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रांची-बानो के बीच दौड़ेगी लोकल ट्रेन, बस से कम किराया व समय...

रांची और बानो के बीच जल्द लोकल ट्रेन चल सकती है। प्रस्तावित लोकल ट्रेन में 1000 से अधिक यात्री यात्रा कर सकेंगे। इस ट्रेन से न सिर्फ लोगों का खर्च कम होगा, बल्कि समय की भी बचत होगी। वर्तमान में रांची से बानो के बीच बस का किराया करीब 240 रुपए है। प्रस्तावित लोकल ट्रेन शुरू होने के बाद किराया करीब 50 रुपए रहने की संभावना है। दोनों स्थानों के बीच सड़क मार्ग से दूरी लगभग 130 किलोमीटर है। रेल मार्ग से यह दूरी करीब 94 किलोमीटर है। रांची से बानो जाने में करीब दो घंटे का समय लगेगा। जबकि अभी बस से यह दूरी तय करने में तीन घंटे लगते हैं। रांची रेल मंडल ने आधुनिक लोकल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इसी माह प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। किसानों, छात्रों और कामकाजी लोगों को होगा लाभ स्पेशल सेवा के रूप में चलेगी ट्रेन जेडआरयूसीसी सदस्य अरुण जोशी ने बताया कि शुरुआत में ट्रेन को स्पेशल सेवा के रूप में चलाया जाएगा, जबकि स्वीकृति के बाद इसे नियमित रूप से संचालित किया जा सकेगा। इससे लोगों का लाभ होगा। ट्रेन की प्रमुख विशेषताएं कुल 12 कोच होंगे। {1000 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे। {किराया किफायती रखा जाएगा। {सुबह बानो से हटिया और शाम में हटिया से बानो तक परिचालित करने का प्रस्ताव है। इन स्टेशनों पर मिल सकता है ठहराव नई लोकल ट्रेन शुरू होने पर महाबुआंग, कुरकुरा, पाकरा, पोकला, बकसपुर, गोविंदपुर रोड, कर्रा, लोधमा और बालसिरिंग जैसे ग्रामीण स्टेशनों पर पर्याप्त ठहराव सुनिश्चित किया जा सकता है। Source link

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रांची के किसान धनेश्वर की मिसाल, 16 साल पहले लगाए आम-कटहल-सागवान, अब...

