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बकरियों का दूध बढ़ाने के लिए खिलाएं यह ‘सुपर फूड’, 7 अनाजों...

Last Updated:May 06, 2026, 10:08 IST पलामू की जगरानी देवी ने बकरियों के लिए खास देशी चारा तैयार किया है. यह चारा मक्का और गेहूं समेत सात पोषक तत्वों से बना है. इसके सेवन से बकरियों का दूध उत्पादन बढ़ता है. यह मिश्रण गर्मी में पशुओं को तंदुरुस्त रखता है. कमजोर बकरियों के लिए यह सुपर फूड वरदान साबित हो रहा है. ख़बरें फटाफट पटनाः गर्मी का मौसम जहां इंसानों के लिए चुनौती लेकर आता है, वहीं पशुओं के लिए भी यह समय काफी कठिन होता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण पशुओं की सेहत पर सीधा असर पड़ता है. खासकर बकरियों में कमजोरी, भूख में कमी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. ऐसे समय में उनकी सही देखरेख और संतुलित आहार बेहद जरूरी हो जाता है. दरअसल, पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड की रहने वाली जगरानी कासी ने एक खास देशी चारा तैयार किया है, जो बकरियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है. यह चारा न केवल बकरियों को तंदुरुस्त बनाता है, बल्कि उनके दूध उत्पादन को बढ़ाने में भी मदद करता है. स्थानीय स्तर पर तैयार इस चारे की खासियत यह है कि इसमें सात प्रकार के पौष्टिक तत्वों का संतुलित मिश्रण शामिल किया जाता है. 7 प्रकार के अनाज से तैयार हुआ है चारारामगढ़ की रहने वाली जगरानी कासी ने लोकल18 को बताया इस चारे को बनाने के लिए मक्का, गेहूं, मिनरल मिक्सचर, नमक, दाल की भूसी और सरसों की खली समेत 7 प्रकार के अनाज का इस्तेमाल किया जाता है. इसे तय मात्रा में मिलाकर तैयार किया जाता है. एक बैच बनाने के लिए 1 किलो मक्का, 250 ग्राम गेहूं, 250 ग्राम दाल की भूसी, आधा किलो मिनरल मिक्सचर, 250 ग्राम नमक और 1 किलो सरसों की खली ली जाती है. सबसे पहले मक्का और गेहूं को दरदरा पीसा जाता है, इसके बाद सभी सामग्री को अच्छे से मिलाकर चारा तैयार किया जाता है. इस चारे का नियमित उपयोग बकरियों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालता है. जिन बकरियों का दूध बंद हो गया है या जो दूध नहीं दे रही हैं, उन्हें यह चारा नियमित रूप से खिलाने पर दूध उत्पादन शुरू हो सकता है. वहीं जो बकरियां पहले से दूध दे रही हैं, उनमें भी दूध की मात्रा में बढ़ोतरी देखी जाती है. बकरियों को रोजाना इतनी मात्रा में देंउन्होंने बताया कि इस चारे के खुराक की मात्रा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है. स्वस्थ बकरियों को रोजाना 100 ग्राम तक यह चारा उनके सामान्य भोजन में मिलाकर दिया जा सकता है. वहीं कमजोर बकरियों को 50 ग्राम तक चारा देना पर्याप्त होता है. इसे चावल की भूसी, गेहूं की भूसी या माड़ में मिलाकर खिलाना अधिक प्रभावी माना जाता है. गांव स्तर पर तैयार यह सस्ता और असरदार चारा न केवल पशुपालकों के खर्च को कम करता है, बल्कि बकरियों की उत्पादकता बढ़ाकर उनकी आय में भी इजाफा करता है. उन्होंने कहा कि इसे 45 रुपए किलो वो उपलब्ध कराती है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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तेज रफ्तार हाइवा की टक्कर से महिला की मौत:धनबाद में शादी में...

