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राज्यसभा चुनाव : दो सीटों के लिए अब तीन प्रत्याशी मैदान में,...

राज्यसभा चुनाव के लिए नाम वापसी के अंतिम दिन गुरुवार को किसी भी प्रत्याशी ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया। इस प्रकार दो सीटों के लिए चुनाव मैदान में तीनों प्रत्याशी जमे हुए हैं। महागठबंधन की ओर से दो उम्मीदवार हैं। झामुमो ने बैजनाथ राम को उतारा है, तो प्रणव झा कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। एनडीए ने निर्दलीय परिमल नाथवानी को समर्थन दिया है। परिमल वर्ष 2008 और वर्ष 2014 में झारखंड से राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। अब 18 जून को चुनाव होंगे, जहां सभी 81 विधायक चुनाव प्रक्रिया में भाग लेंगे। इस बीच, जीत के लिए सभी पार्टियां ने रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम रांची में हैं, तो एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी मुंबई जा चुके हैं। बैजनाथ राम ने बताया कि वे रांची में रहेंगे। परिमल नाथवानी ने कहा कि दो-तीन दिनों बाद रांची आएंगे। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा गुरुवार को माले विधायकों से मिले। उधर, विधायकों को एकजुट रखने के लिए कांग्रेस ने अपने विधायकों को क्षेत्र में या रांची में रहने की सलाह दी है। हमेशा संपर्क में रहने को कहा है। वहीं झामुमो ने कहा कि उनके विधायक 24 कैरेट वाले हैं। न उन्हें कोई खरीद सकता है और न डरा-धमका सकता है। Source link

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आरयू: चार प्रोफेशनल विभाग स्कूल मॉडल में तब्दील होंगे, डेटा साइंस की...

एजुकेशन रिपोर्टर| रांची रांची विश्वविद्यालय में सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं बदलने वाले, बल्कि पूरे अकादमिक ढांचे की सर्जरी की तैयारी है। वीसी प्रो. सरोज शर्मा की अध्यक्षता में 17 जून को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में 27 बड़े प्रस्तावों पर चर्चा के बाद स्वीकृति मिलने वाली है। इनमें विभागों की पहचान बदलने से लेकर डेटा साइंस जैसे रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू करने, करियर काउंसिलिंग सेंटर खोलने, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम लागू करने और गुमला के कार्तिक उरांव कॉलेज को नए संसाधनों से लैस करने तक के प्रस्ताव शामिल हैं। एनईपी के मानक के अनुसार अंकपत्र, सर्टिफिकेट समेत अन्य प्रमाण पत्र के ब्लू प्रिंट को स्वीकृति के लिए रखा जाएगा। रिनपास और केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी) में संचालित पाठ्यक्रमों में भी बदलाव की तैयारी है। यूजीसी और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की नई गाइडलाइन के अनुरूप पुराने एमफिल आधारित पाठ्यक्रमों की जगह नए स्वरूप के कोर्स लागू किए जाएंगे। विश्वविद्यालय में दो नए विशेष केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल हैं। वीसी प्रो. सरोज के योगदान के बाद एकेडमिक काउंसिल की पहली बैठक है। स्कूल मॉडल से विभागों की बदलेगी पहचान विश्वविद्यालय के प्रोफेशनल और वोकेशनल विभागों को नई पहचान देने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके तहत इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (आईएमएस) का नाम बदलकर यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज किया जाएगा। वहीं एमसीए और एमएससी आईटी को एकीकृत कर यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बनाया जाएगा। मास कम्युनिकेशन विभाग को यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन और लीगल स्टडीज को यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। आरयू में पहली बार डेटा साइंस की होगी पढ़ाई एमएससी डेटा साइंस और एमए/एमएससी स्टैटिस्टिक्स के नए सिलेबस को मंजूरी देना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते बाजार को देखते हुए विश्वविद्यालय इन कोर्सों को शुरू करने जा रहा है। Source link

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sumati varman from palamu breaks 100 coconuts with head and becomes popular

