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5 साल में ‘लू’ लगने से 3712 मौतें, बिहार-असम सहित 21 राज्यों...

होमताजा खबरदेश 5 साल में ‘लू’ लगने से 3712 मौतें, 21 राज्यों में हीटवेव से मचेगा हाहाकार Last Updated:April 29, 2026, 02:09 IST एनएचसी ने हीटवेव के भारी खतरे पर अपना कड़ा अलर्ट जारी किया है. लू की बढ़ती इंटेंसिटी से गरीब और बेघर लोग बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं. आउटडोर वर्कर के पास गर्मी से बचने के लिए कोई अच्छा शेल्टर नहीं होता है. बुजुर्ग और छोटे बच्चे इस खतरनाक गर्मी के प्रति बहुत ज्यादा सेंसिटिव होते हैं. ख़बरें फटाफट एनएचसी ने लू को लेकर 21 राज्यों के चीफ सेक्रेटरी को लेटर लिखा है. नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) ने दिल्ली सहित 21 राज्य सरकारों को लू के बढ़ते खतरे से संवेदनशील आबादी की रक्षा के लिए सक्रिय उपाय करने और राहत प्रयासों को लागू करने का निर्देश दिया है. आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सरकारों को निर्देश जारी किया गया है. संबंधित राज्यों और दिल्ली के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्रों में एनएचसी ने भीषण गर्मी के प्रभाव को कम करने और जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए उपायों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया. एनएचसी ने कहा कि लू की बढ़ती आवृत्ति, अवधि और तीव्रता से हाशिए पर रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विशेष रूप से बाहरी कामगार और बेघर लोग असमान रूप से प्रभावित होते हैं, जिनके पास अक्सर पर्याप्त आश्रय और संसाधन नहीं होते हैं. बुजुर्ग, बच्चे, शिशु और नवजात शिशु अत्यधिक तापमान के लंबे समय तक संपर्क में रहने से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य परिणामों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं. एनएचसी ने यह भी कहा कि लू के कारण आजीविका का नुकसान हो सकता है और आग से संबंधित घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए एनएचसी ने कहा कि 2019 से 2023 के बीच पूरे भारत में लू या लू लगने से 3,712 मौतें दर्ज की गईं. इसी कारण सरकारों से आग्रह है कि वे अपनी मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) या राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार राहत उपायों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करें. सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय ने संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के माध्यम से जिला अधिकारियों से समेकित कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है. सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय को मानवाधिकार उल्लंघन की औपचारिक शिकायत प्राप्त किए बिना भी मीडिया रिपोर्टों, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर स्वतः संज्ञान (स्वयं) लेने का अधिकार है. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 02:06 IST Source link

झारखंड

झुलसाती गर्मी में चाहिए सुकून के पल तो घूम आएं रानी तालाब,...

