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झारखंड

जमशेदपुर से 70 किमी दूर है हुदहुद झरना…पर्यटक टकटकी बांध निहारते खूबसूरती,...

Last Updated:May 21, 2026, 10:48 IST Jamshedpur Hudhud Waterfall: जमशेदपुर से महज 70 किलोमीटर दूर मौजूद हुदहुद वॉटरफॉल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है. घने जंगल, ऊंचे पहाड़ और कल-कल गिरता झरना यहां पहुंचने वालों को किसी फिल्मी या विदेशी लोकेशन जैसा एहसास कराता है. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. हाल ही में प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि विदेश यात्रा से पहले कुछ समय अपने ही देश को जानने और घूमने में भी बिताइए. भारत प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और विविधता से भरा हुआ देश है. अगर हरियाली और प्राकृतिक खूबसूरती की बात करें, तो झारखंड उन राज्यों में शामिल है जिसे लोग पहाड़ों और हरियाली की धरती भी कहते हैं. यहां मौजूद जंगल, पहाड़, घाटियां और झरने किसी विदेशी जगह से कम नहीं लगते. फिल्मी लोकेशन जैसा फीलइसी खूबसूरती का एक शानदार उदाहरण है जमशेदपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर धालभूमगढ़ प्रखंड के ढाईकुसुम गांव में स्थित हुदहुद वॉटरफॉल. यह जगह देखने में इतनी खूबसूरत है कि यहां पहुंचने के बाद लोगों को किसी पहाड़ी देश या फिल्मी लोकेशन जैसा एहसास होने लगता है. सुनाई देती है पानी की हर बूंदहुदहुद वॉटरफॉल की सबसे खास बात इसकी प्राकृतिक शांति और आसपास का वातावरण है. चारों तरफ फैली हरियाली, ऊंचे पहाड़, घने पेड़-पौधे और बीचों-बीच गिरता झरना इस जगह को बेहद खास बना देता है. यहां इतनी शांति रहती है कि पानी की गिरती हर बूंद की आवाज साफ सुनाई देती है. सिर्फ इतना ही नहीं, हवा के साथ हिलते पत्तों और पक्षियों की आवाज भी यहां के माहौल को और खूबसूरत बना देती है. फोटोग्राफी के लिए बेस्ट जगहयह जगह सिर्फ घूमने के लिए ही नहीं, बल्कि फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी बेहतरीन मानी जाती है. पूरे क्षेत्र का प्राकृतिक दृश्य इसे एक शानदार फोटो खिंचवाने की जगह बनाता है. यही कारण है कि यहां सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं. मन मोह लिया यहां के नजारे नेहावड़ा से घूमने आई इशिता मुखर्जी ने बताया कि यहां का नजारा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं. उनके अनुसार, उन्होंने सोचा भी नहीं था कि इतनी शांत और खूबसूरत जगह इतनी नजदीक हो सकती है. वहीं विश्वास मुखर्जी ने बताया कि कई लोगों से जानकारी मिलने के बाद वह यहां पहुंचे और यहां आकर उनकी सारी थकान दूर हो गई. उनका कहना है कि लोग अक्सर विदेश घूमने की बात करते हैं, लेकिन भारत में भी ऐसी कई जगहें हैं, जिन्हें देखने के बाद कहीं और जाने का मन नहीं करता. अगर आप भी शहर की भागदौड़ से कुछ समय निकालकर प्रकृति के बीच सुकून तलाश रहे हैं, तो हुदहुद वॉटरफॉल आपकी अगली यात्रा की सूची में जरूर होना चाहिए. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

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पैसों के विवाद में बेटे ने पिता को पीटा:देवघर में इलाज के...

