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खाते में ₹10 लाख, डिलीटेड चैट्स और सीकर कनेक्शन… नीट पेपर बेचने...

NEET Paper Leak Accused: नीट-यूजी 2026 में हुए पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपना शिकंजा कस दिया है. देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस बड़े नेक्सेस (गठजोड़) को तोड़ने के लिए पिछले 24 घंटों में देशभर में 14 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है. इस बड़ी कार्रवाई में अब तक कुल 7 आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं. यह मामला सिर्फ पेपर चुराने का नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपयों की लेन-देन, फर्जी मेडिकल एडमिशन और कोचिंग सेंटरों की संदिग्ध भूमिका का एक बड़ा मकड़जाल है. आइए समझते हैं कि अब तक इस केस में क्या-क्या हुआ है और गिरफ्तार आरोपियों के बारे में. नीट 2026 पेपर लीक: अब तक क्या-क्या हुआ? शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के बाद सीबीआई ने नीट-UG 2026 पेपर लीक मामले में आधिकारिक रूप से केस दर्ज किया. जांच शुरू होते ही मंगलवार को CBI ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें से 3 जयपुर, 1 गुरुग्राम और 1 नासिक से पकड़े गए. पिछले 24 घंटों में 14 ठिकानों पर रेड की गई, जिसके बाद महाराष्ट्र के पुणे और अहिल्यानगर से 2 और आरोपी पकड़े गए. आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से अपने मोबाइल की वॉट्सऐप चैट्स डिलीट कर दी थीं. सीबीआई ने फोन जब्त कर फॉरेंसिक लैब भेज दिए हैं ताकि राज उगले जा सकें. गिरफ्तार और संदिग्ध आरोपियों की पूरी कुंडली 1. धनंजय लोखंडे: महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से गिरफ्तार धनंजय इस पूरे गैंग का एक अहम मोहरा है. यह नासिक से पकड़े गए आरोपी शुभम खैरनार का बेहद करीबी है. धनंजय का मुख्य काम उन अमीर छात्रों और उनके परिवारों को खोजना था, जिन्हें आसानी से भारी भरकम कीमत पर नीट का पेपर बेचा जा सके. इसने जांच एजेंसियों से बचने के लिए अपने फोन का डेटा डिलीट कर दिया था. 2. मनीषा वाघमारे: पुणे से गिरफ्तार मनीषा, धनंजय के लगातार संपर्क में थी और इस रैकेट के वित्तीय लेन-देन का अहम हिस्सा मानी जा रही है. जांच में पता चला है कि मनीषा के बैंक खाते में 21 अलग-अलग अकाउंट्स से ₹10 लाख ट्रांसफर किए गए थे. चौंकाने वाली बात यह है कि ये पैसे ठीक उसी दौरान आए जब नीट की परीक्षा चल रही थी. मनीषा ने भी धनंजय के साथ मिलकर अपनी पुरानी चैट्स डिलीट की हैं. 3. शुभम खैरनार: नासिक से गिरफ्तार किया गया शुभम खैरनार इस पूरे नीट-UG 2026 पेपर लीक रैकेट का एक मुख्य और बेहद अहम आरोपी है. जांच एजेंसियों के अनुसार, शुभम ने ही कथित तौर पर मास्टरमाइंड्स से लीक हुआ असली प्रश्न पत्र ₹10 लाख की मोटी रकम देकर खरीदा था. पेपर हासिल करने के बाद, उसकी मुख्य भूमिका इस पेपर को आगे अन्य एजेंटों और ‘खरीदार’ छात्रों तक सर्कुलेट (वितरित) करने की थी. माना जा रहा है कि शुभम खैरनार ही वह अहम कड़ी है, जिसने महाराष्ट्र और उसके आसपास के इलाकों में इस लीक पेपर को फैलाने का काम किया. फिलहाल CBI उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने आगे किन-किन लोगों को यह पेपर बेचा. 4. दिनेश बिंवाल: मांगीलाल का भाई दिनेश बिंवाल जयपुर के जमवारामगढ़ का रहने वाला है और इस पूरे पेपर लीक नेक्सेस के स्थानीय मास्टरमाइंड्स में गिना जा रहा है. जांच के अनुसार, दिनेश ने अपने भाई मांगीलाल के साथ मिलकर अपने भतीजे (ऋषि) को पास कराने के लिए लीक हुए पेपर का न सिर्फ जुगाड़ किया, बल्कि राजस्थान के कुछ खास इलाकों में इस पेपर को अन्य ‘खरीदारों’ तक सर्कुलेट (वितरित) करने में भी अहम भूमिका निभाई. सीबीआई उससे पूछताछ कर रही है कि उसने आगे किन-किन लोगों को पेपर बेचा और इस सिंडिकेट में उसके साथ राजस्थान के और कौन से लोग जुड़े हुए हैं. 5. विकास बिंवाल: मांगीलाल का बेटा विकास बिंवाल सीधे तौर पर पेपर लीक की ग्राउंड डीलिंग में शामिल था या नहीं, इसकी जांच चल रही है, लेकिन उसका नाम भारी संदेह के घेरे में है. सामने आई जानकारी के मुताबिक, विकास और इस परिवार के करीब पांच बच्चे पिछली बार की नीट परीक्षा पास कर चुके हैं और उन्होंने भी सीकर की उसी ‘CLC कोचिंग’ से मदद लेने का दावा किया था जिसका नाम इस बार विवादों में आया है. जांच एजेंसियां अब इस एंगल से भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या विकास का पिछला सिलेक्शन पूरी तरह से मेरिट पर था, या फिर यह पूरा परिवार लंबे समय से पेपर लीक और फर्जीवाड़े के इस बड़े गिरोह से जुड़ा हुआ है. 6. यश यादव: गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया यश यादव इस पेपर लीक सिंडिकेट का एक प्रमुख बिचौलिया था. वह उन शुरुआती पांच आरोपियों में शामिल था, जिन्हें सीबीआई ने 12 मई 2026 को मामले की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में लिया था. जांच के अनुसार, यश यादव का मुख्य काम पेपर लीक करने वाले मास्टरमाइंड और मोटी रकम देकर पेपर खरीदने के इच्छुक अभ्यर्थियों या उनके परिजनों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम करना था. उसने गुरुग्राम और दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में संभावित ‘खरीदारों’ की पहचान करने और उनके साथ डील फाइनल करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी. फिलहाल सीबीआई उससे इस नेटवर्क के अन्य दलालों और पैसों के अंतिम गंतव्य के बारे में कड़ी पूछताछ कर रही है. 7. ओंकार शिंगोटे: जिन्नर का रहने वाला ओंकार एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है और धनंजय लोखंडे का जिगरी दोस्त है. जानकारी के मुताबिक, ओंकार और धनंजय मिलकर छात्रों का मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन ‘सेट’ करवाने का काम करते थे. फिलहाल इसके रोल की भी गहराई से जांच हो रही है. क्या है ‘सीकर कोचिंग’ का एंगल? मामले की जांच जब राजस्थान पहुंची, तो सीकर की ‘CLC कोचिंग’ का नाम सामने आया. दरअसल, आरोपी मांगीलाल के जिस बेटे ‘ऋषि’ को पेपर मिला था, वह इसी कोचिंग का छात्र बताया जा रहा है. अफवाह उड़ी कि पिछली बार सिलेक्ट हुए इसी परिवार के 5 अन्य बच्चों (जिसमें विकास शामिल है) ने भी यहीं से कोचिंग ली थी और शायद कोचिंग ने ही पेपर बांटा हो. कोचिंग ने क्या कहा? CLC के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रवण चौधरी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने

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यूक्रेन से पश्चिम एशिया तक युद्ध की आग, BRICS बैठक के बीच...

होमताजा खबरदेश यूक्रेन से पश्चिम एशिया तक युद्ध की आग, BRICS बैठक के बीच रूस-भारत में बात Last Updated:May 14, 2026, 21:27 IST प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि लावरोव ने दिसंबर 2025 में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई अपनी बैठक के बाद से द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति के बारे में मोदी को जानकारी दी. बयान में कहा गया है, “विदेश मंत्री लावरोव और प्रधानमंत्री ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति समेत पारस्परिक हित के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.” यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में टेंशन जैसे कई मुद्दों पर पीएम मोदी और सर्गेई लावरोव में बातचीत हुई. नई दिल्ली. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति समेत पारस्परिक हित के विभिन्न क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया. प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान भारत के उस दृढ़ रुख को दोहराया कि संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का बेहतर मार्ग है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि लावरोव ने दिसंबर 2025 में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई अपनी बैठक के बाद से द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति के बारे में मोदी को जानकारी दी. बयान में कहा गया है, “विदेश मंत्री लावरोव और प्रधानमंत्री ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति समेत पारस्परिक हित के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.” इसमें कहा गया है कि मोदी ने लावरोव से पुतिन को उनकी हार्दिक शुभकामनाएं देने का अनुरोध किया. लावरोव ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए यहां आए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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‘चुप रहने का मतलब सरेंडर करना होता’, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने...

