भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

ताज़ा खबर

ताज़ा खबर

CUET (UG) 2026: प्रभावित उम्मीदवारों के लिए बदले हुए एडमिट कार्ड जारी,...

होमताजा खबरदेश CUET (UG) 2026: प्रभावित उम्मीदवारों के लिए बदले हुए एडमिट कार्ड जारी, किस तारीख को होगा परीक्षा Last Updated:June 02, 2026, 22:31 IST CUET Updated Admit Cards: सीयूईटी (UG) 2026 के प्रभावित उम्मीदवारों के लिए संशोधित परीक्षा तारीखों का ऐलान कर दिया गया है. ये परीक्षाएं अब 06 और 07 जून 2026 को आयोजित होंगी. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने इस संबंध में अपडेटेड एडमिट कार्ड भी आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिए हैं, जहां से छात्र इन्हें तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं. CUET Revised Admit Card: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने प्रभावित कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी सीयूईटी (UG) 2026 के उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा अपडेट जारी करते हुए उनके संशोधित एडमिट कार्ड (Updated Admit Cards) आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध करा दिए हैं. प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से प्रभावित हुए इन परीक्षार्थियों की परीक्षा अब नई और संशोधित तारीखों के अनुसार आगामी 06 और 07 जून 2026 को आयोजित की जाएगी. जिन उम्मीदवारों की परीक्षाओं में बदलाव हुआ है, वे तुरंत सीयूईटी के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने नए एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं, क्योंकि परीक्षा केंद्र में प्रवेश केवल इसी संशोधित एडमिट कार्ड के आधार पर दिया जाएगा. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

ताज़ा खबर

CBSE New Chairperson | CBSE Prashant Lokhande | Who is Prashant Lokhande...

होमताजा खबरदेश कौन हैं CBSE का नया बॉस प्रशांत लोखंडे? कंधों पर करोड़ों छात्रों की जिम्मेदारी Last Updated:June 02, 2026, 21:38 IST Who is Prashant Sitaram Lokhande: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को अपना नया मुखिया मिल गया है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत सीताराम लोखंडे को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने उनके नाम को हरी झंडी दे दी है. प्रशांत सीताराम लोखंडे एजीएमयूटी कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जो निवर्तमान चेयरमैन राहुल सिंह की जगह बोर्ड की कमान संभालेंगे. आइए जानते हैं कि कौन हैं सीबीएसई के नए चेयरमैन और उनका प्रशासनिक बैकग्राउंड क्या है. सीबीएसई के नए चेयरपर्सन प्रशांत सीताराम लोखंडे कौन हैं? CBSE New Chairperson Prashant Sitaram Lokhande: देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण शिक्षा बोर्ड, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है. केंद्र सरकार ने वरिष्ठ नौकरशाह प्रशांत सीताराम लोखंडे को सीबीएसई का नया अध्यक्ष (Chairperson) नियुक्त किया