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झारखंड

बोकारो में अवैध डीजल गोदाम में भीषण आग:एलएच-15 स्ट्रीट में दो युवक...

बोकारो के एलएच स्थित एक अवैध डीजल गोदाम में देर शाम भीषण आग लगने से दो युवक गंभीर रूप से झुलस गए। झुलसे युवकों की पहचान एलएच के भाना झा और हैसाबातू निवासी महबूब आलम के रूप में हुई है। सूत्रों के अनुसार संबंधित गोदाम चोरी-छिपे संचालित किया जा रहा था।इसकी जानकारी केवल जरूरतमंद लोगों तक सीमित थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक एक दुकान से आग की तेज लपटें उठने लगीं, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास खड़े लोगों की हिम्मत मौके के करीब जाने की नहीं हुई। इसी बीच दोनों युवक झुलसी हालत में बाहर निकले, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) पहुंचाया गया। दमकल की तत्परता से एक घंटे में पाया काबू घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों के सहयोग सेआग बुझाने का काम शुरू किया गया। डीजल जैसे ज्वलनशील पदार्थ के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया था, जिससे धुएं का गुबार दूर तक दिखाई दे रहा था। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। समय रहते आग पर नियंत्रण पाने से आसपास के घरों और अन्य संपत्तियों को बड़े नुकसान से बचा लिया गया। हालांकि इस दौरान इलाके में दहशत का माहौल बना रहा और लोग घरों से बाहर निकलकर स्थिति पर नजर बनाए रहे। लापरवाही पर उठे सवाल, जांच में जुटा प्रशासन घटना के बाद अवैध रूप से डीजल भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार दोनों घायलों का इलाज जारी है, जिनमें से एक की स्थिति गंभीर बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और अवैध डीजल भंडारण के नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। Source link

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…जब सिद्दारमैया से मात खा गए मल्लिकार्जुन खरगे, 3 बार खंड-खंड हुआ...