Last Updated:April 28, 2026, 08:35 IST Jamshedpur Famous Pond: जमशेदपुर के पास तिरुलडीह गांव में ऐतिहासिक रानी तालाब है, जिसकी एक नहीं कई विशेषताएं हैं. यह सालभर भरा रहता है, मछली और बत्तख पालन से लोगों को आजीविका का मौका देता है, खूबसूरत इतना है कि लोग यहां सुकून के पल बिताने आते हैं. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. झारखंड का मूलभूत नारा ‘जल, जंगल, जमीन’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि इस राज्य की पहचान है. चारों ओर फैली हरियाली, घने जंगल, पहाड़ और जल स्रोत इसे प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत बनाते हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में जब शहरों की गर्मी लोगों को परेशान करती है, तब ऐसे शांत और ठंडे स्थानों की तलाश बढ़ जाती है जहां कुछ समय सुकून से बिताया जा सके. ऐसे में जमशेदपुर के पास स्थित तिरुलडीह गांव का रानी तालाब एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में उभरकर सामने आता है. इस वजह से पड़ा नामजमशेदपुर से करीब 14 किलोमीटर दूर बड़ा तालसा पंचायत में स्थित यह रानी तालाब प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत उदाहरण है. इस तालाब का नाम ‘रानी तालाब’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसका निर्माण घाटशिला की रानी के समय में कराया गया था. वर्षों पुराना यह तालाब आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान और प्राकृतिक आकर्षण को संजोए हुए है. आजीविका का भी साधनइस तालाब की सबसे खास बात यह है कि जहां आसपास के अधिकांश तालाब गर्मी के दिनों में सूख जाते हैं, वहीं रानी तालाब सालभर पानी से भरा रहता है. यही कारण है कि यह न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. गांव के लोग इस तालाब का उपयोग बत्तख पालन और मछली पालन के लिए भी करते हैं, जिससे उनकी आजीविका भी जुड़ी हुई है. गांव के निवासी कानू मुर्मू बताते हैं कि रानी तालाब का पानी बहुत ही पवित्र माना जाता है. यहां के लोग किसी भी शुभ कार्य, शादी या त्योहार की शुरुआत इसी तालाब के पानी से करते हैं. इस आस्था और परंपरा ने इस स्थान को और भी खास बना दिया है. पर्यटन के लिए बेहद खासपर्यटन की दृष्टि से देखा जाए तो रानी तालाब का दृश्य खासकर शाम के समय बेहद मनमोहक हो जाता है. सूरज के ढलते ही आसमान के रंग और तालाब का पानी मिलकर ऐसा दृश्य बनाते हैं, जो किसी विदेशी लोकेशन से कम नहीं लगता. चारों ओर फैले पहाड़, हरी-भरी घास और शांत वातावरण लोगों को प्रकृति के करीब ले जाता है. यहां बैठकर लोग सुकून के पल बिताते हैं और खूबसूरत सनसेट का आनंद लेते हैं. नेचर की असली खूबसूरतीअगर आप भी इस गर्मी में किसी शांत, ठंडी और प्राकृतिक जगह की तलाश में हैं, तो तिरुलडीह का रानी तालाब आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह जगह न सिर्फ आपकी थकान दूर करेगी, बल्कि आपको प्रकृति की असली खूबसूरती का एहसास भी कराएगी. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 08:35 IST Source link

व्यापार

सरसों के डंठल को फेंकना छोड़िए, जानिए इससे कैसे होगी अच्छी कमाई,...

Last Updated:January 19, 2026, 16:30 IST अगर आप गांव में रहते हैं और कुछ चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं, तो यह आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं धान की भूसी से तेल निकालने जैसी कहावत की. इस समय सरसों की बुवाई हो चुकी है और कुछ ही दिनों में सरसों तैयार हो जाएगी. ऐसे में कई किसान सरसों तो रख लेते हैं, लेकिन उसका डंठल या तो जला देते हैं या फेंक देते हैं, जबकि यही डंठल उनकी कमाई का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है. सुल्तानपुर समेत अवध क्षेत्र में सरसों के डंठल को पिंजी कहा जाता है. यह सरसों के पौधे का सूखा हुआ भाग होता है, जो सरसों अलग करने के बाद बचता है. ऐसे में इसे ज्यादातर किसान कूड़ा समझकर फेंक देते हैं, जबकि यही उनकी कमाई का जरिया बन सकता है और अच्छा मुनाफा दिला सकता है. पिंजी को ही सरसों का डंडा भी कहा जाता है, जो कई तरीकों से कमाई में फायदा देता है. किसान अनिल कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि अगर सरसों के डंठल को व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इससे झाड़ू बनाकर बाजार में बेचा जा सकता है. हालांकि यह झाड़ू अस्थायी होती है, लेकिन बड़े क्षेत्रफल की सफाई के लिए यह काफी उपयोगी मानी जाती है. इसे बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति झाड़ू के हिसाब से बेचा जा सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में भूसा, उपले रखने और जानवरों को ठंड से बचाने के लिए टटिया का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में सरसों के डंठल और अरहर के डंठल के मिश्रण से टटिया बनाकर इसे बाजार में बेचा जा सकता है. इसकी कीमत करीब 1000 रुपये प्रति टटिया हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google सरसों के डंठल को ईंट भट्ठों पर सप्लाई कर इससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. दरअसल, सरसों का डंठल ईंट भट्ठों में ईंट पकाने के काम आता है, क्योंकि कोयले को लपक देने के लिए यह ज्यादा कारगर होता है. बशर्ते इसकी मड़ाई की गई हो और इसे टुकड़ों में काटा गया हो. मड़ाई के बाद इसकी कीमत करीब 800 रुपये प्रति कुंतल तक हो सकती है. अगर आप भी सरसों के डंठल का सही इस्तेमाल नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको बताते हैं कि इससे जैविक खाद बनाई जा सकती है. जैविक खाद बनाने के लिए सबसे पहले आपको एक बड़ा और कम गहराई वाला गड्ढा खोदना होगा. उसके बाद उस गड्ढे में सरसों के डंठल को डालें और इसे लगभग 3 इंच मिट्टी से ढक दें. इसके बाद हल्का पानी डाल दें. 2 से 3 महीने बाद जब आप गड्ढा खोदेंगे, तो सरसों का डंठल सड़कर जैविक खाद के रूप में तैयार हो चुका होगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 19, 2026, 13:41 IST Source link

ताज़ा खबर

Vrishchik Rashifal: आज झूठ बोलना पड़ेगा भारी! वृश्चिक राशि के लिए आज...

