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Mamata Banerjee crisis | TMC internal rift | काउंसलर्स ने भी दिखाया...

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली ऐतिहासिक हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगी आग अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी है और इसके लपटें अब कोलकाता नगर निगम (KMC) तक पहुंच गई हैं. पहले विधानसभा में 58 विधायकों का अलग गुट बनना और फिर सबसे मजबूत मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले फिरहाद हकीम का कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा देना टीएमसी के लिए बड़ा झटका था. लेकिन रविवार, 7 जून 2026 को जो कुछ भी हुआ, उसने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है. जमीनी स्तर के जनप्रतिनिधियों यानी नगर निगम के पार्षदों (Councillors) ने भी अब ममता बनर्जी के खिलाफ खुली बगावत का बिगुल फूंक दिया है. कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के निजी आवास पर रविवार को टीएमसी के पार्षदों की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद कोलकाता नगर निगम के भीतर मची खलबली को शांत करना और पार्षदों को एकजुट रखना था. लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि अधिकांश पार्षदों ने ममता बनर्जी से मिलने और इस बैठक में शामिल होने से साफ इनकार (Refuse) कर दिया. अपनी ही पार्टी के पार्षदों द्वारा इस तरह नजरअंदाज किए जाने और खुली नाफरमानी से ममता बनर्जी गुस्से से लाल हो गईं. उन्होंने भारी नाराजगी और आक्रोश में आकर इस बैठक को तुरंत रद्द कर दिया. कालीघाट का गुस्सा अब दिल्ली की मेज पर दिखेगा इस घोर अपमान और सांगठनिक नाकामी के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में रुककर डैमेज कंट्रोल करने के बजाय सीधे दिल्ली का रुख करने का फैसला किया. वे कोलकाता एयरपोर्ट से सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए रवाना (Left for Delhi) हो चुकी हैं, जहां सोमवार, 8 जून को विपक्षी ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक होने जा रही है. कालीघाट का गुस्सा अब दिल्ली की मेज पर दिखेगा इस घोर अपमान और सांगठनिक नाकामी के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में रुककर डैमेज कंट्रोल करने के बजाय सीधे दिल्ली का रुख करने का फैसला किया. वे कोलकाता एयरपोर्ट से सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए रवाना (Left for Delhi) हो चुकी हैं, जहां सोमवार, 8 जून को विपक्षी ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक होने जा रही है. बैठक का समय और महत्व: दिल्ली में कल होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की इस महाबैठक में पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद विपक्ष की भावी रणनीति तय की जाएगी. अभिषेक बनर्जी पहले से मौजूद: ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले से ही दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. अब ममता बनर्जी भी वहां पहुंच रही हैं, जिससे यह साफ है कि दोनों नेता दिल्ली में रहकर ही बंगाल के इस सबसे बड़े संकट का हल निकालने की कोशिश करेंगे. क्यों बगावत पर आमादा हैं टीएमसी के पार्षद? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायकों के बाद पार्षदों का इस तरह दीदी से मुंह मोड़ लेना यह दिखाता है कि तृणमूल कांग्रेस का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है. कोलकाता में मौजूद एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा- “फिरहाद हकीम केवल कोलकाता के मेयर नहीं थे, बल्कि वे स्थानीय पार्षदों और जमीनी कैडर के सबसे बड़े मसीहा थे. उनके इस्तीफे के बाद पार्षदों को अपना राजनीतिक भविष्य पूरी तरह अंधकार में नजर आ रहा है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की नई भाजपा सरकार ने कोलकाता नगर निगम के खिलाफ जिस तरह का आक्रामक रुख अपनाया है, उससे पार्षदों को डर है कि कहीं उनका वार्ड फंड और राजनीतिक अस्तित्व ही समाप्त न हो जाए. यही कारण है कि वे अब ममता बनर्जी के बजाय बागी गुट या सत्तापक्ष के संपर्क में आ रहे हैं.” ममता बनर्जी इस समय अपने जीवन के सबसे कठिन और अकेले दौर से गुजर रही हैं. कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू में संविधान की प्रति लेकर धरना देने वाली दीदी अब अपनी ही पार्टी के भीतर अलग-थलग पड़ चुकी हैं. दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने की आखिरी उम्मीद है. लेकिन सवाल यह उठता है कि जब घर का चूल्हा ही बिखर रहा हो, तो दिल्ली की चौखट पर बैठकर ममता बनर्जी विपक्ष को क्या दिशा दे पाएंगी? बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से एक नए और अप्रत्याशित युग की ओर बढ़ चुकी है. Source link

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major abhilasha barak profile। Who is major abhilasha barak। लेबनान की तबाही...

