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कल से हाजिर होगा मिसिंग लिंक, बदल जाएगा मुंबई से पुणे का...

Last Updated:April 30, 2026, 21:23 IST मिसिंग लिंक के रास्‍ते मुंबई-पुणे एक्‍सप्रेसवे पर कल से आवाजाही शुरू हो जाएगी. मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस नवनिर्मित कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे. मिसिंग लिंक की क्‍या खासियत है और इसमें आपका सफर कैसा होने वाला है, जानने के लिए पढ़ें कॉमिक गैलरी. सुबह का वक्त था. मुंबई से पुणे की ओर जाने वाले एक्सप्रेसवे पर हल्की धूप फैल रही थी. कार में बैठे रोहित और उसकी पत्नी शुची एक लंबे समय बाद साथ में रोड ट्रिप पर निकले थे. ‘रोहित, आज ट्रैफिक कुछ कम लग रहा है, है ना?’ शुची ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा. रोहित मुस्कुराया, ‘अरे, तुमने खबर नहीं देखी क्या? आज से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का ‘मिसिंग लिंक’ शुरू हो गया है. अब वही पुराना खोपोली-लोणावला वाला झंझट खत्म!’<br />‘सच में? वही घाट वाला हिस्सा, जहां हमेशा जाम लगता था?’ शुची ने उत्सुकता से पूछा. ‘हां, बिल्कुल वही,’ रोहित ने जवाब दिया, ‘उसी को बायपास करने के लिए ये नया रास्ता बनाया गया है. अब सीधा, चौड़ा और काफी सुरक्षित रूट मिल गया है.’<br />कार धीरे-धीरे नई सुरंग की ओर बढ़ने लगी. सामने विशाल टनल का प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा था. Add News18 as Preferred Source on Google ‘वाह! ये सुरंग तो बहुत बड़ी लग रही है,’ शुची ने आश्चर्य से कहा.<br />रोहित ने समझाया, ‘ये कोई छोटी-मोटी सुरंग नहीं है. इसमें दो बड़ी टनल हैं—एक करीब 8.92 किलोमीटर और दूसरी 1.75 किलोमीटर लंबी. और सुनो, ये दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंगों में भी गिनी जाती हैं.’<br />‘इतनी चौड़ी?’ शुची ने हैरानी से कहा.<br />‘हां, करीब 23.75 मीटर चौड़ी,’ रोहित ने जवाब दिया, ‘ताकि गाड़ियां आराम से और बिना रुकावट के चल सकें. और सबसे खास बात—इनमें से एक सुरंग लोणावला झील के नीचे से गुजरती है.’<br />‘कमाल है! सच में टेक्नोलॉजी ने बहुत तरक्की कर ली है,’ शुची ने कहा.<br />कार अब सुरंग के अंदर प्रवेश कर चुकी थी. रोशनी और साफ-सुथरी सड़क देखकर शुची को सफर काफी आरामदायक लग रहा था. ‘पहले इसी रास्ते पर कितनी दिक्कत होती थी,’ शुची ने याद करते हुए कहा, ‘तेज मोड़, बारिश में फिसलन और ऊपर से जाम… कितना समय बर्बाद होता था.’<br />रोहित ने सिर हिलाया, ‘सही कहा तुमने. लेकिन अब देखो, इस नए मिसिंग लिंक से मुंबई-पुणे की दूरी करीब 6 किलोमीटर कम हो जाएगी. और लगभग 30 मिनट का समय भी बचेगा.’ ‘मतलब हम जल्दी पहुंच जाएंगे?’ शुची ने खुश होकर पूछा. ‘बिल्कुल,’ रोहित हंसा, ‘और सिर्फ समय ही नहीं, ईंधन की भी बचत होगी. जाम में फंसना नहीं पड़ेगा, तो गाड़ी स्मूद चलेगी.’ ‘ये तो सच में बहुत बड़ा फायदा है,’ शुची ने कहा, ‘और सुरक्षा भी बढ़ेगी, है ना?’<br />‘हां, यही तो सबसे बड़ी बात है,’ रोहित ने गंभीर होकर कहा, ‘पुराने घाट सेक्शन में हादसे ज्यादा होते थे. लेकिन अब सीधे और चौड़े रास्ते की वजह से दुर्घटनाएं काफी कम होंगी.’<br />सुरंग से बाहर निकलते ही सामने टाइगर वैली का खूबसूरत नजारा दिखा. ऊंचाई पर बना केबल-स्टेड ब्रिज देखकर शुची की आंखें चमक उठीं.<br />‘ये ब्रिज तो फिल्म जैसा लग रहा है!’ शुची ने कहा.<br />रोहित ने बताया, ‘ये करीब 182 मीटर ऊंचा है. इस पूरे प्रोजेक्ट को बनाना आसान नहीं था, लेकिन अब इसका फायदा हम जैसे लाखों लोगों को मिलेगा.’ ‘और टोल?’ शुची ने तुरंत सवाल किया.<br />रोहित मुस्कुराया, ‘सबसे अच्छी बात—इस पर कोई अतिरिक्त टोल नहीं लगेगा.’<br />‘वाह, मतलब फायदा ही फायदा!’ शुची हंस पड़ी. थोड़ी देर चुप रहने के बाद शुची बोली, ‘सोचो, इससे सिर्फ हमारा ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य का फायदा होगा. मुंबई और पुणे के बीच सफर आसान होगा, तो कारोबार भी तेजी से बढ़ेगा.’<br />‘बिल्कुल,’ रोहित ने सहमति जताई, ‘लॉजिस्टिक्स, व्यापार—सबको फायदा मिलेगा. यही तो असली विकास है.’ कार तेजी से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी. रास्ता अब पहले से ज्यादा आसान, सुरक्षित और तेज महसूस हो रहा था.<br />शुची ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘सच में, ये ‘मिसिंग लिंक’ नहीं, बल्कि हमारी जिंदगी का ‘सुकून लिंक’ है.’<br />रोहित ने हंसते हुए कहा, ‘बिल्कुल सही कहा तुमने.’ First Published : April 30, 2026, 21:23 IST Source link

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मजदूर दिवस 2026: कब है लेबर डे? जानें भारत में इसका इतिहास...

