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कराची का मुन्ना, पाकिस्तानी ग्रेनेड और मुंबई से दिल्ली तक रेकी… ISI...

होमताजा खबरदेश पाकिस्तानी ग्रेनेड, मुंबई से दिल्ली तक रेकी… ISI टेरर केस में 5 बड़े खुलासे Last Updated:May 30, 2026, 16:27 IST ISI terror module busted: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े आतंकी और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. स्पेशल सीपी अनिल शुक्ला और एडिशनल सीपी प्रमोद कुशवाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़ा यह नेटवर्क दिल्ली और मुंबई में बड़े आतंकी हमलों की साजिश रच रहा था. आतंकियों ने मुंबई के दादर ब्रिज पार्क समेत दिल्ली के कई अहम ठिकानों की रेकी कर ली थी. आरोपियों के पास से पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बने 4 हैंड ग्रेनेड मिले हैं, जिन्हें एनएसजी ने नष्ट किया. इस ऑपरेशन को कराची में बैठा मुन्ना झिंगाड़ा ऑपरेट कर रहा था. गिरफ्तार आरोपी. Terror Module Busted: दिल्ली पुलिस ने एक बहुत बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है. स्पेशल सीपी (स्पेशल सेल) अनिल शुक्ला और एडिशनल सीपी प्रमोद कुशवाह ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसके बारे में खुलासा किया है. अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम देश को दहलाने की साजिश रच रहा था. आतंकी मॉड्यूल के नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. आतंकियों के निशाने पर मुंबई और दिल्ली थे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि आतंकियों ने दिल्ली और मुंबई के कई अहम और संवेदनशील ठिकानों की बाकायदा रेकी कर ली थी. मुंबई में दादर ब्रिज पार्क जैसी व्यस्त जगहों पर रेकी की गई थी. इनका मुख्य मकसद दिल्ली-मुंबई में बड़े धमाके करना और देश की पुलिस फोर्स के जवानों को सीधे तौर पर अपना निशाना बनाना था. दाऊद का गुर्गा मुन्ना झिंगाड़ा था मास्टरमाइंड इस खौफनाक आतंकी साजिश का पूरा खाका पाकिस्तान से तैयार किया जा रहा था. इस ऑपरेशन का हेड अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन पर जानलेवा हमला करने वाला कुख्यात शूटर मुन्ना झिंगाड़ा था. वह कराची में बैठकर आईएसआई (ISI) के इशारे पर इस पूरे नेटवर्क को कंट्रोल कर रहा था. दिल्ली और मुंबई के अहम ठिकानों की हुई थी रेकी पूछताछ में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि आतंकियों ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को दहलाने का पूरा प्लान बना लिया था. इसके लिए उन्होंने बाकायदा मुंबई के दादर ब्रिज पार्क समेत दिल्ली के कई अहम और भीड़भाड़ वाले ठिकानों की रेकी (Recce) भी कर ली थी. पाकिस्तानी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री (POF) के 4 ग्रेनेड बरामद आतंकियों के पास से भारी मात्रा में विदेशी हथियार और विस्फोटक बरामद हुए हैं. सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इनके पास से 4 ऐसे हैंड ग्रेनेड मिले हैं, जिन पर ‘पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री’ की मुहर है. इससे पाकिस्तान की सीधी संलिप्तता साबित होती है. इन ग्रेनेड्स को NSG ने महरौली इलाके में ले जाकर नष्ट किया. पुलिस फोर्स के जवानों पर था सीधा टारगेट आम जनता और अहम ठिकानों के अलावा, इन आतंकियों का एक बड़ा और खतरनाक मकसद देश की पुलिस फोर्स पर हमला करना था. स्पेशल सेल की जांच में साफ हुआ है कि ये आतंकी जानबूझकर पुलिस और सुरक्षाबलों के जवानों को निशाना बनाने की फिराक में थे. ISI, अंडरवर्ल्ड और नेपाली नेटवर्क का गठजोड़ जांच में सामने आया है कि यह कोई आम आतंकी मॉड्यूल नहीं था, बल्कि इसमें तीन अलग-अलग सिंडिकेट एक साथ काम कर रहे थे. इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) रणनीतिक मास्टरमाइंड थी, दाऊद इब्राहिम का अंडरवर्ल्ड नेटवर्क इसे जमीन पर उतार रहा था, और लॉजिस्टिक सपोर्ट व घुसपैठ के लिए एक ‘नेपाली नेटवर्क’ का इस्तेमाल किया जा रहा था. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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‘हिम्मत है तो गिरफ्तार करो…’ अभिषेक बनर्जी के घर अचानक पहुंची CID,...

