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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जिले में चल रही है तैयारी, लोग...

भास्कर न्यूज | सिमडेगा 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस अवसर पर भारत स्वाभिमान पतंजलि योगपीठ की ओर से योग प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए योग प्रशिक्षक भाग लेकर योग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की गई। साथ ही लोगों को योग के विशेष आसनों एवं उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देने पर जोर दिया गया। पतंजलि योग संघ एवं भारत स्वाभिमान पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी देवेंद्र सोनी ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी प्रशिक्षक अपने-अपने क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि जिलेभर में अधिक से अधिक लोगों को नियमित रूप से योग से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षकों ने योग से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। जलडेगा के करमपाल राम ने बताया कि वे जुलाई 2023 से नियमित योग कर रहे हैं। योग उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है, जिससे शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है। उन्होंने कहा कि योग शुरू करने के बाद से उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई है। सोनिया सिन्हा ने बताया कि पहले उन्हें शरीर में सूजन की समस्या रहती थी, लेकिन नियमित योग से यह परेशानी दूर हो गई। अब अधिक काम करने के बावजूद थकान महसूस नहीं होती। वहीं, कोलेबिरा के सौरभ बड़ाइक ने कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से योग कर रहे हैं और इस दौरान उन्हें केवल सामान्य सर्दी-जुकाम ही हुआ है। ठेठईटांगर के खुदीराम सिंह ने बताया कि योग अपनाने से उनके जोड़ों के दर्द सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में काफी राहत मिली है। इधर योग दिवस को सफल बनाने के लिए जिले में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। Source link

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रांची में 40 एमएम बारिश, सड़कें बनी तालाब, राज्य में ठनके से...

झारखंड में मानसून से पहले आंधी-बारिश ने तबाही मचाई। रांची सहित अधिकतर जिलों में गुरुवार दोपहर आंधी के साथ बारिश हुई। इससे दर्जनों पेड़ उखड़ गए। होर्डिंग्स और बैनर हवा में उड़ गए। बिजली कुल हो गई। इस दौरान ठनका गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में घाटशिला के फुलझरी निवासी धनु हेम्ब्रम (30), रामगढ़ के होन्हेटांड़ निवासी अर्जुन करमाली (18) और पोटका के हेंसलबील निवासी मुस्कान पान (22) शामिल हैं। ठनके की चपेट में आने से तीन लोग घायल हुए हैं, जबकि 10 मवेशियों की भी जान चली गई। रांची में दोपहर 1:40 बजे बारिश शुरू हुई, जो 3:40 बजे बंद हुई। इस दो घंटे में राजधानी मे सबसे अधिक 40 एमएम बारिश हुई। वहीं चाईबासा के जगन्नाथपुर में 15 एमएम और बहरागोड़ा में 10 एमएम बारिश हुई। रांची में बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव हो गया। आंधी में बेड़ो में छह गांव कोटपाली, तुतली, दिघिया, रोागडीह, पतराटोली और पाकलमेड़ी में करीब एक दर्जन घरों के छप्पर उड़ गए। तीन-चार दिन में मानसून की एंट्री संभव झारखंड में अगले तीन-चार दिन में मानसून की एंट्री हो सकती है। संथाल के रास्ते मानसून प्रवेश करेगा। इस दौरान अच्छी बारिश की संभावना है। अभी जो बारिश हो रही है, उसी का असर है। 15 जून से बारिश में कमी आएगी। लेकिन 24 घंटे के दौरान होने वाले बदलाव से स्पष्ट हो जाएगा कि मानसून कैसा रहेगा।। 18 जून तक सामान्य से कम, इसके बाद दूसरे सप्ताह से सामान्य बारिश होगी। दो दिन आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि झारखंड में मानसून की आहट शुरू हो गई है। गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश को प्री मानसून बारिश कह सकते हैं। अभी अगले दो दिन अच्छी बारिश के आसार है। फिलहाल एक सिस्टम भी एक्टिव है। दक्षिण पंजाब से दक्षिण बांग्लादेश की ओर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल के उपर से साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इस वजह से 12 और 13 जून को राज्य में बारिश होगी।- अभिषेक आनंद, मौसम वैज्ञानिक Source link

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बरसात में पशुओं के लिए बढ़ा खतरा, गलाघोटू से 24 घंटे में...