Siddaramaiah Vs Mallikarjun Kharge in Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में कई ऐसे मोड़ आए हैं, जिसने राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तक बदल दी. ऐसा ही एक मोड़ था 2013 का विधानसभा चुनाव, जब कांग्रेस की सत्ता में वापसी के साथ मुख्यमंत्री पद की लड़ाई ने दो बड़े नेताओं- सिद्दारमैया और मल्लिकार्जुन खरगे को आमने-सामने ला खड़ा किया. यह सिर्फ दो नेताओं के बीच की प्रतिस्पर्धा नहीं थी, बल्कि कांग्रेस के भीतर बदलते सामाजिक समीकरणों, संगठनात्मक रणनीति और सोनिया गांधी के नेतृत्व में लिए गए राजनीतिक फैसलों की कहानी भी थी. इसी लड़ाई ने एक ओर सिद्दारमैया को कर्नाटक का सबसे प्रभावशाली नेता बना दिया, तो दूसरी ओर मल्लिकार्जुन खरगे का मुख्यमंत्री बनने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया. कांग्रेस में सिद्दारमैया की एंट्री: अहमद पटेल का मास्टरस्ट्रोक सिद्दारमैया मूल रूप से जनता दल परिवार की राजनीति से निकले नेता थे. वे एचडी देवेगौड़ा के करीबी माने जाते थे और जनता दल (सेक्युलर) में तेजी से उभरे थे. लेकिन 2005-06 में देवेगौड़ा परिवार के साथ उनका टकराव बढ़ गया. अंततः उन्हें जेडी (एस) से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. पार्टी से निष्कासन के बाद सिद्दारमैया ने ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव जनता दल (AIPJD) नाम से अलग राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली. यहीं से उन्हें एहसास हुआ कि क्षेत्रीय दल के सहारे राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करना आसान नहीं होगा. इसी दौरान उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क साधा. इस पूरी प्रक्रिया के सूत्रधार थे सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार अहमद पटेल. उन्होंने सिद्दारमैया की राजनीतिक उपयोगिता को समझा. खासकर पिछड़े वर्ग, दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व को लगा कि कर्नाटक में भाजपा और जेडी(एस) के खिलाफ एक बड़ा सामाजिक गठबंधन तैयार किया जा सकता है. अहमद पटेल ने सिद्दारमैया की मुलाकात सोनिया गांधी से कराई. वरिष्ठ नेता एके एंटनी को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया. अंततः 2006 में बेंगलुरु में आयोजित एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में सोनिया गांधी ने स्वयं सिद्दारमैया का कांग्रेस में स्वागत किया. यह सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं था, बल्कि कांग्रेस की भविष्य की रणनीति का हिस्सा था. कांग्रेस में तेजी से बढ़ता कद कांग्रेस में आने के बाद सिद्दारमैया ने खुद को केवल एक पूर्व जेडी(एस) नेता तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने अपने पुराने सामाजिक आधार को कांग्रेस के साथ जोड़ना शुरू किया. उनका सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार था अहिंदा फार्मूला. यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित. यही वह सामाजिक गठबंधन था जिसने उन्हें कांग्रेस के पारंपरिक नेताओं से अलग पहचान दी. धीरे-धीरे वे राज्य में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय जननेता बन गए. विपक्ष में रहते हुए उन्होंने भाजपा सरकारों के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाया और जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाई. इस दौरान कांग्रेस में कई दिग्गज नेता मौजूद थे- मल्लिकार्जुन खरगे, जी. परमेश्वर, डी.के. शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ चेहरे. लेकिन जनाधार और जनसभाओं में भीड़ जुटाने की क्षमता के मामले में सिद्दारमैया लगातार आगे निकलते गए. 2013: मुख्यमंत्री पद की निर्णायक लड़ाई 2013 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण था. भाजपा आंतरिक कलह से जूझ रही थी और कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला. लेकिन जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल था- मुख्यमंत्री कौन बनेगा? मुख्यमंत्री पद की दौड़ में मुख्य रूप से तीन नाम थे- मल्लिकार्जुन खरगे, जी. परमेश्वर और सिद्दारमैया. खरगे उस समय कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे. वे पहले भी कई बार मुख्यमंत्री पद के करीब पहुंचे थे. 1999 में कांग्रेस की जीत के बाद उन्हें मौका नहीं मिला और एसएम कृष्णा मुख्यमंत्री बने. 2004 में भी वे मजबूत दावेदार थे, लेकिन समझौते के उम्मीदवार के रूप में एन. धरम सिंह को चुना गया. 2013 में उन्हें लगा कि तीसरी बार शायद किस्मत उनका साथ देगी. लेकिन राजनीतिक समीकरण बदल चुके थे. सिद्दारमैया के पक्ष में सबसे बड़ी ताकत थी विधायकों का समर्थन. कांग्रेस विधायक दल के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा था. माना जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर हुई रायशुमारी और आंतरिक मतदान में भी उन्हें बढ़त मिली. सोनिया गांधी और कांग्रेस हाईकमान के सामने यह साफ था कि चुनावी जीत में सिद्दारमैया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है. अंततः मुख्यमंत्री पद की बाजी सिद्दारमैया के नाम रही और खरगे एक बार फिर पीछे रह गए. खरगे को दिल्ली भेजने की रणनीति 2013 का फैसला केवल मुख्यमंत्री चुनने का मामला नहीं था. कांग्रेस नेतृत्व को यह भी पता था कि मल्लिकार्जुन खरगे जैसे वरिष्ठ दलित नेता को पूरी तरह नजरअंदाज करना राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है. यही कारण था कि धीरे-धीरे खरगे को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका दी गई. 2014 में वह अपनी कुलबर्गी सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे. उन्हें लोकसभा में कांग्रेस का नेता बनाया गया. बाद में वे राज्यसभा पहुंचे, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और आज पार्टी संगठन के सर्वोच्च पद पर हैं. एक तरह से कहा जाए तो 2013 में मुख्यमंत्री पद गंवाने वाले खरगे को कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजनीति में उससे भी बड़ी भूमिका देकर संतुलन साधने की कोशिश की. सोनिया गांधी की निर्णायक भूमिका पूरे घटनाक्रम में सोनिया गांधी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही. सिद्दारमैया को कांग्रेस में लाने से लेकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने तक हर चरण में हाईकमान की मंजूरी निर्णायक रही. सोनिया गांधी ने 2006 में सिद्दारमैया के प्रवेश को केवल एक नेता की भर्ती के रूप में नहीं देखा, बल्कि उसे कर्नाटक में कांग्रेस के सामाजिक विस्तार की रणनीति का हिस्सा बनाया. बाद के वर्षों में जब सिद्दारमैया ने अपनी उपयोगिता साबित कर दी, तब उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला भी उसी रणनीतिक सोच का परिणाम था. यानी सिद्दारमैया का कांग्रेस में उभार केवल व्यक्तिगत करिश्मे की कहानी नहीं, बल्कि सोनिया गांधी और अहमद पटेल की दीर्घकालिक राजनीतिक योजना की सफलता भी था. अब विदाई की ओर बढ़ते सिद्दारमैया? वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन हो रहा है. सिद्दारमैया सीएम पद छोड़ चुके हैं. अब सीएम की कुर्सी पर डीके शिवकुमार की ताजपोशी होने जा रही है. हालांकि सिद्दारमैया की लोकप्रियता अब भी बरकरार है, लेकिन पार्टी के भीतर नई पीढ़ी और अन्य नेताओं की दावेदारी भी मजबूत हुई है. सिद्दारमैया को कांग्रेस में

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लातेहार: जंगलों के बीच स्वर्ग सा अहसास… गर्मी में यह जलप्रपात बना...

