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मिसिर बेसरा ने 40 साल पहले छोड़ा था गांव:भाई ने कहा- परिवार...

एक करोड़ रुपए के इनामी भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके बाद बुधवार को उसके पैतृक गांव गिरिडीह स्थित पीरटांड़ प्रखंड के हरलाडीह ओपी क्षेत्र में दिनभर चर्चा का माहौल रहा। गिरफ्तारी की खबर मिलने के बाद मीडिया गांव पहुंची और मिसिर बेसरा के परिजनों से बातचीत की।मिसिर बेसरा के छोटे भाई देवीलाल बेसरा पेशे से पारा शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि उनका भाई लगभग 40 साल पहले ही गांव छोड़ चुका था। इसके बाद से उसका परिवार से कोई संपर्क नहीं रहा। देवीलाल ने कहा कि उन्होंने कई वर्षों से मिसिर को देखा तक नहीं है और उन्हें गिरफ्तारी की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली। कुछ वर्ष पहले बेटी का हुआ था निधन देवीलाल ने बताया कि मिसिर बेसरा का एक बेटा है, जो दूसरे राज्य में काम करता है। उसकी एक बेटी थी, जिसका कुछ वर्ष पहले निधन हो गया। उन्होंने कहा कि मिसिर के नक्सली संगठन से जुड़े रहने के कारण पूरा परिवार वर्षों तक परेशान रहा। पुलिस समय-समय पर घर पहुंचती थी, पूछताछ करती थी और फरारी से संबंधित इश्तिहार चिपकाकर चली जाती थी। इससे परिवार को लगातार मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। मिसिर ने कभी परिवार की बात नहीं सुनी: भाई देवीलाल ने बताया कि परिवार की ओर से कई बार मिसिर से आत्मसमर्पण करने की अपील की गई थी। वे चाहते थे कि वह हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौट आए, लेकिन उसने कभी उनकी बात नहीं मानी। वहीं, मिसिर बेसरा के भतीजे सुशील कुमार बेसरा सीआरपीएफ में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने चाचा को कभी देखा ही नहीं। उनके बारे में केवल अपने पिता से ही सुना है। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से यही जानकारी थी कि उनके चाचा पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित है और वे माओवादी संगठन के बड़े नेता हैं। सुशील ने कहा कि उनका परिवार कानून का सम्मान करता है और वे स्वयं देश की सेवा में सीआरपीएफ में कार्यरत हैं। ग्रामीणों ने भी उसे दशकों से नहीं देखा था इधर, गांव के लोगों का कहना है कि मिसिर बेसरा के वर्षों पहले गांव छोड़ने के बाद उसका यहां आना-जाना लगभग समाप्त हो गया था। अधिकांश ग्रामीणों ने भी उसे दशकों से नहीं देखा था। हालांकि, उसके नाम के कारण गांव अक्सर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों का केंद्र बना रहता था। गौरतलब है कि सोमवार देर रात धनबाद-गिरिडीह सीमा स्थित मनियाडीह क्षेत्र में धनबाद पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने विशेष अभियान चलाकर मिसिर बेसरा सहित उसके पांच अन्य साथियों को गिरफ्तार किया। सुरक्षा एजेंसियां इस कार्रवाई को माओवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मान रही हैं। लंबे समय से फरार चल रहे मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को झारखंड में माओवादी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। अब सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर संगठन के नेटवर्क, गतिविधियों और अन्य सहयोगियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में लगी हैं। जानिए…कौन है मिसिर बेसरा गिरिडीह के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनडीह निवासी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल भाकपा माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य है। उस पर सरकार ने एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। उस पर हत्या, आईईडी ब्लास्ट, पुलिस पर हमला और आर्म्स एक्ट के 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। सारंडा, कोल्हान, पारसनाथ और ट्राइजंक्शन (झारखंड-ओ​डिशा-बंगाल) उसका मुख्य कार्य क्षेत्र था। 2003-04 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा में आईईडी ब्लास्ट की साजिश उसी ने रची थी, जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर से सशस्त्र नक्सलियों ने पुलिस पर हमला कर उसे छुड़ा लिया था, इसके बाद से ही वह फरार था। Source link

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कोडरमा में स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त, आधा दर्जन घायल:बेटी की शादी से लौट रहा...

