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हिमालय से हिंद महासागर तक साझेदारी मजबूत करने की तैयारी, दिल्ली आ...

होमताजा खबरदेश जयशंकर-खनाल आमने-सामने, भारत और नेपाल समीकरण में क्या होगा नया? Last Updated:June 04, 2026, 18:04 IST नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह उच्चस्तरीय दौरा दोनों देशों के पुराने और बहुआयामी रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा. विदेश मंत्री खनाल 7 जून को काठमांडू लौटेंगे. ख़बरें फटाफट नेपाल के विदेश मंत्री की भारय यात्रा एस जयशंकर के निमंत्रण पर हो रही है. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल 5 से 7 जून 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और नेपाल अपने पारंपरिक रिश्तों को नई मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे सीमा विवाद अब भी दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दे बने हुए हैं. खनाल का यह दौरा भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर हो रहा है और इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नई दिल्ली में होने वाली वार्ता के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्री व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग, सीमा पार कनेक्टिविटी, जल संसाधन और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे. हालांकि, राजनीतिक और रणनीतिक हलकों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि क्या सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर कोई सकारात्मक संकेत सामने आता है. भारत और नेपाल के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आधार पर बेहद मजबूत रहे हैं. दोनों देशों के बीच खुली सीमा, व्यापक व्यापारिक गतिविधियां और करोड़ों लोगों के पारिवारिक व सामाजिक रिश्ते इस साझेदारी को विशेष बनाते हैं. इसके बावजूद वर्ष 2020 में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर विवाद गहरा गया था, जब नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी कर इन क्षेत्रों को अपना हिस्सा बताया था. भारत ने उस दावे को स्वीकार नहीं किया और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर मतभेद सामने आए. विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में दोनों देशों ने विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने और सहयोग के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है. यही वजह है कि ऊर्जा, जलविद्युत, रेलवे और सड़क संपर्क जैसी परियोजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है. नेपाल से भारत को बिजली निर्यात भी दोनों देशों के संबंधों का नया आधार बनकर उभरा है. नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह उच्चस्तरीय दौरा दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. ऐसे समय में जब दक्षिण एशिया की भू-राजनीति तेजी से बदल रही है, भारत और नेपाल के बीच संवाद और सहयोग को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी अहम माना जा रहा है. विदेश मंत्री शिशिर खनाल 7 जून को अपनी यात्रा समाप्त कर काठमांडू लौटेंगे. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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सिर्फ कुछ बीघा जमीन और लाखों की कमाई! जानिए कैसे पपीते की...

होमताजा खबरकृषि कम जमीन में मुनाफे का फॉर्मूला!पपीते की खेती से लाखों कमा रहे किसान अशोक शर्मा Last Updated:June 04, 2026, 17:02 IST Agriculture News: कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान आज नई सफलता की कहानियां लिख रहे हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी किसान अशोक शर्मा की है, जिन्होंने कम जमीन में पपीते की खेती कर लाखों रुपये का मुनाफा कमाया है. पारंपरिक फसलों की तुलना में पपीते की खेती ने उन्हें बेहतर उत्पादन और अधिक आय दी. उचित देखभाल, वैज्ञानिक तरीके और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए उन्होंने खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया. पपीते की फसल कम समय में तैयार हो जाती है और इसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को नियमित आय का अवसर मिलता है. अशोक शर्मा की सफलता आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. ख़बरें फटाफट Agriculture News: राजस्थान के सीकर जिले के सिंगरावट गांव के किसान अशोक कुमार शर्मा ने साबित कर दिया है कि खेती में सही फसल चयन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके आय को कई गुना बढ़ाया जा सकता है. परंपरागत फसलों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने पपीते की व्यावसायिक खेती को अपनाया और आज यह खेती उनके लिए लाखों रुपये की कमाई का जरिया बन चुकी है. उनकी सफलता अब उन किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही जिसने पास कम जमीन है और वे अधिक वे अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं. अशोक कुमार ने साल 2023 में अपनी तीन बीघा भूमि में करीब 700 पपीते के पौधे लगाए थे. वर्तमान में सभी पौधे उत्पादन दे रहे हैं और खेत से ही व्यापारी फल खरीदकर ले जाते हैं. उनकी उपज जयपुर और चोमू की मंडियों तक पहुंच रही है. पपीते की खेती से उन्हें सालाना लाखों रुपये से अधिक की आय हो रही है. इसके साथ ही वे मधुमक्खी पालन भी कर रहे हैं, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त होती है. अशोक कुमार पपीते और मधुमक्खी पालन करके सालाना करीब 10 लाख रुपए से अधिक की कमाई कर रहे हैं. 8 से 10 महीने में उत्पादन हो जाता है शुरू अशोक कुमार ने बताया कि किसानों के लिए पपीते की खेती फायदे का सौदा है. यह कम समय में उत्पादन देना शुरू कर देती है. उन्होंने बताया कि पौध रोपण के 8 से 10 महीने बाद फल मिलना शुरू हो जाता है. यदि सिंचाई, पोषण और पौधों की देखभाल सही तरीके से की जाए तो एक बार लगाया गया बाग लंबे समय तक नियमित उत्पादन देता रहता है. यही कारण है कि कई किसान अब गेहूं, सरसों और बाजरा जैसी पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं. ऐसे करें खेती की शुरुआत उन्होंने बताया कि पपीते की खेती शुरू करने से पहले किसानों को अच्छी जल निकासी वाली भूमि का चयन करना चाहिए. इसके अलावा पौधों को लगाते समय बीच में उचित दूरी रखे. इसके अलावा ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाने से खर्च कम होता है. वहीं, जैविक खाद का उपयोग करना उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है. साथ ही खेत में मधुमक्खी पालन को शामिल करने से परागण बेहतर होता है, जिससे फल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार देखा जाता है. यही मॉडल अशोक कुमार के खेत में भी सफल साबित हुआ है. संयुक्त मॉडल किसानों के लिए लाभ का सौदा उन्नत अशोक कुमार का मानना है कि यदि किसान बाजार की मांग को समझते हुए फसल का चयन करें और नई तकनीकों को अपनाएं, तो कम जमीन से भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है. पपीते की खेती और मधुमक्खी पालन का यह संयुक्त मॉडल आज क्षेत्र के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आया है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sikar,Rajasthan Source link