Last Updated:May 31, 2026, 09:24 IST भीषण गर्मी और शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से राहत पाने के लिए लोग अब प्राकृतिक और शांत जगहों की ओर रुख कर रहे हैं. झारखंड के लातेहार जिले में स्थित सुग्गा बांध जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. तस्वीरों में देखें खूबसूरती की झलक. यह जलप्रपात लातेहार जिले के गारू प्रखंड के बारेसाढ़ थाना क्षेत्र में स्थित है. चारों ओर फैले घने जंगल और ऊंची-नीची पहाड़ियां इसे और खास बनाती हैं. प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं मानी जाती. यहां आने वाले पर्यटक घंटों तक प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते नजर आते हैं. बता दे कि सुग्गा बांध जलप्रपात आज सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि लोगों के लिए प्रकृति के करीब बिताए गए खूबसूरत पलों का एहसास बन चुका है. झरने की गूंजती आवाज, ठंडी फुहारें और जंगलों के बीच का शांत वातावरण यहां आने वाले हर पर्यटक को दोबारा आने के लिए मजबूर कर देता है. हालांकि गर्मी के मौसम में भी यहां का वातावरण काफी ठंडा और सुकूनभरा रहता है, लेकिन अक्टूबर से फरवरी तक का समय घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस दौरान झरने में पानी की मात्रा अधिक रहती है और ठंडी हवाएं लोगों को अलग ही आनंद देती हैं. जिसमें सालों भर पर्यटक यहां घूमने आते है. Add News18 as Preferred Source on Google सुग्गा बांध जलप्रपात पिकनिक मनाने के लिए भी बेहद लोकप्रिय स्थल बन चुका है. हर साल हजारों लोग परिवार और दोस्तों के साथ यहां घूमने पहुंचते हैं. गर्मी के मौसम में भी इसका नजारा बेहद अदभुत और मनोरम लगता है. विशाल चट्टानें, खुला परिसर और शांत वातावरण लोगों को आकर्षित करता है. यहां लोग रील और वीडियो बनाकर अपने सफर को यादगार भी बना रहे हैं. यहां ऊंचाई से गिरता पानी पर्यटकों को रोमांचित कर देता है. जब झरने का पानी नीचे चट्टानों से टकराता है तो उसकी आवाज दूर तक सुनाई देती है. आसपास फैली हरियाली, चमकती चट्टानें और बहता पानी मिलकर ऐसा दृश्य तैयार करते हैं, जिसे देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. सुग्गा बांध झरना पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यह स्थल मेदिनीनगर से करीब 80 किलोमीटर और बेतला नेशनल पार्क से लगभग 50 से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. नेतरहाट और बेतला जाने वाले रास्ते में पड़ने वाला यह पर्यटन स्थल घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देता है. पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा यहां कई विकास कार्य किए गए हैं. नदी पार करने के लिए मजबूत पुल का निर्माण किया गया है. वहीं बैठने के लिए लकड़ी के सुंदर शेड बनाए गए हैं. वर्ष 2018 में यहां वॉच टॉवर भी बनाया गया, जहां से पूरे जलप्रपात और आसपास की हरियाली का मनोरम दृश्य दिखाई देता है. भीषण गर्मी और शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से राहत पाने के लिए लोग अब प्राकृतिक और शांत जगहों की ओर रुख कर रहे हैं. झारखंड के लातेहार जिले में स्थित सुग्गा बांध जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां पहुंचते ही लोगों को ठंडी हवाओं, हरियाली और झरने की कलकल आवाज के बीच अलग ही सुकून का एहसास होता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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वाटर कनेक्शन जांच और बिजली मीटर अपग्रेड करने के नाम पर साइबर...