कोडरमा जिले के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत रांची-पटना मुख्य मार्ग पर चाराडीह के पास बीती रात एक स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में वाहन में सवार करीब आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। ये सभी एक विवाह संबंधी कार्यक्रम से लौट रहे थे। जानकारी के अनुसार, कोडरमा थाना क्षेत्र के फुलवरिया निवासी फुलिया बिरहोर मंगलवार को अपनी पुत्री के विवाह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए परिवार के साथ स्कॉर्पियो से चतरा गए थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद देर रात वे अपने घर लौट रहे थे। वाहन अनियंत्रित होकर सड़क डिवाइडर से जा टकराया चाराडीह के पास अचानक उनकी स्कॉर्पियो का अगला पहिया निकल गया। इससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क डिवाइडर से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार सभी लोग घायल हो गए। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत कोडरमा पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सभी घायलों को सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। घायलों में 15 वर्षीय सविता बिरहोर (पिता देवेंद्र बिरहोर), 35 वर्षीय देवेंद्र बिरहोर (पिता रामवृक्ष बिरहोर), 20 वर्षीय मुनियता बिरहोरनी (पिता रामवृक्ष बिरहोर), 40 वर्षीय अनिता बिरहोरनी (पति ब्रह्मदेव बिरहोर) और 50 वर्षीय फुलिया बिरहोरनी शामिल हैं। सभी का सदर अस्पताल में उपचार चल रहा है। Source link

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रांची में दिखेगा डूरंड कप का रोमांच, 29 हजार दर्शक देख सकेंगे...

Last Updated:July 29, 2026, 10:16 IST Durand Cup 2026: फुटबॉल प्रेमियों के लिए झारखंड की राजधानी रांची से बड़ी खुशखबरी है. देश के सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप के मुकाबले के लिए जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पूरी तरह तैयार किया जा रहा है. खास बात यह है कि दर्शक बिना किसी शुल्क के इन रोमांचक मुकाबलों का आनंद ले सकेंगे. 29 हजार दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम में इंटरनेशनल स्तर की सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और शानदार उद्घाटन समारोह की तैयारी की जा रही है. रांची में डूरंड कप के आयोजन को लेकर खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. भारत के सबसे प्रतिष्ठित फुटबाल टूर्नामेंट डूरंड कप का 26 जुलाई से आगाज हुआ है, जिसका 16 अगस्त को मैच झारखंड की राजधानी रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में खेला जाना है. यहां फुटबाल का क्रेज़ अभी से ही देखा जा रहा है. सबसे खास बात यह है कि मैच पूरी तरह से नि:शुल्क होगा. यहां पास के लिए कोई पैसे नहीं देने होंगे और पूरे स्टेडियम को इंटरनेशनल लेवल पर सजाया जा रहा है. खेल निदेशक छवि रंजन ने इस मामले में प्रेस वार्ता कर कई अहम जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि 22 तारीख से ही फ्री एंट्री पास मिलना शुरू हो गया. इसके लिए 12 काउंटर बनाये जा चुके हैं. एक व्यक्ति को मैक्सिमम 4 पास मिलेगा. टिकट लेने के लिए पहचान पत्र साथ मिलना बेहद जरूरी है. स्टेडियम की क्षमता लगभग 29000 की है. ऐसे में एक साथ इतने सारे लोग बैठकर फुटबॉल मैच का लुफ्त उठा पाएंगे. ओपनिंग सेरेमनी के दौरान सीएम हेमंत सोरेन तो मौजूद होंगे ही. साथ ही, सेना की ओर से एयर शो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहेगा. कई तरह के करतब आसमान में लोगों को देखने को मिलेंगे. इसके अलावा स्टेडियम में 8000 सीटें केवल मीडिया पर्सन के लिए रिजर्व की गई हैं. वहीं, वीआईपी बॉक्स के आगे हाई क्वालिटी ग्लास लगाई गई है. स्टेडियम के बाहर साफ सफाई का काम काफी तेजी से जारी है. Add News18 as Preferred Source on Google इस संबंध में खेल निदेशक छवि रंजन ने बताया कि डूरंड कप के सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं. सुरक्षा, पार्किंग, टिकट वितरण, दर्शकों की सुविधा, चिकित्सा व्यवस्था और अन्य सभी जरूरी इंतजाम मुकम्मल कर लिए गए हैं. खेल प्रेमियों के बीच अच्छा खासा उत्साह देखा जा रहा है. टिकट लेने के लिए आए संदीप बताते हैं कि यहां व्यवस्था काफी सुचारू रूप से देखने को मिल रही है. क्योंकि 12 काउंटर हैं, इसलिए टिकट लेने में कोई परेशानी नहीं है. बड़ी आसानी से टिकट मिल रहा है. इतने प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का 6 मैच झारखंड को मिलना यह बहुत बड़ी बात है. यहां पर फुटबॉल प्रेमी बहुत हैं. हम चाहते हैं कि इस तरह का आयोजन आगे भी होता रहे. Source link