वह पसीना जिसने गगनचुंबी इमारतों की नींव रखी. वह हाथ जिन्होंने तपती धूप में पत्थर तोड़कर सड़कों का जाल बिछाया और वह जज्बा जिसने कारखानों के शोर के बीच राष्ट्र की आर्थिक प्रगति का मौन संगीत लिखा. उन्हीं हाथों के सम्मान का दिन आने वाला है. लेबर डे यानी वह महापर्व जो लाल झंडे की क्रांति और शिकागो की गलियों से शुरू हुए संघर्ष की गूंज है. यह महज एक तारीख नहीं बल्कि उन करोड़ों बेनाम चेहरों की विजयगाथा है जिन्होंने अपने खून-पसीने से विकास की इबारत लिखी है. आइए जानते हैं कैसे 15 घंटे की गुलामी की जंजीरें टूटीं और 8 घंटे के हक का उदय हुआ. भारत में पहली बार कब मना लेबर डे? भारत में लेबर डे मनाने की परंपरा करीब एक सदी पुरानी है. देश में पहली बार 1 मई, 1923 को मद्रास (अब चेन्नई) में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा इसे मनाया गया था. उस समय पहली बार ‘लाल झंडे’ का इस्तेमाल किया गया था जो श्रमिकों के संघर्ष और एकता का प्रतीक बना. दुनिया भर में इस दिन की शुरुआत 19वीं सदी के अंत में अमेरिका के शिकागो में हुए हेमार्केट मामले से हुई थी, जहां मजदूरों ने काम के घंटे 15-15 घंटे से घटाकर 8 घंटे करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था. लेबर डे की दुनिया भर में क्‍या है तारीख? भारत सहित दुनिया के लगभग 80 से अधिक देशों में श्रमिक दिवस 1 मई को ही मनाया जाता है. हालांकि, अलग-अलग देशों में इसके समय और नाम में विविधता देखी जाती है: · भारत और चीन: यहां 1 मई को सार्वजनिक अवकाश होता है और इसे मजदूरों के सम्मान में बड़े स्तर पर मनाया जाता है. · अमेरिका और कनाडा: इन देशों में लेबर डे मई में नहीं, बल्कि सितंबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है. · ऑस्ट्रेलिया: यहां अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर मजदूर दिवस मनाया जाता है, जो मुख्य रूप से मार्च या अक्टूबर में पड़ता है. लेबर डे का सांस्‍कृतिक महत्‍व भारत जैसे विकासशील देश में लेबर डे का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व बहुत गहरा है. यह सिर्फ एक छुट्टी का दिन नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान का पर्व है. 1. मजदूरों के अधिकारों का जश्न: यह दिन इस बात की याद दिलाता है कि किसी भी उद्योग या व्यापार की सफलता के पीछे श्रमिकों का पसीना होता है. सामाजिक रूप से यह दिन मजदूरों को उनके कानूनी अधिकारों, उचित वेतन और कार्यस्थल पर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का अवसर है. 2. वर्ग भेद को मिटाना: सांस्कृतिक रूप से मई दिवस समाज में फैले ऊंच-नीच के भेदभाव को कम करने का संदेश देता है. यह सिखाता है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और हर हाथ जो श्रम करता है, वह सम्मान का पात्र है. 3. आर्थिक प्रगति की रीढ़: भारत की जीडीपी और बुनियादी ढांचे के विकास में असंगठित और संगठित दोनों क्षेत्रों के मजदूरों का बड़ा योगदान है. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और श्रम कानूनों के प्रति जागरूकता फैलाना इस दिन का मुख्य उद्देश्य होता है. सवाल-जवाब भारत में लेबर डे कब मनाया जाता है? भारत में हर साल 1 मई को लेबर डे (मई दिवस) मनाया जाता है. साल 2026 में यह शुक्रवार के दिन पड़ेगा. भारत में पहली बार लेबर डे कहां मनाया गया था? भारत में पहली बार 1 मई 1923 को मद्रास (चेन्नई) में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा लेबर डे मनाया गया था. लेबर डे का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के योगदान को सम्मान देना और उनके अधिकारों व कार्यस्थलों पर काम के घंटों (8 घंटे) के प्रति जागरूकता फैलाना है. Source link

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कांग्रेस में कुर्सी का घमासान! उधर खरगे का ‘सोनिया ही मालिक’ वाला...

