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Aaj Ka Dhanu Rashifal: धनु वालों खुलेंगे सफलता के द्वार, करियर में...

Last Updated:May 08, 2026, 00:03 IST Aaj ka Dhanu Rashifal 08 may 2026: धनु राशि वालों के लिए आज का दिन करियर और कारोबार में अच्छा रहेगा. पर फिजूलखर्ची से बचें वरना बजट बिगड़ सकता है. परिवार में तनाव संभव है. लव लाइफ अच्छी रहेगी. जल्दीबाजी में कोई भी फैसला ना लें, नहीं तो इसका दुरगामी परिणाम आपके हित में नहीं रहेगा. सेहत का ध्यान रखें और मां लक्ष्मी की पूजा करें. जमुई: धनु राशि के जातकों का 08 मई 2026 का दिन काफी अच्छा गुजरेगा. खासकर जो लोग नौकरी की तलाश कर रहे हैं, बेरोजगार हैं या किसी तरह के सरकारी सेवा की तैयारी कर रहे हैं, तो उनका दिन आज काफी अच्छा गुजरेगा. आज आपको कोई अच्छी खबर मिल सकती है. आप को कोई रोजगार के अवसर मिल सकते हैं. उन्हें पहचान कर उन्हें अपनाना होगा. ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि धनु राशि के जातकों को आज अपने करियर को लेकर काफी सावधान रहने की जरूरत है. अगर आप नौकरी बदलने की सोच रहे हैं या आप अपने काम को छोड़ने की सोच रहे हैं, तो जल्दीबाजी में कोई भी फैसला ना लें, नहीं तो इसका दुरगामी परिणाम आपके हित में नहीं रहेगा. परिवार में किसी बात को लेकर हो सकता है तनावज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों के परिवार में आज किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है. आज परिवार में एक दूसरे के साथ किसी बात को लेकर कहा-सुनी हो सकती है जिससे आपका मन खिन्न होगा. उन्होंने बताया कि आज आपको अपनी संपत्ति को बढ़ाने और उसे बचाने की दिशा में ध्यान देना चाहिए. आज आप किसी भी तरह की फिजूल खर्ची से बचे. आप अपने किसी भी काम को बजट बनाकर करें, तब आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी. कारोबार करने वाले लोगों के लिए आज का दिन अच्छा गुजरेगा. आज आपको आमदनी के नए अवसर मिलेंगे. प्यार में भी अच्छा जाएगा दिन ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों की लव लाइफ अच्छी रहने वाली है. आज आप अपने परिवार के लिए किसी तरह का सरप्राइज प्लान कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि आज आप अपने पार्टनर के साथ घूमने-फिरने जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि आज आपको अपने सेहत को लेकर काफी सावधान रहने की जरूरत है. बदलते मौसम में आपको मौसमी बीमारियां हो सकती हैं. अपने खान-पान पर आज आपको ध्यान देना चाहिए. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों को आज के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और उन्हें खीर का भोग लगाना चाहिए, ऐसा करना आपके लिए अच्छा रहेगा. आज के दिन के लिए आपका शुभ अंक 6 रहने वाला है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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6 LPG सिलेंडर फ्री! सुनते ही झूम पड़ी जनता, पर ‘विजय’ से...

होमताजा खबरदेश 6 LPG सिलेंडर फ्री! सुनते ही झूम पड़ी जनता, पर ‘विजय’ से घबरा गए थलापति, क्‍यो Last Updated:May 07, 2026, 23:21 IST टीवीके प्रमुख थलापति विजय ने तमिलनाडु चुनाव से पहले हर परिवार को साल में 6 मुफ्त LPG सिलेंडर देने का बड़ा वादा किया था. अन्नपूर्णी सुपर 6 योजना ने गृहिणियों और मध्यम वर्ग के बीच तेजी से चर्चा बटोरी है. लेकिन राज्य की खराब आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज को देखते हुए इस योजना की व्यवहारिकता पर सवाल उठ रहे हैं. थलापति के लिए विजय बनी चुनौती! Free LPG Cylinder: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक वादा सबसे ज्यादा चर्चा में है. हर परिवार को साल में 6 मुफ्त LPG सिलेंडर दिए जाएंगे. अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) ने ‘अन्नपूर्णी सुपर 6’ योजना का ऐलान कर ऐसा सियासी दांव चला है, जिसने गृहिणियों से लेकर मध्यम वर्ग तक को अपना दीवाना बना दिया. महंगाई से परेशान लोगों को यह वादा मरहम की तरह लगा. लेकिन, दूसरी तरफ आर्थिक जानकार इस योजना को लेकर बड़े सवाल उठा रहे हैं. इन्‍हीं दावों ने चुनावी विजय के बाद थलापति की घबराहट बढ़ा दी है. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय हालात ने गैस बाजार को पहले ही अस्थिर कर रखा है. ईरान-अमेरिका तनाव और ग्‍लोबल सप्लाई में दबाव के चलते एलपीजी की कीमतों में लगातार असर देखा जा रहा है. आलम यह है कि कमर्शियल सिलेंडर के दाम 3,239 रुपये तक पहुंच चुके हैं. इसका असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, रेस्तरां और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ रहा है. ऐसे माहौल में मुफ्त सिलेंडर का वादा आम लोगों को काफी लुभावना लग रहा है. वहीं, टीवीके का दावा है कि अगर उनकी सरकार बनी तो हर परिवार को साल में 6 सिलेंडर मुफ्त दिए जाएंगे. जनता के भरोसे पर विजय के लिए कहां से पैसा लाएंगे थलापतिलेकिन सवाल यह है कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा? अनुमान के मुताबिक इस योजना पर सरकार को हर साल करीब 12,408 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. यही आंकड़ा अब विजय के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है. तमिलनाडु की आर्थिक हालत पहले से दबाव में बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार 2026-27 तक राज्य पर कुल कर्ज करीब 11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ऐसे में इतनी बड़ी सब्सिडी योजना लागू करना आसान नहीं माना जा रहा है. आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार मुफ्त सिलेंडर जैसी बड़ी योजना लागू करती है, तो उसे या तो दूसरी योजनाओं में कटौती करनी होगी. केंद्र की मेहरबानी दिला सकती है दावों पर विजयहालांकि तेल कंपनियों के कुछ अधिकारी मानते हैं कि योजना पूरी तरह असंभव नहीं है. उनका कहना है कि अगर एक सिलेंडर की औसत कीमत 1,000 रुपये मानी जाए, तो एक परिवार पर सालाना लगभग 6,000 रुपये का खर्च आएगा. सरकार चाहे तो केंद्र की उज्ज्वला योजना की तरह सीधे लोगों के बैंक खातों में सब्सिडी ट्रांसफर कर सकती है. इससे भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की संभावना भी कम होगी. इधर हाल के महीनों में गैस सिलेंडर की सप्लाई को लेकर भी चिंता सामने आई थी. मार्च में अफवाहों और डर के कारण लोगों ने सामान्य से ज्यादा सिलेंडर बुक कर लिए थे, जिससे कई जगह कमी की स्थिति बन गई. हालांकि अब तेल कंपनियों का कहना है कि हालात सामान्य हो रहे हैं और दो दिनों के भीतर सिलेंडर डिलीवरी दी जा रही है. सियासी तौर पर बेहद असरदार रही विजय की योजनाराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नपूर्णी सुपर 6 योजना चुनावी नजरिए से बेहद असरदार साबित रही है. इस वादे ने खासतौर पर गृहिणियों और मध्यम वर्ग के बीच मजबूत पकड़ बनाने में मदद की है. लेकिन असली चुनौती विजय मिलने के बाद इस योजना को लागू करने की है. बढ़ती महंगाई, भारी कर्ज और आर्थिक दबाव के बीच विजय थलापति इस वादे को जमीन पर कैसे उतारेंगे, यही सवाल अब तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Kerala CM | केरल: सतीशन बोले- सीएम पद से कम कुछ भी...