देवघर जिले के चितरा थाना क्षेत्र स्थित शिमला मांझीडीह गांव में पारिवारिक विवाद ने एक दर्दनाक मोड़ ले लिया। पैसों के लेन-देन को लेकर हुए झगड़े में एक बेटे ने अपने ही पिता की कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उनकी मौत हो गई। मृतक की पहचान करीब 70 वर्षीय मुलिंद हेमबरम के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई है और लोग स्तब्ध हैं। बताया जा रहा है कि मुलिंद हेमबरम का अपने पुत्र लुखीराम हेमबरम के साथ काफी समय से पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। ग्रामीणों ने अस्पताल पहुंचाया जानकारी के अनुसार, बुधवार को पिता-पुत्र के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि गुस्से में आकर लुखीराम हेमबरम ने अपने पिता की जमकर पिटाई कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल घायल वृद्ध को इलाज के लिए सारठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। वृद्ध की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आरोपी पुत्र हिरासत में लिया गया घटना की सूचना मिलते ही चितरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पुत्र लुखीराम हेमबरम को हिरासत में ले लिया है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के कारणों की स्पष्ट पुष्टि हो सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। Source link

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कोडरमा में बोलेरो की टक्कर से दो किशोर घायल:घाटी के मेघातरी बस...

कोडरमा जिले के सदर थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात एक सड़क हादसे में बाइक सवार दो किशोर गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दुर्घटना रांची-पटना मुख्य मार्ग पर स्थित कोडरमा घाटी के मेघातरी बस पड़ाव के पास हुई। हादसे के बाद कुछ देर के लिए मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई और तुरंत राहत कार्य शुरू किया गया। जानकारी के अनुसार, दोनों किशोर बाइक से मेघातरी से कोडरमा की ओर जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। बोलेरो ने मारी सामने से टक्कर घायलों की पहचान दिबौर निवासी 17 वर्षीय रितेश कुमार (पिता रामदेव सिंह) और 16 वर्षीय सूरज कुमार (पिता स्व. संजन यादव) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि इसी दौरान कोडरमा से बिहार की ओर जा रही एक बोलेरो ने उनकी बाइक को सामने से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई और दोनों किशोर दूर जा गिरे। हादसे में दोनों को गंभीर चोटें आई हैं। दुर्घटना के बाद बोलेरो चालक मौके से फरार हो गया। एक किशोर रेफर, दूसरा सदर अस्पताल में इलाजरत हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने मानवता दिखाते हुए दोनों घायलों को उठाकर सदर अस्पताल कोडरमा पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। रितेश कुमार की हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया है। वहीं सूरज कुमार का इलाज सदर अस्पताल में ही जारी है। पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दुर्घटना के बाद इलाके में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। Source link

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Falta Repolling Live: फाल्टा में वोटिंग जारी, सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम,...