Last Updated:June 12, 2026, 19:34 IST Success Story : झारखंड की राजधानी रांची से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पतरातू गांव के किसान धनेश्वर बताते हैं कि आज से 16 साल पहले उन्होंने सागवान, कटहल, नींबू और आम का भी पेड़ लगाया था. आज आलम ये है क सारे पेड़ इतने बड़े हो गए हैं कि कुछ फल भी देने लगे है. अब घर बैठे- बैठे कटहल और आम से इस सीजन में अच्छी खासी कमाई हो रही है. वहीं, सागवान के पेड़ के लकड़ी से घर के सारे फर्नीचर उन्होंने बना लिए हैं. इसके अलावा कुछ बाजार में भी बेचकर मुनाफा भी कमाए हैं. किसान धनेश्वर आगे बताते हैं कि वैसे तो उन्होंने नींबू, मिर्ची, बांस और कई सारे पेड़ लगाए थे, लेकिन सबसे ज्यादा कमाई कटहल, नींबू और आम बेचकर होता है. फिलहाल गर्मी के मौसम हर दिन की कमाई ₹1500 तक हो जाती है. सबसे बड़ा फायदा उन्हें इस बात से हुआ है कि जो सागवन की लकड़ी का फर्नीचर अगर आप बाजार में लेने जाए तो लाख रुपए से कम में नहीं मिलने वाला है, वह उन्होंने मुफ्त में ही बनवा डाला है. किसान धनेश्वर बताते हैं कि अभी फिलहाल हर दिन 20 किलो तक कटहल आराम से बेच डालते हैं. बाजार में ₹50 तक भाव होता है. ₹1000 तो इसी का हो जाता है. इसके अलावा उनके पास आम का पेड़ है, हर दिन 20 किलो आम भी बेचते हैं. कच्चा आम ₹30 किलो तक चला जाता है. ₹600 इसका भी निकल ही आता है, तो आप समझ सकते हैं हर दिन 1600 रुपये की कमाई तो ऐसे ही हो जाती है. इसके अलावा नींबू भी 100 रुपए का आराम से निकल आता है और मिर्च, धनिया की तो बात ही छोड़िए. किसान ने बताया कि 16 साल पहले की गई उनकी मेहनत आज रंग दिखा रही है. Add News18 as Preferred Source on Google इसलिए वह अपने बच्चों को भी कहते हैं कि पेड़ लगाओ पर वैसा पेड़ लगाओ जो फलदार पेड़ हो, लेकिन आजकल के बच्चे शो प्लांट लगते हैं. शो प्लांट से कुछ नहीं होगा आपको फलदार पेड़ लगाना होगा. क्योंकि, फलदार पेड़ में जमीन के अंदर पानी बचा के रखने की क्षमता काफी होती है. ऐसे में गर्मी में पानी की किल्लत भी देखने को नहीं मिलेगी. इसके अलावा यह सारे पेड़ उनके आंगन में प्राकृतिक छतरी का काम करते हैं. उनके घर में कभी ऐसी कुलर की भी जरूरत नहीं पड़ती. क्योंकि, इतने सारे पेड़ उनके आंगन को घेरे हुए हैं. ऐसे में वह आंगन में दोपहर में आकर सो जाते हैं. इसके सामने ऐसी फेल हो जाता है. अभी हम लोग और पेड़ लगा रहे हैं. वह हर साल 5 पेड़ लगाते हैं. आम, लीची और कटहल का और आने वाले जनरेशन को भी बोलते हैं कि अपने घर आंगन में खूब पेड़ लगाइए. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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लोगों के आंखों में धूल झोंक रही है कंपनी : सूरज अग्रवाल

लोहरदगा|जिला अंतर्गत लोहरदगा प्रखंड के हेसल गांव के पास हिंडाल्को कंपनी बॉक्साइट क्रसिंग का प्लांट लगाकर काम कर रही है। करोड़ों का बॉक्साइट लोहरदगा से दूसरे राज्यों में भेज दिया जा रहा है। वहीं व्यवस्था के नाम पर कई किलोमीटर तक सड़क जाम, सड़क की बर्बादी और लोगों को परेशान कर रही है। साथ ही विकास के नाम पर मोतियाबिंद का ऑपरेशन, बीज वितरण आदि कर लोगों के आंखों में धूल झोंक रही है। उक्त बातें बातें कहते हुए आजसू नेता सूरज अग्रवाल ने कहा कि हिंडाल्को कंपनी खुद से कभी सड़क नहीं बनाती है, पहाड़ी क्षेत्र से बॉक्साइट ले जाने के लिए मिट्टी मोरम की सड़क बनाती है लेकिन जो सड़क सरकार द्वारा लोगों की सुविधा के लिए बनाई है उसे भी बर्बाद करने में तुली हुई है। वहीं प्रदूषण रोकथाम के नाम पर सिर्फ एक टैंकर पानी सड़कों में पटा दिया जाता है जो दस वाहन गुजरने के बाद ही सूख जाती है। उन्होंने कहा कि जिन जनप्रतिनिधियों को जनता ने अपना बहुमूल्य मत देकर लोहरदगा के विकास व अपनी सुरक्षा के लिए जिताकर भेजा है, आज वही जनप्रतिनिधि हिंडाल्को के बहती गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। दलालों के भरोसे पूरे सिस्टम को हिंडाल्को चला रही है और अपना करोड़ों का बारे न्यारे कर रही है। Source link

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जिले की 14 में तीन एंबुलेंस खराब, सिर्फ पांच ही मरीजों को...

