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गिरिजा देवी, उस्ताद विस्मिल्लाह खान, वाराणसी के भारत रत्न व पद्मविभूषण के...

Last Updated:June 12, 2026, 16:20 IST वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि काशी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पद्मविभूषण गिरिजा देवी, सुप्रसिद्ध गायक पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र सहित कई हस्तियां रही है. इन हस्तियों से जुड़ी कई अनमोल चींजे है जो उनके घर में पड़े है. इन सारी चींजों को संरक्षित करके उनके घर के ही एक कमरें में उन्हें सजाया जाएगा. वाराणसीः देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में कई भारत रत्न और पद्मविभूषण हस्तियां है. इन हस्तियों के संगीत और नृत्य के साथ अलग अलग विधाओं में अपना नाम देश ही नहीं बल्कि दुनिया में रोशन किया है. इन्ही नामचीन हस्तियों के नाम पर अब काशी में म्यूजियम तैयार किया जाएगा. वाराणसी नगर निगम ने इसका पूरा खाका तैयार किया है. वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि काशी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पद्मविभूषण गिरिजा देवी, सुप्रसिद्ध गायक पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र सहित कई हस्तियां रही है. इन हस्तियों से जुड़ी कई अनमोल चींजे है जो उनके घर में पड़े है. इन सारी चींजों को संरक्षित करके उनके घर के ही एक कमरें में उन्हें सजाया जाएगा. 30 करोड़ होगा खर्च उनके घर का वो कमरा उनके नाम म्यूजियम के तौर पर विकसित होगा. इस काम पर 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे. अशोक तिवारी ने बताया कि इन हस्तियों के घर जाने वाले मार्ग का भी नगर निगम सुंदरीकरण कराएगा. ताकि संगीत प्रेमी उनके घर तक आसानी से पहुंच सकें. इन रास्तों को नगर निगम कुछ इस कदर सजायेगा की लोग उनके बारे में बेहतर तरीके से जान और समझ सकें. यह गलियां विश्वस्तरीय होगी, यहां खूबसूरत वॉल पेंटिंग्स और लाइट्स भी लगाएं जाएंगे. परिवार से बातचीत जारी अशोक तिवारी ने बताया की उन सभी महान हस्तियों के परिवार वालों से अफसर लगातार बातचीत भी कर रहें है और उनसे उनके घर के एक कमरें को म्यूजियम के तौर पर विकसित करने पर लगातार चर्चा जारी है. जैसे-जैसे उनके परिवार वालों से इसपर सहमति मिलेगी वैसे-वैसे इस काम को आगे बढ़ाया जाएगा. बताते चलें कि वाराणसी में भारत रत्न,पद्मविभूषण पद्मभूषण सम्मान पाने वाले सबसे ज्यादा विभूतियां है. वाराणसी के कबीरचौरा क्षेत्र में बकायदा इसके लिए पद्म गली भी बनाई गई है. जहां बनारस संगीत घराने के कई नामचीन हस्तियां रहती थी. आज भी उन गलियों के कई घरों में संगीत का विश्वविद्यालय चलता है. अलग अलग घरों में अलग अलग विधाएं सिखाई जाती है. गुरु शिष्य परम्परा का अनूठा संगम इन गलियों में देखने को मिलता है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Varanasi,Uttar Pradesh Source link

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WW2: हिटलर के ‘समुद्री दानव’ को डुबाने में ब्रिटेन को लगे थे...