होमफोटोकृषि बरसात में पशुओं के लिए खतरा, गलाघोटू से 24 घंटे में मौत, जानें बचाव के उपाय Last Updated:June 12, 2026, 18:52 IST Animal husbandry: बरसात का मौसम किसानों और पशुपालकों के लिए राहत लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में पशुओं में कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है लगातार बारिश के कारण नमी, कीचड़, गंदगी और दूषित पानी से संक्रमण तेजी से फैलता है, जिससे पशु बीमार पड़ सकते हैं और कई मामलों में उनकी मौत भी हो सकती है. इससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. इस विषय पर बोकारो के चास पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने बरसात के दौरान पशुओं में होने वाली बीमारियों, उनके लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी. डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि मानसून के दौरान पशुओं की देखभाल सबसे ज्यादा जरूरी होती है. बारिश के समय कई प्रकार की नई घास उगती हैं, जिनमें कुछ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं. इसके अलावा कीचड़, गंदगी और खराब चारे में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं, जो पशुओं को बीमार बना सकते हैं और थोड़ी सी लापरवाही भी पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती हैं. उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में गलाघोटू सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है, इस बीमारी में पशु के शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है, और पशु के मुंह से लगातार लार बहने लगती है और पशु में खाने-पीने में परेशानी होती है और पशु के गले से घरघराहट जैसी आवाज भी आने लगती है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर 24 घंटे के भीतर पशु की मौत तक हो सकती है. इसलिए ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. इसके अलावा बरसात के दिन में खासकर गयों में लंगड़ा बुखार का खतरा भी बढ़ जाता है. इस बीमारी में पशु को तेज बुखार आता है और शरीर के प्रभावित हिस्सों में सूजन दिखाई देती है. सूजन वाले भाग को दबाने पर विशेष प्रकार की आवाज सुनाई देती है और बीमारी बढ़ने पर पशु पूरी तरह कमजोर हो जाता है. ऐसे में इसके रोकथाम के लिए संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से अलग रखना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google इसके अलावा खुरपका-मुंहपका रोग भी बरसात में पशुपालकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है. क्योंकि इस बीमारी के कारण पशु के मुंह और खुरों में छाले हो जाते हैं, जिससे वह खाना-पीना कम कर देता हैऔर इसका सबसे अधिक असर दूध उत्पादन पर पड़ता है और पशु धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है जिसमें कई मामलों में पशु गंभीर रूप से बीमार हो जाता है. ऐसे में आखिर में डॉक्टर अनिल ने बताया कि बरसात शुरू होते ही पशुपालकों को सतर्क रहें और बरसात से पहले पशु का टीकाकरण जरूर कराएं. इसके अलावा गौशाला को साफ और सुख रखें और आसपास के बारिश का पानी जमा न होने दें और पशुओं के खानपान में स्वच्छ खाना दें, ताकि हम अपने पशुधन की रक्षा कर सकें. Source link

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विक्षिप्त महिला ने फेंका था शहीद स्मारक पर कचरा

सिमडेगा| जिला मुख्यालय से सटे कोचेडेगा स्थित शहीद विजय सोरेंग स्मारक के चबूतरे पर बुधवार सुबह 7.30 बजे कचरा फेंके जाने की सूचना मिली। पुलिस ने तुरंत जांच की। जांच में सामने आया कि कचरा 60 वर्षीय विक्षिप्त महिला ने छोड़ा था। पुलिस के मुताबिक महिला सिमडेगा बस स्टैंड के आसपास घूमती रहती है। वह अपने साथ कचरा रखती है। जहां रुकती है, वहीं कचरा छोड़ देती है। स्मारक को नुकसान पहुंचाने का कोई तथ्य नहीं मिला। किसी असामाजिक मंशा का भी कोई प्रमाण नहीं मिला। पुलिस ने महिला को सुरक्षित बरामद किया। चिकित्सा सहायता दी। देखभाल की व्यवस्था कराई। एसपी के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई की गई। पुलिस ने लोगों से अपील की कि अफवाह फैलाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करें। किसी संदिग्ध घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें। Source link

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एसपी ने तीन थाना प्रभारियों को किया शोकॉज:लापरवाही पर मांगा स्पष्टीकरण, संतोषजनक...