होमताजा खबरदेश Falta Repolling Live: फलता में वोटिंग जारी, जहांगीर खान छोड़ चुके हैं मैदान Last Updated:May 21, 2026, 10:27 IST Repolling In Falta Live Update: फाल्टा विधानसभा में 29 अप्रैल का मतदान रद्द होने के बाद आज रीपोलिंग हो रहा है. आज के मतदान के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा दोगुनी कर दी है. CAPF और वेबकास्टिंग से कड़ी निगरानी रखी ज…और पढ़ें फलता विधानसभा सीट पर आज रीपोलिंग हो रही है. Repolling In Falta Live Update:  पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर गुरुवार को दोबारा मतदान कराया जा रहा है. चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मतदान को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला मानते हुए रद्द कर दिया था और रीपोलिंग का आदेश दिया था. अब दोबारा हो रहे मतदान को लेकर चुनाव आयोग पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है. सुरक्षा व्यवस्था को पहले के मुकाबले लगभग दोगुना कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा की आशंका को रोका जा सके. चुनाव आयोग के मुताबिक फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर इस बार केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मजबूत तैनाती की गई है. हर बूथ पर आठ CAPF जवान तैनात रहेंगे, जबकि 29 अप्रैल के मतदान के दौरान केवल चार जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी. आयोग का कहना है कि इस बार किसी भी तरह की अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी. करीब 35 कंपनियों के केंद्रीय बल पूरे इलाके में तैनात किए गए हैं. इसके अलावा 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. चुनाव आयोग ने निगरानी व्यवस्था भी बेहद कड़ी कर दी है. हर बूथ के अंदर दो वेब कैमरे और बाहर एक कैमरा लगाया गया है. पूरे मतदान की लाइव वेबकास्टिंग जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर से मॉनिटर की जाएगी. आयोग ड्रोन सर्विलांस पर भी विचार कर रहा है. इसके साथ ही तीन विशेष चुनाव पर्यवेक्षकों को पूरे मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है. जहांगीर खान ने चुनावी मुकाबले से हटे Falta Repolling Live: फाल्टा में 9 बजे तक 20 फीसदी वोटिंग Falta Repolling Live: फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को दोबारा वोटिंग हो रही है. मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक चलेगा. चुनाव आयोग ने 285 बूथों पर सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की 35 कंपनियां तैनात की हैं. सभी बूथों पर वेबकास्टिंग की जा रही है. इससे पहले, उस केंद्र में मतदान में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे. इसलिए, आयोग ने सभी बूथों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला किया. सुबह 9 बजे तक 20.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. Falta Repolling Live: एक लाख वोटों से जीतूंगा Falta Repolling Live: BJP उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने री-पोलिंग में बड़ी जीत का दावा किया है. उन्होंने कहा कि BJP फाल्टा सीट पर एक से डेढ़ लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेगी. पांडा ने आरोप लगाया कि पहले मतदान के दौरान कई बूथों पर भारी गड़बड़ी हुई थी. उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर BJP के चुनाव चिह्न पर सेलोटेप लगाया गया और कैमरों को घुमाकर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई. BJP ने इन शिकायतों को लेकर चुनाव आयोग से दोबारा मतदान की मांग की थी, जिसके बाद आयोग ने री-पोलिंग का फैसला लिया. अब पूरे राज्य की नजर फल्टा पर टिकी हुई है, जहां कड़ी सुरक्षा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आज मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. Phalta Repolling Live: फाल्टा को विशेष पैकेज देने का ऐलान Falta Repolling Live: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में भव्य रोड शो किया और घोषणा की थी कि अगले राज्य बजट में फाल्टा के लिए एक विशेष पैकेज शामिल किया जाएगा. उन्होंने यह भी वादा किया कि 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा में मारे गए BJP कार्यकर्ताओं के परिवारों के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी. रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री ने TMC नेता जहांगीर खान पर भी निशाना साधा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि खुद को ‘पुष्पा’ कहने वाला अब कहां है? उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था, क्योंकि उसे पोलिंग एजेंट तक नहीं मिल रहे थे, इसलिए वह मैदान छोड़कर भाग गया. सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि फाल्टा के लोग अब खुलकर और निष्पक्ष तरीके से मतदान कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज लोगों के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही है. यह दूसरे स्वतंत्रता दिवस जैसा महसूस हो रहा है. 10 साल बाद मतदाताओं को अपने मतदान अधिकार वापस मिले हैं. Source link

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धोनी के घर के पास रहते हैं? 1 किमी के दायरे में...