27 मई 1941 की सुबह उत्तरी अटलांटिक महासागर में इतिहास का एक सबसे नाटकीय अध्याय अपने अंतिम मोड़ पर पहुंच चुका था. कुछ ही दिन पहले जिस जर्मन युद्धपोत ने ब्रिटिश साम्राज्य की समुद्री ताकत को खुली चुनौती दी थी, वही अब चारों ओर से दुश्मन जहाजों से घिरा खड़ा था. यह था जर्मनी का महाविशाल युद्धपोत बिस्मार्क, एक ऐसा नाम जिसने कुछ ही दिनों में पूरी दुनिया को अपनी ताकत का एहसास करा दिया था. फरवरी 1939 में हैम्बर्ग से लॉन्च किया गया 823 फुट लंबा बिस्मार्क उस दौर के सबसे आधुनिक और सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में गिना जाता था. एडोल्फ हिटलर को उम्मीद थी कि यह जहाज जर्मन नौसैनिक शक्ति के पुनर्जन्म का प्रतीक बनेगा. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब ब्रिटेन ने जर्मनी के समुद्री रास्तों पर कड़ी निगरानी लगा रखी थी, तब बिस्मार्क को अटलांटिक महासागर में भेजने का फैसला किया गया. योजना बेहद खतरनाक थी. खुले अटलांटिक में पहुंचकर बिस्मार्क मित्र देशों के व्यापारिक जहाजों और ब्रिटेन की आपूर्ति लाइनों पर हमला करने वाला था. यदि वह खुले समुद्र में स्वतंत्र रूप से घूमने लगता, तो ब्रिटेन की समुद्री जीवनरेखा गंभीर संकट में पड़ सकती थी. फिर आया 24 मई 1941 का दिनआइसलैंड के पास डेनमार्क स्ट्रेट में बिस्मार्क का सामना ब्रिटिश नौसेना के गौरव HMS Hood और नए युद्धपोत Prince of Wales से हुआ. इसके बाद शुरू हुई भीषण गोलाबारी ने नौसैनिक इतिहास का रुख बदल दिया. बिस्मार्क के एक घातक गोले ने HMS Hood के गोला-बारूद भंडार को भेद दिया. कुछ ही क्षणों में एक विशाल विस्फोट हुआ और ब्रिटेन का गौरव माना जाने वाला युद्धपोत दो हिस्सों में टूटकर समुद्र में समा गया. 1,418 अधिकारियों और नौसैनिकों में से केवल तीन लोग जीवित बच सके. यह ब्रिटिश नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी समुद्री त्रासदियों में से एक थी. इसी लड़ाई में Prince of Wales भी भारी दबाव में आ गया और उसे पीछे हटना पड़ा. कुछ ही घंटों में बिस्मार्क दुनिया का सबसे चर्चित युद्धपोत बन चुका था. लेकिन इस जीत की कीमत भी उसे चुकानी पड़ीलड़ाई के दौरान उसके ईंधन टैंक को नुकसान पहुंचा और तेल का रिसाव शुरू हो गया. यही रिसाव आगे चलकर उसकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुआ, क्योंकि ब्रिटिश नौसेना उसके रास्ते का अनुमान लगाने में सफल हो गई. HMS Hood के डूबने की खबर ने पूरे ब्रिटेन को झकझोर दिया. इसके बाद एक ही आदेश दिया गया—”बिस्मार्क को हर हाल में खत्म करो” ब्रिटिश नौसेना ने अपने इतिहास के सबसे बड़े शिकार अभियानों में से एक शुरू किया. बिस्मार्क को खोजने के लिए लगभग 50 युद्धपोतों और सहायक जहाजों को अभियान में झोंक दिया गया. विमानवाहक पोत, क्रूजर, विध्वंसक और युद्धपोत लाखों वर्ग मील समुद्री क्षेत्र में उसकी तलाश करने लगे. करीब तीन दिनों तक अटलांटिक महासागर में पीछा चलता रहा24 मई 1941 की रात विमानवाहक पोत HMS Victorious से उड़ान भरने वाले Swordfish विमानों ने पहला हमला किया. खराब मौसम, अंधेरा और भारी एंटी-एयरक्राफ्ट फायर के बावजूद पायलटों ने बिस्मार्क तक पहुंचकर टॉरपीडो हमला किया. जहाज को कुछ नुकसान पहुंचा, लेकिन वह अभी भी भाग निकलने में सक्षम था. दो दिन बाद, 26 मई को बिस्मार्क फिर दिखाई दिया. अब वह फ्रांस के ब्रेस्ट बंदरगाह से एक दिन से भी कम दूरी पर था. अगर वह वहां पहुंच जाता, तो जर्मन हवाई सुरक्षा उसे बचा सकती थी. यहीं से इतिहास का निर्णायक मोड़ आयाविमानवाहक पोत HMS Ark Royal से 15 Swordfish विमान खराब मौसम, तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच उड़ान भरकर बिस्मार्क पर टूट पड़े. भारी गोलाबारी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दो टॉरपीडो अपने लक्ष्य तक पहुंचे. इनमें से एक टॉरपीडो बिस्मार्क के पिछले हिस्से में लगा और उसके रडर को जाम कर गया. अब दुनिया के सबसे चर्चित युद्धपोत की दिशा नियंत्रित करने की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी थी. विशाल बिस्मार्क खुले समुद्र में फंस गया था. इसके बाद ब्रिटिश बेड़े ने उसे चारों ओर से घेर लिया27 मई 1941 की सुबह HMS King George V और HMS Rodney समेत ब्रिटिश युद्धपोत उसके करीब पहुंचे और अंतिम हमला शुरू हुआ. बिस्मार्क ने अंत तक जवाबी गोलाबारी की. उसके विशाल तोपखाने आखिरी क्षण तक लड़ते रहे. लेकिन अब उसके खिलाफ पूरा ब्रिटिश बेड़ा खड़ा था. करीब 90 मिनट तक चली भीषण लड़ाई में बिस्मार्क पर 700 से अधिक गोले बरसाए गए. लगातार गोलाबारी, आग, विस्फोट और टॉरपीडो हमलों ने जर्मनी के इस महाविशाल युद्धपोत को धीरे-धीरे एक तैरते हुए मलबे में बदल दिया. फिर भी उसने आखिरी सांस तक युद्ध जारी रखाआखिरकार जब जहाज को बचाना असंभव हो गया, तो उसे स्वयं डुबाने का आदेश दिया गया. इसी दौरान ब्रिटिश भारी क्रूजर HMS Dorsetshire ने भी टॉरपीडो दागे. सुबह 10 बजकर 36 मिनट पर बिस्मार्क उत्तरी अटलांटिक की गहराइयों में समा गया. 2,221 लोगों के चालक दल में से केवल लगभग 115-116 लोग ही जीवित बच पाए. 2,000 से अधिक जर्मन नौसैनिक उसके साथ समुद्र में खो गए. सिर्फ 96 घंटे पहले जिसने HMS Hood को डुबोकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था, वही बिस्मार्क अब समुद्र की तलहटी में पहुंच चुका था. लेकिन उसकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुईबिस्मार्क का अंत केवल एक युद्धपोत का डूबना नहीं था. इस घटना ने साबित कर दिया कि समुद्री युद्ध का भविष्य बदल रहा है. विमानवाहक पोतों और नौसैनिक विमानों ने दिखा दिया कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली युद्धपोत भी अब अजेय नहीं रहा. फिर भी इतिहास में बिस्मार्क का नाम आज भी उस जहाज के रूप में दर्ज है, जिसने कुछ दिनों के लिए ही सही, लेकिन ब्रिटिश साम्राज्य की सबसे शक्तिशाली नौसेना को चुनौती दी, HMS Hood को समुद्र में दफनाया और अपने पीछे ऐसी कहानी छोड़ गया, जिसे दुनिया आज भी रोमांच के साथ पढ़ती है. Source link

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TMC Crisis Live:क्यों बिखर रही TMC, क्या अभिषेक बनर्जी जिम्मेदार? सुकांत मजूमदार...