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टेक्नोलॉजी की नई राजधानी बनेगा हैदराबाद? गूगल का बड़ा इंटरनेशनल कैंपस तैयार,...

होमफोटोदेश टेक्नोलॉजी की नई राजधानी बनेगा हैदराबाद? गूगल का बड़ा इंटरनेशनल कैंपस तैयार Last Updated:June 04, 2026, 16:01 IST Google Hyderabad Campus: हैदराबाद एक बार फिर भारत के प्रमुख टेक्नोलॉजी हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. शहर में गूगल का सबसे बड़ा इंटरनेशनल कैंपस तेजी से आकार ले रहा है, जिसमें लगभग 1500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना से करीब 18,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों के सृजित होने की उम्मीद है. अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह कैंपस गूगल के वैश्विक संचालन, अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश से न केवल हैदराबाद के आईटी और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होगा. गूगल की यह परियोजना भारत में बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक कंपनियों के भरोसे का प्रतीक मानी जा रही है. भारत का प्रमुख आईटी हब, हैदराबाद, इन दिनों वैश्विक टेक जगत में एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है. इंटरनेट दिग्गज Google यहाँ अमेरिका के बाहर अपना सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कैंपस तैयार कर रहा है. करीब 1,500 करोड़ रुपए के भारी-भरकम निवेश से बन रहा यह मेगा प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दौर में पहुंच चुका है जो शहर की तकनीकी साख को पूरी दुनिया में एक नया आयाम देने के लिए तैयार है. गचीबाउली के फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट में करीब 7.3 एकड़ जमीन पर बन रही यह विशालकाय इमारत कई मायनों में बेहद खास है. कैलिफोर्निया (अमेरिका) स्थित गूगल मुख्यालय के बाहर यह कंपनी का पहला ऐसा कैंपस है जिसका मालिकाना हक पूरी तरह से खुद गूगल के पास होगा. लगभग 30 लाख स्क्वायर फीट के इस विशालकाय और आधुनिक परिसर में एक साथ 18,000 से अधिक आईटी प्रोफेशनल्स के काम करने की अद्भुत क्षमता होगी. गूगल ने इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट के लिए साल 2019 में जमीन का अधिग्रहण किया था. हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण शुरुआती दौर में काम की रफ्तार थोड़ी धीमी रही, लेकिन उसके बाद तेलंगाना सरकार के सहयोग और रियल एस्टेट तेजी के चलते निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली. मौजूदा कंस्ट्रक्शन अपडेट्स और इंजीनियरिंग रिपोर्ट्स के अनुसार यह ड्रीम प्रोजेक्ट साल 2027 तक पूरी तरह बनकर तैयार और चालू होने की राह पर है. Add News18 as Preferred Source on Google इस कैंपस की सबसे बड़ी यूएसपी इसका बेहद आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल डिज़ाइन है. प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्चरल फर्म AHMM द्वारा डिज़ाइन की गई यह मुख्य इमारत एक अनोखी, सीढ़ीदार और दीर्घवृत्ताकार आकार की होगी. इसके आर्किटेक्चर में ओपन स्पेस, प्राकृतिक रोशनी और हवा के बेहतर सर्कुलेशन का विशेष ध्यान रखा गया है, जो बिजली की खपत को कम करके कर्मचारियों को एक बेहद सस्टेनेबल और तनावमुक्त वर्किंग एनवायरनमेंट देगा. गूगल के इस नए कैंपस के शुरू होने से न केवल हैदराबाद बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खुलेंगे. यह प्रोजेक्ट अनुभवी प्रोफेशनल्स के साथ-साथ कॉलेज से निकलने वाले फ्रेशर्स के लिए भी बड़े पैमाने पर डायरेक्ट और इनडायरेक्ट जॉब्स लेकर आएगा. इसके अलावा, इस कैंपस के संचालन से स्थानीय स्तर पर सपोर्ट स्टाफ, सिक्योरिटी, हॉस्पिटैलिटी और ट्रांसपोर्टेशन जैसे क्षेत्रों में भी हज़ारों लोगों को रोज़गार मिलेगा. माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न के विशाल परिसरों की मौजूदगी के बाद अब गूगल के इस महा-कैंपस के लाइव होते ही हैदराबाद का वेस्टर्न कॉरिडोर दुनिया के सबसे शक्तिशाली टेक क्लस्टर्स में मजबूती से शुमार हो जाएगा. यह नया परिसर न केवल ग्लोबल स्तर पर भारत की तकनीकी और अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता का नया प्रतीक बनेगा बल्कि आने वाले समय में कई और बड़ी टेक कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित करने में भी मैग्नेट की तरह काम करेगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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तेलंगाना का नरसापुर फॉरेस्ट बना ग्रीन लंग, झरनों और हरियाली से खिंचे...