गिरिडीह जिले में एसपी डॉ. विमल कुमार ने अपराध नियंत्रण, कांडों के अनुसंधान और लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने लापरवाही बरतने के आरोप में तीन थाना प्रभारियों को शोकॉज नोटिस जारी किया है। इनमें जमुआ थाना प्रभारी विभूति देव, सरिया थाना प्रभारी पिक्कू कुमार और तीसरी थाना प्रभारी शम्भूनाथ ईश्वर शामिल हैं। समीक्षा बैठक में इन थानों के कार्यों, मामलों के निष्पादन और अनुसंधान की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई। एसपी ने तीनों थाना प्रभारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। डॉ. विमल कुमार ने स्पष्ट किया है कि यदि दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं हुए, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने, अपराध नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने और अनुसंधान कार्यों में तेजी लाने का निर्देश भी दिया है। एसपी की इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में चर्चा का माहौल है। इस कदम को जिले में पुलिसिंग को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। Source link

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झारखंड का बारनी घाट जहां देवताओं ने किया था विश्राम! पत्थरों पर...

Last Updated:June 12, 2026, 17:43 IST बारनी घाट की सबसे खास पहचान यहां की विशाल प्राकृतिक चट्टानों पर बने धार्मिक प्रतीक और आकृतियां हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इन चट्टानों पर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की आकृतियां उकेरी गई हैं. इसके अलावा यहां शंख और चरण पादुका जैसे कई धार्मिक चिन्ह भी दिखाई देते हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आकर्षण और जिज्ञासा का केंद्र बने हुए हैं. बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले के चास प्रखंड स्थित कुमरी गांव में दामोदर नदी के किनारे बसा बारनी घाट, जिसे स्थानीय लोग बारुनी घाट के नाम से भी जानते हैं, आस्था, इतिहास और लोकमान्यताओं का एक अनोखा केंद्र है. प्राकृतिक चट्टानों पर बने रहस्यमयी चिन्ह, देवी-देवताओं की आकृतियां और एक ही स्थान पर मौजूद कई शिवलिंग इस स्थल को खास पहचान देते हैं. यही वजह है कि यह घाट श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. विशाल चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियांबारनी घाट की सबसे बड़ी विशेषता यहां की विशाल चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियां हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इनमें भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की छवियां दिखाई देती हैं. इसके अलावा चट्टानों पर शंख, चरण पादुका और अन्य धार्मिक प्रतीकों जैसे कई निशान भी मौजूद हैं, जो लोगों के बीच जिज्ञासा और श्रद्धा का विषय बने हुए हैं. धार्मिक चिन्ह कई पीढ़ियों से मौजूदकुमरी गांव निवासी अतुल महतो बताते हैं कि घाट पर मौजूद स्वयंभू शिवलिंग और प्राचीन धार्मिक चिन्ह कई पीढ़ियों से यहां मौजूद हैं. गांव के बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार इस स्थल का धार्मिक महत्व बहुत पुराना है. हर वर्ष चैती महीने में यहां भव्य बारनी मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें बोकारो सहित आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. देवताओं ने इस स्थान पर विश्राम किया थास्थानीय ग्रामीण विशाल राय के अनुसार बारनी घाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोककथाओं और प्राचीन मान्यताओं का भी केंद्र है. स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि किसी प्राचीन काल में देवी-देवताओं ने इस स्थान पर विश्राम किया था. उसी दौरान उनके चरणों के निशान चट्टानों पर अंकित हो गए, जिन्हें आज भी श्रद्धालु चरण पादुका के रूप में पूजते हैं. वहीं एक ही स्थान पर कई शिवलिंगों की मौजूदगी इस घाट को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है. श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्रघाट परिसर में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां प्रतिदिन विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बारनी घाट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु और पर्यटक सड़क मार्ग के जरिए कुमरी गांव पहुंच सकते हैं. प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और रहस्यमयी प्रतीकों से भरपूर यह स्थल बोकारो के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bokaro,Jharkhand Source link

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अवैध जमीन पर कैसे हुआ नक्शा पास, किन-किन लोगों की होती है...