TMC Crisis Live Updates: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस अब अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजरती दिख रही है. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर जो असंतोष शुरू हुआ था, वह अब खुली बगावत में बदलता नजर आ रहा है. एक समय ममता बनर्जी की सबसे मजबूत राजनीतिक दीवार मानी जाने वाली TMC अब अंदर से दरकती दिखाई दे रही है. विधायक, सांसद और पुराने नेता लगातार पार्टी लाइन से अलग होते जा रहे हैं. इसी बीच TMC सांसद अरूप चक्रवर्ती का NDA को समर्थन देने का संकेत ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ एक नेता का रुख बदलना नहीं, बल्कि TMC के अंदर तेजी से बढ़ती बेचैनी का बड़ा संकेत माना जा रहा है. पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं और विपक्ष इसे ममता युग के कमजोर पड़ने की शुरुआत बता रहा है. इस बीच तृणमूल कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद ने पार्टी में जारी बगावत के बीच बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को डराकर, धमकाकर और पैसे देकर तोड़ा जा रहा है. उन्होंने कहा कि ’50 लाख से 5 करोड़ रुपए तक देकर सांसदों को सेट किया गया.’ TMC में बगावत का यह दौर ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है. विधानसभा में 58 बागी विधायकों का अलग गुट बनाना, लोकसभा सांसदों के भीतर असंतोष और राज्यसभा में लगातार इस्तीफों ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बारासात सांसद काकोली घोष दस्तिदार पहले ही दावा कर चुकी हैं कि करीब 20 सांसद उनके गुट के संपर्क में हैं और NDA को समर्थन देने के लिए तैयार हैं. अब अरूप चक्रवर्ती के समर्थन ने इस संकट को और गहरा कर दिया है. दूसरी तरफ अभिषेक बनर्जी से CID की लंबी पूछताछ ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. TMC अब सिर्फ विपक्ष के हमलों से नहीं, बल्कि अपने ही नेताओं की नाराजगी से घिरी हुई दिख रही है. TMC के भीतर राजनीतिक संकट के बीच अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं. फर्जी हस्ताक्षर मामले में CID ने उनसे करीब साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी उनके कई जवाबों से संतुष्ट नहीं थी. विपक्ष इसे TMC नेतृत्व पर बढ़ते दबाव के तौर पर देख रहा है. TMC Crisis Live: TMC में लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चल रही थी संसदीय पार्टी: ऋतब्रत बनर्जी टीएमसी संकट लाइव: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और TMC से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि अगर बागी सांसदों की संख्या 20 से ज्यादा भी हो जाए तो उन्हें हैरानी नहीं होगी, क्योंकि संसदीय दल को जिस तरीके से चलाया जा रहा था वह पूरी तरह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ था. ऋतब्रत ने दावा किया कि सांसदों को स्वतंत्र रूप से सवाल पूछने का अधिकार नहीं दिया जा रहा था. उन्होंने कहा कि पिछले सत्र में उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा, क्योंकि पार्टी की रिसर्च टीम पहले से सवाल तय कर रही थी. उनके मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. TMC Crisis News Live: पाप और भ्रष्टाचार की नींव पर बना TMC का किला ढह रहा: तरुण चुघ का हमला टीएमसी संक लाइव अपडेट्स: BJP नेता और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ‘पाप, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, लूट और तुष्टिकरण की राजनीति पर बना TMC का जर्जर किला अब ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पश्चिम बंगाल को भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण का केंद्र बना दिया, अब जनता द्वारा सत्ता से बाहर किए जाने के बाद वही अपने कर्मों का बोझ झेल रहे हैं. TMC Crisis Live Updates: शाइना NC का ममता पर हमला: आप अब भी आंखों पर पट्टी बांधे हैं टीएमसी संकट न्यूज लाइव: शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना NC ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए ममता बनर्जी पर अभिषेक बनर्जी से जुड़े आरोपों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. फर्जी हस्ताक्षर विवाद और TMC के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के बयानों का जिक्र करते हुए शाइना ने कहा कि अब पार्टी के अपने नेता ही सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि लगातार बढ़ते आरोपों और नेताओं के पार्टी छोड़ने के बावजूद ममता बनर्जी संकट को स्वीकार नहीं कर रही हैं. शाइना NC ने चेतावनी दी कि अगर TMC नेतृत्व ‘जागा नहीं’ तो पार्टी अस्तित्व के संकट में फंस सकती है. TMC Crisis Live: TMC भ्रष्टाचार जांच अभी सिर्फ शुरुआत: दिलीप घोष टीएमसी संकट लाइव: पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामलों में चल रही CID जांच ‘सिर्फ शुरुआत’ है. जलपाईगुड़ी में बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि TMC शासन के दौरान हुए कथित अपराधों में हर स्तर के लोग शामिल रहे हैं. दिलीप घोष ने कहा कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और जैसे-जैसे सबूत सामने आएंगे, उसी के मुताबिक कार्रवाई भी होगी. TMC Crisis News Live: अभिषेक बनर्जी के उभार से TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह: सुकांत मजूमदार का दावा टीएमसी संक लाइव अपडेट्स: केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती दरार, खासकर सांसदों के बीच, अभिषेक बनर्जी के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर लंबे समय से चली आ रही नाराजगी का नतीजा है. सिलीगुड़ी में बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के कई वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी की “पैराशूट एंट्री” से कभी सहज नहीं थे. मजूमदार ने यह भी कहा कि अब जब TMC सत्ता में नहीं है, तो पार्टी के भीतर दबे हुए मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. TMC Crisis Live Updates: कीर्ति आजाद बोले- कल्याण बनर्जी और अभिषेक के बीच विवाद सुलझ गया टीएमसी संकट न्यूज लाइव: तृणमूल कांग्रेस में जारी सियासी घमासान के बीच सांसद कीर्ति आजाद ने दावा किया है कि कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच चल रहा विवाद अब सुलझ चुका है. उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी भावुक इंसान हैं और ‘दीदी’

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बालाघाट के इस चावल के एक नहीं दो पीएम थे दीवाने, जीआई...

