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indian doctor sudhir srivastava creates history with 20000 km longest robotic tele...

Last Updated:June 05, 2026, 20:35 IST Remote Robotic Heart Surgery: मेडिकल साइंस का सबसे बड़ा चमत्कार भारत में हुआ. क्या कोई डॉक्टर 20 हजार किलोमीटर दूर दूसरे देश में बैठकर भारत के मरीज का दिल खोलकर ऑपरेशन कर सकता है? विज्ञान ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है. मशहूर सर्जन डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने गुयाना से बैठकर इंदौर के एक मरीज की सफल रोबोटिक हार्ट टेली-सर्जरी कर नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया है. इस हैरान कर देने वाले ऑपरेशन में भारत के ही बने एक खास रोबोट का इस्तेमाल हुआ. जानिए कैसे समंदर पार से डॉक्टर के एक इशारे पर रोबोट ने बचाई मरीज की जान. दिल्ली: भारत के मशहूर हार्ट सर्जन डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने एक ऐसा काम किया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. उन्होंने गुयाना में बैठकर भारत के इंदौर में मौजूद एक मरीज के दिल की रोबोट की मदद से सर्जरी की. खास बात यह है कि डॉक्टर और मरीज के बीच करीब 20 हजार किलोमीटर की दूरी थी. इसे दुनिया की सबसे लंबी दूरी से की गई रोबोटिक हार्ट सर्जरी माना जा रहा है. कैसे हुई इतनी दूर से सर्जरीडॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने गुयाना में बैठकर कंप्यूटर और रोबोटिक सिस्टम के जरिए इंदौर में मरीज की सर्जरी की. डॉक्टर जो भी हाथ से मूवमेंट कर रहे थे, रोबोट उसे उसी समय मरीज के शरीर पर कर रहा था. यह दिल की बहुत नाजुक सर्जरी थी, लेकिन सब कुछ सफल रहा और मरीज अब ठीक है. इतनी दूर से सर्जरी करना आसान नहीं थाडॉ. सुधीर ने बताया कि यह काम काफी मुश्किल था. इससे पहले भी वह 10 हजार किलोमीटर दूर से सर्जरी कर चुके हैं, इसलिए उन्हें थोड़ा अनुभव था. सर्जरी से पहले इंटरनेट, मशीन और नेटवर्क की कई बार जांच की गई ताकि बीच में कोई दिक्कत न आए. उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी मरीज का भरोसा होता है, क्योंकि मरीज एक जगह होता है और डॉक्टर हजारों किलोमीटर दूर. मरीज की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गयाइतनी दूर से सर्जरी में सबसे बड़ा सवाल मरीज की सुरक्षा का होता है. इसे देखते हुए इंदौर में डॉक्टरों की एक पूरी टीम मौजूद थी. अगर किसी वजह से तकनीकी दिक्कत आती, तो वहां मौजूद डॉक्टर तुरंत सर्जरी संभाल लेते.इस सर्जरी में इस्तेमाल हुआ रोबोटिक सिस्टम भारत में बना है, जिसका नाम SSI Mantra है. डॉ. सुधीर का कहना है कि उनका मकसद ऐसी तकनीक बनाना है जिससे गांव और दूर-दराज के इलाकों में भी अच्छे डॉक्टरों का इलाज पहुंच सके. इंटरनेट और सुरक्षा का भी रखा गया ध्यानडॉ. सुधीर ने बताया कि सर्जरी के लिए खास फाइबर इंटरनेट का इस्तेमाल किया गया था, ताकि नेटवर्क बीच में बंद न हो और कोई साइबर खतरा भी न हो. भविष्य में और दूर तक होगी सर्जरीडॉ. सुधीर का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है. आने वाले समय में दुनिया के किसी भी कोने में बैठे मरीज का इलाज दूर बैठे डॉक्टर कर सकेंगे. इससे उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जहां अच्छे डॉक्टर आसानी से नहीं पहुंच पाते.भारत में बना यह रोबोटिक सिस्टम अब कई देशों में इस्तेमाल हो रहा है. इस उपलब्धि के बाद भारत की तकनीक और डॉक्टरों की तारीफ दुनिया भर में हो रही है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi Source link

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जिंदगी भर भाइयों के साथ रहते हैं चीते, रफ्तार है सबसे बड़ी...