तिरुवनंतपुरम: केरल चुनाव नतीजों के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. केरल में कांग्रेस की शानदार जीत ने हाईकमान के सामने एक मीठी लेकिन जटिल चुनौती खड़ी कर दी है. एक तरफ ज्यादातर विधायक केसी वेणुगोपाल के पक्ष में नजर आ रहे हैं, तो दूसरी तरफ वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला की दावेदारी ने मामले को त्रिकोणीय बना दिया है. दिल्ली से भेजे गए ऑब्जर्वर्स अजय माकन और मुकुल वासनिक ने तिरुवनंतपुरम में नवनिर्वाचित विधायकों से वन-टू-वन बात की है. इस मीटिंग के बाद जो संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी का फैसला करना मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के लिए आसान नहीं होगा. क्या केसी वेणुगोपाल बनेंगे केरल के नए मुख्यमंत्री? सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के 63 में से ज्यादातर विधायक संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं. वेणुगोपाल को राहुल गांधी का बेहद करीबी माना जाता है और दिल्ली में उनकी पकड़ काफी मजबूत है. विधायकों का मानना है कि वेणुगोपाल के पास संगठन को साथ लेकर चलने का लंबा अनुभव है. हालांकि उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा यह है कि वे फिलहाल विधायक नहीं हैं बल्कि सांसद हैं. पार्टी ने चुनाव से पहले यह स्पष्ट किया था कि सांसदों को विधानसभा चुनाव में नहीं उतारा जाएगा. अगर वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो पार्टी को उनके लिए सुरक्षित सीट ढूंढनी होगी और उपचुनाव कराना होगा. 2004 में के मुरलीधरन के साथ हुआ हादसा पार्टी भूली नहीं है, जब मंत्री बनने के बाद वे उपचुनाव हार गए थे. केरल की कुर्सी का सस्पेंस: क्या केसी वेणुगोपाल की होगी ताजपोशी या सतीशन मारेंगे बाजी? (Photo : ANI) वीडी सतीशन की दावेदारी कितनी मजबूत है? वीडी सतीशन पिछले पांच सालों से केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभा रहे थे. पिनाराई विजयन सरकार के खिलाफ मोर्चा संभालने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी थी. सतीशन को गठबंधन के दूसरे सबसे बड़े दल आईयूएमएल (IUML) का भी साथ मिल रहा है. सतीशन ने सांप्रदायिकता और धार्मिक संगठनों के राजनीति में दखल के खिलाफ कड़ा स्टैंड लिया है, जिससे उनकी छवि एक सुलझे हुए नेता की बनी है. सतीशन ने हाईकमान को साफ कर दिया है कि वे मुख्यमंत्री पद के अलावा किसी और जिम्मेदारी में दिलचस्पी नहीं रखते. इसे एक तरह के दबाव की राजनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. जनता के बीच भी सतीशन का चेहरा कांग्रेस के मुख्य अभियान का हिस्सा रहा है. क्या रमेश चेन्निथला की सीनियरिटी को मिलेगी अहमियत? रमेश चेन्निथला कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं. उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी ज्यादा है और नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) जैसे प्रभावशाली संगठनों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं. चेन्निथला ने हाल ही में याद दिलाया कि 2011 में उन्होंने ओमन चांडी के लिए मुख्यमंत्री पद का दावा छोड़ दिया था क्योंकि चांडी सीनियर थे. अब वे चाहते हैं कि उसी सीनियरिटी को आधार मानकर उन्हें मौका दिया जाए. 2021 में बहुमत के बावजूद उन्हें विपक्ष का नेता नहीं बनाया गया था, जिसकी कसक उनके मन में अब भी है. चेन्निथला के लिए किसी जूनियर नेता जैसे सतीशन या वेणुगोपाल की कैबिनेट में काम करना सम्मान की लड़ाई बन सकता है. क्या हाईकमान विधायकों की राय को दरकिनार करेगा? कांग्रेस में यह अक्सर देखा गया है कि हाईकमान विधायकों की राय जानने के बाद अपना फैसला खुद लेता है. 2021 में भी ज्यादातर विधायक चेन्निथला के साथ थे, लेकिन नेतृत्व ने सतीशन को चुना था. इस बार भी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को यह तय करना है कि वे विधायकों की पसंद को चुनेंगे या फिर प्रशासनिक अनुभव और गठबंधन के तालमेल को प्राथमिकता देंगे. राहुल गांधी के लिए भी यह फैसला मुश्किल है क्योंकि वेणुगोपाल उनके संकटमोचक रहे हैं. उन्हें दिल्ली से हटाकर केरल भेजना राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के लिए एक बड़ा बदलाव होगा. कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वे जिसे भी चुनें, बाकी दो बड़े नेता नाराज न हों. Source link