Last Updated:June 12, 2026, 13:08 IST चिन्नौर चावल, जो दिखने में सामान्य और स्वाद में लाजवाब है. चावल की यह किस्म बालाघाट की ही पैदाइश है. बालाघाट के वारासिवनी इलाके में इसका उत्पादन होता है. चिन्नौर चावल को पूर्व प्रधानमंत्रियों की भी पसंद बन चुका था.साल 2022 में चिन्नौर के लिए बालाघाट को जीआई टैग मिला. ये है चिन्नौर चावल की पहचान चिन्नौर चिकना और नोकदार राइस है. मध्य प्रदेश के बालाघाट को धान का कटोरा कहा जाता है. यहां पर धान की खेती  प्रमुखता से की जाती है. यहां पर धान की कई पारंपरिक किस्मों की खेती होती है, जिसकी डिमांड न सिर्फ इंडिया में बल्कि विदेशों में भी काफी है. इसी में से एक है चिन्नौर चावल, जो दिखने में सामान्य और स्वाद में लाजवाब है. चावल की यह किस्म बालाघाट की ही पैदाइश है. बालाघाट के वारासिवनी इलाके में इसका उत्पादन होता है. चिन्नौर चावल को पूर्व प्रधानमंत्रियों की भी पसंद बन चुका था. इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के ग्रामीण हाट बाजार में विशेष कृषि उत्पाद में बालाघाट के चिन्नौर चावल का भी प्रदर्शन रहा. जहां पर कई देशों के प्रतिनिधि मंडल ने चावल की काफी सराहना की थी. ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिन्नौर चावल को अलग पहचान मिलने की संभावना है. इससे किसानों के एफपीओ भी बन सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी निर्यात पहले से बढ़ जाएगा. अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका चिन्नौर चावलबालाघाट के चिन्नौर को मिली थी नई पहचानबालाघाट के वारासिवनी के कायदी इलाके में चिन्नौर चावल की उपज हुई. ऐसे माना जाता है. यहां की जलवायु चावल के लिए सबसे बढ़िया है. ऐसे में साल 2019 में बालाघाट के कृषि विभाग ने चावल निदेशालय हैदराबाद में जीआई टैग का दावा किया. साल 2022 में चिन्नौर के लिए बालाघाट को जीआई टैग मिला. ये है चिन्नौर चावल की पहचान चिन्नौर चिकना और नोकदार राइस है. चावल का स्वाद मीठा है और साथ ही मुलायम लगता है. इसको पकने में काफी कम समय लगता है. इसलिए इसे खीर के लिए बेहतर माना जाता है. ठंडा होने के बाद भी यह चावल नर्म रहता है. अगर आपको असली चिन्नौर की पहचान करनी है, तो उसके पांच से छः दाने अच्छे से चबाकर खा लो तो उसका स्वाद लंबे समय तक मुंह में बना रहता है.  इनमें राइस ब्रान की मात्रा 17-18 प्रतिशत होती है. वहीं चिन्नौर धान की बात करें तो इसमें 20-21 प्रतिशत होती है. दो प्रधानमंत्रियों से जुड़ा है किस्सावारासिवनी के रहने वाले अनिल पिपरवार ने बताया कि एक समय था जब बालाघाट के कायदी से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लिए चिन्नौर चावल जाता था. उसके बाद भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बालाघाट के मलाजखंड आई थी तब उन्हें चिन्नौर चावल भेंट किए गए थे. उसके बाद भी कई बार बालाघाट से दिल्ली उनके लिए चावल भेजे गए. अब भी नाराज है चिन्नौर उत्पादक किसानअनिल पिपलेवार का कहना है कि भले ही बालाघाट के चिन्नौर चावल को जीआई टैग मिल चुका है. लेकिन उस स्तर की वैश्विक पहचान नहीं मिल सकी है. वहीं, किसानों को भी उतना लाभ नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में सरकार इस चावल को और भी बेहतर ढंग प्रचारित करना चाहिए. सबसे जरूरी है कि इसकी मार्केटिंग का ख्याल रखना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसकी खेती कर सकें. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Balaghat,Balaghat,Madhya Pradesh Source link

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ITR Update : इस साल भी 15 सितंबर है आईटीआर भरने की...

Last Updated:June 12, 2026, 12:08 IST ITR Deadline : आप भी नौकरीपेशा हैं तो इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की शुरुआत हो चुकी है. कई टैक्‍सपेयर्स के मन में इस बात को लेकर गफलत चल रही है कि इस बार भी आईटीआर भरने की डेडलाइन सितंबर तक रहेगी. इस चक्‍कर में अगर आप डेडलाइन को चूक गए तो कई तरह के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं. आईटीआर भरने की डेडलाइन 2026 में 31 जुलाई रखी गई है. नई दिल्‍ली. इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की शुरुआत हो चुकी है. आयकर विभाग की ओर से आईटीआर फॉर्म नोटिफाई करने के साथ ही करदाताओं के सामने रिटर्न भरने की मारामारी भी शुरू हो चुकी है. कंपनियों ने तो अपने कर्मचारियों को फॉर्म 16 भी जारी करना शुरू कर दिया है, जिसका मतलब है कि अब रिटर्न भरने की दौड़ पूरी तरह शुरू हो चुकी है. लेकिन, एक सवाल है जो हर बार करदाताओं के मन में जरूर उठता है. अगर वे इनकम टैक्‍स विभाग की ओर से तय की गई डेडलाइन को चूक जाते हैं तो क्‍या परेशानी सामने आ सकती है. दूसरी अहम बात ये है कि इस बार रिटर्न भरने की डेडलाइन क्‍या है. पिछले साल सरकार ने आईटीआर भरने के लिए सितंबर तक का समय दिया था. यही वजह है कि इस बार भी तमाम करदाताओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इस बार भी डेडलाइन वही है या फिर बदल गई है. अगर आप नौकरीपेशा हैं तो एक बात आप गांठ बांध लीजिए कि आपके लिए आईटीआर भरने की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई ही है. इस बार आप सितंबर का सोचकर चूक मत जाइएगा. दूसरी बात ये कि अगर आप डेडलाइन तक आईटीआर नहीं भरते हैं तो इसके कई तरह से नुकसान हो सकते हैं. क्‍या है आईटीआर भरने की डेडलाइन सामान्‍य करदाताओं, नौकरीपेशा और एचयएफ के लिए रिटर्न भरने की डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 है. ऐसे बिजनेसमैन और प्रोफेशनल्‍स जिनके खातों को ऑडिट की जरूरत नहीं है, उनके लिए आईटीआर की डेडलाइन 31 अगस्‍त, 2026 है. ऐसे बिजनेसमैन और पेशेवर जिनके खातों को ऑडिट की जरूरत होती है, वे 31 अक्‍टूबर तक रिटर्न भर सकते हैं. ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के तहत आने वाले टैक्‍सपेयर्स 30 नवंबर, 2026 तक अपना रिटर्न भर सकते हैं. अगर आप सामान्‍य डेडलाइन को चूक जाते हैं तो लेट पेमेंट चार्ज के साथ 31 दिसंबर, 2026 तक आईटीआर भर सकते हैं. डेडलाइन चूक गए तो क्‍या करेंआप सैलरीड पर्सन हैं या फिर एचयूएफ के रूप में आईटीआर दाखिल कर रहे हैं तो 31 जुलाई की डेडलाइन याद रखनी चाहिए. अगर आप इस डेडलाइन को चूक जाते हैं तो इनकम टैक्‍स की धारा 234एफ के तहत आप बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं. डेडलाइन के बाद रिटर्न भरने के लिए आपको लेट फीस चुकानी पडे़गी. इनकम टैक्‍स विभाग ने 5 लाख तक की सालाना कमाई पर 1,000 रुपये की लेट फीस तय की है, जबकि 5 लाख से ज्‍यादा की कमाई 5 हजार रुपये की लेट फीस लगाई जाती है. डेडलाइन चूकने पर आपको क्‍या नुकसानअगर इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की सामान्‍य डेडलाइन आप चूक गए हैं तो सेक्‍शन 234ए के तहत बकाया टैक्‍स पर ब्‍याल लगाया जा सकता है. इनकम टैक्‍स विभाग आपके नुकसान को कैरी फारवर्ड करने से इनकार कर सकता है. इतना ही नहीं आपका रिफंड आने में भी देरी हो सकती है. देरी से रिटर्न भरने पर आपको रिफंड तो मिलेगा, लेकिन आपको इस रिफंड पर मिलने वाले ब्‍याज का नुकसान हो सकता है. 31 दिसंबर के बाद आईटीआर भरते हैं तो रिफंड क्‍लेम करने का अधिकार समाप्‍त हो जाता है. इसके लिए आपको सेक्‍शन 119(2)(b) के तहत कर अधिकारियों से अपनी देरी को माफ किए जाने का आवेदन करना पड़ेगा और यह उनके ऊपर होगा कि वे आपकी बात स्‍वीकार करते हैं या नहीं. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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Video: बांग्लादेशी युवक सीमा पार करके भारतीय क्षेत्र में घुसे और चुरा...