Last Updated:June 05, 2026, 19:41 IST मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है. इसके लिए टाइगर रिजर्व के अंदर करीब 600 वर्ग किलोमीटर की जगह चिन्हित की गई है. इसके अलावा जो वनरक्षक है. उनको भी इसको लेकर कूनो में प्रशिक्षण दिलवाया जा रहा है. जंगल के अंदर जो गांव अभी विस्थापन के लिए बच्चे हैं. हजारों लोग रह रहे हैं. मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है. इसके लिए टाइगर रिजर्व के अंदर करीब 600 वर्ग किलोमीटर की जगह चिन्हित की गई है. और तैयारी भी जोर-जोर से चल रही है. इसके अलावा जो वनरक्षक है. उनको भी इसको लेकर कूनो में प्रशिक्षण दिलवाया जा रहा है. जंगल के अंदर जो गांव अभी विस्थापन के लिए बच्चे हैं. हजारों लोग रह रहे हैं. उनके लिए भी चीता चौपाल लगाई जा रही हैं. इनको लेकर जो भ्रांतियां हैं. लोगों के मन में नेगेटिव बातें बैठी हुई है. उनको दूर किया जा रहा है. इनके संरक्षण का उद्देश्य और महत्व बताया जा रहा है. आज हम बड़ी बिल्ली प्रजाति के सबसे छोटे वन्य जीव कहलाने वाले चीता के बारे में बात करेंगे. इनकी क्या खासियत होती है. यह तेंदुआ और टाइगर से कितने अलग होते हैं इनका व्यवहार किस तरह का होता है. किस तरह से यह रहना शिकार करना पसंद करते हैं. नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह बताते हैं कि चीता घास के मैदान और खुले क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं. यह अपनी अद्भुत रफ्तार और रफ्तार के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं. इनके जो शिकार करने का जो तरीका है. भागना है सबसे बड़ी ताकतइनका जो शिकार ब्लैक बग चीतल चिंकारा नीलगाय के छोटे बच्चे यानी कि कम वजन वाले जो वन्य जीव होते हैं. उनको पहले चेस करते हैं चेस करने के दौरान ही उनका शिकार करते हैं और उनकी कोशिश होती है. वह एक बार के हमले में ही मर जाए, जिससे ना तो छुपाने का डर हो और ना ही रखने का है. यह बहुत ही कम समय में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी दौड़ सकते हैं. इन्हें धरती पर रहने वाले सबसे तेज दौड़ने वाले वन्यजीवों में गिना जाता है.चीतो की एक और प्रवृत्ति होती है कि वह टाइगर और तेंदुआ की तरह अकेले नहीं होते हैं. ग्रुप में रहना पसंद करते हैं. उनके ग्रुप में जो दो-तीन भाई-बहन होते हैं. वह जिंदगी भर साथ रहते हैं साथ घूमते हैं और शिकार करते हैं. इसलिए इनको सामाजिक होना भी कहा जाता है. चीता का जीवन चक्र 10 – 12 साल का होताइनके नाखून भी छोटे होते यानी कि टाइगर कि तरह इनके नाखून अंदर बाहर नहीं होते हैं. जिनकी वजह से उनकी पकड़ कमजोर होती है. किसी के चलते वह पेड़ों पर नहीं जा पाए और यह छोटे जीवों का शिकार करते हैं.चीता का जीवन चक्र 10 – 12 साल का होता है. इनके शरीर पर ब्लैक स्पॉट होते हैं. जबकि चेहरे पर नाक के नीचे से धारियां होती हैं. हर चीता पर ब्लैक स्पॉट और धारियां अलग-अलग होती हैं जो इनकी पहचान का कारण बनती है. मैं टाइगर और तेंदुआ की तरह दहाड़ने वाला आर्गन गले में नहीं होता है. यह बिल्ली की तरह आवाज निकालता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sagar,Madhya Pradesh Source link

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Sikar News | Best Temple | जहां कृष्ण ने रखे थे 7...

होमताजा खबरधर्म जहां कृष्ण ने रखे थे 7 कदम! अब उसी धरोहर को बचाने के लिए जुटा पूरा गांव Last Updated:June 05, 2026, 18:44 IST Sikar Jile Ke Pramukh Mandir : सीकर जिले के कदमा का बास गांव में ग्रामीणों ने अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को बचाने का अनोखा उदाहरण पेश किया है. करीब 500 वर्ष पुराने श्री राधा-कृष्ण मंदिर का 10 करोड़ रुपये की लागत से भव्य जीर्णोद्धार कराया जा रहा है. खास बात यह है कि इस पूरे अभियान में गांव के लोगों, भामाशाहों और श्रद्धालुओं का जनसहयोग शामिल है. मंदिर निर्माण में करौली के पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जिन पर बारीक नक्काशी का कार्य किया जा रहा है. मंदिर के साथ स्थित पौराणिक कुंड का संरक्षण और सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है. ग्रामीणों का मानना है कि यह स्थान कर्दम ऋषि और भगवान कृष्ण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का केंद्र है. महाभारत काल से जुड़ी कथाओं और प्राचीन कदंब वृक्षों के कारण यह क्षेत्र विशेष आस्था रखता है. मंदिर पुनर्निर्माण का यह अभियान अब पूरे इलाके में धरोहर संरक्षण की मिसाल बनता जा रहा है. सीकर. सीकर जिले के कदमा का बास गांव के लोगों ने यह साबित कर दिया है कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं होती, बल्कि समाज भी अपनी विरासत को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. गांव के लोगों ने करीब 500 वर्ष पुराने श्री राधा-कृष्ण मंदिर के जीर्णोद्धार का जिम्मा अपने हाथों में लिया है. इस कार्य पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. मंदिर के साथ-साथ यहां स्थित पौराणिक कुंड के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का काम भी जनसहयोग और श्रमदान के माध्यम से किया जा रहा है. कदमा का बास गांव में मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य इन दिनों तेजी से चल रहा है. इसे पूरा होने में अभी लगभग दो वर्ष का समय लग सकता है. निर्माण कार्य में करौली के उच्च गुणवत्ता वाले पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है. प्रत्येक पत्थर पर बारीक नक्काशी की जा रही है, जिसके लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 35 से अधिक कारीगर जुटे हुए हैं. नक्काशी का अधिकांश कार्य करौली में किया जाता है, जबकि मंदिर परिसर में पत्थरों की फिटिंग और अन्य निर्माण कार्य जारी हैं. ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर का स्वरूप पहले से अधिक भव्य और आकर्षक बनाया जा रहा है. गांव का इतिहास और धार्मिक महत्वग्रामीणों के अनुसार कदमा का बास गांव का इतिहास बेहद प्राचीन है. इस गांव का उल्लेख संवत 1030 के हर्ष शिलालेख में ‘कर्दमखता’ नाम से मिलता है. यह स्थान ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ धार्मिक आस्था का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि महाभारत काल में इस क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा था. तब कर्दम ऋषि ने कठोर तपस्या कर भगवान कृष्ण से लोगों के कष्ट दूर करने का वरदान मांगा था. इसके बाद यहां पवित्र जल कुंड की स्थापना हुई, जो आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. दूर-दूर से लोग यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. भगवान कृष्ण से जुड़ी हैं कई मान्यताएंमंदिर और कुंड के संरक्षण कार्य में गांव तथा आसपास के क्षेत्रों के भामाशाह भी बढ़-चढ़कर आर्थिक सहयोग कर रहे हैं. गांव में मौजूद प्राचीन कदंब वृक्ष भी धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हुए हैं. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि भगवान कृष्ण ने यहां सात कदम रखे थे, जिन स्थानों पर सात कदंब वृक्ष उत्पन्न हुए. इनमें से छह वृक्ष आज भी मौजूद हैं. ग्रामीण समय-समय पर इन वृक्षों और पवित्र कुंड के संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाते रहते हैं. मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ अब धरोहर संरक्षण गांव में एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है. ग्रामीण कुंड की सफाई, परिसर की व्यवस्था सुधारने और धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए लगातार श्रमदान भी कर रहे हैं. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sikar,Sikar,Rajasthan Source link