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TN Govt Formation: WhatsApp पर सरकार बनाने का न्योता! विजय की चाल...

चेन्नई: तमिलनाडु में सरकार बनाने की जद्दोजहद के बीच थलापति विजय की पार्टी तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) ने संभावित सहयोगियों तक पहुंचने के लिए डिजिटल रास्ता अपनाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, टीवीके ने इंडिया ब्लॉक की छोटी पार्टियों जैसे सीपीआई, सीपीआई (एम) और वीसीके को औपचारिक मुलाकात के बजाय व्हाट्सएप मैसेज भेजकर समर्थन मांगा है. इस अनौपचारिक तरीके ने पुराने और अनुभवी राजनेताओं को हैरान कर दिया है. एक लेफ्ट नेता ने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद यह नई पीढ़ी की राजनीति है, जहां सरकार बनाने जैसे गंभीर मुद्दे भी मैसेजिंग ऐप पर तय किए जा रहे हैं. तमिलनाडु की सत्ता की चाबी किसके पास होगी, इस पर गहरा सस्पेंस बना हुआ है. गवर्नर की शर्त और विजय का मिशन 118 टीवीके के पास फिलहाल 108 सीटें हैं, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से 10 कम हैं. हालांकि कांग्रेस के 5 विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने का वादा किया है, लेकिन इसके बावजूद विजय के पास केवल 113 का आंकड़ा ही पहुंच पा रहा है. विजय से TN गवर्नर की दो-टूक: ‘फोन पर नहीं, कागज पर दिखाओ बहुमत’. (File Photo : ANI) लेफ्ट पार्टियों की नाराजगी और ‘डिजिटल’ दूरियां टीवीके के व्हाट्सएप आउटरीच ने लेफ्ट पार्टियों के भीतर काफी असहजता पैदा कर दी है. नेताओं का कहना है कि गठबंधन बनाने के लिए आमतौर पर औपचारिक चर्चा, सम्मान और वैचारिक स्पष्टता की जरूरत होती है. एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, ‘जो पार्टी सरकार बनाना चाहती है और जिसके पास बहुमत नहीं है, वह हमारे ऑफिस तक नहीं आई. उन्होंने सिर्फ व्हाट्सएप पर निमंत्रण भेज दिया, इसे हम क्या समझें?’ इसके पीछे एक गहरी चिंता यह भी है कि कांग्रेस ने डीएमके के साथ अपना दशकों पुराना रिश्ता तोड़कर टीवीके का हाथ थाम लिया है. लेफ्ट पार्टियों को डर है कि कहीं टीवीके का यह डिजिटल जाल उनके गठबंधन को भी न तोड़ दे. फिलहाल सीपीआई और वीसीके जैसी पार्टियों ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और वे अपनी आंतरिक बैठकों का इंतजार कर रही हैं. क्या डीएमके और एआईएडीएमके आएंगे साथ? मौजूदा राजनीतिक गतिरोध के बीच तमिलनाडु में एक ऐसी संभावना की चर्चा भी तेज हो गई है, जो पहले अकल्पनीय थी. राजनीतिक गलियारों में खबर है कि अगर टीवीके बहुमत साबित करने में विफल रहती है, तो डीएमके और एआईएडीएमके के बीच एक गुप्त समझौता हो सकता है. उधर, एमके स्टालिन ने भी आंतरिक रूप से संकेत दिए हैं कि वे टीवीके को सरकार बनाने का मौका देने के पक्ष में हैं, लेकिन उनकी नजर इस बात पर है कि क्या विजय 118 का आंकड़ा जुटा पाएंगे. तमिलनाडु में आगे क्या होने वाला है? 16वीं तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है. इसका मतलब है कि विजय के पास बहुमत जुटाने के लिए बहुत कम समय बचा है. अगर 10 मई तक कोई भी दल सरकार बनाने का स्पष्ट दावा पेश नहीं कर पाता, तो राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने या नए चुनाव कराने का विकल्प होगा. टीवीके के लिए चुनौती यह है कि वह उन 5-10 विधायकों का समर्थन कहां से लाए, जो उन्हें सीएम की कुर्सी तक पहुंचा सकें. क्या व्हाट्सएप वाला यह ‘जेन-जी’ अंदाज काम आएगा या फिर तमिलनाडु की पुरानी राजनीतिक परंपराएं विजय पर भारी पड़ेंगी, इसका फैसला अगले 48 घंटों में हो सकता है. फिलहाल, चेन्नई से लेकर पुडुचेरी तक राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है. Source link

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भारत ने पाकिस्तान के ‘न्यूक्लियर ब्लफ’ को किया बेनकाब, वाइस एडमिरल एएन...