Last Updated:June 04, 2026, 14:57 IST Narsapur Forest Park Hyderabad: तेलंगाना का नरसापुर फॉरेस्ट हैदराबाद के पास स्थित एक प्रमुख प्राकृतिक आकर्षण बन गया है. भागदौड़ भरी शहरी जिंदगी से दूर यह क्षेत्र लोगों को हरियाली और शांति का अनुभव देता है. मानसून के दौरान यहां घने जंगल, पथरीले रास्ते और छोटे-छोटे झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. इसे हैदराबाद का ग्रीन लंग भी कहा जाता है. 50 रुपये के टिकट पर यहां वॉकिंग ट्रैक और वॉचटावर जैसी सुविधाएं मिलती हैं. हालांकि वन विभाग ने प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया है. यह स्थान वीकेंड ट्रिप के लिए लोकप्रिय डेस्टिनेशन बन चुका है. ख़बरें फटाफट हैदराबाद: भागदौड़ भरी शहरी जिंदगी और कंक्रीट के जंगलों के बीच सांस लेती आबादी के लिए तेलंगाना का नरसापुर फॉरेस्ट एक वरदान साबित हो रहा है. सोशल मीडिया पर इन दिनों इस खूबसूरत प्राकृतिक खजाने की तस्वीरें और वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं, जिसमें यहां की घनी हरियाली और पथरीले रास्तों के बीच से बहते पानी के खूबसूरत नजारे लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. हैदराबाद के बेहद करीब स्थित होने के कारण इसे इस क्षेत्र का ग्रीन लंग भी कहा जाता है, जो न केवल हवा को शुद्ध रखने में मदद करता है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता और वन्यजीवों को भी सुरक्षा प्रदान करता है. मेडक जिले के नरसापुर इलाके में स्थित यह आरक्षित वन क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों, ट्रैकर्स और वीकेंड पर शांति की तलाश करने वाले लोगों के लिए एक आदर्श गंतव्य बन चुका है. मानसून की शुरुआत के साथ ही इस पूरे जंगल की रंगत बदल जाती है. जून से अक्टूबर के महीनों में यहां चारों तरफ मखमली हरियाली छा जाती है और चट्टानों के बीच से छोटे-छोटे प्राकृतिक झरने बहने लगते हैं, जो पर्यटकों को एक जादुई अनुभव देते हैं. अर्बन फॉरेस्ट पार्क के तौर पर किया गया है विकसित  इस वन क्षेत्र की लोकप्रियता को देखते हुए यहां नरसापुर अर्बन फॉरेस्ट पार्क भी विकसित किया गया है. मात्र 50 रुपये के प्रवेश शुल्क के साथ आने वाले विजिटर के लिए यहां वॉकिंग ट्रैक, बच्चों के खेलने का स्थान और एक भव्य वॉचटावर बनाया गया है, जहां से पूरे जंगल का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है. हालांकि वन विभाग ने यहां पर्यावरण की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. प्लास्टिक और बाहरी खाने-पीने की वस्तुओं पर सख्त पाबंदी है, क्योंकि इस क्षेत्र में बंदरों की भारी तादाद है, जो खाने की तलाश में पर्यटकों पर हमला कर देते हैं. ऐसे पहुंच सकते हैं नरसापुर अर्बन फॉरेस्ट पार्क हाल ही में सोशल मीडिया पर इस जगह की दूरी को लेकर कुछ भ्रांतियां भी देखी गईं, जिसे लेकर स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि हैदराबाद आउटर रिंग रोड या कुकटपल्ली से नरसापुर फॉरेस्ट की वास्तविक दूरी मात्र 35 से 45 किलोमीटर है, जहां गाड़ी से महज एक घंटे में पहुंचा जा सकता है. कुछ लोग नाम की समानता के कारण इसे आंध्र प्रदेश के नरसापुरम शहर से जोड़ लेते हैं, जो यहां से 423 किलोमीटर दूर है. यदि आप भी वीकेंड पर प्रकृति के करीब एक शांत और सुरक्षित यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो नरसापुर फॉरेस्ट से बेहतर विकल्प कोई दूसरा नहीं हो सकता. About the Author deep ranjan दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Hyderabad,Telangana Source link