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‘कांग्रेस पिछले 12 साल से मौका खोज रही है लेकिन…’ PM मोदी...

Last Updated:June 05, 2026, 17:54 IST पीएम मोदी ने सूरत में सड़क, बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी 18,800 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया. उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया और उनकी आधारशिला रखी. ख़बरें फटाफट पीएम मोदी ने विरोधियों पर निशाना साधा. सूरत.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सूरत में 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए विपक्ष पर तीखा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग आज भी ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का मजाक उड़ाते हैं, लेकिन वही लोग दशकों तक देश को दूसरे देशों पर निर्भर बनाए रखने के लिए जिम्मेदार रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज देश में कुछ निराशावादी लोग आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं. ये वे लोग हैं जिन्होंने हमेशा भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रखा. वे भूल जाते हैं कि दूसरों पर निर्भर रहने वाला देश कभी भी विकास की उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकता, जिसका वह हकदार है.” उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल एक आर्थिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत और सक्षम बनाने का राष्ट्रीय संकल्प है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज रक्षा, विनिर्माण, तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है. सूरत के विकास मॉडल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने शहर की “सर्कुलर वाटर इकोनॉमी” की सराहना की. उन्होंने कहा कि सूरत जल प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है. पीएम मोदी ने कहा, “आजकल सूरत की सर्कुलर वाटर इकोनॉमी की बहुत चर्चा हो रही है. अब प्रयास यह है कि आने वाले कई दशकों तक सूरत के लिए पीने के पानी की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसी उद्देश्य से तापी बैराज परियोजना को मंजूरी दी गई है.” प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सूरत को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने में जुटी हैं. उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, जल आपूर्ति और औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाएं न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश की आर्थिक प्रगति को नई गति देंगी. इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया और नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Surat,Surat,Gujarat Source link

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मानसून ने पकड़ी तूफानी रफ्तार, 5 राज्‍यों में रेड अलर्ट, कहां कल...

नई दिल्‍ली. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दावा किया है कि देश में मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है. दक्षिण-पश्चिम मानसून आज कर्नाटक, तमिलनाडु और गोवा के कुछ और हिस्सों में दस्तक दे चुका है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए देश के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी का दौर फिर से लौटने वाला है. ऐसे में वीकेंड पर बाहर निकलने से पहले आपके लिए कल का मौसम कैसा रहेगा और आने वाले दिनों में मौसम की जानकारी क्या है, यह जानना बेहद जरूरी है. आइए देश के अलग-अलग हिस्सों के अनुसार जानते हैं मौसम का हाल. दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का रेड अलर्टमौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 7 दिनों तक मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने वाला है. • केरल और कर्नाटक: केरल में 6 और 7 जून को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है. इसके अलावा तटीय कर्नाटक में भी अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश (7 से 20 सेमी) का अनुमान है. अगर आप इन राज्यों में रहते हैं, तो कल का मौसम आपके लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. • तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत: तमिलनाडु में भी भारी बारिश की संभावना है. वहीं पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले 7 दिनों तक गरज-चमक और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे) के साथ भारी बारिश का दौर जारी रहेगा. दिल्‍ली-UP, राजस्‍थान में धूल भरी आंधी उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को कल का मौसम मिलाजुला देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या धूल भरी आंधी चलने की संभावना है. • आंधी और तूफान का अलर्ट: राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में 6 जून को 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और आंधी-तूफान (Thundersquall) की चेतावनी दी गई है. • तापमान में उतार-चढ़ाव: उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान में 5 जून तक 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन 6 जून से एक बार फिर तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक बढ़ोतरी शुरू होने जा रही है. ऐसे में कल का मौसम धीरे-धीरे गर्म होने की तरफ बढ़ेगा. कहां जारी रहेगी हीटवेव?एक तरफ जहां देश के आधे हिस्से में मानसून मेहरबान है, वहीं कुछ राज्यों में लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा. IMD से प्राप्‍त मौसम की जानकारी के मुताबिक, तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 5 और 6 जून को अलग-अलग इलाकों में लू चलने की संभावना है. इसके अलावा, ओडिशा में अगले कुछ दिनों तक मौसम बेहद गर्म और उमस भरा बना रहेगा, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है. यदि आप शनिवार को किसी जरूरी काम से बाहर जा रहे हैं, तो अपने इलाके में कल का मौसम कैसा रहेगा, इसकी पूरी अपडेट देखकर ही घर से बाहर निकलें. दक्षिण भारत में जहां लोगों को जलजमाव से बचना होगा, वहीं राजस्थान, दिल्‍ली और उत्तर प्रदेश के लोगों को तेज आंधी और बढ़ती गर्मी के लिए तैयार रहना चाहिए. देश के विभिन्न राज्यों के मौसम का हाल जानने के लिए स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन जरूर करें. Source link