है. सरकार की तरफ से 2 जून 2026 को जारी आधिकारिक लेटर के अनुसार, यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की गई है. सीबीएसई में मचे घमासान के बाद छात्र और अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि बोर्ड का मुखिया कौन है. ऐसे में वर्तमान राहुल सिंह के ट्रांसफर के बाद, अब प्रशांत सीताराम लोखंडे बोर्ड के सभी बड़े फैसले लेंगे. कौन हैं नए चेयरमैन प्रशांत सीताराम लोखंडे? प्रशांत सीताराम लोखंडे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के बेहद अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारी हैं. कैडर और बैच: वे एजीएमयूटी (AGMUT: अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. पिछली तैनाती: सीबीएसई के अध्यक्ष का पद संभालने से ठीक पहले, वे केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे. रैंक और वेतनमान: आधिकारिक आदेश के मुताबिक, उन्हें सीबीएसई चेयरमैन के पद पर अतिरिक्त सचिव के रैंक और वेतनमान में ही नियुक्त किया गया है. अनुशासित काम के तरीके के लिए फेमस: प्रशासनिक हलकों में प्रशांत सीताराम लोखंडे को उनके अनुशासित काम करने के तरीके और नीतिगत मामलों में उनकी गहरी समझ के लिए जाना जाता है. नए चेयरमैन के सामने क्या होंगी बड़ी चुनौतियां? सीबीएसई चेयरमैन का पद बेहद जिम्मेदारी भरा माना जाता है. प्रशांत सीताराम लोखंडे के पद संभालते ही उनके सामने कई बड़े टास्क होंगे- नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन: देश भर के सीबीएसई स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नए पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली को सुचारू रूप से लागू करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी. परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली: बोर्ड परीक्षाओं के दौरान देश-विदेश के हजारों केंद्रों पर पूरी पारदर्शिता और बिना किसी तकनीकी खराबी के परीक्षाओं का आयोजन करवाना और डिजिटल मूल्यांकन को बेहतर बनाना. छात्रों और स्कूलों का समन्वय: देश भर के 25 हजार से अधिक मान्यता प्राप्त स्कूलों, लाखों शिक्षकों और करोड़ों छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर समय पर परिणाम और नीतियां जारी करना. सीबीएसई (CBSE) के नए अध्यक्ष कौन बने हैं? वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत सीताराम लोखंडे को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. नए सीबीएसई चेयरमैन प्रशांत सीताराम लोखंडे किस बैच और कैडर के अधिकारी हैं? प्रशांत सीताराम लोखंडे एजीएमयूटी कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. सीबीएसई चेयरमैन बनने से पहले प्रशांत सीताराम लोखंडे किस पद पर तैनात थे? सीबीएसई अध्यक्ष बनने से पहले वे भारत सरकार के गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे. पूर्व सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह को अब सरकार ने क्या नई जिम्मेदारी दी है? पूर्व अध्यक्ष राहुल सिंह का तबादला करके उन्हें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