धनबाद के झरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत कतरास मोड़, सिंह नगर के पास सड़क हादसे में महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके पति और पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार बलियापुर के निपानिया निवासी शत्रुघ्न महतो अपनी पत्नी ममता देवी और पुत्र संतोष महतो के साथ महुदा में एक शादी समारोह में शामिल होने बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान कोयला लदे तेज रफ्तार हाइवा ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ममता देवी ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि शत्रुघ्न महतो और संतोष महतो सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों ने तत्काल उन्हें संभाला और पुलिस को सूचना दी। हादसे के बाद सड़क जाम, लोगों में आक्रोश घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और मृतका के शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। लोगों का कहना था कि इस मार्ग पर कोयला लदे हाइवा वाहनों की तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। आक्रोशित लोगों ने हाइवा चालक की गिरफ्तारी और इस मार्ग पर भारी वाहनों के संचालन पर नियंत्रण की मांग की। स्थिति को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद लोगों को समझाकर जाम हटवाया गया। इस दौरान यातायात काफी देर तक बाधित रहा। पुलिस ने घायलों को पहुंचाया अस्पताल सूचना मिलते ही झरिया थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। वहीं मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हादसे के बाद हाइवा चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि धनसार और वास्तकोला क्षेत्र से कोयला लदे हाइवा दिन-रात केंदुआ रोड से बीएनआर साइडिंग तक दौड़ते रहते हैं, जिससे इस सड़क पर हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई और यातायात नियंत्रण की मांग की है। Source link

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नाली के गंदे पानी और दुर्गंध से लोग त्रस्त, उपायुक्त से समाधान...

भास्कर न्यूज | सरायकेला जिले के कांड्रा स्थित वीडियो कॉलोनी में गंदे नालों और बजबजाती नालियों से निकल रही दुर्गंध के कारण स्थानीय लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। स्थिति यह है कि नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहते हुए घरों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के कारण पहले 10 फीट चौड़ी सड़क अब सिमटकर मात्र 3 फीट रह गई है। इसके चलते लोगों के घरों और बाथरूम का गंदा पानी सीधे सड़क पर बह रहा है और जलजमाव की स्थिति बनी रहती है। हाल ही में हुई हल्की बारिश ने समस्या को और गंभीर बना दिया है, जिससे पूरे इलाके में पानी जमा हो गया और लोगों की दिनचर्या बाधित हो गई। लोगों का कहना है कि आवागमन में भारी कठिनाई हो रही है, जिसका असर स्कूली बच्चों और कामकाजी लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आपातकालीन परिस्थितियों में एंबुलेंस जैसी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। गंदे पानी के जमाव और नालियों की बदहाल स्थिति के कारण संक्रमण और बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। समस्या के समाधान की मांग को लेकर कॉलोनीवासियों ने उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा है और जल्द कार्रवाई की मांग की है। Source link

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सावधान! मई-जून में चूके तो बरसात में पशुओं पर टूटेगा बीमारी का...

