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आधी रात को थर्रा गई एक साथ 5 देशों की धरती, भारत...

होमताजा खबरदेश आधी रात को थर्रा गई एक साथ 5 देशों की धरती, भारत से लेकर चीन-भूटान तक दहशत, कितनी रही तीव्रता? Last Updated:June 08, 2026, 00:06 IST Bhukamp Today Update: भूटान के पुनाखा में आए 5.6 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने पूरे दक्षिण एशिया को हिलाकर रख दिया है. जमीन से केवल 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आए इस भूकंप के कारण थिम्पू और पारो समेत कई जिलों में इमारतें ताश के पत्तों की तरह हिलने लगीं. इसके तेज झटके भारत के असम, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश और चीन तक महसूस किए गए, जिससे आधी रात को लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागने लगे. फिलहाल प्रशासन बड़े नुकसान का आकलन कर रहा है और लोगों को आफ्टरशॉक्स से सावधान रहने की हिदायत दी गई है. Butan-India Bhukamp Latest Update: भूटान के पुनाखा में रविवार (6 जुलाई 2026) की आधी रात को करीब 11:06 बजे आए एक बेहद शक्तिशाली और खतरनाक भूकंप ने भीषण तबाही की आशंका पैदा कर दी है. यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.6 मापी गई है, जिसका केंद्र पुनाखा से महज 5 किलोमीटर दूर था. जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर की उथली गहराई (Shallow Depth) पर होने के कारण इसके झटके बेहद हिंसक और डरावने थे, जिसने थिम्पू, पारो और कई अन्य जोंगखागों (जिलों) में मजबूत गगनचुंबी इमारतों को भी बुरी तरह हिलाकर रख दिया. आधी रात को अचानक लगी इस भयानक थपकी से घबराए लोग अपनी जान बचाने के लिए चीखते-चिल्लाते हुए अपने घरों से बाहर खुले मैदानों और सड़कों की तरफ भागने लगे, जिससे चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया. इस भूकंप का असर सिर्फ भूटान तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत, नेपाल, बांग्लादेश और चीन को भी अपनी चपेट में ले लिया. भारत के असम, पश्चिम बंगाल और सिक्किम राज्यों में भी इसके बेहद तेज और डरावने झटके महसूस किए गए. सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों लोग पूरी रात दहशत के साये में रहे. हालांकि, इस भयानक प्राकृतिक आपदा में फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आपदा प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं. यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर… News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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मुसलमानों वाले इलाके में बीजेपी हुई मजबूत, राशिद अल्वी ने INDIA गठबंधन...

Last Updated:June 07, 2026, 22:51 IST राशिद अल्वी ने डीएमके से इंडिया अलायंस में शामिल होने की अपील की. अल्वी ने चंद्रबाबू नायडू का जिक्र किया. नायडू अब एनडीए का हिस्सा बन चुके हैं. बीजेपी नॉर्थ इंडिया की पार्टी है. साउथ इंडिया में बीजेपी की स्थिति कमजोर है. ख़बरें फटाफट राशिद अल्वी ने बीजेपी पर हमला बोला. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले सहयोगी दलों से एकजुट होने की अपील की. उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता से दूर करने के लिए सभी विपक्षी दलों को एक साथ आना चाहिए. कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मैं डीएमके से भी यही कहूंगा कि अगर उनका मकसद भारतीय जनता पार्टी का विरोध करना और सत्ता से दूर रखना है तो उन्हें इंडिया गठबंधन में शामिल होने पर फिर से विचार करना चाहिए.” उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (डीटीपी) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू का जिक्र करते हुए कहा कि अब वे भी एनडीए का हिस्सा हैं. भाजपा मुख्य रूप से उत्तर भारत की पार्टी है. दक्षिण भारत में इसकी स्थिति कमजोर है. भाजपा जहां मुसलमानों की संख्या ज्यादा है, वहीं सबसे मजबूत हुई है. उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में यह मजबूत हुई है. जहां हिंदू समुदाय की संख्या ज्यादा है, वहां भाजपा के फलने-फूलने की संभावना नहीं है.” सीपीआई (एम) द्वारा कांग्रेस को लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए राशिद अल्वी ने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ बोलती हैं, लेकिन अब देश और संविधान बचाने का समय है. उन्होंने क्षेत्रीय दलों से अपील की, “जो पार्टियां कांग्रेस छोड़कर चली गई थीं, उन्हें वापस आ जाना चाहिए. वरना भाजपा उन्हें एक-एक करके खत्म कर देगी.” राशिद अल्वी ने जोर देकर कहा कि इंडिया अलायंस को मजबूत करके 2026-27 के चुनावों में बदलाव लाना है. गाजियाबाद में सूर्य प्रताप चौहान हत्याकांड पर बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के ‘लव जिहाद’ वाले बयान पर राशिद अल्वी ने कहा, “मैं ऐसे लोगों पर टिप्पणी नहीं करता जो देश में नफरत फैला रहे हैं. उस हत्या की मैं कड़ी निंदा करता हूं. दोषियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या कोर्ट सजा देंगे या सरकारें? उत्तर प्रदेश में फर्जी एनकाउंटर हो रहे हैं. जब लोग एनकाउंटर की मांग करते हैं तो मुझे हैरानी होती है. तब तो कोर्ट बंद कर दीजिए, पुलिस और मुख्यमंत्री तय करें कि किसे गोली मारनी है.” पश्चिम बंगाल में मदरसों के सर्वे पर अल्वी ने भाजपा पर हमला बोला. उन्होंने कहा, “जहां भी भाजपा की सरकार है, वहां मस्जिदों और मदरसों पर हमला होता है.” About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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bihar engineering admission at 10 lakh rank civil cutoff jee mains college...