ताज़ा खबर

TMC Split News – Mamata Banerjee Dharna – didi political death |...

West Bengal Rebellion : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगी आग अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी है. भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और अपनी पार्टी के नेताओं की सुरक्षा को लेकर कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू में सड़कों पर उतरीं ममता बनर्जी खुद को अपनी ही पार्टी के भीतर अकेला पा रही हैं. मंगलवार को आयोजित इस ‘महाधरने’ ने टीएमसी के भीतर चल रहे भयंकर अंतर्विरोध को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया. जिस पार्टी के पास विधानसभा में 80 विधायक और संसद में 29 सांसद हैं, उसके महाधरने में ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करने के लिए मात्र 7 विधायक और मुट्ठी भर सांसद पहुंचे. यह राजनीतिक संकट तब और गहरा गया जब पार्टी से हाल ही में निकाले गए मुखर नेता रिजू दत्ता ने एक सनसनीखेज दावा कर दिया. रिजू दत्ता के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस अब औपचारिक रूप से दो धड़ों में बंटने की कगार पर खड़ी है. उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के 80 में से 50 से अधिक विधायक एक साथ आकर खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ घोषित करने की अंतिम तैयारी कर रहे हैं. यदि यह दावा सच साबित होता है, तो बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के युग का यह सबसे दर्दनाक अंत हो सकता है, जहां उनके अपने ही सिपहसालार उन्हें मझधार में छोड़कर नई राह पकड़ रहे हैं. अभिषेक पर हमले के बाद बुलाई बैठक में ही तय हो गई थी बगावत की स्क्रिप्ट राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बगावत अचानक नहीं हुई है. इसकी पटकथा उसी दिन लिख दी गई थी जब अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के ठीक बाद ममता बनर्जी ने पार्टी के सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों की एक आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई थी. बैठक का सच: उस महत्वपूर्ण बैठक में भी 80 में से केवल 20 विधायक ही कोलकाता पहुंचे थे. मंगलवार का महासंकट: मंगलवार को जब ममता बनर्जी ने अपनी पूरी राजनीतिक ताकत झोंकने के लिए रानी रासमणि एवेन्यू को चुना, तो यह संख्या 20 से घटकर मात्र 7 विधायकों पर सिमट गई. 73 विधायकों और अधिकांश सांसदों का इस तरह दीदी के सबसे बड़े आंदोलन से दूरी बना लेना यह साफ संकेत देता है कि टीएमसी के भीतर ‘अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व’ और ‘आई-पैक’ की कार्यशैली को लेकर कितना गहरा आक्रोश व्याप्त है. “मर जाऊंगी, लेकिन धरना दूंगी”… कोलकाता पुलिस की पाबंदी पर भड़कीं ममता ममता बनर्जी के इस धरने को रोकने के लिए कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा और अनुमति का हवाला देते हुए परमिशन खारिज कर दी थी. इस प्रशासनिक रोक के बाद बंगाल का सियासी घमासान और उग्र हो गया. ममता बनर्जी ने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार को ललकारते हुए साफ कहा कि उन्हें डराकर चुप नहीं कराया जा सकता. “वे सोचते हैं कि पुलिस के दम पर वे मेरी आवाज को दबा देंगे. मैं साफ कह देना चाहती हूं कि मैं मर जाऊंगी, लेकिन यहीं धरना दूंगी. अगर मुझे कोलकाता में लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने से रोका गया, तो मैं इस आंदोलन को देश की राजधानी दिल्ली तक लेकर जाऊंगी. हम बिना माइक और बिना मंच के भी जनता की अदालत में बैठना जानते हैं.” – ममता बनर्जी, सुप्रीमो (TMC) ममता बनर्जी ने धरना स्थल से बेहद भावुक रुख अपनाते हुए प्रसिद्ध भजन की पंक्तियां, “ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान” का जाप किया. उन्होंने भाजपा और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर सीधे तौर पर टीएमसी को पैसे और सत्ता के बल पर तोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जो लोग आज पार्टी छोड़कर भाग रहे हैं, वे कायर हैं और इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा. राजनीतिक भविष्य: क्या स्ट्रीट पॉलिटिक्स से बच पाएगी पार्टी? इस समय सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि क्या ममता बनर्जी की यह पारंपरिक ‘स्ट्रीट पॉलिटिक्स’ उनकी बिखरती हुई पार्टी को एकजुट रख पाएगी? हकीकत यह है कि ममता बनर्जी जब-जब संकट में रही हैं, वे सड़कों पर उतरी हैं. लेकिन इस बार परिस्थिति पूरी तरह अलग है. इस बार लड़ाई विपक्ष से ज्यादा पार्टी के भीतर के असंतोष से है. सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार बहुत बारीकी से टीएमसी के इस आंतरिक बिखराव पर नजर रख रही है. भाजपा को इस बात का पूरा अंदाजा है कि ममता बनर्जी को प्रशासनिक रूप से रोकने से ज्यादा फायदा टीएमसी को अपने ही बोझ से स्वतः ढहने देने में है. 50 से अधिक विधायकों का टूटना तृणमूल कांग्रेस के वैधानिक अस्तित्व को ही समाप्त कर सकता है, जिससे ममता और अभिषेक बनर्जी पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएंगे. बंगाल की राजनीति का यह हफ्ता तृणमूल के भविष्य का अंतिम फैसला करने वाला साबित हो सकता है. Source link

ताज़ा खबर

Kerala Summer Vacation 2026: केरल के 5 बेस्ट हिल स्टेशन, जानें पूरा...