होमताजा खबरकृषि मई-जून में चूके तो बरसात में पशुओं पर टूटेगा बीमारी का कहर, अभी लगवाएं ये टीका Last Updated:May 06, 2026, 09:00 IST बरसात से पहले पशुओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है. मई-जून में वैक्सीन लगवाने से मुंहपका, खुरपका और गलघोंटू जैसी बीमारियों से बचाव होता है. बकरियों को पीपीआर का टीका जरूर लगवाएं. समय पर सावधानी बरतने से पशु स्वस्थ रहेंगे. इससे दूध उत्पादन में कमी नहीं आएगी और पशुपालक बड़े नुकसान से बचेंगे. ख़बरें फटाफट देवघर: मई–जून का महीना पशुपालकों, खासकर दुधारू पशु और बकरी पालन करने वालों के लिए बेहद अहम होता है. यह वह समय है जब बरसात आने से पहले पशुओं की सेहत को मजबूत बनाने की तैयारी करनी चाहिए. क्योंकि जैसे ही बारिश का मौसम शुरू होता है, नमी और गंदगी के कारण संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. ऐसे में अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो पशु गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं, जिससे दूध उत्पादन घटता है और कई बार पशु की जान भी चली जाती है. यही वजह है कि विशेषज्ञ मई–जून में टीकाकरण को सबसे जरूरी कदम मानते हैं. क्या कहते हैं पशु चिकित्सक?देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने लोकल 18 को बताया कि आज लगभग हर बड़ी बीमारी के लिए प्रभावी टीके उपलब्ध हैं, जो पशुओं को सुरक्षित रखने का सबसे आसान और सस्ता उपाय है.इनमें सबसे खतरनाक बीमारी मुंहपका-खुरपका (FMD) है, जिसे गांवों में “खोरया” भी कहा जाता है. यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है और एक पशु से पूरे झुंड में पहुंच जाती है. इसमें पशु के मुंह और खुर में छाले हो जाते हैं, बुखार आता है, और पशु खाना-पीना छोड़ देता है. इससे बचाव के लिए FMD का टीका हर 6 महीने में लगवाना जरूरी होता है, खासकर बरसात से पहले मई–जून में. गलघोटू बीमारी हो सकती जानलेवा इसके अलावा गलघोंटू (HS) नामक बीमारी भी बेहद जानलेवा मानी जाती है. इसमें पशु को तेज बुखार आता है, सांस लेने में तकलीफ होती है और गले में सूजन आ जाती है. कई बार पशु हांफने लगता है और अचानक मौत भी हो सकती है.इस बीमारी से बचाव के लिए HS का टीका साल में एक बार जरूर लगवाना चाहिए, और इसका सही समय भी मई–जून ही होता है ताकि बरसात में सुरक्षा बनी रहे. बकरियों मे फैलती है पीपीआर बकरी पालन करने वालों के लिए भी कुछ खास बीमारियां खतरा बनती हैं, जैसे पीपीआर इस बीमारी में बकरियों को बुखार, दस्त, नाक और आंख से पानी आना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.यह बीमारी तेजी से फैलती है और मृत्यु दर भी अधिक होती है. इससे बचाव के लिए PPR का टीका बहुत जरूरी है, जो आमतौर पर साल में एक बार लगाया जाता है. इसके अलावा एंटरोटॉक्सिमिया (ET) नाम की बीमारी भी बकरियों में होती है, जिससे अचानक मौत हो सकती है। इसके लिए भी समय-समय पर टीकाकरण जरूरी है. कुल मिलाकर, मई–जून का समय पशुओं के लिए “सुरक्षा कवच” तैयार करने का समय है. साफ-सफाई का ध्यान रखना, पशुओं को सूखी और साफ जगह पर रखना, और समय पर सभी जरूरी टीके लगवाना बेहद जरूरी है. थोड़ी सी जागरूकता और सही समय पर उठाया गया कदम पशुपालकों को बड़े नुकसान से बचा सकता है और उनके पशु स्वस्थ व सुरक्षित रह सकते हैं. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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भविष्य की ऊर्जा: बीआईटी मेसरा में विशेषज्ञों ने स्टूडेंट्स से साझा किए...

वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में आ रहे तीव्र बदलावों के बीच सतत और कुशल ऊर्जा समाधानों की जरूरत बढ़ गई है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए बीआईटी मेसरा के विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभाग में पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आगाज हुआ। ‘स्मार्ट ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, इंटेलिजेंट कंट्रोल और ड्राइव्स में प्रगति’ विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के शोधकर्ता और विशेषज्ञ जुट रहे हैं। पावर इलेक्ट्रॉनिक्स व नवीकरणीय पर चर्चा विशिष्ट वक्ता के रूप में शामिल आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की डॉ. सोनम आचार्य ने पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में हो रही हालिया प्रगति और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में उनके अनुप्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। 8 मई तक चलने वाले इस कार्यक्रम में आईआईटी और एनआईटी के प्रख्यात शिक्षाविद् माइक्रोग्रिड, ऊर्जा भंडारण और इंटेलिजेंट कंट्रोल तकनीकों जैसे विषयों पर व्याख्यान देंगे। ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया का सत्र इंडस्ट्री के बीच की दूरी कम करना लक्ष्य फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम… विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभाग में आयोजन समापन दिवस पर ईआरएलडीसी के चीफ मैनेजर श्री चंदन कुमार उद्योग-केंद्रित सत्र लेंगे, जिसमें पावर सिस्टम संचालन के वास्तविक अनुप्रयोगों पर चर्चा होगी। इस कार्यक्रम का समन्वय डॉ. प्रतीम पान और डॉ. संजीव कुमार द्वारा किया जा रहा है। मुख्य अतिथि प्रो. अशोक शेरॉन (डीन, फैकल्टी अफेयर्स) ने ऊर्जा प्रणालियों के विकसित होते क्षेत्र में निरंतर सीखने और खुद को अपडेट रखने पर जोर दिया। संयोजक डॉ. एसके मिश्रा ने स्पष्ट किया कि उद्देश्य अकादमिक रिसर्च व औद्योगिक व्यवहार के बीच की खाई पाटना है, ताकि शोध का लाभ मिले। Source link