रिम्स की बहुमूल्य जमीन पर अतिक्रमण और अवैध खरीद-बिक्री के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जांच को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में एसीबी ने रांची नगर निगम के कंप्यूटर ऑपरेटर रमन कुमार से लंबी पूछताछ की है। पूछताछ का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि रिम्स की जमीन पर बने फ्लैट और मकानों के नक्शे आखिर किन परिस्थितियों में पास किए गए। एसीबी सूत्रों के अनुसार, ऑपरेटर से यह जानने की कोशिश की कि नक्शा पास करने की इस पूरी प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका होती है और किस स्तर पर संभावित गड़बड़ी हो सकती है। ऑपरेटर ने एजेंसी के सवालों का जवाब दिया है, जिसे अब एसीबी अन्य साक्ष्यों से मिलान कर रही है। रिम्स जमीन मामले में एसीबी अब केवल अवैध खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। अब आगे क्या: अधिकारियों पर भी कस रहा शिकंजा जांच के अगले चरण में एसीबी अब उन अधिकारियों और कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी में है, जो नक्शा पास करने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। सूत्रों के मुताबिक, नक्शा पास करने वाले अधिकारियों व कर्मियों को नोटिस भेजा जा रहा है, ताकि उनसे यह स्पष्ट किया जा सके कि विवादित जमीन पर निर्माण की अनुमति किन आधारों पर दी गई। Source link

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बालू कारोबारियों ने एक ही दिन में 100 सीएफटी पर 1000 रुपए...

रांची सहित राज्य भर में नदियों से बालू उत्खनन पर एनजीटी की रोक लग गई है। ऐसे में मानसून के दौरान 15 अक्टूबर तक राज्य भर में बालू का उत्खनन बंद रहेगा। नदियों से बालू नहीं निकलने पर रांची में बालू की किल्लत शुरू हो गई है। एक ही दिन में कारोबारियों ने 100 सीएफटी बालू की कीमत में 500 से 1000 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है। बालू पर पुलिस-प्रशासन की सख्ती का हवाला देकर महंगा बालू बेचा जा रहा है। इसपर फिलहाल पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इधर, बालू की किल्लत को देखते हुए जिला प्रशासन जब्त बालू को नीलाम करेगा। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में करीब 1.30 लाख सीएफटी बालू जब्त करके रखा गया है। जब्त बालू की नीलामी 19 जून को दोपहर 3:00 बजे होगी। समाहरणालय में अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में जब्त बालू के लिए बोली लगाई जाएगी। पुंदाग में सबसे अधिक बालू जब्त पुंदाग थाना क्षेत्र और टोनको में सबसे अधिक बालू के स्टॉकिस्ट है जो अवैध बालू की खरीद-परोख्त करते हैं। इसलिए डीएमओ ने पुंदाग में सबसे अधिक बालू का स्टॉक जब्त किया है। इसमें पुंदाग ओपी के पीछे मौर्य एलिट के पास 3000 सीएफटी, पुंदाग ओपी क्षेत्र अंतर्गत टेंगरूढीपा गांव में देवी स्थल के पास 45000 सीएफटी, बेड़ो थाना अंतर्गत घाघरा पंचायत के डुमरदोन बस्ती में 15000 सीएफटी, एचईसी फर्टिलाइजर सुनील कोचिंग सेंटर के पास 20000 सीएफटी, एयरपोर्ट थाना अंतर्गत टोनको स्थित एचईसी की खाली जमीन पर 35000 सीएफटी, टोनको में मंडे उरांव के खाली जमीन पर 10000 सीएफटी, बुंडू अंचल अंतर्गत कांची नदी के पास 35000 सीएफटी बालू का स्टॉक जब्त करके रखा गया है। अब जब्त बालू की नीलामी होगी। Source link

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इस फूल की खेती ने बदल दी कोडरमा के किसान की किस्मत,...

