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गुड़-चावल का जादुई चारा… रांची की लैला बत्तख पालन से कर रही...

Last Updated:May 04, 2026, 08:39 IST Ranchi Success Story: रांची के पास गुंडू गांव की लैला देवी बत्तख पालन से अपना जीवन यापन कर रही है. उन्होंने बताया कि वह एक बत्तख लगभग 800 रुपये में बेचती हैं. इसक तरह वह हमेशा 60 से 70 बत्तख का पालन करती हैं. इसी बत्तख को बेचकर राशन के साथ ही अपने लिए दवा भी खरीदती हैं. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड की राजधानी रांची से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुंडू गांव की लैला देवी खासतौर पर बत्तख पालने का काम करती हैं. उनका पूरा जीवन यापन इसी पर निर्भर है. उनके घर में कोई नहीं है. वह गर में सिर्फ अकेली हैं. एक बत्तख ₹400 केजी तक होती है. जहां एक की कीमत ₹800 तक चली जाती है. उन्होंने बताया कि उन्हें खासतौर पर देसी चारा खिलाना पड़ता है. आइये जानते हैं लैला देवी के बारे में. गुड और चावल है खास चारा लैला बताती हैं कि गुड और चावल का बत्तख के लिए खास चारा बनाया जाता है. इससे बीमारी नहीं होती है और लंबे समय तक तंदुरुस्त रहते हैं. दोपहर में जैसे हमारे खाने के लिए चावल बनता है. बस वही चावल को ले लेते हैं. उसमें थोड़ा गुड और थोड़ा भूसा मिलाते हैं. इन दोनों को मिलाकर छोटा-छोटा चारा बनाती हैं और इन सभी को देते हैं. उनके पास कम से कम 60 से 70 बत्तख थी. बीते चार-पांच दिनों में बेचने के बाद फिलहाल 20 ही बची हुई हैं. हालांकि अभी उनके पास 40- 50 बच्चे हैं. वह भी 10-20 दिन में अच्छे खासे मोटे हो जाएंगे. देसी तरीके से बड़ा और तंदुरुस्त करने के लिए इस तरीके का दाना तो देते हैं. जैसे ज्वार और जो भुट्टा तीनो को मिला के दाना तैयार किया जाता है. जो काफी फायदेमंद रहता है. इससे उनका शरीर काफी फिट रहता है. चावल, गेहूं व हरी सब्जी का मिश्रण भी इनको दिया जाता है. साफ सफाई का रखती हैं विशेष ध्यान इसके अलावा उनके लिए साफ पानी का इंतजाम किया जाता है. दिन में कम से कम 4 से 5 बार हम लोग इनको विशेष चारा देते हैं, जो हम लोग पानी पीते हैं. वहीं, साफ पानी इन्हें भी दिया जाता है और साफ सफाई कभी विशेष ध्यान रखा जाता है. इनके लिए एक छोटी सी लकड़ी का घर बना होता है. जिसको अपने घर की तरह हर दिन साफ करती हैं. क्योंकि पशुओं में गंदगी की वजह से ही बीमारी आती है, तो ऐसे में अगर आप साफ-सफाई रखेंगे तो बीमारी होने की संभावना काफी कम हो जाएगी. घर बैठे होती है तगड़ी कमाई उन्होंने बताया कि एक का ₹400 केजी तक दाम होती है. ऐसे में अगर कोई डेढ़ केजी या 2 केजी तक है तो आराम से ₹800 तक भी मिल जाता है. अगर हम एक बार में चार से पांच बेच लें तो हमारी अच्छी खासी बचत हो जाती है. जीवन यापन के लिए यह हमारे लिए वरदान से कम नहीं है. महीना में हम जब ऐसे 50 बत्तख तक बेचती हैं तो घर का राशन, पानी, खुद के लिए दवा हर एक चीज यहां से निकल जाती है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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चतरा में आमने-सामने भिड़ी कार-बाइक:बाइक सवार दो युवकों की स्पॉट डेथ, कार...