कांग्रेस चुनावी मोड से जब भी बाहर आती है, तो घर के अंदर मचे बवंडर को संभालने में जुट जाती है. ऐसा ही कुछ फ‍िर हुआ है. मामला कर्नाटक में कुर्सी का है. सीएम स‍िद्धारमैया कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं, और डीके श‍िवकुमार कुमार बगल में टेबल पर बैठे इंतजार कर रहे हैं, ब‍िल्‍कुल इस फोटो की तरह… लेकिन एक ट्व‍िस्‍ट भी है. इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कह बैठे क‍ि “मेरे बारे में फैसला तो सोनिया गांधी ही लेती हैं”… क्‍या ये स‍िर्फ बयान है, या फ‍िर 10 जनपथ की डोर में फंसा पेंच… बात कुछ भी कुर्सी तो फंसी ही है. मई 2023 में जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, तो कांग्रेस की प्रचंड जीत के जश्न के बीच ही ‘अगला मुख्यमंत्री कौन?’ का सवाल खड़ा हो गया था. एक तरफ अनुभवी सिद्धारमैया थे, तो दूसरी तरफ संकटमोचक और संगठन पर मजबूत पकड़ रखने वाले डीके शिवकुमार. घंटों चली बैठकों के बाद एक कथित ‘पावर शेयरिंग फॉर्मूला’बना, जिसके तहत सिद्धारमैया को पहले कार्यकाल की कमान सौंपी गई. फार्मूला देखकर नारागी  20 नवंबर 2025 को इस सरकार ने अपना आधा कार्यकाल यानी ढाई साल पूरा कर लिया. जैसे ही यह तारीख गुजरी, डीके शिवकुमार के खेमे में हलचल तेज हो गई. समर्थकों ने मांग शुरू कर दी कि अब समझौते के मुताबिक सत्ता ट्रांसफर हो जानी चाह‍िए. लेकिन सिद्धारमैया आसानी से कुर्सी छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहे हैं, और यहीं से कांग्रेस में ‘भारी बवाल’ की शुरुआत होती है. खरगे का नाम और ‘मास्टरस्ट्रोक’ कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने एक नया दांव चलते हुए कह दिया कि अगर मल्लिकार्जुन खरगे मुख्यमंत्री बनते हैं, तो पूरी पार्टी उनका स्वागत करेगी. यह बयान आग में घी डालने जैसा था. परमेश्वर का यह सुझाव डीके शिवकुमार की राह में रोड़ा अटकाने और सिद्धारमैया को सुरक्षित रास्ता देने की कोशिश के रूप में देखा गया. जब मीडिया ने खरगे से पूछा कि क्या वे मुख्यमंत्री बनेंगे? इस पर खरगे कह बैठे, ‘मीडिया और कुछ लोग कहते हैं कि अगर मैं मुख्यमंत्री बन जाऊं तो बेहतर होगा. लेकिन भाग्य से ज्यादा मेरी विचारधारा और पार्टी के लिए मेरी सेवा के आधार पर सोनिया गांधी ही मेरे बारे में निर्णय लेती हैं. अभी यह सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि राज्य में पहले से ही एक मुख्यमंत्री हैं. अगर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मैं मिलकर कोई फैसला लेते हैं, तो उसमें समय लगेगा. फिलहाल इंतजार करना होगा.’ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे. सोन‍िया को आगे कर क्‍या मैसेज दे रहे खरगे? खरगे इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. सैद्धांतिक रूप से वे पार्टी में सबसे बड़े पद पर हैं. लेकिन यह कहकर कि उनका फैसला सोनिया गांधी लेती हैं, उन्होंने यह संदेश दिया कि वे आज भी गांधी परिवार के सबसे वफादार सिपाही हैं. यह बयान उन आलोचकों के लिए भी जवाब है जो कहते हैं कि खरगे केवल रबर स्टैंप अध्यक्ष हैं. उन्होंने इसे अपनी ताकत के रूप में पेश किया कि उनका रिश्ता सीधे आलाकमान से है. खरगे जानते हैं कि सिद्धारमैया और डीके की लड़ाई में किसी एक का पक्ष लेना पार्टी के लिए आत्मघाती हो सकता है. सोनिया गांधी का नाम लेकर उन्होंने गेंद दिल्ली के पाले में डाल दी और खुद को एक न्यूट्रल लेकिन निर्णायक भूमिका में बनाए रखा. दलित कार्ड और मुख्यमंत्री की रेस खरगे कर्नाटक से आते हैं और राज्य के सबसे बड़े दलित नेताओं में से एक हैं. उनके नाम की चर्चा होने से डीके शिवकुमार के दावों को चुनौती मिलती है. अगर स्थिति हाथ से निकली, तो आलाकमान खरगे को ‘कॉम्प्रोमाइज कैंडिडेट’ के रूप में बेंगलुरु भेज सकता है. डीके शिवकुमार की बेचैनी और ‘सीक्रेट एग्रीमेंट’ डीके शिवकुमार ने हाल ही में स्वीकार किया कि सरकार गठन के समय कुछ गोपनीय समझौते हुए थे. उनके समर्थक अब दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. डीके कहते हैं क‍ि उन्होंने 2023 के चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत और संसाधन लगा दिए थे, और अब उनका हक बनता है. लेकिन सिद्धारमैया की लोकप्रियता राजनीति कांग्रेस के लिए लोकसभा और आगामी चुनौतियों के लिहाज से जरूरी है. Source link

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Business Idea: नौकरी छोड़ शुरू किया ये काम! वर्मी कम्पोस्ट ने दिलाई...

Last Updated:April 30, 2026, 15:29 IST Jalore Organic Farming Success: जालोर के युवाओं ने वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) के उत्पादन को एक बेहतरीन बिजनेस स्टार्टअप में बदलकर सफलता की नई इबारत लिखी है. जैविक खेती के बढ़ते चलन ने इस ‘काले सोने’ यानी वर्मी कम्पोस्ट की मांग को न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि गुजरात जैसे बड़े बाजार तक पहुंचा दिया है. इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत और अत्यधिक मुनाफा है, जो इसे ग्रामीण युवाओं के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है. वर्मी कम्पोस्ट न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि रसायन मुक्त कृषि को भी बढ़ावा देता है. जालोर के इन युवाओं ने साबित कर दिया है कि पारंपरिक खेती के साथ जुड़कर या इससे जुड़ा कोई सूक्ष्म व्यवसाय शुरू करके भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है. ख़बरें फटाफट जालौर: जालोर में खेती अब सिर्फ परंपरागत तरीका नहीं रही, बल्कि एक सफल बिजनेस मॉडल के रूप में उभर रही है. यहां के युवा किसान बलवंत लखाणी ने ऑस्ट्रेलियाई केंचुओं की मदद से वर्मी कम्पोस्ट यानी ‘काला सोना’ तैयार कर खेती में नई दिशा दी है. कम लागत और ज्यादा मुनाफे वाले इस मॉडल ने न सिर्फ उनकी किस्मत बदली, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का काम किया है. बलवंत लखाणी बताते हैं कि उन्होंने इस काम की शुरुआत कच्चे गोबर से की. सबसे पहले गोबर को 10 से 15 दिनों तक एक जगह पर इकट्ठा कर उसे अच्छी तरह भिगोया जाता है, ताकि उसमें नमी बनी रहे. इसके बाद करीब 20 फीट लंबी बेड तैयार की जाती है, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई केंचुए डाले जाते हैं. ये केंचुए गोबर और जैविक अपशिष्ट को धीरे-धीरे प्रोसेस कर पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल देते हैं. लगभग दो महीने में यह वर्मी कम्पोस्ट पूरी तरह तैयार हो जाती है. फसलों में रोग भी कम लगतेइस खाद की खासियत यह है कि इसमें 16 से अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और फसल की पैदावार सुधारने में बेहद उपयोगी होते हैं. यही कारण है कि किसान इसे ‘काला सोना’ कहते हैं. इस जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है और फसलों में रोग भी कम लगते हैं. आज बलवंत की तैयार की गई वर्मी कम्पोस्ट की डिमांड जालोर के जीवाणा, बावतरा और बागोड़ा सहित कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है. इतना ही नहीं, उनकी यह खाद अब राजस्थान से बाहर गुजरात तक भी पहुंच रही है, जहां किसान इसे खास तौर पर फलदार फसलों के लिए उपयोग में ले रहे हैं. किसान अगर इसको अपनाएं तो खेती में अच्छी कमाई कर सकतेकिसान बलवंत लखाणी लोकल18 को बताते है कि लंबी पढ़ाई और नौकरी की तलाश में बिताए कई साल, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो हार मानने के बजाय नई राह चुनी. इस काम में लागत बहुत कम आती है और मुनाफा अच्छा मिल जाता है. हम कच्चे गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करते हैं, जो करीब दो महीने में बनकर तैयार हो जाती है. इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है, और सालाना 4 से 5 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है. मेरा मानना है कि किसान अगर इसको अपनाएं तो खेती में अच्छी कमाई कर सकते हैं. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jalor,Rajasthan First Published : April 30, 2026, 15:29 IST Source link

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क्या आपने चखा..? एक प्लेट के लिए घंटों इंतजार! जानिए क्यों जयपुर...