होमताजा खबरदेश चुप रहने का मतलब सरेंडर करना होता… जस्टिस शर्मा ने कहा, फैसले की 10 बड़ी बातें Last Updated:May 14, 2026, 20:10 IST दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल और अन्य AAP नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है. कोर्ट का आरोप है कि एक्साइज पॉलिसी मामले में इन नेताओं ने जज और उनके परिवार को निशाना बनाकर एक एडिटेड वीडियो और सोशल मीडिया कैंपेन चलाया. कोर्ट ने इसे न्यायपालिका को डराने और अस्थिर करने की साजिश करार देते हुए कहा कि राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल अदालत पर दबाव बनाने के लिए नहीं किया जा सकता. अरविंद केजरीवाल समेत AAP के 5 दिग्गजों पर चलेगा अवमानना का मुकदमा, दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनाया फैसला. नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) के चार अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही शुरू कर दी है. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक के खिलाफ यह आदेश जारी किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन नेताओं ने कथित तौर पर एक सुनियोजित कैंपेन चलाकर न केवल एक जज की छवि खराब करने की कोशिश की, बल्कि पूरी न्यायिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाई है. जस्टिस शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि कोर्ट को डराने और दबाव में लाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. यह मामला एक्साइज पॉलिसी केस से जुड़ी सुनवाइयों के दौरान सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई टिप्पणियों से जुड़ा है. अपने आदेश में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने क्या कहा? जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने आदेश में बेहद गंभीर टिप्पणियां की हैं. उन्होंने कहा कि यह महज किसी अदालती आदेश से असहमति का मामला नहीं था, बल्कि कोर्ट के खिलाफ एक समानांतर नैरेटिव तैयार किया गया था. कोर्ट ने पाया कि डिजिटल कैंपेन के जरिए जज और उनके परिवार के सदस्यों तक को घसीटा गया. जस्टिस शर्मा के मुताबिक, ‘जब संस्था को कठघरे में खड़ा किया जाता है, तो यह जज की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि अदालत ऐसे आरोपों से प्रभावित न हो.’ कोर्ट ने साफ किया कि उसे इस बात की जानकारी मिली कि पत्रों, वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों को व्यापक रूप से प्रसारित किया गया था ताकि जज को अपमानित किया जा सके. अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि कुछ अवमाननाकर्ता राजनीतिक शक्ति से लैस थे और उन्होंने इसका इस्तेमाल कोर्ट को डराने के लिए किया. जस्टिस शर्मा ने कहा कि उन्हें निष्पक्ष आलोचना और असहमति स्वीकार करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है, लेकिन जब चुप्पी को कमजोरी समझा जाने लगे, तो बोलना जरूरी हो जाता है. उन्होंने कहा, ‘मेरे चुप रहने को मेरी कमजोरी समझा जा रहा था, लेकिन वह मेरी कमजोरी नहीं थी.’ कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट के अंदर तो सम्मान की बात कही, लेकिन बाहर उनके इशारे पर एक समन्वित अभियान चलाया गया. यह किसी व्यक्तिगत जज पर हमला नहीं, बल्कि न्यायपालिका को अस्थिर करने की संवैधानिक चोट है. ‘एडिटेड वीडियो और सोशल मीडिया के जरिए फैलाया गया भ्रम’ कोर्ट ने बताया कि वाराणसी यूनिवर्सिटी के एक वर्कशॉप के वीडियो को जानबूझकर एडिट और क्रॉप किया गया. उस 59 सेकंड की क्लिप में जस्टिस शर्मा भगवान शिव और वाराणसी की महिमा का जिक्र कर रही थीं, जिसे बदलकर ऐसा दिखाया गया जैसे वह किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम में हिस्सा ले रही हों. संजय सिंह और अन्य नेताओं ने इस वीडियो को शेयर कर यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश की कि जज का प्रमोशन किसी राजनीतिक प्रभाव में हुआ है. जबकि ‘ऑल्ट न्यूज़’, ‘पीटीआई’ और ‘बार एंड बेंच’ जैसी संस्थाओं की फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स ने इसे फर्जी बताया था, जिसे इन नेताओं ने नजरअंदाज कर दिया. Delhi High Court’s Justice Swarana Kanta Sharma initiates criminal contempt proceedings against Arvind Kejriwal over alleged defamatory letters, videos and social media posts targeting the judge and the judiciary. Contempt action has also been initiated against Manish Sisodia,… Source link

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Arvind Kejriwal Latest News | Delhi Liquor Case | Justice Swarana Kanta...