Abhishek Banerjee News: पश्चिम बंगाल में जांच एजेंसियों और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में रस्साकशी लगातार जारी है. शनिवार को सीआईडी की एक टीम ने टीएमसी नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दरवाजे पर कानूनी नोटिस लेकर पहुंची. विधानसभा फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में उनको कानूनी नोटिस थमाया गया है. हालांकि, इस नोटिस को देने की प्रक्रिया के दौरान कोलकाता में जमकर सियासी और पुलिसिया ड्रामा देखने को मिला. सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार दोपहर विधानसभा फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में सीआईडी और हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन की एक संयुक्त टीम अभिषेक बनर्जी को कानूनी नोटिस देने के लिए 188 ए, हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके आवास शांतिनिकेतन पहुंची थी. अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य टीएमसी नेता को यह लीगल नोटिस सौंपना था. हालांकि, उस वक्त अभिषेक बनर्जी हरीश मुखर्जी रोड वाले इस घर पर मौजूद नहीं थे, जिसके कारण टीम को इंतजार करना पड़ा. कालीघाट पहुंची सीआईडी इस घटनाक्रम के कुछ ही देर बाद अभिषेक बनर्जी अपने कालीघाट रोड स्थित आवास पर मीडिया के सामने आए. उन्होंने सीआईडी की कार्रवाई पर तंज कसते हुए स्पष्ट किया, ‘मैं उस घर (शांतिनिकेतन) में नहीं रहता हूं. अगर किसी को मुझसे मिलना है या कोई नोटिस देना है, तो उन्हें मेरे इसी घर (कालीघाट) पर आना होगा.’ अभिषेक बनर्जी के इस बयान के चंद मिनटों के भीतर ही, शांतिनिकेतन के बाहर खड़ी सीआईडी के अधिकारियों की टीम हरकत में आई. वहां से निकलकर सीधे कालीघाट रोड स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास के सामने पहुंच गई. सीआईडी के अधिकारी अभिषेक बनर्जी के नीचे आने का इंतजार करने लगे. जब अभिषेक बनर्जी नीचे आए, तो सीआईडी के अधिकारियों ने सीधे उनके हाथों में कानूनी नोटिस सौंप दिया. मैं 7 साल से वहां नहीं रहता नोटिस लेने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अभिषेक बनर्जी ने जांच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ‘जो अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं, उन्हें यह तक नहीं पता कि मैं पिछले सात सालों से उस घर में नहीं रहता हूं. हो सकता है कि उनके पास गलत जानकारी हो. मैं भी समझता हूं कि उन्हें अपनी नौकरी करनी है. मैंने अभी तक नोटिस नहीं पढ़ा है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘नोटिस पढ़ने के बाद मैं अपने वकील से इस पर चर्चा करूंगा. इसके बाद, अगर मुझे लगेगा और अगर मुझे पूछताछ के लिए उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा, तो मैं निश्चित रूप से जाऊंगा. मैं जरूरी कानूनी कदम भी उठाऊंगा, यह मेरा अधिकार है.’ हिम्मत है तो गिरफ्तार करें केंद्र और राज्य की एजेंसियों पर भड़कते हुए टीएमसी सांसद ने खुली चुनौती दे डाली. अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘अब तक केवल ईडी और सीबीआई पीछे पड़ी थीं, लेकिन अब इसमें पुलिस और नगर पालिका भी जुड़ गए हैं. लेकिन हम उस मिट्टी के नहीं बने हैं जो डर जाएं. अगर उनमें हिम्मत है और क्षमता है, तो वे मुझे गिरफ्तार करके ले जाएं. मैं कहीं भाग नहीं रहा हूं.’ सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को किस मामले में कानूनी नोटिस थमाया है? सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल ‘विधानसभा फर्जी हस्ताक्षर मामले’ की चल रही जांच के सिलसिले में कानूनी नोटिस थमाया है. सीआईडी की टीम नोटिस देने के लिए सबसे पहले अभिषेक बनर्जी के किस आवास पर पहुंची थी? सीआईडी की टीम सबसे पहले अभिषेक बनर्जी को नोटिस देने के लिए 188 ए, हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके शांतिनिकेतन वाले आवास पर पहुंची थी, जहां वे नहीं मिले. अभिषेक बनर्जी को अंततः सीआईडी द्वारा कानूनी नोटिस कहां सौंपा गया? शांतिनिकेतन में न मिलने पर, सीआईडी की टीम ने अभिषेक बनर्जी को उनके कालीघाट रोड स्थित आवास पर पहुंचकर सीधे उनके हाथों में नोटिस सौंपा. नोटिस मिलने के बाद जांच एजेंसियों को लेकर अभिषेक बनर्जी ने क्या तीखी प्रतिक्रिया दी? अभिषेक बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि अधिकारियों को यही नहीं पता कि वह 7 साल से पुराने घर में नहीं रहते. साथ ही उन्होंने चुनौती दी कि अगर एजेंसियों में हिम्मत है तो वे उन्हें गिरफ्तार करें, वह कहीं भागने वाले नहीं हैं. Source link

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कोर्ट कचहरी या पुलिस फोर्स? राबड़ी देवी ने नहीं छोड़ा 10 सर्कुलर...

Last Updated:May 30, 2026, 14:27 IST Rabri Devi 10 circular road bungalow controversy: सर्कुलर रोड आवास खाली करने के आदेश को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा सरकारी आवास खाली करने से इनकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुली चुनौती दिए जाने के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है तो सरकार के पास कौन-कौन से कानूनी और राजनीतिक विकल्प मौजूद हैं. 10 सर्कुलर रोड पर सियासी संग्राम, राबड़ी के रुख के बाद सम्राट सरकार अगला कदम क्या उठाएगी? पटना. मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा पटना स्थित ’10 सर्कुलर रोड’ आवास को किसी भी कीमत पर खाली न करने और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ‘फोर्स बुलाने’ की खुली चुनौती देने के बाद बिहार का बंगला विवाद अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. यह मामला अब महज एक प्रशासनिक नोटिस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें गहरे कानूनी पेंच और बड़े राजनीतिक नफा-नुकसान जुड़ गए हैं. यदि राबड़ी देवी अपने स्टैंड पर कायम रहती हैं और स्वेच्छा से बंगला खाली नहीं करती हैं, तो सम्राट चौधरी सरकार के पास कानून की किताब से लेकर राजनीतिक कूटनीति तक कई रास्ते मौजूद हैं. आइए समझते हैं कि इस हाई-प्रोफाइल विवाद में सरकार के पास क्या कानूनी और राजनीतिक विकल्प हो सकते हैं. राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, सत्ता परिवर्तन या नए आवंटन की स्थिति में सरकारी आवास खाली कराना एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाती है. यदि कोई आवंटी निर्धारित अवधि के बाद भी आवास नहीं छोड़ता है तो संबंधित विभाग उसे अनधिकृत कब्जाधारी मानते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है. आमतौर पर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, फिर जवाब संतोषजनक नहीं होने पर बेदखली की कार्रवाई और जुर्माने जैसी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है. हालांकि 10 सर्कुलर रोड का मामला सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई से कहीं आगे बढ़ चुका है, क्योंकि इसमें बिहार की दो प्रमुख राजनीतिक धाराएं आमने-सामने दिखाई दे रही हैं. कानूनी विकल्प: ‘बिहार सरकारी परिसर (बेदखली) अधिनियम’ का इस्तेमाल प्रशासनिक नियमों के तहत सरकार के पास सबसे अचूक हथियार कानून का होता है. अगर कोई अलॉटी तय समय सीमा के बाद भी सरकारी बंगला खाली नहीं करता तो भवन निर्माण विभाग ‘बिहार पब्लिक प्रेमाइसेस (इविक्शन) एक्ट’ (Bihar Public Premises Eviction Act) के तहत कार्रवाई शुरू कर सकता है. कारण बताओ नोटिस (Show Cause): इसके तहत विभाग की ओर से अनधिकृत कब्जेधारी (Unauthorized Occupant) को एक अंतिम नोटिस जारी कर पूछा जाता है कि उन्हें बेदखल क्यों न किया जाए. बलपूर्वक बेदखली और जुर्माना: यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) जिला प्रशासन और मजिस्ट्रेट की मदद से परिसर को बलपूर्वक खाली कराने का आदेश जारी कर सकता है. साथ ही, अनधिकृत रूप से रहने की अवधि का भारी बाजार मूल्य के हिसाब से जुर्माना (Damage Rent) भी वसूला जा सकता है. राजनीतिक विकल्प: ‘वेट एंड वॉच’ और सहानुभूति कार्ड को बेकार करना जानकार कहते हैं कि कानूनी रास्ते के अलावा सम्राट चौधरी सरकार को इसके राजनीतिक नफा-नुकसान को भी तौलना होगा. राजनीति के चश्मे से सरकार के पास दो रणनीतिक विकल्प हैं. सहानुभूति कार्ड को रोकना (कूटनीतिक रास्ता): आरजेडी इस समय इस मुद्दे को ‘लालू परिवार के उत्पीड़न’ और ‘विपक्षी नेताओं का अपमान’ के तौर पर भुनाने का प्रयास करेगी. अगर सरकार तुरंत पुलिस फोर्स भेजती है, तो राबड़ी देवी को जनता के बीच ‘सहानुभूति’ मिल सकती है. इससे बचने के लिए सरकार बातचीत का रास्ता चुन सकती है या किसी अन्य विकल्प की पेशकश कर सकती है. कानून का इकबाल बुलंद करना (आक्रामक रास्ता): मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की छवि एक कड़े और बेबाक फैसले लेने वाले नेता की है. अगर सरकार इस मामले में ढील देती है तो विपक्ष इसे सरकार की कमजोरी के रूप में प्रचारित कर सकता है. ऐसे में सरकार कोर्ट की शरण लेकर या कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखकर यह संदेश दे सकती है कि ‘कानून के सामने कोई भी रसूखदार परिवार विशेष नहीं है’. आगे क्या हो सकता है? राजनीति और कानूनी पहलू के जानकार बताते हैं आरजेडी इस मुद्दे पर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है और इस बेदखली के आदेश पर ‘स्टे ऑर्डर’ लेने का प्रयास कर सकती है. यदि कोर्ट से स्टे मिल जाता है तो राबड़ी देवी को कुछ समय की मोहलत मिल जाएगी, अन्यथा सम्राट सरकार को देर-सबेर कानून के तहत कड़े प्रशासनिक कदम उठाने ही होंगे. बहरहाल, आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा काफी हद तक कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगी. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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उज्जैन में गहराया जल संकट, पानी की एक-एक बूंद को तरसे 400...