चतरा जिले के इटखोरी थाना क्षेत्र में रविवार की देर रात एक तेज रफ्तार कार और बाइक के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए। उस पर सवार दोनों युवकों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान चौपारण थाना क्षेत्र के कर्मा गांव निवासी ऋषि पासवान और अभिषेक पासवान के रूप में की गई है। जानकारी के अनुसार, दोनों युवक इटखोरी स्थित अपने नानी घर से वापस चौपारण लौट रहे थे। इसी दौरान परसौनी चौक के पास विपरीत दिशा से आ रही तेज रफ्तार कार से उनकी बाइक की सीधी टक्कर हो गई। इस हादसे में कार सवार दो युवक भी गंभीर रूप से घायल हो गए कार सवार दो युवक भी गंभीर इस हादसे में कार सवार दो युवक भी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों की पहचान करनी निवासी हिमांशु कुमार और पत्थलगड्डा निवासी विक्रम कुमार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों युवक पेशे से वीडियोग्राफर हैं। चौपारण के महाराजगंज में एक शादी समारोह की बुकिंग के सिलसिले में कैमरा लेकर जा रहे थे। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस की मदद से घायलों को इटखोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हजारीबाग सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर भेजा पोस्टमॉर्टम घटना की सूचना मिलते ही इटखोरी थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। दोनों शवों को कब्जे में लिया। रात भर शवों को थाना में रखने के बाद आज सुबह पोस्टमॉर्टम के लिए चतरा सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार और बाइक को जब्त कर लिया है। देर रात की जानकारी मिलने के बाद मृतकों के परिजन थाने पहुंचे। घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि परसौनी चौक के पास लगातार हो रहे हादसों के बावजूद परिवहन विभाग और प्रशासन ओवरस्पीडिंग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। Source link

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वैन चालक ने जान-बूझकर हवलदार को मारा धक्का, सड़क से 8 फीट...

जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र स्थित पुराना विधानसभा के पास सड़क पार कर रहे एक हवलदार को अज्ञात वैन सवार ने शनिवार की शाम धक्का मार दिया। धक्का इतना जोरदार था कि हवलदार सड़क किनारे लगभग 8 फीट दूर जा गिरे। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मृत हवलदार का नाम कैलाश पूर्ति है आैर फिलहाल वह पुराना विधानसभा में आर्म्स सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे। धक्का मारने के बाद वैन सवार तेज गति से धुर्वा गोलचक्कर की आेर फरार हो गया। हवलदार को आनन- फानन में पीसीआर की मदद से धुर्वा स्थित पारस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि मौत पहले ही हो चुकी है। मृतक के पुत्र समीर पूर्ति ने वैन सवार पर जान बूझकर धक्का मारने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिसमें कहा है कि पिता कैलाश पूर्ति जब सड़क पार कर रहे थे तो दाहिने साइड से वैन सवार को पार होने के लिए जगह बची थी। वैन सवार अगर दाहिने साइड से आगे बढ़ा होता तो उनके पिता को धक्का नहीं लगता आैर जान बच जाती। हालांकि वैन सवार ऐसा करने के बजाए उनके पिता को जान-बूझकर धक्का मारते हुए आगे बढ़ गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वैन सवार के बारे में जानकारी जुटा रही है। बेटा को साथ रखे हुए थे पिता, प्रतियोगी परीक्षाओं की कर रहा तैयारी मृत कैलाश पूर्ति मूल रूप से चाईबासा मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। वह रांची जिला बल के हवलदार थे आैर पुराना विधानसभा में ड्यूटी कर रहे थे। कैलाश अपने बेटे समीर पूर्ति (23 वर्ष) को भी रांची में ही साथ रखे हुए थे। समीर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। सड़क दुर्घटना में अचानक पिता की मौत के बाद उसके सपने टूट गए। बेटा सड़क के इस पार खड़ा था, आंखों के सामने ही पिता की मौत हो गई हवलदार कैलाश पूर्ति अपने बेटे समीर पूर्ति के साथ ही शनिवार की शाम कमरे से निकल कर पुराना विधानसभा गेट से बाहर सड़क तक पहुंचे थे। कैलाश पूर्ति ने बेटे को एक जगह खड़ा रहने को कहा और खुद सामान खरीदने सड़क पार कर सेक्टर-2 वाले रोड में बाजार की आेर चले गए। सामान खरीदने के बाद कैलाश पूर्ति वापस पुराना विधानसभा आने के लिए सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान बिरसा चौक की आेर से आ रहे वैन तेज रफ्तार से धक्का मारते हुए आगे बढ़ गया। बेटे के सामने ही हवलदार की मौत हो गई। Source link

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पशुपालकों की चांदी! चुटकी में बढ़ जाएगा गाय का रोजाना 2 किलो...