होमताजा खबरदेश ‘मैं जो चोगा पहनती हूं वो…’ जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता ने ऐसा ये क्‍यों कहा? Last Updated:May 14, 2026, 19:27 IST Arvind Kejriwal News: द‍िल्‍ली शराब घोटाले केस में कई आरोपियों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शर्मा ने पाया क‍ि कई लोगों ने अदालत की अवमानना की है. जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता ने कहा था क‍ि वह ऐसे आरोपों के सामने चुप नहीं रह सकतीं और संकेत दिया कि अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू की जाएगी और अब वह इस मामले में ही फैसला दे रही हैं… अरव‍िंद केजरीवाल केस में जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता शर्मा ने क्‍या क्‍या कहा (Photo AI) नई द‍िल्‍ली. ‘मैं जो चोगा पहनती हूं वो इतना कमज़ोर नहीं है कि कुछ आलोचनाओं से उस पर असर पड़े’ अरव‍िंद केजरीवाल समेत 22 आरोप‍ियों को द‍िल्‍ली आरोप मुक्‍त करने के मामले की सुनवाई के दौरान जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता ने यह ट‍िप्‍पणी की.दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा था कि वह कुछ प्रतिवादियों और व्यक्तियों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करेगा जब दिल्ली शराब घोटाले मामले के संबंध में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर ‘बेहद मानहानिकारक सामग्री’ फैलाई गई थी. दरअसल, कोर्ट ने साफ किया कि अवमानना की ये कार्यवाही अचानक या किसी निजी नाराजगी की वजह से शुरू नहीं हुई. फैसला सुनाने के बाद कोर्ट के संज्ञान में आया कि सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित डिजिटल कैंपेन चलाया गया था. एडिट किए हुए वीडियो, चिट्ठियां और पोस्ट बड़े पैमाने पर फैलाए गए जिनका मकसद सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि पूरी न्यायपालिका की छवि को निशाना बनाना था. ‘जज का चोगा पहनने वाले से शांत रहने की अपेक्षा होती है’जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि उन्हें निष्पक्ष आलोचना और असहमति स्वीकार करने की ट्रेनिंग दी गई है, और जज का चोगा पहनने वाले से शांत रहने की अपेक्षा की जाती है. लेकिन उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि हर बार चुप रहना न्यायिक संयम नहीं होता. इस मामले में की गई टिप्पणियां सिर्फ असहमति नहीं थीं बल्कि एक बदनामी अभियान का हिस्सा थीं, जिसमें कुछ लोगों के पास राजनीतिक ताकत भी थी. ‘डराने-धमकाने की कोशिश की गई’जस्‍ट‍िस शर्मा ने कहा क‍ि उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई. कोर्ट के खिलाफ मनगढ़ंत कहानियां गढ़ी गईं और यहां तक कि उनके परिवार को भी इन कहानियों में घसीटा गया ताकि सोच-समझकर उनका अपमान किया जा सके. जब कोर्ट के अंदर कानूनी प्रक्रिया चल रही थी तब बाहर समानांतर डिजिटल नैरेटिव खड़ा किया जा रहा था जो सीधे इस कोर्ट और न्यायपालिका को टारगेट कर रहा था. ‘न्‍याय‍िक चोगा इतना कमजोर नहीं होता’इसी पृष्ठभूमि में जस्टिस स्वर्णकांता ने यह टिप्पणी की कि वे जो न्यायिक चोगा पहनती हैं, वह इतना कमज़ोर नहीं कि आलोचनाओं से हिल जाए लेकिन जब आलोचना की आड़ में न्यायपालिका की संस्थागत साख पर सुनियोजित हमला हो तो कोर्ट का चुप रहना भी न्यायिक संयम नहीं माना जा सकता. यही वह क्षण था जब उन्होंने अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाने का संकेत दिया. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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PM Modi | Sharad Pawar | ‘सर्वदलीय बैठक बुलाएं पीएम मोदी, देश...

Last Updated:May 14, 2026, 18:20 IST Sharad Pawar On PM Modi Appeal: वेस्ट एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत की इकोनॉमी पर बड़े संकट के बादल मंडरा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से तेल, सोना और खाद के उपयोग में कटौती की अपील के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. शरद पवार ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी करार दिया है. ख़बरें फटाफट पीएम मोदी की ‘किफायत’ वाली अपील पर शरद पवार भड़के, सर्वदलीय बैठक बुलाने की डिमांड. (File Photo : PTI) नई दिल्ली: वेस्ट एशिया में युद्ध जैसे हालातों ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से कुछ कड़े कदम उठाने और संसाधनों के उपयोग में कटौती करने की अपील की है. पीएम की इस अचानक आई ‘किफायत’ (Austerity) वाली सलाह ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के अध्यक्ष शरद पवार ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि पीएम की घोषणाओं से देश के आम नागरिकों, उद्योग जगत और विदेशी निवेशकों के बीच डर का माहौल बन गया है. पवार ने मांग की है कि प्रधानमंत्री को तुरंत सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलानी चाहिए. इसमें देश की आर्थिक स्थिरता और भविष्य की नीतियों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए. पीएम मोदी ने जनता से क्या अपील की है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद की रैली और सोशल मीडिया के जरिए देश के सामने 7 बड़ी अपीलें रखी हैं. उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से सप्लाई चैन पूरी तरह टूट गई है. पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद की कीमतें आसमान छू रही हैं. विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए पीएम ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की सलाह दी है. इसके अलावा उन्होंने ऑफिस जाने के बजाय ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का यूज करने और खाने के तेल की खपत कम करने को कहा है. उन्होंने किसानों से भी केमिकल फर्टिलाइजर का इस्तेमाल आधा करने का आग्रह किया है. पीएम का तर्क है कि डॉलर में होने वाले इन आयातों को कम करके ही देश की आर्थिक सेहत को सुधारा जा सकता है. शरद पवार ने क्यों जताई आर्थिक अस्थिरता की आशंका? दिग्गज नेता शरद पवार का कहना है कि जिस तरह से अचानक ये घोषणाएं की गई हैं, उनका भारतीय अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक असर पड़ेगा. पवार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी दलों को विश्वास में लेना जरूरी है. पवार ने सरकार को सुझाव दिया कि केवल राजनीतिक नेताओं ही नहीं, बल्कि देश के बड़े अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ भी एक हाई-लेवल मीटिंग होनी चाहिए. मध्यपूर्वेतील अस्थिर आणि युद्धजन्य परिस्थितीच्या पार्श्वभूमीवर देशाचे प्रधानमंत्री नरेंद्रजी मोदी (@narendramodi) यांनी दोन दिवसांपूर्वी काही घोषणा केल्या. त्यांचा देशाच्या अर्थव्यवस्थेवर दूरगामी परिणाम होण्याची शक्यता आहे. या घोषणा अचानक करण्यात आल्याने सर्वसामान्य नागरिक,… Source link

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NEET-UG Supreme Court Hearing: तुम पहचानते हो इनको? जब सुप्रीम कोर्ट में...