Last Updated:May 30, 2026, 13:24 IST उज्जैन के विक्रमनगर स्थित गांधीनगर और आसपास की कॉलोनियों में जल संकट ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है. करीब 400 परिवार वर्षों से नियमित जल आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं. टैंकरों पर निर्भर लोगों को दो-दो दिन पानी नहीं मिलता. टैंकर आते ही पानी भरने की होड़ मच जाती है. महिलाओं को काम छोड़कर घंटों पानी का इंतजार करना पड़ रहा है. उज्जैन के विक्रमनगर क्षेत्र की गांधीनगर और आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले सैकड़ों परिवार इन दिनों पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं.करीब 400 परिवारों की सुबह किसी काम से नहीं, बल्कि पानी की तलाश से शुरू होती है. वर्षों से लोग नियमित जलापूर्ति और नल कनेक्शन की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है. भीषण गर्मी ने हालात और मुश्किल कर दिए हैं.कई घरों में पानी की एक-एक बूंद बचाकर इस्तेमाल की जा रही है. स्थानीय रहवासियों का कहना है कि उनकी दिनचर्या अब पानी के इंतजार के इर्द-गिर्द ही सिमटकर रह गई है. उज्जैन के इस इलाके में पानी की किल्लत लोगों के लिए रोज़ की परेशानी बन चुकी है. स्थानीय रहवासियों का कहना है कि नलों से नियमित जल सप्लाई नहीं होने के कारण उनका जीवन पूरी तरह पीएचई विभाग के टैंकरों पर निर्भर हो गया है. लेकिन टैंकर भी समय पर नहीं पहुंचते और कई बार दो से तीन दिन का इंतजार करना पड़ता है. जैसे ही टैंकर क्षेत्र में आता है, लोग बाल्टियां, ड्रम, केन और पाइप लेकर दौड़ पड़ते हैं. पानी भरने की होड़ में पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी और चिंता का माहौल दिखाई देता है. हर कभी होती है धक्का-मुक्की और बहस गांधीनगर की गलियों में इन दिनों पानी की हर बूंद कीमती बन गई है। जैसे ही पानी का टैंकर मोहल्ले में प्रवेश करता है, चारों ओर हलचल मच जाती है. महिलाएं बाल्टियां लेकर दौड़ पड़ती हैं, बुजुर्ग कतार में लग जाते हैं और बच्चे भी पानी जुटाने में हाथ बंटाते हैं. टैंकर के आसपास इतनी भीड़ जमा हो जाती है कि कभी-कभी धक्का-मुक्की और बहस की नौबत आ जाती है. यह दृश्य इलाके में गहराते जल संकट की दर्दनाक कहानी बयां करता है. क्या बोले ग्रामीण स्थानीय रहवासी सीमा परमार बताती हैं कि उनके मोहल्ले में पानी की किल्लत अब लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है. सुबह होते ही घरों में पानी जुटाने की चिंता शुरू हो जाती है. पीने के पानी के लिए कई परिवारों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और डिब्बों में पानी भरकर घर लाना पड़ता है. हालात ऐसे हैं कि पड़ोसी भी मजबूरी में पानी देने से इंकार कर देते हैं. नहाने-धोने और अन्य जरूरतों के लिए लोगों को अलग से इंतजाम करना पड़ रहा है. क्षेत्र की रहने वाली रेखा बताती हैं कि पानी की समस्या अब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. टैंकर कब आएगा, इसका कोई तय समय नहीं होता. कभी शाम तो कभी आधी रात को पानी पहुंचता है. लोग घंटों बर्तनों के साथ इंतजार करते रहते हैं. कई महिलाओं को कामकाज और मजदूरी छोड़कर पानी की चिंता में बैठना पड़ता है. रेखा कहती हैं, अगर पानी न मिले तो पूरे परिवार का दिन मुश्किलों में गुजरता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Source link

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UPSC vs CA: यूपीएससी का भौकाल या सीए की चकाचौंध? पावर, पैसा...