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India Defence News | सेना के अधिकारियों की खर्च करने की पावर...

होमताजा खबरदेश डिफेंस चीफ्स की खर्च करने की ताकत हुई दोगुनी, अब किस कमांडर के पास कितना बजट? Last Updated:June 05, 2026, 15:36 IST Center Hikes Spending Powers of Military Chiefs: केंद्र सरकार ने रक्षा बलों की वित्तीय शक्तियों को बढ़ाकर 100 परसेंट तक कर दिया है. नए DFPDS-2026 नियमों के तहत अब सर्विस चीफ्स 125 करोड़ रुपये और सैन्य कमांडर 100 करोड़ रुपये तक खर्च कर सकेंगे. इस कदम से 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी. साथ ही इमरजेंसी खरीद, रिसर्च और स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग को दोगुना बजट सपोर्ट मिलेगा. इससे सेना की ऑपरेशनल तैयारी और मजबूत होगी. क्यों बढ़ाई गई आर्मी चीफ और कमांडरों की फाइनेंशियल पावर? (सांकेतिक फोटो Made with AI) नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सैन्य कमांडरों और सर्विस चीफ्स की खर्च करने की फाइनेंशियल पावर को काफी बढ़ा दिया है. इस नए फैसले से सेना के लिए अब हथियार और जरूरी सामान खरीदना बहुत आसान हो जाएगा. रक्षा मंत्रालय के इस कदम से करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा किया जा सकेगा. इस नए नियम को डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स फॉर डिफेंस सर्विसेज (DFPDS-2026) नाम दिया गया है. इसके तहत अधिकारियों की खर्च करने की लिमिट को 100 परसेंट तक बढ़ा दिया गया है. कुछ मामलों में तो यह लिमिट दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है. इस फैसले का मुख्य मकसद सेना की जरूरतों को बिना किसी देरी के पूरा करना है. इससे सेना की ऑपरेशनल तैयारी और मजबूत होगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों के साथ नए वित्तीय नियमों की गाइडलाइन जारी की. सर्विस चीफ्स की खर्च करने की नई लिमिट क्या है? नए नियमों के मुताबिक आर्मी चीफ, नेवी चीफ और एयर चीफ की फाइनेंशियल पावर काफी बढ़ गई है. अब वे किसी भी जरूरी प्रोजेक्ट के लिए 125 करोड़ रुपये तक खर्च कर सकते हैं. इससे पहले उनकी लिमिट केवल 75 करोड़ रुपये तय थी. इस फैसले से वे बिना किसी सरकारी फाइलिंग के तुरंत बड़े फैसले ले सकेंगे. इससे सेना की जरूरतें समय पर पूरी होंगी. आर्मी कमांडरों को कितने करोड़ खर्च करने की छूट मिली? आर्मी कमांडरों और उनके बराबर के नेवी और एयरफोर्स के बड़े अधिकारियों की पावर भी बढ़ाई गई है. उनकी खर्च करने की लिमिट को पहले के 30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह ऐतिहासिक बदलाव फील्ड लेवल पर चल रहे प्रोजेक्ट्स को बहुत तेज कर देगा. अफसरों को बार-बार दिल्ली से मंजूरी नहीं मांगनी पड़ेगी. I congratulate MoD and the Armed Forces on getting enhanced Financial Powers for Revenue related Procurement having annual value of more than Rs 1.25 Lakh crore under the new delegation of financial powers (DFPDS-2026). Source link

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Supreme Court Latest News | Husband Wife News | Dowry Case –...