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रामगढ़ में युवक की सड़क किनारे मिली लाश:परिजनों ने पैसे के लेनदेन...

रामगढ़ थाना क्षेत्र के न्यू कॉलोनी बगीचा में बुधवार को एक युवक का शव सड़क किनारे मिला। इससे इलाके में हड़कंप मच गया। युवक के शरीर और गर्दन पर चाकू से गोदने के कई गहरे निशान पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में इसे हत्या का मामला माना जा रहा है। मृतक की पहचान झंडा चौक निवासी सुमित अग्रवाल के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों ने शव देखकर तत्काल रामगढ़ पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस मामले की हर बिंदु पर गहनता से जांच कर रही है। फिलहाल टेंपो चलाता था मृतक सुमित अग्रवाल पूर्व में नशे के इंजेक्शन बेचने के आरोप में जेल भी जा चुका था। उसके मामा आनंद अग्रवाल ने बताया कि सुमित फिलहाल टेंपो चलाने का काम करता था। सुमित की पत्नी मनीषा अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि मंगलवार की शाम करीब 6 बजे सुमित को किसी का फोन आया था। फोन करने वाले ने कहीं मारपीट होने की बात कहकर उसे तुरंत आने को कहा था। रात भर घर नहीं लौटा सुमित सुमित ने अपनी पत्नी से चाय बनाने को कहा और यह कहकर घर से निकला कि वह काम से जा रहा है और रात तक लौट आएगा। हालांकि, वह रात को घर नहीं लौटा। परिजनों ने रात भर सुमित की तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। सुबह परिजनों को सुमित की मौत की खबर मिली। सुमित की मां का कहना है कि उनके बेटे की हत्या पैसे के लेनदेन के चलते हुई होगी, क्योंकि उसे कई बार फोन पर पैसे के लिए धमकियां मिलती थीं। परिजनों के अनुसार, यह पूरा मामला पैसे के लेनदेन से जुड़ा है। तीन साल पहले हुई थी शादी सुमित अग्रवाल की शादी तीन साल पहले हुई थी और उसका एक छोटा बेटा भी है। घटना के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे न्याय की मांग कर रहे हैं। Source link

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गुरु पूर्णिमा पर बैद्यनाथ मंदिर में भक्तों की उमड़ी भीड़:'हर-हर महादेव' के...