होमताजा खबरदेश तुम पहचानते हो इनको? जब जज ने आरोप‍ियों से वकील के बारे में पूछ ल‍िया सवाल Last Updated:May 14, 2026, 17:25 IST नीट परीक्षा लीक मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाला मामला सामने आया. आरोप‍ियों की ओर से एक वकील कोर्ट के सामने पेश हो गए. वे बिना कोर्ट की गाउन में पहुंच गए थे. यह देखकर जज भी चौंक उठे. सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी नीट पर सुनवाई्.. सुप्रीम कोर्ट में NEET-UGC पेपर लीक से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई जब अदालत ने वकील की पहचान पर सवाल उठा दिए. सुनवाई के बीच जज ने सीधे आरोपियों से पूछ लिया कि क्या वे उस वकील को पहचानते हैं, जो उनकी ओर से पेश हो रहा था. फ‍िर जो हुआ वो और भी चौंकाने वाला था. सूत्रों के अनुसार, यह मामला तीन आरोपियों से जुड़ा हुआ है, जिनकी तरफ से वीपी सिंह नाम के वकील अदालत में पेश हुए थे. लेकिन उनकी वेशभूषा देखकर जज साहब हैरान रह गए. न तो उन्‍होंने अदालत का ड्रेस गाउन पहना था और ना ही उन्‍होंने कोर्ट की प्रक्रिया का पालन क‍िया था. जब आरोपी से जज ने पूछा सुनवाई के दौरान जज ने सीधे आरोपियों में से एक मंगीलाल बिवाल को बुलाकर उनसे सीधा सवाल किया, क्‍या आप इन वकील साहब को पहचानते हैं? आरोपी कुछ बोल नहीं पाए. इसके बाद कोर्ट को शक हुआ. पूछा क‍ि क्या बिना अनुमति के वकील साहब ने कोर्ट के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर द‍िए हैं. जज ने स्पष्ट किया कि यदि किसी वकील को आधिकारिक रूप से पक्षकारों की ओर से पेश होना है, तो उसे कोर्ट से आवश्यक अनुमति लेनी चाहिए और प्रक्रिया का पालन करना चाहिए. वकील मुहैया कराने को कहा कोर्ट में यह भी चर्चा हुई कि यदि किसी आरोपी के पास निजी वकील उपलब्ध नहीं है, तो क्या अदालत की ओर से सरकारी वकील उपलब्ध कराया जाए. यह विकल्प भारतीय न्याय व्यवस्था के तहत हर आरोपी का मौलिक अधिकार माना जाता है, ताकि किसी भी व्यक्ति को उचित कानूनी सहायता से वंचित न रखा जाए. बाद स्थिति को संभालते हुए अदालत ने एक अन्य सरकारी वकील को आरोपियों की ओर से पेश होने के लिए नियुक्त करने का निर्देश दिया, ताकि सुनवाई प्रक्रिया आगे बाधित न हो और सभी पक्षों को कानूनी प्रतिनिधित्व मिल सके. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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Thalapathy Vijay: विजय ने CM बनते ही गर्दा मचाना किया शुरू! शपथ...

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में जोसेफ विजय उर्फ थलापति विजय ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही बड़े फैसलों की झड़ी लगानी शुरू कर दी है. उनकी सरकार ने न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की ओर कदम बढ़ाए हैं, बल्कि सामाजिक सुधार के लिए कड़े फैसले भी लिए हैं. मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं को मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक सहायता राशि में कोई रुकावट नहीं आएगी. सचिवालय में वित्त सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि यह राशि तुरंत लाभार्थियों के खातों में भेजी जाए. तमिलनाडु वेत्री कषगम (TVK) ने चुनाव से पहले इस राशि को 2,500 रुपये करने का वादा किया था. सरकार का लक्ष्य है कि जब तक इस बढ़ी हुई राशि को लागू करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक पुरानी 1,000 रुपये की किस्त निर्बाध रूप से जारी रहे. शराब की 717 दुकानें कराई बंद मुख्यमंत्री का पदभार संभालते ही विजय ने राज्य के स्वास्थ्य और सामाजिक परिवेश को सुधारने के लिए कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने राज्य भर में मंदिरों, स्कूलों, कॉलेजों और बस स्टैंडों के पास स्थित 717 TASMAC शराब की दुकानों को बंद करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है. मुख्यमंत्री की ओर से कराए गए एक विशेष सर्वेक्षण में पाया गया कि ये दुकानें निर्धारित दूरी के नियमों का उल्लंघन कर रही थीं. अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षण संस्थानों और पूजा स्थलों के 500 मीटर के दायरे में आने वाली इन दुकानों को दो सप्ताह के भीतर हटा दिया जाए. जनता की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता बंद किए जाने वाले आउटलेट्स में 276 मंदिर-मस्जिदों के पास, 186 स्कूलों के पास और 255 बस स्टैंडों के पास स्थित हैं. हालांकि TASMAC तमिलनाडु के राजस्व का एक बहुत बड़ा स्रोत है, फिर भी मुख्यमंत्री विजय ने राजस्व के बजाय जनहित को प्राथमिकता दी है. उन्होंने इसे “आम लोगों की सरकार” बताया है, जो सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर चलेगी. विधानसभा में विजय का ‘शक्ति प्रदर्शन’ राजनीतिक गलियारों में विजय की सरकार ने अपनी मजबूती साबित कर दी है. विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट में सरकार ने 144 वोटों के साथ शानदार जीत दर्ज की. बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत थी, लेकिन कांग्रेस, वामपंथी दलों, VCK और IUML के समर्थन ने विजय की राह आसान कर दी. हैरानी की बात यह रही कि विपक्षी दल AIADMK के कुछ विधायकों ने भी पार्टी लाइन से हटकर विजय के पक्ष में मतदान किया. मुख्यमंत्री ने सदन में उन सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनकी लोकतांत्रिक सरकार पर भरोसा जताया. ‘व्हिसल क्रांति’ का उदय राजनीति में TVK का सफर किसी चमत्कार से कम नहीं रहा है. मुख्यमंत्री विजय ने इसे व्हिसल क्रांति का नाम दिया है. पार्टी की स्थापना के मात्र तीन साल के भीतर TVK ने 34.92% वोट शेयर हासिल कर सबको चौंका दिया है. विजय ने भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार एक पारदर्शी और जन-हितैषी प्रशासन देगी, जो राज्य के हर नागरिक के हक के लिए खड़ा होगा. तमिलनाडु में आए इस राजनीतिक बदलाव ने यह संकेत दे दिया है कि ‘मुख्यमंत्री विजय’ अब केवल सिनेमाई पर्दे के हीरो नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव लाने वाले राजनेता के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं. Source link

