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राहुल गांधी के शब्दों से हिली ‘इंडिया’ गठबंधन की एकता, माकपा ने...

होमताजा खबरदेश केरल चुनाव की टीस अभी बाकी! राहुल गांधी के बयान पर माकपा का तगड़ा जवाब Last Updated:June 13, 2026, 21:28 IST राहुल गांधी ने ‘इंडिया’ गठबंधन की मीटिंग में केरल की राजनीति और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को लेकर बयान दिया था. राहुल ने साफ कहा था कि वह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री को गले नहीं लगा सकते हैं. अब माकपा नेता ने इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. इससे गठबंधन की एकता पर असर पड़ सकता है. ख़बरें फटाफट ‘इंडिया’ गठबंधन को लेकर माकपा ने राहुल गांधी को नसीहत दी. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा केरल की राजनीति को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में की गई टिप्पणी पर शनिवार को कहा कि उन्हें सिर्फ इतनी सलाह दी गई है कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और मोदी सरकार के लिए ‘मददगार’ बनने से बचें. माकपा महासचिव एम ए बेबी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा, “कोई भी राहुल गांधी से यह नहीं कह रहा कि वह पिनराई विजयन को गले लगाएं.” उन्होंने कहा, “इसके उलट, हम उनसे केवल यह कह रहे हैं कि वह पिनराई विजयन और अन्य विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की मांग कर ईडी और मोदी सरकार का मददगार बनने से बचें. यह विपक्ष के नेता का काम नहीं है.” बेबी की यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी द्वारा आठ जून को हुई ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में उनके द्वारा दिये गए संबोधन को शुक्रवार को सार्वजनिक किए जाने के एक दिन बाद आई. राहुल गांधी ने बैठक में कहा था, “हमारे अपने राजनीतिक मतभेद हैं, लेकिन यदि आप मुझसे कह रहे हैं कि मैं केरल के पूर्व मुख्यमंत्री को जाकर गले लगाऊं, तो मैं ऐसा नहीं कर सकता और न ही करूंगा, क्योंकि मेरा उनके साथ राजनीतिक संघर्ष जारी है.” वह केरल विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा तत्कालीन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार पर किए गए हमलों को लेकर माकपा की आपत्ति के संदर्भ में यह बात कह रहे थे. राहुल गांधी ने यह भी कहा था, “हमें लचीला रुख अपनाना होगा और यह समझना होगा कि हमारे खिलाफ पूरी ताकत से हमला किया जा रहा है, ताकि यह साबित किया जा सके कि विपक्ष कमजोर और बिखरा हुआ है.” सूत्रों के अनुसार, माकपा के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने चुनाव प्रचार के दौरान लगाए गए आरोपों पर बैठक के दौरान चिंता जताई थी. कांग्रेस ने केरल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान वाम दल और भाजपा के बीच कथित ‘मौन सहमति’ होने का आरोप लगाया था. बैठक से पहले बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर इन आरोपों पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि इस तरह के आरोप विपक्षी गठबंधन की सहयोगात्मक भावना के अनुरूप नहीं हैं. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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50 साल से एक जैसा स्वाद, जैन साहब की चाय के बिना...

