देवघर. सनातन धर्म में साल भर में चार नवरात्रि आती हैं, लेकिन आषाढ़ और माघ महीने की गुप्त नवरात्रि का महत्व सबसे अलग माना जाता है. यह नवरात्रि मुख्य रूप से मां आदिशक्ति की आराधना, साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए जानी जाती है. सामान्य नवरात्रि की तरह इसमें अधिक सार्वजनिक आयोजन देखने को नहीं मिलते, लेकिन देवी उपासना करने वाले साधकों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान पूरी श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ की गई पूजा कई गुना अधिक फल देने वाली मानी जाती है.
इस बार गुप्त नवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह इसलिए भी देखा जा रहा है, क्योंकि ज्योतिषीय गणना के अनुसार एक दुर्लभ शुभ योग बन रहा है. ऐसे में किस शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना, क्या रहेगी पूजा विधि, जानते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य से.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए बताया कि इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई से हो रही है. जो श्रद्धालु अपने घर में कलश स्थापना करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह 5 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 30 मिनट तक अमृतकाल और पुष्य नक्षत्र रहेगा, जो शुभ माना जाता है. उन्होंने बताया कि इसी अवधि में कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान करना उत्तम माना गया है.
ऐसे करें अपने घर में कलश स्थापना
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि आप भी गुप्त नवरात्रि के दौरान अपने घर में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर सकते हैं. पूजा के समय सबसे पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करनी चाहिए. गंगाजल का छिड़काव जरूर करें. इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर माता की दस महाविद्याओं का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें.
मिट्टी या तांबे के कलश में साफ जल भरकर आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें और विधि-विधान से मां का आवाहन करें. कलश स्थापना के बाद अखंड दीप जलाना, दुर्गा सप्तशती का पाठ करना और नियमित रूप से माता की आरती करना भी बेहद शुभ माना गया है.
पूरे नौ दिनों तक सात्विक भोजन करें
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन करना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखकर मां दुर्गा की आराधना करनी चाहिए. हर दिन फूल, फल और भोग अर्पित करने के साथ माता के मंत्रों का जाप करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है. उन्होंने कहा कि पूजा केवल परंपरा निभाने के लिए नहीं, बल्कि पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करनी चाहिए. जब पूजा में सच्ची आस्था और समर्पण जुड़ता है, तभी उसका आध्यात्मिक महत्व बढ़ जाता है.
अष्टमी तिथि में कुंवारी कन्या पूजन करें
पंडित नंद किशोर मुदगल ने आगे बताया कि इस बार 21 जुलाई को महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा. इस दिन कुंवारी कन्याओं का पूजन विशेष रूप से शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार कन्या पूजन के बाद उन्हें भोजन कराना और अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा देना मां दुर्गा को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है.
उन्होंने कहा कि गुप्त नवरात्रि केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक साधना का भी पर्व है. इसलिए जो भी श्रद्धालु पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और विश्वास के साथ इस दौरान मां की उपासना करेंगे, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होने की धार्मिक मान्यता है.