Last Updated:April 29, 2026, 00:03 IST Aaj ka Vrishchik Rashifal 29 April 2026: वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन नैतिक परीक्षा का है. ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे के अनुसार आज का मूल मंत्र स्पष्ट संवाद है. जानें क्यों आज एक छोटा सा झूठ आपके करियर और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है. ख़बरें फटाफट सीतामढ़ी: आज 29 अप्रैल 2026 का दिन वृश्चिक राशि के जातकों के लिए एक नैतिक और आध्यात्मिक अग्निपरीक्षा के समान है. ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे के अनुसार आज के ग्रहों की स्थिति स्पष्ट संकेत दे रही है कि सच्चाई ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है. सुबह के समय आपके सामने ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं. जहां आपको लगेगा कि एक छोटा सा झूठ बोलने से काम आसान हो जाएगा या आप किसी अप्रिय स्थिति से बच जाएंगे. लेकिन सावधानी बरतें, क्योंकि आज बोला गया एक छोटा सा झूठ भी भविष्य में आपके लिए बड़े आर्थिक या सामाजिक नुकसान का कारण बन सकता है. आज का मूल मंत्र सीधा और स्पष्ट संवादकार्यक्षेत्र और करियर के लिहाज से आज का दिन पूरी तरह से पारदर्शिता की मांग करता है. यदि आप नौकरी पेशा हैं या व्यवसाय में हैं तो आज किसी भी कार्य को गोपनीय रखने या शॉर्टकट अपनाने से बचें. सितारों की चाल बताती है कि आज छुपाकर किया गया कोई भी काम या अधूरी जानकारी बाद में अधिकारियों या भागीदारों के सामने आ सकती है. जिससे आपकी साख पर आंच आ सकती है. आज अपने काम में ईमानदारी बरतें और जो भी स्थिति हो उसे वरिष्ठों के सामने स्पष्ट रखें. यही स्पष्टता आपके भविष्य के मार्ग प्रशस्त करेगी. आर्थिक मामलों और निवेश आज का दिन बेहद सतर्क रहने का है. ज्योतिषाचार्य की सलाह है कि आज अपने लेन-देन और हिसाब-किताब को बिल्कुल साफ रखें. धन के मामले में थोड़ी सी भी लापरवाही या दस्तावेजों को नजरअंदाज करना आपको भारी वित्तीय चपत लगा सकता है. निजी रिश्तों की बात करें तो आज पार्टनर के साथ पूर्ण ईमानदारी बरतने से आपके संबंधों में नई ऊर्जा और मजबूती आएगी. आज अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय खुलकर व्यक्त करें. इससे न केवल आपसी विश्वास बढ़ेगा बल्कि पुरानी गलत फहमियां भी जड़ से समाप्त होंगी. जानिए लकी नंबर और कलरआज के दिन को ऊर्जावान और सकारात्मक बनाने के लिए वृश्चिक राशि वालों का लकी नंबर 9 और लकी कलर गहरा लाल है. मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए एक विशेष उपाय सुझाया गया है. आज एक दीपक जलाएं और लगभग 30 सेकंड तक उसकी लौ को एकटक देखें. यह ‘त्राटक’ जैसी सूक्ष्म क्रिया आपके विचलित मन को स्थिर करेगी. आपको सही निर्णय लेने की आंतरिक शक्ति प्रदान करेगी. अंततः आज का दिन वही लोग जीतेंगे जो हर परिस्थिति में सच का साथ देने का साहस दिखाएंगे. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sitamarhi,Bihar First Published : April 29, 2026, 00:03 IST Source link

झारखंड

तिलापिया मछली के लिए बौराए रहते हैं कोडरमा वाले, कई किमी से...