Last Updated:April 30, 2026, 11:59 IST Bheege Kulche Jaipur: पाकिस्तान के मुल्तान की प्रसिद्ध डिश ‘भींगे कुल्चे’ (Bheege Kulche) ने अब जयपुर के स्ट्रीट फूड मार्केट में अपनी खास जगह बना ली है. अपनी अनूठी रेसिपी और लजीज स्वाद के कारण यह डिश देखते ही देखते ‘गुलाबी नगरी’ के फूड लवर्स की पहली पसंद बन गई है. सड़क किनारे लगी छोटी-छोटी दुकानों पर अब हर दिन खाने के शौकीनों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं. मुल्तान से प्रेरित यह कॉन्सेप्ट न केवल स्वाद में अनोखा है, बल्कि जयपुर के पारंपरिक स्ट्रीट फूड कल्चर में एक नया और चटपटा अध्याय जोड़ रहा है. यह जायका अब शहरभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. ख़बरें फटाफट जयपुर: जयपुर अपने स्वादिष्ट जायके के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं जहां वर्षों पुरानी छोटी-छोटी दुकानों से लेकर सड़कों पर स्ट्रीट फूड का स्वाद लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रहती हैं. खासतौर पर जयपुर का चारदीवारी बाजार जहां की हर सड़क पर स्वाद का अनोखा जायका लोगों को मिलता हैं. सड़कों पर ही ठेले-रेडीयों पर लोगों को ऐसा स्वाद मिलता हैं, वैसा स्वाद बड़ी-बड़ी हॉटलों को भी मात दे देता हैं ऐसे जयपुर के जौहरी बाजार में स्थित नंदलाल जी के फेमस भीगे कुलचे जो पिछले 50 सालों से जयपुर में अपने स्पेशल छोले-कुलचे के लिए प्रसिद्ध हैं जहां लाजवाब जायके से तैयार भीगे कुलचे का स्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोगों की यहां भीड़ उमड़ती हैं. लोकल-18 ने नंदलाल जी छोले-कुलचे के इस ठेले पर पहुंच कर यहां वर्षों से इस जायके को तैयार करने वाले मोहित कुमार बताते हैं भीगे कुलचे के इस खास जायके की शुरुआत उनके दादा जी ने की जो बंटवारे के समय पाकिस्तान के मुल्तान से राजस्थान आए थे, वहां के भीगी रोटी के जायके से ही उन्हें अलग-अलग प्रकार की चाट और छोले कुलचे का जायका मुल्तानी रेसीपी के आइडिया के साथ शुरू किया जिसका स्वाद लोगों को खूब पंसद आया और फिर उन्होंने छोले-कुलचे के टेस्ट को भीगे कुलचे के जायके के साथ शुरू किया जो अब जयपुर का सबसे फेमस स्ट्रीट फूड हैं जहां लोग सुबह से शाम तक हमारे भींगे कुल्चे का स्वाद लेने के लिए यहां दूर-दूर से आते हैं. दादाजी के सीक्रेट जायके और मसालों के स्वाद की बादशाहत लोकल-18 से बात करते हुए मोहित बताते हैं पूरे जयपुर में वैसे तो हर जगह लोगों को सामान्य छोले-कुलचे या अमृतसरी कुल्चों का स्वाद मिल जाता हैं लेकिन पूरे जयपुर में सिर्फ हम ही भींगे कुल्चे के इस जायके का स्वाद लोगों को देते हैं जिसके लोग दीवाने हैं. हमारे यहां के भीगे कुल्चे ख़ासतौर पर बेहतरीन मसालों और दादाजी के सीक्रेट जायके से तैयार होते हैं जिसका स्वाद सबसे अलग-अलग होता हैं. खासतौर हमारे छोले जो बेहतरीन गाढ़े मसालों के साथ हम इन्हें तैयार करते हैं जिसमें अलग-अलग प्रकार की खास चटनियों के फ्लेवर के साथ भीगे कुल्चे ग्राहकों को सर्व करते हैं जिसका स्वाद बेहद खास होता हैं साथ ही कुल्चे का साइज इतना बड़ा होता हैं लोग एक बार में सिर्फ एक ही प्लेट खा सकते हैं. भीगे कुल्चे के खास स्वाद में सबसे खास बात यह हैं ये जायका सिर्फ कोयले की बिगड़ी पर तैयार होता है जिसके चलते इसका स्वाद ओर भी लाजवाब बन जाता हैं. मोहित का कहना हैं हमारे यहां स्थानीय लोग वर्षों से भींगे कुल्चे का स्वाद लेने आते हैं इसलिए हमें ग्राहकों का कभी इंतजार नहीं करना पड़ता साथ ही विदेशी पर्यटक और जयपुर घूमने आने वाले पर्यटक भी जयपुर में कही भी घूमने आए एक बार हमारे भीगे कुलचे का स्वाद लेने यहां जरूर आते हैं. भीगे कुल्चे के स्वाद के लोग सबसे ज्यादा दीवाने सुमित बताते हैं वैसे तो हम सामान्य छोले-कुलचे, पाव छोले, आलू टिक्की, भीगा पाव चाट जैसी अलग-अलग रेसीपी तैयार करते हैं लेकिन लोगों में सबसे ज्यादा हमारे भीगे कुलचे की सबसे ज्यादा डिमांड रहती हैं क्योंकि भीगे कुलचे का स्वाद सबसे खास हैं स्वाद के साथ ही हमारे ठेले पर चटपटे स्वाद की सजावट भी खास होती हैं जिसे चलती सड़क पर देखकर ही लोग कंट्रोल नहीं कर पाते और अपने आप भीगे कुल्चे की चटपटी खूशबू उन्हें यहां तक खीच लाती हैं. अगर बात करें हमारे भीगे कुल्चे की एक प्लेट की कीमत तो 140 रूपए की हैं जिसमें 2 कुल्चे ग्राहकों को हम सर्व करते हैं जो ग्राहक पूरा भी नहीं खा सकते हैं. हर दिन हमारे यहां 30 से 40 किलों भीगे कुल्चे की डिमांड रहती हैं जिसके चलते सुबह से रात तक लोग यहां भीगे कुल्चे का स्वाद लेने के लिए भीड़ लगाएं खड़े रहते हैं. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jaipur,Rajasthan First Published : April 30, 2026, 11:49 IST Source link

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बंगाल में भाजपा बमबम, ममता बनर्जी के युग का अंत, एग्जिट पोल...