होमवीडियोकृषि चुटकी में बढ़ जाएगा गाय का रोजाना 2 किलो दूध, बस कर लें ये आसान उपाय X चुटकी में बढ़ जाएगा गाय का रोजाना 2 किलो दूध, बस कर लें ये आसान उपाय   पशुपालकों के लिए ‘सूडान घास’ दूध उत्पादन बढ़ाने का रामबाण उपाय साबित हो रही है. गर्मी में हरे चारे की किल्लत को दूर करने के लिए कोडरमा गौशाला ने इसकी सफल खेती की है. मात्र 400 रुपये के बीज से शुरू हुई इस घास की ऊंचाई 7 फीट तक होती है. पशुओं को यह पोषक चारा खिलाने से प्रति गाय रोजाना 2 किलो दूध की वृद्धि हुई है, जिससे पशुपालकों को प्रति गाय 130 रुपये तक का अतिरिक्त मुनाफा हो रहा है. इसकी खासियत यह है कि एक बार लगाने के बाद इसे दोबारा रोपा जा सकता है, जिससे लागत कम और मुनाफा अधिक मिलता है. Source link

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कनेक्टिंग फ्लाईओवर: अधिग्रहित जमीन पर अब कब्जा लेगा प्रशासन

कांटाटोली – सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाईओवर का 45% काम पूरा हो गया है। बहुबाजार की ओर से पिलर का काम हो गया है। गर्डर चढ़ाकर उसके ऊपर ढ़लाई की तैयारी की जा रही है। जबकि, सिरमटोली चौक की ओर अभी पिलर का ही काम हुआ है। सिंगल पिलर पर बन रहे करीब 1.25 किमी. लंबे फ्लाईओवर के किनारे सर्विस रोड बनाने के लिए रैयती जमीन भी ली जा रही है। चार वार्डों में करीब 2.23 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी गई है। हालांकि, अधिकतर रैयत अधिग्रहण के विरोध में हैं, इसलिए वे मुआवजा लेने के लिए दावा नहीं कर रहे हैं। इसे देखते हुए जिला भू अर्जन पदाधिकारी ने वार्ड नं. -4 में एसपीजी मिशन के एक प्लॉट, वार्ड-5 में एसपीजी और जीईएल मिशन के पांच प्लॉट में 39 डिसमिल जमीन, वार्ड 6 में 8 रैयतों की करीब 87 डिसमिल जमीन, इसके अलावा कोणका मौजा में एक प्लॉट और सिरम मौजा में कुल 19 प्लॉट में 97 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण किया गया है। लेकिन एक भी रैयत मुआवजा लेने आगे नहीं आए। इसे देखते हुए प्रशासन ने रैयतों को अंतिम नोटिस जारी कर 10 मई तक मुआवजा के लिए आवेदन देने का निर्देश दिया है, नहीं तो राशि सरकारी खजाने में जमा करा दी जाएगी। रैंप को बिना बाधित किए दोनों किनारों से जुड़ेगा फ्लाईओवर कांटाटोली-सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाईओवर का 45% काम पूरा कनेक्टिंग फ्लाईओवर पर चढ़ने के लिए वाहनों को बदलना होगा लेन कांटाटोली और सिरमटोली फ्लाईओवर से कनेक्टिंग फ्लाईओवर पर चढ़ने के लिए दोनों ओर के वाहन सवारों को अपना लेन बदलना होगा। क्योंकि, दोनों फ्लाईओवर के रैंप के बगल से कनेक्टिंग फ्लाईओवर का लेन जुड़ेगा। ऐसे में लेन बदलने के बाद वाहन सवार सीधे ऊपर-ऊपर मूवमेंट कर स्केंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा होगा कि रांची को करीब 8 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर की सौगात मिल जाएगी। क्योंकि, कांटाटोली और सिरमटोली फ्लाईओवर की लंबाई करीब 6.50 किमी है। कनेक्टिंग फ्लाईओवर के बनने से सिरमटोली चौक भी पूरी तरह जाम मुक्त हो जाएगा। साथ ही रेलवे स्टेशन जाने वालों को भी काफी सुविधा होगी। कनेक्टिंग फ्लाईओवर भी रांची में इंजीनियरिंग का उद्भूत नजारा पेश करेगा। क्योंकि, कांटाटोली और सिरमटोली फ्लाईओवर को जोड़ने के लिए कनेक्टिंग फ्लाईओवर बन रहा है, लेकिन यह फ्लाईओवर दोनों फ्लाईओवर के रैंप से नहीं जुड़ेगा। दरअसल, इसका डिजायन इस तरह तैयार किया गया है कि कांटाटोली और सिरमटोली फ्लाईओवर के रैंप के बगल से दो-दो लेन में यह फ्लाईओवर जुड़ेगा। ऐसे में दोनों फ्लाईओवर के मौजूदा रैंप से मिले बिना यह फ्लाईओवर एक-दूसरे से जुड़ जाएगा। रैंप भी अभी की तरह काम करते रहेंगे। कांटाटोली से बहुबाजार और मेकॉन से सिरमटोली के पास उतरने वाले वाहन अभी की तरह ही उतरेंगे। कनेक्टिंग फ्लाईओवर के ऊपर से दोनों ओर के ट्रैफिक का मूवमेंट आसानी से होगा। Source link