Last Updated:April 28, 2026, 09:22 IST Koderma Tilapiya Fish On High Demand: कोडरमा के तिलैया डैम पर खास तिलापिया मछली मिलती है. स्वाद के शौकीन इसे इतना पसंद करते हैं कि कई किमी दूर से खरीदने आते हैं और घंटो इंतजार करते हैं. इसकी कीमत 160 रुपये किलो होती है. जानते हैं इसमें ऐसा क्या खास है. ख़बरें फटाफट कोडरमा. कोडरमा का तिलैया डैम प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ताजा मछलियों के लिए भी लोगों के बीच खास पहचान रखता है. यहां मिलने वाली विभिन्न प्रजातियों की मछलियां दूर-दराज से आने वाले लोगों को आकर्षित करती हैं. लेकिन इन सबमें तिलापिया मछली की मांग सबसे अधिक देखने को मिल रही है. इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इसे खरीदने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और फिर भी मछली मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती. घंटों इंतजार करते हैं लोग, बड़े कांटे से खाने में काफी सहूलियततिलैया डैम में कोडरमा जिले के अलावा हजारीबाग, रांची समेत कई अन्य इलाकों से लोग ताजा मछली खरीदने पहुंचते हैं. मछुआरे जैसे ही डैम से मछलियां निकालकर किनारे स्टॉल पर लाते हैं. पहले से इंतजार कर रहे खरीदारों की भीड़ टूट पड़ती है और कुछ ही पलों में सारी तिलापिया मछलियां बिक जाती हैं. करीब 20 किलोमीटर दूर झुमरी तिलैया शहर से मछली खरीदने पहुंचे मोहम्मद शाहबाज ने बताया कि तिलापिया मछली की सबसे बड़ी खासियत इसके बड़े कांटे हैं. उन्होंने कहा कि ‘दूसरी मछलियों में छोटे-छोटे कांटे होने के कारण अक्सर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को खाने में परेशानी होती है. कई बार कांटे गले या दांतों के बीच में फंसने से दिक्कत भी हो जाती है. लेकिन तिलापिया में बड़े कांटे होने से इसे खाने में काफी सहूलियत होती है.’ स्वाद के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूरवे आगे कहते हैं कि ‘इस मछली की मांग लगातार बढ़ रही है. बच्चे भी इसे आसानी से खा लेते हैं. स्वाद के मामले में भी तिलापिया किसी से कम नहीं है. इसे अन्य मछलियों की तरह ही पकाया जाता है और इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है.’ मोहम्मद शाहबाज ने बताया कि इस मछली को खरीदने के लिए उन्हें करीब चार घंटे इंतजार करना पड़ा. यह मछली स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर मानी जाती है. इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. यही कारण है कि लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि सेहत के लिहाज से भी पसंद कर रहे हैं. तिलैया डैम के समीप ताजा तिलापिया मछली फिलहाल 160 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 09:22 IST Source link

व्यापार

गांव की मिट्टी में छुपा है पैसा, 1 लाख में शुरू करें...