नई दिल्ली (UPSC vs CA Difference Career). जब भी देश की सबसे कठिन इम्तिहानों वाली नौकरियों की बात होती है तो जुबां पर 2 नाम सबसे पहले आते हैं- यूपीएससी और सीए. इन दोनों की ही समाज में बहुत प्रतिष्ठा है. कई लोग इन दोनों के बीच बुनियादी फर्क को लेकर उलझन में रहते हैं. यूपीएससी के जरिए देश के नीति-निर्माता यानी IAS, आईपीएस और आईएफएस अफसर निकलते हैं, वहीं सीए यानी चार्टर्ड अकाउंटेंसी के जरिए देश का बड़ा वित्तीय साम्राज्य संभालने वाले फाइनेंशियल जीनियस तैयार होते हैं. दोनों ही रास्तों में सफलता पाने के लिए दिन-रात एक करना पड़ता है और सफलता का रेशियो भी बेहद कम है. लेकिन परीक्षा के ढर्रे से लेकर नौकरी के प्रोफाइल, सैलरी, रुतबे और लाइफस्टाइल के मामले में दोनों फील्ड्स के बीच जमीन-आसमान का अंतर है. यूपीएससी में सरकारी तंत्र की असीमित ताकत का भौकाल है तो सीए में कॉर्पोरेट वर्ल्ड की चकाचौंध और बिना किसी सीमा के अंधाधुंध पैसा कमाने की आजादी है. समझिए परीक्षा, सिस्टम, सैलरी और करियर स्कोप के मामले में कौन किस पर भारी है. परीक्षा का पैटर्न: देश का सबसे बड़ा सिलेबस बनाम नंबरों का खेल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 3 चरणों में होती है- प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू. इसमें इतिहास, भूगोल, राजनीति से लेकर देश-दुनिया के हर मुद्दे का ज्ञान होना जरूरी है. हर साल 10-12 लाख लोग यूपीएससी परीक्षा देते हैं. उनमें से 1000 के आसपास चुने जाते हैं. सीए की परीक्षा ‘द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (ICAI) कराती है. इसके भी 3 चरण हैं- फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल. सीए में कोई तय सीटें नहीं होतीं. यहां पूरा खेल मिनिमम पासिंग मार्क्स (हर विषय में 40% और कुल 50%) लाने का है. UPSC में किस्मत और रैंक का बड़ा रोल है, जबकि CA मार्कशीट और टेक्निकल होल्ड पर टिका है. सिस्टम और ट्रेनिंग: लबासना की वादियों से लेकर आर्टिकलशिप के रगड़े तक यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद आप देश के सबसे एलीट ग्रुप का हिस्सा बनते हैं. आपको मसूरी की ‘लबासना’ (LBSNAA) अकादमी में वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग दी जाती है और सीधे सरकार के तहत तैनात किया जाता है. वहीं, सीए बनने के सफर में सबसे अहम पड़ाव होता है ‘आर्टिकलशिप’. सीए इंटर पास करने के बाद किसी सीनियर सीए या फर्म के साथ दो-तीन साल तक कड़ी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (रगड़ा) झेलनी पड़ती है. यूपीएससी सिविल सर्विस आपको प्रशासनिक ढांचा देती है, जबकि सीए का सिस्टम प्रोफेशनल फाइनेंस कंसलटेंट बनाता है. नौकरी और काम: जिले की कमान बनाम कंपनियों का बही-खाता एक आईएएस या आईपीएस अधिकारी के कंधों पर पूरे जिले की कानून-व्यवस्था, विकास से जुड़े काम और सरकारी योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी होती है. इन सरकारी अफसरों के पास असीमित पावर और प्रशासनिक रसूख होता है. वहीं, एक सीए का काम कंपनियों का ऑडिट करना, टैक्स प्लानिंग, वित्तीय सलाह देना और धोखाधड़ी रोकना होता है. सीए के बिना देश की कोई भी छोटी-बड़ी कंपनी या बिजनेस एक कदम आगे नहीं बढ़ सकता. सैलरी और भत्ते: सरकारी सुविधाएं बनाम कॉर्पोरेट का भारी-भरकम पैकेज सैलरी के मामले में दोनों का गणित बिलकुल अलग है. शुरुआती आईएएस अफसर की बेसिक सैलरी 56,100 रुपये होती है, जो भत्तों के साथ करीब 1 लाख तक पहुंचती है. हालांकि, उन्हें बंगला, गाड़ी, स्टाफ और अपार सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जिसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती. वहीं, फ्रेशर सीए का औसत शुरुआती पैकेज 8 से 12 लाख रुपये सालाना (यानी करीब 80 हजार से 1 लाख महीना) होता है. लेकिन अगर आपके पास हुनर है तो कॉर्पोरेट कंपनियां सीए को करोड़ों का पैकेज भी देती हैं. करियर स्कोप: कैबिनेट सेक्रेटरी बनाम खुद की ग्लोबल प्रैक्टिस यूपीएससी परीक्षा पास करके करियर ग्राफ फिक्स है- आप डीएम, कमिश्नर से होते हुए देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद ‘कैबिनेट सेक्रेटरी’ तक पहुंच सकते हैं या रिटायरमेंट के बाद बड़े आयोगों के अध्यक्ष बन सकते हैं. सीए के पास करियर के असीमित रास्ते हैं. आप किसी मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) के सीएफओ (CFO) या सीईओ (CEO) बन सकते हैं, दुनिया के किसी भी कोने में अपनी खुद की कंसल्टेंसी फर्म खोल सकते हैं या बड़े-बड़े कप्तानों के पर्सनल वेल्थ मैनेजर बन सकते हैं. Source link

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UPSC vs NTA Paper Leak: यूपीएससी का सीक्रेट फॉर्मूला vs NTA का...