होमफोटोदेश लेबनान की तबाही में दिखा भारत की बेटी का दम, अब मेजर अभिलाषा के आगे झुका UN! Last Updated:June 07, 2026, 15:55 IST Major Abhilasha Barak Profile: मेजर अभिलाषा बराक ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर भारत का ऐतिहासिक गौरव बढ़ाया है. उन्हें वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित ‘यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मेजर अभिलाषा को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्मान उनकी उत्कृष्ट सेवा और संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षा प्रयासों में भारत के दीर्घकालिक योगदान का प्रतीक है. उनकी यह सफलता देश की उन अनगिनत बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो भारतीय सेना में शामिल होकर राष्ट्र और मानवता की सेवा करना चाहती हैं. मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की एक जांबाज सैन्य अधिकारी हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा वैश्विक स्तर पर अत्यंत प्रतिष्ठित ‘2025 यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह वैश्विक सम्मान लेबनान में तैनाती के दौरान स्थानीय महिलाओं और किशोरियों के बीच शानदार आउटरीच तथा सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मिला है. मेजर अभिलाषा बराक वर्तमान में पश्चिम एशियाई देश लेबनान में ‘संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल’ (UNIFIL) में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रही हैं. वह वहां भारतीय बटालियन के साथ तैनात ‘फीमेल एंगेजमेंट टीम’ (FET) की कमांडर के रूप में नेतृत्व कर रही हैं. इसके साथ ही वह जेंडर फोकल प्वाइंट भी हैं, जहां वह अन्य शांति सैनिकों को जेंडर संवेदीकरण का प्रशिक्षण देती हैं. इस अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने से पहले भी मेजर अभिलाषा बराक ने भारतीय सैन्य इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया था. वह भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट (युद्धक विमान चालक) हैं. उन्होंने आर्मी एविएशन कोर में शामिल होकर इस कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया और देश की अनगिनत युवा बेटियों के लिए नई राहें खोल दीं. Add News18 as Preferred Source on Google मेजर अभिलाषा बराक संयुक्त राष्ट्र का यह प्रतिष्ठित जेंडर एडवोकेट पुरस्कार हासिल करने वाली भारत की तीसरी सैन्य अधिकारी बन गई हैं. उनसे पहले मेजर सुमन गवानी को वर्ष 2019 में दक्षिण सूडान (UNMISS) में और मेजर राधिका सेन को वर्ष 2023 में कांगो (MONUSCO) में उनके असाधारण कार्यों के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस वैश्विक सम्मान से नवाजा जा चुका है. विश्व संस्था द्वारा प्रतिवर्ष 29 मई को मनाए जाने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांतिसैनिक दिवस’ के विशेष अवसर पर मेजर अभिलाषा को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक भव्य समारोह में सम्मानित किया जाएगा. यह पुरस्कार वर्ष 2016 में सैन्य शांति अभियानों में लैंगिक समानता और सुरक्षा परिषद के ऐतिहासिक प्रस्ताव 1325 को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था. भारत दुनिया भर में यूएन शांति मिशनों में सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले प्रमुख देशों में शामिल है. लेबनान में भारत के 642 जांबाज शांतिसैनिक तैनात हैं, जो चौथे स्थान पर हैं. मेजर अभिलाषा बराक ने वहां स्थानीय महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करके और शांति कार्यों में लैंगिक दृष्टिकोण को बेहतर तरीके से शामिल करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान-सम्मान काफी बढ़ाया है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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भाजपा से वैचारिक मतभेद पर… नीतीश के असली उत्तराधिकारी निशांत, उपेंद्र कुशवाहा...

Last Updated:June 07, 2026, 14:55 IST Upendra Kushwaha News: राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने अपनी नई सांगठनिक टीम की घोषणा कर दी है, जिसमें विधायक आलोक सिंह को बिहार का नया प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है. इसके साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने गठबंधन की राजनीति, पार्टी विचारधारा और बिहार के भविष्य के नेतृत्व को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले बयान दिए हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राजनीति में आगे लाने की वकालत करते हुए उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री  बनाने की मांग की है. उपेंद्र कुशवाहा के बयान के कई राजनीतिक मायने पटना. बिहार की राजनीति में एक बार फिर उत्तराधिकार की चर्चा तेज हो गई है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की घोषणा के साथ ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने साफ कहा कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के वास्तविक राजनीतिक उत्तराधिकारी उनके पुत्र निशांत कुमार (Nishant Kumar) हैं. साथ ही उन्होंने जेडीयू को लेकर अपना पुराना भावनात्मक जुड़ाव भी सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के संगठनात्मक चुनाव के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने विधायक आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष, प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तथा हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव घोषित किया. इस अवसर पर कुशवाहा ने कहा कि उनकी पार्टी और भाजपा की विचारधाराएं पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं, लेकिन व्यापक राजनीतिक और सामाजिक उद्देश्यों को लेकर गठबंधन की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को साथ लाने का माध्यम ही गठबंधन है और राष्ट्रीय लोक मोर्चा NDA में पूरी मजबूती के साथ बना रहेगा. आरएलएम की नई टीम का गठन राष्ट्रीय लोक मोर्चा के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए नए पदाधिकारियों का चयन किया गया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दो नेताओं ने नामांकन दाखिल किया था, जिसके बाद सर्वसम्मति से अंतिम फैसले के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को अधिकृत किया गया. उपेंद्र कुशवाहा ने विधायक आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया है. संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पार्टी के भीतर सांगठनिक मजबूती के लिए मतदान की व्यवस्था को भी जरूरी बताया गया है. विचारधारा अलग, पर गठबंधन जरूरी पार्टी की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राजनीतिक विचारधारा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मेल नहीं खाती है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचारधाराओं के बावजूद लोगों को एक मंच पर लाने के लिए गठबंधन की जरूरत होती है और आरएलएम वर्तमान गठबंधन में पूरी मजबूती के साथ शामिल है. उनका कहना है कि बिहार को बचाने और सामाजिक न्याय की विचारधारा को बनाए रखने के लिए यह एकजुटता बेहद आवश्यक है. पुराने साथियों की वफादारी पर भरोसा उपेंद्र कुशवाहा ने उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी आश्वस्त किया जो शुरुआती दिनों में समता पार्टी के समय से नीतीश कुमार के साथ संघर्ष कर रहे थे. उन्होंने दावा किया कि समता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के निर्माण में उनके जैसे नेताओं ने अपना खून-पसीना बहाया है. इसलिए पार्टी में जब भी कोई आंतरिक परेशानी होती है, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से दर्द महसूस होता है. कुशवाहा ने कहा कि पुराने संघर्षी साथी कभी भी बीजेपी या राजद (आरजेडी) का रुख नहीं करेंगे, बल्कि वे जहां हैं, वहीं मजबूती से डटे रहेंगे. ‘निशांत कुमार ही नीतीश के असली उत्तराधिकारी’ उपेंद्र कुशवाहा के बयान का सबसे अहम हिस्सा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार से जुड़ा रहा. उपेंद्र कुशवाहा ने पुरजोर तरीके से कहा कि नीतीश कुमार के राजनीतिक अस्तित्व और जदयू को बचाए रखने के लिए निशांत कुमार को बहुत पहले ही राजनीति में आगे लाया जाना चाहिए था. उन्होंने खुलकर मांग रखी कि निशांत कुमार को सिर्फ कैबिनेट मंत्री नहीं, बल्कि बिहार का डिप्टी सीएम बनाया जाना चाहिए क्योंकि वही नीतीश कुमार के वास्तविक और सच्चे राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 13 जून को इसी कड़ी में कुशवाहा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राष्ट्रीय टीम के गठन और नेतृत्व को लेकर आगामी दिनों में बड़ी बैठक होने जा रही है. पार्टी के सांगठनिक ढांचे को अंतिम रूप देने और राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 13 जून को देश की राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण मतदान प्रक्रिया और बैठक का आयोजन तय किया गया है, जिसके बाद आगामी राजनीति को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति बिल्कुल साफ हो जाएगी. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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आम और रबड़ी का लाजवाब संगम! घर पर बनाएं कुल्हड़ वाली शाही...