रांची में साइबर ठगों ने अब ठगी का नया तरीका निकाल लिया है। नगर निगम और बिजली वितरण निगम के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ठग खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर घर-घर पहुंच रहे हैं और कभी वाटर कनेक्शन जांच तो कभी स्मार्ट मीटर अपग्रेड के नाम पर उपभोक्ताओं से पैसे ऐंठ रहे हैं। इतना ही नहीं, अब वे मोबाइल हैक कर बैंक खाते तक खाली कर दे रहे हैं। ठग दो तरीके अपना रहे हैं। निगम के नाम पर सीधे घर जाकर पेयजल उपभोक्ताओं को डराते हैं। जबकि, बिजली निगम के नाम पर व्हाट्सएप के जरिए डिजिटल ठगी कर रहे। घर पहुंचने वाले ठग खुद को नगर निगम का कर्मचारी बताते हैं। वे वाटर यूजर चार्ज बकाया या कनेक्शन में गड़बड़ी का हवाला देकर जुर्माना और कनेक्शन काटने की धमकी देते हैं। जो लोग डर जाते हैं, उनसे 2 हजार से 10 हजार रुपए तक वसूल कर फरार हो जाते हैं। दूसरी ओर, बिजली उपभोक्ताओं को फोन कर स्मार्ट मीटर अपग्रेड नहीं कराने पर कनेक्शन काटने की धमकी दी जा रही है। इसके बाद व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेजी जाती है। फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक हो जाता है। फिर ठग बैंकिंग एप तक पहुंच बना लेते हैं। रहें सतर्क… 1930 पर शिकायत करें पहचान पत्र जरूर देखें : कोई भी व्यक्ति खुद को निगम या बिजली विभाग का कर्मचारी बताए तो उसका आईडी कार्ड जांचें। बिना पहचान के प्रवेश न दें। धमकी से न घबराएं : कनेक्शन काटने या जुर्माने की धमकी अक्सर ठगी का हिस्सा होती है। पहले विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर पुष्टि करें। एपीके फाइल डाउनलोड न करें : व्हाट्सएप या अनजान नंबर से आई किसी भी एपीके फाइल को न खोलें। यह मोबाइल हैक करने का सबसे बड़ा जरिया है। सिर्फ आधिकारिक ऐप का इस्तेमाल करें। बैंकिंग डिटेल साझा न करें : किसी के साथ ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक से जुड़ी कोई जानकारी साझा न करें। संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत शिकायत करें : ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं। केस स्टडी : स्मार्ट मीटर अपग्रेड के नाम पर मोबाइल हैक मधुकम निवासी सतीश कुमार को फोन आया कि उनका स्मार्ट मीटर अपग्रेड नहीं हुआ है, इसलिए कनेक्शन काट दिया जाएगा। घबराकर उपभोक्ता ने बात मान ली। इसके बाद व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजी गई।जैसे ही फाइल डाउनलोड की गई, मोबाइल हैक हो गया। कुछ ही मिनटों में बैंक खाते से करीब 12 हजार रुपए कट गए। बाद में पता चला कि ठगों ने मोबाइल का रिमोट एक्सेस लेकर पूरी ठगी को अंजाम दिया। केस स्टडी : डोरंडा में नकली निगम कर्मी बनकर पहुंचे ठग डोरंडा के मनी टोला निवासी साकेत कुमार के घर दो लोग पहुंचे। खुद को नगर निगम का कर्मी बताया और कहा कि उनके नाम पर 40 हजार रुपए वाटर टैक्स बकाया है। उन्होंने कनेक्शन काटने की धमकी दी और पुलिस केस की बात भी कही। जब साकेत ने आपत्ति जताई तो ठगों ने ‘मामला सेट’ करने के नाम पर पैसे देने का सुझाव दिया। साकेत को शक हुआ और उन्होंने अधिकारियों से बात कराने को कहा। इसके बाद दोनों ठग फरार हो गए। निगम और विभाग भी अलर्ट : नगर निगम और बिजली विभाग के पास ऐसी कई शिकायतें पहुंच चुकी हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि विभाग का कोई कर्मचारी इस तरह घर-घर जाकर कैश वसूली या मोबाइल फाइल डाउनलोड कराने का काम नहीं करता। Source link

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आस्था .विश्वस्तरीय धर्म महासम्मेलन में पहुंचे देश-विदेश से अनुयायी:ईश्वर की प्राप्ति सच्चे...