होमताजा खबरदेश बंगाल में भाजपा बमबम, ममता बनर्जी के युग का अंत, एग्जिट पोल ने कर दिया इशारा Last Updated:April 30, 2026, 06:06 IST Bengal Chunav Result 2026 LIVE: पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्‍यों में मतदान प्रकिया संपन्‍न होने के बाद बुधवार 29 अप्रैल 2026 की शाम को एग्जिट पोल के नतीजे भी सामने आ गए. इसमें पश्चिम बंगाल में सत्‍तारूढ़ टीएमसी …और पढ़ें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ चुके हैं. इस बार इस पूर्वी राज्‍य में भाजपा का परचम लहरा सकता है. Bengal Chunav Result 2026 LIVE: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल 294 सीटों पर दो चरणों में वोट डाले गए. पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को और दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ. मतगणना 4 मई को होगी. इस बीच दूसरे चरण की वोटिंग खत्म होते ही एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आ गए हैं. जेवीसी के एग्जिट पोल के अनुसार, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है. टीएमसी को 131 से 152 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 138 से 159 सीटें मिल सकती हैं. कांग्रेस के खाते में 0 से 2 सीटें जाने का अनुमान है, जबकि वाम दलों और अन्य के खाते में कोई सीट जाती नहीं दिख रही है. वहीं, जनमत पोल्स के एग्जिट पोल में टीएमसी को 195 से 205 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 80 से 90 सीटें मिल सकती हैं. कांग्रेस को 1 से 3 सीटें मिलने की संभावना है. वाम दलों को 0 से 1 सीट और अन्य के खाते में 3 से 5 सीटें जा सकती हैं. वहीं पीपुल्स इनसाइट के एग्जिट पोल के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. टीएमसी को 138 से 150 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 144 से 154 सीटें मिल सकती हैं. कांग्रेस के खाते में 0 से 1 सीट और वाम दलों को भी 0 से 1 सीट मिलने की संभावना जताई गई है. पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 148 सीटों की जरूरत होगी. इस चुनाव में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच रहा. चुनाव के दौरान दोनों तरफ से एक-दूसरे पर तीखे जुबानी हमले किए गए. बंगाल में जमकर वोटिंग पश्चिम बंगाल में इस बार कुल 6.82 करोड़ से अधिक मतदाता थे. इनमें 3.60 करोड़ से अधिक पुरुष, 3.44 करोड़ से अधिक महिलाएं और 1,382 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल थे. चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य में इस बार रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया. अगर मतदान प्रतिशत की बात करें तो पहले चरण में 152 सीटों पर 93.19 प्रतिशत मतदान हुआ, जो राज्य के चुनावी इतिहास में रिकॉर्ड माना गया. वहीं, दूसरे चरण में 142 सीटों पर शाम 5 बजे तक 89.99 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. दोनों चरणों को मिलाकर पश्चिम बंगाल में इस बार मतदान प्रतिशत ऐतिहासिक स्तर पर रहा. Bengal Chunav Results LIVE: पश्चिम बंगाल में अब तक हुए चुनावों में कैसा रहा हाल पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम लाइव: पश्चिम बंगाल के चुनाव के संदर्भ में अगर बीते वर्षों की बात करें तो 1951 विधानसभा चुनाव में 43.12, 1951 में लोकसभा चुनाव में 40.49 फीसदी, 1957 विधानसभा चुनाव में 47.64, 1957 लोकसभा चुनाव में 47.67, 1962 विधानसभा चुनाव में 55.55, 1962 लोकसभा चुनाव में 55.75 प्रतिशत मतदान हुआ था. इसके अलावा, 1967 विधानसभा चुनाव में 66.10 और लोकसभा चुनाव में 66.03, 1969 विधानसभा चुनाव में 66.51, 1971 विधानसभा चुनाव में 62.03, 1971 लोकसभा में 61.93, 1972 विधानसभा चुनाव में 60.82, 1977 विधानसभा चुनाव में 56.15, 1977 लोकसभा चुनाव में 60.24, 1980 लोकसभा चुनाव में 70.62 और 1982 विधानसभा चुनाव में 76.96 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई थी. वहीं, 1984 लोकसभा चुनाव में 78.61,1987 विधानसभा चुनाव में 75.66, 1989 लोकसभा चुनाव में 79.67, 1991 विधानसभा चुनाव में 76.80 और लोकसभा चुनाव में 76.73, 1996 विधानसभा चुनाव में 82.94 और लोकसभा चुनाव में 82.66 प्रतिशत मतदान हुआ था. इसके साथ ही, 1998 लोकसभा चुनाव में 79.27, 1999 लोकसभा में 75.05, 2001 विधानसभा चुनाव में 75.29, 2004 लोकसभा चुनाव में 78.04, 2006 विधानसभा में 81.58, 2009 लोकसभा में 81.42, 2011 विधानसभा चुनाव में 84.72, 2014 लोकसभा चुनाव में 82.22, 2016 विधानसभा में 83.02, 2019 लोकसभा में 81.76, 2021 विधानसभा में 82.30 और 2024 लोकसभा चुनाव में 79.55 फीसदी मतदान हुआ था. Bengal Chunav Results LIVE: बंगाल में दूसरे चरण में भी रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम लाइव: बंगाल विधानसभा के दूसरे चरण के लिए मतदान बुधवार सुबह 7:00 बजे प्रारंभ हुआ. शाम 7.45 बजे तक 91.66 फीसदी मतदान हुआ. पुरुष 91.07, महिला 92.8 और थर्ड जेंडर के 91.28 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया. हालांकि इस आंकड़े में बदलाव हो सकता है. वहीं, पहले चरण में 93.19 फीसदी मतदान हुआ था. दोनों चरणों का संयुक्त मतदान प्रतिशत 92.47 फीसदी रहा है. इससे पहले, पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 84.72 फीसदी मतदान विधानसभा चुनाव 2011 हुआ था. Bengal Chunav Results LIVE: पश्चिम बंगाल तकरीबन 7 करोड़ मतदाताओं ने डाला वोट पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम लाइव: पश्चिचम बंगाल मतदाताओं की संख्या पर नजर डालें तो पहले चरण में 3 करोड़ 60 लाख और दूसरे चरण में 3 करोड़ 21 लाख लोगों ने वोट डाले. पुरुष मतदाताओं ने पहले चरण में एक करोड़ 84 लाख और दूसरे चरण में एक करोड़ 65 लाख वोट डाले. महिलाओं ने पहले चरण में 1 करोड़ 76 लाख और दूसरे चरण में 1 करोड़ 57 लाख वोट डाले. पश्चिम बंगाल के 5,343 पोलिंग स्टेशनों का डेटा अभी तक अपडेट नहीं किया गया है. इसलिए मतदान का प्रतिशत बढ़ सकता है. Bengal Chunav Results LIVE: पश्चिम बंगाल चुनाव में टूटा मतदान का रिकॉर्ड, 1951 से ऐसा रहा मतदाताओं का मिजाज पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम लाइव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान खत्म होने पर चुनाव आयोग ने आंकड़े जारी करते हुए खुशी जताई है. स्वतंत्रता के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में सर्वाधिक मतदान 91.66 फीसदी दर्ज की गई है. यह आंकड़ा शाम 7.45 बजे तक का है. अब तक यह रिकॉर्ड त्रिपुरा के

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Vrishabha Rashifal 30 April | Today Vrishabha Rashifal | Vrishabha Daily Horoscope...