होमताजा खबरदेश बेनकाब हुआ पाक का न्यूक्लियर ब्लफ, वाइस एडमिरल बोले- हम तय करेंगे युद्ध का रुख Last Updated:May 07, 2026, 20:18 IST वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान की परमाणु को लेकर बार-बार दी जाने वाली गीदड़ भ‍भकियों को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है. 7 मई 2025 को आज के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बिल्‍कुल सटीक हमला कर लश्कर, जैश और हिजबुल के लॉन्च पैड तबाह किए थे. वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा है कि भविष्य में भारत सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, बल्कि शुरुआत से ही युद्ध के मैदान का रुख अपनी रणनीति के मुताबिक तय करेगा. भविष्‍य में भारत युद्ध की दिशा खुद तय करेगा. Operation Sindoor: भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने गुरुवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने पाकिस्तान की न्‍यूकिल्‍यर ब्‍लैकमेल की सच्चाई दुनिया के सामने उजागर कर दिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से परमाणु हमले की धमकी देकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन भारत ने इस बार साफ कर दिया कि वह किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग से डरने वाला नहीं है. ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए. इन हमलों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के लॉन्च पैड और ठिकानों को निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि लंबी दूरी तक मार करने वाले आधुनिक हथियारों की मदद से भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुस कर कार्रवाई की. साथ ही, यह साबित कर दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है. उन्‍होंने कहा कि इन हमलों ने पाकिस्तान की न्यूक्लियर ब्लैकमेल की रणनीति को पूरी तरह नाकाम कर दिया है. पहले जैसे नहीं होंगे भविष्‍य में युद्ध वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने यह भी कहा कि भविष्य के युद्ध अब पहले जैसे नहीं होंगे. आने वाले समय में बिना इंसानों वाली यानी अनक्रूड और ऑटोनॉमस प्रणालियों की भूमिका बहुत बढ़ने वाली है. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना तेजी से नई तकनीकों को अपने सैन्य सिस्टम में शामिल कर रही है ताकि दुश्मन से हमेशा एक कदम आगे रहा जा सके. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की रणनीतिक ताकत, सैन्य तैयारी और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का बड़ा उदाहरण है. समुद्र में बड़ी ताकत बन चुका है भारतीय नौसेना लगातार अपनी युद्ध रणनीतियों की समीक्षा कर रही है और नई क्षमताओं को शामिल कर रही है. प्रमोद ने भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोतों की भी तारीफ करते हुए कहा कि विमानवाहक पोत विक्रांत, कोलकाता और विशाखापत्तनम ने शानदार प्रदर्शन किया है. इस युद्ध में यह भी साबित हो गया है कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि समुद्र में लंबे समय तक युद्ध के लिए तैयार रहने के साथ आधुनिक युद्ध कौशल को विकसित कर भारत की बड़ी ताकत बन चुका है. सैन्‍य सफलता के लिए जरूर है आत्‍मनिर्भता उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी सैन्य अभियान में सफलता के लिए आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है. भारत अब अपने हथियार, युद्धपोत और तकनीक खुद विकसित कर रहा है, जिससे सेना की ताकत लगातार बढ़ रही है. भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि अब भारत सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में भारत को फिर चुनौती दी गई तो भारतीय सेना सिर्फ जवाब नहीं देगी, बल्कि शुरुआत से ही युद्ध के मैदान का रुख अपने हिसाब से तय करेगी. 11 एयरपोर्ट और 13 एयरक्राफ्ट को किया बर्बाद भारतीय वायु सेना के उप-प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को हुए नुकसान की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 7 मई 2025 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद नौ बड़े आतंकी ठिकानों पर हमला किया था और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया था. अवधेश कुमार भारती ने बताया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 11 एयरपोर्ट्स को निशाना बनाया और उसके 13 विमानों को नष्ट कर दिया. इनमें जमीन और हवा दोनों में मौजूद विमान शामिल थे. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर मौजूद पाकिस्तान की एक अहम हवाई संपत्ति को भी सफलतापूर्वक निशाना बनाया था. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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महाभारत : नियोग से पांडु, धृतराष्ट्र और विदुर को पैदा करने वाले...