Last Updated:June 07, 2026, 13:56 IST Kulhad Wali Mango Rabdi Recipe: अगर आप गर्मियों में कुछ ठंडा, स्वादिष्ट और शाही डेजर्ट बनाना चाहते हैं तो मैंगो रबड़ी एक बेहतरीन विकल्प है. हैदराबाद की पारंपरिक खाद्य संस्कृति से जुड़ी यह मिठाई आम और रबड़ी का शानदार फ्यूजन है. कुल्हड़ में परोसे जाने पर इसकी सोंधी खुशबू स्वाद को और बढ़ा देती है. इसे बनाने के लिए दूध को गाढ़ा कर रबड़ी तैयार की जाती है और फिर उसमें आम का पल्प मिलाया जाता है. दो घंटे फ्रिज में ठंडा करने के बाद ड्राई फ्रूट्स से सजाकर इसे सर्व किया जाता है. ख़बरें फटाफट हैदराबाद. भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां लोग ठंडक पहुंचाने वाले व्यंजनों की तलाश में रहते हैं, वहीं आम से बनी पारंपरिक मिठाइयों का क्रेज भी चरम पर है. इन दिनों मिट्टी के पारंपरिक कुल्हड़ में परोसी जाने वाली गाढ़ी और मलाईदार मैंगो रबड़ी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. फलों के राजा आम और पारंपरिक भारतीय रबड़ी का यह शानदार मेल स्वाद प्रेमियों को खूब आकर्षित कर रहा है. हैदराबाद की खाद्य संस्कृति में खास पहचान रखने वाली यह मिठाई गर्मियों की दावतों और पारिवारिक आयोजनों की शान मानी जाती है. मैंगो रबड़ी पारंपरिक लच्छेदार रबड़ी और पके हुए मीठे आम के पल्प का बेहतरीन मिश्रण है. पुरानी हैदराबाद की शादियों, दावतों और विशेष अवसरों पर इसे खास तौर पर परोसा जाता रहा है. कुल्हड़ या मिट्टी के कसौरे में परोसने से इसमें सोंधी खुशबू घुल जाती है, जो इसके स्वाद को और भी खास बना देती है. यही वजह है कि यह डेजर्ट बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. इन सामाग्रियों की पड़ेगी जरूरत अगर आप भी इस गर्मी में मेहमानों का मुंह मीठा कराना चाहते हैं या घर पर कुछ ठंडा और शाही स्वाद चखना चाहते हैं, तो मैंगो रबड़ी आसानी से तैयार की जा सकती है. इसको बनाने के लिए फुल क्रीम दूध 1 लीटर, पके और मीठे आम का पल्प 1 कप, आम के बारीक कटे टुकड़े आधा कप, चीनी स्वादानुसार, इलायची पाउडर आधा चम्मच छोटा, कटे हुए पिस्ते और बादाम 2 चम्मच की जरूरत पड़ेगी. नोट कर लें बनाने की विधि सबसे पहले एक भारी तले वाली कढ़ाई में दूध डालकर उबाल लें. उबाल आने के बाद आंच धीमी कर दें और दूध को लगातार पकने दें. दूध की सतह पर बनने वाली मलाई को कढ़ाई के किनारों पर चिपकाते जाएं. बीच-बीच में दूध को चलाते रहें ताकि वह तले में न लगे. जब दूध घटकर अपनी मूल मात्रा का लगभग एक-तिहाई रह जाए और अच्छी तरह गाढ़ा हो जाए, तब किनारों पर जमा मलाई को खुरचकर दूध में मिला दें. इसके बाद इसमें चीनी और इलायची पाउडर डालकर 3 से 4 मिनट तक पकाएं. फिर गैस बंद कर दें और रबड़ी को पूरी तरह ठंडा होने दें. सर्व करने से पहले दो घटें फ्रीज में रखें रबड़ी के ठंडी होने पर उसमें आम का पल्प डालकर अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद इसे कम से कम दो घंटे के लिए फ्रिज में रख दें. सर्व करते समय ठंडी मैंगो रबड़ी को कुल्हड़ में निकालें और ऊपर से आम के टुकड़े, पिस्ते तथा बादाम से सजाएं. गर्मियों में यह शाही मैंगो रबड़ी न सिर्फ स्वाद का आनंद देती है, बल्कि ठंडक का अहसास भी कराती है. यही वजह है कि इन दिनों यह मिठाई फूड लवर्स की पसंदीदा डेजर्ट बनी हुई है. About the Author deep ranjan दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Hyderabad,Telangana Source link

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भारत की वह खोज जिसने दुनिया को समझाया एल नीनो, मानसून की...