धर्म महासम्मेलन में शामिल विश्व भर से पहुंचे अनुयायी। सिटी रिपोर्टर | बोकारो आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आनंद नगर पुंदाग में आयोजित आनंद मार्ग धर्म महासम्मेलन का शुभारंभ प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक ध्यान के साथ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश से आए हजारों मार्गियों और आध्यात्मिक साधकों ने भाग लिया। यह आयोजन आनंद मार्ग के संस्थापक श्री आनंदमूर्ति के आध्यात्मिक एवं सामाजिक दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। मुख्य वक्ता आचार्य विकासानंद अवधूत ने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति केवल कठोर साधना या विद्वता से नहीं, बल्कि सच्चे भाव, प्रेम और समर्पण से होती है। जैसे माता-पिता अपनी सभी संतानों को समान दृष्टि से देखते हैं, वैसे ही ईश्वर भी सभी जीव को बिना किसी भेदभाव के समान प्रेम करते हैं। उन्होंने बताया कि ज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन अहंकार से जुड़ा ज्ञान व्यक्ति को उलझा सकता है, जबकि सरल हृदय और निष्कपट आस्था ईश्वर के निकट ले जाती है। सम्मेलन में आध्यात्मिक प्रवचनों के साथ मानव कल्याण, सामाजिक सेवा, नैतिक शिक्षा और वैश्विक भाईचारे जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। आयोजन ने वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को सशक्त करते हुए विभिन्न देशों और संस्कृतियों से आए लोगों को एक मंच पर जोड़ा। इस अवसर पर आनंद मार्ग की सांस्कृतिक शाखा रेनशा के प्रभात संगीत पर आधारित सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसने आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बना दिया। सम्मेलन के आगामी सत्रों में भी विश्वभर से आए मार्गियों की सहभागिता जारी रहेगी। Source link

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लाखों-करोड़ों दिल्‍लीवालों की मनचाही मुराद पूरी, 230 दिनों के बाद आई खुशखबरी...

होमताजा खबरDelhi लाखों-करोड़ों दिल्‍लीवालों की मनचाही मुराद पूरी, 230 दिनों के बाद आई खुशखबरी Last Updated:May 31, 2026, 08:41 IST Delhi AQI Report: दिल्‍ली-एनसीआर के साथ ही देश के अन्‍य हिस्‍सों में नौतपा के दौरान मौसम का अलग ही तेवर देखने को मिला है. तेज हवा के साथ बारिश की वजह से तापमान में उल्‍लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, दिल्‍ली में वायु प्रदूषण से लोगों को फौरी राहत मिली है. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की वजह से वेदर में इस तरह का बदलाव हुआ है. देश की राजधानी में बारिश और तेज हवा ने वायु प्रदूषण को काफी कम कर दिया है, जिससे लाखों-करोड़ों दिल्‍लीवालों ने राहत की सांस ली है. (फोटो: PTI) Delhi AQI Report: देशभर में इन दिनों नौतपा का दौर चल रहा है. यानी भीषण गर्मी का समय. ऐसे वक्‍त में देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में मौसम ने गजब तरीके से करवट बदला है. बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर के तटवर्ती इलाकों के साथ ही बिहार, उत्‍तर प्रदेश, दिल्‍ली-एनसीआर समेत अनेक हिस्‍सों में अलग-अलग मौसमी दशाओं की वजह से आंधी-तूफान के साथ बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने आने वाले एक-दो दिन तक मौसम का यही रुख रहने का पूर्वानुमान जताया है. दिल्‍ली में भी तेज हवा के साथ बारिश हुई है, जिससे तापमान में 8 से 9 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है. पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते तेज हवा के साथ हुई बारिश का एक और सुखद परिणाम सामने आया है. दिल्‍लीवालों ने 230 दिनों के बाद सबसे साफ और स्‍वच्‍छ हवा में सांस लिया. मई की भीषण गर्मी और नौतपा की तल्‍खी से जूझ रही दिल्ली को लगातार दूसरे दिन मौसम ने बड़ी राहत दी. शनिवार को राजधानी में तेज हवाएं, बादल और हल्की बारिश दर्ज की गई, जिसके चलते तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा. मौसम में आए इस बदलाव का असर केवल गर्मी पर ही नहीं बल्कि वायु गुणवत्ता पर भी दिखाई दिया. बारिश और तेज हवाओं के कारण दिल्ली ने पिछले 230 दिनों में सबसे स्वच्छ हवा का दिन दर्ज किया. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार शनिवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री से अधिक कम रहा. वहीं, न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. मौसम विभाग का अनुमान है कि रविवार को भी अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा. AQI में सुधार राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) शनिवार को गिरकर 85 पर पहुंच गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है. यह 8 अक्टूबर के बाद सबसे कम AQI है. उस समय यह 80 दर्ज किया गया था. मई महीने में यह चौथा अवसर है, जब दिल्ली की हवा संतोषजनक कैटेगरी में रही. इससे पहले 4, 5 और 8 मई को AQI 88, 86 और 100 दर्ज किया गया था. शनिवार सुबह IMD ने बारिश और तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट जारी किया था. दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच शहर के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई. मयूर विहार में सबसे अधिक 4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि लोधी रोड में 3.8 मिमी और सफदरजंग में 0.9 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. इसके अलावा पीतमपुरा, पूसा, रिज और अयानगर में भी हल्की वर्षा हुई. 230 दिन के लंबे इंतजार के बाद दिल्‍ली का AQI 85 रिकॉर्ड किया गया है. हालांकि, बारिश की वजह से यातायात पर भी असर पड़ा. (फोटो: PTI) मौसम का बदला तेवर शाम 4:17 बजे मौसम विभाग ने उत्तर दिल्ली, उत्तर-पश्चिम दिल्ली और पश्चिमी क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी किया. इस दौरान 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई. नोएडा सहित एनसीआर के कई इलाकों में भी बिजली गिरने, तेज हवाओं और बारिश को लेकर फ्लैश अलर्ट जारी किया गया. मौसम के प्रतिकूल प्रभाव का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा. खराब मौसम के कारण इंदौर, लेह और बेंगलुरु से दिल्ली आने वाली तीन उड़ानों को लखनऊ की ओर डायवर्ट करना पड़ा. सोमवार से फिर झुलसाने वाली गर्मी यह राहत लंबे समय तक नहीं रहने वाली है. IMD के अनुसार, सोमवार 1 जून 2026 से तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि शुरू होगी और 4 जून तक अधिकतम तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जून के दौरान कभी-कभार लू की स्थिति बन सकती है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियों के चलते बीच-बीच में बारिश और गरज-चमक के साथ तूफान आते रहेंगे, जिससे लोगों को गर्मी से अस्थायी राहत मिलती रहेगी. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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सेवा ही धर्म फाउंडेशन ने मैट्रिक- इंटर टॉपर्स को किया सम्मानित