क्या आपको मालूम है कि महर्षि वेद व्यास का असली बेटा कौन था. वही व्यास जिन्होंने नियोग के जरिए पांडु, धृतराष्ट्र और विदुर को पैदा करने में मदद की थी. व्यास का अपना जो असली बेटा हुआ, उसका जन्म भी हैरानी भरा ही था. हालांकि ये बेटा भी खासा नामी निकला था महर्षि वेद व्यास खुद पाराशर और सत्यवती से पैदा हुए थे. वेद व्यास को ऋषि पाराशर ने पाला. वह खुद महर्षि बन गए. इसके बाद सत्यवती की शादी राजा शांतुन से हुई, जिनके दो पुत्र थे विचित्रवीर्य और चित्रांगद. चित्रांगद का निधन युवावय में हो गया. फिर विचित्रवीर्य का विवाह अंबिका और अंबालिका से हुआ. लेकिन विवाह के बाद विचित्रवीर्य का भी निधन हो गया. नियोग के लिए व्यास को बुलाया गया अब समस्या ये थी कि राजवंश को कैसे आगे चलाया जाएगा, क्योंकि दोनों ही रानियों की कोई संतान नहीं थी. तब सत्यवती ने अपनी दोनों बहुओं से संतान प्राप्त करने के लिए नियोग परंपरा का पालन करने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने अपने पुत्र महर्षि व्यास को बुलाया.  तीनों के जैविक पिता थे इससे पांडु और धृतराष्ट्र का जन्म हुआ. लेकिन जब अंबालिका को दोबारा वेद व्यास के पास जाना था तो उसने डर के मारे दासी को उनके पास भेज दिया, जिससे विदुर पैदा हुए. इस तरह व्यास इन तीनों के जैविक पिता थे. महर्ष वेद व्यास जैविक तौर पर पांडु, धृतराष्ट्र और विदुर के जैविक पिता थे. उन्होंने ये संतान नियोग के जरिए पैदा की थी. (News18 AI) व्यास की शादी वाटिका से हुई थी क्या इन तीनों के अलावा व्यास का कोई और भी जैविक पुत्र था. वैसे तो व्यास ऋषि थे लेकिन उनकी शादी वाटिका से हुई, जिन्हें आरुणि के नाम से भी जानते हैं. उन दोनों के एक पुत्र शुकदेव हुए थे. हालांकि शुकदेव के जन्म की कहानी भी विचित्र ही है. व्यास के कैसे हुआ एक और पुत्र वाटिका ऋषि जाबालि की पुत्री थीं. वह खुद भी आध्यात्मिक तौर पर बहुत प्रखर और उन्नत महिला थीं. ग्रंथों में कहा गया है कि शुकदेव अयोनिज पुत्र थे. वह 12 वर्ष तक माता के गर्भ में रहे. कथा के अनुसार, भगवान शिव पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे, तभी एक तोता (शुक) ने हुंकारी भरी. शिव ने उस तोते को मारने के लिए त्रिशूल छोड़ा. तब जान बचाकर भागा वह शुक वेदव्यास की पत्नी के गर्भ में प्रवेश कर गया. 12 वर्ष तक वह वहीं रहा. फिर भगवान कृष्ण के आश्वासन पर जन्मा. जन्म लेते ही शुकदेव बाल्यावस्था में ही तपस्या के लिए वन चले गए. महर्षि शुकदेव लोगों को प्रवचन देते हुए (WIKI COMMONS) शुक कितने बड़े ऋषि थे शुक खुद प्रबुद्ध ऋषि थे. उन्हें वेद व्यास का सच्चा आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माना जाता है. वे महाभारत में युवा कुरु राजकुमारों के एक बुद्धिमान मार्गदर्शक के रूप में भी बताए गए हैं. कौरव और पांडव दोनों सम्मान करते थे महर्षि वेद व्यास के पुत्र शुक (शुकदेव) एक अत्यंत प्रबुद्ध ऋषि थे, जो अपने गहन आध्यात्मिक ज्ञान और सांसारिक मामलों से विरक्ति के लिए जाने जाते थे. उनका कौरव और पांडव दोनों बहुत सम्मान करते थे. उन्हें भागवत पुराण के मुख्य वक्ता के रूप में जाना जाता है. बताया जाता है कि गर्भ में ही उन्हें ब्रह्मज्ञान प्राप्त हो गया था. इसी वजह से वह जन्म लेते ही वे सांसारिक मोह से मुक्त होकर वन की ओर चले गए. शुकदेव ने महाराज परीक्षित (अभिमन्यु के पुत्र) को मृत्यु से पहले 7 दिनों में भागवत पुराण का उपदेश दिया, जिससे परीक्षित को मोक्ष प्राप्त हुआ. एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब व्यास जी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो शुकदेव जी इतने तेजस्वी हो गए कि उनके शरीर से होकर वायु और जल बहने लगा. इससे व्यास जी ने समझ लिया कि वे पूर्ण ब्रह्मज्ञानी हैं. वैसे आपको बता दें कि महाभारत के दौर में कई ऐसे जन्म भी हुए थे, जो बॉयोलॉजिकल नहीं थे. बल्कि दैवीय तरीके से हुए थे. Source link

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जेवर एयरपोर्ट पर किसे मिलेगा पहला वॉटर कैनन सैल्‍यूट, फिर किस शहर...

Last Updated:May 07, 2026, 18:16 IST नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाइट ऑपरेशन का ऐलान हो गया है. क्‍या आपको पता है कि जेवर में बने इस एयरपोर्ट से किस शहर के लिए पहली फ्लाइट टेकऑफ करने वाली है. इतना ही नहीं, किस फ्लाइट के पैसेंजर को खास वॉटर कैनन सैल्‍यूट मिलेगा. एयरपोर्ट से किस शहर के लिए उड़ेगी पहली फ्लाइट? Noida International Airport: आपको यह तो पता होगा कि 15 जून से नोएडा इंटरनेशलन एयरपोर्ट से फ्लाइट ऑपरेशन शुरू होने जा रहे हैं. लेकिन, क्‍या आपको यह पता है कि इस एयरपोर्ट से किस शहर के लिए पहली फ्लाइट टेकऑफ करेगी. साथ ही, किस शहर से आने वाली फ्लाइट को जेवर के इस एयरपोर्ट पर पहली लैंडिंग मिलेगी और उसका स्‍वागत वॉटर कैनन सैल्‍यूट से किया जाएगा. इसके अलावा, यहां से किस-किस शहरों के लिए फ्लाइट्स ऑपरेट की जाएगी. यदि आपके पास इन सभी सवालों के जवाब नहीं हैं तो चलिए सिलसिलेवार तरीके से हम आपको बताते हैं. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh Source link

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OPINION: कर्नाटक में येदियुरप्पा को मिला था मौका, लेकिन TN में गवर्नर...

थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने भले ही तमिलनाडु की राजनीति को सिर के बल पलट दिया हो, मगर खुद भी उलझ गई है. तीन दशकों से चला आ रहा द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (AIADMK) का दबदबा खत्म हो गया. राज्य की जनता ने एक नया विकल्प तो चुना, लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजों ने ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने सरकार बनाने की चाबी राजभवन की मेज पर रख दी है. आज तमिलनाडु की राजनीति उस मोड़ पर है, जहां राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं. राज्यपाल ने गुरुवार को टीवीके (TVK) चीफ विजय के सरकार बनाने के दावे को खारिज कर दिया. राजभवन की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि विजय विधानसभा में आवश्यक बहुमत साबित करने में सफल नहीं रहे हैं. विजय की पार्टी ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया है. यह आंकड़ा बहुमत के जादुई नंबर 118 से सिर्फ 10 सीटें दूर है. कांग्रेस के समर्थन के बाद यह संख्या 113 तक पहुंच गई है, जो अब भी बहुमत से 5 कदम दूर है. विजय ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि उन्हें सबसे बड़े दल के नाते मौका दिया जाए और वे दो हफ्ते के भीतर फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित कर देंगे. लेकिन राज्यपाल का रुख कड़ा बना हुआ है. वे चाहते हैं कि विजय शपथ लेने से पहले ही उन 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाएं, जो उनके साथ हैं. कर्नाटक 2018: क्या तब नियमों की परिभाषा अलग थी? जब हम तमिलनाडु के मौजूदा संकट को देखते हैं, तो मई 2018 का कर्नाटक चुनाव बरबस याद आता है. उस समय 224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में बीजेपी 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. वह भी बहुमत के आंकड़े से दूर थी. दूसरी तरफ कांग्रेस और जेडीएस ने चुनाव के तुरंत बाद गठबंधन किया, जिसके पास बहुमत का स्पष्ट आंकड़ा था. इसके बावजूद तत्कालीन राज्यपाल वजुभाई वाला ने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को बुलाने के बजाय सबसे बड़ी पार्टी के नेता बी.एस. येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया. येदियुरप्पा को शपथ दिलाते समय उनसे विधायकों की लिस्ट नहीं मांगी गई, बल्कि उन्हें सदन में बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद फ्लोर टेस्ट हुआ और येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा. सवाल यह है कि जो ‘VIP छूट’ कर्नाटक में बीजेपी को मिली, वही संवैधानिक परंपरा तमिलनाडु में विजय के लिए क्यों नहीं अपनाई जा रही है? गवर्नर से मिलकर तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश करते विजय (PTI Photo) ‘राजभवन टेस्ट’ बनाम ‘फ्लोर टेस्ट’ का संवैधानिक विवाद संविधान विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों ने यह स्पष्ट किया है कि बहुमत का फैसला राजभवन के बंद कमरों में नहीं, बल्कि विधानसभा के पटल पर होना चाहिए. 1994 का ‘एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ’ मामला इसी बात की तस्दीक करता है. 9 जजों की बेंच ने साफ कहा था कि किसी सरकार के पास बहुमत है या नहीं, इसे परखने की एकमात्र जगह विधानसभा है. तमिलनाडु के मामले में ऐसा लग रहा है मानो राज्यपाल फ्लोर टेस्ट से पहले ही ‘राजभवन टेस्ट’ लेना चाह रहे हैं. वे विजय से यह पूछ रहे हैं कि वे बाकी पार्टियों का समर्थन कैसे जुटाएंगे. क्या यह राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आता है कि वह पहले से ही सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाएं, जबकि सबसे बड़े दल ने दावा पेश कर दिया हो? क्या राज्यपाल केवल केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे हैं? राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मामले में राज्यपाल की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल अक्सर केंद्र के एजेंट के रूप में काम करते हैं और अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए संविधान को नुकसान पहुंचाते हैं. अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने इसे जनमत का अपमान बताया है. उनका कहना है कि तमिलनाडु की जनता ने विजय को सबसे ज्यादा सीटें दी हैं, ऐसे में उन्हें मौका न देना जनादेश का गला घोंटने जैसा है. कांग्रेस ने भी कड़ी चेतावनी दी है कि अगर बीजेपी ने एक विधायक के दम पर पिछले दरवाजे से शासन करने की कोशिश की, तो राज्य में बड़ा विद्रोह हो सकता है. தமிழ்நாடு சட்டமன்றத் தேர்தலில் தனித்து ஆட்சியமைக்கும் அதிகாரத்தை மக்கள் எந்தக் கட்சிக்கும் வழங்கவில்லை. இந்த முடிவு தமிழ்நாட்டு வரலாற்றில் முன்னெப்போதும் நிகழாதது. என் சகோதரர் திரு. @mkstalin அவர்கள் ‘மக்கள் தீர்ப்பை மதிக்கிறோம்; பொறுப்பான எதிர்க்கட்சியாகச் செயல்படுவோம்’ என்று… Source link

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क्यों नहीं बढ़ सकी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की वंशरेखा, बेटा देहरादून में...