Last Updated:April 30, 2026, 00:14 IST Vrishabha Rashifal 30 April: 30 अप्रैल को वृषभ राशि के जातकों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बरसेगी. वज्र योग और चित्रा नक्षत्र के संयोग से आज आपका रुका हुआ धन वापस मिलेगा और नए वाहन की खरीदारी के योग बन रहे हैं. बिजनेस में सकारात्मक ऊर्जा और नौकरी में बॉस का भरपूर सहयोग मिलेगा. लव लाइफ में मधुरता के लिए पार्टनर को लाल गुलाब दें और सफलता के लिए पीले वस्त्र धारण करें. जानें काशी के ज्योतिषाचार्य से अपना पूरा राशिफल. Vrishabha Rashifal 30 April: ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की चाल और नक्षत्रों के योग के आधार पर 12 राशियों के राशिफल की गणना की जाती है. 30 अप्रैल को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि और गुरुवार का दिन है. वैदिक हिन्दू पंचांग के अनुसार, आज चित्रा नक्षत्र और वज्र योग का संयोग बन रहा है. आज चंद्रमा कन्या राशि से तुला राशि में संचरण कर रहे हैं. आइये जानते हैं काशी के ज्योतिषाचार्य से वृषभ राशि के जातकों के लिए गुरुवार का दिन बिजनेस, करियर और लव लाइफ के लिए कैसा रहने वाला है. ज्योतिषाचार्य पंडित विकास पांडेय ने बताया कि गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित दिन है. यह दिन वृषभ राशि वालों के लिए चमत्कारिक और शुभ साबित हो सकता है. आज आपको आपका रुका हुआ धन मिलने की संभावना है. आज आप पूरे दिन खुशमिजाज मन से घर और ऑफिस में रहेंगे. आज आप नया वाहन भी खरीद सकते हैं. जो लोग लंबे समय से बीमार चल रहे हैं, आज उन्हें स्वास्थ्य लाभ होगा. आत्मविश्वास से बनेंगे कामवृषभ राशि के जातक जो बिजनेस कर रहे हैं, आज वो पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ काम करेंगे. इसका फायदा भी आपको जरूर मिलेगा. आज आप उधार देने से परहेज करें. जो लोग नौकरी कर रहे हैं, आज वो अपने कार्यक्षेत्र में अपने टारगेट को आसानी से पूरा कर पाएंगे. आज आपको अपने बॉस और सहयोगियों का साथ भी मिलने वाला है. बात इन्वेस्टमेंट की करें तो आज आप म्युचुअल फंड में पैसा इन्वेस्ट करेंगे तो इससे आपको भविष्य में अच्छा रिटर्न मिलेगा. आपकी ये छोटी-छोटी बचत आपको भविष्य में बड़ा सहारा बनेगी. लव लाइफ होगी खुशनुमावृषभ राशि के जातकों का लव लाइफ में आज बेहतर होगा. आज आपके पार्टनर से चले आ रहे पुराने सभी झगड़े समाप्त होंगे. आज आप अपने पार्टनर को ‘रेड रोज’ जरूर भेंट करें. इससे आपके जीवन में मधुरता बनी रहेगी. जो लोग शादीशुदा हैं आज उनका दिन भी सामान्य होगा. आज आप अपने लाइफ पार्टनर के साथ किसी धार्मिक स्थल पर जा सकते हैं. पीला वस्त्र करें धारणआज आपका शुभ रंग केशरिया और शुभ अंक 5 है. आज के दिन वृषभ राशि के जातक भगवान विष्णु की पूजा आराधना करें. आज आप घर से बाहर किसी जरूरी काम से जा रहे हैं तो पीला वस्त्र जरूर धारण करें. इससे आपका काम जरूर बनेगा. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Varanasi,Uttar Pradesh First Published : April 30, 2026, 00:14 IST Source link

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हेलीकॉप्टर से दागे दो मिसाइल, भारत ने पहली बार दिखाया डबल अटैक...