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अवैध बांग्‍लादेशियों की शामत, अब तक 500 हिरासत में लिए गए –...

Last Updated:June 04, 2026, 13:54 IST Illegal Bangladeshi News: देशभर में अवैध तरीके से भारत की सीमा में घुसे घुसपैठियों के खिलाफ एक्‍शन लिया जा रहा है. गुजरात में इसके लिए बकायदा ऑपरेश डेल्‍टा हंट लॉन्‍च किया गया है. इसके तहत सैकड़ों की तादाद में अवैध बांग्‍लादेशियों को पकड़ा गया है. गुजरात में अवैध बांग्‍लादेशियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है. Illegal Bangladeshi News: गुजरात पुलिस ने अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ पूरे राज्य में ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ को तेज कर दिया है. इसी क्रम में पुलिस ने 501 लोगों को हिरासत में लिया है. अधिकारियों ने बताया कि पुलिस की कार्रवाई एक ही समय में कई जिलों में हुई. कोऑर्डिनेटेड एक्‍शन में अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों की पहचान और उनका वेरिफिकेशन किया गया. पुलिस टीमों ने खुफिया जानकारी के आधार पर चिह्नित आवासीय क्षेत्रों, मजदूरों के ठिकानों और अन्य स्थानों पर जांच की. इस कार्रवाई में पुलिस की जिला इकाइयां, क्राइम ब्रांच टीमें और साइबर सेल की टीमें शामिल थीं. ऑपरेशन के शुरुआती चरणों में अधिकारियों ने हजारों संदिग्ध लोगों की जांच की थी और सत्यापन के बाद सैकड़ों लोगों को हिरासत में ले लिया. गुजरात के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने इस पहल को एक खुफिया सूचना आधारित अभियान बताया है, जिसमें पुलिस की विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वित कार्रवाई शामिल है. उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों का उद्देश्य बिना दस्तावेज वाले निवासियों की पहचान करना और जाली दस्तावेज, आवास और रोजगार सहायता से जुड़े संभावित मददगार नेटवर्क की जांच करना है. फेक आधार कार्ड पिछले चरणों में पुलिस की जांच में पहचान के दस्तावेजों की बारीकी से जांच भी शामिल थी. कुछ मामलों में जाली या धोखाधड़ी से प्राप्त आधार रिकॉर्ड के संदिग्ध इस्तेमाल की बात सामने आई और जांच का दायरा उन लोगों और नेटवर्क तक भी बढ़ाया गया, जो कथित तौर पर बिना दस्तावेज वाले निवासियों की मदद कर रहे थे. वेरिफिकेशन के साथ पूछताछ अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया था कि हिरासत में लिए गए लोगों के वेरिफिकेशन के साथ-साथ अन्य संदिग्ध लोगों से भी आगे की पूछताछ जारी रहेगी. ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के पिछले चरणों में अहमदाबाद, सूरत और राजकोट जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर जांच-पड़ताल और लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई दर्ज की गई थी. फिलहाल, हिरासत में लिए गए लोगों का जिला-वार ब्योरा और आगे की कानूनी कार्रवाई समेत अन्य विस्तृत जानकारी, जारी सत्यापन कार्य पूरा होने के बाद सामने आने की संभावनाएं हैं. बता दें कि देशभर में अवैध तरीके से सीमा पार करने वालों पर एक्‍शन लिया जा रहा है. ये लोग नेशनल थ्रेट के तौर पर भी सामने आए हैं. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ahmedabad,Ahmedabad,Gujarat Source link

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इतिहास जिंदा… झुंझुनूं के प्राइवेट बस स्टैंड को अब मिली नई पहचान!...