Last Updated:May 30, 2026, 11:25 IST UPSC vs NTA Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए के कायाकल्प का खाका मांगा है. आखिर यूपीएससी में कभी कोई पेपर लीक क्यों नहीं होता, जबकि एनटीए में धांधली रुकने का नाम नहीं ले रही? समझिए इसकी वजह. UPSC vs NTA Exams: यूपीएससी और एनटीए के वर्किंग सिस्टम में कई अंतर हैं नई दिल्ली (UPSC vs NTA Paper Leak). देश में नीट यूजी 2026 पेपर लीक और डिजिटल ‘गेस पेपर’ बिक्री कांड के बाद मचे हाहाकार के बीच सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा कि स्थिति बेहद संवेदनशील है और NTA के पूरे कायाकल्प का खाका अदालत के सामने पेश किया जाए. सुप्रीम कोर्ट की इन तल्ख टिप्पणियों के बीच अब इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि आखिर देश का परीक्षा सिस्टम कहां फेल हो रहा है. कोर्ट ने सरकार की उच्च स्तरीय समिति (डॉ. के राधाकृष्णन कमेटी) से भी सवाल किया है कि इतनी निगरानी के बाद भी नीट पेपर लीक कैसे हो गया और ऐसी कौन सी खामी रह गई जो पकड़ में नहीं आई? जो देश यूपीएससी जैसी बेहद प्रतिष्ठित और जटिल परीक्षा बिना किसी दाग के सालों से करा रहा है, वही देश एनटीए के तहत होने वाली परीक्षाओं में बार-बार फेल हो रहा है. आखिर एनटीए की साख पूरी तरह मटियामेट क्यों हो रही है? जानिए UPSC का सिस्टम कैसे ‘लीक प्रूफ’ बना और NTA का ढांचा क्यों बार-बार ढह जाता है. यूपीएससी वर्सेस एनटीए: वो 7 बड़े कारण जिसने दोनों का ढर्रा बदला यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग और एनटीए यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के काम करने के तरीके और उनकी बनावट में 7 बुनियादी अंतर हैं, जो एक को अभेद्य दीवार बनाते हैं और दूसरे को असुरक्षित: संवैधानिक स्वायत्तता बनाम गैर-संवैधानिक ढांचा: यूपीएससी संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत एक स्वायत्त संस्था है, जिसमें बाहरी राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप 0 होता है. दूसरी तरफ, एनटीए महज सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है, जिसके पास वैधानिक शक्तियों की कमी है. स्थायी कैडर की कमी: यूपीएससी के पास अपना समर्पित और स्थायी प्रशासनिक ढांचा है जो सालों से गोपनीयता की संस्कृति को बनाए रखता है. इसके उलट, एनटीए में स्थायी कैडर की कमी है और यह पूरी तरह आउटसोर्स और प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आए कर्मचारियों के भरोसे चलती है. ब्लाइंड पेपर सेटिंग: यूपीएससी में प्रश्नपत्र तैयार करने वाले एक्सपर्ट को अंतिम समय तक नहीं पता होता कि उनका सेट किया हुआ पेपर चुना जाएगा या नहीं. NTA में वेंडर-बेस्ड आउटसोर्सिंग के कारण छपाई और टेक्निकल मैनेजमेंट के लिए अक्सर प्राइवेट थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर निर्भर रहना पड़ता है. इन-हाउस सीक्रेट प्रिंटिंग: यूपीएससी के पेपर की छपाई बहुत सुरक्षित, चुनिंदा और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए ‘आइसोलेटेड प्रिंटिंग प्रेस’ में होती है. एनटीए के केस में दूर-दराज के अनवेरिफाइड निजी स्कूलों और केंद्रों को भी एग्जाम सेंटर बना दिया जाता है, जिससे सुरक्षा में सेंध आसान होती है. कमजोर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन: यूपीएससी के पेपर के लिए किसी निजी कूरियर के बजाय सीधे राज्य पुलिस और सरकारी मजबूत कमरों (स्ट्रॉन्ग रूम) का उपयोग होता है, जबकि एनटीए में कई बार निजी कूरियर सेवाओं का सहारा लिया जाता है, जिससे रास्ते में पेपर लीक का खतरा रहता है. ओएमआर बेस्ड फॉर्मेट: एनटीए की नीट जैसी परीक्षाओं में ऑब्जेक्टिव (OMR) पैटर्न होता है, जिसे सॉल्वर गैंग के लिए उत्तर कुंजी के जरिए लीक करना आसान होता है. इसके उलट यूपीएससी मुख्य परीक्षा का फॉर्मेट सब्जेक्टिव और एनालिटिकल होता है, जिसे रटकर या लीक से पास नहीं कर सकते. सिंगल-पॉइंट फेलियर मॉडल: एनटीए के मेगा-एग्जाम में देश के किसी भी एक कोने में सुरक्षा चक्र टूटने पर पूरी राष्ट्रीय परीक्षा पर असर पड़ता है. साथ ही, परीक्षा कराने में कई कमेटियां और वेंडर्स बिखरे हुए हैं, जिससे लीक होने पर हर कोई एक-दूसरे पर उंगली उठाता है. एनटीए की परीक्षाओं का लीक इतिहास: कब-कब दागदार हुआ सिस्टम? एनटीए के गठन (2017) के बाद से कई बार इसकी परीक्षाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं: नीट यूजी 2021 और 2024 विवाद: साल 2021 में ओएमआर शीट लीक और सॉल्वर गैंग के एक्टिव होने की खबरें आईं. इसके बाद 2024 में नीट यूजी परीक्षा के दौरान ओएसिस स्कूल (हजारीबाग) और पटना में पेपर लीक का मामला सामने आया, जिसकी जांच अभी भी सीबीआई कर रही है. नीट यूजी 2026 महा-संकट: मई 2026 में हुए एग्जाम में डिजिटल माध्यमों और WhatsApp ग्रुप्स पर बकायदा हूबहू ‘गेस पेपर’ (जिसमें 180 में से 120 सवाल मैच कर गए) वायरल होने के बाद सरकार को परीक्षा रद्द कर री-नीट का आदेश देना पड़ा. UGC NET परीक्षाओं पर संकट: साल 2022 (अक्टूबर) में इतिहास के पेपर लीक के दावे और हाल के वर्षों में डार्क नेट पर यूजीसी नेट के इनपुट मिलने के बाद परीक्षाओं की शुचिता बार-बार प्रभावित हुई है, जिससे एनटीए के डिजिटल और फिजिकल सुरक्षा चक्रों पर सवालिया निशान लग गया है. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में अफसर बनने की राह आसान! सीकर की...