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पलामू में रात 10 बजे तक चली NEET-UG परीक्षा:48 स्टूडेंट्स को मिला...

मेदिनीनगर में आयोजित नीट यूजी परीक्षा के दौरान योध सिंह नामधारी महिला कॉलेज परीक्षा केंद्र पर गंभीर अव्यवस्था सामने आई। रविवार को देशभर में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा में यहां कमरा नंबर 11 के 48 परीक्षार्थियों को निर्धारित समय पर प्रश्न-पत्र उपलब्ध नहीं कराया जा सका। परीक्षा का समय दोपहर 2 बजे तय था। सभी परीक्षार्थी सुबह 11 से 12 बजे के बीच अपने-अपने कक्ष में पहुंच चुके थे। इसके बावजूद शाम 5 बजे तक इन अभ्यर्थियों को प्रश्न-पत्र नहीं मिला, जिससे वे लगातार कक्ष में बैठे इंतजार करते रहे और उनकी चिंता बढ़ती गई। रोती हुई छात्रा की सूचना से बढ़ा आक्रोश शाम 5:37 बजे स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एक छात्रा रोते हुए परीक्षा केंद्र के गेट तक पहुंची और अपने अभिभावक को बताया कि अब तक प्रश्न-पत्र नहीं मिला है। इस सूचना के बाद केंद्र के बाहर मौजूद अभिभावकों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने बच्चों को बिना परीक्षा दिलाए वापस ले जाने की मांग की। प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। इस दौरान अभिभावकों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। अभिभावकों का आरोप था कि उन्हें पूरे मामले में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। जिससे असमंजस और गुस्सा दोनों बढ़ते गए। वे देर रात तक केंद्र के बाहर डटे रहे। अधिकारियों के पहुंचने के बाद तेज हुई प्रक्रिया मामले की गंभीरता को देखते हुए शाम 6:18 बजे उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत परीक्षा केंद्र पहुंचे, जिसके बाद परीक्षा शुरू कराने की प्रक्रिया तेज हुई। करीब 10 मिनट बाद एसपी कपिल चौधरी भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने प्रश्न-पत्र की मांग की, तो उन्हें बताया गया कि इसका प्रिंट आउट कराकर दिया जाएगा। वहीं, सदर एसडीओ सुलोचना मीणा ने शाम 6:12 बजे कहा कि प्रश्न-पत्र के भाषा माध्यम से जुड़ी समस्या थी, जिसे सुलझा लिया गया है। जल्द ही परीक्षा शुरू कराई जाएगी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद परीक्षार्थियों को कक्ष में वापस भेजा गया। फोटोकॉपी कराकर दिया गया प्रश्नपत्र आखिरकार प्रश्न-पत्र की फोटोकॉपी कराकर अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया गया। परीक्षा शाम 6:55 बजे शुरू हुई, जो रात 9:55 बजे तक चली। इस दौरान 48 परीक्षार्थियों को करीब 10 से 11 घंटे तक कॉलेज परिसर में ही रोके रखा गया। दोपहर 3 बजे ही प्रश्न-पत्र नहीं मिलने पर इन छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया था और मुख्य गेट तक पहुंचकर विरोध जताया था। छात्राओं के रोने और परिजनों से संपर्क कराने के बाद मामला और तूल पकड़ गया। वहीं, अन्य सभी परीक्षार्थियों की परीक्षा शाम 5 बजे समाप्त होने पर उन्हें घर जाने दिया गया, लेकिन इन 48 छात्रों को वहीं रोका गया। घटना ने परीक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Source link