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Jharkhand Congress Rift | Finance Minister Criticizes State President

झारखंड कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ‘एक को साधिए, झारखंड में सब सध जाएगा’ जैसे तीखे बयान के साथ प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। . उन्होंने प्रदेश प्रभारी के. राजू को पत्र लिखकर संगठन की दिशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई है। इस बयान और पत्र के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसे नेतृत्व के खिलाफ खुली नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश प्रभारी के. राजू को राधाकृष्ण किशोर की ओर से भेजे गए पत्र के बाद से प्रदेश कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान साफ दिखने लगी है। संगठन विस्तार पर उठाए सवाल, जन मुद्दों से दूरी का आरोप राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि केवल संगठन का आकार बढ़ाने से पार्टी मजबूत नहीं हो सकती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश कमेटी के सदस्यों की संख्या 314 से बढ़ाकर 628 भी कर दी जाए, तब भी कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। यदि पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज नहीं उठाएगी। उनका कहना है कि प्रदेश कांग्रेस स्थानीय और संवेदनशील मुद्दों पर लगातार मौन बनी हुई है। यह पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। जेटेट और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर चुप्पी पर सवाल किशोर ने जेटेट परीक्षा से भोजपुरी और मगही भाषा हटाने के फैसले, हजारीबाग के विष्णुगढ़ में नाबालिग से दुष्कर्म और तीन अल्पसंख्यकों की हत्या जैसे मामलों पर प्रदेश नेतृत्व की चुप्पी को समझ से परे बताया। राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि केवल संगठन का आकार बढ़ाने से पार्टी मजबूत नहीं हो सकती। पार्टी जनमुद्दों से दूर हो रही है। उन्होंने कहा कि पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, गोड्डा, धनबाद और बोकारो जैसे जिलों में इन भाषाओं का व्यापक उपयोग होता है, इसके बावजूद इसे बड़ा जनमुद्दा नहीं बनाया गया। उनका आरोप है कि इन गंभीर घटनाओं पर पार्टी की सक्रियता जमीन पर नजर नहीं आई। प्रतिनिधित्व और परिवारवाद पर भी उठे सवाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन को लेकर भी राधाकृष्ण किशोर ने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि 314 सदस्यीय कमेटी में दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने संगठन में नेताओं के परिवारों को मिले स्थान पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि पारदर्शिता और संतुलित प्रतिनिधित्व के बिना संगठन मजबूत नहीं हो सकता। प्रदेश अध्यक्ष बोले- सोशल मीडिया पर बातें सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं थी। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो से सीधी बात महिला आरक्षण मुद्दा नहीं बन सका? -प्रदेश कांग्रेस ने शुरू से ही इसे मुद्दा बनाया। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, रमा खलखो, प्रदीप यादव समेत कई नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। महिला कांग्रेस ने मशाल जुलूस निकाला और प्रमंडल स्तर पर कार्यक्रम चल रहे हैं। जेटेट से मगही और भोजपुरी भाषा हटाने का विरोध क्यों नहीं किया गया? – यह कैबिनेट का मामला था। जिस दिन जेटेट का प्रस्ताव पारित हुआ, उसी दिन मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विरोध किया था। प्रदेश अध्यक्ष अकेले फैसला नहीं लेते, यह विषय पीएसी की बैठक में उठाया जाना चाहिए था। अनुसूचित जाति आयोग पर चुप्पी क्यों? -प्रदेश कांग्रेस ने ओबीसी के लिए अलग मंत्रालय बनाने और अनुसूचित जाति परामर्शदात्री समिति व आयोग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। हजारीबाग की घटनाओं पर पार्टी निष्क्रिय थी? – विष्णुगढ़ में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद, रमा खलखो और महिला टीम गई थी। तीन अल्पसंख्यकों की हत्या के मामले में विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप के नेतृत्व में टीम भेजी गई थी। राधाकृष्ण लगातार सवाल उठा रहे हैं? – राधाकृष्ण किशोर को पूरा सम्मान दिया है। उन्हें अपनी बात पार्टी फोरम या वरिष्ठ नेताओं के समक्ष रखनी चाहिए। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं थी। Source link