भारत में मानसून दस्तक दे चुका है और तेजी से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र तक पहुंचा चुका है. ऐसे में सभी को अब इस बात का इंतजार है कि उनके इलाके तक मानसून कब पहुंचेगा. हालांकि इस बार मौसम विज्ञानी सामान्य से कम बारिश की आशंका जता रहे हैं. देश में जब भी कमजोर मानसून, सूखे की आशंका या सामान्य से अधिक गर्मी की चर्चा होती है, तब एक शब्द बार-बार सुनाई देता है. वह शब्द है एल नीनो (El Niño)… मौसम वैज्ञानिकों से लेकर आम लोगों तक इस नाम से अब काफी परिचित हो चुके हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस वैश्विक मौसमीय घटना को समझने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती खोज भारत में हुई थी और उसका सीधा संबंध भारतीय मौसम विभाग (IMD) से है. आज एल नीनो और ला नीना दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक घटनाओं में गिने जाते हैं, लेकिन इस पूरी कहानी की शुरुआत करीब एक सदी पहले भारत से हुई थी, जब एक वैज्ञानिक भारतीय मानसून के रहस्यों को समझने की कोशिश कर रहा था. आखिर क्या है एल नीनो? एल नीनो दरअसल एक बड़े वैश्विक जलवायु तंत्र का हिस्सा है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एल नीनो सदर्न ऑसिलेशन (ENSO) कहा जाता है. यह प्रशांत महासागर और उसके ऊपर मौजूद वायुमंडलीय परिस्थितियों के बीच होने वाली जटिल प्रक्रिया है, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है. एल नीनो की स्थिति में दक्षिण अमेरिका के तटों के पास प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है. इसका असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई देशों में बारिश, तापमान और मौसम के पैटर्न बदल जाते हैं. भारत में आमतौर पर एल नीनो को कमजोर मानसून से जोड़ा जाता है, जबकि अमेरिका और कुछ अन्य क्षेत्रों में यह अधिक वर्षा का कारण बन सकता है. इसके उलट स्थिति को ला नीना कहा जाता है, जब समुद्र का तापमान सामान्य से कम हो जाता है और इसका प्रभाव एल नीनो के विपरीत देखने को मिलता है. भारत से कैसे शुरू हुई इस खोज की कहानी? एल नीनो की वैज्ञानिक समझ विकसित होने से कई दशक पहले भारतीय मौसम विभाग मानसून की भविष्यवाणी को अधिक सटीक बनाने की कोशिश कर रहा था. बीसवीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश गणितज्ञ और वैज्ञानिक सर गिल्बर्ट वॉकर को भारतीय मौसम विभाग का प्रमुख बनाया गया. उन्होंने 1904 से 1924 तक करीब 21 वर्षों तक इस पद पर काम किया. उस समय मानसून की भविष्यवाणी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि देश की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक बारिश पर निर्भर थी. एल नीनो जहां भारत में सूखा लाता है, जबकि ला नीना में मूसलाधार बारिश होती है. वॉकर ने अपने अध्ययन के दौरान महसूस किया कि भारतीय मानसून को केवल भारत की सीमाओं के भीतर होने वाली मौसमी गतिविधियों से नहीं समझा जा सकता. इसके पीछे दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले बड़े मौसमीय बदलाव भी जिम्मेदार हो सकते हैं. उन्होंने उस दौर में उपलब्ध मौसम संबंधी आंकड़ों का गहन अध्ययन शुरू किया. यह काम आसान नहीं था, क्योंकि तब कंप्यूटर जैसी आधुनिक तकनीक मौजूद नहीं थी और सारी गणनाएं तथा विश्लेषण मैन्युअल तरीके से किए जाते थे. एक क्षेत्र में दबाव बढ़ा तो दूसरे में हो गया कम अपने शोध के दौरान वॉकर ने एक बेहद दिलचस्प पैटर्न देखा. उन्होंने पाया कि प्रशांत महासागर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में वायुदाब झूले की तरह ऊपर-नीचे होता रहता है. जब एक क्षेत्र में दबाव बढ़ता है तो दूसरे हिस्से में कम हो जाता है. इस प्रक्रिया को उन्होंने ‘सदर्न ऑसिलेशन’ नाम दिया. यही वह खोज थी जिसने आगे चलकर एल नीनो और ला नीना को समझने की नींव रखी. वॉकर ने यह भी पाया कि सदर्न ऑसिलेशन का भारतीय मानसून से गहरा संबंध है और इसका प्रभाव भारत में होने वाली वर्षा पर पड़ सकता है. हालांकि उस समय तक यह स्पष्ट नहीं था कि समुद्र और वायुमंडल के बीच यह संबंध वास्तव में कैसे काम करता है. बाद में 1960 के दशक में नॉर्वे-अमेरिकी मौसम वैज्ञानिक जैकब ब्येर्कनेस ने इस रहस्य को सुलझाया. उन्होंने साबित किया कि सदर्न ऑसिलेशन और एल नीनो वास्तव में एक ही बड़े जलवायु तंत्र के दो हिस्से हैं. दक्षिण अमेरिका के पेरू और इक्वाडोर के मछुआरे सदियों से समुद्र के तापमान में होने वाले इन बदलावों को जानते थे, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह पहली बार साबित हुआ कि समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय दबाव के बीच सीधा संबंध है. ब्येर्कनेस ने दिखाया कि समुद्र और वायुमंडल एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और यही प्रक्रिया ENSO प्रणाली का निर्माण करती है. कैसे खुला एल नीनो का रहस्य? इस खोज के बाद वैज्ञानिकों को पहली बार यह समझ में आया कि एल नीनो और ला नीना जैसी घटनाएं केवल किसी एक क्षेत्र का मामला नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती हैं. एल नीनो के दौरान पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ने की प्रवृत्ति रहती है. भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम हो सकती है, जबकि उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के कई हिस्सों में भारी वर्षा हो सकती है. ला नीना के दौरान आमतौर पर इसके विपरीत प्रभाव देखने को मिलते हैं. सदर्न ऑसिलेशन की खोज ने भारतीय मानसून की वैज्ञानिक समझ को नई दिशा दी, लेकिन इसके बावजूद मानसून की सटीक भविष्यवाणी करना आसान नहीं हुआ. मानसून दुनिया की सबसे जटिल मौसम प्रणालियों में से एक माना जाता है. इसका संबंध केवल एल नीनो या ला नीना से नहीं होता, बल्कि हिंद महासागर के तापमान, अरब सागर की स्थितियों, पश्चिमी विक्षोभ, हिमालयी क्षेत्र की गतिविधियों और कई अन्य कारकों से भी होता है. यही कारण है कि एल नीनो और मानसून के बीच संबंध हमेशा एक जैसा नहीं रहता. पूर्वानुमान की चुनौतियों के कारण भारतीय मौसम विभाग ने 1932 से 1988 के बीच पूरे देश के लिए मानसून का पूर्वानुमान जारी करना लगभग बंद कर दिया था. उस दौरान केवल उत्तर-पश्चिम भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिए सामान्य अनुमान दिए जाते थे. तब बारिश का प्रतिशत नहीं बताया जाता था, बल्कि ‘सामान्य से थोड़ा अधिक’ या “सामान्य के करीब”

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UPSC CSE Prelims Result 2026 Date: पास या फेल? यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट...