Last Updated:May 30, 2026, 10:18 IST Sikar Top NDA Academy: सीकर शिक्षा के क्षेत्र में लगातार अपनी अलग पहचान बना रहा है. इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी के साथ-साथ अब NDA और रक्षा सेवाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी यह प्रमुख केंद्र बन गया है. यहां की टॉप NDA एकेडमी छात्रों को लिखित परीक्षा से लेकर SSB इंटरव्यू तक की व्यापक तैयारी कराती है, जिससे उनका सेना में अफसर बनने का सपना साकार हो सके. एकेडमी में अनुभवी फैकल्टी, नियमित टेस्ट सीरीज, फिजिकल फिटनेस गाइडेंस और व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में छात्र NDA परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में अधिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. बेहतर रिजल्ट और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन के कारण यह संस्थान छात्रों और अभिभावकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. Sikar NDA Academy: राजस्थान का सीकर आज पूरे देश में शिक्षा नगरी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है. यहां हर साल लाखों विद्यार्थी JEE, NEET, NDA, CDS और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने पहुंचते हैं. खास बात यह है कि डिफेंस परीक्षाओं की तैयारी के लिए सीकर को देश के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है. यहां की कोचिंग संस्थाओं का परिणाम लगातार शानदार रहता है, जिसके कारण देशभर के अभ्यर्थी और उनके अभिभावक सीकर पर भरोसा जताते हैं. सीकर की डिफेंस अकादमियां केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन और देशसेवा का जज्बा भी विकसित करती हैं. हर साल यहां से सैकड़ों युवा भारतीय सेना में जवान और अधिकारी बनकर देश सेवा का सपना पूरा करते हैं. लोकल 18 की स्पेशल एजुकेशन सीरीज में आज हम आपको सीकर की पांच ऐसी डिफेंस एकेडमियों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने अपने बेहतरीन परिणामों और उत्कृष्ट प्रशिक्षण से राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में खास पहचान बनाई है. नवजीवन NDA एकेडमी: यह एकेडमी भी सीकर की टॉप NDA अकादमियों में से एक है. यहा, पर NDA, CDS, Airforce, Navy, Army और Paramilitary Forces की तैयारी करवाई जाती है. यहां पर तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को न केवल शैक्षणिक रूप से बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया जाता है. एकेडमी में SSB इंटरव्यू की स्पेशल कोचिंग, GTO ग्राउंड एक्सरसाइज़ और फिजिकल ट्रेनिंग, खास ध्यान दिया जाता है. यहां पर स्टूडेंट्स के लिए समय समय पर मोटिवेशनल सेशंस भी होते हैं. इसके अलावा यहां बच्चों को हॉस्टल सुविधा भी मिलती है. यहा से हर साल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी डिफेंस सेवाओं में चयनित होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google राजस्थान डिफेंस एकेडमी: इस एकेडमी ने भी सीकर में ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान में अपनी अलग पहचान बनाई है. यहा पर खासतौर पर फाउंडेशन बेच के जरिए NDA और अन्य डिफेंस परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है. राजस्थान एकेडमी में लड़कियों के लिए भी अलग से NDA की ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाते हैं. एकेडमी में आधुनिक क्लासरूम, नियमित मॉक टेस्ट, पर्सनल गाइडेंस और फिजिकल ट्रेनिंग की बेहतरीन सुविधाए दी जाती हैं. गुरूकृपा डिफेंस एकेडमी: यह सीकर में डिफेंस परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक भरोसेमंद नाम बन चुकी है. यहां NDA, CDS, Navy, Airforce और Army की सभी शाखाओं की कोचिंग दी जाती है. एकेडमी में पढ़ाई के साथ-साथ फिजिकल फिटनेस पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. यहां पर स्टूडेंट्स के लिए समय-समय पर मॉक टेस्ट व प्रैक्टिस सेशन्स आयोजित किए जाते हैं. इसके अलावा यहां पर भी बच्चों को हॉस्टल और लाइब्रेरी जैसी सुविधा भी मिलती है. प्रिंस NDA एकेडमी: यह सीकर की बड़ी NDA डिफेंस संस्थानों में से एक है. इस एकेडमी ने कम समय में शानदार रिजल्ट्स के दम पर बड़ी पहचान बनाई है. यहा NDA लिखित परीक्षा के साथ-साथ SSB इंटरव्यू की भी विशेष तैयारी कराई जाती है. यहां पर त्यौहारी करने वाले स्टूडेंट्स में अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है. इसके अलावा व्यक्तित्व विकास पर भी भरपूर ध्यान दिया जाता है. यहां तैयारी करने वाले अनेकों लड़के और लड़कियां सेना में अधिकारी बन चुके हैं. यहां पर सेना के रिटायर्ड अधिकारियों की देखरेख में स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग होती है.  फिजिक्सवाला NDA एकेडमी: यह सीकर में एक मल्टीफेसिलिटी डिफेंस कोचिंग सेंटर है. इस एकेडमी में भी NDA के साथ साथ Airforce, Navy और Army की तैयारी करवाई जाती है. खास बात यह है कि यहा पर स्कूलिंग, कोचिंग, हॉस्टल, मैस और खेलकूद की सभी सुविधाए उपलब्ध हैं, जिससे स्टूडेंट्स को किसी अन्य सुविधा की तलाश नहीं करनी पड़ती. एकेडमी की पढ़ाई का स्तर काफी उच्च है और विद्यार्थी यहाँ से अच्छे रिजल्ट्स लेकर निकलते हैं. छात्रों के संपूर्ण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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नोएडा में मकान खरीदारों के लिए खुशखबरी! यूनिटेक में फंसा है आपका...

Last Updated:May 30, 2026, 09:23 IST Unitech Home Buyers Update : नोएडा के एक जाने-माने बिल्‍डर यूनिटेक के खिलाफ ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है. कंपनी ने मकान खरीदारों के पैसों का दुरुपयोग किया था, जिसके बाद 76 मामले दर्ज किए गए. ईडी ने ताजा कार्रवाई में कंपनी की 8 हजार करोड़ से ज्‍यादा कीमत वाली जमीन को जब्‍त कर लिया है. अब इस जमीन को बेचकर मकान खरीदारों को पैसा लौटाने की तैयारी है. यूनिटेक ने मकान खरीदारों के हजारों करोड़ रुपये दूसरे कामों में खर्च कर दिए. नई दिल्ली. राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में घर खरीदने वालों की सबसे बड़ी मुसीबत ये है कि बिल्‍डर उन्‍हें टाइम पर पजेशन नहीं देते. कई मामलों में तो उनका पैसा दूसरे कामों में लगा दिया जाता है और प्रोजेक्‍ट अटकने से मकान खरीदारों का पैसा फंस जाता है. ऐसे ही एक बड़े बिल्‍डर यूनिटेक पर कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने उसकी 8 हजार करोड़ की संपत्ति जब्‍त कर ली. ईडी ने कहा है कि अब इन संपत्तियों को बेचकर मकान खरीदारों का पैसा लौटाया जाएगा. इससे नोएडा स्थित इस बिल्‍डर के प्रोजेक्‍ट में पैसे लगाने वालों को बड़ी राहत मिली है. ईडी ने यूनिटेक को बड़ा झटका देते हुए नोएडा सेक्टर 96, 97, 98 में स्थित उसकी 348 एकड़ जमीन को अटैच कर दिया है. इस जमीन की बाजार कीमत 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है. यह जमीन गोल्फ कोर्स के लिए थी और कंपनी व उसके प्रमोटर्स के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अटैच की गई है. ईडी ने साफ कहा है कि इस जमीन को बेचकर जो भी पैसा मिलेगा, उसे यूनिटेक के प्रोजेक्‍ट में पैसे लगाने वाले खरीदारों को लौटाया जाएगा. पहले भी जब्‍त की है संपत्तियूनिटेक के प्रमोटर्स पर आरोप है कि उन्होंने घर खरीदारों से जुटाए गए 16,000 करोड़ रुपये में से 7,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग कर डाली है. जांच एजेंसी इससे पहले भी उनकी 2,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति अटैच कर चुकी है. ताजा अटैचमेंट के बाद ED जब्त संपत्तियों को बेचकर पीड़ित घर खरीदारों को उनका पैसा लौटाएगी. ईडी ने अब तक करीब 10,230 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्‍त कर ली है, जो इस मामले में बड़ी सफलता मानी जा रही है. कहां स्थित है यह जमीनईडी की ओर से अटैच की गई जमीन यूनिटेक गोल्फ एंड कंट्री क्लब (UGCC) प्रोजेक्ट से जुड़ी है, जो नोएडा के सेक्टर 96, 97 और 98 में स्थित है. ED के मुताबिक, इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत 8,115 करोड़ रुपये है, जबकि कागजों पर इसकी रजिस्टर्ड कीमत 634 करोड़ रुपये है. ED ने बताया कि अटैच की गई संपत्तियों में 347.83 एकड़ जमीन पर लीजहोल्ड राइट्स और इक्विटी शेयरहोल्डिंग्स शामिल हैं, जो Sungrace Products (India) Pvt Ltd (Uflex Group) और CIG Infrastructure Pvt Ltd के जरिए कंसोर्टियम/स्पेशल पर्पस कंपनी स्ट्रक्चर में रखी गई हैं. कंपनी के खिलाफ दर्ज हैं 76 मामलेदिल्ली पुलिस और CBI ने यूनिटेक लिमिटेड, उसके प्रमोटर्स/डायरेक्टर्स और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और घर खरीदारों के पैसे की हेराफेरी के मामले में 76 से ज्यादा FIR दर्ज की हैं. एजेंसी ने बताया कि जांच में पता चला है कि यूनिटेक लिमिटेड ने घर खरीदारों, निवेशकों और वित्तीय संस्थाओं से मिले कुल 16,076 करोड़ रुपये में से 7,794 करोड़ रुपये गैर-जरूरी कामों में खर्च किए हैं. ED ने आगे दावा किया कि Uflex ग्रुप की Sungrace Products (India) Pvt Ltd और CIG Infrastructure Pvt Ltd ने UGCC प्रोजेक्ट में बिना किसी वित्तीय योगदान के काफी आर्थिक लाभ हासिल किया है और अभी भी उसे बनाए हुए हैं. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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ब्रिटेन बिक जाए तब भी नहीं चुका पाएगा 4500000 करोड़ डॉलर, फिर...