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नदी के पत्थरों पर बैठकर मालपुआ-समोसे का आनंद, चारों ओर घना जंगल…ये...

Last Updated:May 04, 2026, 08:54 IST Ranchi Best Place To Visit Kanchi River: रांची की कांची नदी दोस्तों के साथ चिल करने के लिए बेस्ट प्लेस है. यह जगह कम एक्स्प्लोर हुई है इसलिए यहां आमतौर पर भीड़ नहीं मिलती. घने जंगल, गर्मी में भी शहर की तुलना में कम तापमान और कम पानी वाली नदी. यहां पत्थरों पर बैठकर आप शांति-सुकून को गहराई से अनुभव कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट रांची. झारखंड की राजधानी रांची से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है कांची नदी. यह नदी एकदम घने जंगल के बीच से गुजरती है और यहां का नजारा ऐसा होता है कि गर्मी के दिनों में पानी का स्तर काफी कम होता है. जिस वजह से नदी के अंदर के पत्थरों पर लोग आराम से बैठकर जंगल के बीच का मजा लेते हैं. यहां पर टेंपरेचर 10 से 15 डिग्री तक कम होता है. यहां पर आपको शॉल तक की जरूरत पड़ जाएगी. शहर के शोर-शराबे से दूर, प्रकृति के बीच कोई शांत जगह तलाश रहे हैं तो यहां आ सकते हैं. यहां आपको नेचर के वे सारे एलिमेंट मिलेंगे जो दिल को सुकून देते हैं. यहां आने पर बगल से नदी, घने जंगल, एकदम सुनसान, कोई परिंदा पर मारने वाला नहीं. कैंपिंग का भी ले सकते हैं मजायहां पर आप कैंपिंग का भी मजा ले सकते हैं. खासतौर पर ऐसे युवा, जो शहर से बाहर जंगल जैसा इलाका तलाश रहे हैं, उनके लिए यह एरिया बेस्ट है. यह अधिक एक्सप्लोर नहीं किया गया है. इसलिए यहां पर आपको ज्यादा डेवलेपमेंट नहीं दिखेगा हालांकि खूबसूरती का कोई सानी नहीं है. यहां पर आप आते हैं, तो आपको लगेगा कि आप शिमला या मनाली आ चुके हैं. बाहर अगर 40 डिग्री टेंपरेचर है, तो यहां पर 30 डिग्री ही होगा. कैसे पहुंचें यहांइस जगह पर पहुंचने के लिए आपको आना है रांची के टोरेन वर्ल्ड स्कूल. आप गूगल मैप में टोरेन वर्ल्ड स्कूल डाल दीजिए और वहां तक आ जाइए. फिर वही रास्ता पकड़कर आप किसी से भी पूछ लीजिए कि आपको कांची नदी के पास जाना है, वह आपको बता देंगे. यहां से जाने का भी रास्ता इतना खूबसूरत है, दोनों तरफ जंगल और बीच में पतली पक्की और चकाचक सड़क. ड्राइविंग का भी मजा यहां चार गुना बढ़ जाता है. थोड़ी दूर पर गांव में लगता है बाजारइस जंगल से थोड़ी सी दूर बाहर निकलेंगे, तो आपको खाली मैदान मिलेगा. जहां पर गांव वाले शाम के वक्त 4:00 बजे बाजार लगाते हैं. जहां गरम मालपुआ, समोसा, झालमुड़ी, ऐसी सारी चीजें मिलेंगी और खास बात है कि यह सब आपकी आंखों के सामने लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाता है. ऐसे में जंगल के बीचों-बीच बैठकर खाने का अपना अलग ही मजा है. बस इतना ध्यान रखना है कि आपको अकेले बिल्कुल भी नहीं आना है, कम से कम दो-तीन लोगों को साथ में लेकर आएं. दरअसल इलाका थोड़ा सुनसान पड़ता है तो सेफ्टी के लिहाज से ग्रुप में आएं और अंधेरा होने के पहले निकल जाएं. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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जातीय जनगणना में सरना धर्म कोड का अलग कॉलम दें : हेमंत