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कोलकाता से आया 3 इन 1 वाला जादुई पलंग, रांची ट्रेड फेयर...

Last Updated:May 06, 2026, 07:41 IST Ranchi Trade Mela Harmu Ground: रांची के हरमू मैदान में 10 मई तक ट्रेड फेयर का आयोजन किया गया है. यहां मेले में कोलकाता से सुदेश एक पलंग लेकर आए हैं. इस पलंग को आप सोफा, आलमारी और पलंग बना सकते हैं. इसे देखने वालों की भीड़ लगी हुई है. आइये जानते हैं इसकी कीमत. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड की राजधानी रांची के मेले में खासतौर पर एक पलंग आई हुई है, जो लोगों को खूब भा रही है. इसका आप सोफा बना सकते हैं. इसको बेड भी बना सकते हैं या फिर स्टोरेज की तरह इसको इस्तेमाल कर सकते हैं और अच्छा खासा सामान रख सकते हैं. यानी की एक ही चीज से 3 तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं. खासतौर पर बैचलर के बीच यह काफी हिट हो रहा है. आइये जानते हैं इसके बारे में. रांची के मेले में कोलकाता से लेकर आए सुदेश बताते हैं कि वह पश्चिम बंगाल से आये हैं और इसका 15 से 20 डिलीवरी यहां पर कर भी चुके हैं, जो अकेले रहते हैं घर में या फिर जो बैचलर हैं, जिनके घर छोटे हैं. ऐसे लोगों के बीच यह काफी डिमांड में है. इसकी कीमत 39000 रुपए है और यह टीक की लकड़ी से बनी हुई है. मतलब 20 साल की वह इसकी गारंटी देते हैं. यह आराम से बिना टूटे सालों साल तक चलने वाली है. मजबूत लकड़ी का है बना यह मजबूत लकड़ी की बनी हुई है और बढ़िया पालिश की गई है. अगर आप आर्डर करते हैं तो हम एक बार फिर से इसे पॉलिश करेंगे. इसके बाद आपके घर पहुंचा देंगे. इसके बाद सेट करेंगे. इसमें स्टोरेज के लिए दो बड़े-बड़े बॉक्स दिए गए हैं. आराम से इसके अंदर सामान रखकर लॉक कर सकते हैं. इसके अलावा रात में सोना है, तो इसे पलंग बना लीजिए. सिर्फ सिंगल ही नहीं, यह डबल बेड का पलंग बनेगा, जिसमें आराम से दो से तीन लोग सो सकते हैं. वहीं, अगर कोई गेस्ट है तो इसको सोफा सेट बना लीजिए. अगर आप अकेले सोना पसंद करते हैं तो आप सिंगल सोफे सेट जैसे तरीके में भी आराम से सो सकते हैं. यानी सिंगल या डबल दोनों कर सकते हैं जो आपको पसंद हो. लोगों को खूब पसंद आ रही है ये पलंग बता दें कि इस पलंग को देखने वालों की भीड़ लग रही है. भले ही लोगों को खरीदना हो या नहीं, लेकिन, एक बार रुक कर इस पलंग को जरूर देख रहे हैं कि आखिर क्या खास बात है. सुदेश बताते हैं कि अभी और बुकिंग आ रही है. यहां से जा रही नेहा बताती हैं कि वह अकेले रहती हैं. ऐसे में यह मेरे लिए परफेक्ट है. उन्होंने इसकी एक एडवांस बुकिंग कराई है. यह अधिक स्पेस घर में नहीं लेती और एक ही चीज से दो से तीन काम हो जाता है. अगर आप यह देखना चाहते हैं तो आ जाइए रांची के ट्रेड फेयर मेला में जो कि हरमु मैदान में 10 मई तक लगा हुआ है. इसका समय दोपहर के 3 से लेकर रात के 10:00 बजे तक रहता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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कोर्ट ने कहा- यूपी पुलिस ने आदेश व निर्देश की अवहेलना की,...