नई द‍िल्‍ली. एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर द‍िया है कि पत्‍नी से कुछ दिनों तक बात न करना अपने आप में ‘क्रूरता’ नहीं माना जा सकता. खासकर तब जब इसके समर्थन में ठोस सबूत न हों. सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन में मतभेद और नाराजगी आम बात है और कई बार इसका नतीजा पति-पत्‍नी के बीच कुछ समय तक बातचीत बंद रहने के रूप में सामने आता है पर केवल इसी आधार पर पति को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता. क्‍या था मामला? यह मामला तमिलनाडु का है जहां एक व्‍यक्ति पर अपनी पत्‍नी को आत्‍महत्‍या के लिए मजबूर करने और उसे प्रताड़‍ित करने के आरोप लगे थे. ट्रायल कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट ने उसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498A के तहत दोषी ठहराकर 3 साल की सजा सुनाई थी. आरोप था कि वह 13 दिनों तक अपनी पत्‍नी से बात नहीं कर रहा था और इसी मानसिक पीड़ा के कारण पत्‍नी ने फांसी लगाकर आत्‍महत्‍या कर ली. पत्‍नी अपने मायके में रह रही थी वहीं उसने आत्‍महत्‍या की. आरोप था कि शादी के समय उसके माता-पिता ने 3 लाख रुपये, 20 सोने के गहने और अन्‍य सामान दिए थे. इसके बाद में पति पर यह भी आरोप लगा कि वह पत्‍नी पर मायके से और पैसे लाने का दबाव डालता था जबकि ससुरालवाले भी अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसे लगातार परेशान करते थे. प्रॉस‍िक्‍यूशन की थी क्‍या दलील?प्रॉसिक्‍यूशन का यह भी कहना था कि पत्‍नी जब अपने मायके गई तो पति और उसके परिवार को यह पसंद नहीं आया. पति ने उसे डांटा, उसकी इस बात पर नाराजगी जताई और फोन पर भी बात करना बंद कर दी. आरोप के मुताबिक, 13 दिनों तक पति की यह चुप्‍पी पत्‍नी के लिए इतनी बड़ी मानसिक पीड़ा बन गई कि उसने जान दे दी. पत‍ि पर क्‍या था आरोप?इन आरोपों के आधार पर पति के खिलाफ IPC की धारा 498A (क्रूरता) और 304B (दहेज उत्‍पीड़न से मौत) के तहत केस दर्ज किया गया। साथ ही ससुर, सास और दो देवरों (जिनमें से एक नाबालिग था) पर भी मामला दर्ज हुआ. नाबालिग के खिलाफ ट्रायल नहीं हुआ जबकि बाकी 4 आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चला. ट्रायल कोर्ट ने पति को 498A के तहत दोषी ठहराया, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा. पति की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका भी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी. सुप्रीम कोर्ट में क्‍या हुआ? मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो जस्टिस जे के महेश्‍वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने पूरे रिकॉर्ड और निचली अदालतों के फैसलों को परखा. सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पति के खिलाफ मुख्य आरोप यही थे कि 1. उसने पत्‍नी से फोन पर बात नहीं की,2. वह इस बात से नाराज था कि पत्‍नी बिना ससुरालवालों को बताए मायके चली गई,3. इस रवैये से पत्‍नी आहत हुई और उसने आत्‍महत्‍या कर ली. पीठ ने साफ किया कि प्रॉसिक्‍यूशन पर यह भार होता है कि वह आरोपों को संदेह से परे साबित करे. आरोपी को यह साबित करने की बाध्‍यता नहीं होती कि वह निर्दोष है खासकर धारा 498A जैसे मामलों में. कोर्ट ने कहा कि केवल यह दिखा देना कि पति ने 13 दिन बात नहीं की. अपने आप में ‘क्रूरता’ साबित करने के लिए काफी नहीं है, जब तक कि इसे पुख्‍ता सबूतों से समर्थित न किया जाए और यह न दिखाया जाए कि उसका व्‍यवहार इतना गंभीर था कि वह पत्‍नी को आत्‍महत्‍या की ओर धकेल दे. कोर्ट ने यह भी नोट किया कि.. – यह मामला ऐसा नहीं था जहां पति-पत्‍नी के बीच किसी झगड़े या मारपीट का ठोस प्रमाण हो.– निचली अदालतों ने इस बात का समुचित आकलन नहीं किया कि आरोपों को मजबूत सबूतों से साबित किया गया या नहीं.– ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने इस बात पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया कि क्रूरता का आरोप कितनी गंभीरता से सिद्ध हुआ. कोर्ट ने यह भी पाया क‍ि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के अनुसार, पत्‍नी अपने पति के साथ मसकट नहीं जा सकी थी क्‍योंकि उसके पासपोर्ट के कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई थीं इसलिए उसका वीजा जारी नहीं हो पाया. यानी यह कहना कि पति उसे विदेश नहीं ले गया और इसलिए वह परेशान होकर जान दे बैठी, रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्‍यों से मेल नहीं खाता. सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्‍पणियां सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कुछ महत्‍वपूर्ण बातें स्‍पष्‍ट कीं: 1. वैवाहिक जीवन में मतभेद और दूरी:कोर्ट ने कहा कि शादीशुदा जीवन में मतभेद और खटपट होना असामान्‍य नहीं है. कभी-कभी ऐसे मतभेदों की वजह से पति-पत्‍नी के बीच कुछ समय के लिए बातचीत बंद भी हो सकती है लेकिन हर ऐसी स्थिति को ‘क्रूरता’ नहीं कहा जा सकता, जब तक कि उसके साथ गंभीर उत्‍पीड़न, हिंसा या मानसिक यातना का ठोस प्रमाण न हो. 2. 13 दिन बात न करना = क्रूरता नहीं? पीठ ने साफ कहा क‍ि किसी भी तरह के ठोस सबूत के बिना केवल 13 दिन तक मृतका से बात न करना. इस मामले के तथ्‍यों में किसी भी तरह की कल्‍पना में क्रूरता की परिभाषा में नहीं आ सकता. यानी सिर्फ नाराज होकर या किसी कारणवश कुछ दिन बात न करना, अपने आप में IPC की धारा 498A के तहत अपराध नहीं बन जाता. 3. क्रूरता की गंभीरता कैसी होनी चाहिए:कोर्ट ने स्‍पष्‍ट किया कि ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि आरोपी के कथित व्‍यवहार की गंभीरता इतनी हो कि वह किसी महिला को आत्‍महत्‍या करने, खुद को चोट पहुंचाने या उसकी मानसिक सेहत को गंभीर खतरे में डाल दे. केवल मामूली नाराजगी, असंतोष या कुछ समय की चुप्पी को आपराधिक क्रूरता नहीं कहा जा सकता. 4. सबूतों की कसौटी:सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि प्रॉसिक्‍यूशन को आरोपों को संदेह से परे साबित करना होता है। यहां ऐसा कोई ठोस, संगत और विश्वसनीय सबूत नहीं था जो यह दिखाए कि पति की चुप्पी और कथित नाराजगी इतनी गंभीर थी कि उसने पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया. Source link