मुख्यमंत्री गए दिल्ली, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री से मिल सकते हैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जातीय जनगणना में सरना धर्म कोड का अलग कॉलम देने का आग्रह किया है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि आदिवासी समुदाय के धार्मिक अस्तित्व की रक्षा के लिए इस पर सकारात्मक निर्णय लें। क्योंकि देश का आदिवासी समुदाय कई सालों से अपने धार्मिक अस्तित्व की रक्षा के लिए यह मांग उठा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि पीएम मोदी समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के लिए जिस तरह तत्पर रहते हैं, उसी तरह आदिवासी समुदाय के समेकित विकास के लिए सरना धर्म कोड का प्रावधान करेंगे। साथ ही पीएम को याद दिलाया कि वर्ष 2011 की जनगणना में अलग कोड न होने के बावजूद 21 राज्यों के लगभग 50 लाख लोगों ने धर्म के कॉलम में स्वप्रेरणा से ‘सरना’ अंकित कराया। वहीं राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि आदिवासी समाज की भावना और झारखंड की आकांक्षा के मद्देनजर द्वितीय चरण की जनगणना के प्रपत्र में सरना धर्म व अन्य सदृश्य धार्मिक व्यवस्था के लिए अलग कोड रखने का निर्देश दें। उन्होंने लिखा कि जनगणना 2027 में झारखंड सरकार पूरा सहयोग कर रही है। मैं भी स्व-गणना कर इस अभियान में भूमिका निभा रहा हूं। झारखंड ही नहीं, पूरे देश के आदिवासी लंबे समय से सरना धर्म को जनगणना में अलग कोड के रूप में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच रविवार को हेमंत सोरेन दिल्ली चले गए। वे वहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृह मंत्री से मिल सकते हैं। जानिए…सरना धर्म कोड पर अब तक क्या हुआ हेमंत सोरेन सरकार ने 11 नवंबर 2020 को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्म कोड को जनगणना में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया। सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष ने भी इस प्रस्ताव का एक सुर में समर्थन किया। विधानसभा से पारित होने के बाद राज्य सरकार ने इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को मंजूरी के लिए भेजा। फिर मुख्यमंत्री ने दिल्ली जाकर कई बार केंद्रीय गृह मंत्री व पीएम से मुलाकात की। इस पर जल्द फैसला लेने का आग्रह किया। विधानसभा से पास होने के बाद राज्य के आदिवासी संगठनों में उम्मीद जगी। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। देशभर के आदिवासी समुदायों को एकजुट करना शुरू किया। प्रस्ताव पास हुए पांच साल से ज्यादा समय हो चुका है। लेकिन यह केंद्र के पास अभी भी लंबित है। अब चूंकि फिर से जनगणना का काम शुरू हुआ है, इसलिए मुख्यमंत्री ने इसे फिर जोर-शोर से उठाया है। आदिवासी समाज की सामाजिक-धार्मिक पहचान की रक्षा जरूरी राष्ट्र​पति को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि संविधान के तहत आदिवासी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की रक्षा करना जरूरी है। वहीं राज्यपाल को लिखा कि झारखंड की पहचान आदिवासी संस्कृति व परंपराओं से जुड़ी है। वे इस मुद्दे को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सामने उठाएं और सकारात्मक कदम उठाने का प्रयास करें। इस बार डिजिटल जनगणना, आंकड़ों का संकलन बेहतर हो सकेगा हेमंत ने लिखा कि राज्य की नीति, योजनाएं और निर्णय यहां के स्थानीय लोगों की भावना पर आधारित है। इसके केंद्र में खासकर आदिवासी समाज की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता है। ऐसे में यह जरूरी लगता है। जब जनगणना के सारे काम डिजिटल हो रहे हैं, तो ऐसे में अलग धर्मकोड के आंकड़ों का संकलन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। इसलिए 2023 के आग्रह, विधानसभा के संकल्प, आदिवासी समाज की भावना और राज्य की आकांक्षा को देखते हुए फैसला लें। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को लिखा पत्र… धर्म के कॉलम में स्वप्रेरणा से ‘सरना’ अंकित कराया। वहीं राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि आदिवासी समाज की भावना और झारखंड की आकांक्षा के मद्देनजर द्वितीय चरण की जनगणना के प्रपत्र में सरना धर्म व अन्य सदृश्य धार्मिक व्यवस्था के लिए अलग कोड रखने का निर्देश दें। उन्होंने लिखा कि जनगणना 2027 में झारखंड सरकार पूरा सहयोग कर रही है। मैं भी स्व-गणना कर इस अभियान में भूमिका निभा रहा हूं। झारखंड ही नहीं, पूरे देश के आदिवासी लंबे समय से सरना धर्म को जनगणना में अलग कोड के रूप में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच रविवार को हेमंत सोरेन दिल्ली चले गए। वे वहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृह मंत्री से मिल सकते हैं। Source link