Last Updated:June 04, 2026, 12:47 IST Jhunjhunu Private Bus Standछ झुंझुनूं शहर के प्राइवेट बस स्टैंड को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है. नगर के पहले शहीद इंद्रसिंह सैनी के सम्मान में प्राइवेट बस स्टैंड का नाम बदलकर “शहीद इंद्रसिंह सैनी बस स्टैंड” रखने का निर्णय लिया गया है. इस फैसले का उद्देश्य शहीद के बलिदान को सम्मान देना और आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान से परिचित कराना है. स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है. बताया जा रहा है कि शहर के प्रमुख स्थानों पर भी शहीद इंद्रसिंह सैनी के नाम को सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाएगा. नाम परिवर्तन के बाद बस स्टैंड की पहचान आधिकारिक रूप से नए नाम से होगी, जिससे यात्रियों और नागरिकों को शहीद की स्मृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा. Jhunjhunu News: झुंझुनूं शहर के प्राइवेट बस स्टैंड का नाम बदल दिया गया है. जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्व सम्मति इस बस स्टैंड का नाम बदला गया है. अब यह बस स्टैंड शहीद इंद्रसिंह सैनी के नाम से जाना जाएगा. ये झुंझुनूं के पहले शहीद थे, जिन्हें देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. जल्द ही मुख्य बोर्ड पर भी शहीद इंद्रसिंह सैनी का नाम लिखा जाएगा. आपको बता दें कि झुंझुनूं शहर के इस बस स्टैंड में केवल प्राइवेट बसों का हो संचालन होता है. यहां से लोकल रूट से लेकर देश के अलग अलग राज्यों के लिए बसे जाती है. इसके अलावा लोक परिवहन बसों का भी संचालन यहां होता है. रोजाना दर्जनों लंबी रूटों की स्लीपर बस यहां चलती है. यह बस स्टैंड शेखावाटी के सबसे बड़े बस स्टैंड में से एक है. इस बस स्टैंड का नाम शाहिद के नाम से किए जाने पर लोगों में खुशी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सही मायने में शहीद इंद्रसिंह सैनी का सही सम्मान है. इस प्राइवेट बस स्टैंड का नाम उनके नाम पर रखे जाने से उनका नाम हमेशा के लिए अमर हो गया है. आने वाली पीढ़ी भी उनके शौर्य और पराक्रम के किस्सों के बारे में जान सकेगी. जानकारी के अनुसार इस बस स्टैंड पर शहीद इंद्रसिंह सैनी की जानकारी भी लिखी जाएगी. Add News18 as Preferred Source on Google जानिए कौन थे इंद्रसिंह सैनी: जवान इंद्रसिंह सैनी जवानों की फैक्ट्री कहे जाने वाले झुंझुनू जिले के पहले शहीद जवान थे. जब वे शहीद हुए तब उनकी पोस्टिंग जम्मू के सांबा कैवेलरी रेजीमेंट में थी. गुरुवार का दिन था, तभी अचानक कुछ आतंकवादियों ने हमला कर दिया. तब उन्होंने हिम्मत से आतंकियों को जवाब दिया. लेकिन, अचानक हुए हमले से नहीं बच सके. एक आतंकी की गोली जवान इंद्रसिंह सैनी को लग गई. इस दौरान वे आखिरी सांस तक लड़ते रहे और अंत में लड़ते लड़ते ही शहीद हो गए. जब उनका शव राजकीय अंतिम संस्कार के लिए लाया गया तभी एक उनकी पत्नी और बच्चों को उनके शहीद होने की खबर नहीं थी. जब शहीद इंद्रसिंह सैनी के घर वालों ने बहुत सारे जवानों को घर आते देखा तो वे सहम गए. जब सेना के अधिकारी ने परिवार वालों को उनका सामान दिया, तो घर में चीख पुकार मच गया. जब लोगों को इस बारे में पता चला तो उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शमिल हुए. इसके बाद उनका स्मारक भी बनाया गया. हर साल उनके शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होता है. इसके अलावा जगह रक्तदान और जगह जगह सेवा के कार्य होते हैं. ऐसे में अब लोगों की मांग के अनुसार उनके नाम पर झुंझुनूं शहर के प्राइवेट बस स्टैंड का नाम रखा गया है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

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धान की रोपाई से पहले कर लें यह काम, 80% तक कम...