Last Updated:January 22, 2026, 11:37 IST आज के समय में गांव सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यहां से भी अच्छी कमाई के नए रास्ते निकल रहे हैं. कम पूंजी में शुरू होने वाले छोटे-छोटे बिजनेस गांव के लोगों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं. दूध, खेती, पैकिंग और घरेलू प्रोडक्ट जैसे काम अब घर बैठे शुरू किए जा सकते हैं. सही प्लानिंग और मेहनत से यही छोटे काम आगे चलकर मजबूत कमाई का जरिया बन जाते हैं. गांव में डेयरी शुरू करना सबसे आसान और भरोसेमंद काम है. इसकी शुरुआत आप 2 से 4 गाय या भैंस से कर सकते हैं. सुबह-शाम दूध बेचकर रोज की कमाई होती है. दूध के साथ दही, घी और पनीर भी बनाया जा सकता है. यह बिजनेस सालभर चलता है. आसपास के कस्बों में सप्लाई करने से मुनाफा और बढ़ जाता है. बकरी पालन कम खर्च में शुरू होने वाला बिजनेस है. 10 से 15 बकरियों से शुरुआत की जा सकती है. बकरी का दूध, बच्चे और मीट तीनों बिकते हैं. इसे किसी भी मौसम में शुरू किया जा सकता है. चारे की व्यवस्था गांव में आसानी से हो जाती है. मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए इस काम में कम समय में अच्छा रिटर्न मिलने लगता है. इस टाइम मुर्गी पालन गांव में तेजी से चलने वाला बिजनेस है. इसमें 200 से 500 मुर्गियों से शुरुआत की जा सकती है. इसके अंडे और मीट दोनों की अच्छी डिमांड रहती है और 30 से 40 दिन में ही कमाई शुरू हो जाती है. सही देखभाल और साफ-सफाई से नुकसान कम होता है. शहरों में सप्लाई करने से मुनाफा दोगुना हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google गांव में आटा चक्की की जरूरत हमेशा रहती है. इसके लिए 40 से 60 हजार रुपये में मशीन आ जाती है और आप चाहें तो गेहूं पिसाई के साथ मसाले पीसने का काम भी जोड़ सकते हैं. रोजाना 500 से 1500 रुपये तक की कमाई हो सकती है. यह काम पूरे साल चलता है और इसमें ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती. गांव में अचार, जैम और जूस बनाने का काम घर से ही आसानी से शुरू किया जा सकता है. इसमें लोकल फल और सब्जियों का इस्तेमाल होता है, जिससे लागत कम रहती है. शुरुआत में थोड़ी मात्रा बनाकर आसपास के लोगों और बाजार में बेच सकते हैं. अगर स्वाद अच्छा रहा तो लोग खुद दोबारा खरीदने लगते हैं. त्योहारों और मेलों के समय इसकी बिक्री ज्यादा होती है. धीरे-धीरे पैकिंग सुधारकर शहरों तक भी सप्लाई की जा सकती है. गांव में बीज, खाद और कीटनाशक की दुकान हमेशा चलती है. किसान सीधे जरूरत के हिसाब से खरीदारी करते हैं. थोड़ी जानकारी और सही कंपनी से माल लेकर यह काम शुरू किया जा सकता है. खेती के मौसम में बिक्री ज्यादा होती है. भरोसा बनने के बाद ग्राहक खुद आते हैं और कमाई लगातार होती रहती है. अगर गांव में फल और सब्जी की पैदावार होती है तो उनकी पैकिंग का काम बढ़िया कमाई का जरिया बन सकता है. टमाटर, आलू, नींबू या हरी सब्जियों को अच्छे से धोकर, छांटकर और साफ पैक करके बाजार में बेचा जा सकता है. इसकी शुरुआत बहुत कम खर्च में हो जाती है. जब माल साफ और सही पैक होता है तो ग्राहक भरोसा करते हैं. यही भरोसा शहरों में भी अच्छा दाम दिलाता है. गांव में तुलसी, नीम और आंवला जैसे पौधों की खेती करना मुनाफे वाला काम है. इन पौधों को ज्यादा पानी या खास देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती है, इसलिए खर्च भी कम आता है. एक बार खेत तैयार हो जाए तो सालों तक इनसे फायदा मिलता रहता है. आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली कंपनियां इन्हें अच्छे दाम पर खरीदती हैं. यही वजह है कि यह खेती आज के साथ-साथ आने वाले समय के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 22, 2026, 11:37 IST Source link

व्यापार

30 रुपये की साड़ी, लाखों का बिजनेस! कमाल है छत्तीसगढ़ के विनय...