19वीं सदी में बंगाल में टैगोर परिवार जाना माना बहुत संपन्न परिवार था. उनकी गिनती भारत के सबसे धनी परिवारों में होती थी. जाहिर सी बात है कि इस परिवार के सबसे चर्चित और प्रसिद्ध चेहरे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर थे. उनका बनाया शांति निकेतन आज भी खूब फलफूल रहा है. उनके नाम से देशभर में बहुत सी संस्थाएं हैं. किताबें छपती हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि टैगोर परिवार के लोग अब क्या कर रहे हैं. रवींद्रनाथ टैगोर के वंशज आज दुनिया भर में फैले हुए हैं. उनमें से अधिकांश लोग सार्वजनिक सुर्खियों से दूर अपनी निजी और व्यावसायिक जिंदगी में सक्रिय हैं. वैसे ये बात सही है कि रवींद्रनाथ टैगोर की अपनी सीधी संतान रेखा अब नहीं रही. उनके बड़े भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर के वंशज अभी उनके विचारों और विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. रवींद्रनाथ टैगोर के भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर के परपोते सुप्रियो टैगोर छह दशकों से अधिक समय से शांतिनिकेतन की विरासत के अगुआ और संरक्षक रहे. वह विश्व भारती विश्वविद्यालय के छात्र थे, जिसकी स्थापना टैगोर ने की थी. वह टैगोर की प्रसिद्ध आश्रम प्रणाली के विद्यालय, पाठा भवन स्कूल के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानाचार्य भी रहे. हाल के वरसों में परिवार के कुछ सदस्यों ने रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए आवाज उठाई है. फरवरी 2025 में प्रदीप टैगोर ने रांची के ‘टैगोर हिल’ पर हो रहे अवैध कब्जे के खिलाफ स्थानीय अधिकारियों से मुलाकात की. ऐतिहासिक संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग की. वैसे परिवार के ज्यादातर लोग पारंपरिक रूप से चकाचौंध से दूर रहकर सादगीपूर्ण जीवन जीना पसंद करते हैं. हालांकि वे अक्सर अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं और कोलकाता, शांतिनिकेतन या अन्य स्थानों पर अपने पेशेवर जीवन में सक्रिय हैं. गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर अपनी बहू प्रतिमा और बेटे रथींद्रनाथ के साथ (फाइल फोटो) टैगोर परिवार के घर को ठाकुरबाड़ी कहा जाता था. ठाकुरबाड़ी का नाम आते ही एक ऐसे परिवार का नाम उभरने लगता है जो ज्ञान, कला, साहित्य और समृद्धि के बीच जीता था. ईस्ट इंडिया के जमाने में उद्योगपति द्वारकानाथ टैगोर से शुरू हुई ये यात्रा महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर से होती हुई गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर तक पहुंची लेकिन ये सवाल अक्सर मन में आता है कि रवींद्रनाथ टैगोर के सीधे वंशज आज कहां हैं, क्या कर रहे हैं. रवींद्रनाथ टैगोर की संतानें रवींद्रनाथ टैगोर का विवाह मृणालिनी देवी से हुआ था. उनके पांच बच्चे थे.1. माधुरीलता (बेला) – सबसे बड़ी बेटी2. रथींद्रनाथ – सबसे बड़े बेटे3. रेणुका – दूसरी बेटी4. मीरा – सबसे छोटी बेटी.5. शमींद्रनाथ – सबसे छोटा बेटा नियति के क्रूर खेल से ये परिवार नहीं बच सका. बीमारी और अकाल मौतों का साया परिवार पर पड़ा रहा. टैगोर के जीवनकाल में ही उनके तीन बच्चों बेला, रेणुका और शमींद्रनाथ की मृत्यु युवाकाल या और कम उम्र में हो गई. शमींद्रनाथ की मृत्यु मात्र 11 वर्ष की आयु में हैजा से हुई, जिससे गुरुदेव पूरी तरह टूट गए थे. रवींद्रनाथ की वंशरेखा के भौतिक रूप से समाप्त होने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण रहे – अकाल मृत्यु और संतानहीनता. एक बेटा और एक बेटी ही बच सके रवींद्रनाथ के एक बेटा और एक बेटी ही बाद जीवित बच पाए. बेटे रथींद्रनाथ टैगोर कृषि वैज्ञानिक थे. वह शांतिनिकेतन के पहले उपकुलपति बने. उन्होंने प्रतिमा देवी से विवाह किया, लेकिन उनकी अपनी कोई संतान नहीं हुई. उन्होंने नंदिनी नाम की एक कन्या को गोद लिया. रथींद्रनाथ बाद के वर्षों में पारिवारिक और प्रशासनिक विवादों के कारण शांतिनिकेतन छोड़कर देहरादून चले गए. रवींद्रनाथ टैगोर अपने बेटे रथींद्रनाथ और बेटी माधुरीलता के साथ (फोटो X) रथींद्रनाथ टैगोर का अंतिम समय देहरादून में ही बीता. उनका वहां जाना टैगोर परिवार के इतिहास का एक अत्यंत दुखद और विवादास्पद अध्याय माना जाता है. गुरुदेव की मृत्यु के बाद वह विश्वभारती विश्वविद्यालय के पहले ‘उपकुलपति’ बने. उनके शांतिनिकेतन छोड़ने और देहरादून बसने के पीछे की दो वजहें थीं. 1. प्रशासनिक विवादरथींद्रनाथ एक कुशल कृषि वैज्ञानिक और शिल्पी थे. 7 अगस्त 1941 में गुरुदेव की मृत्यु के बाद विश्वभारती को संभालना उनके लिए कांटों भरा ताज साबित हुआ. शांतिनिकेतन के पुराने आश्रमवासियों और कुछ दिग्गज विद्वानों के साथ उनके मतभेद गहरे हो गए. उन पर प्रशासनिक अनियमितताओं और विश्वविद्यालय के फंड के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए. रथींद्रनाथ स्वभाव से बहुत संवेदनशील थे. उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए समितियां बनाई गईं, जिससे उन्हें लगा कि जिस संस्था को उनके पिता ने खून-पसीने से सींचा, वहीं उनका अपमान हो रहा है. आखिरकार 1953 में उन्होंने भारी मन से उपकुलपति के पद से इस्तीफा दे दिया. 2. पारिवारिक विवाद और मीरा से नजदीकियांरथींद्रनाथ का निजी जीवन भी काफी जटिलताओं से भरा रहा, जिसने उन्हें शांतिनिकेतन से दूर जाने पर मजबूर किया. उनकी पत्नी प्रतिमा देवी के साथ उनके संबंध अंतिम वर्षों में बहुत मधुर नहीं रह गए थे. प्रतिमा देवी शांतिनिकेतन में ही रहना चाहती थीं, जबकि रथींद्रनाथ वहां के माहौल से ऊब चुके थे. रथींद्रनाथ के जीवन में मीरा चटर्जी का प्रवेश हुआ, जो उनके मित्र निर्मल चंद्र चटर्जी की पत्नी थीं. मीरा उनके अकेलेपन का सहारा बनीं. जब रथींद्रनाथ ने शांतिनिकेतन छोड़ा, तो मीरा चटर्जी और उनका परिवार भी उनके साथ देहरादून चला गया. इस रिश्ते को उस समय के बंगाली समाज और टैगोर परिवार के कई सदस्यों ने स्वीकार नहीं किया, जिससे विवाद और बढ़ गया. गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बेटे रथींद्रनाथ पारिवारिक और विश्वभारती विवि के प्रशासनिक विवादों के बाद सबकुछ छोड़कर देहरादून आ गए. उनका अंतिम जीवन यहीं गुजरा (फाइल फोटो) बेटा सबकुछ छोड़ देहरादून चला गया 1953 में शांतिनिकेतन त्यागने के बाद रथींद्रनाथ देहरादून के राजपुर’ इलाके में एक बंगले में रहने लगे, जिसका नाम उन्होंने ‘मयाली’रखा था. वहां उन्होंने अपना समय पेंटिंग करने, लिखने और बागवानी में बिताया. वह शांतिनिकेतन की राजनीति से दूर एक गुमनाम जीवन जीना चाहते थे. देहरादून में रहते हुए भी वे आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद से जूझते रहे. गुमनामी में निधन 3 जून 1961 को देहरादून में ही उनका निधन हुआ. उनकी मृत्यु के समय उनके पास शांतिनिकेतन का कोई आधिकारिक प्रतिनिधि नहीं था, जो उस महान विरासत के उत्तराधिकारी के लिए एक विडंबना ही थी. रथींद्रनाथ का देहरादून