बरसात का मौसम शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी है, लेकिन इस बीच किसान धान की रोपाई की तैयारी में जुट गए हैं. अगर आप किसान हैं और धान की रोपाई करना चाहते हैं और चाहते हैं कि आगे चलकर आपकी फसल में खरपतवार न आएं, तो रोपाई से पहले यह जरूरी काम जरूर कर लें. इससे आपकी धान की फसल में खरपतवार की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी. आइए जानते हैं कि वे कौन-से जरूरी उपाय हैं, जिनसे फसल में खरपतवार नहीं उगेंगे. जानकारी के अभाव में किसान नहीं कर पाते सही खेती लोकल 18 से बातचीत में जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि पूर्वांचल में ज्यादातर किसान धान की खेती संडा विधि से करते हैं. इस विधि में पर्याप्त जानकारी के अभाव में किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. खरपतवार को नष्ट करने के लिए किसान काफी पैसा और रसायनों का उपयोग करते हैं, जबकि थोड़ी-सी जानकारी और सावधानी बरतकर इस अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में किसान धान की नर्सरी तैयार कर रहे हैं और लगभग 21 दिन बाद संडा की रोपाई की जाती है. रोपाई से पहले कुछ आवश्यक कार्य कर लेने से खरपतवार की समस्या काफी कम हो सकती है. धान की रोपाई से 20-25 दिन पहले करें हल्की सिंचाई सोम प्रकाश गुप्ता के अनुसार, जब खेत में अंतिम रोपाई करनी हो, तो उससे 20 से 25 दिन पहले किसी भी साधन से हल्की सिंचाई कर दें. इससे खेत में मौजूद खरपतवार के बीज अंकुरित होकर उगने लगेंगे. हल्की सिंचाई के बाद खेत में उगने वाले अधिकांश खरपतवार बाहर आ जाते हैं. जब इन खरपतवारों में दो से तीन पत्तियां निकल आएं, तब रोपाई से पहले खेत में पानी भरकर कीचड़ वाली जुताई कर दें और खरपतवारों को मिट्टी में दबा दें. जब ये खरपतवार कीचड़ में दब जाएंगे और उसके बाद धान की रोपाई कर दी जाएगी, तो वे दोबारा नहीं उग पाएंगे. 80 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं खरपतवार उन्होंने बताया कि रोपाई से पहले हल्की सिंचाई करने पर उस मौसम में उगने वाले 80 से 90 प्रतिशत खरपतवार पहले ही अंकुरित हो जाते हैं. यदि इन खरपतवारों को रोपाई से पहले कीचड़ में दबा दिया जाए, तो लगभग 80 प्रतिशत तक खरपतवार की समस्या समाप्त हो सकती है. इससे किसान खरपतवार नियंत्रण पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से बच सकते हैं. धान की फसल में खरपतवार आने पर महंगे रसायनों और खरपतवारनाशकों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ फसल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए, यदि आप धान की रोपाई करने जा रहे हैं, तो पहले खेत में हल्की सिंचाई करें और उगे हुए खरपतवारों को जुताई के दौरान कीचड़ में दबा दें. इससे आपकी फसल मजबूत होगी और खरपतवार की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी. Source link

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fotula tunnel| lac china border| चीन बॉर्डर पर फटाफट पहुंचेंगे तोप-टैंक, LAC...