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Jharkhand will soon sign a 1.24 lakh crore MoU, and the government...

Hindi News Local Jharkhand Ranchi Jharkhand Will Soon Sign A 1.24 Lakh Crore MoU, And The Government Will Also Seek Input From Companies On Industrial And Textile Policies. रांची2 घंटे पहले कॉपी लिंक झारखंड सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने में जुट गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की स्विटजरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच और यूनाइटेड किंगडम की यात्रा के दौरान मिले 1.24 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार जल्दी ही इन कंपनियों के साथ एमओयू करेगी। इससे पहले उद्योग विभाग नई दिल्ली में स्टेक होल्डर निवेशकों के साथ राउंड टेबल बैठक करेगा इसमें राज्य की नई औद्योगिक और टेक्सटाइल नीति बनाने पर उनसे राय ली जाएगी। यह बैठक जून के अंतिम सप्ताह में होने की उम्मीद है। वहीं आईटी विभाग भी आईटी सेक्टर में बड़े निवेश को लेकर दिल्ली में कार्यक्रम करेगा। -शेष पेज 11 पर पिछले साल होना था 15 एमओयू, 1 भी नहीं हुआ सरकार ने पिछले साल 15 एमओयू की रूपरेखा तैयार की थी। इसमें करीब 31 हजार करोड़ रुपए पूंजी निवेश का प्रस्ताव था। करीब 20 हजार लोगों को रोजगार मिलता। लेकिन एक भी एमओयू नहीं हुआ। एमओयू एसएम स्टील एंड पावर, वोल्टोक्स रेल, एसएम स्टील एंड पावर, एसएम स्टील एंड पावर, इंडियन स्टील एंड वायर, गजानन फेरो, जय सस्पेंसन,अल्ट्राटेक सीमेंट, रामकृष्णा फोर्जिंग, सुप्रीम मेटल्स एक्सपोर्ट, स्कीसीआरपी वेंचर, बीएमडब्ल्यू इंडस्ट्री और रश्मि मेटालिक्स के साथ होना था। बिहार से अच्छी औद्योगिक नीति बनाने की तैयारी झारखंड सरकार बिहार से बेहतर औद्योगिक नीति (औद्योगिक व निवेश प्रोत्साहन नीति) बनाने में जुटी है। पिछले साल दिसंबर में विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह ने उद्योग विभाग के साथ समीक्षा बैठक में बिहार से बेहतर नीति बनाने का निर्देश दिया था। अभी बिहार की औद्योगिक नीति को काफी बेहतर माना जा रहा है। बिहार में अगस्त 2025 में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज लागू हुआ था। उसमें निवेशकों को कई सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। झारखंड के अधिकारी उसका अध्ययन करने में जुटे हैं। कब कितने एमओयू… वर्ष एमओयू 2015 11 2016 05 2017 241 2018 18 2019 14 2020 02 2021 03 2022 03 2023 03 2024 16 मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दावोस और यूके यात्रा के दौरान मिले थे निवेश के प्रस्ताव 2015 से 2024 के बीच 316 एमओयू : राज्य में 2015 से 2024 तक कुल 316 एमओयू हुए थे। इनमें 2015 से 2021 के बीच हुए एमओयू में 60 प्रतिशत में कोई काम ही शुरू नहीं हुआ वहीं 2004 से 2014 के बीच 74 एमओयू हुए थे। इनमें सरकार ने 24 कंपनियों का एमओयू रद्द कर दिया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ Source link