भास्कर न्यूज | लातेहार जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस की हालत दयनीय है। जिले में उपलब्ध 14 एंबुलेंसों में तीन पूरी तरह खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी है, जबकि शेष 11 में भी अधिकांश वाहनों की स्थिति दयनीय है। हालात यह हैं कि जिले में केवल पांच एंबुलेंस ही ऐसी बची हैं जिनसे गंभीर मरीजों को रिम्स या अन्य बड़े अस्पतालों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है। बाकी छह एंबुलेंसों का उपयोग केवल स्थानीय स्तर पर मरीजों को अस्पताल लाने-ले जाने के लिए किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कई एंबुलेंसों के टायर घिस चुके हैं, तो कई के गियर बॉक्स, ब्रेक और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जे खराब हैं। तकनीकी खामियों के बावजूद वाहनों का किसी तरह संचालन किया जा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। सदर अस्पताल की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यहां पांच 108 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से केवल एक एंबुलेंस ही रांची तक जाने योग्य है। बाकी चार एंबुलेंसों का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर किए जाने पर अस्पताल की अन्य एंबुलेंस या निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है, जिससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। कई प्रखंडों में एंबुलेंस की भारी कमी : जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी एंबुलेंस की भारी कमी देखने को मिल रही है। महुआडांड़ में दो एंबुलेंस हैं, जिनमें से एक लगभग पांच लाख किलोमीटर चलने के बाद पूरी तरह खराब हो चुकी है। बरवाडीह, मनिका और गारू में एक-एक एंबुलेंस संचालित है। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए मनिका की एक एंबुलेंस को चंदवा भेज दिया गया है। चंदवा में पहले से एक एंबुलेंस खराब पड़ी है, जबकि वर्तमान में दो एंबुलेंस सेवा में हैं। बालूमाथ में चार एंबुलेंस हैं, जिनमें दो रांची जाने योग्य हैं और दो स्थानीय सेवा में लगी हुई हैं। हेरहंज और बरियातू प्रखंड में फिलहाल एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि 108 नंबर पर कॉल करने के बाद भी समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती। कई बार कॉल रिस्पॉन्स में देरी होती है, जिससे दुर्घटना और गंभीर बीमारी के मामलों में मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। ^जिले में संचालित 14 में से तीन एंबुलेंस जर्जर अवस्था में है। जो रांची के मां अम्बे मोटर गैरेज में लगी है। 11 एम्बुलेंस चल रहे हैं। लेकिन पांच ही रांची भेजने लायक है। छह की स्थिति भी खराब है। जिसे इमरजेंसी केस में लोकल स्तर पर चलाया जा रहा है। ^ अमरोज अंसारी, एसीओ, लातेहार Source link

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साल में सिर्फ एक बार होता है पाताल बाबा का दर्शन! 300...