Jammu-Kashmir to Ladakh Fotu la Tunnel: भारत सरकार ने चीन की सीमा के बेहद करीब लद्दाख तक फटाफट पहुंचने और जम्मू-कश्मीर से कनेक्ट करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जोजिला सुरंग से भी एक कदम आगे बढ़कर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग-1 फोटू ला पास के पार दो यूनि-डायरेक्शन सुरंगों के निर्माण की बोली प्रक्रिया शुरू कर दी है. ये दोनों ही सुरंगे LAC के इस पार चीन की गुस्ताखियों के मद्देनजर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं और आने वाले दिनों में चीन बॉर्डर के बेहद करीबी इस इलाके में किसी भी मौसम में मिलिट्री हथियारों से लेकर जरूरी सामान तक तुरंत पहुंचाया जा सकेगा. जोजिला सुरंग का ब्रेकथ्रू समारोह अगले हफ्ते होने जा रहा है जो 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा. करीब 7000 करोड़ रुपये की जोजिला सुरंग और फोटू ला पास सुरंग मिलकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के राष्ट्रीय राजमार्ग-1 को ऑल-वेदर रणनीतिक कॉरिडोर बना देंगे. गौरतलब है कि इसी साल मई में सरकार ने फोटू ला सुरंग के लिए बजट आवंटित किया था. फोटू ला सुरंग परियोजना करीब 824.12 करोड़ रुपये की है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है. इसमें लगभग दो-दो किलोमीटर लंबी दो सुरंगें बनानी हैं, साथ में एप्रोच रोड भी, जिससे कुल परियोजना की लंबाई 2.65 किलोमीटर हो जाएगी. फोटू ला सुरंग का महत्व इसकी जगह के कारण है. फोटू ला, श्रीनगर-कारगिल-लेह राजमार्ग पर सबसे ऊंचा बिंदु है, जो लगभग 4,108 मीटर की ऊंचाई पर है. यह पास राष्ट्रीय राजमार्ग-1 का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ने वाली एकमात्र मुख्य सड़क है. कई दशकों से यह हिस्सा इस रूट का सबसे मुश्किल हिस्सा रहा है. तेज मौसम, भारी बर्फबारी और खतरनाक ड्राइविंग की स्थिति अक्सर आवाजाही रोक देती है, अधिकारियों ने बताया कि अब इस सुरंग को पूरा करने के लिए तीन साल की समय-सीमा तय की गई है. अब आड़े नहीं आएगी 5-10 फीट मोटी बर्फ की परत हर सर्दी में फोटू ला पर बर्फ पांच से दस फीट तक जमा हो सकती है, एक दस्तावेज में कहा गया है. सड़क पर बर्फ की परत बनने से ड्राइविंग बहुत खतरनाक हो जाती है, दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और वहां कर्मचारियों को लगातार बर्फ हटाने का काम करना पड़ता है. इतनी ऊंचाई पर पहाड़ी सड़कों के तेज ढलान और तेज मोड़ भी समस्या बढ़ाते हैं. भारी बर्फबारी या खराब मौसम में यहां यातायात पूरी तरह रुक जाता है. हालांकि अब प्रस्तावित सुरंग इन समस्याओं का जड़ से समाधान करेगी. यह सुरंग यातायात को पहाड़ के ऊपर से नहीं, बल्कि नीचे से लेकर जाएगी. पास के खुले हिस्से को बायपास करके यह सुरंग मौसम पर निर्भरता कम कर देगी और लद्दाख की इस महत्वपूर्ण सड़क को ज्यादा भरोसेमंद बना देगी. लेह-कारगिल के बीच आसान होगी यात्रा यह परियोजना पास के पार सड़क की दूरी कम करेगी और लेह-कारगिल के बीच यात्रा को आसान और तेज बनाएगी. इस प्रोजेक्ट का महत्व सिर्फ आम लोगों की सुविधा से काफीद आगे है क्योंकि यह भारत की सबसे जरूरी रणनीतिक सड़कों में से एक बनने जा रही है. इसका इस्तेमाल सैनिकों, उपकरणों, ईंधन, राशन और लद्दाख में आगे तैनात सैनिकों के लिए सामान भेजने के लिए बेहद सुविधाजनक होने जा रहा है. चीन से सैन्य तनाव में जरूरत हुई महसूस 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य तनाव के बाद इस इलाके में मजबूत और बिना रुकावट कनेक्टिविटी की जरूरत और भी ज्यादा साफ हो गई है. मौसम से जुड़ी समस्याएं कम करने और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाओं को अब राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से देखा जा रहा है. जोजिला सुरंग, जो फिलहाल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच बन रही है, अगले हफ्ते ब्रेकथ्रू देखेगी. इसे 2028 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. सबसे खास बात है कि यह एशिया की सबसे लंबी सुरंग होगी. सरकार का लंबा लक्ष्य साफ है कि श्रीनगर-लेह कॉरिडोर पर मौसम से होने वाली सारी रुकावटों को धीरे-धीरे खत्म किया जाए और एक ऐसी यातायात व्यवस्था बनाई जाए जो साल भर चल सके, जिसमें आम लोगों की आवाजाही, आर्थिक विकास और सेना की जरूरतें सभी पूरी हो सकें. Source link

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चुनाव आयोग की टांगें तोड़ देंगे, BJP के बाप की औकात नहीं…ये...

Last Updated:June 04, 2026, 09:50 IST Firhad Hakim Resigns As Kolkata Mayor After Mamata: पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार के संकट के बीच कभी ‘चुनाव आयोग के पैर तोड़ने’ की धमकी देने वाले कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम पूरी तरह शांत पड़ गए हैं. बीजेपी सरकार की धमक और टीएमसी में 58 विधायकों की ऐतिहासिक टूट के बाद अब वह बस अपनी जान बचाने में जुट गए हैं. ख़बरें फटाफट कभी मंच से जहर उगलने वाले फिरहाद हकीम की राजनीति का क्या होने वाला है अंत. Firhad Hakim Resigns: पश्चिम बंगाल की सियासत में कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम की चर्चा तेज हो गई है. फिरहाद हकीम जो ऐसा आदमी जिसकी ममता राज में ऐसी तूती बोलती थी कि बस जुबान जहर ही उगलती थी. बयानों से ‘आग उगलने वाले’  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सबसे विवादित चेहरे के तौर पर लोग उन्हें जानते हैं. लेकिन बीजेपी की सत्ता आते ही अब उनके तेवर पूरी तरह ठंडे पड़ चुके हैं. कभी मंचों से खुलेआम केंद्रीय एजेंसियों, चुनाव आयोग और बीजेपी को घुटनों पर लाने की हुंकार भरने वाले हकीम अब राजनीति में सिर्फ अपनी ‘सेफ एग्जिट’ की गुहार लगा रहे हैं. बंगाल में ममता बनर्जी के राजनैतिक साम्राज्य में आई इस भीषण दरार और बीजेपी की बढ़ती ताकत के बीच फिरहाद हकीम अब चुपचाप कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा देने की सोच रहे हैं. मंगलवार रात से उनके इस्तीफ की बात भी होने लगी है. कल वे विधानसभा में बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी के साथ भी देखे गए थे, जिसने सबको चौंका दिया. आप भी देखें ममता के राज में जहर उगलने वाले इंसान का हाल:- Source link