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बकरी पालन बना ATM: 4 बकरियों से शुरू किया सफर, अब सालाना...

होमताजा खबरकृषि 4 बकरियों से शुरू किया सफर, अब सालाना लाखों का मुनाफा कमा रही हैं महिलाएं Last Updated:May 04, 2026, 06:46 IST पलामू के चैनपुर की महिलाओं ने ईंट-भट्टों पर मजदूरी छोड़ बकरी पालन को स्वरोजगार बनाया है. सरकारी योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर कुसमी और निर्मला देवी जैसी दर्जनों महिलाएं अब सालाना लाखों रुपये कमा रही हैं. वैज्ञानिक देखभाल और बेहतर चारे के दम पर यह व्यवसाय ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘एटीएम’ साबित हो रहा है. ख़बरें फटाफट पलामूः पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड के गुरहा गांव की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है. जहां कभी ये महिलाएं ईंट-भट्टों पर मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करती थीं, वहीं आज बकरी पालन के जरिए सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं. सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर इन महिलाओं ने अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है. गांव की करीब 40 महिलाएं अब पूरी तरह बकरी पालन पर निर्भर हैं और इसी से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं. गुरहा गांव की कुसमी देवी की कहानी इस बदलाव की सबसे बड़ी उदाहरण है. करीब 10 साल पहले तक वह दिहाड़ी मजदूरी करती थीं, लेकिन उससे घर चलाना बेहद मुश्किल था. कुसमी देवी ने लोकल18 को बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बकरी पालन के बारे में जानकारी मिली और योजना के तहत 7 बकरियां और एक बकरा मिला. बकरियां साल में दोगुनी-तिगुनी हो जाती हैं, जिससे उनकी बिक्री कर अच्छी आमदनी हो जाती है. आज उनके पास बड़ी संख्या में बकरियां हैं और वे सालाना लाखों रुपये तक कमा रही हैं. पौष्टिक चारे का उपयोग जरूरीआगे बताया कि बकरी पालन में मेहनत भी कम नहीं है. महिलाओं को बकरियों के लिए चारा जुटाना, उन्हें चराने जंगल ले जाना और जंगली जानवरों से बचाना पड़ता है. इसके अलावा उन्हें शेड भी उपलब्ध कराया गया है, जिसे उन्होंने सरकारी सहायता और अपनी मेहनत से तैयार किया है. एजोला घास जैसे पौष्टिक चारे का उपयोग कर वे बकरियों की अच्छी देखभाल करती हैं, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ती है. वहीं निर्मला देवी ने भी अपनी मेहनत से पहचान बनाई है. उन्होंने पांच साल पहले केवल 4 बकरियों से शुरुआत की थी और आज उनके पास 15 से 16 बकरियां हैं. निर्मला देवी बताती हैं कि एक बकरी 10 से 12 हजार रुपये में बिक जाती है. सालभर में बकरियों की देखभाल पर करीब 10 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि उन्हें 80 से 90 हजार रुपये तक का मुनाफा हो जाता है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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