कोर्ट द्वारा लगातार पारित आदेश और निर्देश को नजरअंदाज करने की शिकायत को लेकर सिविल कोर्ट रांची स्थित फैमिली कोर्ट नंबर 1 के जज रमेश चंद्रा की अदालत ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को पत्र लिखा है। अपने पत्र में कहा गया है कि भरण-पोषण मामले में वाराणसी अंतर्गत लंका थाना क्षेत्र में रहने वाले देवेंद्र कुमार शर्मा की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए अगस्त 2024 से ही लंका थाना थाना प्रभारी और बनारस के एसपी को पत्र लिखा जा रहा है। जिसका आज तक पालन नहीं किया गया। भरण-पोषण का यह मामला शुभांगी शर्मा द्वारा वर्ष 2021 में अपने पति देवेंद्र कुमार शर्मा के खिलाफ दर्ज कराया गया है। जिसमें कोर्ट ने पति को पत्नी के पक्ष में भरण पोषण की राशि भुगतान करने का आदेश वर्ष 2024 में किया। लेकिन पति द्वारा पत्नी को भरण पोषण की राशि का भुगतान नहीं किया गया। जिसके बाद कोर्ट ने देवेंद्र कुमार शर्मा के खिलाफ 27 अगस्त 2024 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया और गिरफ्तारी वारंट की तामिला रिपोर्ट भी मांगी। रिपोर्ट नहीं देने पर तब कोर्ट ने लंका थाना प्रभारी को 7 जनवरी 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसका भी जवाब नहीं मिलने पर वाराणसी के एसपी को 19 अगस्त 2025 को पत्र लिखा गया। लेकिन, एसपी द्वारा भी न तो लंका के थाना प्रभारी के खिलाफ और न ही देवेंद्र कुमार शर्मा के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। जिसके बाद कोर्ट ने डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। Source link

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11 मई तक झारखंड में बदला रहेगा मौसम:रांची, रामगढ़, हजारीबाग और बोकारो...

झारखंड में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और राज्य के ऊपर सक्रिय टर्फ लाइन के कारण पिछले 24 घंटे में रांची समेत कई जिलों में मूसलाधार बारिश हुई। इसका असर यह हुआ कि अधिकतम तापमान में एक ही दिन में करीब 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। रांची का अधिकतम तापमान घटकर 29.4 डिग्री पर पहुंच गया, जो सामान्य से लगभग 7.7 डिग्री कम है। राज्य के कई जिलों में तापमान 30 डिग्री के आसपास सिमट गया है। जिससे मई में फरवरी जैसी ठंड का एहसास हो रहा है। अगले छह दिन बारिश और वज्रपात की संभावना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 6 से 11 मई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। 6 मई को रांची, रामगढ़, हजारीबाग और बोकारो में हल्की बारिश के आसार हैं। 7 मई को संथाल परगना और दक्षिण-पूर्वी जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होगी, जिसके लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। 8 मई को पश्चिमी झारखंड को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में बारिश होगी। वहीं 9 से 11 मई तक 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और वज्रपात की चेतावनी दी गई है। अगले दो दिनों में तापमान में 2 से 4 डिग्री की और गिरावट संभव है। कई इलाकों में 50 मिमी से अधिक वर्षा पिछले 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई। तेनुघाट में सबसे अधिक 82.2 मिमी बारिश हुई, जबकि बुढ़मू में 51.2 मिमी, कांके में 50 मिमी, नामकुम में 46 मिमी, ओरमांझी में 41 मिमी और मांडर में 40 मिमी वर्षा हुई। इस दौरान न्यूनतम तापमान भी गिरकर 19.3 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और स्थानीय हीटिंग के प्रभाव से बादल बन रहे हैं। यही स्थिति पूरे सप्ताह बनी रह सकती है। बाजार पर असर, एसी-कूलर की मांग घटी मौसम में अचानक आए इस बदलाव का असर बाजार पर भी दिखने लगा है। कुछ दिन पहले तक 40 डिग्री तापमान के कारण एसी, कूलर और पंखों की मांग तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन अब बारिश और ठंडक के कारण बिक्री में गिरावट आई है। दुकानदारों के अनुसार, फिलहाल केवल पहले से बुक किए गए ऑर्डर ही पूरे किए जा रहे हैं। नई बुकिंग लगभग बंद हो गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि पूरे मई महीने में तापमान सामान्य के आसपास ही बना रहेगा। बीच-बीच में ऐसी स्थिति दोबारा बन सकती है। Source link