Last Updated:June 12, 2026, 19:39 IST भगवान शंकर के एक से बढ़कर एक भक्त हैं और इनकी महिमा की गाथाएं भी अपरंपार हैं. लोगों की भगवान शंकर में बड़ी आस्था है. भगवान शंकर को लोग मूर्ति और लिंग स्वरूप दोनों में पूजते हैं. देशभर में एक से बढ़कर एक शिवलिंग हैं और इनसे जुड़ी मान्यताएं और आस्थाएं हैं. आज हम आपको एक और रोचक शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पहुंचकर आप भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सकते हैं. देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथधाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ मनोकामना लिंग हैं यानी सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा यहां पूरी होती है. यही वजह है कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग बाबाधाम आकर जलार्पण और पूजा करते हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि बाबाधाम की यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक श्रद्धालु दुमका जिले में स्थित बासुकीनाथधाम जाकर भगवान शिव का दर्शन नहीं कर लेते. बाबाधाम से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित बासुकीनाथधाम को बाबा बैद्यनाथ का दरबार पूरा करने वाला धाम माना जाता है. यहां के पुरोहितों के अनुसार, जो भक्त बाबाधाम में पूजा करने के बाद बासुकीनाथ में भी जलार्पण करते हैं, उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. इसी कारण सावन हो या सामान्य दिन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु दोनों धामों का दर्शन करने पहुंचते हैं. बासुकीनाथ मंदिर की अपनी अलग धार्मिक महत्ता है और यहां की कई परंपराएं लोगों की आस्था से जुड़ी हुई हैं. बासुकीनाथधाम परिसर में एक पवित्र शिवगंगा तालाब भी स्थित है. मंदिर में पूजा करने से पहले श्रद्धालु इस तालाब में स्नान कर खुद को पवित्र मानते हैं. इसी शिवगंगा की गहराई में एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जिसे लोग श्रद्धा से पाताल बाबा के नाम से जानते हैं. यह शिवलिंग आम दिनों में पूरी तरह पानी के अंदर डूबा रहता है, इसलिए सालभर इसके दर्शन नहीं हो पाते. यही वजह है कि पाताल बाबा के दर्शन को बेहद दुर्लभ माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google हर वर्ष सावन शुरू होने से पहले ज्येष्ठ माह में एक विशेष परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान बासुकीनाथधाम के पुरोहित, स्थानीय ग्रामीण और प्रशासन के सहयोग से शिवगंगा तालाब का पानी निकाला जाता है तथा उसकी साफ-सफाई की जाती है. जब तालाब का जलस्तर कम होता है, तब वर्षों से जलमग्न पाताल बाबा के दर्शन श्रद्धालुओं को होते है. इस मौके का लोग पूरे साल इंतजार करते हैं. दूर-दूर से शिवभक्त केवल इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए बासुकीनाथ पहुंचते हैं. हाल ही में लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर पाताल बाबा के दर्शन होने पर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के पुजारियों ने षोडशोपचार विधि से भगवान शिव का विशेष पूजन कराया और भव्य श्रृंगार किया. सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालु शिवगंगा कुंड में उतरकर जलार्पण करते नजर आए. कई भक्तों ने कहा कि पता नहीं अगली बार ऐसा अवसर कब मिलेगा, इसलिए इस बार दर्शन और पूजा का विशेष महत्व है. कुंड के आसपास भक्ति, श्रद्धा और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. पाताल बाबा को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच एक बेहद रोचक मान्यता भी प्रचलित है. स्थानीय तीर्थपुरोहित लम्बोदर मिश्रा बताते है कि यह स्वयंभू शिवलिंग लगभग 300 वर्ष पहले प्रकट हुआ था. हैरानी की बात यह है कि वर्षों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद बाबा पर चढ़ाए गए बिल्वपत्र, फूल, अबीर और अन्य पूजन सामग्री पूरी तरह सुरक्षित दिखाई देती है. जब शिवगंगा का पानी निकाला जाता है और पाताल बाबा के दर्शन होते हैं, तो ऐसा लगता है मानो अभी-अभी उनका श्रृंगार किया गया हो. श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य कृपा और चमत्कार मानते हैं. यही कारण है कि बासुकीनाथ का पाताल बाबा आज करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है. Source link

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जिले में चल रही है तैयारी, लोग...

भास्कर न्यूज | सिमडेगा 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस अवसर पर भारत स्वाभिमान पतंजलि योगपीठ की ओर से योग प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए योग प्रशिक्षक भाग लेकर योग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की गई। साथ ही लोगों को योग के विशेष आसनों एवं उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देने पर जोर दिया गया। पतंजलि योग संघ एवं भारत स्वाभिमान पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी देवेंद्र सोनी ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी प्रशिक्षक अपने-अपने क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि जिलेभर में अधिक से अधिक लोगों को नियमित रूप से योग से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षकों ने योग से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। जलडेगा के करमपाल राम ने बताया कि वे जुलाई 2023 से नियमित योग कर रहे हैं। योग उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है, जिससे शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है। उन्होंने कहा कि योग शुरू करने के बाद से उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई है। सोनिया सिन्हा ने बताया कि पहले उन्हें शरीर में सूजन की समस्या रहती थी, लेकिन नियमित योग से यह परेशानी दूर हो गई। अब अधिक काम करने के बावजूद थकान महसूस नहीं होती। वहीं, कोलेबिरा के सौरभ बड़ाइक ने कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से योग कर रहे हैं और इस दौरान उन्हें केवल सामान्य सर्दी-जुकाम ही हुआ है। ठेठईटांगर के खुदीराम सिंह ने बताया कि योग अपनाने से उनके जोड़ों के दर्द सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में काफी राहत मिली है। इधर योग दिवस को सफल बनाने के लिए जिले में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। Source link

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रांची में 40 एमएम बारिश, सड़कें बनी तालाब, राज्य में ठनके से...