होमताजा खबरदेश Video: बांग्लादेशी युवक सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में घुसे, चुरा ले गए सब्जी Last Updated:June 12, 2026, 11:18 IST भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर अजीब टेंशन! कैमरे में कैद हुई घुसपैठियों की करतूत, हमारी जमीन से चुरा ले गए हरी सब्जियां, फसलों को तहस-नहस कर दिया. भारतीय जमीन से सब्जी चुराते और फसल बर्बाद बांग्लादेशी युवक. हिंदुस्तान-बांग्लादेश बॉर्डर पर जो सब्जियां भारत के किसान मेहनत करके उगा रहे हैं, उन्हें बांग्लादेशी लेकर भाग जाते हैं. बांग्लादेश की तरफ से आए युवक दिनदहाड़े सब्जियां लेकर भाग रहे हैं और पौधे भी उखाड़ देते हैं. बांग्लादेशी सेना के जवान भी तब कुछ करते हैं जब फसल बर्बाद होने लगती है. इसका एक वीडियो भी है, जो इस खबर में लगा है, उसे देखकर आपको सारी बात समझ आ जाएगी. दिनदहाड़े खेतों में घुसे युवक, सब्जियां तोड़कर भागेये पूरी घटना भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी कंटीली बाड़ के पास स्थित खेतों की है. ग्राउंड से मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ बांग्लादेशी युवक सीमा पार करके भारतीय किसानों के खेतों तक पहुंच गए. उन्होंने खेतों में लगी ताजा हरी सब्जियों को उखाड़ा, उन्हें इकट्ठा किया और अपने साथ लेकर चले गए. ये सब कुछ दिन के उजाले में हुआ. खेतों से इस तरह फसल चोरी होने से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है. जवानों के सामने हुई हरकत, ग्रामीण नाराजइस घटना ने बॉर्डर के पास रहने वाले भारतीय ग्रामीणों को सबसे ज्यादा इसलिए परेशान किया है, क्योंकि यह चोरी सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में हुई है. वीडियो में देख सकते हैं कि जब सब्जियां तोड़ ली गईं, पौधे उखाड़ लिए गए तब जाकर बांग्लादेशी जवान लोगों को वहां से हटा रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि जब ये युवक भारतीय खेतों से सब्जियां बटोर रहे थे, तब सीमा के दूसरी तरफ ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ के जवान भी वहां मौजूद थे. लोगों का कहना है कि यह पूरी हरकत साफ-साफ दिखाई दे रही थी, इसके बावजूद दूसरी तरफ से उन युवकों को रोकने या टोकने की कोई कोशिश नहीं की गई. बॉर्डर पर खेती करना मुश्किलबॉर्डर के इलाकों में खेती करना पहले से ही मुश्किल काम है, और अब इस तरह की घटनाओं ने किसानों की मुसीबतें और ज्यादा बढ़ा दी हैं. किसानों का कहना है कि वे दिन-रात एक करके, पैसे लगाकर फसल तैयार करते हैं. लेकिन जब फसल कटने का वक्त आता है, तो सीमा पार से होने वाली इस चोरी के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इस तरह की हरकतों की वजह से सीमावर्ती गांवों में रहने वाले किसान अब अपने ही खेतों में जाने से डरने लगे हैं और वहां बेवजह का तनाव पैदा हो रहा है. किसानों ने की मांग, ‘बांग्लादेशी अधिकारियों से बात करे प्रशासन’इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और किसानों ने भारतीय प्रशासन और सुरक्षा बलों से कड़े कदम उठाने की अपील की है. ग्रामीणों का कहना है कि भारतीय अधिकारियों को इस मुद्दे पर बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ बात करनी चाहिए, ताकि वे अपने नागरिकों को ऐसी हरकतें करने से रोकें. किसानों ने मांग की है कि खेतों के आस-पास सुरक्षा और गश्त बढ़ाई जाए, जिससे किसान बिना किसी डर के अपनी जमीनों पर खेती कर सकें और सुरक्षित महसूस करें. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें ग्रामीणों का आरोप है कि जब ये युवक भारतीय खेतों से सब्जियां बटोर रहे थे, तब सीमा के दूसरी तरफ ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ के जवान भी वहां मौजूद थे. लोगों का कहना है कि यह पूरी हरकत साफ-साफ दिखाई दे रही थी, इसके बावजूद दूसरी तरफ से उन युवकों को रोकने या टोकने की कोई कोशिश नहीं की गई. बॉर्डर पर खेती करना मुश्किलबॉर्डर के इलाकों में खेती करना पहले से ही मुश्किल काम है, और अब इस तरह की घटनाओं ने किसानों की मुसीबतें और ज्यादा बढ़ा दी हैं. किसानों का कहना है कि वे दिन-रात एक करके, पैसे लगाकर फसल तैयार करते हैं. लेकिन जब फसल कटने का वक्त आता है, तो सीमा पार से होने वाली इस चोरी के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इस तरह की हरकतों की वजह से सीमावर्ती गांवों में रहने वाले किसान अब अपने ही खेतों में जाने से डरने लगे हैं और वहां बेवजह का तनाव पैदा हो रहा है. किसानों ने की मांग, ‘बांग्लादेशी अधिकारियों से बात करे प्रशासन’इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और किसानों ने भारतीय प्रशासन और सुरक्षा बलों से कड़े कदम उठाने की अपील की है. ग्रामीणों का कहना है कि भारतीय अधिकारियों को इस मुद्दे पर बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ बात करनी चाहिए, ताकि वे अपने नागरिकों को ऐसी हरकतें करने से रोकें. किसानों ने मांग की है कि खेतों के आस-पास सुरक्षा और गश्त बढ़ाई जाए, जिससे किसान बिना किसी डर के अपनी जमीनों पर खेती कर सकें और सुरक्षित महसूस करें. खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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बिना लाल मिर्च-हल्दी से बनता है राजस्थान का ये सफेद चिकन, जानें...