गुरु पूर्णिमा के दिन बुधवार को बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की अहले सुबह से भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने कतार में लगकर बाबा का जलाभिषेक किया। आज अंतिम स्पर्श पूजा गुरुवार से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। ऐसे में बाबा बैद्यनाथ का स्पर्श पूजा एक माह तक के लिए आज रात 12 बजे से बंद हो जाएगा। बैद्यनाथ मंदिर में अरघा सिस्टम लागू हो जाएगा। इधर, आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही देश के विभिन्न राज्यों और स्थानीय क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु बाबा मंदिर में भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और स्पर्श दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु अरघा के माध्यम से ही जलार्पण कर सकेंगे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का एक मुख्य कारण यह भी है कि बुधवार को स्पर्श पूजा का अंतिम दिन है। 30 जुलाई से श्रावणी मेला शुरू होने के साथ ही मंदिर में अरघा व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके बाद पूरे सावन माह में श्रद्धालु अरघा के माध्यम से ही जलार्पण कर सकेंगे और स्पर्श पूजा स्थगित रहेगी। आज भगवान शिव और गुरु दोनों की कृपा प्राप्त होती है मंदिर के पंडा-पुजारियों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक और पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से भगवान शिव और गुरु दोनों की कृपा प्राप्त होती है। इसी आस्था के चलते मंदिर में देर शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और श्रद्धालुओं की अन्य सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। कल से शुरू होने वाले श्रावणी मेले में लाखों कांवरियों के आगमन के साथ बाबा नगरी पूरी तरह शिवमय हो जाएगी। वहीं, गुरु पूर्णिमा के मौके पर झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका सिंह पांडे ने भी बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने राज्य की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने यह भी बताया कि कल से सावन माह और विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू हो रहा है, जिसके लिए सरकार और जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। Source link

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बालों का प्राकृतिक डॉक्टर भी है गुड़हल! फूल और पत्तों से घर...

Last Updated:July 29, 2026, 09:54 IST Hair Care Tips: गुड़हल सिर्फ पूजा का फूल नहीं, बल्कि बालों का प्राकृतिक डॉक्टर भी है. इसके फूल और पत्तों से बना खास हेयर ऑयल बालों की कई समस्याओं को दूर कर सकता है. इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है. इसके नियमित इस्तेमाल से चमत्कारिक फायदे मिलते हैं. जानिए इसे बनाने का सही तरीका. ख़बरें फटाफट पलामूः भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है. जहां पेड़-पौधों से लेकर फूलों तक की पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इन्हीं में गुड़हल का फूल विशेष महत्व रखता है. लाल रंग का यह फूल देवी दुर्गा, मां काली और भगवान गणेश की पूजा में अर्पित किया जाता है. लेकिन धार्मिक महत्व के साथ-साथ गुड़हल आयुर्वेद में भी औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है. खासकर बरसात के मौसम में जब बाल झड़ने, रूसी और सिर की अन्य समस्याएं बढ़ जाती हैं, तब यह फूल प्राकृतिक उपचार के रूप में काफी लाभकारी साबित हो सकता है. पलामू जिले के आयुर्वेद के जानकर शिव कुमार पांडे ने लोकल18 को बताया कि गुड़हल के फूल और पत्तियों में ऐसे कई प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं, जो बालों की जड़ों को पोषण देने के साथ सिर की त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. नियमित और सही तरीके से इसका उपयोग करने पर बालों का झड़ना कम हो सकता है. साथ ही रूसी, जुओं की समस्या और स्कैल्प से जुड़ी कई परेशानियों में भी राहत मिल सकती है. गुड़हल से ऐसे बनाएं हेयर ऑयलउन्होंने आगे बताया कि घर पर आसानी से गुड़हल का हेयर ऑयल तैयार किया जा सकता है. इसके लिए 8 से 10 ताजे गुड़हल के फूल और 5 पत्तियों को अच्छी तरह धोकर पीस लें. इसके बाद इस पेस्ट को लगभग 10 मिलीलीटर नारियल तेल में मिलाकर हल्की आंच पर कुछ देर गर्म करें. मिश्रण ठंडा होने के बाद इसे छानकर कांच की बोतल में सुरक्षित रख लें. यह प्राकृतिक हेयर ऑयल तैयार हो जाएगा. आगे कहा कि इस तेल का सप्ताह में दो बार सिर की हल्के हाथों से मालिश करते हुए इस्तेमाल करना लाभकारी हो सकता है. इससे बालों की जड़ों को पोषण मिलता है, रक्त संचार बेहतर होता है और बाल मजबूत बनने लगते हैं. नियमित उपयोग से बाल लंबे, घने और चमकदार बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है. आयुर्वेद विशेषज्ञ से लें सलाह उन्होंने यह भी कहा कि गुड़हल की तासीर शीतल मानी जाती है. इसमें प्राकृतिक जीवाणुरोधी (एंटीबैक्टीरियल) और कीटाणुनाशक गुण पाए जाते हैं, जो सिर की त्वचा को संक्रमण से बचाने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि यदि किसी व्यक्ति को गंभीर स्कैल्प संक्रमण, एलर्जी या लगातार बाल झड़ने की समस्या हो, तो घरेलू नुस्खों के साथ किसी योग्य चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेना भी जरूरी है. आगे कहा कि बरसात के मौसम में महंगे हेयर प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहने के बजाय घर के आंगन में आसानी से मिलने वाला गुड़हल का फूल बालों की प्राकृतिक देखभाल का एक प्रभावी विकल्प बन सकता है.धार्मिक आस्था से जुड़ा यह फूल स्वास्थ्य और सौंदर्य, दोनों के लिए प्रकृति का अनमोल उपहार माना जाता है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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मिसिर का 17 साल का ‘अभेद्य' सारंडा-कोल्हान किला ढहा:जॉब के लिए नहीं...