Last Updated:June 13, 2026, 20:17 IST शिवपुरी के पुराने कलेक्ट्रेट के पास स्थित ‘जैन चाय दुकान’ आज महज एक दुकान नहीं, बल्कि शिवपुरी के लोगों के दिन की पहली जरूरत बन चुकी है. शहर के रग-रग में बसे स्वाद का जादू ऐसा है कि आज भी हजारों शिवपुरी वासियों की सुबह तब तक अधूरी मानी जाती है बदलते दौर की चकाचौंध में जहां हर मोड़ पर आधुनिक कैफे और नए-नए टी-स्टॉल खुल रहे हैं. वहीं शिवपुरी के दिल में एक ऐसी जगह भी है. जिसकी खुशबू पिछले पांच दशकों से रत्ती भर भी नहीं बदली. पुराने कलेक्ट्रेट के पास स्थित ‘जैन चाय दुकान’ आज महज एक दुकान नहीं, बल्कि शिवपुरी के लोगों के दिन की पहली जरूरत बन चुकी है. शहर के रग-रग में बसे इस स्वाद का जादू ऐसा है कि आज भी हजारों शिवपुरी वासियों की सुबह तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक उनके होठों से जैन साहब की कड़क चाय की पहली चुस्की न लग जाए. पिता की छोटी सी टपरी से शुरू हुआ पांच दशकों का सफरइस स्वाद की विरासत को जिंदा रख रहे दुकान के संचालक दीपक जैन जब पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यादों का एक खूबसूरत कारवां सामने आ जाता है. दीपक बताते हैं कि यह सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि उनके पिता के पसीने से सींची गई एक पुश्तैनी थाती है. दशकों पहले उनके पिता ने एक बेहद छोटी सी टपरी से इस सफर का आगाज किया था. उस दौर में बोया गया मेहनत, ईमानदारी और शुद्धता का बीज आज एक ऐसा वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी छांव में पूरा शिवपुरी चाय का आनंद लेता है. दीपक जैन बड़े गर्व से कहतेपिताजी ने हमेशा एक ही सीख दी कि चाहे दुनिया बदल जाए, लेकिन हमारी चाय की गुणवत्ता और ग्राहकों के प्रति हमारा आदर कभी नहीं बदलना चाहिए. यही वजह है कि आधी सदी बीत जाने के बाद भी हमारी चाय का वही पारंपरिक और ठेठ स्वाद आज भी जस का तस बरकरार है, जिसने 50 साल पहले लोगों को पहली बार अपना दीवाना बनाया था. अफसरों की गंभीर चर्चा से लेकर युवाओं के ठहाकों तकजैन साहब की चाय का सम्मोहन देखना हो, तो यहां सुबह से शाम तक उमड़ने वाले हुजूम को देखिए। इस दुकान की बेंच पर समाज का हर रंग एक साथ चाय की चुस्कियों में घुला नजर आता है. कॉलेज जाने वाले युवाओं के बेबाक ठहाके हों, फुर्सत में बैठे बुजुर्गों की पुरानी यादें हों, दिनभर की भागदौड़ के बीच सुस्ताते व्यापारी हों, या फिर कलेक्ट्रेट के गंभीर अधिकारी—हर कोई यहाँ आकर एक ही रंग में रंग जाता है. सिर्फ चाय का ठिकाना नहीं, शिवपुरी की यादों का एक जीवंत हिस्सापचास वर्षों का यह लंबा और सुहाना सफर सिर्फ चाय बेचने और मुनाफा कमाने की कहानी नहीं है। यह कहानी है शिवपुरी की तीन पीढ़ियों के आपस में जुड़ने की, उनकी खुशियों और चर्चाओं की. यहां कई ऐसे चेहरे रोज सुबह दिखाई देते हैं जो कभी अपने बचपन में पिता की उंगली थामकर यहां पहली बार चाय का स्वाद चखने आए थे, और आज वे खुद अपने बच्चों और पोतों को इस ऐतिहासिक स्वाद का हिस्सा बनाने यहाँ लेकर आते हैं.वक्त बदला, कलेक्ट्रेट पुराना हो गया, शहर की सड़कें चौड़ी हो गईं, लेकिन जैन चाय दुकान की वो चिर-परिचित खौलती चाय. उसकी महक आज भी शिवपुरी के अपनत्व, संस्कृति और पहचान का सबसे खूबसूरत प्रतीक बनी हुई है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Shivpuri,Madhya Pradesh Source link

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जोरहाट IAF AN-32 क्रैश: क्‍यों जांबाजों का काल बन रहे हैं ऐसे...