Last Updated:May 21, 2026, 10:03 IST Best Schools On Harmu Road Ranchi: रांची के हरमू रोड पर, जहां महेंद्र सिंह धोनी का निवास है, अगर आप भी वहीं या आसपास के इलाके में रहते हैं, तो ये स्कूल आपके बच्चों के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं. इन स्कूलों में पढ़ाई का स्तर तो शानदार है ही, साथ ही अतिरिक्त गतिविधियां भी खूब होती हैं. बच्चों के बेहतर विकास पर खास ध्यान दिया जाता है. रांची के हरमू में धोनी का घर है जहां 1-2 किलोमीटर की रेडियस में ही आपको एक से बढ़कर एक स्कूल देखने को मिलेंगे. खास बात यह है कि इसमें सरकारी से लेकर सीबीएसई और सीआईएससीई स्कूल भी हैं. आप अपने बजट के अनुसार स्कूलों का चयन कर सकते हैं. यहां जानिए टॉप स्कूलों के नाम. हरमू रोड से करीब 1 किलोमीटर आगे बढ़ते ही आपको झारखंड के सबसे चर्चित और टॉप स्कूलों में गिना जाने वाला डीपीएस सबसे पहले नजर आएगा. जी हां, यह वही स्कूल है जहां से हर साल बड़ी संख्या में 10वीं और 12वीं के टॉपर निकलते हैं. यहां के कई छात्र 99 से 100% तक अंक हासिल करते हैं. यही वजह है कि इस स्कूल में एडमिशन पाना आसान नहीं माना जाता. यहां दाखिले के लिए छात्रों के बोर्ड परीक्षा में कम से कम 95% से अधिक अंक होना लगभग जरूरी माना जाता है. वहीं, अगर आपका बच्चा दिव्यांग है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. हरमू रोड स्थित संत फ्रांसिस स्कूल के पास राजकीय दिव्यांग स्कूल मौजूद है और इसके बगल में ब्लाइंड स्कूल भी संचालित होता है. खास बात यह है कि दोनों स्कूल एक ही कैंपस में अलग-अलग तरीके से सुचारू रूप से चल रहे हैं. यहां बच्चों के लिए हॉस्टल की सुविधा भी उपलब्ध है. खाने-पीने की पूरी व्यवस्था कैंपस में ही की जाती है और बच्चों को यहीं ताजा भोजन बनाकर दिया जाता है. बाहर का खाना देने की जरूरत नहीं पड़ती. . Add News18 as Preferred Source on Google इस स्कूल के ठीक सामने करीब 500 मीटर की दूरी पर जेवीएम श्यामली स्कूल स्थित है. डीपीएस और जेवीएम श्यामली, दोनों ही सीबीएसई से संबद्ध स्कूल हैं. जेवीएम श्यामली से भी झारखंड के कई टॉपर निकल चुके हैं. साथ ही, यहीं से महेंद्र सिंह धोनी ने भी पढ़ाई की है. यहां दाखिला लेने के लिए भी अच्छे अंकों की जरूरत मानी जाती है और आमतौर पर 92% से अधिक अंक होने पर बेहतर संभावना रहती है. इन दोनों स्कूलों की मासिक फीस करीब 2500 से 3000 रुपये के बीच बताई जाती है. इसके अलावा आप आ सकते हैं हरमू रोड के क्रॉउन पब्लिक स्कूल में. यहां पर तो फीस ₹800 महीना है. ऐसे में आप अपने बच्चों को अगर बजट में पढ़ाना चाहते हैं तो यह बेस्ट विकल्प है, यहां सीबीएसई बोर्ड है और यहां पर अनुशासन ऐसा है कि आप स्कूल जाएंगे तो आपको लगेगा कि आज छुट्टी है, एकदम पिन ड्रॉप साइलेंस. इसी स्कूल के ठीक सामने है, एस्कॉर्ट इंटरनेशनल स्कूल. इसके फीस भी 1000 के अंदर ही है. आप अपने बजट के अनुसार चयन कर सकते हैं. इसी स्कूल के सामने सन फ्रांसिस स्कूल है, जोकि आईसीएसई एफिलिएटेड है. यह भी रांची के टॉप स्कूलों में माना जाता है. खासतौर पर जब आईसीएससी बोर्ड की बात आती है तो इस स्कूल के बच्चों की इंग्लिश सुनकर आपको विदेशी याद आ जाएंगे. यहां पर कड़े अनुशासन व पंक्चुअलिटी पर अधिक जोर दिया जाता है. यही कारण है कि पेरेंट्स अपने बच्चों का इस स्कूल में दाखिला कराने के लिए बेचैन रहते हैं. महीने की फीस 2 से 3000 के बीच है. इन दो स्कूल की खास बात यह है कि अगर आपके बच्चे डिसएबल हैं तो आप यहां पर मुफ्त में एडमिशन करा सकते हैं. यहां पर कोई चार्ज नहीं लगता, कोई फीस नहीं है, हॉस्टल चार्ज कुछ भी नहीं. ऐसे में मुफ्त में ही आप अपने बच्चों को सही दिशा दिला सकते हैं. यहां के दिव्यांग बच्चे आज सरकारी नौकरी जैसे रेलवे में अधिकारी के तौर पर अपना करियर बना चुके हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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गढ़वा पेट्रोल पंप डीलरशिप एसोसिएशन की बैठक