Last Updated:June 07, 2026, 11:51 IST UPSC CSE Prelims Result 2026 Date: यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के नतीजों का इंतजार खत्म होने वाला है. यूपीएससी सीएसई प्रीलिम्स रिजल्ट 10 जून के आस-पास जारी हो सकता है. जानिए रोल नंबर की पीडीएफ फाइल कैसे चेक करें और मेंस परीक्षा कब से शुरू होगी. UPSC CSE Prelims Result 2026 Date: यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा का रिजल्ट इसी महीने जारी होगा नई दिल्ली (UPSC CSE Prelims Result 2026 Date). संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 में शामिल हुए लाखों कैंडिडेट्स का इंतजार खत्म होने वाला है. देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा का हिस्सा बने उम्मीदवारों को सरकारी रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार है. यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 का रिजल्ट 10 जून के आस-पास कभी भी घोषित किया जा सकता है. हालांकि आयोग ने अभी तक रिजल्ट डेट की कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी है. यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा 2026 में शामिल हुए स्टूडेंट्स रिजल्ट जारी होने के बाद ऑफिशियल वेबसाइट्स upsc.gov.in और upsconline.nic.in पर अपना परिणाम देख सकेंगे. संघ लोक सेवा आयोग इस रिजल्ट को पीडीएफ (PDF) फॉर्मेट में जारी करेगा. इस लिस्ट में सिर्फ उन्हीं भाग्यशाली और मेहनती उम्मीदवारों के रोल नंबर दर्ज होंगे, जो चयन प्रक्रिया के अगले और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव यानी यूपीएससी मेंस परीक्षा में बैठने के पात्र माने जाएंगे. यूपीएससी मेंस परीक्षा कब होगी? इस साल यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन देशभर के विभिन्न केंद्रों पर 24 मई 2026 को किया गया था. यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 में पास हुए उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा (UPSC Mains 2026) में बैठने का मौका मिलेगा. आयोग के शेड्यूल के अनुसार, यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की शुरुआत 21 अगस्त 2026 से होने जा रही है. ऐसे में यूपीएससी प्रीलिम्स का रिजल्ट आने के बाद सफल उम्मीदवारों के पास मेंस की तैयारी के लिए लगभग दो महीने का ही समय बचेगा. यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट कैसे तैयार होता है? यूपीएससी प्रीलिम्स का रिजल्ट मुख्य रूप से 2 फैक्टर्स पर निर्भर करता है. परीक्षा में दो पेपर होते हैं- पहला जनरल स्टडीज (GS) और दूसरा सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट यानी सीसैट (CSAT). सीसैट (CSAT) का खेल: यह पेपर सिर्फ क्वॉलिफाइंग नेचर का होता है.. यानी इसमें सिर्फ पास होना होता है और उम्मीदवारों को कम से कम 33 प्रतिशत अंक लाने अनिवार्य होते हैं. मेरिट की रेस: फाइनल कट-ऑफ लिस्ट पूरी तरह से सामान्य अध्ययन के पहले पेपर में परफॉर्मेंस, कुल वैकेंसी की संख्या और उम्मीदवारों के ओवरऑल प्रदर्शन के आधार पर तय की जाती है. अगर आप सीसैट पास कर लेते हैं, तभी पहले पेपर के नंबरों के आधार पर मेरिट बनती है. 933 अधिकारियों की होगी भर्ती, कड़ा है मुकाबला यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा का नोटिफिकेशन 4 फरवरी को जारी किया था, जिसके बाद 27 मई तक आवेदन की प्रक्रिया पूरी की गई थी. इस साल सिविल सेवा परीक्षा 2026 के माध्यम से कुल रिक्तियों की संख्या लगभग 933 है. इसमें बेंचमार्क विकलांगता कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए 33 पद आरक्षित रखे गए हैं. इस परीक्षा में टॉप रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), आईएफएस (IFS) और आईआरएस (IRS) जैसी प्रशासनिक सेवाओं में अफसर बनने का अवसर मिलेगा. यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट कैसे चेक करें? संघ लोक सेवा आयोग की तरफ से यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 जारी होने के बाद उम्मीदवार नीचे लिखे स्टेप्स के जरिए अपने मार्क्स चेक कर पाएंगे: यूपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in या upsconline.nic.in पर लॉगिन करें. होमपेज पर दिख रहे ‘परीक्षाएं’ (Examinations) सेक्शन पर क्लिक करें. इसके बाद सामने खुले ‘Written Results’ वाला टैब ओपन करें. यहां UPSC CSE Prelims Result 2026 का लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें. क्लिक करते ही सेलेक्टेड कैंडिडेट्स के रोल नंबर की पीडीएफ फाइल डाउनलोड हो जाएगी. इस पीडीएफ में सर्च फंक्शन (Ctrl + F) का इस्तेमाल करके अपना रोल नंबर टाइप करें. अगर रोल नंबर लिस्ट में है तो समझ जाइए कि आपको मेंस परीक्षा का टिकट मिल चुका है! About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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पाउडर से पैकिंग तक का सफर! जानिए फैक्ट्री में कैसे बनता है...

Last Updated:June 07, 2026, 10:45 IST Detergent Manufacturing Process: डिटर्जेंट पाउडर हमारे दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसे फैक्ट्री में किस तरह तैयार किया जाता है. डिटर्जेंट निर्माण की प्रक्रिया में विभिन्न रसायनों, सर्फैक्टेंट्स, सोडा ऐश, एंजाइम और खुशबूदार तत्वों को वैज्ञानिक अनुपात में मिलाया जाता है. बड़े औद्योगिक संयंत्रों में इन सामग्रियों को विशेष मशीनों के जरिए प्रोसेस किया जाता है, जहां मिश्रण को सुखाकर महीन पाउडर का रूप दिया जाता है. इसके बाद गुणवत्ता जांच की जाती है ताकि सफाई की क्षमता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. अंतिम चरण में डिटर्जेंट को आकर्षक पैकेजिंग में भरकर बाजार में भेजा जाता है. आधुनिक तकनीक के कारण आज डिटर्जेंट अधिक प्रभावी, कम पानी में घुलने वाला और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है. ख़बरें फटाफट बाड़मेर. कपड़ों पर लगे जिद्दी दाग मिनटों में साफ करने वाला डिटर्जेंट आखिर बनता कैसे है? इसी को जानने के लिए लोकल18 टीम ने डिटर्जेंट बनाने वाली फैक्ट्री से इसके तैयार होने की प्रक्रिया को बारीकी से समझा है. फैक्ट्री में केमिकल्स, खुशबू और सफाई बढ़ाने वाले मिश्रण को मिलाकर ऐसा डिटर्जेंट बनाया जाता है जो कपड़ों को चमकाने के साथ ताजगी भी देता है. घर में इस्तेमाल होने वाला डिटर्जेंट पाउडर कई चरणों और खास तत्वों को मिलाकर तैयार किया जाता है. इसका मुख्य काम कपड़ों में जमी धूल, मिट्टी, तेल और जिद्दी दागों को हटाना होता है. डिटर्जेंट बनाने की प्रक्रिया फैक्ट्री में बड़ी मशीनों और तय फॉर्मूले के आधार पर होती है. बाड़मेर में डिटर्जेंट बनाने वाले रामसर निवासी गिरीश खत्री बताते है कि सबसे पहले डिटर्जेंट में सर्फेक्टेंट  मिलाए जाते हैं. फैक्ट्री में ऐसे तैयार होता है डिटर्जेंट पाउडरयह ऐसा तत्व होता है जो कपड़ों में जमी चिकनाई और गंदगी को पानी के साथ अलग करने में मदद करता है. इसी वजह से डिटर्जेंट दाग हटाने में असरदार माना जाता है. इसके बाद सोडियम कार्बोनेट और सोडियम सल्फेट जैसे तत्व मिलाए जाते हैं. वॉशिंग सोडा पानी को मुलायम बनाने में मदद करता है जिससे डिटर्जेंट ज्यादा असर दिखाता है वहीं सोडियम सल्फेट पाउडर की मात्रा और बनावट को संतुलित रखने का काम करता है. कपड़ो को चमकदार बनाने के लिए मिलाते है ऑप्टिकल ब्राइटनरकपड़ों को ज्यादा चमकदार दिखाने के लिए इसमें ऑप्टिकल ब्राइटनर मिलाए जाते हैं जो कपड़ों की सफेदी को बेहतर दिखाते हैं वहीं जिद्दी दाग हटाने के लिए कई कंपनियां एंजाइम्स का इस्तेमाल करती हैं जो तेल, खाने के दाग और मिट्टी को साफ करने में मददगार होते हैं. खत्री के मुताबिक इसमें करीब 20 से अधिक केमिकल्स को मिलाया जाता है जिससे यह कपड़ो को खुशबूदार और जिद्दी दाग को हटाने में सहायक होते है. इस प्रक्रिया में करीबन 3-4 घण्टे का समय लगता है. कपड़ो की ताजगी के लिए मिलाते है हल्के कलर और खुशबूडिटर्जेंट में फ्रेगरेंस (खुशबू) और हल्के कलर भी मिलाए जाते हैं ताकि कपड़ों में ताजगी बनी रहे.  इन केमिकल्स को बड़ी मशीनों में अच्छी तरह मिक्स किया जाता है. इसके बाद मिश्रण को सुखाकर महीन पाउडर का रूप दिया जाता है और फिर पैकिंग कर बाजार में भेजा जाता है. इसके साथ ही लिक्विड डिटर्जेंट भी तैयार किए जाते हैं जिनमें पानी और एक्टिव क्लीनिंग एजेंट का मिश्रण होता है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Barmer,Rajasthan Source link

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राफेल से कितना ताकतवर Su-57 5th जेन स्‍टील्‍थ जेट, कौन महंगा और...