होमताजा खबरदेश IAF AN-32 क्रैश: क्‍यों जांबाजों का काल बन रहे हैं ऐसे मिशन, जानें एक-एक बात Last Updated:June 13, 2026, 19:19 IST Jorhat IAF AN-32 Crash: जोरहाट में भारतीय वायुसेना के AN-32 एयरक्राफ्ट क्रैश के बाद एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर AN-32 जैसे एयरक्राफ्ट किन हालात में उड़ान भरते हैं और ऐसे मिशन इतने चुनौतीपूर्ण क्यों माने जाते हैं? भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल ने उस बातों का खुलासा किया है, जिसकी वजह से मिशंस पर गए एयरक्राफ्ट लगातार हादसे का शिकार हो रहे हैं. असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना का एयरक्राफ्ट एएन-32 क्रैश हो गया है. Jorhat IAF AN-32 Crash: असम के जोरहट एयरफोर्स स्‍टैशन पर लैंडिंग के दौरान भारतीय वायुसेना का एएन-32 प्‍लेन क्रैश हो गया है. इस क्रैश में भारतीय वायुसेना के पांच जांबाज शहीद हो गए हैं. शहीदों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और दानिश आलम के नाम शामिल हैं. इस हादसे के बाद एक बार उन कारणों को लेकर बहस छिड़ गई है, जिनकी वजह से मिशन के दौरान प्‍लेन क्रैश हो रहे हैं. भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल रहे एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि एएन-32 एयरक्राफ्ट पिछले चार दशकों से भारतीय वायुसेना की ट्रांसपोर्ट फ्लीट की रीढ़ रहा है. 1980 के दशक के मध्य में भारतीय वायुसेना में शामिल होने वाला यह एयरक्राफ्ट तब से लेकर आज तक लद्दाख, पूर्वोत्तर भारत, अंडमान-निकोबार सहित देश के अन्य हिस्सों में अपने मिशन्‍स को सफलतापूर्वक पूरा करता आया है. जोरहाट में भी AN-32 एयरक्राफ्ट ने अपने अलग-अलग ऑपरेशंस को अब तक सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. आखिर क्‍या हो सकते हैं हादसे के कारण? हादसे की संभावित वजहों को लेकर पूर्व एयर मार्शल का कहना है कि किसी भी फ्लाइट के दो सबसे अहम फेज ऑफ और लैंडिंग होते है. दुनिया भर में लगभग 90 प्रतिशत एयरक्राफ्ट दुर्घटनाएं इन्हीं दो फेज के दौरान होती हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान एयरक्राफ्ट अपनी परफॉर्मेंस कैपेसिटी की लिमिट के बेहद करीब काम कर रहा होता है. एयरक्राफ्ट की स्‍पीड कम होती है और पायलट को बेहद सीमित सयम में कई अहम फैसले लेने पड़ते हैं. लैंडिंग के दौरान यदि कोई गंभीर तकनीकी खराबी, इमरजेंसी सिचुएशन या कंट्रोल से संबंधित कोई दिक्‍कत सामने आ जाए तो पायलट के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय होता है. जमीन के करीब होने और स्‍पीड कम होने की वजह से दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसके अलावा, जोरहाट सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में उड़ान भरना सामान्य एयरक्राफ्टन ऑपरेशन जैसा नहीं होता है. मिलिट्री फ्लाइट्स और और कमर्शियल फ्लाइट्स में सबसे बड़ा अंतर यही है कि मिलिट्री एयरक्राफ्ट उन इलाकों में जाते हैं जहां सामान्य पैसेंजर एयरक्राफ्ट नहीं जाते हैं. AN-32 जैसे एयरक्राफ्ट घाटियों, पहाड़ों और दुर्गम इलाकों में उड़ान भरते हैं, जहां कई बार रडार कवरेज भी नहीं होता है. मौसम तेजी से बदलने, बादल आने, बारिश होने या विजिबिलिटी कम होने की स्थिति में फ्लाइट ऑपेशन बेहद मुश्किल हो जाता है. ऐसे हालात में पायलटों को संकरी घाटियों के बीच से गुजरते हुए छोटे एयरस्ट्रिप तक पहुंचना पड़ता है. कई बार रनवे पूरी तरह डेवलप भी नहीं होते हैं. यही कारण है कि इस तरह के मिशंस को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. छोटी गलती भी बन सकती है बड़ा खतरा पूर्व एयर मार्शल के अनुसार, पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में मौजूद कई एयरस्ट्रिप केवल 3,000 से 3,500 फीट लंबे होते हैं. कुछ जगहों पर केवल एक दिशा से ही एयरक्राफ्ट को उतारा जा सकता है. ऐसी स्थिति में पायलट के पास गलती सुधारने की बहुत कम गुंजाइश होती है. यदि एयरक्राफ्ट तय लैंडिंग प्‍वाइंट से आगे उतरता है तो रनवे की लंबाई कम पड़ सकती है. यदि वह तय स्थान से पहले नीचे आ जाए तो पेड़ों और पहाडि़यों से टकराने का खतरा पैदा हो जाता है. यही वजह है कि इन इलाकों में लैंडिंग को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. बादल और घाटियां भी बन सकती हैं जोखिम पूर्व एयर मार्शल ने पुराने हादसों का भी जिक्र करते हुए बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में खराब मौसम और घने बादलों के बीच उड़ान भरना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है. कई बार विजिबिलिटी इतनी कम हो जाती है कि घाटियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है. कुछ पुराने मामलों में एयरक्राफ्ट गलत घाटी में दाखिल हो गए. हालांकि पायलट्स को ऐसी परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए ट्रेंड किया जाता है. उन्‍हें उन सुरक्षित रास्‍तों के बारे में बताया जाता है, जहां से सुरक्षित बाहर निकला जा सकता है. लेकिन कुछ घाटियां ऐसी भी होती हैं जहां गलती की गुंजाइश ना के बराबर भी नहीं होती है. किसना सुरक्षित है आईएएफ का एएन-32 एयरक्राफ्टपूर्व एयर मार्शल के अनुसार, केवल दुर्घटनाओं के आधार पर एएन-32 को असुरक्षित नहीं एयरक्राफ्ट कहा जा सकता है. यह एयरक्राफ्ट वर्षों से भारतीय वायुसेना के सबसे भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट विमानों में शामिल रहा है. इसका इस्तेमाल जवानों और हथियारों के साथ-साथ राशन, दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने में किया जाता रहा है. इसके अलावा यह एयरक्राफ्ट पैरा-असॉल्ट मिशन और सर्च एंड रेस्क्यू सहित अन्य कई मिशंस के लिए इस्‍तेमाल‍ किया जाता रहा है. समय के साथ इन एयरक्राफ्ट्स को मॉर्डन इक्‍यूपमेंट्स और नए एवियोनिक्स सिस्टम से भी लैस किया गया है. क्‍या हो सकती हैं जोरहाट में एएन-32 क्रैश की वजहफिलहाल जोरहाट में हुए एएन-32 क्रैश की असल वजहों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा. भारतीय वायुसेना सहित संबंधित एजेंसियों के अधिकारी क्रैश साइट पर पहुंच चुके हैं. मलवे से एयरक्राफ्ट के ब्‍लैक बॉक्‍स को खोजने की कवायद शुरू हो चुकी है. साथ ही, एयरक्राफ्ट के मलवे के सैंपल को भी इकट्ठा किया जा रहा है. जल्‍द ही पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर के बीच हुई बातचीत की पड़ताल भी की जाएगी. इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही एएन-32 के क्रैश की वजहों के बारे में पता चल सकेगा. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation,

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पंजाब में अब तक जितने सीएम बने, सब पर भ्रष्टाचार के आरोप,...