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जनेऊ और तिलक तो बस बहाना है, असली मकसद हिजाब को लाना...

Karnataka Hijab Controversy: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर ‘हिजाब’ की एंट्री हो गई है. और इस बार इसके पीछे कांग्रेस सरकार का नया फरमान है. कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में ड्रेस कोड के नियमों को ताक पर रखते हुए धार्मिक प्रतीकों को पहनने की खुली छूट दे दी है. शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा के इस फैसले के बाद अब छात्र हिजाब, स्कार्फ, जनेऊ और तिलक , पगड़ी और रुद्राक्ष पहनकर राज्य के स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में जा सकते हैं. लेकिन इस फैसले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. सियासी जानकारों का मानना है कि जनेऊ और रुद्राक्ष की बात तो सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने के लिए की जा रही है, सरकार का असली निशाना उस हिजाब बैन को हटाना था जिसे 2022 में भाजपा सरकार ने अनुशासन के नाम पर लागू किया था. क्या जनेऊ का विवाद सिर्फ एक सियासी पैंतरा है? शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने इस फैसले के पीछे 24 अप्रैल की एक घटना का हवाला दिया है, जिसमें परीक्षा के दौरान एक छात्र का जनीवरा (जनेऊ) उतरवा दिया गया था. सरकार का कहना है कि वे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नया नियम लाए हैं. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हिंदू प्रतीकों का अपमान एक अपवाद था, जबकि हिजाब को लेकर एक सुनियोजित मांग रही है. सरकार ने जनेऊ के अपमान को ढाल बनाकर हिजाब को कानूनी मान्यता दे दी है, ताकि कोई सीधे तौर पर उन पर सांप्रदायिक होने का आरोप न लगा सके. भाजपा के ‘समानता मॉडल’ पर कांग्रेस का प्रहार न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत आदेश दिया था कि स्कूलों में केवल यूनिफॉर्म ही चलेगी. उस समय तर्क दिया गया था कि स्कूल में धर्म नहीं, बल्कि समानता और अखंडता दिखनी चाहिए. कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी तब कहा था कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है. लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इस ‘समानता मॉडल’ को दरकिनार कर दिया है. इसे सीधे तौर पर भाजपा के फैसलों को पलटने और अपने खास वोट बैंक को साधने की कोशिश माना जा रहा है. ड्रेस कोड की धज्जियां उड़ाने वाला नया सरकारी आदेश नए नियमों के तहत अब क्लासरूम और परीक्षा केंद्रों पर धार्मिक पहचान को वर्दी से ऊपर रखने की इजाजत मिल गई है. अब छात्राएं हिजाब पहन सकेंगी और अन्य छात्र अपनी-अपनी धार्मिक पहचान के कपड़े. सवाल यह उठता है कि अगर हर छात्र अपनी धार्मिक पहचान के साथ स्कूल आएगा, तो ‘यूनिफॉर्म’ (एकसमान) होने का मतलब क्या रह जाएगा? आलोचकों का कहना है कि यह आदेश स्कूलों को शिक्षा के मंदिर के बजाय धार्मिक पहचान के अखाड़े में तब्दील कर सकता है, जिससे बच्चों के बीच भेदभाव की भावना पैदा होगी. तुष्टिकरण की राजनीति का ‘कर्नाटक मॉडल’ विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ के अपने पुराने एजेंडे पर लौट आई है. चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने के नाम पर सरकार एक ऐसी परंपरा को बढ़ावा दे रही है जो भविष्य में विवादों की जड़ बनेगी. जानकारों का कहना है कि जब मामला पहले ही कोर्ट में विचाराधीन रहा हो और उस पर कड़े फैसले आ चुके हों, तो सरकार का इस तरह नियमों को लचीला बनाना केवल और केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है. यह कदम समाज को जोड़ने के बजाय और अधिक ध्रुवीकरण की ओर ले जा रहा है. शिक्षा मंत्री के तर्कों पर उठते गंभीर सवाल शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों के कल्याण के लिए नियमों में बदलाव किया गया है. लेकिन सवाल यह है कि क्या पढ़ाई के लिए हिजाब या धार्मिक प्रतीक अनिवार्य हैं? भाजपा कार्यकाल के दौरान जब हिजाब पर पाबंदी थी, तब भी हजारों छात्राओं ने बिना किसी बाधा के परीक्षाएं दी थीं.  सरकार का यह तर्क कि प्रतीकों से पढ़ाई बेहतर होगी, गले नहीं उतरता. असल में, यह फैसला उन कट्टरपंथी ताकतों को मजबूती देने वाला है जो लंबे समय से स्कूलों में धार्मिक एजेंडा चलाना चाहते थे. धार्मिक ध्रुवीकरण की भेंट चढ़ता शैक्षणिक सत्र इस आदेश के बाद अब राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में फिर से हिजाब बनाम भगवा शॉल का पुराना विवाद शुरू होने की आशंका है. जब एक पक्ष को धार्मिक पोशाक की अनुमति मिलेगी, तो दूसरा पक्ष भी अपनी कुछ खास मांगे इसी तरह की और रख सक सकता है. कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने जनेऊ और तिलक का नाम लेकर जो ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ बनाने की कोशिश की है, वह वास्तव में हिजाब की वापसी का रास्ता साफ करने जैसा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तुष्टिकरण के खेल का सबसे बुरा असर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के भविष्य पर पड़ सकता है. अगर ध्यान से देखा जाए तो अंत में, कर्नाटक सरकार का यह फैसला शिक्षा से ज्यादा सियासत से प्रेरित नजर आता है. जनेऊ और तिलक का जिक्र करना महज एक ‘कवर फायर’ है ताकि हिजाब को दोबारा स्कूलों में एंट्री दिलाई जा सके. सरकार ने भले ही इसे समावेशी कदम बताया हो, लेकिन धरातल पर यह सांप्रदायिक खाई को चौड़ा करने वाला कदम है. शिक्षा के केंद्रों में धर्म को प्राथमिकता देना आने वाले समय में कांग्रेस सरकार के लिए और राज्य की शांति के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. क्या था 2022 का हिजाब विवाद? विवाद की शुरुआत दिसंबर 2021 में उडुपी के एक सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज से हुई थी, जहाँ छह मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने से रोक दिया गया था. कॉलेज प्रशासन का तर्क था कि यह यूनिफॉर्म नियमों का उल्लंघन है. इसके विरोध में छात्राओं ने प्रदर्शन शुरू किया, जो धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैल गया. जवाब में कई हिंदू छात्र भगवा गमछा पहनकर कॉलेजों में आने लगे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई. 5 फरवरी 2022 को तत्कालीन भाजपा सरकार ने एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि छात्रों को केवल निर्धारित यूनिफॉर्म ही पहननी होगी और ऐसी कोई भी पोशाक नहीं पहनी जाएगी जो “समानता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था” को प्रभावित करती हो. हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट का रुख मामला कर्नाटक हाईकोर्ट