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malviya nagar hotel owner lovkesh bajaj: मालवीय नगर होटल में आग के...

होमताजा खबरDelhi आग की लपटें उठते हुए देखीं लेकिन… मालवीय नगर होटल मालिक लवकेश का बड़ा खुलासा Last Updated:June 04, 2026, 08:37 IST Delhi Malviya nagar restaurent owner luvkesh Bajaj: मालवीय नगर अग्‍न‍िकांड के आरोपी और होटल के मा‍ल‍िक लवकेश बजाज ने द‍िल्‍ली पुलिस की पूछताछ में बड़ा खुलासा क‍िया है. उसने बताया क‍ि वह आग लगने के समय होटल के पास ही था लेक‍िन जैसे जैसे आग बढ़ती गई, वह डर के मारे मौके से भाग गया और अपने घर भी नहीं गया, सड़कों पर घूमता रहा. Malviya nagar fire update today: मालवीय नगर आग मामले में होटल माल‍िक लवकेश बजाज को द‍िल्‍ली पुल‍िस के सामने बड़ा खुलासा. Delhi Malviya nagar restaurent owner luvkesh Bajaj: दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में जले होटल के मालिक लवकेश बजाज ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में बड़ा खुलासा किया है. लवकेश बजाज ने कल रात दिल्ली पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह घटना के वक्त मौके पर ही मौजूद था. उसने होटल में आग लगते हुए देखी लेकिन वह उस वक्त मौके से होकर गुजर गया और वहां रुका नहीं. लवकेश बजाज ने पुलिस को बताया कि वह घबरा गया था और डर के चलते मौके से भाग गया था और आग की घटना को देखने के बाद भी वहां रुका नहीं था. उसने बताया कि जब यह अग्निकांड हुआ तो उसकी वह इतना परेशान था कि अपने घर भी नही गया और सड़कों पर घूमता रहा. पूछताछ मे उसने खुलासा किया की उसने तीन साल पहले अहुलवालिया नाम की एक पार्टी से यह जगह बिल्डिंग थी और उसमे होटल कम गेस्ट हाउस चला रहा था.पहले यहां खादी की शॉप थी. लवकेश बजाज ने कहा कि जिस वक्त उसने यह बिल्डिंग ली थी तब भी इमारत काफी जर्जर थी. हालांकि पूछताछ में उसने दावा किया कि उसने BNB, यानी बेड एंड ब्रेकफास्ट का लाइसेंस ले रखा था और टूरिस्ट, हेल्थ रेस्टोरेंट की परमिशन ली थी. अनुमति के बाद ही वह इसे चला रहा था. हालांकि पुलिस को उसकी सुनाई कहानी पर यकीन नहीं हो रहा है और दिल्ली पुलिस उसके इस दावों की जांच करवा रही है. आज गुरुवार को करीब 2 बजे के आसपास उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा.पुलिस कोर्ट से आरोपी के 3 से 4 दिन की पुलिस रिमांड की मांग करेगी. बता दें कि अग्निकांड वाले दिन भी मौके पर मौजूद लोगों ने बताया था कि आग लगने के तुरंत बाद ही होटल मालिक लवकेश बजाज को सूचना दे दी गई थी. सुबह 8 बजकर 52 मिनट पर उन्हें फोन कर आग लगने और मौके के हालात की जानकारी दी गई थी. आग की सूचना मिलने के बाद लवकेश बजाज करीब 15 मिनट के भीतर ही घटनास्थल पर पहुंच गए थे. हालांकि जैसे जैसे आग धधकती गई, वह करीब 40 से 45 मिनट तक होटल और गेस्ट हाउस के आसपास मौजूद रहे, लेकिन फिर अचानक ही वह मौके से फरार हो गए. इस दौरान आग लगातार फैलती रही और अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए राहत एवं बचाव कार्य के बावजूद 21 लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोगों ने बिल्डिंग की छत से कूदकर अपनी जान बचाई. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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