गढ़वा| गढ़वा जिला पेट्रोल पंप डीलरशिप एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक रंका मोड़ स्थित एसोसिएशन के महामंत्री आनंद प्रकाश दुबे के अंबालाल पेट्रोल पंप परिसर में एसोसिएशन के अध्यक्ष अलखनाथ पांडेय की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में जिले के विभिन्न पेट्रोल पंप संचालकों ने भाग लिया। वहीं वर्तमान समय में पेट्रोल पंप संचालकों एवं वहां कार्यरत कर्मचारियों को हो रही समस्याओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। बैठक के दौरान पेट्रोल पंप संचालन में आ रही दैनिक चुनौतियों, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के कार्य, बढ़ते दबाव तथा तकनीकी और प्रबंधन संबंधी परेशानियों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। मौके पर एच.के. पैट्रोलियम गढ़वा के संचालक हनीफ खान ने कहा कि बदलते समय के साथ पेट्रोल पंप व्यवसाय में कई प्रकार की नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। Source link

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झारखंड में 25 हार्डकोर नक्सली करेंगे समर्पण:6 सब जोनल कमांडर, 6 एरिया...

झारखंड में आज नक्सलियों का अब तक का सबसे बड़ा सरेंडर होगा। पुलिस मुख्यालय में 25 हार्डकोर नक्सली समर्पण करेंगे। कोल्हान और सारंडा के घने जंगलों में सक्रिय बचे करीब 60 नक्सलियों में से 25 नक्सली सरेंडर के लिए तैयार हैं। इनमें छह सब जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और 13 हार्डकोर नक्सली शामिल हैं। ये सभी गुरुवार को पुलिस मुख्यालय रांची में औपचारिक रूप से हथियार डालेंगे। झारखंड के नक्सल इतिहास में यह पहला मौका है, जब इतनी बड़ी संख्या में उग्रवादी एक साथ आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे बड़ी सफलता मान रही हैं। हथियारों का जखीरा भी करेंगे जमा सरेंडर करने वाले नक्सली सागेन आंगारिया दस्ता, गुलशन मुंडा दस्ता और मिसिर बेसरा दस्ता से जुड़े हुए हैं। ये सभी अपने पास मौजूद हथियार भी पुलिस को सौंपेंगे। बरामद होने वाले हथियारों में एक इंसास एलएमजी, चार इंसास राइफल, नौ एसएलआर, एक .303 राइफल और एक देसी पिस्टल शामिल हैं। इसके अलावा 27 मैगजीन, इंसास की 2000 गोलियां और एसएलआर की 755 गोलियां भी जमा कराई जाएंगी। इस बड़े सरेंडर के बाद कोल्हान-सारंडा क्षेत्र में एक करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा समेत अब केवल 35 नक्सली ही सक्रिय रह जाएंगे। कुख्यात कमांडरों पर दर्जनों केस दर्ज सरेंडर करने वालों में सबसे कुख्यात नाम सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल का है, जो कोल्हान में पुलिस के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ था। गोइलकेरा का रहने वाला सागेन अपने दस्ते के साथ लंबे समय से सक्रिय था। केवल चाईबासा जिले में ही उसके खिलाफ 123 मामले दर्ज हैं। वहीं गादी मुंडा उर्फ गुलशन मुंडा बुंडू-दशम फॉल और खूंटी बॉर्डर इलाके में लेवी वसूली और टेरर फंडिंग में सक्रिय था, जिस पर 48 केस दर्ज हैं। महिला कमांडरों में भी कई सक्रिय सदस्य शामिल हैं, जिन पर इनाम घोषित था। सरेंडर सूची में पांच लाख, दो लाख और एक लाख के इनामी नक्सली भी शामिल हैं। अन्य राज्यों में भी झारखंड कनेक्शन हाल के दिनों में तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में भी नक्सलियों के सरेंडर और गिरफ्तारी के मामले सामने आए हैं, जिनका झारखंड से सीधा संबंध है। पश्चिम बंगाल में समर दा ने आत्मसमर्पण किया, जबकि मुर्शिदाबाद की बेला सरकार को गिरफ्तार किया गया। वहीं आंध्र प्रदेश के विश्वनाथ उर्फ संतोष और पूनम उर्फ जोभा ने तेलंगाना में सरेंडर किया। इन सभी के खिलाफ चाईबासा में मामले दर्ज हैं। विश्वनाथ पर 13, पूनम पर 11 और समर व बेला पर तीन-तीन केस दर्ज हैं। लगातार हो रही कार्रवाई और दबाव के चलते नक्सली संगठन कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। Source link

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Explainer: क्या नदी में दूध डालने से वह प्रदूषित हो सकती है-...