Last Updated:June 12, 2026, 05:15 IST Palamu Ajab Gajab: पलामू के सुमति वर्मन अपनी अनोखी कला ‘सिर से नारियल फोड़ने’ के लिए चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. सुमति अब तक अपने सिर से करीब 100 नारियल फोड़ चुके हैं। यह कोई साधारण करतब नहीं है, बल्कि इसके पीछे पांच महीने की कड़ी मेहनत और मार्शल आर्ट्स का गहन प्रशिक्षण है. उनका कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह से तकनीक और एकाग्रता का खेल है. हालांकि यह देखने में बेहद जोखिम भरा लगता है, लेकिन सुमति ने इसे अपनी मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग और विशेष अभ्यास के दम पर सिद्ध किया है. पलामू: पलामू में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. यहां के लोग शिक्षा, खेल, कला और साहसिक प्रदर्शन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. ऐसी ही एक अनोखी प्रतिभा के धनी हैं पलामू जिले के निवासी सुमति वर्मन, जिनका हैरतअंगेज कारनामा लोगों को आश्चर्यचकित कर देता है. सुमति अपने सिर से नारियल फोड़ लेते हैं. यह सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे, लेकिन उन्होंने वर्षों की मेहनत और कठिन अभ्यास के दम पर इस कला में महारत हासिल की है. मजेदार प्रतियोगिता से शुरू हुई ये अनोखी यात्रासुमति वर्मन ने लोकल18 को बताया कि इस अनोखी यात्रा की शुरुआत एक मजेदार प्रतियोगिता से हुई थी. उस समय वे मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रहे थे. दोस्तों के बीच एक शर्त लगी थी कि जो व्यक्ति नारियल को सिर, दांत या किसी अलग तरीके से फोड़ देगा, उसे पैसे नहीं देने होंगे, जबकि असफल होने वाले को पूरी राशि चुकानी पड़ेगी. इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए उन्होंने पहली बार नारियल फोड़ने का प्रयास किया. शुरुआत में यह केवल पैसे बचाने का एक तरीका था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी विशेष पहचान बन गई. अबतक फोड़ चुके हैं 100 नारियलउन्होंने बताया कि तब से लेकर अब तक वे करीब 100 नारियल सिर से फोड़ चुके हैं. हालांकि बीच में कुछ समय का अंतराल भी आया, लेकिन अभ्यास और आत्मविश्वास ने उन्हें इस कला से जोड़े रखा. सुमति के अनुसार मार्शल आर्ट केवल हाथ-पैर चलाने की कला नहीं है, बल्कि यह शरीर के हर हिस्से को मजबूत और नियंत्रित बनाने की एक विधा है. लगातार प्रशिक्षण के कारण शरीर की सहनशक्ति और मानसिक मजबूती दोनों विकसित होती हैं. पांच महीने का किया विशेष अभ्यासआगे कहा कि नारियल सामान्य वस्तु नहीं है. इसकी कठोरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक नारियल की मजबूती कई ईंटों के बराबर मानी जाती है. ऐसे में इसे सिर से फोड़ना आसान काम नहीं है. इसके लिए उन्होंने लगभग चार से पांच महीने तक विशेष अभ्यास किया था. इसके बाद ही उन्होंने वास्तविक प्रदर्शन शुरू किया. इस तरह का प्रदर्शन जोखिम भरा हालांकि वे यह भी स्वीकार करते हैं कि इस तरह का प्रदर्शन जोखिम भरा होता है. बिना उचित प्रशिक्षण के इसे करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उनका मानना है कि किसी भी कठिन कार्य को सही तकनीक, अनुशासन और लगातार अभ्यास के बल पर संभव बनाया जा सकता है. आज सुमति वर्मन का यह अनोखा कारनामा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. उनकी मेहनत तथा समर्पण की मिसाल पेश कर रहा है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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मतदाता सूची में मैपिंग के लिए 13 व 14 को सभी बूथों...