Last Updated:June 07, 2026, 22:06 IST Bihar Engineering Admission Cutoff: जेईई-मेंस की परीक्षा में कम स्कोर या 10 लाख तक रैंक लाने वाले छात्रों के लिए भी बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल इंजीनियर बनने का रास्ता साफ है. राज्य के विभिन्न जिलों में खुले नए इंजीनियरिंग कॉलेजों और सीटों की संख्या अधिक होने के कारण, सही काउंसलिंग रणनीति अपनाकर छात्र कम रैंक पर भी सरकारी कॉलेज में अपनी सीट पक्की कर सकते हैं. जानिए एडमिशन और काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया. ख़बरें फटाफट गयाजी: इंजीनियर बनने का सपना देख रहे हैं लेकिन जेईई एडवांस में सफलता नहीं मिली हो बावजूद बिहार के कॉलेज में जेईई मेंस के रैंक के आधार पर नामांकन लेकर इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर सकते हैं. बिहार के लगभग हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज है जहां जेईई मेंस और बीसीईसीई के रैंक पर नामांकन होता है. बिहार के टॉप फाइव इंजीनियरिंग कॉलेज में शामिल गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में नामांकन के लिए जेईई मेंस में 90 हजार से 10 लाख रैंक के बीच छात्रों का नामांकन होता है. बिहार में स्कोप ज्यादा, नामांकन की होड़गया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग का सिविल ब्रांच में नामांकन के लिए छात्रों में होड़ लगी रहती है. पिछले 2 साल की रैंक की बात करें तो जेईई मेंस में 1 लाख से 10 लाख के बीच के रैंक वाले छात्रों को सिविल ब्रांच मिला है. बिहार में सिविल इंजीनियरिंग एक प्रमुख और अत्यधिक मांग वाली शाखा है. यह बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, पुल, इमारत के निर्माण और योजना से जुड़ी ब्रांच है. इस कोर्स को करने के बाद ज्यादातर छात्र सरकारी नौकरी लेता चाहते हैं और बिहार में इसका स्कोप भी अधिक है. यहां पर है खूब मांग, मिलेगा अवसर भीदेश और राज्य में बन रहे नए एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स, एयरपोर्ट्स और स्मार्ट सिटीज, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे सड़कें, पुल, भवन, और रियल एस्टेट के कारण सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए भी प्लेसमेंट के शानदार मौके बन रहे हैं. इसके अलावे जूनियर इंजीनियर से लेकर सरकारी ठेकेदार और निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों में काम करके आप शानदार करियर बना सकते हैं. वहीं प्राइवेट सेक्टर में भी सिविल इंजीनियर की मांग हाल के वर्षो में खूब बढी है. सिविल ब्रांच की डिमांड ज्यादा, इस बार ये रहेगा रैंकगया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डिप्टी रजिस्ट्रार डाॅ.कृष्णा प्रसाद ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बिहार के ज्यादातर बच्चे सरकारी नौकरी में जाना चाहते हैं इसलिए सिविल ब्रांच की डिमांड ज्यादा रहती है. सरकारी नौकरियों में सबसे ज्यादा वैकेंसी सिविल इंजीनियर के लिए होती है. इन्होंने बताया इस कालेज में 120 सीट पर सिविल ब्रांच में नामांकन होता है. इस बार भी उम्मीद है 1 लाख से 10 लाख के बीच रैंक वाले छात्रों को यहां एडमिशन मिलेगा. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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पीएम की कुर्सी तक पहुंचने के दो रास्ते! नेहरू को मिली तैयार...