नई दिल्ली/चांदीपुर: भारतीय नौसेना की मारक क्षमता में एक नया और घातक अध्याय जुड़ गया है. ओडिशा के तट पर ‘नेवल एंटी-शिप मिसाइल – शॉर्ट रेंज’ (NASM-SR) का सफल ‘साल्वो लॉन्च’ (Salvo Launch) किया गया. यह परीक्षण इसलिए खास है क्योंकि पहली बार एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलें एक साथ दागकर दुश्मन के जहाज को तबाह करने की तकनीक का प्रदर्शन किया गया. यह मिसाइल मात्र एक हथियार नहीं, बल्कि स्वदेशी इंजीनियरिंग का नमूना है. इसमें वॉटरलाइन हिट क्षमता (Waterline Hit Capability) का सफल परीक्षण किया गया. इसका मतलब है कि यह मिसाइल दुश्मन के जहाज के उस हिस्से पर वार करती है जहाँ पानी और जहाज की बॉडी मिलती है. ऐसा करने से जहाज में तेजी से पानी भरता है और वह कुछ ही मिनटों में जलसमाधि ले लेता है. प्रमुख विशेषताएं और तकनीक· साल्वो लॉन्च की ताकत: एक साथ दो मिसाइलें दागने की क्षमता का मतलब है कि अगर दुश्मन का एक डिफेंस सिस्टम एक मिसाइल को रोक भी ले, तो दूसरी मिसाइल उसका काम तमाम कर देगी. · स्वदेशी ‘आंखें’ (Seeker): इसमें डीआरडीओ द्वारा विकसित उन्नत सीकर और फाइबर-ऑप्टिक जायरोस्कोप लगा है, जो इसे सटीक निशाना लगाने में मदद करता है. · प्रोपल्शन सिस्टम: मिसाइल में सॉलिड प्रोपल्शन बूस्टर और लॉन्ग-बर्न सस्टेनर का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे हवा में स्थिरता और लंबी दूरी तक मार करने की शक्ति देता है. · टू-वे डेटा लिंक: इस तकनीक की मदद से मिसाइल दागने के बाद भी उसे निर्देश दिए जा सकते हैं या उसकी दिशा में बदलाव किया जा सकता है. · इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स: इसके नियंत्रण और मार्गदर्शन के लिए आधुनिक एल्गोरिद्म का उपयोग किया गया है, जो इसे इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से भी सुरक्षित रखता है. क्यों खास है यह उपलब्धि?रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक भारतीय नौसेना इस तरह की मिसाइलों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर थी. NASM-SR के आने से अब नौसेना के हेलीकॉप्टर (जैसे सी-किंग या ध्रुव) हवा से ही दुश्मन के युद्धपोतों को डुबोने में सक्षम होंगे. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ी छलांग है क्योंकि इसे हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने मिलकर बनाया है. सवाल-जवाब ‘साल्वो लॉन्च’ (Salvo Launch) का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? साल्वो लॉन्च का अर्थ है एक साथ या बहुत कम अंतराल पर एक से अधिक मिसाइलें दागना. यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए बचाव करना लगभग असंभव हो जाता है. ‘वॉटरलाइन हिट क्षमता’ से दुश्मन को क्या नुकसान होता है? यह क्षमता मिसाइल को जहाज के उस हिस्से पर वार करने की अनुमति देती है जो पानी की सतह के ठीक पास होता है. इससे जहाज के निचले हिस्से में बड़ा छेद हो जाता है, जिससे जहाज तुरंत डूबने लगता है. इस मिसाइल को विकसित करने में किन संस्थानों की भूमिका रही? मुख्य रूप से हैदराबाद की RCI लेबोरेटरी ने इसे विकसित किया है, जिसमें पुणे (HEMRL), चंडीगढ़ (TBRL) और चांदीपुर (ITR) जैसी डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं का सहयोग रहा. Source link

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3, 7, 4, 5, 0… ये IPL में प्‍लेयर्स का स्‍कोर कार्ड...

Last Updated:April 29, 2026, 20:51 IST Kerala Exit Poll Latest News: केरल एग्जिट पोल्स के मुताबिक, इस राज्य में बीजेपी को सिंगल डिजिट या बेहद सीमित सीटें मिलने का अनुमान है. पोल ऑफ पोल्‍स में बीजेपी को केरल में 2 ही सीटें म‍िलने का अनुमान है. सभी अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े देखें तो तस्वीर लगभग एक जैसी ही बनती दिख रही है. केरल के एग्‍ज‍िट पोल में क्‍या है बीजेपी का हाल? नई द‍िल्‍ली. एग्‍ज‍िट पोल में पश्‍च‍िम बंगाल में बीजेपी सरकार बनाती नजर आ रही है पर केरल में पार्टी की हालत अच्‍छी नहीं द‍िख रही है. पहली नजर में 3, 7, 4, 5, 0… जैसे आंकड़े आपको इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के किसी बल्लेबाज के स्कोरकार्ड जैसे लग सकते हैं लेकिन ये नंबर असल में एक राज्य के एग्जिट पोल में बीजेपी की संभावित सीटों का अनुमान हैं और तस्वीर पार्टी के लिए चौंकाने वाली है. केरल के पोल ऑफ पोल्‍स में बीजेपी गठबंधन को महज 2 सीटें दी गई हैं. एक्‍सेस माई इंड‍िया के सर्वे में बीजेपी गठबंधन को 0 से 3 सीटों के बीच रखा गया है. JVC के अनुमान के मुताबिक बीजेपी गठबंधन को 3 से 7 सीटें मिल सकती हैं, जबकि P-MARQ ने 1 से 4 सीटों की रेंज बताई है. Matrize के हिसाब से भी बीजेपी गठबंधन को 3 से 5 सीटों के बीच सिमटी दिख रही है. केरल में क्‍या है बीजेपी के ल‍िए सबसे चौंकाने वाला नतीजासबसे चौंकाने वाला अनुमान Peoples Pulse का है जहां बीजेपी गठबंधन को 0 से 3 सीटों तक सीमित बताया गया है. यानी लगभग हर एजेंसी का सर्वे इस ओर इशारा कर रहा है कि इस चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन उम्मीद से काफी कमजोर रह सकता है. क्‍या है जानकारों का माननाराजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ये एग्जिट पोल सही साबित हुए तो यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका होगा. खासकर तब जब पार्टी ने इस राज्य में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाया था. हालांकि यह भी याद रखना होगा कि एग्जिट पोल हमेशा सटीक नहीं होते और कई बार असली नतीजे इन अनुमानों से बिल्कुल अलग निकल आते हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 29, 2026, 20:51 IST Source link

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Exit Poll 2026 Results LIVE | एग्जिट पोल पश्चिम बंगाल 2026 |...

