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Monsoon News | Weather Scientist News | IMD Rain Alert | IMD...

होमफोटोदेश लू के बीच गुड न्यूज! कई राज्यों में बारिश, 60KM की रफ्तार से तूफान का अलर्ट Last Updated:May 22, 2026, 22:49 IST Weather Scientist Alert For Rain: ऐसी भीषण गर्मी पड़ रही है, बाहर धूप क्या घर भी भट्टी बन गए हैं. कूलर-पंखे तो इस गर्मी के आगे फेल हो गए हैं. अब तो एसी ही सहारा है. लेकिन, एसी तो सभी अफोर्ड नहीं कर सकते हैं, ऊपर बिजली की हाई डिमांड के बाद पावर कट भी होने की संभावना बढ़ जाता है. आईएमडी ने अगले 6-7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में भयंकर लू का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है. उत्तर प्रदेश (यूपी), राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश भट्टी की तरह तप रहे हैं. लेकिन, इन सबके बीच स्काईमेट के मौसम विज्ञानी महेश पहलावत ने एक बड़ी खुशखबरी दी है. पहाड़ों, पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत में भारी बारिश का दौर शुरू होने वाला है. दिल्ली-पंजाब और हरियाणा में भी आंधी-बारिश से राहत की उम्मीद है. पूरे उत्तर भारत में पारा 47 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. लू तो ऐसी चल रही है कि मानों शरीर पानी सोख लेगी. आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. मौसम विभाग (आईएमडी) की ताजा चेतावनी ने लोगों के पसीने और छुड़ा दिए हैं, क्योंकि अगले एक हफ्ते तक इस जानलेवा गर्मी से कोई बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है. लेकिन, निराशा और तपिश के इस रेगिस्तान के बीच स्काईमेट वेदर से एक ठंडी हवा का झोंका भी आया है. भीषण गर्मी के बीच कुछ राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है. आईएमडी के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी, मध्य और पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों के साथ-साथ प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में अगले छह से सात दिनों तक लू का भयंकर प्रकोप जारी रहेगा. मई के इस आखिरी हफ्ते में आसमान से आग बरसने का यह सिलसिला थमेगा नहीं. 23 से 28 मई तक लोगों को चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के थपेड़ों का कड़ा सामना करना पड़ेगा. प्रशासन ने लोगों को बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी है. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लोगों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट बेहद डराने वाला है. 22 से 28 मई तक इन दोनों राज्यों के कई इलाकों में भयानक लू चलने की आशंका है. विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में ‘भीषण लू’ का अलर्ट जारी किया गया है. यहां दिन के समय सूरज की तपिश इतनी तेज होगी कि सड़कों पर सन्नाटा पसर सकता है. कई शहरों में अधिकतम तापमान अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google देश की राजधानी दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा भी इस हीटवेव के टॉर्चर से अछूते नहीं रहेंगे. मौसम विभाग ने 23 से 28 मई के बीच इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में लगातार लू चलने की प्रबल संभावना जताई है. स्थिति और भी बदतर तब होगी जब 24 से 27 मई के बीच इन राज्यों के कई इलाकों में भीषण लू का अलर्ट सक्रिय हो जाएगा. दिल्ली एनसीआर में तो कंक्रीट की इमारतों के बीच गर्मी का यह सितम लोगों को पूरी तरह बेहाल कर देगा. रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में गर्मी पहले ही अपने चरम स्तर पर पहुंच चुकी है. मौसम विभाग के मुताबिक, 23 से 28 मई के दौरान राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में लू का कहर बदस्तूर जारी रहेगा. सबसे ज्यादा परेशानी पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में होगी, जहां 24 से 28 मई के बीच भीषण लू की जानलेवा स्थिति बनेगी. यहां रेत इतनी गर्म हो जाएगी कि आम जनजीवन पूरी तरह से ठप होने की कगार पर पहुंच जाएगा. गर्मी का यह खौफनाक दायरा सिर्फ उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है. मौसम विभाग ने बताया है कि महाराष्ट्र के विदर्भ, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना में भी 23 से 28 मई के बीच झुलसाने वाली लू चलेगी. सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि पहाड़ों पर बसे जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के निचले हिस्सों में भी अलग-अलग तारीखों पर लू या भीषण लू की स्थिति रहने का पूर्वानुमान है, जो ग्लोबल वार्मिंग का एक स्पष्ट और खतरनाक संकेत है. गर्मी का यह टॉर्चर सिर्फ दिन के उजाले तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रात के अंधेरे में भी लोगों को चैन की नींद नसीब नहीं होगी. मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ इलाकों में 23 से 24 मई तक रात के समय भी मौसम बेहद गर्म रहने का अनुमान है. इसके अलावा, ओडिशा में 22 से 26 मई तक और तेलंगाना में 23 मई को रात में भी गर्म हवाएं चलेंगी, जिससे घरों के अंदर भारी उमस और बेचैनी का माहौल रहेगा. झुलसाती गर्मी के बीच स्काईमेट के मशहूर मौसम वैज्ञानिक महेश पहलावत ने एक बड़ी और सुकून देने वाली खुशखबरी शेयर की है. उन्होंने बताया कि भले ही देश का आधे से ज्यादा हिस्सा 47 और 48 डिग्री की भट्टी में तप रहा है, लेकिन पहाड़ों पर मौसम जल्द ही शानदार करवट लेगा. हिमालयी क्षेत्रों और पहाड़ी राज्यों में अच्छी बारिश होने की प्रबल संभावना है. यह बारिश न सिर्फ पहाड़ों को बल्कि वहां से आने वाली ठंडी हवाओं के जरिए मैदानी इलाकों को भी राहत देगी. महेश पहलावत के पूर्वानुमान के अनुसार, मैदानी इलाकों के लोगों के लिए भी आसमान में थोड़ी उम्मीद बची है. पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में जल्द ही बारिश की संभावना बन रही है. इसके साथ ही, दिल्ली एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर बादल गरज सकते हैं. हल्की बारिश की फुहारें पड़ सकती हैं. उत्तर-पश्चिमी राजस्थान, दिल्ली और यूपी के कुछ हिस्सों में धूल भरी तेज आंधी आ सकती है. इसके अलावा बिहार के तराई वाले जिलों में भी बारिश का अनुमान जताया गया है.<br />महेश पहलावत के पूर्वानुमान के अनुसार, मैदानी इलाकों के लोगों के लिए भी आसमान में थोड़ी उम्मीद बची है. पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में जल्द ही बारिश की संभावना बन रही है. इसके साथ ही, दिल्ली एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर बादल गरज सकते हैं. हल्की

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Jaguar fighter jets | विदेशी कंपनियों ने खड़े किए हाथ, संकट में...