Last Updated:June 07, 2026, 21:04 IST नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम करने जा रहे हैं. लेकिन इस पड़ाव से एक दिलचस्प तुलना भी सामने आती है. जवाहरलाल नेहरू और नरेंद्र मोदी दोनों पीएम की कुर्सी तक पहुंचे, मगर उनके रास्ते बिल्कुल अलग थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जवाहर लाल नेहरू. मंजरी जोशी10 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे. इस मौके पर यह देखना भी दिलचस्प है कि मोदी और जवाहरलाल नेहरू दोनों देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे जरूर, लेकिन वहां तक पहुंचने के उनके रास्ते पूरी तरह अलग थे. जब जवाहरलाल नेहरू 1947 में देश के पहले प्रधानमंत्री बने, तब वे स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे. उन्हें कांग्रेस संगठन का पूरा समर्थन हासिल था. महात्मा गांधी का भरोसा भी उनके साथ था और आजादी की लड़ाई से कांग्रेस को देशभर में जबरदस्त सम्मान मिला हुआ था. उस समय भारत की राजनीति आज जैसी नहीं थी. कांग्रेस का पूरे देश में दबदबा था और विपक्षी दल बहुत कमजोर तथा बिखरे हुए थे. आजादी की खुशी और कांग्रेस के योगदान के कारण जनता का बड़ा वर्ग पार्टी के साथ खड़ा था. नेहरू के सामने नई आजाद हुई देश की संस्थाओं को खड़ा करने की बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के रास्ते में उन्हें बहुत ज्यादा राजनीतिक मुकाबले का सामना नहीं करना पड़ा. चुनावी संघर्ष से निकले मोदी नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर बिल्कुल अलग दौर में शुरू हुआ. प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने संगठन में लंबे समय तक काम किया, जमीनी राजनीति की, चुनाव लड़े और प्रशासनिक अनुभव हासिल किया. जिस दौर में मोदी उभरे, उस समय भारतीय राजनीति गठबंधन सरकारों, क्षेत्रीय दलों, वैचारिक टकराव और कड़े चुनावी मुकाबलों से भरी हुई थी. राष्ट्रीय राजनीति में किसी एक पार्टी का वैसा दबदबा नहीं था जैसा आजादी के बाद कांग्रेस का हुआ करता था. बीसवीं सदी के आखिरी वर्षों और इक्कीसवीं सदी के शुरुआती दौर में देश की राजनीति खंडित जनादेश, गठबंधन की मजबूरियों, भ्रष्टाचार के आरोपों और अलग-अलग राजनीतिक विचारों से प्रभावित रही. ऐसे माहौल में राष्ट्रीय नेतृत्व हासिल करने के लिए लगातार चुनाव जीतना और जनता का समर्थन बढ़ाना जरूरी था. पार्टी कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने तक मोदी का सफर लगातार चुनावी सफलताओं और जनसमर्थन पर आधारित रहा. भारत की राजनीति के दो अलग दौर News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi चुनावी संघर्ष से निकले मोदी नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर बिल्कुल अलग दौर में शुरू हुआ. प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने संगठन में लंबे समय तक काम किया, जमीनी राजनीति की, चुनाव लड़े और प्रशासनिक अनुभव हासिल किया. जिस दौर में मोदी उभरे, उस समय भारतीय राजनीति गठबंधन सरकारों, क्षेत्रीय दलों, वैचारिक टकराव और कड़े चुनावी मुकाबलों से भरी हुई थी. राष्ट्रीय राजनीति में किसी एक पार्टी का वैसा दबदबा नहीं था जैसा आजादी के बाद कांग्रेस का हुआ करता था. बीसवीं सदी के आखिरी वर्षों और इक्कीसवीं सदी के शुरुआती दौर में देश की राजनीति खंडित जनादेश, गठबंधन की मजबूरियों, भ्रष्टाचार के आरोपों और अलग-अलग राजनीतिक विचारों से प्रभावित रही. ऐसे माहौल में राष्ट्रीय नेतृत्व हासिल करने के लिए लगातार चुनाव जीतना और जनता का समर्थन बढ़ाना जरूरी था. पार्टी कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने तक मोदी का सफर लगातार चुनावी सफलताओं और जनसमर्थन पर आधारित रहा. भारत की राजनीति के दो अलग दौर नेहरू और मोदी की यात्राएं भारत के लोकतंत्र के दो अलग-अलग चरणों को दिखाती हैं. नेहरू उस दौर के नेता थे जब कांग्रेस का दबदबा था और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत उनके साथ थी. वहीं मोदी ऐसे समय में उभरे जब हर चुनाव कड़ी प्रतिस्पर्धा वाला था, राजनीतिक समर्थन बंटा हुआ था और राष्ट्रीय जनादेश हासिल करने के लिए कई स्तरों पर मुकाबला करना पड़ता था. एक नेता ऐसे राजनीतिक माहौल में आगे बढ़ा जहां एक ही आंदोलन और एक ही पार्टी का प्रभाव था. दूसरे नेता ने गठबंधन युग, क्षेत्रीय राजनीति और लगातार चुनावी संघर्ष के बीच अपनी जगह बनाई. मोदी के इस ऐतिहासिक पड़ाव के साथ यह भी साफ दिखाई देता है कि आजादी के बाद के सर्वसम्मति वाले राजनीतिक दौर से भारत अब प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र के एक नए युग में पहुंच चुका है. खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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बुंदेलखंड के यात्रियों को राहत, चर्लपल्ली एक्सप्रेस ट्रेन से नागपुर-हैदराबाद पहुंचना होगा...