Last Updated:June 02, 2026, 19:32 IST Kerala Summer Vacation 2026: गर्मी की छुट्टियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो केरल आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है. मानसून से पहले का मौसम यहां की खूबसूरती को और बढ़ा देता है. मुन्नार के चाय बागान, वायनाड के जंगल, थेक्कडी की बोट सफारी, वागामोन की वादियां और नेल्लियाम्पथी की शांत पहाड़ियां पर्यटकों को खूब आकर्षित करती हैं. खास बात यह है कि दिल्ली से ट्रेन के जरिए 15 से 17 हजार रुपये के बजट में भी केरल ट्रिप पूरी की जा सकती है. जानिए केरल के 5 बेहतरीन हिल स्टेशन और वहां घूमने का पूरा खर्च. केरल घूमने का आ गया परफेक्ट टाइम: गर्मी की छुट्टियों में अगर आप किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहां ठंडा मौसम, हरियाली, पहाड़ और सुकून एक साथ मिले, तो केरल आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. मानसून से पहले का मौसम यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. मुन्नार, वायनाड, थेक्कडी, वागामोन और नेल्लियाम्पथी जैसे हिल स्टेशन आपको न केवल प्रकृति के बेहद करीब ले जाएंगे, बल्कि आपकी छुट्टियों को भी शानदार बना देंगे. आइए जानते हैं केरल की 5 शानदार जगहों और वहां घूमने में आने वाले खर्च के बारे में. गर्मी की छुट्टियों में बनाएं केरल का प्लान: अगर आप इस गर्मी कहीं ठंडी और खूबसूरत जगह घूमने का सोच रहे हैं तो केरल बेहतरीन विकल्प हो सकता है. मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस बार केरल में मानसून 30 जून से पहले पहुंच सकता है. ऐसे में जून का महीना यहां घूमने के लिए शानदार माना जा रहा है. हरियाली, पहाड़, झीलें और शांत वातावरण केरल को परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के लिए खास बनाते हैं. मुन्नार के चाय के बागानों और बादलों की दुनिया: करीब 1,532 मीटर की ऊंचाई पर बसा मुन्नार केरल के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में गिना जाता है. यहां की हरी-भरी पहाड़ियां, ठंडी हवाएं और दूर-दूर तक फैले चाय के बागान पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं. परिवार के साथ एराविकुलम नेशनल पार्क घूम सकते हैं, जहां दुर्लभ नीलगिरि तहर देखने को मिलता है. पोथामेडु व्यू प्वाइंट से धुंध में ढकी घाटियों का खूबसूरत नजारा भी देखा जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google वायनाड के जंगल, झरने और एडवेंचर का शानदार मेल: प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए वायनाड किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां का तापमान गर्मियों में भी 18 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. वायनाड वाइल्डलाइफ सेंचुरी में हाथी, हिरण, तेंदुए और कई दुर्लभ पक्षी देखे जा सकते हैं. चेंबरा पीक ट्रैकिंग के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय है. हरियाली से घिरा यह इलाका परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आदर्श माना जाता है. थेक्कडी में बोट सफारी और वन्यजीवों का रोमांच: थेक्कडी बच्चों और परिवारों के बीच सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक है. यहां स्थित पेरियार झील में बोट सफारी का अनुभव बेहद खास माना