Jaguar Fighter Jet: भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले जगुआर (Jaguar) फाइटर जेट्स इन दिनों गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. ठीक वही समस्या है जिससे कभी मिग-21 (MiG-21) जेट्स जूझ रहे थे यानी स्पेयर पार्ट्स की कमी. दुनिया में भारत एकमात्र ऐसा देश है, जो आज भी जगुआर फाइटर जेट्स का इस्तेमाल कर रहा है. ऐसे में जगुआर के पार्ट्स बनाने वाली विदेशी कंपनियों ने अब स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराने में अपनी असमर्थता जता दी है, जिससे वायुसेना की चिंताएं बढ़ गई हैं. भारतीय वायुसेना ने अपने कैपेबिलिटी रोडमैप दस्तावेज में इस संकट का खुलासा किया है. इसमें जगुआर विमानों में लगी ‘मार्टिन-बेकर इजेक्शन सीटों’ (Martin-Baker Ejection Seats) के पार्ट्स पुराने पड़ रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ओरिजिनल इक्विपमेंट निर्माता कंपनी मार्टिन-बेकर ने इजेक्शन सीटों के लिए आवश्यक स्पेयर पार्ट्स की 250 से अधिक लाइनों की सप्लाई करने से साफ इनकार कर दिया है. 2 जरूरी प्वाइंट्स इजेक्शन सीटक्यों है जरूरी? इजेक्शन सीट किसी भी फाइटर जेट का सबसे अहम हिस्सा होती है. अगर हवा में जेट का इंजन फेल हो जाए, विमान से कोई पक्षी टकरा जाए (Bird Hit) या कोई तकनीकी खराबी आ जाए, तो यही सीट पायलट को रॉकेट की तरह विमान से बाहर सुरक्षित निकालती है. अगर इस सीट के पार्ट्स एक्सपायर हो जाएं, तो पायलट की जान को भारी खतरा हो सकता है. क्या है फॉर्म-700 का नियम? फाइटर जेट को उड़ान भरने से पहले लंबी चेकिंग से गुजरना होता है (जैसे- हथियार, फ्यूल, पार्ट्स आदि). यह सारी जानकारी फॉर्म-700 नाम के दस्तावेज में दर्ज होती है. अगर इस फॉर्म में इजेक्शन सीट की किसी भी खराबी का जिक्र हो, तो उस फाइटर जेट को उड़ने की परमिशन किसी भी कीमत पर नहीं दी जाती है. जगुआर फाइटर जेट संकट के दौर से गुजर रहा है. इसके इजेक्शन पुर्जे विदेशी कंपनियों से नहीं मिल रहे हैं. वायुसेना का ‘देसी’ मास्टरप्लान चूंकि इजेक्शन सीट के बिना जगुआर उड़ान नहीं भर सकते, इसलिए वायुसेना फिलहाल इन सीटों की मरम्मत अपने बेस पर ‘इन-हाउस’ ही कर रही है. लेकिन, एयरफोर्स का मानना है कि यह कोई स्थायी समाधान नहीं है. सीटों के सटीक आकार, फिटिंग और क्वालिटी को मेंटेन रखने के लिए अब एयरफोर्स देश में ही भारतीय कंपनियों की मदद से इसका स्वदेशी समाधान विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. फिलहाल भारत के पास जगुआर के 6 स्क्वाड्रन मौजूद हैं, जिन्हें हाल ही में अपग्रेड किया गया था. 2035 तक खत्म हो जाएगी पुरानी फ्लीट भारतीय वायुसेना अपने बेड़े को लगातार आधुनिक बना रही है. मिग-21 के अलग-अलग वेरिएंट (बिस, टाइप-96, बाइसन) और मिग-27 पहले ही रिटायर हो चुके हैं. साल 2030 से मिग-29 भी सेवा से बाहर होना शुरू हो जाएंगे. इसके बाद मिराज-2000 के 3 स्क्वाड्रन और जगुआर के 6 स्क्वाड्रन का नंबर आएगा. कुल मिलाकर 2035 तक वायुसेना की पुरानी फाइटर फ्लीट लगभग पूरी तरह बाहर हो जाएगी. कौन करेगा खालीपन की भरपाई इस भारी कमी को पूरा करने के लिए एयरफोर्स का पूरा भरोसा अब स्वदेशी फाइटर जेट तेजस मार्क-1ए (Tejas Mark-1A) और 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट पर टिका है. एचएएल (HAL) के साथ कुल 220 तेजस फाइटर जेट की खरीद का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट किया जा चुका है, जिसमें से तेजस मार्क-1 के 38 जेट वायुसेना को मिल चुके हैं, जबकि 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी का बेसब्री से इंतजार है. जगुआर फाइटर जेट्स के संचालन में भारतीय वायुसेना को फिलहाल किस समस्या का सामना करना पड़ रहा है? भारत दुनिया का इकलौता देश है जो अब भी जगुआर विमान उड़ा रहा है. वायुसेना को फिलहाल जगुआर की ‘इजेक्शन सीटों’ के स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि विदेशी निर्माता कंपनी ने पार्ट्स देने से मना कर दिया है. इजेक्शन सीट (Ejection Seat) किसी भी फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों होती है? बर्ड हिट, इंजन फेल होने या किसी अन्य गंभीर इमरजेंसी के समय पायलट को विमान से सुरक्षित बाहर निकालने का काम इजेक्शन सीट ही करती है. इसके बिना उड़ान भरना पायलट की जान के लिए सीधा खतरा है. फाइटर जेट्स की उड़ान में ‘फॉर्म-700’ (Form-700) क्या होता है? उड़ान से पहले एयरक्राफ्ट के पार्ट्स, फ्यूल, एम्यूनिशन और सिस्टम की पूरी चेकिंग की जाती है, जिसे फॉर्म-700 में दर्ज किया जाता है. यदि इस फॉर्म में विमान या इजेक्शन सीट में कोई खराबी दर्ज हो, तो जेट को उड़ान की अनुमति नहीं मिलती है. जगुआर, मिग-29 और मिराज-2000 के फेज आउट होने पर वायुसेना उनकी जगह किन विमानों को शामिल करेगी? इन पुरानी फ्लीट के रिटायर होने पर वायुसेना मुख्य रूप से स्वदेशी फाइटर जेट ‘तेजस मार्क-1ए’ और 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) पर निर्भर करेगी, जिसके लिए HAL के साथ बड़े कॉन्ट्रैक्ट किए गए हैं. Source link