1986 में प्राथमिक शिक्षक की नौकरी के लिए मांगे गए आठ हजार रुपए ‎की कथित रिश्वत नहीं दे पाने का गुस्सा मिसिर बेसरा को माओवादी संगठन तक ‎ले गया। करीब 40 साल बाद एक करोड़ रुपए का इनामी भाकपा‎(माओवादी) का पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर अब‎ पुलिस की गिरफ्त में है। कभी झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के ‎त्रि-सीमांत सारंडा और कोल्हान के जंगलों में जिस माओवादी का‎ प्रभाव था, उसका 17 साल पुराना अभेद्य गढ़ अब पूरी तरह ध्वस्त ‎हो चुका है।‎ सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर की गिरफ्तारी‎ सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा ‎झटका है। लंबे समय तक जिस क्षेत्र को संगठन का मजबूत गढ़‎ माना जाता था, वहां सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से‎ माओवादियों का प्रभाव लगातार कमजोर हुआ है।‎ तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा, जिसे भेदना आसान नहीं था‎ मिसिर बेसरा सिर्फ एक माओवादी नेता ‎नहीं, बल्कि संगठन के सबसे सुरक्षित ‎ठिकानों में से एक का प्रमुख संचालक ‎माना जाता था। उसकी सुरक्षा के लिए ‎तीन-स्तरीय सुरक्षा चक्र बनाया गया था।‎ बाहरी घेरा (आउटर रिंग) : कोल्हान और ‎सारंडा के प्रवेश मार्गों पर अत्याधुनिक‎ हथियारों से लैस जन-मिलिशिया और ‎सेंट्री पोस्ट तैनात रहते थे। रास्तों को ‎आईईडी और स्पाइक होल्स से सुरक्षित‎ किया गया था।‎ मध्य घेरा (मिडिल रिंग) : ”अनल मांझी” ‎और ”अनमोल” जैसे दुर्दांत कमांडरों के‎ दस्ते हर गतिविधि पर नजर रखते थे और ‎किसी भी हलचल पर सुरक्षा बलों का ‎मुकाबला करते थे।‎ भीतरी घेरा (इनर रिंग) : 10-12 चुनिंदा ‎प्रशिक्षित बॉडीगार्ड 24 घंटे ऑटोमैटिक‎ हथियारों के साथ 100 मीटर के दायरे में ‎उसकी सुरक्षा में तैनात रहते थे।‎ रणनीति बदलकर पुलिस ने कमजोर किया ‎सुरक्षा कवच सुरक्षा बलों ने सीधे टकराव के बजाय पिछले दो वर्षों में ‎ऑपरेशन मेगाहातुबुरु और ऑपरेशन कोल्हान के तहत ‎मिसिर बेसरा के बाहरी रसद नेटवर्क, आईईडी तंत्र और ‎सुरक्षा घेरे को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया। धीरे-धीरे‎ उसकी सुरक्षा ढाल टूटती चली गई और संगठन का प्रभाव ‎भी घटने लगा।‎ 2007 में गिरफ्तारी, 2009 में पुलिस हिरासत से‎ दुस्साहसिक फरारी मिसिर बेसरा का आपराधिक ‎इतिहास कई चर्चित घटनाओं से जुड़ा रहा है। 2007:‎झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों ने एक गुप्त अभियान में ‎उसे पहली बार गिरफ्तार किया। 23 जून 2009:‎चाईबासा कोर्ट में पेशी के दौरान माओवादी दस्ते ने पुलिस‎ वाहन पर हमला कर ताबड़तोड़ फायरिंग की और उसे‎ पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया। ‎इस फरारी के बाद उसने‎ सारंडा और कोल्हान के जंगलों को अपना स्थायी ठिकाना ‎बना लिया और लंबे समय तक संगठन की गतिविधियों ‎का संचालन करता रहा।‎ पीरटांड़ के मदनडीह निवासी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर भाकपा माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य है। उस पर हत्या, आईईडी ब्लास्ट, पुलिस पर हमला और आर्म्स एक्ट के 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। सारंडा, कोल्हान, पारसनाथ और ट्राइजंक्शन (झारखंड-ओ​डिशा-बंगाल) उसका मुख्य कार्यक्षेत्र था। 2003-04 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा में आईईडी ब्लास्ट की साजिश उसी ने रची थी, जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर से सशस्त्र नक्सलियों ने पुलिस पर हमला कर उसे छुड़ा लिया था, इसके बाद से ही वह फरार था। बॉडीगार्ड्स ने छोड़ा साथ,‎ कैडर भी हो गए थे अलग‎ पिछले कुछ महीनों में संगठन के‎ भीतर कई बड़े बदलाव हुए।‎ शीर्ष कमांडर अनल मांझी के‎ मारे जाने के बाद मिसिर बेसरा‎ का सुरक्षा तंत्र कमजोर पड़ गया। ‎लगातार पुलिस कैंप स्थापित ‎होने और रसद आपूर्ति बाधित ‎होने से उसके दस्ते के 16 से ‎18 माओवादी कैडरों ने ‎आत्मसमर्पण कर दिया।‎ संसाधन घटने और गिरफ्तारी के ‎बढ़ते खतरे के कारण उसके कई‎ बॉडीगार्ड भी संगठन छोड़कर ‎भाग निकले। अलग-थलग पड़‎ चुके मिसिर बेसरा को‎ आखिरकार झारखंड पुलिस और ‎सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने‎ गिरफ्तार कर लिया।‎ Source link