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pati ne patni ko mara| जनगणना कर रही थी पत्नी, पति ने...

Last Updated:June 05, 2026, 13:47 IST चालोदा गांव की प्राइमरी स्कूल शिक्षिका रीना बेन बलदेवभाई झाला हत्या वाले दिन जनगणना ड्यूटी के लिए निकली थीं. साथ में खत्रीपुर स्कूल के प्रधानाचार्य और उनके पति बलदेव तोयाभाई झाला भी स्कूटर पर साथ थे. 2 जून को रास्ते में ईंट भट्टे के नजदीक पहुंचते-पहुंचते दोनों पति-पत्नी में झगड़ा हो गया. लड़ाई इतनी बढ़ गई कि पति ने पत्नी के सिर पर बार-बार पत्थर से हमला किया और उसकी जान जाने तक उसे मारता रहा. पत‍ि ने जनगणना करती पत्‍नी को पत्‍थर से कुचल कुचल कर मार डाला. Pati ne Patni ko maar dala: अहमदाबाद के ग्रामीण क्षेत्र धोलका से हत्या का बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां जनगणना के लिए ड्यूटी पर गई सरकारी प्राइमरी स्कूल की टीचर की उसके ही पति ने पत्थर से कुचल-कुचल कर हत्या कर दी. हत्यारा पति भी सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य है. फिलहाल पुलिस ने पति को गिरफ्तार कर लिया है. 3 जून को धोलका तालुका के चालोदा-केलियावासना रोड के पास नर्मदा नहर के किनारे सुनसान इलाके में उस महिला का आधा जला हुआ शव बरामद होने से हड़कंप मच गया. शव की पहचान रीना झाला के रूप में हुई, जो चालोदा गांव की प्राइमरी स्कूल शिक्षिका थीं. पुलिस ने मामले की छानबीन की तो कुछ ही घंटे में चौंकाने वाली कहानी सामने आई.. पुलिस के अनुसार, चालोदा गांव की प्राइमरी स्कूल शिक्षिका रीना बेन बलदेवभाई झाला हत्या वाले दिन जनगणना ड्यूटी के लिए निकली थीं. साथ में खत्रीपुर स्कूल के प्रधानाचार्य और उनके पति बलदेव तोयाभाई झाला भी स्कूटर पर साथ थे. 2 जून को रास्ते में ईंट भट्टे के नजदीक पहुंचते-पहुंचते दोनों पति-पत्नी में झगड़ा हो गया. लड़ाई इतनी बढ़ गई कि पति ने पत्नी के सिर पर बार-बार पत्थर से हमला किया और उसकी जान जाने तक उसे मारता रहा. हत्या के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश की और अपने स्कूटर के टैंक से पेट्रोल निकालकर शव पर छिड़का और आग लगा दी. जब स्थानीय लोगों ने आंशिक रूप से जला शव देखा तो पुलिस को सूचना दी. घटना के बाद बलदेवभाई घर लौटे और परिवार वालों को बताया कि पत्नी लापता हो गई है. उन्होंने रीना के भाई और परिचितों को फोन कर बताया कि उनका फोन स्विच ऑफ है और उन्हें कहीं नहीं मिल रही हैं. बाद में उन्होंने पुलिस थाने में लापता रिपोर्ट भी दर्ज कराई. हालांकि धोलका ग्रामीण पुलिस, सर्विलांस टीम और लोकल क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, लोकल इंटेलिजेंस की मदद से जांच की और शक की सुई बलदेवभाई की ओर मुड़ गई. गिरफ्तार करने पर उन्होंने जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस को दी गई जानकारी में बलदेवभाई ने बताया कि घर में लंबे समय से घरेलू कलह चल रही थी. उन्हें लगता था कि पत्नी, बच्चे और मां अक्सर उनके खिलाफ रहते हैं. इससे पहले भी उन्होंने पत्नी को मारने की धमकी दी थी. धोलका पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की हत्या और सबूत नष्ट करने संबंधी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. जांच चल रही है कि हत्या पहले से प्लान की गई थी या झगड़े के दौरान अचानक हुई. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ahmedabad,Ahmedabad,Gujarat Source link

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आंधी-तूफान में नहीं गिरेगा एक भी आम, अपनाएं ये धांसू टिप्स, पैसों...