Exit Poll Results LIVE Updates: पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के एग्जिट पोल नतीजे भी आज ही जारी किए जा रहे हैं. इन पांचों राज्यों में वोटिंग प्रतिशत काफी ज्यादा रहा है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के लिए आज 29 अप्रैल को वोट डाले गए. शाम 5 बजे तक राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई है, जो मतदाताओं के भारी उत्साह को दर्शाती है. चुनावी मैदान में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला है. चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के अनुसार, शाम 6:30 बजे तक किसी भी तरह के एग्जिट पोल पर पाबंदी है. इसके बाद ही सर्वे एजेंसियां अपने आंकड़े जारी कर सकेंगी. Tamil Nadu Exit Poll 2026 लाइव: तमिलनाडु में गठबंधनों की जंग से बदला चुनावी समीकरण तमिलनाडु चुनाव 2026 में मुकाबला अब पूरी तरह गठबंधनों पर टिक गया है. डीएमके के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन एम के स्टालिन के साथ मैदान में है. दूसरी तरफ एआईएडीएमके गठबंधन ई के पलानीस्वामी के नेतृत्व में चुनौती दे रहा है. इस बार विजय की तमिलगा वेत्री कषगम की एंट्री ने मुकाबले को और पेचीदा बना दिया है. राज्यभर में त्रिकोणीय और बहुकोणीय टक्कर चुनावी तस्वीर बदल सकती है. तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026 लाइव: 10 हॉट सीटें जो तय करेंगी सत्ता की दिशा तमिलनाडु की कई हॉट सीटें ऐसी हैं जहां कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है. कोलाथुर में एम के स्टालिन की प्रतिष्ठा दांव पर है, तो एडप्पाडी सीट ई के पलानीस्वामी के लिए अहम है. कोयंबटूर साउथ में शहरी वोटर बड़ा फैक्टर बन सकते हैं. मदुरै सेंट्रल और सलेम में सीधी टक्कर का माहौल है. तिरुचिरापल्ली वेस्ट को स्विंग सीट माना जा रहा है. चेन्नई सेंट्रल क्षेत्र शहरी रुझान दिखाएगा. बोडिनायकनूर, तिरुप्पुर और कन्याकुमारी में बहुकोणीय मुकाबला चुनावी नतीजों की दिशा तय कर सकता है. असम एग्जिट पोल LIVE: 75 सीटों के आसपास मजबूत बढ़त असम विधानसभा चुनाव का एग्जिट पोल: आंकड़ों के मुताबिक करीब 75 सीटों का आंकड़ा आरामदायक जीत की ओर इशारा करता है. यह स्थिति सरकार को स्थिरता देती है और भविष्य में उपचुनाव या दल बदल जैसे झटकों को संभालने की क्षमता बढ़ाती है. इससे शासन में निरंतरता और नीति लागू करने में तेजी देखने को मिल सकती है. असम एग्जिट पोल अपडेट LIVE: 64 सीट पार करते ही बहुमत तय, सरकार बनना लगभग तय असम विधानसभा में 64 सीट का आंकड़ा स्पष्ट बहुमत की सीमा माना जाता है. जो भी दल या गठबंधन इस आंकड़े को पार करेगा, वह बिना बाहरी समर्थन के सरकार बना सकेगा. साल 2021 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह आंकड़ा आसानी से पार किया था. एग्जिट पोल 2026 LIVE: क्या आपको एग्जिट पोल्स पर भरोसा करना चाहिए? एग्जिट पोल्स को अंतिम नतीजा नहीं, बल्कि एक ‘संकेत’ (Signal) के तौर पर देखना चाहिए. ये ट्रेंड समझने और हवा का रुख पहचानने के लिए तो अच्छे हैं, लेकिन इन्हें 100% सटीक मान लेना सही नहीं है. असली तस्वीर तो 4 मई, 2026 को ही साफ होगी, जब ईवीएम (EVM) के पिटारे खुलेंगे. तब तक ये आंकड़े सिर्फ एक चर्चा और विश्लेषण का आधार मात्र हैं. Exit Poll 2026 Results LIVE: आखिर क्यों फेल हो जाते हैं बड़े-बड़े एग्जिट पोल्स? इतनी मेहनत और गणित के बावजूद एग्जिट पोल्स कई बार पूरी तरह गलत साबित होते हैं. इसके पीछे 5 बड़े कारण हैं: साइलेंट वोटर: अगर कोई खास वर्ग अपनी पसंद छुपा ले, तो पूरा कैलकुलेशन बिगड़ जाता है. झूठे जवाब: कई बार वोटर दबाव में या डर के मारे गलत जानकारी दे देता है. सैंपल एरर: अगर सैंपल में हर वर्ग का सही प्रतिनिधित्व नहीं है, तो नतीजा गलत आएगा. टर्नआउट का अनुमान: सर्वे इस आधार पर होता है कि कितने लोग वोट देने आएंगे, लेकिन एक्चुअल टर्नआउट कम-ज्यादा होने पर गणित फेल हो जाता है. गठबंधन और लोकल फैक्टर: भारत जैसे विविधता वाले देश में गठबंधन और स्थानीय प्रत्याशियों का प्रभाव नेशनल लेवल के डेटा को मात दे देता है. Exit Poll Results 2026 LIVE: एजेंसियां अलग-अलग नतीजे क्यों दिखाती हैं? अक्सर देखा जाता है कि एक चैनल किसी पार्टी की जीत दिखा रहा है, तो दूसरा कड़े मुकाबले की बात करता है. इसके पीछे कई कारण हैं: सैंपलिंग में अंतर: कोई एजेंसी शहरी इलाकों पर ज्यादा फोकस करती है, तो कोई ग्रामीण बेल्ट पर. सवाल पूछने का तरीका: अगर सवाल पूछने का ढंग थोड़ा भी अलग हो, तो वोटर का जवाब बदल सकता है. नो-रिस्पॉन्स का इलाज: बहुत से लोग यह नहीं बताते कि उन्होंने किसे वोट दिया. एजेंसियां अपनी समझ के हिसाब से इन ‘साइलेंट वोटर्स’ का अनुमान लगाती हैं. वेटिंग फॉर्मूला: डेटा को एडजस्ट करने का हर एजेंसी का अपना सीक्रेट फॉर्मूला होता है. Exit Poll 2026 Results LIVE: डेटा की वेटिंग और वोटों से सीटों का पेचीदा गणित ग्राउंड से जो डेटा आता है, उसे वैसा का वैसा नहीं दिखाया जाता. इस ‘रॉ डेटा’ पर स्टैटिस्टिकल वेटिंग (Statistical Weighting) अप्लाई की जाती है. मान लीजिए किसी इलाके में महिलाओं ने कम जवाब दिए, तो उनके डेटा को आनुपातिक रूप से बढ़ा दिया जाता है ताकि बैलेंस बना रहे. सबसे कठिन काम है वोटों को सीटों में बदलना. भारत में ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ सिस्टम है. इसका मतलब है कि अगर किसी पार्टी का वोट शेयर सिर्फ 1-2% भी ऊपर-नीचे होता है, तो सीटों की संख्या में भारी अंतर आ सकता है. यहीं पर अलग-अलग एजेंसियों के दावों में अंतर दिखने लगता है क्योंकि हर एजेंसी का कैलकुलेशन मॉडल अलग होता है. Exit Poll 2026 LIVE: भारत में एग्जिट पोल का प्रोसेस, जमीन पर क्या होता है? एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियां जैसे एक्सिस माई इंडिया, सी-वोटर या CSDS-लोकनीति एक खास पैटर्न फॉलो करती हैं. यह प्रक्रिया कुछ स्टेप्स में पूरी होती है: निर्वाचन क्षेत्रों और पोलिंग बूथों का चुनाव: देश के हर बूथ पर जाकर सर्वे करना नामुमकिन है. इसलिए, एजेंसियां एक ‘रिप्रेजेंटेटिव सैंपल’ चुनती हैं. इसमें इलाके के पुराने वोटिंग पैटर्न, जातिगत समीकरण और डेमोग्राफिक फैलाव को ध्यान में रखा जाता है. ग्राउंड फील्ड सर्वे: वोटिंग के दिन सर्वे करने

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