सौ बात की एक बात ये कि ये जो गोरों में फैलाया जा रहा है भारतीय उनके देशों में जा कर उनकी नौकरियां खा रहे हैं, इस पॉलिटिक्स का जवाब देने की जरूरत है. इसलिए भी जरूरत है क्योंकि लोगों को ये लॉजिक ठीक लग रहा है कि भाई बाहर के देशों से अगर कोई उनके देश में आ कर काम करेगा तो लोकल लोग तो बिफरेंगे ही. ब्रिटेन में तो एक पार्टी ही खड़ी हो गई है रिफॉर्म यूके नाम की जिसने इस बार के वहां के लोकल काउंसिल चुनावों में वहां की पुरानी पार्टियों को ही पीछे छोड़ दिया. और उसकी पॉलिटिक्स ही यही है कि ब्रिटेन अब ब्रिटेन वालों का ही नहीं रहा. और बाहर से आ कर लोग वहां बस रहे हैं. लेकिन इसमें ये फर्क करना जरूरी है कि भाई एक तो वो हैं जो गैर-कानूनी तरीके से इराक से आ रहे हैं, सिरिया से आ रहे हैं, अफगानिस्तान से आ रहे हैं, अफ्रीका के सूडान से आ रहे हैं और भी कई अफ्रीकी देशों से आ रहे हैं. वो तो हो गया वहां का घुसपैठिया फैक्टर. कि वो गैर-कानूनी तरीके से आ रहे हैं और ब्रिटेन के लोगों पर बोझ बन रहे हैं. लेकिन नेता लोग वहां अब भारतीयों को भी लपेटे में लेने लग गए हैं. वहां के एक निर्दलीय सांसद हैं रूपर्ट लो. वो भी रिफॉर्म यूके पार्टी में हुआ करते थे. अब उन्होंने अपनी एक अलग मुहिम शुरू की है ‘रिस्टोर ब्रिटेन के नाम से’. वो भी यही पॉलिटिक्स चमका रहे हैं. उन्होंने कह दिया कि ये लाखों भारतीय और पाकिस्तानी ब्रिटेन में आ कर ब्रिटेन के बेरोजगारों का रोजर छीन रहे हैं. कह रहे हैं कि मुझे जिसको रेसिस्ट कहना है कह ले, जिसको नस्लवादी कहना है कह ले, लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता, ये बंद होना चाहिए. और लोग कह रहे हैं कि अगर वो अपने देश की बात कर रहे हैं तो गलत क्या है? वहां के सांसद हैं तो अपने लोगों के बारे में ही बोलेंगे, इसमें गलत क्या है? तो ऐसे लोगों को बताने की जरूरत है कि गलत क्या है. कौन से रोजगार छीन रहे हैं भारतीय? गोरों के रोजगार छीन रहे हैं भारत के लोग? कौनसे रोजगार? उनकी कंपनियों के रोजगार? कहां से बनी वो कंपनियां? कहां से बना है वो अमीर देश? हमें गरीब देश के लोग बता रहे हो जो तुम्हारी नौकरियां ले रहे हैं, तुम्हारा काम-धंधा ले रहे हैं? कहां से खड़ा किया गोरों ने ये काम-धंधा जिसपर ऐसे ऐंठ रहे हैं कि उनकी मिल्कियत भारत के लोग ले जा रहे हैं? औद्योगिक क्रांति से बनाया आपने? औद्योगिक क्रांति का पैसा कहां से आया था? याददाश्‍त ताजा करने की जरूरत इन लोगों की याददाश्त ताजा करने की जरूरत है. ये जो ऐंठ रहे हैं कि भारत के लोग हमारे महान ब्रिटेन में कैसे घुसे चले आ रहे हैं इनको याद दिलाने की जरूरत है कि वो आए थे यहां. वो आए थे यहां भीख मांगते हुए कि व्यापार कर लो उनके साथ. 400 साल पहले अग्रेज जब भारत आए थे तो पूरी दुनिया की GDP में भारत का हिस्सा जानते हैं कितना था? 25%, दुनिया की एक चौथाई GDP भारत से आती थी. सबसे अमीर देश भारत था. और ब्रिटेन का हिस्सा कितना था? 2%, सिर्फ 2% हिस्सा रखने वाला मामूली सा देश ब्रिटेन था. वो आए जहांगीर के दरबार में और मिन्‍नतें कर रहे थे कि हमारे साथ व्यापार कर लो. ब्रिटेन के राजघराने का दूत जो आया था 1615 में सर टॉमस रो, वो वहां से तोहफे लेकर आया घड़ियां, शराब, पिस्तौल वगेरह मुगल बादशाह को देने के लिए तो दरबार में लोग हंस रहे थे कि कौन से गरीब से देश से आया है कोई दूत. उसने खुद लिखा कि व्यापार का समझौता करने चला तो गया भारत लेकिन भारत को देने के लिए हमारे पास है क्या? ऐसी कौनसी चीज है जो भारत में नहीं जो हम उसको दे सकें. खुद लिखा उसने कि उसको भारत देख कर ही शर्म आ रही थी कि हम क्या देंगे इनको. ब्रिटेन में भारतीय अपनी काबिलियत के दम पर रोजगार पाते हैं. (फाइल फोटो/Reuters) …तब तो ब्रिटेन में सीवर और शौचालय तक नहीं थे कपड़ा भारत का दुनिया में नंबर एक पर था. ढाका का मलमल दुनिया में मशहूर था. दुनिया में 25% कपड़ा भारत का बिकता था. समुद्री जहाज भारत जैसे दुनिया में कहीं नहीं बनते थे. बंगाल में बने जहाज दुनिया के सबसे मजबूत जहाज माने जाते थे. दिल्ली, आगरा, लाहौर जैसे शहर ऐसे थे कि दुनिया में ऐसे मॉडर्न शहर नहीं थे. और लंदन क्या था? भारत में सिंधु घाटी सभ्यता के समय से नालियों का सिस्टम था. वो तो चलो 5000 साल पहले की बात हो गई लेकिन जब अंग्रेज भारत आए तब तक भी उनके यहां शौच के लिए जगह नहीं होती थी, सीवर नहीं होते थे. लोग घर में गड्ढा कर के उसके अंदर शौच करते थे. जब वो गड्ढा भर जाता था तो मिट्टी डाल कर दूसरा गड्ढा करते थे. लंदन में नालियां सीधा वहां की टेम्स नदी में गिरती थीं. जानवरों की लाशें नदी में डाल देते थे. गरीब तो सड़कों पर खुले में शौच करते थे. लंदन में जब संसद बंद करनी पड़ी थी 1858 में तो ये हालत हो गई थी कि लंदन की संसद बंद करनी पड़ गई थी. क्यों? क्योंकि टेम्स नदी शौच से भर गई थी. पूरे लंदन में सांस लेना मुश्किल हो गया था इतनी बदबू थी इन गोरे अंग्रेजों के प्यारे लंदन में. 1858 की घटना को तो इनके इतिहास में ‘द ग्रेट स्टिंक’ के नाम से जाना जाता है. उनके बच्चे गंदगी में बीमारियों से मर जाते थे. नदी में शौच भरा हुआ था पीने की पानी तक नहीं था. और उस टाइम भारत में सड़कें रोज धुलती थीं. नहरों का जाल था. कसाईखाने शहर से बाहर होते थे. गुसलखाने होते थे. ड्रेनेज सिस्टम होता था. नदियों पर घाट थे. घाट नियमित रूप से साफ रखे जाते थे. शहरों में बाजार ऐसे थे कि दुनिया में कहीं नहीं होते थे ऐसे बाजार. चांदनी चौक उस वक्‍त की दुनिया का टाइम्ज स्क्वेयर था. इंस्टाग्राम