होमताजा खबरकृषि आंधी-तूफान में नहीं गिरेगा एक भी आम,अपनाएं ये धांसू टिप्स, मुनाफा होगा डबल Last Updated:June 05, 2026, 12:47 IST मानसून की आमद होती है. आंधी तूफान चलता है जिसकी वजह से भी फसल उजड़ने लगती है.किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. जब यह स्थिति बनती है तो किसान भाई कुछ तरीके अपना कर अपनी फसल को भी बचा सकते हैं. उसमें कुछ वैल्यू एडिशन करके मुनाफा भी बढ़ा सकते हैं. गर्मी का मौसम यानी कि आमों का सीजन और आम के दीवाने तो इन्हें किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ते हैं. वह सीजन में अलग-अलग वैरायटी के आमों को खाना पसंद करते हैं किसी में रस ज्यादा होता है तो किसी में गूदा, तो कोई कच्चे आमों को खाने का भी शौकीन होता है. लेकिन आम के सीजन में जब एक साथ फल आते हैं.इनके भाव एकदम से गिर जाते हैं. खासकर कच्चे आमों को लेकर यह स्थिति बनती है या फिर जब आमों का सीजन जाने वाला होता है तब मानसून की आमद होती है. आंधी तूफान चलता है जिसकी वजह से भी फसल उजड़ने लगती है.किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. जब यह स्थिति बनती है तो किसान भाई कुछ तरीके अपना कर अपनी फसल को भी बचा सकते हैं. उसमें कुछ वैल्यू एडिशन करके मुनाफा भी बढ़ा सकते हैं. आंधी तूफान में उजाड़ रहा आम का बगीचासागर के कपूरिया में प्रगतिशील युवा किसान आकाश चौरसिया के द्वारा 36 वैरायटी के आमों का उत्पादन ले रहे हैं. लेकिन उनके द्वारा जब एक साथ फल आ जाते हैं. आंधी तूफान में फल झड़ते हैं या फिर पक्षियों के द्वारा आम गिराए जाते हैं तो उनका अलग-अलग तरह से उपयोग करते हैं. आकाश बताते हैं कि आम के फल को अगर चिड़िया खाकर गिर रही है या किसी अन्य वजह से वह टूट कर गिर गए हैं. दम एकदम से सस्ते हो गए हैं तो ऐसी स्थिति में हम उन फलों को एकत्रित करते हैं. उनको छीलकर काटते हैं. फिर उनको धूप में सूखने के लिए डाल देते हैं जिनको आम की कली के नाम से बाजार में बेचा जाता है. इसको सूखने के बाद पाउडर फॉर्म में भी कर सकते हैं. जिनको अमचूर कहते हैं. इस अमचूर का उपयोग आजकल गोलगप्पे का पानी बनाने के लिए खूब किया जाता है खास तौर पर भिंड मुरैना ग्वालियर इलाके में इसकी डिमांड बहुत अधिक है. यह पाउडर 200 – 300 रुपया किलो तक बिक जाता है.इसके अलावा इन कच्चे आम को अच्छे से कटिंग करके अचार के रूप में भी तैयार किया जा सकता है. अच्छा वैल्यू एडिशन हो सकता हैवहीं इसके अलावा जब इन फलों की गुठलियों खेतों में गिर जाती या रह जाती हैं तो इसे भी अंकुरण होता है जिनका ग्राफ्टिंग करके पौधे तैयार करते हैं. एक पौधा 80 से 100 रुपए तक में बिक जाता है. इस तरह से कुछ आसान उपाय करके हम अपनी फसल का वैल्यू एडिशन कर सकते हैं जो किसान को होने वाला नुकसान मुनाफे के रूप में बदल जाता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sagar,Madhya Pradesh Source link

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RBI MPC Meeting Live : रेपो रेट स्थिर, ग्रोथ रेट घटाई, विदेशी...

