खाते में ₹10 लाख, डिलीटेड चैट्स और सीकर कनेक्शन… नीट पेपर बेचने...
NEET Paper Leak Accused: नीट-यूजी 2026 में हुए पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपना शिकंजा कस दिया है. देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस बड़े नेक्सेस (गठजोड़) को तोड़ने के लिए पिछले 24 घंटों में देशभर में 14 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है. इस बड़ी कार्रवाई में अब तक कुल 7 आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं. यह मामला सिर्फ पेपर चुराने का नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपयों की लेन-देन, फर्जी मेडिकल एडमिशन और कोचिंग सेंटरों की संदिग्ध भूमिका का एक बड़ा मकड़जाल है. आइए समझते हैं कि अब तक इस केस में क्या-क्या हुआ है और गिरफ्तार आरोपियों के बारे में. नीट 2026 पेपर लीक: अब तक क्या-क्या हुआ? शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के बाद सीबीआई ने नीट-UG 2026 पेपर लीक मामले में आधिकारिक रूप से केस दर्ज किया. जांच शुरू होते ही मंगलवार को CBI ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें से 3 जयपुर, 1 गुरुग्राम और 1 नासिक से पकड़े गए. पिछले 24 घंटों में 14 ठिकानों पर रेड की गई, जिसके बाद महाराष्ट्र के पुणे और अहिल्यानगर से 2 और आरोपी पकड़े गए. आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से अपने मोबाइल की वॉट्सऐप चैट्स डिलीट कर दी थीं. सीबीआई ने फोन जब्त कर फॉरेंसिक लैब भेज दिए हैं ताकि राज उगले जा सकें. गिरफ्तार और संदिग्ध आरोपियों की पूरी कुंडली 1. धनंजय लोखंडे: महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से गिरफ्तार धनंजय इस पूरे गैंग का एक अहम मोहरा है. यह नासिक से पकड़े गए आरोपी शुभम खैरनार का बेहद करीबी है. धनंजय का मुख्य काम उन अमीर छात्रों और उनके परिवारों को खोजना था, जिन्हें आसानी से भारी भरकम कीमत पर नीट का पेपर बेचा जा सके. इसने जांच एजेंसियों से बचने के लिए अपने फोन का डेटा डिलीट कर दिया था. 2. मनीषा वाघमारे: पुणे से गिरफ्तार मनीषा, धनंजय के लगातार संपर्क में थी और इस रैकेट के वित्तीय लेन-देन का अहम हिस्सा मानी जा रही है. जांच में पता चला है कि मनीषा के बैंक खाते में 21 अलग-अलग अकाउंट्स से ₹10 लाख ट्रांसफर किए गए थे. चौंकाने वाली बात यह है कि ये पैसे ठीक उसी दौरान आए जब नीट की परीक्षा चल रही थी. मनीषा ने भी धनंजय के साथ मिलकर अपनी पुरानी चैट्स डिलीट की हैं. 3. शुभम खैरनार: नासिक से गिरफ्तार किया गया शुभम खैरनार इस पूरे नीट-UG 2026 पेपर लीक रैकेट का एक मुख्य और बेहद अहम आरोपी है. जांच एजेंसियों के अनुसार, शुभम ने ही कथित तौर पर मास्टरमाइंड्स से लीक हुआ असली प्रश्न पत्र ₹10 लाख की मोटी रकम देकर खरीदा था. पेपर हासिल करने के बाद, उसकी मुख्य भूमिका इस पेपर को आगे अन्य एजेंटों और ‘खरीदार’ छात्रों तक सर्कुलेट (वितरित) करने की थी. माना जा रहा है कि शुभम खैरनार ही वह अहम कड़ी है, जिसने महाराष्ट्र और उसके आसपास के इलाकों में इस लीक पेपर को फैलाने का काम किया. फिलहाल CBI उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने आगे किन-किन लोगों को यह पेपर बेचा. 4. दिनेश बिंवाल: मांगीलाल का भाई दिनेश बिंवाल जयपुर के जमवारामगढ़ का रहने वाला है और इस पूरे पेपर लीक नेक्सेस के स्थानीय मास्टरमाइंड्स में गिना जा रहा है. जांच के अनुसार, दिनेश ने अपने भाई मांगीलाल के साथ मिलकर अपने भतीजे (ऋषि) को पास कराने के लिए लीक हुए पेपर का न सिर्फ जुगाड़ किया, बल्कि राजस्थान के कुछ खास इलाकों में इस पेपर को अन्य ‘खरीदारों’ तक सर्कुलेट (वितरित) करने में भी अहम भूमिका निभाई. सीबीआई उससे पूछताछ कर रही है कि उसने आगे किन-किन लोगों को पेपर बेचा और इस सिंडिकेट में उसके साथ राजस्थान के और कौन से लोग जुड़े हुए हैं. 5. विकास बिंवाल: मांगीलाल का बेटा विकास बिंवाल सीधे तौर पर पेपर लीक की ग्राउंड डीलिंग में शामिल था या नहीं, इसकी जांच चल रही है, लेकिन उसका नाम भारी संदेह के घेरे में है. सामने आई जानकारी के मुताबिक, विकास और इस परिवार के करीब पांच बच्चे पिछली बार की नीट परीक्षा पास कर चुके हैं और उन्होंने भी सीकर की उसी ‘CLC कोचिंग’ से मदद लेने का दावा किया था जिसका नाम इस बार विवादों में आया है. जांच एजेंसियां अब इस एंगल से भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या विकास का पिछला सिलेक्शन पूरी तरह से मेरिट पर था, या फिर यह पूरा परिवार लंबे समय से पेपर लीक और फर्जीवाड़े के इस बड़े गिरोह से जुड़ा हुआ है. 6. यश यादव: गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया यश यादव इस पेपर लीक सिंडिकेट का एक प्रमुख बिचौलिया था. वह उन शुरुआती पांच आरोपियों में शामिल था, जिन्हें सीबीआई ने 12 मई 2026 को मामले की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में लिया था. जांच के अनुसार, यश यादव का मुख्य काम पेपर लीक करने वाले मास्टरमाइंड और मोटी रकम देकर पेपर खरीदने के इच्छुक अभ्यर्थियों या उनके परिजनों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम करना था. उसने गुरुग्राम और दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में संभावित ‘खरीदारों’ की पहचान करने और उनके साथ डील फाइनल करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी. फिलहाल सीबीआई उससे इस नेटवर्क के अन्य दलालों और पैसों के अंतिम गंतव्य के बारे में कड़ी पूछताछ कर रही है. 7. ओंकार शिंगोटे: जिन्नर का रहने वाला ओंकार एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है और धनंजय लोखंडे का जिगरी दोस्त है. जानकारी के मुताबिक, ओंकार और धनंजय मिलकर छात्रों का मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन ‘सेट’ करवाने का काम करते थे. फिलहाल इसके रोल की भी गहराई से जांच हो रही है. क्या है ‘सीकर कोचिंग’ का एंगल? मामले की जांच जब राजस्थान पहुंची, तो सीकर की ‘CLC कोचिंग’ का नाम सामने आया. दरअसल, आरोपी मांगीलाल के जिस बेटे ‘ऋषि’ को पेपर मिला था, वह इसी कोचिंग का छात्र बताया जा रहा है. अफवाह उड़ी कि पिछली बार सिलेक्ट हुए इसी परिवार के 5 अन्य बच्चों (जिसमें विकास शामिल है) ने भी यहीं से कोचिंग ली थी और शायद कोचिंग ने ही पेपर बांटा हो. कोचिंग ने क्या कहा? CLC के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रवण चौधरी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने