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अंतरिक्ष में भारत का नया ‘खेल’! चीन-अमेरिका की हो गई बोलती बंद,...

होमताजा खबरदेश अंतरिक्ष में भारत का नया ‘खेल’! चीन-US की हुई बोलती बंद, बनेंगे प्राइवेट रॉकेट Last Updated:May 22, 2026, 23:44 IST भारत ने अंतरिक्ष सेक्टर में बड़ा दांव खेलते हुए गुजरात और तमिलनाडु में स्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने को मंजूरी दे दी है. इन हाईटेक क्लस्टर में अब प्राइवेट कंपनियां भी रॉकेट, सैटेलाइट और लॉन्च सिस्टम तैयार कर सकेंगी. गुजरात के खोराज में स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क और तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्पेस व्हीकल्स क्लस्टर बनाया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे भारत ग्लोबल स्पेस मार्केट में बड़ी ताकत बनकर उभरेगा. यह कदम स्टार्टअप्स, एमएसएमई और निजी कंपनियों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है. स्‍पेस की दुनिया में भारत ने नया कदम बढ़ाया है. यह कदम चीन और अमेरिका के लिए किसी झटके से कम नहीं है. India Space News: भारत अब अंतरिक्ष की दुनिया में ऐसा बड़ा दांव खेलने जा रहा है, जिसने चीन और अमेरिका जैसे देशों की बोलती बंद कर दी है. केंद्र सरकार ने गुजरात और तमिलनाडु में बड़े स्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने को मंजूरी दे दी है. खास बात यह है कि यहां सिर्फ सरकारी एजेंसियां ही नहीं, बल्कि प्राइवेट कंपनियां भी रॉकेट और स्पेस सिस्टम तैयार कर सकेंगी. यानी आने वाले समय में भारत में निजी कंपनियों के बनाए रॉकेट अंतरिक्ष में उड़ते नजर आ सकते हैं. सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पूरी दुनिया में स्पेस इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है. सैटेलाइट लॉन्च से लेकर स्पेस टेक्नोलॉजी तक, हर देश इस सेक्टर में अपनी ताकत बढ़ाने में जुटा है. भारत भी अब इस दौड़ में सिर्फ हिस्सा लेने नहीं, बल्कि नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है. गुजरात के खोराज में ‘स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क’ बनाया जाएगा. यहां सैटेलाइट, पेलोड सिस्टम और स्पेसक्राफ्ट से जुड़े उपकरण तैयार किए जाएंगे. ‘स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क’ में हाईटेक टेस्टिंग और डेवलपमेंट की सुविधाएं भी होंगी. इससे भारत में स्पेस टेक्नोलॉजी बनाने वाली कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा. तमिलनाडु के तूतीकोरिन में “स्पेस व्हीकल्स क्लस्टर” तैयार किया जाएगा. यह जगह छोटे रॉकेट और लॉन्च सिस्टम बनाने के लिए खास तौर पर विकसित की जा रही है. यहां रॉकेट सिस्टम की टेस्टिंग, इंटीग्रेशन और प्रोपल्शन वैलिडेशन जैसी एडवांस सुविधाएं मौजूद होंगी. यह क्लस्टर कुलसेकरपट्टनम में बनने वाले छोटे लॉन्च कॉम्प्लेक्स के पास होगा, जिससे लॉन्चिंग प्रॉसेस और आसान हो जाएगा. अब तक भारत का स्पेस सेक्टर ज्यादातर इसरो के इर्द-गिर्द ही सीमित था, लेकिन सरकार ने कुछ साल पहले इसे निजी कंपनियों के लिए खोल दिया था. इसके बाद कई भारतीय स्टार्टअप्स ने छोटे रॉकेट और सैटेलाइट बनाने शुरू किए. अब सरकार उन्हें ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर देने जा रही है, जो पहले सिर्फ बड़े देशों के पास हुआ करता था. इन फैसिलिटी का इस्तेमाल स्टार्टअप्स, एमएसएमई और बड़ी निजी कंपनियां कर सकेंगी. इससे उन्हें करोड़ों रुपये खर्च करके अपनी अलग टेस्टिंग लैब बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यानी छोटी कंपनियों को भी अंतरिक्ष सेक्टर में आगे बढ़ने का बड़ा मौका मिलेगा. डॉ. पवन कुमार गोयनका, चेयरमैन, IN-SPACe जल्‍द स्‍पेस मैन्‍युफैक्‍चरिंग का बड़ा हब बनेगा भारतविशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत को ग्लोबल स्पेस मार्केट में नई ताकत देगा. अभी अमेरिका और चीन इस सेक्टर में बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं, लेकिन भारत कम लागत में बेहतर तकनीक देने की वजह से तेजी से आगे बढ़ रहा है. चंद्रयान और आदित्य-L1 जैसे मिशनों के बाद दुनिया पहले ही भारत की क्षमता देख चुकी है. अब अगर निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में तेजी से काम करने लगीं, तो भारत स्पेस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बन सकता है. सरकार के मुताबिक करीब 10 राज्य ऐसे स्पेस क्लस्टर बनाने में दिलचस्पी दिखा चुके हैं. आने वाले वर्षों में भारत में ‘स्पेस इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन’ देखने को मिल सकता है. इससे रोजगार बढ़ेंगे, विदेशी निवेश आएगा और भारत का नाम अंतरिक्ष की दुनिया में और मजबूत होगा. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Dhanu Rashifal: पैतृक संपत्ति का सुख, ऑफिस में बढ़ेगा रुतबा! धनु वाले...

Last Updated:May 23, 2026, 00:03 IST Aaj ka Dhanu Rashifal 23 may 2026: धनु राशि के जातकों को आज ऑफिस में मान-सम्मान और पैतृक संपत्ति का बड़ा लाभ मिल सकता है. आर्थिक रूप से दिन मजबूत है, लेकिन सितारों की चाल को देखते हुए आज किसी भी तरह के निवेश से बचने की सलाह दी जाती है. पारिवारिक शांति के लिए गुस्से पर काबू रखें और भगवान विष्णु की पूजा करें. जानें राशिफल. जमुई. 23 मई 2026 के दिन कई राशि के जातकों पर ग्रहों का शुभ योग का असर पड़ने वाला है. ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि आज के दिन धन लाभ के कई अवसर मिलेंगे. जबकि आज कार्यस्थल पर बड़ी कामयाबी मिलने की भी संभावना है. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों पर आज गुरु, शुक्र, सूर्यदेव और बुध की मजबूत स्थिति का असर पड़ेगा. उन्होंने बताया कि आज आप अपने जीवन के कई बड़े फैसले भी कर सकते हैं. आर्थिक रूप से धनु राशि के जातकों का आज का दिन काफी अच्छा गुजरने वाला है. आज आपको अपने बिजनेस या पार्टनर बिजनेस के जरिए कोई बड़ा धन लाभ हो सकता है. आज आपको जल्दबाजी या गुस्से में आकर पैसा खर्च करने से बचना चाहिए. ऑफिस ने बना रहेगा अच्छा माहौल ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातक जहां काम करते हैं वहां आज काफी अच्छा माहौल बना रहेगा. आज आप अपने बातचीत की शैली से बड़ी मुश्किलों को सुलझा सकेंगे, जिस कारण आज आप ऑफिस में काफी प्रतिष्ठा भी प्राप्त करेंगे. अगर आप पढ़ाई-लिखाई करते हैं या किसी तरह की तैयारी से जुड़े हुए हैं, तो आज आप काफी शानदार प्रदर्शन करेंगे और आप अपने लक्ष्य को हासिल करने की तरफ और आगे बढ़ जाएंगे. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों को आज के दिन किसी भी तरह के निवेश इत्यादि से बचना चाहिए. आज आपको पैतृक संपत्ति का लाभ मिलेगा. अगर आपका कोई मामला कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ा हुआ है, तब आज उसमें आपको जीत मिल सकती है. धनु राशि के जातकों को आज किसी भी तरह के गृह कलह में नहीं पड़ना चाहिए.  सेहत और प्यार के लिए रहना होगा सावधान ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों को आज अपने सेहत के प्रति काफी सावधान रहने की जरूरत है. साथ ही आप अपने लाइफ लाइफ को लेकर भी आज काफी धैर्यवान बन कर रहे. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों के पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में किसी बात को लेकर आज विवाद पैदा हो सकता है. उन्होंने बताया कि आज आपको एक दूसरे के साथ काफी सामंजस्य बना कर काम करना चाहिए तथा आज अपने गुस्से पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए. धनु राशि के जातकों को आज अपने आंगन में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए और उसकी पूजा करनी चाहिए. साथ ही भगवान विष्णु की पूजा करने से आज आपको सफलता मिल सकती है. धनु राशि के जातकों के लिए आज का शुभ अंक 5 रहने वाला है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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धान की खेती में किसान करें गोबर खाद का इस्तेमाल, सालों तक...

होमताजा खबरकृषि धान की खेती में किसान करें गोबर खाद का इस्तेमाल, सालों तक उपजाऊ रहेगी मिट्टी Last Updated:May 22, 2026, 23:10 IST कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र गौतम अनुसार अगर मई महीने में किसान गोबर की सड़ी हुई खाद का सही तरीके से उपयोग करें तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है. धान की फसल बेहतर होती है. जैविक खाद से न सिर्फ जमीन की गुणवत्ता सुधरती है बल्कि उत्पादन भी बढ़ता है. मध्य प्रदेश में किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारी शुरू कर दी है. जून के शुरुआती सप्ताह से धान की नर्सरी और बीज की बुवाई शुरू होने वाली है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को खेत तैयार करते समय सड़ी हुई गोबर खाद के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं. यदि किसान अभी से खेतों में जैविक खाद डालें तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी और धान की फसल बेहतर उत्पादन देगी. सीधी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र गौतम ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि धान की खेती के लिए खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ करीब 200 से 250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर खाद डालना फायदेमंद रहता है। इससे मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी नहीं होती. फसल को प्राकृतिक रूप से पोषण मिलता है. उन्होंने कहा कि गोबर प्राकृतिक खाद का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ उसकी जल धारण क्षमता भी बढ़ाता है. धान की खेती में जैविक खाद का कमालडॉ. गौतम के अनुसार किसान ताजा गोबर सीधे खेत में डालने से बचें, क्योंकि इससे खेत में अधिक गर्मी पैदा हो सकती है. पौधों को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने सलाह दी कि गोबर को कम से कम 2 से 3 महीने तक गड्ढे में सड़ाकर जैविक खाद तैयार करें. गेहूं की कटाई के बाद खाली खेतों में इस खाद को फैलाकर हल्की जुताई कर मिट्टी में मिला देना चाहिए. इससे खाद के पोषक तत्व सीधे जमीन तक पहुंचते हैं. मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है. मोड़ी गांव के किसान रामाशंकर कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि किसान गोबर की खाद के साथ ढैंचा और सन जैसी हरी खाद वाली फसलें भी बो सकते हैं. कुछ समय बाद इन फसलों को खेत में पलट देने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है. इससे रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है और खेती की लागत भी घटती है. मिट्टी रहेगी सालों तक उपजाऊउन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जबकि गोबर की खाद मिट्टी को फिर से उपजाऊ बनाने में मदद करती है.किसानों का मानना है कि जैविक खाद के इस्तेमाल से खेत में केंचुए और सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है, जो मिट्टी को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं. वहीं प्रोफेसर अनुपम दुबे के अनुसार धान रोपाई से पहले यदि किसान गोबर की खाद का सही उपयोग करें तो फसल मजबूत होती है. उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक खेती की ओर बढ़ना आने वाले समय में किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh Source link

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पुलिस पर चली थीं तलवारें, अब सरकार ने हटा लिए केस! दंगाइयों...