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानि एनजीटी की भोपाल बेंच ने हाल ही में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नर्मदा नदी में एक अनुष्ठान के दौरान 11,000 लीटर दूध बहाने और 210 साड़ियां विसर्जित करने के मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है. एनजीटी ने इस मामले में केंद्री प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक वैज्ञानिक रिपोर्ट मांगी है. तो आइए जानते हैं कि साइंस नदी में दूध डालने पर क्या कहती है, क्या इससे नदी प्रदूषित हो सकती है. भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में नदियों को ‘मां’ और साक्षात चेतना मानकर पूजा जाता है. इसी श्रद्धा भाव से नदियों में दूध, दही, घी, तेल, फूल और वस्त्र व अन्य सामग्रियां अर्पित करते आए हैं. लेकिन मौजूदा हालात में जब हमारी नदियां प्रदूषण का शिकार हो रही हों तो ये देखना जरूरी है कि सजीव माने जाने वाली नदियों की सेहत के लिए क्या जरूरी और क्या नहीं. विज्ञान और रिसर्च क्या कहती है? विज्ञान के दृष्टिकोण से दूध एक “शुद्ध खाद्य पदार्थ” जरूर है लेकिन जब ये पानी में जाता है, तो अत्यधिक कंसंट्रेटेड जैविक प्रदूषक का काम करने लगता है. डेयरी विज्ञान और पर्यावरण इंजीनियरिंग के शोध बताते हैं कि दूध क बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानि बीओडी स्तर घरेलू सीवेज यानि नाली के गंदे पानी की तुलना में बहुत अधिक होता है यानि वो गंदे पानी की तुलना में पानी को ज्यादा प्रदूषित करता है. 1 लीटर दूध को पूरी तरह से डीकंपोज करने के लिए पानी को जितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, वह हजारों लीटर सामान्य पानी की ऑक्सीजन को खत्म कर सकती है. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जब 11,000 लीटर जैसी भारी मात्रा में दूध नदी में जाता है, तो ये उस हिस्से के पानी में ऑक्सीजन के स्तर को करीब शून्य कर सकता है, जिससे जलीय जीवों और मछलियों की तत्काल मौत हो सकती है. महीनों तक पानी पीने लायक नहीं रहता पर्यावरणविदों का कहना है कि इसका असर केवल तुरंत नहीं दिखता. दूध बहने के बाद नदी के पारिस्थितिकी तंत्र यानि इकोसिस्टम को जो नुकसान होता है, उसका ‘सेकंड फेज’ ज्यादा खतरनाक होता है. पानी में दूध के सड़ने से जो बैक्टीरिया पनपते हैं, वे महीनों तक पानी को पीने और नहाने के लिए अनुपयुक्त बना देते हैं. तेल और घी से नुकसान धार्मिक तौर पर जब नदी तेल और घी अर्पित करते हैं तो ये पानी से हल्के होते हैं, इसलिए पानी की सतह पर एक अदृश्य या गाढ़ी परत बना लेते हैं. यह परत हवा की ऑक्सीजन को पानी में घुलने से रोक देती है. साथ ही, यह सूरज की रोशनी को पानी के नीचे तक जाने से रोकती है, जिससे पानी के अंदर मौजूद पौधे प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाते और पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है. बैक्टीरिया और फंगस का बढ़ना दूध और दही में मौजूद लैक्टोज और प्रोटीन पानी में जाकर हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस के लिए भोजन का काम करते हैं. इससे पानी में सड़न पैदा होती है, बदबू आती है और पानी पीने या नहाने योग्य नहीं रह जाता. कपड़ों या साड़ियों का विसर्जन दूध के साथ-साथ साड़ियों या अन्य कपड़ों का विसर्जन पानी में होने पर वो कई हानिकारक चीजें पानी में घोलते हैं, जिसमें टेक्सटाइल डाइस और माइक्रोप्लास्टिक्स होते हैं, टेक्सटाइल डाइस रासायनिक रंग होते हैं. ये तत्व नदी के तलवे में जमा होकर जलीय वनस्पतियों का दम घोंट देते हैं. तो इसका सीधा मतलब ये है कि धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से दूध नदी में बहाना पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं माना जाता, खासकर जब मात्रा बहुत ज्यादा हो. वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इन सामग्रियों को नदी में डालने से पानी प्रदूषित होता है. विज्ञान की भाषा में इसे ऑर्गेनिक पोल्यूशन (जैविक प्रदूषण) कहा जाता है. क्या हैं भारत के जल कानून भारतीय जल अधिनियम, 1974 की धारा 24 पानी में प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण की बात करती है. ये कहती है कि किसी भी ऐसी प्रदूषणकारी या जैविक सामग्री को नदियों, धाराओं या कुओं में डालने पर सख्त रोक लगानी चाहिए, क्योंकि ये पानी की गुणवत्ता को खराब करते हैं. एनजीटी ने यह भी पाया कि सीपीसीबी के पास वर्तमान में ऐसी कोई स्पष्ट और समर्पित गाइडलाइन नहीं है जो धार्मिक अनुष्ठानों में नदी में दूध चढ़ाने को नियमबद्ध या रेगुलेट करती हो. अदालत ने इसी कमी को पूरा करने के लिए दोनों बोर्डों से कहा है कि वे वैज्ञानिक डेटा जुटाएं और यदि जरूरी हो, तो भविष्य के लिए नए नियम या दिशा-निर्देश सुझाएं. प्राचीन काल से अब तक कितना अंतर प्राचीन काल में नदियों में जो सामग्री दूध समेत अर्पित की जाती थी, वो प्रतीकात्मक तौर पर होती थी और आबादी बहुत कम होने की वजह से ऐसा करने वाले भी बहुत कम होते हैं. ऐसा चढ़ाया जाने वाला दूध नदियों के लिए कभी समस्या नहीं बनता था लेकिन आज टैंकरों के माध्यम से हजारों लीटर दूध नदी में बहाना सीधे तौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है. फिर पुराने समय में नदियां अपने पूरे वेग के साथ बहती थीं. तब यदि कोई प्रतीकात्मक रूप से दूध या तेल अर्पित करता था, तो नदी की अपनी ‘खुद को साफ करने की क्षमता’ उसे संभाल लेती थी. आज नदियों में पानी का बहाव कम हो गया है. अब हमारी आबादी करोड़ों में है. जब हजारों लीटर दूध या टन के हिसाब से सामग्री एक साथ नदियों में बहती है, तो नदियां उस बोझ को संभाल नहीं पातीं. Source link