झारखंड में मानसून से पहले आंधी-बारिश ने तबाही मचाई। रांची सहित अधिकतर जिलों में गुरुवार दोपहर आंधी के साथ बारिश हुई। इससे दर्जनों पेड़ उखड़ गए। होर्डिंग्स और बैनर हवा में उड़ गए। बिजली कुल हो गई। इस दौरान ठनका गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में घाटशिला के फुलझरी निवासी धनु हेम्ब्रम (30), रामगढ़ के होन्हेटांड़ निवासी अर्जुन करमाली (18) और पोटका के हेंसलबील निवासी मुस्कान पान (22) शामिल हैं। ठनके की चपेट में आने से तीन लोग घायल हुए हैं, जबकि 10 मवेशियों की भी जान चली गई। रांची में दोपहर 1:40 बजे बारिश शुरू हुई, जो 3:40 बजे बंद हुई। इस दो घंटे में राजधानी मे सबसे अधिक 40 एमएम बारिश हुई। वहीं चाईबासा के जगन्नाथपुर में 15 एमएम और बहरागोड़ा में 10 एमएम बारिश हुई। रांची में बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव हो गया। आंधी में बेड़ो में छह गांव कोटपाली, तुतली, दिघिया, रोागडीह, पतराटोली और पाकलमेड़ी में करीब एक दर्जन घरों के छप्पर उड़ गए। तीन-चार दिन में मानसून की एंट्री संभव झारखंड में अगले तीन-चार दिन में मानसून की एंट्री हो सकती है। संथाल के रास्ते मानसून प्रवेश करेगा। इस दौरान अच्छी बारिश की संभावना है। अभी जो बारिश हो रही है, उसी का असर है। 15 जून से बारिश में कमी आएगी। लेकिन 24 घंटे के दौरान होने वाले बदलाव से स्पष्ट हो जाएगा कि मानसून कैसा रहेगा।। 18 जून तक सामान्य से कम, इसके बाद दूसरे सप्ताह से सामान्य बारिश होगी। दो दिन आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि झारखंड में मानसून की आहट शुरू हो गई है। गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश को प्री मानसून बारिश कह सकते हैं। अभी अगले दो दिन अच्छी बारिश के आसार है। फिलहाल एक सिस्टम भी एक्टिव है। दक्षिण पंजाब से दक्षिण बांग्लादेश की ओर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल के उपर से साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इस वजह से 12 और 13 जून को राज्य में बारिश होगी।- अभिषेक आनंद, मौसम वैज्ञानिक Source link

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बरसात में पशुओं के लिए बढ़ा खतरा, गलाघोटू से 24 घंटे में...