होमताजा खबरदेश पुलिस पर चली थीं तलवारें, सरकार ने हटाए केस! दंगाइयों पर मेहरबान सिद्धारमैया Last Updated:May 22, 2026, 22:18 IST कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार एक बड़े विवाद में घिर गई है. साल 2022 में कलबुर्गी के अलंद में हुए ‘लाडले मशक दरगाह’ दंगों से जुड़े 7 गंभीर आपराधिक मामलों को सरकार ने वापस ले लिया है. इन मामलों में पुलिस पर जानलेवा हमला, हत्या का प्रयास और दंगा भड़काने जैसे संगीन आरोप शामिल थे. स्पीकर यूटी खादर की सिफारिश पर लिए गए इस फैसले से 100 से अधिक आरोपियों को राहत मिलेगी. इस कदम के बाद बीजेपी आक्रामक हो गई है और कांग्रेस सरकार पर अपराधियों और दंगाइयों को बचाने का गंभीर आरोप लगाया है. पुलिस पर तलवार चलाने वालों के केस वापस लिए सिद्धारमैया सरकार. बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिस पर भारी सियासी घमासान मच गया है. सरकार ने साल 2022 में अलंद कस्बे के ‘लाडले मशक दरगाह’ में हुए भीषण दंगों से जुड़े 7 गंभीर आपराधिक मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है. इस फैसले से दंगा भड़काने और पुलिस पर जानलेवा हमला करने के 100 से अधिक आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस खत्म हो जाएंगे. यह विवाद मार्च 2022 का है. कैबिनेट के गोपनीय दस्तावेजों के मुताबिक, अलंद कस्बे में तनाव के दौरान बंदोबस्त में लगे पुलिस अधिकारियों पर हथियारों से लैस उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था. भीड़ के हाथों में लोहे की रॉड, तलवारें और लाठियां थीं, और वे धार्मिक नारे लगाते हुए पुलिस की तरफ बढ़े थे. इस जानलेवा हमले (Attempt to murder) में एक डीएसपी (DSP) और एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसी मामले में मुख्य आरोपियों में से एक आकिब अंसारी पर हिंसा के दौरान पुलिस को धमकाने का भी आरोप है. स्पीकर यू.टी. खादर की सिफारिश पर एक्शन आश्चर्यजनक रूप से, इन संगीन मामलों को वापस लेने की सिफारिश कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यू.टी. खादर (U.T. Khader) द्वारा की गई थी. इन मामलों में दंगा करने (Rioting), हत्या का प्रयास और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराएं लगी हुई थीं. आलोचकों का आरोप है कि राज्य सरकार ने बिना किसी शोर-शराबे के इन दंगा मामलों को ‘विरोध-प्रदर्शन’ से जुड़े सामान्य मामलों के साथ क्लब कर दिया, ताकि किसी का ध्यान इस पर न जाए. बीजेपी का सरकार पर तीखा हमला इस फैसले के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सिद्धारमैया सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस सरकार अपराधियों और दंगाइयों का बचाव कर रही है. बीजेपी का कहना है कि सरकार तुष्टिकरण की राजनीति के तहत पुलिस का मनोबल गिरा रही है और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ कर रही है. वहीं दूसरी ओर, राज्य के गृह मंत्री ने इस फैसले का बचाव करते हुए इसे एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया बताया है. कर्नाटक सरकार ने हाल ही में कौन से विवादित आपराधिक मामले वापस लिए हैं? कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने साल 2022 में कलबुर्गी जिले के अलंद कस्बे में हुए ‘लाडले मशक दरगाह’ दंगों से जुड़े 7 गंभीर आपराधिक मामलों को वापस ले लिया है. अलंद दंगे में आरोपियों पर किस तरह के आरोप लगे थे? कैबिनेट दस्तावेजों के अनुसार, आरोपियों पर तलवारों और रॉड से लैस होकर ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर जानलेवा हमला करने, हत्या का प्रयास करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप थे. इन दंगा मामलों को वापस लेने की सिफारिश किसने की थी? इन मामलों को वापस लेने की सिफारिश कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यू.टी. खादर (U.T. Khader) द्वारा की गई थी. इस फैसले पर बीजेपी की क्या प्रतिक्रिया रही है? बीजेपी ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और अपराधियों व दंगाइयों का समर्थन कर पुलिस का मनोबल गिराने का आरोप लगाया है. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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22 साल पहले बनी मिसाइल आज भी उतनी ही घातक, सेना ने...