Su-57 vs Rafale Fighter Jet: भारत ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने का फैसला किया गया है. तकरीबन सवा तीन लाख करोड़ का यह रक्षा सौदा अपने आप में ऐतिहासिक है. इंडियन एयरफोर्स की फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिए पांचवीं पीढ़ी का विमान भी खरीदने पर विचार किया जा रहा है. अमेरिका और रूस मुख्‍य रूप से 5th जेनरेशन फाइटर जेट की रेस में शामिल हैं. पांचवीं पीढ़ी के स्‍टील्‍थ फाइटर जेट F-35 और Su-57 में मुकाबला चल रहा है. रूस ने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान के को-प्रोडक्‍शन के साथ ही सोर्स कोड शेयर करने का भी ऑफर भारत को दिया है. इसके साथ ही रूसी Su-57 और फ्रेंच राफेल फाइटर जेट के बीच तुलना शुरू हो गई है. मारक क्षमता से लेकर वेपन इंटीग्रेशन तक पर चर्चाएं शुरू हो चुकी है. इंडियन एयरफोर्स फ्रेंच डिफेंस कंपनी डसॉल्‍ट से इंटरफेस कंट्रोल डॉक्‍यूमेंट का राइट देने की मांग कर रहा है, ताकि राफेल फाइटर जेट की नई खेप में देसी हथियारों को भी फिट किया जा सके. इसके अलावा Su-57 और राफेल फाइटर जेट की कीमतों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं. भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण के दौर में रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. चीन के तेजी से बढ़ते J-20 बेड़े और पाकिस्तान द्वारा संभावित J-35 खरीदने की खबरों के बीच भारत के सामने अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने की चुनौती है. ऐसे समय में रूस ने भारत को Su-57 के संयुक्त विकास और लाइसेंस प्राप्त उत्पादन का प्रस्ताव देकर नई रणनीतिक बहस छेड़ दी है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, रूस का दावा है कि Su-57 दुनिया के सबसे किफायती पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में से एक है. इसकी अनुमानित कीमत 3.5 से 5 करोड़ डॉलर (करीब 300 से 430 करोड़ रुपये) प्रति विमान बताई जा रही है. हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लड़ाकू विमान की वास्तविक लागत केवल उसकी खरीद कीमत से तय नहीं होती. वेपन सिस्‍टम, मेंटेनेंस, स्पेयर पार्ट्स, ट्रेनिंग और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर होने वाला खर्च अंतिम लागत को काफी बढ़ा देता है. Su-57 बनाम राफेल फाइटर जेट Su-57 फाइटर जेट राफेल फाइटर जेट रूस का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर: सुखोई Su-57 (नाटो नाम: फेलॉन) रूस का पहला ऑपरेशनल 5th जेनरेशन का स्टील्थ मल्टीरोल लड़ाकू विमान है. इसे अमेरिकी F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग-II जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों को टक्कर देने के लिए विकसित किया गया है. फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation द्वारा विकसित राफेल (Rafale) एक ट्विन-इंजन, कैनार्ड डेल्टा-विंग मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसे वायु श्रेष्ठता, टोही, सटीक हमले और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता जैसे मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है. स्टील्थ और मल्टीरोल क्षमता से लैस: Su-57 को वायु, जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें कम रडार सिग्नेचर, इंटरनल वेपन बे, सुपरमैन्युवरेबिलिटी और लंबी दूरी तक मिशन संचालित करने जैसी उन्नत क्षमताएं मौजूद हैं. राफेल को ओम्नी-रोल फाइटर माना जाता है, क्योंकि यह एक ही उड़ान में कई प्रकार के सैन्य अभियानों को अंजाम दे सकता है. इसके तीन प्रमुख संस्करण हैं—राफेल C, राफेल B और नौसेना के लिए राफेल M. सुपरक्रूज और हाई-स्पीड प्रदर्शन: यह लड़ाकू विमान अधिकतम मैक 2 (करीब 2,130 किमी/घंटा) की रफ्तार हासिल कर सकता है. साथ ही यह आफ्टरबर्नर के बिना लगभग 1,800 किमी/घंटा की सुपरसोनिक गति से उड़ान भरने की सुपरक्रूज क्षमता रखता है. विमान में अत्याधुनिक RBE2 AESA रडार और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम लगाया गया है, जो दुश्मन के खतरों की पहचान, निगरानी और उनसे बचाव की उन्नत क्षमता प्रदान करता है. AI और नए इंजन से हो रहा अपग्रेड: रूस लगातार Su-57 को आधुनिक बना रहा है. विमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम जोड़े जा रहे हैं, जिससे पायलट पर कार्यभार कम होगा. इसके अलावा नए AL-51F-1 (इज्देलिये-177) इंजन के जरिए इसकी थ्रस्ट और प्रदर्शन क्षमता को और बढ़ाया जा रहा है. राफेल 9,500 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है. इसमें Meteor लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल, SCALP क्रूज मिसाइल और HAMMER प्रिसिजन-गाइडेड बम जैसे आधुनिक हथियारों का एकीकरण किया गया है. भारत को को-प्रोडक्‍शन का प्रस्ताव: रूस ने भारत को Su-57E निर्यात संस्करण की पेशकश की है. राष्ट्रपति Vladimir Putin ने भारत के साथ इस विमान के सह-विकास और सह-उत्पादन का प्रस्ताव भी रखा है, ताकि भारतीय वायुसेना की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरतों को तेजी से पूरा किया जा सके. भारत वर्तमान में 36 राफेल विमानों को ऑपरेट कर रहा है. इसके अलावा Indian Air Force पुराने विमानों की जगह लेने के लिए 114 नए लड़ाकू विमानों की योजना पर काम कर रही है, जबकि Indian Navy ने विमानवाहक पोत INS Vikrant और INS Vikramaditya के लिए 26 राफेल-M लड़ाकू विमानों की खरीद का समझौता किया है. राफेल की कितनी कीमत? तुलना के लिए भारत ने वर्ष 2016 में फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया था, जिसकी कुल कीमत लगभग 59,000 करोड़ रुपये थी. इस हिसाब से सभी सहायता पैकेजों और हथियारों सहित प्रति विमान लागत करीब 1,640 करोड़ रुपये बैठती है. राफेल की अधिक कीमत उसके प्रूव्‍ड वॉर परफॉर्मेंस, भारत के मनमुताबिक संशोधनों और अत्याधुनिक मेटेओर तथा स्कैल्प जैसी मिसाइलों के कारण मानी जाती है. भारत ने फ्रांस से जो 36 राफेल फाइटर जेट खरीदा है, उसकी औसत कीमत रूस के Su-57 जेट से कहीं ज्‍यादा है. (फाइल फोटो/Reuters) रूस के ऑफर में कितना दम? रूस की पेशकश केवल विमान बिक्री तक सीमित नहीं है. प्रस्ताव में संवेदनशील सोर्स कोड तक पहुंच, व्यापक टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर और भारत की जरूरतों के अनुरूप दो सीटों वाले Su-57D वेरिएंट के विकास की संभावना भी शामिल है. यह भारत को स्वदेशी हथियारों, सेंसरों और एवियोनिक्स को बिना किसी विदेशी मंजूरी के विमान में इंटीग्रेट करने की स्वतंत्रता देगा. रक्षा क्षेत्र में इस स्तर का तकनीकी हस्तांतरण बेहद दुर्लभ माना जाता है. प्रस्ताव के अनुसार शुरुआती लगभग 30 विमान सीधे रूस से मिल सकते हैं, जबकि बाद के विमानों का उत्पादन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सहयोग से भारत में किया जा सकता है. रूस का कहना है कि सहयोग

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31 दिसंबर 2018…’खूनी जश्न’ की वो रात और एक महिला डॉक्टर की...