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बारिश-धूप के खेल ने बढ़ाई किसानों की चिंता! मक्के की फसल पर...

होमताजा खबरकृषि बदलते मौसम में मक्के की फसल पर कीटों का हमला, समय रहते ऐसे करें बचाव Last Updated:May 06, 2026, 07:10 IST मौसम में बदलाव से मक्के की फसल पर कीटों का हमला बढ़ गया है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. कीट नियंत्रण के लिए नीम के घोल या दवाओं का छिड़काव करें. खेतों में जल निकासी की सही व्यवस्था रखें. समय पर बचाव से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है. ख़बरें फटाफट देवघरः झारखंड और बिहार में इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बदला-बदला नजर आ रहा है. कभी अचानक तेज बारिश हो जाती है, तो कुछ ही देर बाद कड़ी धूप निकल आती है. इस तरह के उतार-चढ़ाव भरे मौसम का सबसे ज्यादा असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ रहा है, खासकर मक्के की खेती करने वाले किसान ज्यादा परेशान है. कई इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में पानी का जमाव हो जा रहा है, जिससे मक्के की फसल को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. पानी के ठहराव की वजह से मिट्टी में नमी अत्यधिक बढ़ जाती है और यही स्थिति कीटों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देती है. नतीजतन मक्के के पौधों में कीड़ों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पौधे कमजोर हो रहे हैं और फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है. क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक?इस समस्या को लेकर देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा सर किसानों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि जैसे ही खेतों में कीड़ों का प्रकोप दिखाई दे, वैसे ही तुरंत कदम उठाना बेहद जरूरी है. सबसे पहले किसानों को चाहिए कि वे उचित रासायनिक दवाओं का छिड़काव करें, ताकि कीड़ों को शुरुआती स्तर पर ही खत्म किया जा सके और फसल को ज्यादा नुकसान से बचाया जा सके. हालांकि, कई किसान रासायनिक दवाओं का उपयोग नहीं करना चाहते, ऐसे में उनके लिए भी एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प मौजूद है. किसान नीम के घोल का छिड़काव कर सकते हैं, जो प्राकृतिक तरीके से कीड़ों को नियंत्रित करने में काफी कारगर होता है और इससे फसल या मिट्टी को किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं होता. जल निकाशी की व्यवस्था करेंइसके साथ ही कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा यह भी बताते हैं कि खेतों में पानी का जमाव बिल्कुल नहीं होने देना चाहिए. यदि खेत में पानी रुकता है, तो वह न सिर्फ कीटों को बढ़ावा देता है, बल्कि पौधों की जड़ों को भी सड़ा सकता है. इसलिए किसानों को चाहिए कि वे अपने खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें, ताकि बारिश का पानी तुरंत बाहर निकल सके. इसके लिए खेतों में नालियां बनाना या पहले से मौजूद निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना बेहद जरूरी है.कुल मिलाकर देखा जाए तो बदलते मौसम के इस दौर में किसानों को ज्यादा सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है. समय पर सही कदम उठाकर न सिर्फ कीटों के प्रकोप को रोका जा सकता है, बल्कि फसल को होने वाले बड़े नुकसान से भी बचाया जा सकता है. थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी के साथ किसान अपनी मक्के की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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