Last Updated:February 04, 2026, 12:02 IST Saree Business Idia : रायपुर के पंडरी कपड़ा मार्केट में शादी सीजन के चलते साड़ियों की जबरदस्त मांग बढ़ गई है. यहां 30-35 रुपये से शुरू होने वाली साड़ियां अच्छी क्वालिटी में उपलब्ध हैं. होलसेल बाजार होने के कारण छोटे व्यापारी यहां से सस्ती साड़ियां खरीदकर अपने क्षेत्रों में बेचकर बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. बाजार सुबह 9:30 से रात 10 बजे तक खुला रहता है. Saree Business Idia : छत्तीसगढ़ में शादी का सीजन एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुका है और इसके साथ ही बाजारों में रौनक लौट आई है. रायपुर के पंडरी इलाके में स्थित ऐतिहासिक कपड़ा मार्केट इन दिनों ग्राहकों की पहली पसंद बना हुआ है. यहां साड़ियां मात्र 30 से 35 रुपये की शुरुआती कीमत में उपलब्ध हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में कहीं और इतनी सस्ती दर पर नहीं मिलतीं. कम दाम में भी अच्छी क्वालिटी की साड़ियांपंडरी कपड़ा मार्केट के साड़ी व्यापारी विनय जैन ने बताया कि कम कीमत का मतलब यह नहीं है कि क्वालिटी से समझौता किया गया है. यहां कम दाम में भी अच्छी क्वालिटी की साड़ियां मिल जाती हैं. जैसे-जैसे ग्राहक अधिक कीमत वाली साड़ियों की ओर बढ़ते हैं, उन्हें और बेहतर डिजाइन व कपड़े की क्वालिटी मिलती है. यही वजह है कि इस बाजार में हर महीने साड़ियों की लगातार मांग बनी रहती है. विनय जैन के अनुसार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में साड़ी का विशेष महत्व है. यहां की महिलाएं पारंपरिक रूप से साड़ी पहनना पसंद करती हैं, विशेषकर विवाह, पूजा-पाठ और सामाजिक आयोजनों में. शादी के सीजन की शुरुआत होते ही बाजार में ग्राहकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो जाती है. पसंद के अनुसार चयन करने में आसानीउन्होंने बताया कि यहां उपलब्ध साड़ियां 8 से 10 रंगों में आती हैं, जिससे ग्राहकों को अपनी पसंद के अनुसार चयन करने में आसानी होती है. पंडरी मार्केट की खासियत यह है कि यहां अधिकतर दुकानें थोक विक्रेता (होलसेल) हैं. छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापारी यहां से कम कीमत में साड़ियां खरीदकर अपने इलाकों में खुदरा बिक्री करते हैं. जो लोग साड़ियों का व्यापार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए पंडरी कपड़ा मार्केट सबसे उपयुक्त विकल्प माना जाता है. कम पूंजी में व्यापार शुरू करने की सुविधा यहां मौजूद है. दुकानें सुबह साढ़े 9 बजे से रात 10 बजे तक खुली रहती हैं, जिससे ग्राहकों और व्यापारियों दोनों को पर्याप्त समय मिलता है. विनय जैन ने बताया कि इच्छुक व्यापारी उनसे मोबाइल नंबर 9981299492 पर संपर्क कर सकते हैं. शादी सीजन के चलते इन दिनों बाजार में भारी भीड़ देखी जा रही है और साड़ियों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. पंडरी कपड़ा मार्केट न केवल रायपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में साड़ी व्यापार का प्रमुख केंद्र बन चुका है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Raipur,Raipur,Chhattisgarh First Published : February 04, 2026, 12:02 IST Source link

व्यापार

अब वेंडरों को नहीं जाना पड़ेगा साहूकार के पास, छत्तीसगढ़ सरकार दे...

X अब वेंडरों को नहीं जाना पड़ेगा साहूकार के पास, छत्तीसगढ़ सरकार दे रही पैसा   Street vendors loan scheme : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पीएम स्वनिधि योजना से जुड़े स्ट्रीट वेंडरों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब पात्र पथ विक्रेताओं को बिना ब्याज ₹30,000 तक की रुपे क्रेडिट कार्ड सुविधा मिलेगी, जिससे छोटे कारोबार को बढ़ाने और आपात जरूरतों में मदद मिलेगी. नगर निगम ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. दूसरे चरण का ऋण चुका चुके हितग्राहियों को पहले ₹10,000 की लिमिट मिलेगी, जो समय पर भुगतान करने पर ₹30,000 तक बढ़ाई जाएगी. 45 दिनों में भुगतान करने पर कोई ब्याज नहीं लगेगा, जिससे वेंडरों की आर्थिक मजबूती बढ़ेगी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

झारखंड

11 गुफाएं, 9 मंदिर…श्रद्धा-पर्यटन का केंद्र; देवघर की ये पहाड़ी देखने देश...