होमफोटोकृषि बरसात में पशुओं के लिए खतरा, गलाघोटू से 24 घंटे में मौत, जानें बचाव के उपाय Last Updated:June 12, 2026, 18:52 IST Animal husbandry: बरसात का मौसम किसानों और पशुपालकों के लिए राहत लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में पशुओं में कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है लगातार बारिश के कारण नमी, कीचड़, गंदगी और दूषित पानी से संक्रमण तेजी से फैलता है, जिससे पशु बीमार पड़ सकते हैं और कई मामलों में उनकी मौत भी हो सकती है. इससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. इस विषय पर बोकारो के चास पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने बरसात के दौरान पशुओं में होने वाली बीमारियों, उनके लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी. डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि मानसून के दौरान पशुओं की देखभाल सबसे ज्यादा जरूरी होती है. बारिश के समय कई प्रकार की नई घास उगती हैं, जिनमें कुछ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं. इसके अलावा कीचड़, गंदगी और खराब चारे में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं, जो पशुओं को बीमार बना सकते हैं और थोड़ी सी लापरवाही भी पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती हैं. उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में गलाघोटू सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है, इस बीमारी में पशु के शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है, और पशु के मुंह से लगातार लार बहने लगती है और पशु में खाने-पीने में परेशानी होती है और पशु के गले से घरघराहट जैसी आवाज भी आने लगती है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर 24 घंटे के भीतर पशु की मौत तक हो सकती है. इसलिए ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. इसके अलावा बरसात के दिन में खासकर गयों में लंगड़ा बुखार का खतरा भी बढ़ जाता है. इस बीमारी में पशु को तेज बुखार आता है और शरीर के प्रभावित हिस्सों में सूजन दिखाई देती है. सूजन वाले भाग को दबाने पर विशेष प्रकार की आवाज सुनाई देती है और बीमारी बढ़ने पर पशु पूरी तरह कमजोर हो जाता है. ऐसे में इसके रोकथाम के लिए संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से अलग रखना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google इसके अलावा खुरपका-मुंहपका रोग भी बरसात में पशुपालकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है. क्योंकि इस बीमारी के कारण पशु के मुंह और खुरों में छाले हो जाते हैं, जिससे वह खाना-पीना कम कर देता हैऔर इसका सबसे अधिक असर दूध उत्पादन पर पड़ता है और पशु धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है जिसमें कई मामलों में पशु गंभीर रूप से बीमार हो जाता है. ऐसे में आखिर में डॉक्टर अनिल ने बताया कि बरसात शुरू होते ही पशुपालकों को सतर्क रहें और बरसात से पहले पशु का टीकाकरण जरूर कराएं. इसके अलावा गौशाला को साफ और सुख रखें और आसपास के बारिश का पानी जमा न होने दें और पशुओं के खानपान में स्वच्छ खाना दें, ताकि हम अपने पशुधन की रक्षा कर सकें. Source link

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विक्षिप्त महिला ने फेंका था शहीद स्मारक पर कचरा

सिमडेगा| जिला मुख्यालय से सटे कोचेडेगा स्थित शहीद विजय सोरेंग स्मारक के चबूतरे पर बुधवार सुबह 7.30 बजे कचरा फेंके जाने की सूचना मिली। पुलिस ने तुरंत जांच की। जांच में सामने आया कि कचरा 60 वर्षीय विक्षिप्त महिला ने छोड़ा था। पुलिस के मुताबिक महिला सिमडेगा बस स्टैंड के आसपास घूमती रहती है। वह अपने साथ कचरा रखती है। जहां रुकती है, वहीं कचरा छोड़ देती है। स्मारक को नुकसान पहुंचाने का कोई तथ्य नहीं मिला। किसी असामाजिक मंशा का भी कोई प्रमाण नहीं मिला। पुलिस ने महिला को सुरक्षित बरामद किया। चिकित्सा सहायता दी। देखभाल की व्यवस्था कराई। एसपी के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई की गई। पुलिस ने लोगों से अपील की कि अफवाह फैलाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करें। किसी संदिग्ध घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें। Source link

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एसपी ने तीन थाना प्रभारियों को किया शोकॉज:लापरवाही पर मांगा स्पष्टीकरण, संतोषजनक...

गिरिडीह जिले में एसपी डॉ. विमल कुमार ने अपराध नियंत्रण, कांडों के अनुसंधान और लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने लापरवाही बरतने के आरोप में तीन थाना प्रभारियों को शोकॉज नोटिस जारी किया है। इनमें जमुआ थाना प्रभारी विभूति देव, सरिया थाना प्रभारी पिक्कू कुमार और तीसरी थाना प्रभारी शम्भूनाथ ईश्वर शामिल हैं। समीक्षा बैठक में इन थानों के कार्यों, मामलों के निष्पादन और अनुसंधान की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई। एसपी ने तीनों थाना प्रभारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। डॉ. विमल कुमार ने स्पष्ट किया है कि यदि दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं हुए, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने, अपराध नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने और अनुसंधान कार्यों में तेजी लाने का निर्देश भी दिया है। एसपी की इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में चर्चा का माहौल है। इस कदम को जिले में पुलिसिंग को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। Source link

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