X न लाल रंग, न तीखे मसाले…फिर भी स्वाद में लाजवाब है राजस्थान का सफेद चिकन   Rajasthani Safed Chicken Recipe: राजस्थान अपनी समृद्ध पाक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है और सफेद चिकन (सफेद मांस) यहां के शाही व्यंजनों में खास स्थान रखता है. इस अनोखी डिश की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लाल मिर्च और हल्दी का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे इसका रंग पूरी तरह सफेद बना रहता है. दही, काजू, बादाम और अन्य ड्राई फ्रूट्स से तैयार की जाने वाली इसकी क्रीमी ग्रेवी इसे बेहद स्वादिष्ट बनाती है. मेवाड़ और मारवाड़ की शाही रसोई से जुड़ा यह व्यंजन आज भी लोगों की पहली पसंद है, खासकर उन लोगों के लिए जो हल्के मसालों वाला भोजन पसंद करते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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Priyanka Gandhi Congress Meeting | Priyanka Gandhi News: हर बात पर प्रदर्शन…...

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी पिछले कुछ सालों से लगातार चुनावी हार, कमजोर संगठन और जमीन पर घटते प्रभाव से जूझ रही है. ऐसे समय में पार्टी की अंदरूनी बैठकों में अक्सर बड़े-बड़े आंदोलन, सरकार घेरने की रणनीति और जनहित के मुद्दों पर आक्रामक अभियान की बातें होती हैं. लेकिन गुरुवार को हुई अहम बैठक में प्रियंका गांधी ने जिस अंदाज में सवाल उठाए, उसने कांग्रेस नेतृत्व के भीतर चल रही असली चिंता को सामने ला दिया. प्रियंका ने साफ शब्दों में पूछा कि जब बूथ स्तर पर संगठन ही नहीं है तो सिर्फ घोषणाएं और आंदोलन की बातें करने से क्या हासिल होगा. उनका यह सवाल केवल संगठन पर टिप्पणी नहीं था, बल्कि कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का आईना भी माना जा रहा है. पार्टी के कई नेताओं के लिए यह संदेश था कि केवल बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन से राजनीति नहीं चलती, उसके लिए जमीन पर मजबूत नेटवर्क भी जरूरी होता है. प्रियंका गांधी ने बैठक में यह भी कहा कि हर मुद्दे पर आंदोलन और प्रदर्शन करने की आदत से बाहर निकलना होगा. उनका मानना था कि जनता से जुड़े चुनिंदा मुद्दों पर फोकस करके लंबे समय तक योजनाबद्ध तरीके से काम करना ज्यादा असरदार होगा. कांग्रेस की इस बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल समेत कई बड़े नेता मौजूद थे. बैठक में बेरोजगारी, महंगाई, MSME सेक्टर की हालत, पेपर लीक और आर्थिक संकट जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. राहुल गांधी ने भी नेताओं को ‘आंदोलनकारी ऊर्जा’ बनाए रखने की सलाह दी, लेकिन प्रियंका का जोर इस बात पर रहा कि आंदोलन तभी सफल होगा जब संगठन मजबूत और एक्टिव हो. कांग्रेस के भीतर इसे आत्ममंथन वाली बैठक माना जा रहा है. बूथ संगठन पर प्रियंका के सवाल से बढ़ी हलचल प्रियंका गांधी ने बैठक में बेहद सीधा सवाल पूछा कि जिन मुद्दों को बूथ स्तर तक ले जाने की बात की जा रही है, वहां कांग्रेस का संगठन आखिर है कहां. उन्होंने कहा कि जब बूथ स्तर पर कार्यकर्ता और संरचना ही मजबूत नहीं है तो सिर्फ नारे और घोषणाएं करने से जनता तक संदेश नहीं पहुंचेगा. पार्टी नेताओं के मुताबिक प्रियंका ने संगठन की मॉनिटरिंग और समन्वय पर भी जोर दिया. बैठक में यह बात भी सामने आई कि कांग्रेस अब आने वाले महीनों में बड़े जनआंदोलन की तैयारी कर रही है. पार्टी महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक संकट और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है. हालांकि प्रियंका गांधी का कहना था कि आंदोलन तभी असर दिखाएंगे जब पार्टी का स्थानीय ढांचा मजबूत होगा और हर स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी. राहुल गांधी ने बैठक में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि देश की ओर ‘आर्थिक सुनामी’ बढ़ रही है. उन्होंने दावा किया कि बेरोजगारी और MSME सेक्टर की खराब हालत आने वाले समय में बड़ा संकट पैदा कर सकती है. राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की व्यापार और विदेश नीति किसानों और युवाओं के हित में नहीं है. कांग्रेस की नई रणनीति पर फोकस बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार कांग्रेस अब हर मुद्दे पर सड़क पर उतरने की बजाय चुनिंदा मुद्दों पर केंद्रित अभियान चलाने की तैयारी में है. प्रियंका गांधी ने कहा कि जनता से जुड़े दो बड़े मुद्दों को पकड़कर लगातार काम किया जाए ताकि पार्टी की विश्वसनीयता मजबूत हो सके. उन्होंने संगठन के हर स्तर पर जवाबदेही तय करने की भी बात कही. बेरोजगारी और महंगाई को बनाएगी बड़ा मुद्दा कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक के बाद कहा कि देश में बेरोजगारी चरम पर है और युवा भविष्य को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने दावा किया कि MSME सेक्टर तबाह हो चुका है और महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है. पार्टी आने वाले महीनों में इन मुद्दों को लेकर देशव्यापी अभियान चलाने की तैयारी कर रही है. क्या कांग्रेस में शुरू हुआ आत्ममंथन? प्रियंका गांधी के सवालों को कांग्रेस के अंदर बड़े आत्ममंथन की शुरुआत माना जा रहा है. लंबे समय से पार्टी के भीतर संगठन कमजोर होने की चर्चा होती रही है, लेकिन इस बार शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक तौर पर इस कमजोरी को स्वीकार करने जैसे संकेत दिए हैं. अब देखना होगा कि कांग्रेस केवल बैठकों तक सीमित रहती है या जमीन पर संगठन को मजबूत करने के लिए ठोस कदम भी उठाती है. प्रियंका गांधी ने बैठक में सबसे बड़ा सवाल क्या उठाया? प्रियंका गांधी ने पूछा कि जब बूथ स्तर पर कांग्रेस का संगठन ही मौजूद नहीं है तो सिर्फ आंदोलन और घोषणाएं करने से क्या फायदा होगा. उन्होंने संगठन की कमजोरी को कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती बताया. राहुल गांधी ने बैठक में क्या कहा? राहुल गांधी ने कहा कि देश की ओर एक ‘आर्थिक सुनामी’ बढ़ रही है. उन्होंने बेरोजगारी, MSME सेक्टर की हालत और सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर चिंता जताई और नेताओं से आंदोलनकारी ऊर्जा बनाए रखने को कहा. कांग्रेस अब आगे क्या रणनीति बना रही है? कांग्रेस अब हर मुद्दे पर प्रदर्शन करने की बजाय चुनिंदा जनहित मुद्दों पर फोकस करना चाहती है. पार्टी महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक और आर्थिक संकट को लेकर लंबा अभियान चलाने की तैयारी कर रही है. Source link

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UPSC Prelims Result 2026: यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट से पहले एडमिट कार्ड गायब...