Last Updated:June 13, 2026, 18:00 IST अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भगवंत मान, उनके परिवार या किसी मंत्री पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है. भगवंत मान सरकार ने सारा सरकारी पैसा बचाकर जनता की बिजली मुफ्त कर दी और 10-10 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू कर दिया. ख़बरें फटाफट बठिंडा में मेगा रोड शो के दौरान सीएम भगवंत मान के साथ अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया. नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीएम भगवंत सिंह मान के साथ बठिंडा में मेगा रोड शो कर नगर निगम चुनाव में पार्टी को शानदार जीत दिलाने के लिए जनता का धन्यवाद किया. रोड शो में उमड़ी लोगों की भारी भीड़ और उनके चेहरे पर खुशी देखकर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भगवंत मान सरकार के चार साल के काम से पंजाब की जनता बेहद खुश है. हमें पूरा विश्वास है कि 2027 में भगवंत मान का दोबारा मुख्यमंत्री बनना तय है. उन्होंने कहा कि पंजाब में अब तक जितने भी सीएम बने, सब पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, लेकिन भगंवत मान पर एक पैसे का आरोप नहीं है. अगर भगवंत मान या सरकार के मंत्रियों पर एक भी आरोप लगा होता तो मोदी सरकार रोज ईडी-सीबीआई की रेड कराती. इस अवसर पर ‘आप’ पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया समेत तमाम वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे. रोड शो के दौरान अरविंद केजरीवाल ने नगर निगम के चुनावों में आम आदमी पार्टी को शानदार जीत दिलाने के लिए धन्यवाद करते हुए कहा कि हमें पंजाब में सरकार चलाते हुए चार साल हो गए हैं. जब अकाली दल या कांग्रेस की पुरानी सरकारें होती थीं, तो जनता उन्हें मारने के लिए जूते लेकर खड़ी होती थी, लेकिन आज हमारी सरकार के चार साल पूरे होने पर जनता के चेहरों पर इतनी खुशी है कि देखकर दिल खुश हो गया. हम राजनीति में काम करने आए थे और यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि चार साल बाद भी जनता हमारा काम पसंद कर रही है. एक तरह से बठिंडा में शानदार जीत दिलाकर जनता ने हमारे अच्छे काम पर मोहर लगाई है. रोड शो में लोगों की झलकती खुशी से साफ पता चलता है कि आज जनता मौजूदा सरकार से बहुत खुश है. अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि 2022 के चुनाव के समय जब मैं बठिंडा आया था, तो मुझे बताया गया कि यहां के लोगों से जोजो टैक्स लिया जाता है. अब वह जोजो टैक्स बंद हो गया है. अब कोई पैसे नहीं मांगता और कोई लूट-खसोट नहीं होती है. यह भगवंत मान की ईमानदार सरकार है. आज पंजाब में चार पार्टियां हैं. एक पार्टी है जिसे लोग गुस्से से चिट्टा पार्टी कहते हैं. उनके समय में खूब चिट्टा बिकता था और उन्होंने घर-घर में चिट्टा पहुंचा दिया था. लोग उस पार्टी को नफरत से बेअदबी पार्टी भी कहते हैं, क्योंकि उनके समय में खूब बेअदबी हुई थी. दूसरी पार्टी झगड़ा पार्टी है, जिसके सारे नेता आपस में लड़ते रहते हैं. तीसरी पार्टी ईडी पार्टी है, जो ईडी की धमकी देती है और लोगों के पीछे ईडी लगाती है. चौथी पार्टी आम आदमी पार्टी है, जो जनता की अपनी पार्टी है और लोगों के लिए काम करती है. अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चर्चा है कि अब फरवरी के बजाय नवंबर में ही चुनाव होंगे. चुनाव में बस चार महीने रह गए हैं. अब हम सबको मिलकर एक ही काम करना है. भगवंत मान को दोबारा मुख्यमंत्री बनाना है. पंजाब में पिछले 75 साल में कई मुख्यमंत्री और मंत्री आए, लेकिन भगवंत मान जितना ईमानदार कोई नहीं आया. आज तक जितने भी मुख्यमंत्री आए, उन सभी पर घोटाले करने और पैसे खाने के आरोप लगे. उनके परिवारों और मंत्रियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे. अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि पिछले चार साल में भगवंत मान पर एक नए पैसे के घोटाले का भी आरोप नहीं लगा है. अगर कोई आरोप लगता तो पीएम मोदी उन्हें नहीं छोड़ते और आज उनके ऊपर भी ईडी और सीबीआई की रेड हो जाती. भगवंत मान, उनके परिवार या किसी मंत्री पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है. भगवंत मान सरकार ने सारा सरकारी पैसा बचाकर जनता की बिजली मुफ्त कर दी और 10-10 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा कर दिया. 1 जुलाई से हर मां और बहन के बैंक खाते में एक हजार या डेढ़ हजार रुपए जाने शुरू हो जाएंगे. ‘आप’ सरकार ने इतना काम किया है कि अब सबको मिलकर भगवंत मान को दोबारा मुख्यमंत्री बनाना चाहिए, ताकि जो भी अधूरे काम रह गए हैं, उन्हें पूरा किया जा सके. वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी बठिंडा में आम आदमी पार्टी का मेयर बनाने के लिए जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि इतनी भयानक गर्मी के बावजूद लोग वोट डालने निकले और जब वोटों की पेटियां खुलीं, तो उन्होंने आम आदमी पार्टी और झाड़ू के पक्ष में बहुत बड़ा जनादेश दिया. उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी क्लीनिक खुल गए हैं, शानदार स्कूल-अस्पताल बन गए हैं. सरकारी स्कूलों के बच्चे अब मुश्किल से मुश्किल टेस्ट पास कर रहे हैं. खेतों के लिए दिन में बिजली आ रही है और टीलों तक नहर का पानी पहुंचा दिया गया है. यही बातें असली आनंद देती हैं. बाकी दोनों-तीनों पार्टियां आपस में समझौता करती फिर रही हैं. सुनाम में 23 में से 19 सीटें आम आदमी पार्टी ने जीती हैं. वहां भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल तीनों मिलकर लड़े थे, लेकिन जनता ने तीनों का सूपड़ा साफ कर दिया और सब पर झाड़ू फेर दिया. भगवंत सिंह मान ने बताया कि इस बार जो धान लग रही है, वह पहली बार नहरों के पानी से लग रहा है. किसान जितना मर्जी पानी इस्तेमाल करें, पंजाब में पानी की कोई कमी नहीं है. भाखड़ा डैम अपने औसत स्तर से 16 फुट ऊपर चल रहा है. अगर हम रोज खुला पानी भी छोड़ें, तब भी कई दिनों तक डैम में पानी की कोई कमी नहीं होगी. आने वाले समय में खेतों के लिए पानी हमेशा भरपूर रहेगा. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक

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डेमोग्राफी चेंज कहां और कितना हुआ? अमित शाह ने मांगी जमीनी हकीकत...

होमताजा खबरदेश अमित शाह की सख्ती: बदलती डेमोग्राफी पर हर जिले की रिपोर्ट तैयार करने का आदेश Last Updated:June 13, 2026, 17:22 IST गृह मंत्री अमित शाह के आदेश पर देशभर में पिछले कुछ सालों में कई जगहों पर हुए जनसंख्या अनुपात बदलाव का आंकलन करने के लिए एक कमीशन बनाया गया है जिसकी बैठक आज गृह मंत्री के साथ हुई थी. ख़बरें फटाफट अमित शाह ने अधिकारियों को डेमोग्राफी चेंज पर स्पष्ट आदेश दिया है. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. डेमोग्राफी चेंज यानि जनसंख्या अनुपात में बदलाव जिसकी जानकारी सरकार और अन्य एजेंसियों को समय समय पर मिल रही है उस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह ने डेमोग्राफी चेंज पर बनाए गए कमीशन के बैठक की अध्यक्षता की. गृह मंत्री अमित शाह ने कमीशन के सदस्यों को आदेश दिया कि सीमावर्ती इलाकों मेट्रो और इंडस्ट्रियल एरिया जो देशभर में हैं उनका दौरा कमीशन के सदस्य करें और एक रिपोर्ट बनाएं कि ऐसी जगहों पर पिछले कुछ सालों में जनसंख्या अनुपात में कितना बदलाव हुआ है. About the Author अमित पांडेयविशेष संवाददाता अमित पांडेय News 18 इंडिया से करीब डेढ़ दशक से जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के अपने इस करियर में उन्होंने क्राइम, कोर्ट, गृह मंत्रालय और संसद की गतिविधियों की रिपोर्टिंग की है. अभी स्पेशल करिस्पांडेट के तौर पर गृह…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi Source link

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400 साल पुरानी शाही बावड़ी, जिसमें छिपा है इंजीनियरिंग का अनोखा चमत्कार;...

Last Updated:June 13, 2026, 16:16 IST Royal Stepwell of Golconda Fort: हैदराबाद के ऐतिहासिक गोलकोंडा किले में स्थित शाही बावड़ी आज भी अपनी अनूठी बनावट और रहस्यमयी इतिहास के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है. यह किले की सबसे बड़ी पानी की बावड़ी मानी जाती है, जो कुतुबशाही शासनकाल की उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली का बेहतरीन उदाहरण है. इतिहासकारों के अनुसार बावली के बीच कभी एक सुंदर फव्वारा हुआ करता था, जिसके आसपास शासक बैठकर प्राकृतिक वातावरण और पानी की फुहारों का आनंद लेते थे. यह बावड़ी केवल सौंदर्य का केंद्र नहीं थी, बल्कि पूरे किले तक पानी पहुंचाने का प्रमुख स्रोत भी थी. ख़बरें फटाफट हैदराबाद. इतिहास के पन्नों को समेटे भाग्यनगर यानी हैदराबाद का ऐतिहासिक गोलकोंडा किला आज भी अपने भीतर कई ऐसे रहस्य और अचंभे छुपाए हुए हैं, जिन्हें देखकर लोग दंग रह जाते हैं. स्थापत्य कला और बेहतरीन इंजीनियरिंग के तालमेल का ऐसा ही एक उदाहरण इस किले के भीतर स्थित शाही बावड़ी है, जो पर्यटकों के लिए हमेशा से चर्चा का विषय रही है. यह बावड़ी न सिर्फ इस दुर्ग की सबसे बड़ी पानी की बावड़ी है बल्कि यह कुतुबशाही दौर के शाही वैभव और उनकी उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली की जीती-जागती गवाही भी देती है. इतिहासकारों और स्थानीय जानकारों के मुताबिक, इस विशाल बावड़ी की गहराई बहुत ज्यादा है. प्राचीन काल में इस पूरी बावड़ी के ठीक बीचों-बीच एक बेहद खूबसूरत और कलात्मक फव्वारा हुआ करता था. किले के सुल्तान और राजा अक्सर इसके सामने बने ऊंचे सुरक्षित स्थानों पर बैठकर ठंडी हवाओं के साथ इस फव्वारे के नयनाभिराम दृश्यों और पानी की फुहारों का आनंद लिया करते थे. मनोरंजन और खूबसूरती से अलग, इस बावड़ी का मुख्य काम बेहद रणनीतिक और जरूरी था. सलीके से बनाई गई प्राचीन सीढ़ियां आज भी सुरक्षित हैं पुराने समय में इस गहरी बावड़ी से ही प्राचीन स्वदेशी तकनीकों का उपयोग करके पूरे गोलकोंडा किले के भीतर पानी की निर्बाध सप्लाई की जाती थी. दुर्ग की अत्यधिक ऊंचाई पर होने के बावजूद इस अनूठी व्यवस्था से महल के कोने-कोने तक पानी पहुंचता था. वर्तमान में इस बावड़ी की बनावट को देखा जाए, तो इसके एक तरफ नीचे पानी तक उतरने के लिए बेहद सलीके से बनाई गई प्राचीन सीढ़ियां आज भी सुरक्षित हैं. चूंकि इसकी गहराई काफी ज्यादा है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से यह जगह संवेदनशील मानी जाती है. पर्यटकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है यह कदम पुरातत्व विभाग ने इसी वजह से आम पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस गहरी बावड़ी के चारों तरफ एक मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण करा दिया है. इस दीवार के बनने से यहां आने वाले लोग और बच्चे बिना किसी खतरे के इस ऐतिहासिक और बेजोड़ धरोहर को करीब से निहार सकते हैं. गोलकोंडा किला घूमने आने वाले हर मुसाफिर के लिए यह बावड़ी अतीत के किसी सुनहरे सफर जैसी महसूस होती है. About the Author deep ranjan दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Hyderabad,Telangana Source link