रांची: मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए 13 और 14 जून को सभी बूथों पर लगेगा विशेष कैंप, होगी वोटर्स की मैपिंग रांची: रांची के मतदाताओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक बार फिर ‘विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम’ के तहत विशेष कैंप का आयोजन किया जाएगा। डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने जिले के सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर 13 और 14 जून को दो दिवसीय विशेष कैंप लगाने का निर्देश दिया है। सुबह 8 से दोपहर 4 बजे तक तैनात रहेंगी बीएलओ इस विशेष अभियान के तहत सभी बूथों पर सुबह 8:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे तक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मतदाता सूची के साथ उपस्थित रहेंगी। हालांकि, जो बीएलओ जनगणना कार्य में भी लगी हुई हैं, वे दोपहर 1:00 बजे तक ही कैंप में मौजूद रहेंगी। मतदाताओं और उनके परिवार की होगी मैपिंग डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक, त्रुटिहीन और अप-टू-डेट (अद्यतन) करने के लिए यह महाअभियान चलाया जा रहा है। कैंप के दौरान मतदाताओं के निवास, पहचान एवं अन्य आवश्यक जानकारियों का भौतिक सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाएगा। कागजात लाना अनिवार्य: जिन मतदाताओं ने अभी तक अपनी और अपने परिवार की मैपिंग नहीं कराई है, वे इस कैंप में जाकर इसे पूरा करा सकते हैं। इसके लिए मतदाताओं को बीएलओ द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेजों (पहचान और पते का प्रमाण) के साथ अपने-अपने मतदान केंद्र पर पहुंचना होगा। 15 जून तक चलेगी मैपिंग की प्रक्रिया: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी इधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (रिवीजन) से पूर्व मतदाताओं की मैपिंग की यह प्रक्रिया 15 जून तक जारी रहेगी। इसके बाद अगले चरण में इन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) की छपाई और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) का कार्य शुरू किया जाएगा। कैंप से जुड़ी मुख्य बातें:तारीख: 13 और 14 जून (शनिवार और रविवार)समय: सुबह 8:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे तक (जनगणना कार्य में लगी बीएलओ दोपहर 1:00 बजे तक)स्थान: आपके क्षेत्र का संबंधित मतदान केंद्र (बूथ)उद्देश्य: मतदाता सूची का सत्यापन, शुद्धिकरण और परिवारों की मैपिंग। Source link

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रांची-बानो के बीच दौड़ेगी लोकल ट्रेन, बस से कम किराया व समय...

रांची और बानो के बीच जल्द लोकल ट्रेन चल सकती है। प्रस्तावित लोकल ट्रेन में 1000 से अधिक यात्री यात्रा कर सकेंगे। इस ट्रेन से न सिर्फ लोगों का खर्च कम होगा, बल्कि समय की भी बचत होगी। वर्तमान में रांची से बानो के बीच बस का किराया करीब 240 रुपए है। प्रस्तावित लोकल ट्रेन शुरू होने के बाद किराया करीब 50 रुपए रहने की संभावना है। दोनों स्थानों के बीच सड़क मार्ग से दूरी लगभग 130 किलोमीटर है। रेल मार्ग से यह दूरी करीब 94 किलोमीटर है। रांची से बानो जाने में करीब दो घंटे का समय लगेगा। जबकि अभी बस से यह दूरी तय करने में तीन घंटे लगते हैं। रांची रेल मंडल ने आधुनिक लोकल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इसी माह प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। किसानों, छात्रों और कामकाजी लोगों को होगा लाभ स्पेशल सेवा के रूप में चलेगी ट्रेन जेडआरयूसीसी सदस्य अरुण जोशी ने बताया कि शुरुआत में ट्रेन को स्पेशल सेवा के रूप में चलाया जाएगा, जबकि स्वीकृति के बाद इसे नियमित रूप से संचालित किया जा सकेगा। इससे लोगों का लाभ होगा। ट्रेन की प्रमुख विशेषताएं कुल 12 कोच होंगे। {1000 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे। {किराया किफायती रखा जाएगा। {सुबह बानो से हटिया और शाम में हटिया से बानो तक परिचालित करने का प्रस्ताव है। इन स्टेशनों पर मिल सकता है ठहराव नई लोकल ट्रेन शुरू होने पर महाबुआंग, कुरकुरा, पाकरा, पोकला, बकसपुर, गोविंदपुर रोड, कर्रा, लोधमा और बालसिरिंग जैसे ग्रामीण स्टेशनों पर पर्याप्त ठहराव सुनिश्चित किया जा सकता है। Source link

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रांची के किसान धनेश्वर की मिसाल, 16 साल पहले लगाए आम-कटहल-सागवान, अब...