भास्कर न्यूज | धालभूमगढ़ सेवा ही धर्म सोशल फाउंडेशन की ओर से शनिवार को धालभूमगढ़ स्टेशन रोड स्थित यूथ क्लब में मैट्रिक व इंटरमीडिएट परीक्षा के मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह में शिक्षा, खेल और क्षेत्र के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि विधायक सोमेश चंद्र सोरेन, बीडीओ , थाना प्रभारी धीरज कुमार मिश्रा, जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू, मुखिया विलासी सिंह, पूर्व जिला परिषद सदस्य आरती सामाद, पंचायत समिति सदस्य प्रदीप कुमार राय, आशा सीट, नौशाद अहमद एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी बबली कुमारी, थाना प्रभारी धीरज कुमार मिश्रा, जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू, मुखिया विलासी सिंह, प्रदीप कुमार राय सहित अन्य वक्ताओं ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। अतिथियों ने मैट्रिक एवं इंटर परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन शाकिल अहमद ने किया। मौके पर जावेद खान, हर प्रसाद सिंह सोलंकी, विशाल नामाता, सुजीत डे समेत बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक और गणमान्य लोग उपस्थित थे। दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन करते अति​िथ । Source link

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रांची सहित राज्य के कई हिस्से में बारिश, निचले इलाकों में पानी...