Last Updated:June 07, 2026, 08:49 IST BJP MLA Raju Singh Convicted: साल 2018 की वो आखिरी रात, जब पूरी दुनिया नए साल के स्वागत में झूम रही थी, तब दिल्ली के एक आलीशान फार्महाउस में रसूख, शराब और बारूद का एक ऐसा जानलेवा कॉकटेल तैयार हो रहा था जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को जीवन भर का मातम दे दिया. बिहार के मुजफ्फरपुर की साहिबगंज सीट से रसूखदार बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह की पिस्तौल से नए साल की पार्टी में निकली एक अंधाधुंध फायरिंग ने वहां मौजूद महिला आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में सुराख कर दिया था. रसूख के नशे में की गई उसी ‘हर्ष फायरिंग’ का इंसाफ करीब साढ़े सात साल बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से आया है. आइए जानते हैं क्या था यह पूरा कांड? डॉक्टर अर्चना गुप्ता मौत मामले में BJP विधायक राजू सिंह दोषी पटना/नई दिल्ली. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहिबगंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजू कुमार सिंह की मुश्किलें कानून के शिकंजे में पूरी तरह बढ़ गई हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का दोषी करार दिया है. विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने फैसला सुनाते ही विधायक को तुरंत न्यायिक हिरासत में लेने का आदेश जारी कर दिया. अदालत अब आगामी 9 जून को विधायक की सजा की अवधि पर अंतिम बहस सुनेगी. हालांकि, इस मामले में कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को सबूत मिटाने समेत सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है. वो खौफनाक रात… जब पार्टी के बीच अचानक चलीं गोलियां इस पूरे हत्याकांड की वास्तविक कहानी 31 दिसंबर 2018 की रात दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके फतेहपुर बेरी स्थित मांडंडी फार्महाउस में शुरू होती है. यह फार्महाउस किसी और का नहीं बल्कि खुद राजू कुमार सिंह के परिवार का था. नए साल के इस जश्न में दिल्ली के कई रसूखदार लोग और नामचीन हस्तियां शामिल थीं, जिनमें प्रसिद्ध आर्किटेक्ट और दिल्ली की रहने वाली डॉ. अर्चना गुप्ता भी अपने पति और बच्चों के साथ मौजूद थीं. रात के करीब 12 बजने वाले थे, हर तरफ संगीत गूंज रहा था. तभी आधी रात को काउंटडाउन शुरू होते ही तत्कालीन विधायक (उस वक्त वे वीआईपी पार्टी में थे) राजू कुमार सिंह ने अपने रसूख का प्रदर्शन करने के लिए अपनी लाइसेंसी पिस्तौल और राइफल से हवा में ताबड़तोड़ फायरिंग (हर्ष फायरिंग) शुरू कर दी. चीख-पुकार और अस्पताल में डॉक्टर की दर्दनाक मौत प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवा में की गई कई राउंड फायरिंग के दौरान ही अचानक एक गोली सीधे वहां खड़ी डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में जा धंसी. गोली लगते ही डॉ. अर्चना खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ीं. जश्न का माहौल चंद सेकंड में चीख-पुकार और सन्नाटे में बदल गया. गंभीर रूप से घायल डॉक्टर को तुरंत पास के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया. सिर में गहरी चोट और भारी ब्लीडिंग होने के कारण वे कोमा में चली गईं और घटना के ठीक एक हफ्ते बाद इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और वीआईपी कल्चर के तहत होने वाली फायरिंग पर बड़े सवाल खड़े किए थे. न्यू ईयर पार्टी में चली गोली, डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत, अब दोषी करार दिए गए BJP विधायक राजू सिंह. कुशीनगर से गिरफ्तारी और कानूनी शिकंजे का सच घटना को अंजाम देने के बाद विधायक राजू सिंह और उनका परिवार दिल्ली पुलिस के डर से रातों-रात फार्महाउस छोड़कर फरार हो गया था. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जब उनका पीछा किया, तो घटना के दो दिन बाद उन्हें उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वे बिहार भागने की फिराक में थे. पुलिस को उनके पास से दो प्रतिबंधित अत्याधुनिक हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद हुए थे. दिल्ली पुलिस ने फतेहपुर बेरी थाने में हत्या के प्रयास (जो बाद में हत्या की धारा में बदला) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था. कानून की नजर में रसूखदारों के गुनाह सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने पाया कि राजू सिंह को एक जनप्रतिनिधि होने के नाते अच्छी तरह पता था कि भीड़भाड़ वाली जगह पर गोली चलाने से किसी की जान जा सकती है. इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें आर्म्स एक्ट की धारा 304 भाग-2 (गैर इरादतन हत्या) के तहत दोषी माना है, जिसमें अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है. अब 9 जून को आने वाला कोर्ट का अंतिम फैसला यह तय करेगा कि कानून की नजर में रसूखदारों के गुनाह की सजा क्या होती है. परिवार का दर्द और रसूखदारों को लेकर सवाल अर्चना गुप्ता आर्किटेक्ट थीं और खास बात यह कि परिवार ने उनके अंगदान का फैसला लिया था. पति विकास गुप्ता ने पूरे मामले में न्याय की लड़ाई लड़ी. घटना के समय राजू सिंह नशे में थे, यही कोर्ट का भी निष्कर्ष रहा. यह मामला हर्ष फायरिंग की खतरनाक परंपरा और जिम्मेदारीहीन व्यवहार का उदाहरण बन गया. राजनीतिक प्रभाव और क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले लोगों द्वारा हथियारों के दुरुपयोग पर भी सवाल उठे. वहीं, राजू सिंह अभी भी बिहार विधानसभा में सक्रिय हैं. इस दोषसिद्धि के बाद उनकी राजनीतिक और कानूनी स्थिति पर असर पड़ सकता है. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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देश ने खोया असम का जांबाज! राजौरी में आतंकियों से लोहा लेते...

होमताजा खबरदेश देश ने खोया असम का जांबाज! राजौरी में आतंकियों से लोहा लेते हुए कैप्टन बीरेश्वर शहीद Last Updated:June 07, 2026, 07:18 IST Captain Bireshwar Goswami Martyred: देश जब चैन की नींद सोता है, तब सीमा पर तैनात जवान हर पल मौत को आंख दिखा रहे होते हैं. जम्मू-कश्मीर के राजौरी से आई खबर ने एक बार फिर पूरे देश को भावुक कर दिया है. आतंकियों के खिलाफ चल रहे लंबे ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी कैप्टन बीरेश्वर गोस्वामी ने सर्वोच्च बलिदान दे दिया. असम की धरती से निकला यह वीर बेटा देश की सुरक्षा के लिए जंगलों में डटा रहा और आखिरकार मातृभूमि पर खुद को न्योछावर कर गया. सेना के इस अधिकारी की शहादत ने सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि पूरे देश को गर्व और गम दोनों से भर दिया है. राजौरी के गंभीर मुगलान और डोरी माल जंगल क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सुरक्षा बल लगातार आतंकियों की तलाश में जुटे हुए थे. इसी कठिन अभियान के दौरान कैप्टन बीरेश्वर अपनी टीम के साथ आगे मोर्चा संभाले हुए थे. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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