जाता है. नाव की सैर के दौरान झील के किनारे हाथियों और अन्य वन्यजीवों को देखा जा सकता है. मसालों के बागानों की सैर, हाथी जंक्शन में हाथियों के साथ समय बिताना और बांस राफ्टिंग जैसी एक्टिविटीज इस जगह को और आकर्षक बनाती हैं. वागामोन की रोमांटिक वादियां और सुकून भरा माहौल: करीब 1,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वागामोन अपने शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है. यहां चारों ओर फैले पाइन के जंगल, झरने और बादलों से ढकी पहाड़ियां देखने को मिलती हैं. थांगल पारा व्यू प्वाइंट से घाटियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है. वागामोन लेक में बोटिंग और आसपास की पहाड़ियों में ट्रैकिंग का आनंद लिया जा सकता है. यह जगह परिवार और कपल्स दोनों के लिए खास मानी जाती है. नेल्लियाम्पथी में कम बजट में शानदार हिल स्टेशन का अनुभव: नेल्लियाम्पथी को अक्सर ‘दूसरा ऊटी’ कहा जाता है क्योंकि यहां कम खर्च में बेहतरीन प्राकृतिक नजारे देखने को मिलते हैं. यहां का मौसम सालभर सुहावना बना रहता है. पर्यटक ऑरेंज प्लांटेशन, इलायची के बागानों और खूबसूरत पहाड़ियों का आनंद ले सकते हैं. सीथरकुंडु व्यू प्वाइंट से घाटियों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है. शांत और भीड़भाड़ से दूर छुट्टियां बिताने वालों के लिए यह शानदार जगह है. दिल्ली से केरल पहुंचने का हवाई बजट: दिल्ली से कोच्चि, कोझिकोड़ और तिरुवनंतपुरम के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं. सामान्य दिनों में फ्लाइट टिकट का किराया 8,000 से 12,000 रुपये के बीच रहता है. अगर आप यात्रा से 10 से 15 दिन पहले टिकट बुक कर लेते हैं तो बेहतर किराया मिल सकता है. समय की बचत और आरामदायक यात्रा चाहने वालों के लिए फ्लाइट सबसे सुविधाजनक विकल्प माना जाता है. कम बजट में केरल पहुंचने का आसान तरीका: अगर आप यात्रा पर कम खर्च करना चाहते हैं तो ट्रेन बेहतर विकल्प हो सकती है. दिल्ली से चलने वाली केरल एक्सप्रेस इस रूट की प्रमुख ट्रेनों में शामिल है. थर्ड एसी का किराया लगभग 2,700 रुपये प्रति व्यक्ति है. ट्रेन यात्रा लंबी जरूर होती है, लेकिन इससे यात्रा का कुल खर्च काफी कम हो जाता है और बजट यात्रियों के लिए यह सबसे पसंदीदा विकल्प माना जाता है. रहने और खाने पर कितना खर्च होगा: केरल के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर लगभग 2,000 रुपये प्रति रात के बजट में अच्छा होटल या होमस्टे मिल सकता है. खाने-पीने पर एक व्यक्ति का दैनिक खर्च 500 से 700 रुपये के बीच माना जा सकता है. स्थानीय दक्षिण भारतीय भोजन स्वादिष्ट होने के साथ-साथ किफायती भी होता है. यदि आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो पहले से होटल बुक करने पर बेहतर विकल्प मिल सकते हैं. दो रात की केरल ट्रिप का पूरा हिसाब: यदि आप दिल्ली से ट्रेन के जरिए केरल जाते हैं और वहां दो रात रुकते हैं, तो ट्रेन टिकट, होटल, भोजन, स्थानीय परिवहन और साइट सिइंग सहित कुल खर्च लगभग 15,000 से 17,000 रुपये तक आ सकता है. वहीं फ्लाइट से यात्रा करने पर यह बजट कुछ और बढ़ सकता है. कम खर्च में खूबसूरत पहाड़, हरियाली और यादगार छुट्टियों का आनंद लेने के लिए केरल शानदार विकल्प साबित हो सकता है. प्रकृति, पहाड़ और सुकून का शानदार