होमताजा खबरदेश 22 साल पहले बनी मिसाइल आज भी उतनी ही घातक, सेना ने किया ‘फिटनेस टेस्‍ट’ Last Updated:May 22, 2026, 21:12 IST Agni-1 Test: भारत ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-1 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. सेना की स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में 22 मई 2026 को हुए इस लॉन्च में मिसाइल के सभी तकनीकी और ऑपरेशनल मानक पूरी तरह खरे उतरे. यह परीक्षण देश की रणनीतिक हथियार क्षमता को मजबूत करने और दुश्मनों के खिलाफ मारक क्षमता को अचूक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. ख़बरें फटाफट अग्नि मिसाइल का सफल टेस्‍ट हुआ. साल 2004 में जब देश ने पहली बार अग्नि मिसाइल की ताकत देखी थी, तब से लेकर आज तक सरहद के पार न जाने कितने हुक्मरान बदल गए, दुश्मन ने कितनी ही नई चालें चल दीं. लेकिन भारत का यह पहला ‘परमाणु दूत’ आज 22 साल बाद भी उतना ही जवान, उतना ही खूंखार और उतना ही घातक है. शुक्रवार को ओडिशा के चांदीपुर में जब सेना की स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड ने अचानक इस मिसाइल को डिपो से निकालकर इसका कड़ा ‘फिटनेस टेस्ट’ लिया तो आसमान चीरती इसकी रफ्तार देखकर शायद पाकिस्तान के मिलिट्री हेडक्वार्टर में सन्नाटा पसर गया होगा. लोग सोच रहे थे कि यह मिसाइल पुरानी हो चुकी है लेकिन DRDO ने इसके भीतर नए जमाने का ऐसा ‘डिजिटल दिमाग’ और अचूक नेविगेशन फिट कर दिया है कि यह आज भी पलक झपकते ही पूरे पाकिस्तान को धूल चटाने का पूरा दम रखती है. युद्ध के मुहाने पर खड़े इस दौर में अग्नि-1 का यह दहाड़ना इस बात का सबूत है कि भारत का यह पुराना ब्रह्मास्त्र आज के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की धज्जियां उड़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है. रक्षा मंत्रालय और स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) की देखरेख में हुआ यह सफल परीक्षण सिर्फ एक मिसाइल का लॉन्च नहीं है बल्कि भारत के उस अटूट भरोसे और सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक है जो नो फर्स्ट यूज की नीति के बावजूद पलक झपकते ही दुश्मनों को राख करने का दम रखती है. भारत ने सैन्य क्षेत्र में अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाते हुए शुक्रवार, 22 मई 2026 को शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-1 का इंटीग्रेटिड परीक्षण रेंज (ITR) से सफलतापूर्वक परीक्षण किया. रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस हाई-प्रोफाइल लॉन्च को सेना के स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में अंजाम दिया गया. इस यूजर ट्रायल के दौरान मिसाइल सिस्‍टम्‍ के सभी ऑपरेशनल और तकनीकी मानकों को पूरी सटीकता के साथ परखा गया जो हर कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरे. क्यों खास है अग्नि-1 का यह सफल परीक्षण?रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इस सफल परीक्षण ने अग्नि-1 सिस्‍टम की विश्वसनीयता और परिचालन तत्परता की पुष्टि की है. रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा करते हुए कहा कि इस लॉन्च ने देश के रणनीतिक हथियारों की क्षमता और समग्र प्रतिरोधक मुद्रा में सेना के विश्वास को और मजबूत किया है. अग्नि-1 मिसाइल अपनी श्रेणी में बेहद घातक और कम समय में तैनात होने वाली मिसाइल है, जो दुश्मनों के ठिकानों को पल भर में तबाह करने की क्षमता रखती है. Short Range Ballistic Missile ‘Agni-1’ was successfully test-launched from the Integrated Test Range, Chandipur, Odisha on May 22, 2026. Conducted under the aegis of the Strategic Forces Command, the launch validated all operational and technical parameters, reaffirming the… — Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) May 22, 2026 Source link

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Harbhajan Singh Rajya Sabha controversy। ‘मैं बताऊंगा किसको कितना चढ़ावा गया’, गद्दार...

होमताजा खबरदेश ‘मैं बताऊंगा किसको कितना चढ़ावा गया’, गद्दार कहने पर चिढ़े भज्‍जी, क्‍या बोले? Last Updated:May 22, 2026, 20:06 IST Harbhajan Singh Gaddar Controversy: पूर्व क्रिकेटर और पंजाब से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर बड़ा हमला बोलते हुए दावा किया है कि पंजाब की राज्यसभा सीटें बेची गई थीं. सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने के बाद हरभजन ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि समय आने पर वह खुद खुलासा करेंगे कि किसको कितना चढ़ावा गया था और पंजाब को लूटने के लिए किसे कैसे मंत्री-संतरी बनाया गया. ख़बरें फटाफट हरभजन सिंह ने अपनी बात कही. क्रिकेट के मैदान में जब एक ‘टर्बिनेटर’ अपनी फिरकी छोड़ता है तो बड़े-बड़े सूरमाओं के पैर उखड़ जाते हैं. लेकिन इस बार पिच क्रिकेट की नहीं बल्कि राजनीति की है और हाथ में गेंद नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर दागा गया एक ऐसा बारूद है जिसने पंजाब से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों को हिलाकर रख दिया है. बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह पर अपनी ही पुरानी पार्टी के वफादार ‘गद्दार’ होने का ठप्पा लगाते हैं. अब जवाब में भज्जी ने एक ऐसा पलटवार किया जो सीधे पार्टी के सबसे बड़े ‘सच’ और शुचिता के दावों पर सवाल खड़े करता है. हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खुद को ‘गद्दार’ कहे जाने पर सीधे आप के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा करते हुए दावा किया है कि पंजाब की राज्यसभा सीटें भारी-भरकम रकम लेकर बेची गई थीं. हरभजन सिंह (भज्जी) ने विरोधी ट्रोलर्स और पार्टी कार्यकर्ताओं को खुली चुनौती दी है कि यदि उनके लोगों ने सच नहीं उगला तो वे खुद जनता के सामने इस बात का पर्दाफाश करेंगे कि राज्यसभा टिकट के बदले किसको कितना चढ़ावा और किसकी तरफ से गया था. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पंजाब से लेकर दिल्ली तक की सियासत में भूचाल आ गया है. गद्दार के टैग पर भज्जी का पलटवारदरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर देवेंदर यादव नाम के एक आप कार्यकर्ता ने हरभजन सिंह को ‘गद्दार’ बताते हुए सीधे निशाना साधा. पोस्ट में हरभजन सिंह से तीखा सवाल पूछा गया था कि, “जिस नेता को आप दिन-रात गाली देते हैं, उसकी दी हुई राज्यसभा सीट से आपने इस्तीफा क्यों नहीं दिया? भाजपा में जाने की आपकी क्या मजबूरी थी?” इसके साथ ही सोशल मीडिया पर हरभजन सिंह पर करोड़ों रुपये की बोली लगाए जाने के आरोप भी मढ़े गए. इन आरोपों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हरभजन सिंह ने पलटवार किया और लिखा, “समय आने पर तुम्हारे एक-एक शब्द का जवाब दिया जाएगा. मैंने तुम्हारे किसी नेता को गाली नहीं दी है. मैं अपनी जुबान क्यों गंदी करूं?” समय आने पर आपकी हर बात का जवाब दिया जाएगा । और मैं आपके किसी लीडर को गाली नहीं दी । अपनी जुबान क्यों गंदी करूँ मै । और मुझे ग़द्दार कहने वालो पहले अपने लोगो से पूछो पंजाब की राज्य सभा सीट कितने मे बेची थी । अगर ना बताए तो मैं आपको बताऊंगा किसको कितना चढ़ावा गया था और किसकी तरफ से… https://t.co/5sd2sxQDO7 Source link

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Ebola Outbreak 2026: कोरोना से कम संक्रामक पर 50% मृत्यु दर, इबोला...