होमताजा खबरकृषि इस फूल की खेती ने बदल दी कोडरमा के किसान की किस्मत, अब कमा रहे 30 हजार महीना Last Updated:June 12, 2026, 17:04 IST कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड के किसान सुमन मेहता ने आधुनिक खेती अपनाकर नई मिसाल पेश की है. उन्होंने 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में ग्रीन नेट हाउस बनाकर जरबेरा फूलों की खेती शुरू की है. जिला उद्यान विभाग की सहायता और विशेष प्रशिक्षण के बाद वे हर सप्ताह करीब 1500 फूलों का उत्पादन कर रहे हैं. फूलों की बिक्री से उन्हें हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है. कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपना रहे हैं. जहां पहले ज्यादातर किसान धान, गेहूं और मौसमी सब्जियों की खेती पर निर्भर थे, वहीं अब कुछ किसान नई और लाभकारी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं. इसी कड़ी में डोमचांच प्रखंड के किसान सुमन मेहता ने अपने गांव में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर जरबेरा फूल की खेती शुरू कर एक नई पहचान बनाई है. आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर वे आज हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं. जरबेरा फूल की खेतीसुमन मेहता बताते हैं कि उन्हें जिला उद्यान विभाग के माध्यम से जरबेरा फूल की खेती के लिए प्रेरित किया गया. विभाग के उद्यान मित्र ने उन्हें इस खेती से होने वाले लाभ और इसकी संभावनाओं के बारे में जानकारी दी. इसके बाद उन्होंने इस दिशा में काम करने का फैसला किया. खेती शुरू करने से पहले उन्होंने रांची में छह दिनों का विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया, जहां उन्हें फूलों की खेती, पौधों की देखभाल, उत्पादन बढ़ाने के तरीके और आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई. आधुनिक तरीके से खेत का विकासप्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने खेत को आधुनिक तरीके से विकसित किया. करीब 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में ग्रीन नेट हाउस तैयार किया गया, जिसमें ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग कर जरबेरा के पौधे लगाए गए. इस तकनीक से पौधों को जरूरत के अनुसार पानी मिलता है और खेत में खरपतवार की समस्या भी काफी कम हो जाती है. फूलों की गुणवत्ता बेहतरसुमन मेहता के अनुसार ग्रीन नेट हाउस में खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पौधे तेज धूप, भारी बारिश और कीटों के प्रकोप से काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं. नियंत्रित वातावरण मिलने के कारण फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी लगातार बना रहता है. 1500 जरबेरा फूलों का उत्पादनवर्तमान में उनके बागान से हर सप्ताह लगभग 1500 जरबेरा फूलों का उत्पादन हो रहा है. स्थानीय माली और फूल विक्रेता सीधे खेत पर पहुंचकर इन फूलों की खरीदारी करते हैं. बाजार में एक जरबेरा फूल की कीमत 5 से 6 रुपये तक मिल जाती है, जिससे उन्हें नियमित आय हो रही है. उन्होंने बताया कि जरबेरा फूलों की मांग गुलदस्ते, शादी-विवाह, समारोहों और सजावट के कार्यों में सबसे अधिक रहती है. ग्रीन नेट हाउस का पूरा सेटअपसुमन मेहता ने बताया कि इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि उन्हें जरबेरा के पौधे और ग्रीन नेट हाउस का पूरा सेटअप उद्यान विभाग की सरकारी योजना के तहत निशुल्क उपलब्ध कराया गया. इससे उन्हें शुरुआती निवेश नहीं करना पड़ा और अब उनकी आय का बड़ा हिस्सा सीधे मुनाफे के रूप में मिल रहा है. किसानों के लिए भी प्रेरणाउनके बागान में लाल, पीले, गुलाबी, सफेद, नारंगी समेत कई आकर्षक रंगों के जरबेरा फूल खिले हुए हैं, जो दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं. सुमन मेहता की सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है और कई किसान आधुनिक फूलों की खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Kodarma,Jharkhand Source link

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रेलवे फाटक के पास अवैध शराब कारोबार का भंडाफोड़:264 बोतल अंग्रेजी शराब...

बोकारो के बालीडीह थाना क्षेत्र में 11 जून की रात रेलवे फाटक के पास अवैध शराब बिक्री का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने एक लाइन होटल और जनरल स्टोर पर छापेमारी कर भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब और बीयर बरामद की। इस कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को 11 जून की रात गुप्त सूचना मिली थी कि रेलवे फाटक के पास स्थित अमर लाइन होटल में अवैध शराब का कारोबार संचालित हो रहा है। सूचना के आधार पर, वरीय अधिकारियों को सूचित कर एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। सुमित्रा जनरल स्टोर पर छापा मारा गठित टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अमर लाइन होटल और उसके बगल में स्थित सुमित्रा जनरल स्टोर पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान दोनों प्रतिष्ठानों से विभिन्न ब्रांडों की कुल 264 बोतल अंग्रेजी शराब और 101 बोतल/कैन बीयर बरामद की गई। संचालकों से वैध कागजात मांगे जाने पर वे कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इस कार्रवाई में अमर लाइन होटल के मैनेजर अविनाश सिंह और सुमित्रा जनरल स्टोर के मालिक सूरज कुमार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है, और अवैध शराब कारोबार से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। Source link

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