Last Updated:June 07, 2026, 19:58 IST रीवा से हैदराबाद के लिए जाने वाली चर्रपल्ली एक्सप्रेस अब वाया सागर और बीना से होते हुए जाएगी यानी कि अब इस ट्रेन का ठहराव सागर जिले की दो प्रमुख स्टेशन सागर और बीना पर होगा जिसकी वजह से सागर शहर पूरे बुंदेलखंड के हजारों यात्रियों के लिए इसका फायदा मिलेगा सागर की रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. यहां लंबे समय से मध्य भारत के क्षेत्र को दक्षिण भारत से जोड़ने की जो मांग की जा रही थी. वह अब लगभग पूरी हो गई है यानी कि बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी अब नागपुर और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों से होने जा रही है. क्योंकि रीवा से हैदराबाद के लिए जाने वाली चर्रपल्ली एक्सप्रेस अब वाया सागर और बीना से होते हुए जाएगी यानी कि अब इस ट्रेन का ठहराव सागर जिले की दो प्रमुख स्टेशन सागर और बीना पर होगा जिसकी वजह से सागर शहर पूरे बुंदेलखंड के हजारों यात्रियों के लिए इसका फायदा मिलेगा यह ट्रेन नियमित रूप से चलाने की स्वीकृति मिली है. पिछले 3 – 4 दशकों से बुंदेलखंड एरिया को नागपुर और हैदराबाद जैसे महानगरों से जोड़ने की मांग चल रही थी. क्षेत्रीय लोगों के द्वारा इसको लेकर कई बार धरना प्रदर्शन किए गए. जनप्रतिनिधियों के द्वारा संसद में इसकी आवाज उठाई गई जिम्मेदार अधिकारी मंत्रियों से मुलाकात हुई पत्राचार हुआ. लेकिन हर बार यह मांग ठंडी बस्ती में चली जाती थी बरसों से चली आ रही इस मांग पर इस बार केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के द्वारा गंभीरता से लिया गया. और पिछले दिनों सागर सांसद ने इसको लेकर बैक टू बैक मुलाकातें की इस क्षेत्र की समस्याएं बताईं लोगों के पिछड़ेपन के बारे में और उन्हें किस तरह से दक्षिण भारत तक जाने में आसुविधाओं का सामना करना पड़ता है इन सब से परिचित करवाया. सागर-बीना होते हुए नागपुर तक जाएगी चर्लपल्ली एक्सप्रेससागर और इसके आसपास के जिलों की लोगों को ध्यान में रखते हुए वर्षों से चली आ रही है. इस मांग को लेकर उन्होंने आखिरकार स्वीकृति दे दी रेल मंत्री के द्वारा सागर सांसद के लिए 4 जून को पत्र लिखकर इसके बारे में जानकारी दी गई जिसमें उन्होंने लिखा है कि जन सुविधा के लिए आपकी संसदीय क्षेत्र सागर को हैदराबाद एवं अन्य शहरों से जोड़ने के लिए नई रेलगाड़ी का परिचालन किए जाने के संबंध में जानकर प्रसन्नता होगी. रीवा से हैदराबाद बाय सागर वेपीना नई रेलगाड़ी संख्या 20158/20157 रीवा चर्लपल्ली एक्सप्रेस के परिचालन को स्वीकृत कर दिया गया है. बुंदेलखंड की दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटीसागर और बुंदेलखंड क्षेत्र के लोग सबसे अधिक इलाज करने के लिए नागपुर और हैदराबाद जैसी शहरों में जाते हैं इसके अलावा यहां पर स्टूडेंट व्यापारी और आईटी सेक्टर के लोगों की भी खूब आवाजाही है अभी तक सागर से यात्री बसों या निजी वाहन के माध्यम से इन शहरों तक सफर करती है लेकिन रेल कनेक्टिविटी मिलने की वजह से इनकी पहुंच आसान हो जाएगी. किराया कम लगेगा सफर आरामदायक होता है. हालांकि यह ट्रेन कब से चालू की जाएगी इसका टाइम टेबल आना अभी बाकी है News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sagar,Madhya Pradesh Source link

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portugal shooting case। sunil meena gang history। पुर्तगाल में ठाएं-ठाएं! भारतीय गैंग...

होमताजा खबरदेश पुर्तगाल में ठाएं-ठाएं! भारतीय गैंग ने हमला कर कहा- कहीं भी छिपो ढूंढ लेंगे! Last Updated:June 07, 2026, 19:04 IST Portugal Firing: सात समंदर पार पुर्तगाल के विला नोवा डी मिलफोंटेस में भारतीय मूल के गुरप्रीत सिंह गिल के घर पर 15 से 20 राउंड ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं. इस अंतरराष्ट्रीय गैंगवार की जिम्मेदारी लॉरेंस सिंडिकेट और सुनील मीना गैंग से जुड़े शूटर राहुल आरके मीणा ने सोशल मीडिया पर ली है. वायरल वीडियो और ऑडियो के जरिए विरोधी गैंग को खुली धमकी दी गई है कि दुनिया के किसी भी कोने में छिपने पर उन्हें ढूंढकर सीधे जान से मार दिया जाएगा. पुलिस मामले की जांच कर रही है. नई दिल्‍ली. यूरोप के शांत देश पुर्तगाल की धरती उस वक्त दहल उठी जब वहां एक भारतीय मूल के नागरिक के ठिकाने पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं. पंजाब और उत्तर भारत से शुरू हुआ गैंगवार अब सात समंदर पार यूरोपीय देशों में भी अपना खूनी पैर पसार चुका है. पुर्तगाल के विला नोवा डी मिलफोंटेस इलाके में रहने वाले गुरप्रीत सिंह गिल के घर को निशाना बनाकर 15 से 20 राउंड अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसका एक डरावना वीडियो और ऑडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस दुस्साहसिक हमले के तुरंत बाद उत्तर भारत के कुख्यात सुनील मीना गैंग के गुर्गे राहुल आरके मीणा ने सोशल मीडिया पर आकर इस हमले की सरेआम जिम्मेदारी ली है. यह शूटर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्टिव लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट और अमन साहू गैंग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसने विदेशी धरती से विरोधी गुटों को दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढ निकालने की खौफनाक धमकी दी है. जगह नई, पैटर्न पुरानाक्राइम और इंटेलिजेंस के नजरिए से देखा जाए तो कनाडा और अमेरिका के बाद अब पुर्तगाल भारतीय मूल के गैंगस्टर्स के लिए नया वॉरज़ोन बनता जा रहा है. लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सिंडिकेट (जिसमें सुनील मीना, राहुल दुबे और अमन साहू गैंग शामिल हैं) अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम कर रहे हैं. इस घटना का पैटर्न बिल्कुल भारत या मुंबई जैसा ही है. पहले विरोधी या कारोबारी के घर पर डराने के लिए फायरिंग करवाना, उसका वीडियो बनाना और फिर सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर जिम्मेदारी लेते हुए खौफ का माहौल बनाना. ‘कहीं भी छिप जाओ, ढूंढ लेंगे’ पुर्तगाल जैसे देश में जहां कानून-व्यवस्था काफी सख्त मानी जाती है, वहां भारतीय गैंग्स द्वारा ऑटोमैटिक हथियारों से 20 राउंड फायरिंग करना बेहद चिंताजनक है. इसका मुख्य कारण यह है कि हाल के दिनों में कई भारतीय अपराधी फर्जी पासपोर्ट के सहारे पुर्तगाल और अन्य यूरोपीय देशों में शरण ले चुके हैं. वहां बैठकर ये भारत और खाड़ी देशों के व्यापारियों के साथ-साथ विदेशों में बसे अमीर भारतीयों को टारगेट कर रहे हैं. राहुल मीणा द्वारा पोस्ट में यह लिखना कि ‘दुनिया में कहीं भी छिप जाओ, ढूंढ लेंगे’, यह दर्शाता है कि इन गैंग्स का नेटवर्क कितना ग्लोबल हो चुका है. अब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों (जैसे NIA) को पुर्तगाल पुलिस और इंटरपोल के साथ मिलकर इन सिंडिकेट्स के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना होगा. पुर्तगाल फायरिंग से जुड़ी 5 मुख्य बातें • ताबड़तोड़ 20 राउंड फायरिंग: पुर्तगाल के विला नोवा डी मिलफोंटेस में भारतीय मूल के शख्स गुरप्रीत सिंह गिल के ठिकाने पर अचानक हमला हुआ. चश्मदीदों और दावों के मुताबिक, शूटरों ने दहशत फैलाने के लिए 15 से 20 राउंड गोलियां चलाईं.• सोशल मीडिया पर कुबूलनामा: वारदात के तुरंत बाद उत्तर भारत के कुख्यात सुनील मीना गैंग के गुर्गे ‘राहुल आरके मीणा’ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली. उसने इस हमले का वीडियो और एक धमकी भरा ऑडियो भी जारी किया है.• 6 मई के हमले का भी कनेक्शन: अपनी वायरल पोस्ट में राहुल मीणा ने न सिर्फ गुरप्रीत गिल बल्कि इससे पहले बीते 6 मई को पुर्तगाल के ही सिंट्रा इलाके में गुरदीप सिंह नामक व्यक्ति पर हुई फायरिंग की वारदात को भी अपने ही गैंग द्वारा अंजाम देने की बात कबूली है.• सिर्फ ट्रेलर थी यह फायरिंग: गैंग ने विरोधी गुटों को खुली चेतावनी देते हुए लिखा कि यह हमला सिर्फ उनके कान के पर्दे खोलने और डराने के लिए किया गया था. धमकी दी गई है कि अगर वे नहीं सुधरे तो अगली बार गोलियां सीधे सीने में उतारी जाएंगी.• विदेशी धरती पर रंगदारी और वर्चस्व: पोस्ट के अंत में राहुल दुबे गैंग, अमन साहू गैंग और सुनील मीना गैंग जैसे कई बड़े आपराधिक गुटों के नाम शामिल हैं. पुलिस के अनुसार, यह पूरा विवाद विदेशी धरती पर भारतीय प्रवासियों से वसूली और अपना वर्चस्व कायम करने से जुड़ा है. सवाल-जवाब1. पुर्तगाल में फायरिंग की यह ताज़ा घटना किस जगह और किसके खिलाफ हुई?यह घटना पुर्तगाल के विला नोवा डी मिलफोंटेस में हुई, जहां हमलावरों ने गुरप्रीत सिंह गिल नामक व्यक्ति के ठिकाने और घर को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ फायरिंग की.2. किस गैंगस्टर या गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है?इस हमले की जिम्मेदारी सुनील मीना और लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट से जुड़े उत्तर भारत के गैंगस्टर ‘राहुल आरके मीणा’ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर ली है.3. सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल मीणा ने और किस पुरानी वारदात का जिक्र किया है?राहुल मीणा ने अपनी पोस्ट में दावा किया है कि इससे पहले 6 मई को पुर्तगाल के सिंट्रा (Sintra) इलाके में गुरदीप सिंह नाम के शख्स पर हुई फायरिंग को भी उसी के गैंग ने अंजाम दिया था.4. हमलावर गैंग ने विरोधी गुट को सोशल मीडिया पर क्या धमकी दी है?गैंग ने धमकी दी है कि यह फायरिंग सिर्फ एक चेतावनी थी. अगर विरोधी पुर्तगाल छोड़कर नहीं भागे या उनकी बात नहीं मानी, तो अगली बार उन्हें सीधे जान से मार दिया जाएगा.5. इस हमले के पीछे सुरक्षा एजेंसियां क्या मुख्य वजह मान रही हैं?शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, इसके पीछे विदेशी धरती पर रह रहे भारतीय प्रवासियों से रंगदारी (Extortion) वसूलना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना आपराधिक वर्चस्व कायम करना मुख्य वजह है. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ

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अब ममता के हाथों से कोलकाता नगर निगम भी गया? KMC बोर्ड...