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दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: ISI के इशारे पर आतंक फैलाने आए...

होमताजा खबरDelhi टारगेट किलिंग और धमाकों का था प्लान, दिल्ली में रेकी कर रहे 8 ISI एजेंट पकड़ाए Last Updated:May 07, 2026, 15:11 IST दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर चल रहे एक बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेतृत्व में काम कर रहे 8 गुर्गों को गिरफ्तार किया गया है. ये आरोपी दिल्ली में टारगेट किलिंग और बम धमाकों जैसी बड़ी आतंकी वारदातों को अंजाम देने की फिराक में थे. पुलिस ने इनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए हैं. राजधानी दहलाने की साजिश फेल: स्पेशल सेल ने पकड़ा पाकिस्तानी गैंगस्टर भट्टी का खूंखार मॉड्यूल. (AI Image) नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बहुत बड़े ऑपरेशन में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के नापाक इरादों को नाकाम कर दिया है. पुलिस ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के मॉड्यूल पर स्ट्राइक करते हुए अलग-अलग शहरों से 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. ये सभी आरोपी सोशल मीडिया के जरिए सीधे पाकिस्तान में बैठे भट्टी और उसके आकाओं के संपर्क में थे. पुलिस की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि ये लोग दिल्ली में किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे. इनके निशाने पर कुछ वीवीआईपी और महत्वपूर्ण स्थान भी शामिल थे, जिनकी इन्होंने पहले ही रैकी कर ली थी. गिरफ्तार आरोपियों से मिले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर सीमा पार बैठे आतंकियों से जुड़े हैं. दिल्ली में बड़ी तबाही मचाने का था प्लान पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है कि उन्हें दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाकों में हमले का टास्क दिया गया था. शहजाद भट्टी ने ISI के निर्देश पर इन लोगों को भारत में एक्टिव किया था. ये मॉड्यूल न सिर्फ धमाके बल्कि दिल्ली में टारगेट किलिंग की प्लानिंग भी कर रहा था. आरोपियों ने शहर के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील ठिकानों की रैकी पूरी कर ली थी. स्पेशल सेल अब इनके बाकी नेटवर्क और मददगारों की तलाश में जुटी हुई है. कैसे ऑपरेट हो रहा था शहजाद भट्टी का यह मॉड्यूल? शहजाद भट्टी पाकिस्तानी जेलों और सुरक्षित ठिकानों से बैठकर सोशल मीडिया के जरिए इन युवकों को रिक्रूट कर रहा था. गिरफ्तार किए गए 8 आरोपी अलग-अलग शहरों से ताल्लुक रखते हैं, जो आपस में डिजिटल माध्यमों से जुड़े थे. पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं. इन डिवाइस की एनालिसिस से पता चला है कि भट्टी इन्हें हथियारों और फंड्स की सप्लाई करने वाला था. पुलिस को अंदेशा है कि इस मॉड्यूल के तार अन्य बड़े अंडरवर्ल्ड गैंग्स से भी जुड़े हो सकते हैं. क्या इन आरोपियों के तार दूसरे गैंग्स से भी जुड़े हैं? दिल्ली पुलिस को जांच के दौरान यह भी पता चला है कि ISI अब गैंगस्टर्स का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए कर रही है. गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अब उन बड़े गैंग्स पर भी एक्शन ले रही है जो परोक्ष रूप से इनकी मदद कर रहे थे. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक हाइब्रिड मॉडल है, जहां अपराधियों को आतंक फैलाने का काम सौंपा गया है. आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है. About the Author दीपक वर्माDeputy News Editor दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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