ताज़ा खबर

Annapurna Yojana Bengal : suvendu sarkar-mamata banerjee | ‘देश में रहना है...

होमताजा खबरwest bengalKolkata ममता के बाउंसर पर सीएम सुवेंदु सरकार ने मारा सिक्सर, बंगाल में कल से खेला शुरू Last Updated:June 02, 2026, 18:21 IST कोलकाता में ममता बनर्जी के धरने के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हुगली से बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है. सुवेंदु ने एलान किया है कि कल से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अन्नपूर्णा योजना का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले घुसपैठियों को इस योजना का लाभ बिल्कुल नहीं मिलेगा. ममता बनर्जी के धरने पर सुवेंदु ने क्या कहा? कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय शह और मात का खेल चरम पर पहुंच चुका है. कोलकाता में जहां पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और चुनाव बाद की हिंसा के खिलाफ धरने पर बैठी थीं, उसके कुछ ही घंटे के बाद बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अन्नपूर्णा योजना (Annapurna Scheme) के तहत धन राशि जारी करने का ऐलान कर दिया. सुवेंदु ने घुसपैठ के मुद्दे पर ममता बनर्जी के कोर वोट बैंक को लेकर भी तीखा हमला बोला. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ किया कि भाजपा ने चुनाव के दौरान बंगाल की जनता से जो भी वादे किए थे, वे बेहद सोच-समझकर किए गए थे और सरकार अब उन्हें पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ जमीन पर उतारने जा रही है. इसी कड़ी में कल यानी बुधवार से उन सभी योग्य नागरिकों के बैंक खातों में अन्नपूर्णा योजना की राशि सीधे ट्रांसफर (Direct Benefit Transfer) कर दी जाएगी, जिन्होंने इसके आवेदन फॉर्म भरे हैं. ममता बनर्जी के सड़क आंदोलन के बीच सुवेंदु सरकार का यह कदम जनता का ध्यान सीधे कल्याणकारी योजनाओं और सुशासन की ओर मोड़ने की एक सुनियोजित रणनीति है. मीडिया से बात करते हुए सुवेंदु ने कहा- ‘कल हमलोग अन्नपुर्णा योजना का रुपया ट्रांसफर करेगा. जो लोग फॉर्म फिलअप किया है उसका पैसा कल चालू हो जाएगा. हमलोग जो बोलता है सोचकर बोलता है. जो बोलता है वो भी करता है. सबलोग सरकार का साथ दे, जो घुसपैठिया है. जो घुसपैठिया है उसको तो रुपया नहीं मिलेगा. ये लोग को रुपया नहीं मिल सकता. जो लोग देश के कानून का उल्लंघन करता है. वैक्सीन नहीं लेता है. स्कूल में भी दाखिल नहीं करता है. कहां-कहां दूसरा स्कूल में भेजता है, जहां पर दूसरा तरह से उसको ट्रेनिंग दिया जाता है. वो लोग तो पैसा नहीं मिलना. हर स्कूल में वंदे मातरम और जन गण मन अनिवार्य कर दिया है. देश में रहना है तो वंदे मातरम बोलना है. देश में रहना है तो जन गण मन गाना है. देश में रहना है तो 26 जनवरी और 15 अगस्त को सम्मान करना है. ये सनातन संस्कृति है. भारत का नाम हिंदुस्तान भी है इंडिया भी है. सांस्कृतिक कल्चर को मानकर ही चलना चाहिए. ये देश दूसरा किसी के हाथ में नहीं जा सकता है.’ #WATCH | Hooghly: West Bengal CM Suvendu Adhikari says, “Tomorrow, we will transfer the money for the Annapurana scheme to those who have filled up their forms. All promises are made after careful consideration and are executed faithfully. However, infiltrators within the system,… https://t.co/27w966FoNG pic.twitter.com/8epLMgXWbO Source link

ताज़ा खबर

Amritsar Student Suicide Case। 3 महीने से स्कूल नहीं आई बच्ची… स्कूल...

अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में 17 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. इस दुखद घटना के बाद जहां एक तरफ पुलिस ने मृतका के पिता के बयानों के आधार पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है, वहीं दूसरी तरफ स्कूल प्रशासन ने सामने आकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. स्कूल प्रबंधन का दावा है कि छात्रा पिछले तीन महीनों से स्कूल ही नहीं आ रही थी, इसलिए फीस के लिए प्रताड़ित करने का सवाल ही पैदा नहीं होता. पुलिस अब दोनों पक्षों के दावों की सत्यता जांचने में जुट गई है. स्कूल प्रबंधन की सफाई और दावेघटना के बाद चौतरफा घिरे स्कूल प्रबंधन ने आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. प्रबंधन का कहना है कि मृतका फरवरी महीने के बाद से स्कूल नहीं आ रही थी. वह पिछले लगभग 3 महीने से लगातार अनुपस्थित चल रही थी. इस दौरान स्कूल प्रशासन द्वारा छात्रा और उसके परिजनों से लिखित पत्रों (रिटर्न लेटर्स) और फोन कॉल के जरिए कई बार संपर्क साधने का प्रयास किया गया था, ताकि उसकी अनुपस्थिति का कारण जाना जा सके. प्रबंधन के मुताबिक, इस दौरान परिवार के सदस्यों से उन्हें सिर्फ यही जानकारी मिली थी कि बच्ची की तबीयत ठीक नहीं है, इसी वजह से वह स्कूल नहीं आ पा रही है. स्कूल प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फीस भरने को लेकर छात्रा को प्रताड़ित करने का जो आरोप लगाया जा रहा है, वह पूरी तरह से झूठ, बेबुनियाद और मनगढ़ंत है. अस्पताल की सूचना पर हरकत में आई पुलिसइस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल द्वारा स्थानीय पुलिस को एक मेमो भेजा गया. अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया कि एक 17 वर्षीय छात्रा को गंभीर हालत में लाया गया था, जिसने सुसाइड की कोशिश की थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है. अस्पताल से मिली इस सूचना के बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई और शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की. पिता के बयान पर एफआईआर दर्जपुलिस ने इस मामले में मृतका के पिता रविंद्र सिंह के बयान दर्ज किए हैं. पिता ने स्कूल प्रशासन पर बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप लगाए हैं. रविंद्र सिंह का कहना है कि उनकी बेटी को 11वीं कक्षा की स्कूल फीस जमा न कर पाने के कारण प्रबंधन द्वारा लगातार मानसिक रूप से परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा था. पिता के मुताबिक, इसी मानसिक तनाव और प्रताड़ना से तंग आकर उनकी बेटी ने यह आत्मघाती कदम उठाया. पुलिस ने पिता की शिकायत को आधार बनाते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि असल में छात्रा की मौत के पीछे की मुख्य वजह क्या थी. अमृतसर सुसाइड केस की 5 अहम बातें 17 वर्षीय छात्रा का सुसाइड: अमृतसर में 11वीं कक्षा की एक 17 वर्षीय छात्रा ने संदिग्ध परिस्थितियों में सुसाइड कर लिया, जिसकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. स्कूल प्रबंधन पर एफआईआर: मृतका के पिता रविंद्र सिंह के बयानों के आधार पर पुलिस ने स्कूल प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. फीस के लिए प्रताड़ना का आरोप: पिता का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन उनकी बेटी को 11वीं कक्षा की बकाया फीस जमा करने के लिए लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था. 3 महीने से अनुपस्थित रहने का दावा: स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि छात्रा फरवरी महीने के बाद से (पिछले 3 महीने से) स्कूल नहीं आ रही थी. बीमारी का दिया गया था हवाला: स्कूल के मुताबिक, फोन और लिखित नोटिस के जरिए संपर्क करने पर परिजनों ने बताया था कि बच्ची ठीक नहीं है, इसलिए स्कूल नहीं आ रही. सवाल-जवाब स्कूल प्रबंधन ने फीस से जुड़े प्रताड़ना के आरोपों पर क्या सफाई दी है? स्कूल प्रबंधन ने फीस को लेकर प्रताड़ित करने के आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठ करार दिया है. उनका कहना है कि जब छात्रा पिछले तीन महीनों से स्कूल ही नहीं आ रही थी, तो उसे प्रताड़ित करने का कोई आधार ही नहीं बनता. प्रबंधन के अनुसार, उन्होंने अपनी तरफ से छात्रा की पढ़ाई और अनुपस्थिति को लेकर लगातार परिवार से संपर्क बनाए रखा था. पुलिस को इस दुखद घटना की जानकारी कैसे मिली और उसकी शुरुआती कार्रवाई क्या रही? पुलिस को इस घटना की शुरुआती जानकारी फोर्टिस अस्पताल के माध्यम से मिली, जहां छात्रा को सुसाइड के बाद इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. छात्रा की मौत के बाद अस्पताल ने पुलिस को सूचित किया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मृतका के पिता रविंद्र सिंह के बयान दर्ज किए और तुरंत स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी धाराओं में केस दर्ज कर लिया. स्कूल प्रशासन और मृतका के परिजनों के बयानों में क्या मुख्य विरोधाभास (अंतर) है? इस मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास छात्रा के स्कूल न आने के कारण को लेकर है. पिता का आरोप है कि स्कूल की तरफ से फीस के लिए मिल रही मानसिक प्रताड़ना के कारण उनकी बेटी तनाव में थी और उसने यह कदम उठाया. इसके विपरीत, स्कूल का दावा है कि लिखित रिकॉर्ड और फोन कॉल्स के अनुसार, परिजनों ने खुद उन्हें बताया था कि बच्ची की तबीयत खराब (ठीक नहीं) है, जिसके कारण वह फरवरी के बाद से स्कूल नहीं आ पा रही थी. Source link