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अलवर के लाल जुबेर खान ने कर दिखाया कमाल, श्रीलंका को धूल...

Last Updated:May 30, 2026, 07:16 IST Zubair Khan Alwar: राजस्थान के अलवर जिले के प्रतिभाशाली खिलाड़ी जुबेर खान ने श्रीलंका में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को ऐतिहासिक 3-0 सीरीज जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम ने कोलंबो में खेले गए मुकाबलों में श्रीलंका को पूरी तरह मात देकर विदेशी धरती पर नया इतिहास रचा. कप्तान के नेतृत्व में टीम ने बेहतरीन खेल दिखाया, जबकि जुबेर खान का प्रदर्शन चर्चा का केंद्र बना रहा. इस उपलब्धि से अलवर सहित पूरे राजस्थान में खुशी की लहर है. भारत की इस जीत ने व्हीलचेयर क्रिकेट में देश की बढ़ती ताकत और खिलाड़ियों के संघर्ष व समर्पण को दुनिया के सामने साबित किया. ख़बरें फटाफट Alwar News: अलवर जिले के खिलाड़ी देश सहित अब विदेश में खेल के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर रहे हैं. खैरथल तिजारा जिले के किशनगढ़ बास क्षेत्र के बखथला गांव निवासी जुबेर खान ने श्रीलंका के कोलम्बो में आयोजित व्हीलचेयर क्रिकेट प्रतियोगिता में भारत की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम ने श्रीलंका की धरती पर शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया. ‘भारत बनाम श्रीलंका 2026 अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट 3 टी-20 चैंपियनशिप’ में भारतीय टीम ने श्रीलंका को लगातार तीनों मुकाबलों में हराकर 3-0 से सीरीज अपने नाम कर ली. जुबेर खान ने बताया कि उनका चयन भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में हुआ था. व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में राजस्थान से चार खिलाड़ियों का चयन हुआ था जिसमें दो अलवर जिले से खिलाड़ी शामिल हुए. इस दौरान 26 से 28 मई तक श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित हुई इंटरनेशनल व्हीलचेयर क्रिकेट 3T-20 सीरीज में उसने ऑलराउंडर के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया. व्हीलचेयर क्रिकेट खिलाड़ी जुबेर को शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें एमर्जिंग प्लेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया. शानदार पारी खेली और 1 विकेट अपने नाम कियाजुबेर खान ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में बेहतरीन प्रदर्शन कर भारत और अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया. जुबेर खान ने पहले मैच में 40 रन बनाए और 1 विकेट लिया. दूसरे मुकाबले में उन्होंने 31 रन बनाकर 2 विकेट हासिल किए. वहीं तीसरे और अंतिम मैच में 48 रनों की शानदार पारी खेली और 1 विकेट अपने नाम किया. भारतीय टीम की इस ऐतिहासिक जीत से खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की जा रही है. शानदार प्रदर्शन करते हुए कई मैच जिताएजुबेर खान ने बताया कि लायन व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन (इंडिया) द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार उनका चयन उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन, बेहतरीन खेल कौशल और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में दिखाई गई प्रतिभा के आधार पर किया गया था. चयनित खिलाड़ियों को 25 मई को चेन्नई एयरपोर्ट पर बुलाया गया था जहां से टीम श्रीलंका के लिए रवाना हुई. जुबेर खान इससे पहले दिव्यांग व्हीलचेयर क्रिकेट फाउंडेशन (राजस्थान) की टीम के लिए अहम भूमिका निभा चुके हैं. ऑलराउंडर के रूप में उन्होंने राजस्थान व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए कई मैच जिताए हैं. अब उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है. भारत माता की जय के नारे लगाते हुए जुलूस निकालाजुबेर खान का श्रीलंका के कोलम्बो में आयोजित व्हीलचेयर क्रिकेट प्रतियोगिता में भारत की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए जीत दर्ज कर वापस लौटने पर खैरथल रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया. जिसे ही वह ट्रेन से उतरे तो उनके समर्थको ने जुबेर भाई जिंदाबाद व भारत माता की जय के नारे लगाते हुए जुलूस निकाला. जुलूस डीजे व वाहनों के काफिले के साथ शहर के मुख्य मार्गो से गुजरता हुआ नई अनाज मंडी में जिला बचाओ धरना स्थल पर पहुंचा जहां विधायक दीपचंद खैरिया ने जुबेर खान का साफा व माला पहनाकर भव्य स्वागत किया. इस दौरान खुशी में लड्डू बांटे गए. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Alwar,Rajasthan Source link

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