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किसानों की हो गई मौज! उदयपुर बना पपीता खेती का नया हब,...

होमवीडियोकृषि Udaipur Papaya Farming: उदयपुर बना पपीता खेती का नया हब, किसानों की बढ़ी कमाई X Udaipur Papaya Farming: उदयपुर बना पपीता खेती का नया हब, किसानों की बढ़ी कमाई   Papaya Farming Udaipur: राजस्थान का उदयपुर जिला अब पपीता खेती के नए हब के रूप में तेजी से उभर रहा है. खासकर मावली और भटेवर क्षेत्र में किसान हाईटेक तकनीकों की मदद से बड़े स्तर पर पपीता उत्पादन कर रहे हैं. ड्रिप इरिगेशन, उन्नत बीज और आधुनिक कृषि पद्धतियों के उपयोग से यहां के बाग लहलहा रहे हैं और किसानों को बेहतर उत्पादन मिल रहा है. स्थानीय बाजार में पपीते की बढ़ती मांग ने किसानों की आय में बड़ा इजाफा किया है. पहले जहां किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, वहीं अब फल खेती की ओर बढ़ते कदम उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम समय में अधिक लाभ और लगातार बनी रहने वाली मांग के कारण पपीता खेती किसानों के लिए फायदेमंद विकल्प साबित हो रही है. उदयपुर की यह सफलता अब राजस्थान के अन्य जिलों के किसानों के लिए भी प्रेरणा बनती जा रही है और क्षेत्र में बागवानी को नई पहचान मिल रही है. Source link

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Asteroid| Earth| अगले हफ्ते आ रही मुसीबत, धरती से टकराई तो शहरों...