Last Updated:June 12, 2026, 19:34 IST Success Story : झारखंड की राजधानी रांची से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पतरातू गांव के किसान धनेश्वर बताते हैं कि आज से 16 साल पहले उन्होंने सागवान, कटहल, नींबू और आम का भी पेड़ लगाया था. आज आलम ये है क सारे पेड़ इतने बड़े हो गए हैं कि कुछ फल भी देने लगे है. अब घर बैठे- बैठे कटहल और आम से इस सीजन में अच्छी खासी कमाई हो रही है. वहीं, सागवान के पेड़ के लकड़ी से घर के सारे फर्नीचर उन्होंने बना लिए हैं. इसके अलावा कुछ बाजार में भी बेचकर मुनाफा भी कमाए हैं. किसान धनेश्वर आगे बताते हैं कि वैसे तो उन्होंने नींबू, मिर्ची, बांस और कई सारे पेड़ लगाए थे, लेकिन सबसे ज्यादा कमाई कटहल, नींबू और आम बेचकर होता है. फिलहाल गर्मी के मौसम हर दिन की कमाई ₹1500 तक हो जाती है. सबसे बड़ा फायदा उन्हें इस बात से हुआ है कि जो सागवन की लकड़ी का फर्नीचर अगर आप बाजार में लेने जाए तो लाख रुपए से कम में नहीं मिलने वाला है, वह उन्होंने मुफ्त में ही बनवा डाला है. किसान धनेश्वर बताते हैं कि अभी फिलहाल हर दिन 20 किलो तक कटहल आराम से बेच डालते हैं. बाजार में ₹50 तक भाव होता है. ₹1000 तो इसी का हो जाता है. इसके अलावा उनके पास आम का पेड़ है, हर दिन 20 किलो आम भी बेचते हैं. कच्चा आम ₹30 किलो तक चला जाता है. ₹600 इसका भी निकल ही आता है, तो आप समझ सकते हैं हर दिन 1600 रुपये की कमाई तो ऐसे ही हो जाती है. इसके अलावा नींबू भी 100 रुपए का आराम से निकल आता है और मिर्च, धनिया की तो बात ही छोड़िए. किसान ने बताया कि 16 साल पहले की गई उनकी मेहनत आज रंग दिखा रही है. Add News18 as Preferred Source on Google इसलिए वह अपने बच्चों को भी कहते हैं कि पेड़ लगाओ पर वैसा पेड़ लगाओ जो फलदार पेड़ हो, लेकिन आजकल के बच्चे शो प्लांट लगते हैं. शो प्लांट से कुछ नहीं होगा आपको फलदार पेड़ लगाना होगा. क्योंकि, फलदार पेड़ में जमीन के अंदर पानी बचा के रखने की क्षमता काफी होती है. ऐसे में गर्मी में पानी की किल्लत भी देखने को नहीं मिलेगी. इसके अलावा यह सारे पेड़ उनके आंगन में प्राकृतिक छतरी का काम करते हैं. उनके घर में कभी ऐसी कुलर की भी जरूरत नहीं पड़ती. क्योंकि, इतने सारे पेड़ उनके आंगन को घेरे हुए हैं. ऐसे में वह आंगन में दोपहर में आकर सो जाते हैं. इसके सामने ऐसी फेल हो जाता है. अभी हम लोग और पेड़ लगा रहे हैं. वह हर साल 5 पेड़ लगाते हैं. आम, लीची और कटहल का और आने वाले जनरेशन को भी बोलते हैं कि अपने घर आंगन में खूब पेड़ लगाइए. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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लोगों के आंखों में धूल झोंक रही है कंपनी : सूरज अग्रवाल

लोहरदगा|जिला अंतर्गत लोहरदगा प्रखंड के हेसल गांव के पास हिंडाल्को कंपनी बॉक्साइट क्रसिंग का प्लांट लगाकर काम कर रही है। करोड़ों का बॉक्साइट लोहरदगा से दूसरे राज्यों में भेज दिया जा रहा है। वहीं व्यवस्था के नाम पर कई किलोमीटर तक सड़क जाम, सड़क की बर्बादी और लोगों को परेशान कर रही है। साथ ही विकास के नाम पर मोतियाबिंद का ऑपरेशन, बीज वितरण आदि कर लोगों के आंखों में धूल झोंक रही है। उक्त बातें बातें कहते हुए आजसू नेता सूरज अग्रवाल ने कहा कि हिंडाल्को कंपनी खुद से कभी सड़क नहीं बनाती है, पहाड़ी क्षेत्र से बॉक्साइट ले जाने के लिए मिट्टी मोरम की सड़क बनाती है लेकिन जो सड़क सरकार द्वारा लोगों की सुविधा के लिए बनाई है उसे भी बर्बाद करने में तुली हुई है। वहीं प्रदूषण रोकथाम के नाम पर सिर्फ एक टैंकर पानी सड़कों में पटा दिया जाता है जो दस वाहन गुजरने के बाद ही सूख जाती है। उन्होंने कहा कि जिन जनप्रतिनिधियों को जनता ने अपना बहुमूल्य मत देकर लोहरदगा के विकास व अपनी सुरक्षा के लिए जिताकर भेजा है, आज वही जनप्रतिनिधि हिंडाल्को के बहती गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। दलालों के भरोसे पूरे सिस्टम को हिंडाल्को चला रही है और अपना करोड़ों का बारे न्यारे कर रही है। Source link

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जिले की 14 में तीन एंबुलेंस खराब, सिर्फ पांच ही मरीजों को...