नई दिल्‍ली. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्‍होत्रा की अगुवाई में तीन दिनों से चल रही मौद्रिक नीति सीमिति (MPC) की बैठक के नतीजा आ गया है. इस बार आरबीआई के सामने कई चुनौतियां थीं. इसलिए कयास लगाए जा रहे थे कि रुपये को थामने के लिए ब्‍याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन ज्‍यादातर एक्‍सपर्ट का यही मानना है कि रिजर्व बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा. आरबीआई ने अपनी पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया है. RBI Policy News: बाहरी झटकों से निपटने के लिए भारत बेहतर स्थिति में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा और मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए पहले से अधिक मजबूत हुई है. केंद्रीय बैंक के मुताबिक सरकार द्वारा MSME और निर्यात क्षेत्र को दिया गया समर्थन, घरेलू गैस और कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने की कोशिशें तथा आयातित उत्पादों के घरेलू विकल्पों को बढ़ावा देने जैसे कदमों ने अर्थव्यवस्था की मजबूती बढ़ाई है.RBI ने कहा कि महत्वपूर्ण आयातों के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति भी भारत को बाहरी झटकों से बचाने में मदद कर रही है. इन उपायों की वजह से वैश्विक संकट या आपूर्ति संबंधी बाधाओं का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पहले की तुलना में कम पड़ने की उम्मीद है. RBI का संतुलित रुख अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा मॉड्यूलस अल्टरनेटिव्स के सीईओ एवं सीआईओ संदीप अग्रवाल ने कहा कि RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखकर विकास, महंगाई और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. यह फैसला दिखाता है कि केंद्रीय बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा रखता है, लेकिन वैश्विक जोखिमों को लेकर भी सतर्क है.उनके मुताबिक RBI द्वारा घोषित उपायों से बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहेगी और कारोबारों को वित्तपोषण मिलता रहेगा. उन्होंने कहा कि नीतिगत स्थिरता प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि यह ऐसे समय में मजबूत कंपनियों की फंडिंग जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है, जब पारंपरिक कर्जदाता अधिक सतर्क रुख अपना रहे हैं. RBI Monetary Policy Meeting: फूड इन्फ्लेशन पर RBI का क्या टेक? RBI Monetary Policy Meeting: आरबीाई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि खाद्य कीमतों का भविष्य अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह सामान्य से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून का अनुमान और एल नीनो की आशंका है. यदि मौसम की स्थिति उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, तो कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, जिससे खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में दबाव बढ़ सकता है.मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई बढ़ने के जोखिम पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुए हैं. हालांकि, मौद्रिक नीति समिति (MPC) का मानना है कि किसी बड़े कदम से पहले स्थिति को और स्पष्ट होने देना बेहतर होगा. इसी कारण समिति ने फिलहाल इंतजार करने और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखने का फैसला किया है. रेपो रेट में विराम, लेकिन रियल एस्टेट की रफ्तार बरकरार: मोहित मित्तल MORES के सीईओ मोहित मित्तल ने कहा कि RBI का रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था, हालांकि कई निवेशक एक और दर कटौती की उम्मीद कर रहे थे. उनके मुताबिक 2025 की शुरुआत से अब तक ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कमी का असर अब धीरे-धीरे आम घर खरीदारों तक पहुंच रहा है. इससे EMI का बोझ कम हुआ है, होम लोन सस्ते हुए हैं और बाजार में सकारात्मक माहौल बना है. मोहित मित्तल ने कहा कि बढ़ते कच्चे तेल के दाम और रुपये पर दबाव को देखते हुए RBI का रुख पूरी तरह उचित है. उन्होंने कहा कि रेपो रेट में फिलहाल कोई बदलाव न होना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए नकारात्मक संकेत नहीं है. पिछले एक साल में हुई दर कटौतियों ने उन खरीदारों को भी बाजार में वापस लाया है, जो लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. उनके अनुसार किफायती आवास, मिडिल क्लास हाउसिंग और प्रीमियम सेगमेंट तीनों में मांग मजबूत बनी हुई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि FY27 में ब्याज दरों में एक और कटौती होती है, तो रियल एस्टेट बाजार की रफ्तार और तेज हो सकती है. मोहित मित्तल का मानना है कि सेक्टर की बुनियादी स्थिति मजबूत है और किसी एक नीतिगत फैसले से इसकी दीर्घकालिक विकास कहानी नहीं बदलने वाली. स्थिर रेपो रेट से हाउसिंग डिमांड को मिलेगा समर्थन: आशीष भूटानी भूटानी इंफ्रा के सीईओ आशीष भूटानी ने कहा कि RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखना और न्यूट्रल रुख जारी रखना मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलते महंगाई परिदृश्य के बीच एक संतुलित फैसला है. उनके मुताबिक रियल एस्टेट सेक्टर के लिए केवल ब्याज दरों में कटौती ही नहीं, बल्कि दरों में स्थिरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है.आशीष भूटानी ने कहा कि स्थिर ब्याज दरें घर खरीदारों का भरोसा बढ़ाती हैं और उन्हें लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाने में मदद करती हैं. साथ ही, पूर्वानुमान योग्य उधारी माहौल के कारण डेवलपर्स भी अपनी परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाकर उन्हें समय पर पूरा कर सकते हैं.उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्याज दरों में यह स्थिरता आवासीय रियल एस्टेट की मांग को बनाए रखने में मदद करेगी, खासकर मिड-इनकम और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में. उनके अनुसार यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर की विकास रफ्तार को आगे भी मजबूती प्रदान कर सकता है. RBI ने बढ़ते जोखिमों के बीच संतुलित रुख अपनाया कोटक महिंद्रा एएमसी में हेड फिक्स्ड इनकम अभिषेक बिसेन (Abhishek Bisen) ने कहा कि जून 2026 की RBI मौद्रिक नीति बैठक ऐसे समय में हुई, जब वैश्विक संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में कमजोरी और मानसून से जुड़े जोखिम बाजार की चिंता बढ़ा रहे हैं. हालांकि खुदरा महंगाई (CPI) 3.48% के अपेक्षाकृत आरामदायक स्तर पर बनी हुई है, लेकिन थोक महंगाई (WPI) और ईंधन की बढ़ती कीमतें भविष्य में दबाव बढ़ने के संकेत दे रही हैं.उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन उस पर कुछ चुनौतियों का असर दिखने लगा है और FY27 के लिए विकास की संभावनाएं पहले की तुलना में थोड़ी कमजोर हुई हैं. इसी वजह से बॉन्ड यील्ड और जोखिम प्रीमियम में भी बढ़ोतरी देखी

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