रांची सहित राज्य के कई हिस्से में बारिश, निचले इलाकों में पानी भरा, आज भी अलर्ट रांची: झारखंड के कई हिस्सों में शनिवार सुबह हुई आंधी और बारिश से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली। राजधानी रांची में सुबह करीब 6:30 बजे अचानक आसमान काले बादलों से घिर गया और तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। तकरीबन दो घंटे तक हुई इस बारिश का असर शहर के कई इलाकों में देखने को मिला। तेज हवा के कारण डोरंडा स्थित नीलम कॉम्पलेक्स के पास एक बड़ा पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे कुछ देर के लिए यातायात बाधित रहा और जाम की स्थिति बन गई। इसके अलावा शहर के अन्य इलाकों में भी पेड़ और डालियां गिरने की घटनाएं सामने आईं। वहीं बरियातू के संस्कृति विहार सहित कई निचले इलाकों में जलजमाव (पानी भरने) से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। धनबाद के तोपचांची में सबसे ज्यादा 77 मिमी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में धनबाद के तोपचांची में राज्य में सर्वाधिक 77 मिलीमीटर (मीमी) बारिश दर्ज की गई। वहीं रांची में 42.6 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। हालांकि, दोपहर होते-होते बारिश थम गई और धूप निकल आई। आज 12 जिलों में आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट मौसम केंद्र ने 31 मई को राज्य के 12 जिलों में आंधी और बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में शामिल हैं: रांची, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, सरायकेला, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) और चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। मानसून अपडेट: झारखंड, बिहार और बंगाल में अच्छी बारिश संभव, लेकिन देश में कमजोर शुरुआत की आशंका मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल मानसून के पहले महीने (जून) में देश भर में औसत की केवल 92% बारिश होने का अनुमान है। इसके साथ ही जून के महीने में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में हीट वेव (लू) के दिन सामान्य से अधिक रहने वाले हैं। जून से सितंबर के बीच कहाँ, कैसी होगी बारिश? कमजोर मानसून से देश में खड़ी होगी दोहरी चुनौती; दाल-सब्जी और बिजली पर सीधा असर देश के बड़े हिस्से में मानसून की कमजोर शुरुआत और अधिक गर्मी के कारण आगामी दिनों में कई संकट खड़े हो सकते हैं: खेती के लिए चिंता: देश के अधिकतर बारिश आधारित कृषि क्षेत्रों में कम बारिश की आशंका है। इससे खरीफ फसलों—खासकर धान, दालों और तिलहन की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। महंगाई पर दबाव: कमजोर मानसून का सीधा असर सब्जियों, दालों और खाद्यान्नों की उपलब्धता पर पड़ता है। इससे खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम रहेगा, जो आरबीआई (RBI) के महंगाई काबू रखने के उपायों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। बिजली और पानी का संकट: कम बारिश से जलाशयों में पानी का स्तर घटेगा। इसका सीधा असर पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और जलविद्युत (हाइड्रोपावर) उत्पादन पर पड़ सकता है। गर्मी का दोहरा थपेड़ा: ‘कम वर्षा और अधिक गर्मी’ की दोहरी चुनौती से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। साथ ही श्रम उत्पादन में कमी और बिजली की मांग में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। डेटा बॉक्स: 25 साल में केवल 5 बार 90% से कम बरसे बादल पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में केवल 5 बार ही ऐसा हुआ है जब कुल मानसून सीजन में 90% से कम बारिश दर्ज की गई हो। 2001: 91% 2002: 81% (सूखा/कमजोर) 2003: 102% 2004: 87% (सूखा/कमजोर) 2005: 99% 2006: 100% 2007: 106% 2008: 98% 2009: 77% (भारी सूखा) 2010: 102% 2011: 102% 2012: 92% 2013: 106% 2014: 88% (सूखा/कमजोर) 2015: 86% (सूखा/कमजोर) 2016: 97% 2017: 95% 2018: 91% 2019: 110% 2020: 109% 2021: 99% 2022: 106% 2023: 94% 2024: 108% 2025: 108% Source link

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कम मेहनत में ज्यादा कमाई का फॉर्मूला! जानिए कैसे थाई एप्पल की...

होमफोटोकृषि पारंपरिक खेती छोड़ किसान अपना रहे थाई एप्पल की खेती! बंपर उत्पादन Last Updated:May 31, 2026, 07:51 IST Thai Apple Ki Kheti: कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच किसान अब ऐसी फसलों की तलाश कर रहे हैं जो कम पानी, कम मेहनत और कम लागत में अधिक आय दे सकें. थाई एप्पल की खेती इसी दिशा में एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. विशेषज्ञों के अनुसार एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों को लगातार आय का स्रोत मिलता है. यह फसल पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभदायक मानी जा रही है. थाई एप्पल के पौधों को अपेक्षाकृत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है और इनकी देखभाल भी आसान होती है. बाजार में इसकी अच्छी मांग होने के कारण किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है. बागवानी आधारित इस खेती से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है. बदलते समय के साथ करौली जिले के किसान अब परंपरागत खेती के बजाय नकदी फसलों और बागवानी की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इन्हीं में से एक है थाई एप्पल की खेती, जो कम लागत, कम पानी और बेहतर मुनाफे के कारण किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. विशेषज्ञों के अनुसार एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक इससे उत्पादन लिया जा सकता है. पौधे लगाने के बाद लगभग दो से तीन वर्षों में अच्छी मात्रा में फल मिलने लगते हैं. हर साल फरवरी-मार्च में पौधों की छंटाई की जाती है, जिसके बाद नए फुटाव के साथ अक्टूबर-नवंबर से फल उत्पादन शुरू हो जाता है. कृषि जानकारों के अनुसार थाई एप्पल के पौधे विश्वसनीय नर्सरी से खरीदकर लगाए जा सकते हैं. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाती है ताकि उनका विकास बेहतर तरीके से हो सके. खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था होना जरूरी है. अच्छी पैदावार के लिए जैविक खाद, गोबर खाद और सरसों की खली का उपयोग लाभदायक माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google थाईलैंड के फल की खेती करने वाले किसान हेमंत का कहना है कि परंपरागत खेती के साथ किसी दूसरी खेती को नहीं किया जा सकता है. लेकिन थाई एप्पल की खेती के साथ दूसरी खेती भी संभव है. हम हर साल इसकी खेती के साथ ही आलू, मूंगफली सहित कई प्रकार की खेती भी इसी के साथ ही कर लेते हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में थाई एप्पल की मांग लगातार बढ़ रही है. बेहतर प्रबंधन और उचित देखभाल के साथ किसान इसकी खेती से सालाना लाखों रुपये की आय अर्जित कर सकते हैं. यही कारण है कि करौली जिले के कई किसान अब परंपरागत खेती छोड़कर इस फल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. थाई एप्पल की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गेहूं, चना और अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में पानी की आवश्यकता काफी कम होती है. इसमें पौधों की देखभाल भी कम और आसान होती है, जिससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों कम हो जाती हैं. थाई एप्पल के बागानों में पर्याप्त जगह होने के कारण किसान इसके साथ आलू, मूंगफली, सब्जियां और अन्य फसलें भी उगा सकते हैं. इससे एक ही खेत से किसानों को आय के कई स्रोत मिल जाते हैं. Source link