भास्कर न्यूज | लातेहार जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस की हालत दयनीय है। जिले में उपलब्ध 14 एंबुलेंसों में तीन पूरी तरह खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी है, जबकि शेष 11 में भी अधिकांश वाहनों की स्थिति दयनीय है। हालात यह हैं कि जिले में केवल पांच एंबुलेंस ही ऐसी बची हैं जिनसे गंभीर मरीजों को रिम्स या अन्य बड़े अस्पतालों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है। बाकी छह एंबुलेंसों का उपयोग केवल स्थानीय स्तर पर मरीजों को अस्पताल लाने-ले जाने के लिए किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कई एंबुलेंसों के टायर घिस चुके हैं, तो कई के गियर बॉक्स, ब्रेक और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जे खराब हैं। तकनीकी खामियों के बावजूद वाहनों का किसी तरह संचालन किया जा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। सदर अस्पताल की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यहां पांच 108 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से केवल एक एंबुलेंस ही रांची तक जाने योग्य है। बाकी चार एंबुलेंसों का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर किए जाने पर अस्पताल की अन्य एंबुलेंस या निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है, जिससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। कई प्रखंडों में एंबुलेंस की भारी कमी : जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी एंबुलेंस की भारी कमी देखने को मिल रही है। महुआडांड़ में दो एंबुलेंस हैं, जिनमें से एक लगभग पांच लाख किलोमीटर चलने के बाद पूरी तरह खराब हो चुकी है। बरवाडीह, मनिका और गारू में एक-एक एंबुलेंस संचालित है। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए मनिका की एक एंबुलेंस को चंदवा भेज दिया गया है। चंदवा में पहले से एक एंबुलेंस खराब पड़ी है, जबकि वर्तमान में दो एंबुलेंस सेवा में हैं। बालूमाथ में चार एंबुलेंस हैं, जिनमें दो रांची जाने योग्य हैं और दो स्थानीय सेवा में लगी हुई हैं। हेरहंज और बरियातू प्रखंड में फिलहाल एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि 108 नंबर पर कॉल करने के बाद भी समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती। कई बार कॉल रिस्पॉन्स में देरी होती है, जिससे दुर्घटना और गंभीर बीमारी के मामलों में मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। ^जिले में संचालित 14 में से तीन एंबुलेंस जर्जर अवस्था में है। जो रांची के मां अम्बे मोटर गैरेज में लगी है। 11 एम्बुलेंस चल रहे हैं। लेकिन पांच ही रांची भेजने लायक है। छह की स्थिति भी खराब है। जिसे इमरजेंसी केस में लोकल स्तर पर चलाया जा रहा है। ^ अमरोज अंसारी, एसीओ, लातेहार Source link

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साल में सिर्फ एक बार होता है पाताल बाबा का दर्शन! 300...