नई दिल्ली: सेंट्रल अफ्रीका में फैले नए इबोला वायरस ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इंफेक्शन बहुत तेजी से पैर पसार रहा है. सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और मामलों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है. एक्सपर्ट्स को डर है कि मई की शुरुआत में हुई एक ‘सुपर स्प्रेडर’ घटना के बाद यह वायरस कई देशों में फैल सकता है. इसी बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडहानोम गेब्रिएसस ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने सबको चिंता में डाल दिया है. उनका कहना है कि इस नए इबोला आउटब्रेक से निपटने के लिए अगले 6 से 9 महीने तक कोई भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाएगी. जब दुनिया के पास पहले से ही इबोला की वैक्सीन मौजूद है, तो इस बार ऐसा क्यों हो रहा है. आखिर क्यों मौजूदा मेडिकल साइंस इस नए खतरे के सामने बेबस नजर आ रही है. इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण है, जिसे समझना बेहद जरूरी है. इबोला का इतिहास क्या है? इबोला वायरस की खोज पहली बार साल 1976 में हुई थी. यह एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, जो इंसानों और प्राइमेट्स (जैसे चिंपैंजी और गोरिल्ला) को अपना शिकार बनाती है. WHO की रिपोर्ट बताती है कि यह वायरस चमगादड़, साही और प्राइमेट्स के जरिए इंसानों में आता है. इसके बाद यह मरीजों के खून, शारीरिक तरल पदार्थ (बॉडी फ्लूइड्स) और उनके कपड़ों के संपर्क में आने से दूसरे इंसानों में फैलता है. इस बीमारी की औसतन मृत्यु दर लगभग 50 परसेंट है. आज से करीब एक दशक पहले साल 2014 में वेस्ट अफ्रीका में इबोला का सबसे खतरनाक हमला हुआ था. उस आउटब्रेक में दुनिया भर में 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. उस समय तबाही मचाने वाला वायरस इबोला का ‘जायरे स्ट्रेन’ (Zaire strain) था. वह इतिहास का सबसे बड़ा आउटब्रेक था, जो गिनी से शुरू होकर सिएरा लियोन और लाइबेरिया तक फैल गया था. जायरे स्ट्रेन का इलाज न होने पर मृत्यु दर 90 परसेंट तक पहुंच जाता है. यही वजह थी कि वैज्ञानिकों ने रात-दिन एक करके इस खास स्ट्रेन के खिलाफ दो बेहतरीन वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज तैयार कर ली थीं. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन क्या है और यह क्यों खतरनाक है? मौजूदा संकट के पीछे असली विलेन इबोला का एक बिल्कुल अलग रूप है, जिसे ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ (Bundibugyo strain) कहा जाता है. इंसानों को बीमार करने वाले इबोला के मुख्य रूप से चार स्ट्रेन हैं, जिनमें जायरे और बुंडिबुग्यो शामिल हैं. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का इतिहास बहुत छोटा है. इतिहास में इसके सिर्फ दो आउटब्रेक देखे गए हैं. पहला साल 2007 में युगांडा में और दूसरा साल 2012 में कांगो में हुआ था. इस स्ट्रेन की चपेट में आने वाले करीब एक-तिहाई मरीजों की मौत हो जाती है. सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हमारे पास जो 5 लाख से ज्यादा वैक्सीन डोज (जैसे एरवेबो वैक्सीन) का स्टॉक मौजूद है, वह जायरे स्ट्रेन के लिए बना है. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन पर वह वैक्सीन काम करेगी या नहीं, इसका कोई ठोस सबूत नहीं है. वायरस की बनावट अलग होने के कारण पुरानी वैक्सीन इस नए आउटब्रेक को रोकने में नाकाम साबित हो रही है. नई वैक्सीन आने में 9 महीने का समय क्यों लगेगा? WHO के एडवाइजर डॉ. वासी मूंथी के मुताबिक, बुंडिबुग्यो इबोला के खिलाफ दो ‘कैंडिडेट वैक्सीन’ पर काम चल रहा है, लेकिन अभी तक इनका इंसानों पर ट्रायल (क्लीनिकल ट्रायल) नहीं हुआ है. पहली वैक्सीन उसी रीकॉम्बीनेंट वेसिकुलर स्टोमेटाइटिस वायरस (rVSV) प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिससे जायरे स्ट्रेन की सफल वैक्सीन बनी थी. इसे सबसे ज्यादा उम्मीद जगाने वाली वैक्सीन माना जा रहा है, लेकिन इसके क्लीनिकल ट्रायल में 6 से 9 महीने का समय लगना तय है. दूसरी वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) मिलकर तैयार कर रहे हैं. यह एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन की तरह ChAdOx प्लेटफॉर्म पर काम करती है. यह वैक्सीन अगले दो से तीन महीनों में क्लीनिकल ट्रायल के लिए तैयार हो सकती है. हालांकि, अभी तक इसका जानवरों पर भी पूरी तरह टेस्ट नहीं हुआ है, जिससे इसकी सफलता को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है. जानवरों के टेस्ट सफल होने के बाद ही इसे इंसानों के ट्रायल के लिए मंजूरी मिलेगी. इसी वजह से WHO ने वैक्सीन उपलब्ध होने के लिए 6 से 9 महीने की समयसीमा तय की है. इस पूरे मामले पर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है? हेल्थ एक्सपर्ट्स इस स्थिति को बेहद गंभीर मान रहे हैं. डलास की यूटी साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर की एसोसिएट प्रोफेसर कृतिका कुप्पल्ली कहती हैं कि भले ही बुंडिबुग्यो के आउटब्रेक पहले कम हुए हों, लेकिन यह एक बेहद घातक पैथोजन (बीमारी फैलाने वाला वायरस) है. इस बार स्थिति इसलिए ज्यादा डरावनी है क्योंकि हमारे पास इसके लिए कोई मान्यता प्राप्त वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के फिजिशियन डॉ. अबरार करन इसे ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ यानी एक बहुत बड़ी मुसीबत की शुरुआत बताते हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि इबोला हवा के जरिए नहीं फैलता. इसलिए यह कोविड-19 या खसरे (Measles) जितना संक्रामक नहीं है. इबोला के मरीजों का इलाज कर चुकीं डॉ. नाहिद भदेलिया बताती हैं कि इबोला का एक मरीज औसतन दो लोगों को संक्रमित करता है, जबकि खसरे का एक मरीज 18 लोगों को बीमार कर सकता है. भले ही यह कम फैलता हो, लेकिन इसकी मृत्यु दर बहुत ज्यादा है. इस आउटब्रेक को लेकर क्या राजनीति हो रही है? इस महामारी के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी शुरू हो गई है. अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने आरोप लगाया है कि WHO ने इस आउटब्रेक को संभालने में काफी देर कर दी. दूसरी तरफ, कांगो के इस संकट के बीच अमेरिकी प्रशासन ने वहां 50 इबोला ट्रीटमेंट क्लिनिक बनाने के लिए 23 मिलियन डॉलर की मदद का एलान किया है. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी आपातकालीन फंड से 60 मिलियन डॉलर जारी किए हैं. हालांकि, युगांडा के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अमेरिका की तरफ से ऐसे किसी ट्रीटमेंट सेंटर बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं मिली है. मार्को रुबियो के आरोपों का