Last Updated:June 07, 2026, 17:47 IST फिरहाद हकीम के इस्तीफे से केएमसी में संकट गहरा गया है. सीएम सुवेंदु अधिकारी की सरकार एक्शन की तैयारी में है. सरकार ने केएमसी अधिकारियों को नोटिस भेजा है. नोटिस में टीएमसी के बोर्ड को भंग करने की बात कही गई है. कई बोरो चेयरमैन और मेयर इन काउंसिल अपना दे चुके हैं. राज्य सरकार केएमसी एक्ट की धारा 117 के तहत एक्शन ले सकती है. ख़बरें फटाफट टीएमसी में आंतरिक कलह ने ममता बनर्जी की परेशानी बढ़ा दी है. कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ने रविवार को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में अपनी पार्टी के पार्षदों के साथ होने वाली अहम बैठक रद्द कर दी. उन पार्षदों को मीटिंग रद्द होने की सूचना पहले ही भेज दी गई है, जिन्हें रविवार को कोलकाता के पूर्वी बाहरी इलाके में पार्टी के राज्य मुख्यालय, तृणमूल भवन में मौजूद रहने के लिए कहा गया था. हालांकि, पार्षदों ने मीटिंग रद्द होने की कोई वजह नहीं बताई है. यह भी पता चला है कि ममता बनर्जी सोमवार को विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक की मीटिंग में शामिल होने के लिए नई दिल्ली जाने वाली हैं. उनके भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी शनिवार को ही नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे. केएमसी पार्षदों के साथ रविवार की मीटिंग को अहम माना जा रहा था, क्योंकि पश्चिम बंगाल के पूर्व म्युनिसिपल अफेयर्स और अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्टर और केएमसी के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई राज्य सरकार ने शनिवार शाम केएमसी अधिकारियों को एक नोटिस भेजा. इसमें उनसे यह बताने को कहा गया है कि मेयर के इस्तीफे के बाद केएमसी में तृणमूल कांग्रेस के कंट्रोल वाले बोर्ड को क्यों भंग नहीं किया जाना चाहिए. मौजूदा केएमसी बोर्ड संकट से जूझ रहा है, न सिर्फ हकीम के मेयर पद से इस्तीफे की वजह से, बल्कि बोर्ड के कुछ अन्य चुने हुए प्रतिनिधियों के इस्तीफे की वजह से भी, जिनमें एक सदस्य (मेयर-इन-काउंसिल) और कुछ बोरो चेयरमैन शामिल हैं. यह नोटिस टीएमसी के कंट्रोल वाले बोर्ड के बने रहने को लेकर कानूनी पेचीदगियों के बीच भेजा गया है. केएमसी चेयरपर्सन माला रॉय और राज्य के म्युनिसिपल अफेयर्स और अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के बीच इस मुद्दे पर बहस और जवाबी बहस हुई थी. राज्य सरकार के डिपार्टमेंट का तर्क है कि केएमसी एक्ट, 1980 की धारा 117(1) के तहत, जो राज्य सरकार को कॉरपोरेशन को भंग करने का अधिकार देती है, मेयर के इस्तीफे के बाद तृणमूल कांग्रेस द्वारा चलाया जा रहा बोर्ड खत्म हो जाना चाहिए. इसके अलावा, हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित होने के बाद से रविवार सुबह तक, पुलिस ने केएमसी में तृणमूल कांग्रेस के कुल आठ पार्षदों को भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और महिलाओं के साथ गलत व्यवहार जैसे अलग-अलग आरोपों में गिरफ्तार किया है. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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Mamata Banerjee crisis | TMC internal rift | काउंसलर्स ने भी दिखाया...

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली ऐतिहासिक हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगी आग अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी है और इसके लपटें अब कोलकाता नगर निगम (KMC) तक पहुंच गई हैं. पहले विधानसभा में 58 विधायकों का अलग गुट बनना और फिर सबसे मजबूत मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले फिरहाद हकीम का कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा देना टीएमसी के लिए बड़ा झटका था. लेकिन रविवार, 7 जून 2026 को जो कुछ भी हुआ, उसने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है. जमीनी स्तर के जनप्रतिनिधियों यानी नगर निगम के पार्षदों (Councillors) ने भी अब ममता बनर्जी के खिलाफ खुली बगावत का बिगुल फूंक दिया है. कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के निजी आवास पर रविवार को टीएमसी के पार्षदों की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद कोलकाता नगर निगम के भीतर मची खलबली को शांत करना और पार्षदों को एकजुट रखना था. लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि अधिकांश पार्षदों ने ममता बनर्जी से मिलने और इस बैठक में शामिल होने से साफ इनकार (Refuse) कर दिया. अपनी ही पार्टी के पार्षदों द्वारा इस तरह नजरअंदाज किए जाने और खुली नाफरमानी से ममता बनर्जी गुस्से से लाल हो गईं. उन्होंने भारी नाराजगी और आक्रोश में आकर इस बैठक को तुरंत रद्द कर दिया. कालीघाट का गुस्सा अब दिल्ली की मेज पर दिखेगा इस घोर अपमान और सांगठनिक नाकामी के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में रुककर डैमेज कंट्रोल करने के बजाय सीधे दिल्ली का रुख करने का फैसला किया. वे कोलकाता एयरपोर्ट से सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए रवाना (Left for Delhi) हो चुकी हैं, जहां सोमवार, 8 जून को विपक्षी ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक होने जा रही है. कालीघाट का गुस्सा अब दिल्ली की मेज पर दिखेगा इस घोर अपमान और सांगठनिक नाकामी के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में रुककर डैमेज कंट्रोल करने के बजाय सीधे दिल्ली का रुख करने का फैसला किया. वे कोलकाता एयरपोर्ट से सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए रवाना (Left for Delhi) हो चुकी हैं, जहां सोमवार, 8 जून को विपक्षी ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक होने जा रही है. बैठक का समय और महत्व: दिल्ली में कल होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की इस महाबैठक में पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद विपक्ष की भावी रणनीति तय की जाएगी. अभिषेक बनर्जी पहले से मौजूद: ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले से ही दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. अब ममता बनर्जी भी वहां पहुंच रही हैं, जिससे यह साफ है कि दोनों नेता दिल्ली में रहकर ही बंगाल के इस सबसे बड़े संकट का हल निकालने की कोशिश करेंगे. क्यों बगावत पर आमादा हैं टीएमसी के पार्षद? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायकों के बाद पार्षदों का इस तरह दीदी से मुंह मोड़ लेना यह दिखाता है कि तृणमूल कांग्रेस का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है. कोलकाता में मौजूद एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा- “फिरहाद हकीम केवल कोलकाता के मेयर नहीं थे, बल्कि वे स्थानीय पार्षदों और जमीनी कैडर के सबसे बड़े मसीहा थे. उनके इस्तीफे के बाद पार्षदों को अपना राजनीतिक भविष्य पूरी तरह अंधकार में नजर आ रहा है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की नई भाजपा सरकार ने कोलकाता नगर निगम के खिलाफ जिस तरह का आक्रामक रुख अपनाया है, उससे पार्षदों को डर है कि कहीं उनका वार्ड फंड और राजनीतिक अस्तित्व ही समाप्त न हो जाए. यही कारण है कि वे अब ममता बनर्जी के बजाय बागी गुट या सत्तापक्ष के संपर्क में आ रहे हैं.” ममता बनर्जी इस समय अपने जीवन के सबसे कठिन और अकेले दौर से गुजर रही हैं. कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू में संविधान की प्रति लेकर धरना देने वाली दीदी अब अपनी ही पार्टी के भीतर अलग-थलग पड़ चुकी हैं. दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने की आखिरी उम्मीद है. लेकिन सवाल यह उठता है कि जब घर का चूल्हा ही बिखर रहा हो, तो दिल्ली की चौखट पर बैठकर ममता बनर्जी विपक्ष को क्या दिशा दे पाएंगी? बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से एक नए और अप्रत्याशित युग की ओर बढ़ चुकी है. Source link

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major abhilasha barak profile। Who is major abhilasha barak। लेबनान की तबाही...

होमफोटोदेश लेबनान की तबाही में दिखा भारत की बेटी का दम, अब मेजर अभिलाषा के आगे झुका UN! Last Updated:June 07, 2026, 15:55 IST Major Abhilasha Barak Profile: मेजर अभिलाषा बराक ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर भारत का ऐतिहासिक गौरव बढ़ाया है. उन्हें वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित ‘यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मेजर अभिलाषा को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्मान उनकी उत्कृष्ट सेवा और संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षा प्रयासों में भारत के दीर्घकालिक योगदान का प्रतीक है. उनकी यह सफलता देश की उन अनगिनत बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो भारतीय सेना में शामिल होकर राष्ट्र और मानवता की सेवा करना चाहती हैं. मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की एक जांबाज सैन्य अधिकारी हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा वैश्विक स्तर पर अत्यंत प्रतिष्ठित ‘2025 यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह वैश्विक सम्मान लेबनान में तैनाती के दौरान स्थानीय महिलाओं और किशोरियों के बीच शानदार आउटरीच तथा सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मिला है. मेजर अभिलाषा बराक वर्तमान में पश्चिम एशियाई देश लेबनान में ‘संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल’ (UNIFIL) में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रही हैं. वह वहां भारतीय बटालियन के साथ तैनात ‘फीमेल एंगेजमेंट टीम’ (FET) की कमांडर के रूप में नेतृत्व कर रही हैं. इसके साथ ही वह जेंडर फोकल प्वाइंट भी हैं, जहां वह अन्य शांति सैनिकों को जेंडर संवेदीकरण का प्रशिक्षण देती हैं. इस अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने से पहले भी मेजर अभिलाषा बराक ने भारतीय सैन्य इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया था. वह भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट (युद्धक विमान चालक) हैं. उन्होंने आर्मी एविएशन कोर में शामिल होकर इस कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया और देश की अनगिनत युवा बेटियों के लिए नई राहें खोल दीं. Add News18 as Preferred Source on Google मेजर अभिलाषा बराक संयुक्त राष्ट्र का यह प्रतिष्ठित जेंडर एडवोकेट पुरस्कार हासिल करने वाली भारत की तीसरी सैन्य अधिकारी बन गई हैं. उनसे पहले मेजर सुमन गवानी को वर्ष 2019 में दक्षिण सूडान (UNMISS) में और मेजर राधिका सेन को वर्ष 2023 में कांगो (MONUSCO) में उनके असाधारण कार्यों के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस वैश्विक सम्मान से नवाजा जा चुका है. विश्व संस्था द्वारा प्रतिवर्ष 29 मई को मनाए जाने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांतिसैनिक दिवस’ के विशेष अवसर पर मेजर अभिलाषा को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक भव्य समारोह में सम्मानित किया जाएगा. यह पुरस्कार वर्ष 2016 में सैन्य शांति अभियानों में लैंगिक समानता और सुरक्षा परिषद के ऐतिहासिक प्रस्ताव 1325 को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था. भारत दुनिया भर में यूएन शांति मिशनों में सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले प्रमुख देशों में शामिल है. लेबनान में भारत के 642 जांबाज शांतिसैनिक तैनात हैं, जो चौथे स्थान पर हैं. मेजर अभिलाषा बराक ने वहां स्थानीय महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करके और शांति कार्यों में लैंगिक दृष्टिकोण को बेहतर तरीके से शामिल करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान-सम्मान काफी बढ़ाया है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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भाजपा से वैचारिक मतभेद पर… नीतीश के असली उत्तराधिकारी निशांत, उपेंद्र कुशवाहा...