Last Updated:June 12, 2026, 19:39 IST भगवान शंकर के एक से बढ़कर एक भक्त हैं और इनकी महिमा की गाथाएं भी अपरंपार हैं. लोगों की भगवान शंकर में बड़ी आस्था है. भगवान शंकर को लोग मूर्ति और लिंग स्वरूप दोनों में पूजते हैं. देशभर में एक से बढ़कर एक शिवलिंग हैं और इनसे जुड़ी मान्यताएं और आस्थाएं हैं. आज हम आपको एक और रोचक शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पहुंचकर आप भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सकते हैं. देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथधाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ मनोकामना लिंग हैं यानी सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा यहां पूरी होती है. यही वजह है कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग बाबाधाम आकर जलार्पण और पूजा करते हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि बाबाधाम की यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक श्रद्धालु दुमका जिले में स्थित बासुकीनाथधाम जाकर भगवान शिव का दर्शन नहीं कर लेते. बाबाधाम से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित बासुकीनाथधाम को बाबा बैद्यनाथ का दरबार पूरा करने वाला धाम माना जाता है. यहां के पुरोहितों के अनुसार, जो भक्त बाबाधाम में पूजा करने के बाद बासुकीनाथ में भी जलार्पण करते हैं, उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. इसी कारण सावन हो या सामान्य दिन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु दोनों धामों का दर्शन करने पहुंचते हैं. बासुकीनाथ मंदिर की अपनी अलग धार्मिक महत्ता है और यहां की कई परंपराएं लोगों की आस्था से जुड़ी हुई हैं. बासुकीनाथधाम परिसर में एक पवित्र शिवगंगा तालाब भी स्थित है. मंदिर में पूजा करने से पहले श्रद्धालु इस तालाब में स्नान कर खुद को पवित्र मानते हैं. इसी शिवगंगा की गहराई में एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जिसे लोग श्रद्धा से पाताल बाबा के नाम से जानते हैं. यह शिवलिंग आम दिनों में पूरी तरह पानी के अंदर डूबा रहता है, इसलिए सालभर इसके दर्शन नहीं हो पाते. यही वजह है कि पाताल बाबा के दर्शन को बेहद दुर्लभ माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google हर वर्ष सावन शुरू होने से पहले ज्येष्ठ माह में एक विशेष परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान बासुकीनाथधाम के पुरोहित, स्थानीय ग्रामीण और प्रशासन के सहयोग से शिवगंगा तालाब का पानी निकाला जाता है तथा उसकी साफ-सफाई की जाती है. जब तालाब का जलस्तर कम होता है, तब वर्षों से जलमग्न पाताल बाबा के दर्शन श्रद्धालुओं को होते है. इस मौके का लोग पूरे साल इंतजार करते हैं. दूर-दूर से शिवभक्त केवल इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए बासुकीनाथ पहुंचते हैं. हाल ही में लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर पाताल बाबा के दर्शन होने पर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के पुजारियों ने षोडशोपचार विधि से भगवान शिव का विशेष पूजन कराया और भव्य श्रृंगार किया. सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालु शिवगंगा कुंड में उतरकर जलार्पण करते नजर आए. कई भक्तों ने कहा कि पता नहीं अगली बार ऐसा अवसर कब मिलेगा, इसलिए इस बार दर्शन और पूजा का विशेष महत्व है. कुंड के आसपास भक्ति, श्रद्धा और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. पाताल बाबा को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच एक बेहद रोचक मान्यता भी प्रचलित है. स्थानीय तीर्थपुरोहित लम्बोदर मिश्रा बताते है कि यह स्वयंभू शिवलिंग लगभग 300 वर्ष पहले प्रकट हुआ था. हैरानी की बात यह है कि वर्षों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद बाबा पर चढ़ाए गए बिल्वपत्र, फूल, अबीर और अन्य पूजन सामग्री पूरी तरह सुरक्षित दिखाई देती है. जब शिवगंगा का पानी निकाला जाता है और पाताल बाबा के दर्शन होते हैं, तो ऐसा लगता है मानो अभी-अभी उनका श्रृंगार किया गया हो. श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य कृपा और चमत्कार मानते हैं. यही कारण है कि बासुकीनाथ का पाताल बाबा आज करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है. Source link

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जिले में चल रही है तैयारी, लोग...

भास्कर न्यूज | सिमडेगा 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस अवसर पर भारत स्वाभिमान पतंजलि योगपीठ की ओर से योग प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए योग प्रशिक्षक भाग लेकर योग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की गई। साथ ही लोगों को योग के विशेष आसनों एवं उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देने पर जोर दिया गया। पतंजलि योग संघ एवं भारत स्वाभिमान पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी देवेंद्र सोनी ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी प्रशिक्षक अपने-अपने क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि जिलेभर में अधिक से अधिक लोगों को नियमित रूप से योग से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षकों ने योग से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। जलडेगा के करमपाल राम ने बताया कि वे जुलाई 2023 से नियमित योग कर रहे हैं। योग उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है, जिससे शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है। उन्होंने कहा कि योग शुरू करने के बाद से उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई है। सोनिया सिन्हा ने बताया कि पहले उन्हें शरीर में सूजन की समस्या रहती थी, लेकिन नियमित योग से यह परेशानी दूर हो गई। अब अधिक काम करने के बावजूद थकान महसूस नहीं होती। वहीं, कोलेबिरा के सौरभ बड़ाइक ने कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से योग कर रहे हैं और इस दौरान उन्हें केवल सामान्य सर्दी-जुकाम ही हुआ है। ठेठईटांगर के खुदीराम सिंह ने बताया कि योग अपनाने से उनके जोड़ों के दर्द सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में काफी राहत मिली है। इधर योग दिवस को सफल बनाने के लिए जिले में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। Source link

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