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vaibhav suryavanshi special talent revealed by uncle in samastipur thanked to bcci

होमखेलक्रिकेट वैभव सूर्यवंशी का स्पेशल टैलेंट आया सामने! चाचा ने खोला राज,BCCI का जताया आभार Last Updated:June 13, 2026, 15:09 IST Vaibhav Suryavanshi: IPL के बाद बेबी बॉस यानी वैभव सूर्यवंशी के लिए लगातार खुशियां ही मिल रही है. इंडिया ए टीम में चयन होने के बाद बीसीसीआई ने टी-20 टीम के साथ इंडियन टीम में चयन हुआ है. उन्होंने मात्र 15 साल 15 दिन में चयनित होकर क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा. समस्तीपुर के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद विश्व क्रिकेट में तहलका मचा दिया है. उनकी सफलता पर उनके चाचा ने कई राज खोले हैं. साथ ही नई खुशी के लिए बीसीसीआई का धन्यवाद कहा है. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर: समस्तीपुर जिले के ताजपुर से निकलकर क्रिकेट के क्षेत्र में तेजी से पहचान बना रहे कम उम्र की खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. हाल ही में टीम इंडिया में उनके चयन की खबर सामने आने के बाद हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आखिर वैभव के अंदर ऐसी कौन सी खास बात थी जिसने उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचा दिया. इस सवाल का जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने वैभव के छोटे चाचा राजीव सूर्यवंशी से खास बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि बचपन से ही वैभव बाकी बच्चों से अलग थे. खेल के प्रति उनका जुनून, घंटों अभ्यास करने की आदत और खुद को हर दिन बेहतर बनाने की जिद ही उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आई है. परिवार को हमेशा विश्वास था कि एक दिन वह बड़ा नाम जरूर करेंगे. चाचा ने कहा-भारतीय क्रिकेट बोर्ड का आभारवैभव के छोटे चाचा राजीव सूर्यवंशी ने कहा कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने जिस भरोसे के साथ उनके भतीजे को टीम में जगह दी है. उसके लिए पूरा परिवार आभारी है. उन्होंने कहा कि बोर्ड के चयनकर्ताओं ने वैभव के अंदर छिपे हुनर को पहचाना और उन्हें सही अवसर दिया. राजीव बताते हैं कि अगर वैभव ने आईपीएल में अपना दमदार प्रदर्शन नहीं किया होता तो शायद आज यह दिन देखने को नहीं मिलता. IPL में जिस तरह उन्होंने बड़े-बड़े गेंदबाजों के सामने बेखौफ बल्लेबाजी की. लगातार रन बनाए और अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया. उसी ने चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर खींचा. यही वह मंच था जिसने वैभव को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई. वजह है आईपीएल का प्रदर्शनराजीव सूर्यवंशी ने आगे कहा कि पिछले दो आईपीएल सीजन वैभव के करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुए. उन्होंने कहा कि आईपीएल में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड और कई बड़े गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी ने साबित कर दिया कि वैभव बड़े मंच के खिलाड़ी हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान रॉयल्स भले खिताब नहीं जीत पाई हो, लेकिन पूरे सीजन में चर्चा सिर्फ वैभव की बल्लेबाजी की रही. यही वजह बनी कि भारतीय टीम प्रबंधन ने उनके खेल को गंभीरता से देखा और उन्हें टीम इंडिया में जगह देने का फैसला किया. आज समस्तीपुर ही नहीं, पूरा बिहार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar Source link

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झुंझुनूं के इस गांव ने कर दिखाया कमाल! जनसहयोग से करोड़ों जुटाकर...