Last Updated:April 28, 2026, 09:41 IST Best Religious Place To Visit In Deoghar: देवघर में यूं तो घूमने की कई जगहें हैं पर तपोवन पहाड़ की बात ही अलग है. ये स्थान लोगों के लिए पूज्यनीय है. यहां संकरी गुफाएं और मंदिर हैं. साथ ही ट्रैकिंग का अलग ही रोमांच मिलता है. ख़बरें फटाफट देवघर. झारखंड के देवघर में स्थित तपोवन पहाड़ हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यह स्थान ऊंचे पहाड़ पर बसा हुआ है और अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ धार्मिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है. तपोवन को ’11 गुफाओं और 09 मंदिरों की पहाड़ी’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां एक ही स्थान पर कई प्राचीन गुफाएं और मंदिर मौजूद हैं. दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने और घूमने के लिए आते हैं. शांत वातावरण, ठंडी हवा और चारों तरफ फैली हरियाली इस जगह को और भी खास बना देती है. बेहद रहस्यमयी हैं यहां की गुफाएंतपोवन की गुफाएं यहां की सबसे बड़ी खासियत हैं. बाहर से देखने पर ये गुफाएं बेहद संकरी और छोटी लगती हैं, जिससे लगता है कि शायद इनमें प्रवेश करना आसान नहीं होगा. लेकिन जैसे ही लोग अंदर जाते हैं, उन्हें महसूस होता है कि इन गुफाओं में आसानी से जाया जा सकता है. अंदर का माहौल बिल्कुल अलग दुनिया जैसा लगता है, जहां शांति और सुकून का अनुभव होता है. यही वजह है कि पुराने समय में यह स्थान ऋषि-मुनियों और तपस्वियों की साधना का केंद्र रहा है. मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि ने भी यहां तप किया था, वहीं श्री बालानंद ब्रह्मचारी ने भी इसी स्थान पर साधना कर सिद्धि प्राप्त की थी. क्या कहते हैं स्थानीय लोगयहां के स्थानीय निवासी अमित कुमार बताते हैं कि यहां स्थित मंदिरों में भगवान शिव की विशेष पूजा होती है. पहाड़ पर बना तपो नाथ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के बीच खास महत्व रखता है, जहां लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं. इसके अलावा गुफाओं के भीतर हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है. यहां की एक और अद्भुत चीज है पहाड़ में बनी एक बड़ी दरार, जिसके बीच हनुमान जी का मंदिर स्थित है. इस दरार को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है कि जब रावण यहां तप करने आया था, तब देवताओं के कहने पर रावण का तप भंग करने के लिए हनुमान जी ने अपने गदा के प्रहार से पहाड़ को तोड़ दिया, जिससे यह दरार बन गई. दो पत्थरों के दरारों के बीच है हनुमान मंदिरतपोवन के नीचे एक पवित्र जल कुंड भी मौजूद है, जिसे सीता कुंड कहा जाता है. मान्यता है कि माता सीता यहां स्नान करती थीं, इसलिए यह स्थान भी धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके साथ ही यह पूरा क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बेहद सुंदर है, जहां पहाड़, गुफाएं और हरियाली मिलकर एक अनोखा दृश्य प्रस्तुत करते हैं. यही कारण है कि यहां न केवल श्रद्धालु, बल्कि पर्यटक भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और तपो नाथ महादेव मंदिर, हनुमान गुफा, सीता कुंड समेत कई जगहों का आनंद लेते हैं. देवघर से इतना दूर हैझारखंड के सबसे ऊंचे पर्वतों में स्थित तपोवन पहाड़ी में पवित्र जैन तीर्थ स्थल है. यहां तपोवन पर्वत के ऊपर कई प्राचीन मंदिर और गुफाएं हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में तपोवन पहाड़ियों में घूमने लायक जगहों में तपो नाथ महादेव मंदिर, हनुमान गुफा, सीता कुंड के साथ ही अन्य गुफाएं और पहाड़ियां हैं. जहां आप घूम सकते हैं. देवघर शहर से तपोवन पहाड़ की दूरी 10 किलोमीटर है. यहां पहुंचने के लिए आप देवघर से टैक्सी या ऑटो ले सकते हैं. जहां देवघर बस स्टैंड और देवघर रेलवे स्टेशन से भी तपोवन पहाड़ की दूरी 10 किलोमीटर है. इसके साथ ही नजदीकी एयरपोर्ट देवघर हवाई अड्डा रांची है. जहां से तपोवन पहाड़ की दूरी 15 किलोमीटर है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 09:41 IST Source link

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चौथी पास किसान ने बदली किस्मत, धान-गेहूं छोड़ा, उगाया जरबेरा, 4 कट्ठा...