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Chennakeshava Temple in Karnataka A unique star shaped temple dedicated to lord...

होमताजा खबरधर्म तारे के आकार का नारायण को समर्पित विशेष मंदिर, देवालय में विराजमान सुंदर केशव Last Updated:May 22, 2026, 17:59 IST Chennakeshava Temple: वैसे तो भगवान नारायण के देशभर में कई मंदिर हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जो तारे के आकार का है. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1258 ईस्वी में करवाया गया था. बताया जाता है कि होयसला काल की इस उत्कृष्ट कृति को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. आइए जानते हैं मंदिर की खास बातें… Chennakeshava Temple: दुनिया भर में भगवान नारायण को समर्पित कई देवालय हैं, जिनकी बनावट मनमोहक है तो भक्ति से भरी कथा भक्तों के विश्वास को और भी मजबूत बनाती है. ऐसा ही एक देवालय कर्नाटक राज्य के मैसूर में है. तारे के आकार के नारायण को समर्पित मंदिर का निर्माण 1258 ईस्वी में हुआ है और इस प्रसिद्ध मंदिर में तीन गर्भगृह हैं. बताया जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और सभी तरह के दोषों से मुक्ति भी मिलती है. मंदिर की उत्कृष्ट कृति को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. आइए जानते हैं तारे के आकार का नारायण को समर्पित विशेष मंदिर के बारे में… मंदिर में तीन अलग-अलग गर्भगृहकर्नाटक के मैसूर से करीब 35 किलोमीटर दूर कावेरी नदी के तट पर स्थित सोमनाथपुर का चेन्नाकेशव मंदिर भारत की अद्भुत वास्तुकला का एक शानदार नमूना है. यह मंदिर तारे के आकार में बना है और भगवान विष्णु के सुंदर रूप चेन्ना केशव को समर्पित है. 1258 ईस्वी में निर्मित इस मंदिर में तीन अलग-अलग गर्भगृह हैं, जहां भगवान केशव, वेणुगोपाल और जनार्दन विराजमान हैं. इसे 2023 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला है. होयसला काल की इस उत्कृष्ट कृति को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. सेनापति ने 1258 ईस्वी में कराया था निर्माणचेन्ना केशव मंदिर को सोमनाथपुर मंदिर भी कहा जाता है, जिसका निर्माण होयसला राजा नरसिम्हा तृतीय के सेनापति सोमनाथ दंडनायक ने 1258 ईस्वी में कराया था. यह मंदिर होयसला राजवंश की कला और भक्ति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कहा जा सकता है. यह मंदिर आज भी अपने मूल स्वरूप में मौजूद है, जो उस समय की उत्कृष्ट कारीगरी को पेश करता है. चेन्नाकेशव का अर्थ है सुंदर केशव. मंदिर का पूरा नाम ही इसकी सुंदरता को व्यक्त करता है. तारे के आकार का नारायण मंदिरचेन्ना केशव मंदिर तारे के आकार के पांच-स्तरीय चबूतरे पर बना है, जो होयसला शैली की खासियत है. इस अनोखे डिजाइन की वजह से मंदिर की दीवारों पर हजारों मूर्तियां और नक्काशी आसानी से दिखाई देती हैं. मंदिर की हर इंच जगह पर बारीक नक्काशी की गई है. यहां देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, दैनिक जीवन के दृश्यों, फूलों, जानवरों और ज्यामितीय पैटर्न्स को सूक्ष्मता से उकेरा गया है. तीनों मूर्तियां बेहद सुंदर और कलात्मकमंदिर की सबसे खास बात इसका त्रिकूट डिजाइन है. इसमें तीन अलग-अलग गर्भगृह हैं, मध्य गर्भगृह में भगवान केशव, एक में वेणुगोपाल यानी बांसुरी बजाते कृष्ण और तीसरे में जनार्दन विराजमान हैं. तीनों ही मूर्तियां बेहद सुंदर और कलात्मक हैं. मंदिर के खंभे, छत और द्वारों पर भी अद्भुत नक्काशी है. केंद्रीय छत पर कमल के आकार का भव्य मंडलम है. मंदिर के आसपास ये खास जगहेंमंदिर संरक्षित स्मारक है, जहां बैकुंठ एकादशी और जन्माष्टमी जैसे पर्व पर विशेष आयोजन होते हैं. सोमनाथपुर मंदिर मैसूर की सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके पास ही भव्य मैसूर पैलेस, चामुंडेश्वरी मंदिर (चामुंडी पहाड़ी) और सेंट फिलोमेना चर्च जैसे दर्शनीय स्थल हैं. About the Author Parag SharmaChief Sub Editor पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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