Last Updated:June 13, 2026, 14:09 IST Jhunjhunu Hindi News: झुंझुनूं जिले का एक गांव आज जनसहयोग और सामुदायिक भागीदारी का अनूठा उदाहरण बनकर उभरा है. गांव के लोगों ने विकास कार्यों के लिए केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय आपसी सहयोग और जनभागीदारी का रास्ता चुना. ग्रामीणों ने मिलकर करोड़ों रुपये की राशि जुटाई और गांव में सड़क, पेयजल, शिक्षा, सामुदायिक भवन, धार्मिक स्थल तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास कराया. इसके परिणामस्वरूप गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई और यह क्षेत्र अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है. ग्रामीणों की एकजुटता और विकास के प्रति समर्पण ने साबित कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से बड़े बदलाव संभव हैं. आज यह गांव न केवल आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है. Jhunjhunu News: झुंझुनूं जिले का भोड़की गांव केवल एक साधारण ग्रामीण नहीं, बल्कि जनसहयोग और सामाजिक एकता का उदाहरण है. गुढ़ागौड़जी क्षेत्र में स्थित यह गांव करीब 550 वर्षों का गौरवशाली इतिहास अपने भीतर समेटे हुए है. यहां के लोगों ने विकास के लिए कभी केवल सरकार पर निर्भर रहने की बजाय स्वयं आगे बढ़कर योगदान दिया और अपने गांव की तस्वीर बदलने का संकल्प लिया. इसी सोच ने भोड़की को पूरे राजस्थान में एक मॉडल के रूप में स्थापित किया है. भोड़की गांव के विकास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां करोड़ों रुपये के विकास कार्य जनसहयोग से किए गए हैं. गांव में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई गोशाला और करीब 80 लाख रुपये की लागत से तैयार खेल मैदान इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं. ग्रामीणों ने बिना किसी बड़े सरकारी बजट का इंतजार किए आपसी सहयोग, दान और सामूहिक प्रयासों से इन परियोजनाओं को साकार किया. यही कारण है कि आज भोड़की आत्मनिर्भर गांव के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है. गांव का इतिहास भी बेहद रोचक और गौरवशाली रहा है. स्थानीय निवासी राजकुमार सैनी के अनुसार प्राचीन समय में यहां भोड़ा गुर्जर नाम का एक ग्वाला निवास करता था. उस दौर में नवाबों का शासन था. वर्ष 1735 में शार्दूल सिंह के पुत्र जोरावर सिंह ने भोड़ा गुर्जर की सहायता से नवाब को पराजित कर इस क्षेत्र में अपना शासन स्थापित किया. इस घटना के बाद इस स्थान को भोड़ा की बस्ती के नाम से जाना जाने लगा, जिसने आगे चलकर भोड़की का स्वरूप धारण कर लिया. Add News18 as Preferred Source on Google समय के साथ भोड़की गांव का विस्तार हुआ और इसका प्रशासनिक महत्व भी बढ़ा. पहले इसे भोड़ाकी कहा जाता था, लेकिन धीरे-धीरे लोगों की बोलचाल में इसका नाम भोड़की हो गया. वर्तमान में भोड़की एक पंचायत मुख्यालय है, जिसके अंतर्गत बड़ापाना, कचौलिया जोहड़, ढाब जोहड़ और धमाणा जोहड़ जैसे कई राजस्व गांव शामिल हैं. शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं की बात करें तो यहां आजादी से पहले वर्ष 1932 में पुलिस चौकी स्थापित हो चुकी थी और वर्ष 1936 में विद्यालय भी शुरू हो गया था. गांव में स्थित जमवाय ज्योति गोशाला सामाजिक सेवा और गौसंरक्षण का बड़ा केंद्र बन चुकी है. गोशाला के अध्यक्ष शिवराम गोदारा के अनुसार वर्ष 2015 में ग्रामीणों और भामाशाहों के सहयोग से इसकी स्थापना की गई थी. स्थापना के बाद से लेकर अब तक गोशाला के विकास, पशुओं की देखभाल, भवन निर्माण और अन्य सुविधाओं पर 5 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है. यह गोशाला न केवल क्षेत्र में गौसेवा का केंद्र है, बल्कि जनसहयोग की शक्ति का भी जीवंत उदाहरण मानी जाती है. खेलों के क्षेत्र में भी भोड़की गांव ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. गांव के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किए गए खेल मैदान पर अब तक लगभग 80 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं. स्टेडियम समिति के अध्यक्ष हरलाल गढ़वाल बताते हैं कि यह पूरा कार्य ग्रामीणों और दानदाताओं के सहयोग से संभव हुआ है. इस मैदान के बनने से गांव के युवाओं को खेल प्रतिभा निखारने का अवसर मिला है और कई खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना रहे हैं. भोड़की गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान जमवाय माता मंदिर से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि गांव के धमाणा जोहड़ में माता का शिला स्वरूप प्राकृतिक रूप से धरती से प्रकट हुआ था. इसके बाद श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ी और धामाराम द्वारा यहां मंदिर का निर्माण करवाया गया. मंदिर के निकट स्थित धमाणा तालाब भी धार्मिक महत्व रखता है. आज जमवाय माता मंदिर भोड़की की पहचान बन चुका है और नवरात्र के दौरान यहां लगने वाले मेले में देशभर से हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

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AN-32 Plane crash | Air Force Plane Crash | असम के जोरहाट...