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विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन, अनीता पूर्ति अध्यक्ष व पिंकी बागे उपाध्यक्ष...

भास्कर न्यूज | चाईबासा उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टेकासाई (चाईबासा) में प्रधानाध्यापिका की अध्यक्षता में विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य विद्यालय में सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना, विकेंद्रीकृत व्यवस्था को मजबूत करना तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। बैठक में विद्यालय में नामांकित छात्र-छात्राओं के माता-पिता, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया। इस दौरान विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत विद्यालय प्रबंधन समिति के कार्यों और दायित्वों की विस्तार से जानकारी दी गई। इसके बाद, समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई और उपस्थित अभिभावकों में से सदस्यों का सर्वसम्मति से चयन किया गया। नयी विद्यालय प्रबंधन समिति में कुल 20 सदस्यों का चयन किया गया है, जिनमें अनीता पुरती को अध्यक्ष तथा पिंकी बागे को उपाध्यक्ष चुना गया है। इसके अलावा, संध्या लालिमा होरो को संयोजक, कविता गागराई एवं राजा राय को शिक्षक प्रतिनिधि, लक्ष्मी पाड़ेया को वार्ड सदस्य तथा मेजनवती पुरती को आंगनबाड़ी सेविका के रूप में शामिल किया गया है। समिति के अन्य चयनित सदस्यों में सोनामुनी लोहार, जोंगा पाड़ेया, राजेश बिरुली, बामिया सिंकु, सोमबारी बिरुली, समिता हेम्ब्रम, शुरू पुरती, प्यारी हेम्ब्रम, सावित्री हेम्ब्रम, मंजू बिरुली, मंजुरा करोवा, रजनी व रामाय शामिल हैं। प्रधानाध्यापिका ने सभी नवचयनित पदाधिकारियों और सदस्यों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए उनके कार्यों और दायित्वों से अवगत कराया। बैठक को सफल बनाने में समिति के सदस्यों के साथ अन्य अभिभावकों, बाल संसद के सदस्यों और शिक्षकों का योगदान रहा। Source link