होमफोटोनॉलेज अगले हफ्ते आ रही मुसीबत, धरती से टकराई तो शहरों के उड़ जाएंगे परखच्चे Last Updated:May 14, 2026, 13:19 IST अगले हफ्ते पृथ्‍वी के नजदीक से एस्‍टेरॉयड गुजरने जा रहा है. नासा और वैज्ञान‍िक इस घटना पर पैनी नजर बनाए हुए हैं. वैज्ञान‍िकों ने बताया क‍ि क्षुद्रग्रह 2026 JH2 अगले हफ्ते पृथ्वी से लगभग 90 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जो अगर टकरा गया तो शहर के शहर नष्‍ट कर देगा, हालांक‍ि ऐसे टकराव की आशंका नहीं है. अगले हफ्ते एक बड़ी मुसीबत आ रही है. एक बड़ा एस्टेरॉयड धरती के बेहद करीब से गुजरने वाला है. अगर यह धरती से टकरा गया तो बड़ा विध्वंशकारी हो सकता है. यह एस्टेरॉयड कई शहरों को अपनी जद में लेने की क्षमता रखता है. वैज्ञानिकों की मानें तो अगर यह धरती पर गिरा तो पूरे के पूरे शहर को तबाह कर सकता है. वैज्ञानकों ने 2026 JH2 नाम का यह नया एस्टेरॉइड हाल ही में खोजा है और इसकी निगरानी की जा रही है. अब अगले हफ्ते यह एस्टरॉयड धरती के बहुत करीब से गुजरेगा. इसकी दूरी करीब 90 हजार किलोमीटर बताई जा रही है तो वैज्ञानिकों के अनुसार काफी नजदीक है. स्कूल बस के आकार के इस क्षुद्रग्रह को NASA और अंतरिक्ष वैज्ञानिक बारीकी से ट्रैक कर रहे हैं.<br />(AI से बनाई सांकेतिक तस्वीर) यह एक अपोलो की तरह का धरती का नजदीकी जिसका रास्ता पृथ्वी की कक्षा को पार करता है. एरिजोना के माउंट लेमन सर्वे ने इसे पहचाना था. फिलहाल इसकी अनुमानित चौड़ाई 16 से 35 मीटर के बीच बताई जा रही है. छोटा होने पर यह बस जितना और बड़ा होने पर कई मंजिला इमारत जितना लग सकता है. हालांकि अगर यह टकराकर धरती पर गिरता है तो पूरे शहर को खत्म कर सकता है.<br />(AI इमेज) Add News18 as Preferred Source on Google यह एक अपोलो की तरह का धरती का नजदीकी जिसका रास्ता पृथ्वी की कक्षा को पार करता है. एरिजोना के माउंट लेमन सर्वे ने इसे पहचाना था. फिलहाल इसकी अनुमानित चौड़ाई 16 से 35 मीटर के बीच बताई जा रही है. छोटा होने पर यह बस जितना और बड़ा होने पर कई मंजिला इमारत जितना लग सकता है. हालांकि अगर यह टकराकर धरती पर गिरता है तो पूरे शहर को खत्म कर सकता है. यह क्षुद्रग्रह पृथ्वी से महज 90,000 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा. यह दूरी चंद्रमा की औसत दूरी का लगभग एक-चौथाई है. खगोलीय मानकों में यह बहुत करीबी फ्लाईबाय माना जा रहा है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पृथ्वी से टकराने की आशंका नहीं है. इतनी दूरी भी बचाव के लिए काफी है. दिन में सुबह 8-9 बजे के आसपास यह क्षुद्रग्रह चंद्रमा के भी करीब से गुजरने वाला है. वैज्ञानिक इसकी गति और रास्ते को समझने के लिए लगातार नई जानकारी जुटा रहे हैं. यह घटना वैज्ञानिकों के लिए बड़ा मौका है. इससे छोटे क्षुद्रग्रहों के व्यवहार को बेहतर समझा जा सकेगा. वैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसी करीबी मुठभेड़ें ग्रह रक्षा अनुसंधान के लिए बहुत उपयोगी होती हैं. वैज्ञानिक इससे क्षुद्रग्रह की कक्षा, आकार और सूर्य के प्रकाश के प्रभाव को समझ पाते हैं. भविष्य में खतरनाक घटनाओं के घटने से पहले ही पहचानने की क्षमता भी बढ़ेगी. विशेषज्ञों ने बताया कि यह क्षुद्रग्रह नंगी आंखों से नहीं दिखेगा क्योंकि इसकी चमक magnitude 11.5 तक ही रहेगी. अच्छे टेलीस्कोप से इसे देखा जा सकता है. चूंकि वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट जैसे संगठन इस फ्लाईबाय की लाइव स्ट्रीमिंग भी करने वाले हैं. लिहाजा दुनिया भर के लोग इसे ऑनलाइन देख सकेंगे. 2026 JH2 जैसे छोटे एस्टेरॉयड हमें याद दिलाते हैं कि हमारे सौर मंडल में कितनी चट्टानी वस्तुएं घूम रही हैं. ज्यादातर इनका पृथ्वी से कोई खतरा नहीं होता. फिर भी NASA और विश्व भर के वेधशालाएं इन्हें लगातार निगरानी में रखती हैं. निरंतर निगरानी ही हमारी सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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