असम के जोरहाट स्थित रौरिया एयरफोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का एक AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक उस हादसा समय हुआ, जब विमान एयरबेस पर लैंडिंग की कोशिश कर रहा था. घटना के बाद पूरे एयरफोर्स स्टेशन में हड़कंप मच गया और राहत-बचाव दलों को तुरंत मौके पर भेजा गया. भारतीय वायुसेना (IAF) ने हादसे की पुष्टि करते हुए कहा कि एक सैन्य विमान जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर दुर्घटना का शिकार हुआ है. यह विमान AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट था, जिसका इस्तेमाल सैन्य रसद और जरूरी सामानों के परिवहन के लिए किया जाता है. हादसे के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा प्राप्त जानकारी के अनुसार, विमान एयरबेस पर उतर रहा था, तभी यह क्रैश हो गया. हादसे की वजह से एयरफोर्स का विमान दो टुकड़ों में टूट गया और वहां से आग और धुएं का गुबार उठता दिखा. विमान में सवार कर्मियों की संख्या और उनकी स्थिति को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान क्रैश के बाद दो हिस्सों में बंट गया. पायलट की मौत की आशंका हादसे के बाद सामने आई शुरुआती रिपोर्टों में पायलट के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि भारतीय वायुसेना ने अभी तक किसी मौत या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. बचाव दल और मेडिकल टीमें मौके पर मौजूद हैं तथा स्थिति का आकलन किया जा रहा है. रौरिया एयरफोर्स स्टेशन भारतीय वायुसेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यह पूर्वोत्तर भारत में वायुसेना के प्रमुख ठिकानों में शामिल है और असम समेत पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में सैन्य अभियानों तथा लॉजिस्टिक सपोर्ट में अहम भूमिका निभाता है. 3 बार हादसे का शिकार हो चुका AN-32 विमान, 42 जवानों की गई जान वर्ष 1986 के बाद भारत में एएन-32 विमान के 22 हादसे हो चुके हैं. वहीं साल 2016 से लेकर 2026 तक यानी पिछले 10 वर्षों में भारतीय वायुसेना के AN-32 परिवहन विमान से जुड़े तीन प्रमुख हादसे सामने आए हैं. इनमें से दो हादसे बेहद घातक रहे, जबकि एक में सभी कर्मी सुरक्षित बच गए थे. 22 जुलाई 2016 को AN-32 विमान चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जाते समय बंगाल की खाड़ी के ऊपर लापता हो गया था. विमान में सवार सभी 29 लोगों की मौत हो गई थी. इसका मलबा 2024 में समुद्र की गहराई में मिला, लेकिन हादसे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी. इसके बाद 3 जून 2019 को एक अन्य AN-32 विमान असम के जोरहाट से अरुणाचल प्रदेश के मेचुका जाते समय तातो क्षेत्र की पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में विमान में सवार सभी 13 लोगों की जान चली गई. वहीं, 7 मार्च 2025 को पश्चिम बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट पर AN-32 विमान की क्रैश लैंडिंग हुई. विमान लैंडिंग के समय रनवे से फिसलकर क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित रहे और किसी की जान नहीं गई. इन तीन हादसों में कुल 42 लोगों की मौत हुई, जबकि 2025 की घटना में कोई हताहत नहीं हुआ. Source link

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लैंडिंग के बाद देखिए कैसे आग का गोला बन गया IAF का...

होमवीडियोदेश लैंडिंग के बाद देखिए कैसे आग का गोला बन गया IAF का विमान-VIDEO X लैंडिंग के बाद देखिए कैसे आग का गोला बन गया IAF का विमान-VIDEO   Assam Plane Crash Video: असम के जोरहाट से भारतीय वायुसेना के AN-32 विमान हादसे की बड़ी खबर सामने आई है. जानकारी के मुताबिक एयरफोर्स का विमान जोरहाट के रौरेआह एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के बाद अचानक हादसे का शिकार हो गया. बताया जा रहा है कि रनवे पर पहुंचने के कुछ ही देर बाद पूरा एयरक्राफ्ट आग के गोले में बदल गया. घटना के बाद एयरबेस पर अफरा-तफरी मच गई. हादसे का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें विमान से ऊंची लपटें और काला धुआं उठता दिखाई दे रहा है. शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार विमान का पायलट गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है और उसके बचने की उम्मीद बेहद कम बताई जा रही है. हालांकि आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है. रौरेआह एयरफोर्स स्टेशन पूर्वोत्तर भारत के सबसे अहम सैन्य एयरबेस में गिना जाता है. यह स्टेशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां से पूर्वोत्तर के कई ऑपरेशन संचालित होते हैं. हादसे के तुरंत बाद एयरफोर्स और बचाव दल मौके पर पहुंच गए. फिलहाल दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है. तकनीकी खराबी, लैंडिंग फेलियर या किसी अन्य वजह की जांच की जा रही है. भारतीय वायुसेना की ओर से जल्द आधिकारिक बयान जारी किया जा सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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