Last Updated:June 12, 2026, 08:07 IST UPSC Prelims Result 2026: यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट की टेंशन के बीच अगर एडमिट कार्ड खो गया है तो पैनिक करने की जरूरत नहीं है. जानिए बिना रोल नंबर के सरकारी रिजल्ट कैसे चेक कर सकते हैं और संघ लोक सेवा आयोग की ओरिजिनल वेबसाइट्स कौन सी हैं. UPSC Prelims Result 2026: यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट जल्द जारी होने की संभावना है नई दिल्ली (UPSC Prelims Result 2026). यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 की घड़ी जैसे-जैसे करीब आ रही है, लाखों एस्पिरेंट्स के दिलों की धड़कनें तेज हो गईं हैं. इस भारी टेंशन के बीच 2 बड़ी मुसीबतें भी उम्मीदवारों के सामने हैं. पहली- यूपीएससी परीक्षा का एडमिट कार्ड गुम हो जाना… ऐन वक्त पर रोल नंबर न मिलना किसी डरावने सपने जैसा होता है. दूसरी- डिजिटल दुनिया का मायाजाल, जहां सोशल मीडिया पर ‘UPSC Result OUT’ के दावों के साथ धड़ाधड़ फर्जी PDF और लिंक्स शेयर होने लगते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है तो सबसे पहले लंबी सांस लीजिए और बिल्कुल भी पैनिक मत होइए. बिना रोल नंबर के भी अपनी रजिस्ट्रेशन आईडी (RID) या ईमेल के जरिए रिजल्ट चेक कर सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ, स्कैमर्स के झांसे में आने से बचने का इकलौता इलाज है कि आप सिर्फ और सिर्फ आयोग के ऑफिशियल सोर्स पर ही भरोसा करें. जानिए बिना एडमिट कार्ड के सरकारी रिजल्ट चेक करने का तरीका और वो 2 ऑफिशियल वेबसाइट्स का पता भी, जहां 100% सही रिजल्ट मिलेगा. यूपीएससी एडमिट कार्ड गायब? टेंशन मत लीजिए, ये रहा ‘प्लान बी’ यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 आते ही सबसे पहला काम होता है पीडीएफ डाउनलोड करके उसमें रोल नंबर सर्च करना. लेकिन अगर एडमिट कार्ड खो गया है और रोल नंबर याद नहीं है तो भी घबराने की जरूरत नहीं है. इसके लिए सबसे पहले अपने जीमेल या उस ईमेल आईडी के इनबॉक्स में जाएं, जिससे यूपीएससी का फॉर्म भरा था. वहां सर्च बार में ‘UPSC’ या ‘Registration’ लिखकर सर्च करें. फॉर्म भरते वक्त आयोग जो कन्फर्मेशन मेल भेजता है, उसमें रजिस्ट्रेशन आईडी (RID) सुरक्षित रहती है. ‘Forgot RID’ का ऑप्शन और ईमेल इनबॉक्स की ट्रिक अगर ईमेल से भी बात न बने तो सीधे यूपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं. वहां ‘Forgot RID’ या ‘Instructions’ का विकल्प मिलेगा. इस पर क्लिक करके अपना नाम, माता-पिता का नाम और बर्थ डेट एंटर करके अपनी रजिस्ट्रेशन आईडी दोबारा हासिल कर सकते हैं. एक बार जब रजिस्ट्रेशन आईडी मिल जाएगी तो उसकी मदद से अपना रोल नंबर आसानी से दोबारा डाउनलोड कर पाएंगे. इसलिए अपना हौसला बनाए रखें, यूपीएससी मेंस का रास्ता रोल नंबर खोने से बंद नहीं होगा. रिजल्ट से पहले एक्टिव हुए ऑनलाइन ठग, एक गलत क्लिक और खेल खत्म! यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 के दिन जितना प्रेशर उम्मीदवारों पर होता है, साइबर ठग और स्कैमर्स उतने ही ज्यादा एक्टिव होते हैं. वॉट्सऐप ग्रुप्स और टेलीग्राम चैनल्स पर ‘UPSC Result Link Active’ या ‘Direct Link to Check Result’ जैसे लुभावने मेसेज फॉरवर्ड होने लगते हैं. इन मेसेज में दिए गए लिंक्स अक्सर फिशिंग साइट्स होते हैं. इन पर क्लिक करते ही फोन का पर्सनल डेटा चोरी होने का खतरा रहता है या फिर ये आपको ढेरों अश्लील विज्ञापनों वाले पेज पर रीडायरेक्ट कर देते हैं. सिर्फ इन 2 ऑफिशियल वेबसाइट्स पर आएगा यूपीएससी रिजल्ट किसी भी तरह के फ्रॉड या फेक न्यूज से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है- थर्ड पार्टी सोर्स पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, यूपीएससी कभी भी किसी प्राइवेट साइट पर सरकारी रिजल्ट जारी नहीं करता. केवल इन दो ऑफिशियल वेबसाइट्स पर ही नजर रखें: upsc.gov.in upsconline.nic.in जैसे ही नतीजे घोषित होंगे, सबसे पहले ‘What’s New’ सेक्शन में क्वॉलिफाई हुए कैंडिडेट्स के रोल नंबर वाला पीडीएफ अपलोड किया जाएगा. अगर भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट कुछ देर के लिए क्रैश या स्लो हो जाए तो थोड़ा इंतजार कर लें. लेकिन किसी भी अनजान या अनवेरिफाइड लिंक पर क्लिक करने की भूल बिल्कुल न करें. सुरक्षित रहें और सही सोर्स से ही यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 चेक करें. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Petrol-Diesel Price : बिहार में डीजल 100 रुपये के पार, पेट्रोल भी...

Last Updated:June 12, 2026, 06:38 IST Petrol-Diesel Price : ग्‍लोबल मार्केट में कई महीने बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंची हैं. इसका शुक्रवार सुबह देश के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर भी दिखा. आज कई शहरों में तेल के दाम बदल गए हैं. कुछ जगहों पर इसकी कीमतों में उछाल दिख रहा है तो कुछ जगहों पर गिरावट दिखी है. ग्‍लोबल मार्केट में कच्‍चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दिख रही है. नई दिल्‍ली. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम की गुंजाइशों ने कच्‍चे तेल की कीमतों पर भी दबाव डाला है. यही वजह रही कि शुक्रवार सुबह ग्‍लोबल मार्केट में कई महीनों बाद कच्‍चे तेल दाम 90 डॉलर से नीचे आए हैं. इसका असर सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर भी दिख रहा है. आज देश के कई शहरों में तेल के दाम बदल गए हैं. कुछ जगहों पर इसकी कीमतों में गिरावट दिख रही है तो कुछ शहरों में भाव बढ़ता दिख रहा है. हालांकि, दिल्‍ली-मुंबई जैसे देश के चारों महानगरों में तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है. सरकारी तेल कंपनियों के अनुसार, गाजियाबाद में पेट्रोल 30 पैसे महंगा होकर 102.10 रुपये लीटर हो गया है तो डीजल 29 पैसे बढ़त के साथ 95.58 रुपये लीटर पहुंच गया है. हरियाणा की राजधानी गुरुग्राम में पेट्रोल 4 पैसे महंगा होकर 102.80 रुपये लीटर बिक रहा है तो डीजल भी 4 पैसे बढ़त के साथ 95.47 रुपये लीटर के भाव पहुंच गया है. बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 69 पैसे महंगा होकर 114.24 रुपये लीटर हो गया तो डीजल 66 पैसे महंगा होकर 100.20 रुपये लीटर बिक रहा है. कच्‍चे तेल की बात करें तो बीते 24 घंटे में इसकी कीमतों में गिरावट दिख रही है. ग्‍लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.50 डॉलर टूटकर 89.03 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. डब्‍ल्‍यूटीआई का रेट भी गिरा है और ग्‍लोबल मार्केट में अब 86.33 डॉलर प्रति बैरल के भाव चल रहा है. चारों महानगरों में पेट्रोल-डीजल के दाम– दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर– मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर– चेन्नई में पेट्रोल 108.01 रुपये और डीजल 99.78 रुपये प्रति लीटर– कोलकाता में पेट्रोल 113.47 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर इन शहरों में बदल गए रेट– गाजियाबाद में पेट्रोल 102.10 रुपये और डीजल 95.58 रुपये प्रति लीटर हो गया है.– गुरुग्राम में पेट्रोल 102.47 रुपये और डीजल 95.47 रुपये प्रति लीटर हो गया है.– पटना में पेट्रोल 114.24 रुपये और डीजल 100.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है. हर सुबह 6 बजे जारी होते हैं नए रेटहर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है. सुबह 6 बजे से ही नए रेट लागू हो जाते हैं. पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन, वैट और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम मूल भाव से लगभग दोगुना हो जाता है. यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल के दाम इतने अधिक दिखाई देते हैं. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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