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Today Weather Live | Aaj Ka Mausam Live | 80 KMPH की...

Aaj Ka Mausam Live: भीषण गर्मी और लू से थपेड़ों से जूझ रहे उत्तर भारत के कई राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश राहत बनकर आई हैं. इस राहत की बारिश ने तापमान में 4-5 डिग्री की गिरावट ला दी है. इस बीच मौसम विभाग की तरफ से दो-दो गुड न्यूज मिली है. एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से देश के कई हिस्सों में आज भी बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाओं की गतिविधियां जारी रहेंगी. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण भारत से लेकर पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी भारत तक अनेक राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. वहीं कुछ इलाकों में भारी बारिश, ओलावृष्टि और 70-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं. उधर दक्षिण-पश्चिम मानसून आगे बढ़ते हुए अरब सागर, लक्षद्वीप, बंगाल की खाड़ी के बड़े हिस्सों और पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी तक पहुंच गया है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले 4-5 दिनों के दौरान मानसून केरल, तमिलनाडु और आसपास के अन्य क्षेत्रों में और आगे बढ़ सकता है. मानसून की इस सक्रियता का असर दक्षिण भारत के कई राज्यों में दिखाई देगा, जहां भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. दक्षिण भारत में भारी बारिश का दौर केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में 31 मई को बारिश की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है. केरल और माहे में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी कई इलाकों में तेज बारिश के आसार हैं. दक्षिण भारत से लेकर पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी भारत तक अनेक राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में गरज-चमक के साथ बारिश के अलावा 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. इन राज्यों में लोगों को बिजली गिरने और तेज हवाओं से सावधान रहने की सलाह दी गई है. पूर्वोत्तर भारत में मेघों की मेहरबानी पूर्वोत्तर भारत में अगले 24 घंटों के दौरान बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश की संभावना है. असम और मेघालय में भी कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है. अरुणाचल प्रदेश में भी बादलों की सक्रियता बढ़ेगी और कई इलाकों में बारिश देखने को मिल सकती है. लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है. पूर्वी भारत में आंधी, बारिश और तेज हवाओं का असर ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मौसम सक्रिय रहेगा. ओडिशा में भारी बारिश के साथ तेज आंधी और गरज-चमक की चेतावनी जारी की गई है. कुछ स्थानों पर 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. झारखंड और बिहार में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. झारखंड और बिहार में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश हो सकती है. समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों में समुद्र उग्र बना रहेगा. दिल्ली में कूल-कूल रहेगा मौसम राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को मौसम सुहावना रहने की संभावना है. पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिम भारत पर बने मौसम तंत्रों के प्रभाव से दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है. कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी. हालांकि अगले दो दिनों के बाद अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने के संकेत हैं, जिससे सप्ताह के मध्य तक गर्मी फिर बढ़ सकती है. उत्तर प्रदेश में बदला-बदला मौसम का मिजाज उत्तर प्रदेश में 31 मई को मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा. पश्चिमी और पूर्वी दोनों हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की जा सकती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं और बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है. कई जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. किसानों और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को मौसम की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है. उत्तराखंड में बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना उत्तराखंड में आज मौसम काफी सक्रिय रहेगा. राज्य के अधिकांश पर्वतीय जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. कुछ इलाकों में भारी बारिश भी दर्ज की जा सकती है. मौसम विभाग ने ओलावृष्टि की आशंका भी जताई है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा. चारधाम यात्रा मार्गों पर भी मौसम का असर देखने को मिल सकता है. यात्रियों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है. बिहार में गरज-चमक के साथ बारिश बिहार में आज कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों में बादलों की सक्रियता अधिक रह सकती है. कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं. बारिश के कारण दिन के तापमान में कमी आने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी. हालांकि बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है. झारखंड में आज आंधी-बारिश झारखंड में भी 31 मई को मौसम सक्रिय रहेगा. राज्य के अधिकांश जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएं 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती हैं. मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि तेज

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