होमताजा खबरकृषि चौथी पास किसान ने बदली किस्मत, धान-गेहूं छोड़ा उगाया जरबेरा, हो रही दनादन कमाई Last Updated:April 28, 2026, 10:28 IST Deoghar Farmer Earning Well With Gerbera: देवघर के किसान टुनटुन पंडित इस बात का बढ़िया उदाहरण हैं कि अगर थोड़ी सी ट्रेनिंग लेकर एडवांस खेती की जाए तो पारंपरिक खेती की तुलना में बढ़िया कमाई की जा सकती है. उन्होंने धान-गेंहू छोड़ जरबेरा उगाया और 4 कट्टा से सालाना 4 लाख तक की कमाई कर रहे हैं. ख़बरें फटाफट देवघर. समय के साथ खेती-किसानी का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है. पहले जहां किसान केवल पारंपरिक फसलों जैसे धान, गेहूं और सरसों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण की मदद से वे नई-नई फसलों की खेती कर रहे हैं. इस बदलाव ने किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. आज के दौर में कृषि विज्ञान केंद्र जैसे संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर किसान तकनीकी खेती अपना रहे हैं और कम जमीन में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. यह बदलाव न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधार रहा है, बल्कि उनके जीवन स्तर को भी बेहतर बना रहा है. मात्र चौथी कक्षा तक पढ़े हैं किसान टुनटुन पंडितझारखंड के देवघर जिले के देवीपुर प्रखंड के गमरडीहा गांव के रहने वाले किसान टुनटुन पंडित इसकी एक मिसाल हैं. टुनटुन पंडित ने बहुत कम पढ़ाई की है, वे केवल चौथी कक्षा तक ही पढ़े हैं. एक समय था जब वे भी पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन उस समय उनकी आमदनी इतनी कम थी कि घर चलाना भी मुश्किल हो जाता था. खेती में मेहनत बहुत लगती थी, लेकिन उसके मुकाबले आमदनी बहुत कम होती थी. ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था. सालाना होती है 04 लाख से भी ज्यादा कमाईटुनटुन पंडित ने हार नहीं मानी और अपनी स्थिति को बदलने का फैसला किया. उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लिया और नई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की. इसके बाद उन्होंने जरबेरा फूल की खेती शुरू की. यह एक ऐसी खेती है जिसमें मेहनत तो लगती है, लेकिन सही तरीके से करने पर अच्छी आमदनी भी होती है. आज टुनटुन पंडित करीब चार कट्ठा जमीन में 3500 से 4000 जरबेरा के पौधे लगाए हुए हैं. इन पौधों से उन्हें सालाना करीब 4 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है, जो उनके लिए एक बड़ी सफलता है. आसानी से बिक जाते हैं फूलदेवघर को देवों की नगरी कहा जाता है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में फूलों की काफी मांग रहती है, जिसका फायदा टुनटुन पंडित को भी मिल रहा है. उनके उगाए हुए जरबेरा फूल आसानी से बाजार में बिक जाते हैं, जिससे उन्हें लगातार अच्छी आय प्राप्त हो रही है. यही कारण है कि उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर फूलों की खेती को अपनाया और आज वे एक सफल किसान बन गए हैं. परिवार की जिम्मेदारी के साथ साथ की खेतीहालांकि, टुनटुन पंडित का जीवन इतना आसान नहीं रहा है. कुछ साल पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था, जिसके बाद उन पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई. उन्होंने न केवल खेती संभाली, बल्कि अपने बच्चों की देखभाल भी खुद ही की. वे खेत में काम करने के साथ-साथ घर पर खाना बनाकर बच्चों को खिलाते थे और उनकी पढ़ाई का भी ध्यान रखते थे. यह समय उनके लिए बहुत कठिन था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करते रहे. खेती के बदौलत बेटे को दिलाई नौकरीआज उनकी मेहनत रंग लाई है. फूलों की खेती से हुई कमाई के दम पर उन्होंने अपने बड़े बेटे को बाहर पढ़ने भेजा और उसे अच्छी शिक्षा दिलाई. यही नहीं, उनका बेटा आज रेलवे में नौकरी कर रहा है, जो टुनटुन पंडित के संघर्ष और मेहनत का सबसे बड़ा परिणाम है. उनकी कहानी यह बताती है कि अगर इंसान मेहनत और सही दिशा में प्रयास करे, तो वह किसी भी परिस्थिति को बदल सकता है. सिमित संसाधनों के बावजूद सफलता हासिल कीटुनटुन पंडित जैसे किसान आज के समाज के लिए प्रेरणा हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कम पढ़ाई और सीमित संसाधनों के बावजूद भी सफलता हासिल की जा सकती है. जरूरत है तो सिर्फ सही जानकारी, प्रशिक्षण और मेहनत की. उनकी यह सफलता कहानी न केवल अन्य किसानों को प्रेरित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि खेती में बदलाव अपनाकर बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 10:28 IST Source link

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