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सावन की शॉपिंग के लिए बेस्ट है रांची की ये मार्केट, हरी...

Last Updated:July 29, 2026, 08:46 IST Ranchi Sawan Shopping: सावन की शॉपिंग करनी है और एक ही जगह पर हर तरह का सामान लेना चाहती हैं तो रांची की रंगरेज गली आ सकती हैं. यहां साड़ी, बिंदी चूड़ी, जूती, ज्यूलरी जो कुछ भी आपको चाहिए सब मिलेगा. छोटी सी जगह पर आसपास ही दुकानें हैं. इनका कलेक्शन बहुत अच्छा है और कीमत ऐसी की हर बजट में फिट होती है. झारखंड की राजधानी रांची में कुछ मार्केट ऐसी हैं जहां पर आप खासतौर पर सावन की शॉपिंग एक छत के नीचे कर सकते हैं. अलग-अलग सामान के लिए आपको अलग-अलग बाजारों में नहीं जाना होगा. इस कड़ी में सबसे ऊपर नाम आता है रंगरेज़ गली का. परिसर में घुसते ही आपको दो-तीन कॉम्प्लेक्स देखने को मिलेंगे और लाइन से कम से कम 40 से 50 दुकानें मिल जाएंगी. यहां की खास बात यह है कि आपको हरी चूड़ियां, साड़ी के अलावा हरी जूती, नेकलेस इन सबकी काफी वैरायटी देखने को मिलेगी. हरे रंग में आपको जो भी चीज चाहिए वो सब यहां मिल जाएगी, वह भी बहुत कम दाम में. मात्र ₹100 से किसी भी आइटम की रेंज शुरू हो जाती है. साड़ी यहां पर 300 से शुरू हो जाएगी और चूड़ी ₹50 व जूती ₹100 में मिल जाएगी. लेडीज बैंगल शॉप के संचालक आशीष बताते हैं, यहां पर खास तौर पर आपको चूड़ियों के जबरदस्त कलेक्शन देखने को मिलेगा. कांच की चूड़ियां चाहिए या लाह की या फिर मेटल वाली चाहिए, जैसी वैरायटी चाहेंगे मिलेगी. इसमें गोल्डन कलर, कस्टमाइज चूड़ी, लटकन चूड़ी, घुंघरू चूड़ी इस तरीके का यूनिक कलेक्शन यहां पर आपको देखने को मिलेगा. आपकी साड़ी के हिसाब से चूड़ियों को सेट भी कर दिया जाएगा. Add News18 as Preferred Source on Google इतना ही नहीं यहां पर आपके हरी साड़ी से मैचिंग की जूती भी मिलेंगी. आशीष बताते हैं हमारे पास एक ही छत के नीचे जूती के भी कलेक्शन हैं. अगर ग्रीन और सिल्वर कलर में साड़ी है तो इस पर सिल्वर कलर की जूती ज्यादा अच्छी लगेगी. हम इस तरीके से मैचिंग करके देते हैं. जूती की कीमत ₹250 से शुरू हो जाती है. वहीं, आपको बगल में कई सारी छोटी-छोटी ज्वेलरी की दुकानें देखने को मिलेंगी. एक ज्वेलरी दुकान के संचालक रमेश बताते हैं, आपके यहां पर एडी स्टोन, कुंदन सेट जैसी चाहेंगे वैसी ज्वेलरी मिलेगी. इन सारी ज्वेलरी की कीमत ₹100 से शुरू हो जाती है. 200- 300 रुपए की रेंज में तो आपको हरे कलर का काफी अच्छा कलेक्शन मिल जाएगा. इसके अलावा अगर आपको हरे कलर की बिंदी चाहिए या नेल पॉलिश चाहिए तो वो भी यहां पर मिलेगी. सब कुछ यहां 100 मीटर के अंदर ही खरीदा जा सकता है. ऐसे में इस सावन अपर बाजार की रंगरेज गली आना ना भूलें. सावन में यहां पर पैर रखने की जगह नहीं होती. महिला और लड़कियों की खचाखच भीड़ होती है, इसिलए कोशिश करे कि दोपहर में आएं. Source link