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जेटीईटी 2026 में चुना है नागपुरी? ये किताबें और टिप्स दिला सकती...

Last Updated:May 21, 2026, 08:28 IST JTET 2026 Nagpuri Preparation: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जे टेट) 2026  में क्षेत्रीय भाषा नागपुरी चुनने वाले उम्मीदवार इस प्रकार तैयारी कर सकते हैं.  इससे कम समय में भी बढ़िया अंक आने की संभावना बढ़ेगी. देखिए जरूरी किताबों की लिस्ट पैडागॉजी और सही रणनीति.  ख़बरें फटाफट पलामू. झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जे टेट) 2026 को लेकर अभ्यर्थियों में उत्साह बढ़ गया है. वर्ष 2012 और 2016 के बाद एक बार फिर यह परीक्षा आयोजित होने जा रही है. ऐसे में प्रतियोगियों के पास बेहतर तैयारी कर सफलता हासिल करने का सुनहरा मौका है. खासकर वे अभ्यर्थी जिन्होंने क्षेत्रीय भाषा में नागपुरी का चयन किया है, उनके लिए सही रणनीति और विषय की गहरी समझ बेहद जरूरी हो जाती है. विशेषज्ञ श्वेता कुमारी ने बताया कि नागपुरी विषय जे टेट में सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है, बशर्ते तैयारी योजनाबद्ध तरीके से की जाए. ऐसा है परीक्षा पैटर्नजे टेट परीक्षा पैटर्न की बात करें तो पैडागॉजी 30 अंक, नागपुरी भाषा 30 अंक तथा हिंदी और अंग्रेजी 15-15 अंक के होते हैं. पहली से पांचवीं कक्षा तक के लिए पर्यावरण और गणित से प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि छठी से आठवीं के लिए सोशल साइंस, जियोग्राफी तथा साइंस विषय में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स शामिल हैं. इस बार परीक्षा में 10 अंकों का कंप्यूटर साइंस भी जोड़ा गया है. इसलिए अभ्यर्थियों को हर विषय के लिए अलग रणनीति बनाकर पढ़ाई करनी होगी. ये किताबें करेंगी मददनागपुरी विषय की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को सबसे पहले भाषा अध्याय और भाषा शिक्षण यानी पैडागॉजी पर विशेष ध्यान देना चाहिए. नागपुरी व्याकरण की मजबूत पकड़ सफलता की पहली सीढ़ी है. इसके लिए डॉ. शकुंतला मिश्र की ‘सदानी व्याकरण’ पुस्तक काफी उपयोगी मानी जाती है. वहीं नागपुरी लोक साहित्य को समझने के लिए डॉ. भुनेश्वर अनुज की पुस्तक तथा झारखंड की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि जानने के लिए डॉ. गिरधारी राम गौंझू की ‘झारखंड लोक संगीत’ पढ़ना लाभदायक होगा. इसके अलावा भाषा शिक्षण और शिक्षाशास्त्र की बेहतर समझ के लिए डॉ. हरिहर नाथ तिवारी की पुस्तक अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. सही रणनीति से मिलेगी सफलतानई शिक्षा नीति 2020 में क्षेत्रीय और मातृभाषाओं को विशेष महत्व दिया गया है. ऐसे में नागपुरी भाषा का दायरा लगातार बढ़ रहा है. यदि अभ्यर्थी भाषा की मूल अवधारणाओं, व्याकरण, लोक साहित्य और पैडागॉजी को सही तरीके से समझकर नियमित अभ्यास करें, तो नागपुरी विषय में अच्छे अंक प्राप्त करना आसान हो सकता है. सही प्लानिंग, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के साथ तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए जे टेट 2026 सफलता का बड़ा अवसर साबित हो सकता है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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मधुपुर में बाइकर्स गैंग का बढ़ता आतंक:कॉलेज रोड पर महिला से सोने...

देवघर जिले के मधुपुर शहर में बाइकर्स गैंग का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन राह चलते लोगों से मोबाइल, चेन और महिलाओं के गहने छीनने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ताजा मामला मधुपुर थाना क्षेत्र के कॉलेज रोड का है। जहां बाजार से लौट रहे एक दंपति को अपराधियों ने निशाना बनाया। जानकारी के अनुसार, अंजली देवी (लगभग 30 वर्ष) अपने पति प्रवीण पंडित के साथ खरीदारी करने मधुपुर आई थीं। बाजार से सामान लेने के बाद दोनों बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान कॉलेज रोड के पास पीछे से तेज रफ्तार में आए अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने वारदात को अंजाम दिया। चलती बाइक पर झपटमारी, महिला घायल प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवार के अनुसार, अपराधियों ने बेहद शातिर तरीके से चलती बाइक के दौरान अंजली देवी के कान से सोने की बाली झपट ली और मौके से फरार हो गए। घटना इतनी तेजी से हुई कि दंपति कुछ समझ पाते, उससे पहले ही अपराधी आंखों से ओझल हो चुके थे। झपटमारी के दौरान महिला के कान में हल्की चोट भी आई है, जिससे वह सहम गईं। परिजनों के मुताबिक छीनी गई सोने की बाली की कीमत करीब दस हजार रुपए आंकी जा रही है। घटना के बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस जांच में जुटी, लोगों ने बढ़ाई गश्ती की मांग घटना की सूचना मिलते ही मधुपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है ताकि अपराधियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जा सके। लगातार बढ़ रही इस तरह की घटनाओं से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि शहर में बाइकर्स गैंग बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे आमजन असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से शहर में नियमित गश्ती बढ़ाने और ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। Source link

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