Last Updated:June 07, 2026, 14:55 IST Upendra Kushwaha News: राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने अपनी नई सांगठनिक टीम की घोषणा कर दी है, जिसमें विधायक आलोक सिंह को बिहार का नया प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है. इसके साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने गठबंधन की राजनीति, पार्टी विचारधारा और बिहार के भविष्य के नेतृत्व को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले बयान दिए हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राजनीति में आगे लाने की वकालत करते हुए उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री  बनाने की मांग की है. उपेंद्र कुशवाहा के बयान के कई राजनीतिक मायने पटना. बिहार की राजनीति में एक बार फिर उत्तराधिकार की चर्चा तेज हो गई है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की घोषणा के साथ ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने साफ कहा कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के वास्तविक राजनीतिक उत्तराधिकारी उनके पुत्र निशांत कुमार (Nishant Kumar) हैं. साथ ही उन्होंने जेडीयू को लेकर अपना पुराना भावनात्मक जुड़ाव भी सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के संगठनात्मक चुनाव के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने विधायक आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष, प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तथा हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव घोषित किया. इस अवसर पर कुशवाहा ने कहा कि उनकी पार्टी और भाजपा की विचारधाराएं पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं, लेकिन व्यापक राजनीतिक और सामाजिक उद्देश्यों को लेकर गठबंधन की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को साथ लाने का माध्यम ही गठबंधन है और राष्ट्रीय लोक मोर्चा NDA में पूरी मजबूती के साथ बना रहेगा. आरएलएम की नई टीम का गठन राष्ट्रीय लोक मोर्चा के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए नए पदाधिकारियों का चयन किया गया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दो नेताओं ने नामांकन दाखिल किया था, जिसके बाद सर्वसम्मति से अंतिम फैसले के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को अधिकृत किया गया. उपेंद्र कुशवाहा ने विधायक आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया है. संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पार्टी के भीतर सांगठनिक मजबूती के लिए मतदान की व्यवस्था को भी जरूरी बताया गया है. विचारधारा अलग, पर गठबंधन जरूरी पार्टी की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राजनीतिक विचारधारा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मेल नहीं खाती है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचारधाराओं के बावजूद लोगों को एक मंच पर लाने के लिए गठबंधन की जरूरत होती है और आरएलएम वर्तमान गठबंधन में पूरी मजबूती के साथ शामिल है. उनका कहना है कि बिहार को बचाने और सामाजिक न्याय की विचारधारा को बनाए रखने के लिए यह एकजुटता बेहद आवश्यक है. पुराने साथियों की वफादारी पर भरोसा उपेंद्र कुशवाहा ने उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी आश्वस्त किया जो शुरुआती दिनों में समता पार्टी के समय से नीतीश कुमार के साथ संघर्ष कर रहे थे. उन्होंने दावा किया कि समता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के निर्माण में उनके जैसे नेताओं ने अपना खून-पसीना बहाया है. इसलिए पार्टी में जब भी कोई आंतरिक परेशानी होती है, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से दर्द महसूस होता है. कुशवाहा ने कहा कि पुराने संघर्षी साथी कभी भी बीजेपी या राजद (आरजेडी) का रुख नहीं करेंगे, बल्कि वे जहां हैं, वहीं मजबूती से डटे रहेंगे. ‘निशांत कुमार ही नीतीश के असली उत्तराधिकारी’ उपेंद्र कुशवाहा के बयान का सबसे अहम हिस्सा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार से जुड़ा रहा. उपेंद्र कुशवाहा ने पुरजोर तरीके से कहा कि नीतीश कुमार के राजनीतिक अस्तित्व और जदयू को बचाए रखने के लिए निशांत कुमार को बहुत पहले ही राजनीति में आगे लाया जाना चाहिए था. उन्होंने खुलकर मांग रखी कि निशांत कुमार को सिर्फ कैबिनेट मंत्री नहीं, बल्कि बिहार का डिप्टी सीएम बनाया जाना चाहिए क्योंकि वही नीतीश कुमार के वास्तविक और सच्चे राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 13 जून को इसी कड़ी में कुशवाहा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राष्ट्रीय टीम के गठन और नेतृत्व को लेकर आगामी दिनों में बड़ी बैठक होने जा रही है. पार्टी के सांगठनिक ढांचे को अंतिम रूप देने और राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 13 जून को देश की राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण मतदान प्रक्रिया और बैठक का आयोजन तय किया गया है, जिसके बाद आगामी राजनीति को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति बिल्कुल साफ हो जाएगी. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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