झारखंड

कई जगह फाल्ट होने से लोहरदगा में 12 से 14 घंटे ही...

भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिले में बिजली आपूर्ति व्यवस्था इन दिनों बारिश और तेज हवाओं के बीच संकट से गुजर रही है। शहरी क्षेत्र में तो फिर भी कुछ हद तक स्थिति ठीक है परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। लगातार ट्रिपिंग, बार-बार बिजली कटौती और लोकल फॉल्ट के नाम पर आपूर्ति बाधित रहने से आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है जिला को जितनी बिजली चाहिए उतनी मिल नहीं रही है। परंतु जगह-जगह पर फॉल्ट होने के कारण बिजली घंटों बाधित हो रही है। खासकर जिलेभर में बिछाए गए तारों में से कई जगहों पर अभी जर्जर तार निर्बाध विद्युत आपूर्ति में बाधा उत्पन्न कर रहा है। बीते एक दर्जन से अधिक बैठकों में जगह-जगह पर उलझी वह जर्जर तारों को बदलने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किया जाता है। बावजूद इस दिशा में कार्य होने के बाद भी इससे पूर्ण रूप से छुटकारा जिलेवासियों को नहीं मिल पा रहा है। इधर बारिश के बीच बिजली व्यवस्था की बदहाली लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होने के साथ ही बिजली आपूर्ति की स्थिति और खराब हो गई है। पूरे शहर में लगातार 24 घंटे में 12 से 14 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। खासकर रात में फॉल्ट की बात कहते हुए आपूर्ति ज्यादा बाधित रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि के समय विद्युत आपूर्ति सही से नहीं मिल पाने के कारण कई बार अंधेरे से कई प्रकार के परेशानियां भी बढ़ जाती है। जिले के पेशरार प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत केकरांग गांव में बिछाए गए 11 हजार वोल्ट के बिजली के तार जर्जर हो गए हैं जिसे बदलने को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा मांग भी की गई है। बावजूद जिस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। इधर शहर के विभिन्न मोहल्लों में पिछले कुछ दिनों से फेज उड़ने व फॉल्ट की समस्या लगातार बढ़ी है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल होती नहीं दिख रही है। सबसे अधिक दिक्कत बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को हो रही है। रात के समय बिजली कटने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। मामले पर विभाग के सहायक विद्युत अभियंता अज्जू कच्छप ने बताया कि समय-समय पर मेंटेनेंस का कार्य किया जाता है। इसके अलावा हर एक कर्मियों की कार्य क्षेत्र बंटी है। इसी प्रकार के बाधा उत्पन्न होने पर उसके तुरंत निराकरण करने की कोशिश जारी रहती है। उन्होंने कहा कि लोहरदगा नगर क्षेत्र में ऑफिस ग्रिड से सप्लाई की जाती है, जिसमें ज्यादा परेशानी नहीं आती है। परंतु शंख नदी पिकेट के समक्ष बनी पावर ग्रिड से की गई सप्लाई में 33 केवीए में ज्यादा परेशानी बारिश के दौरान पेड़, डाल गिरने या फिर तेज हवा से आपस में तार सटने से सामने आती है, हालांकि इसका समाधान भी तुरंत कराया जाता है। Source link

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