ताज़ा खबर

India Maritime Surveillance : Indian Ocean | China Surveillance | India Vs...

नई दिल्ली: हिंद महासागर जियोपॉलिटिक्स का सेंटर बन गया है क्योंकि यहीं से दुनिया का लगभग 60-70 फीसदी समुद्री व्यापार गुजरता है. इस समंदर में जो देश जितना ताकतवर होगा, दुनिया में उसी की तूती बोलेगी. यही वजह है कि चीन यहां लगातार चालबाजियां बढ़ाने में लगा है लेकिन भारत भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है. ड्रैगन पर लगाम कसने को भारत ने दिल्ली से सटे गुरुग्राम में एक ऐसा हाई-टेक ‘वॉर रूम’ खड़ा कर दिया है, जो समंदर में चीन की हर चाल, हर गुस्ताखी पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखता है. इसके साथ ही समंदर की रियल-टाइम सूचनाएं सीधे वॉशिंगटन से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक भेजी जाती हैं. समंदर की ‘तीसरी आंख’ है गुरुग्राम का IMAC और IFC-IOR सेंटर गुरुग्राम के इस बेहद सुरक्षित और आधुनिक परिसर में दो मुख्य सेंटर एक साथ काम करते हैं. पहला है IMAC (Information Management and Analysis Centre) और दूसरा है IFC-IOR (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region). 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद भारत ने अपनी तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए IMAC की शुरुआत की थी. इसे भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड मिलकर चलाते हैं. ये सेंटर देश की 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा की सुरक्षा करने वाला ‘नेशनल कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन एंड इंटेलिजेंस’ नेटवर्क का मुख्य दिमाग है. ये सेंटर हर साल दुनिया के 1,20,000 से ज्यादा कमर्शियल और गैर-सैन्य जहाजों को ट्रैक करता है, जिसे ‘व्हाइट शिपिंग’ डेटा कहा जाता है. तटीय रडार, अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स और जहाजों के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) से मिलने वाले डेटा को यहां प्रोसेस किया जाता है, जिससे समंदर की एक-एक हलचल साफ दिखाई देती है. भारत से वॉशिंगटन से ऑस्ट्रेलिया तक चीन का रियल टाइम डेटा इसी परिसर में मौजूद IFC-IOR भारत की वैश्विक ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक है. इसे साल 2018 में स्थापित किया गया था ताकि दुनिया के मित्र देशों के साथ मिलकर समुद्री खतरों से निपटा जा सके. इस सेंटर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां दुनिया के 15 से ज्यादा देशों के ‘इंटरनेशनल लायजन ऑफिसर्स’ यानी सैन्य अधिकारी हर वक्त तैनात रहते हैं. इन देशों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, फ्रांस, यूके, सिंगापुर और इटली जैसे बड़े और शक्तिशाली देश शामिल हैं. जब भी हिंद महासागर या उसके आसपास चीन की कोई संदिग्ध पनडुब्बी, जासूसी जहाज या कोई अवैध गतिविधि दिखती है, तो यहां बैठे अधिकारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक एनालिटिक्स की मदद से सेकंडों में उसकी पहचान कर लेते हैं. ये सूचना रियल-टाइम में सीधे वॉशिंगटन और कैनबरा जैसे वैश्विक केंद्रों तक पहुंचा दी जाती है. हाल ही में क्वाड देशों के साथ मिलकर शुरू किए गए ‘इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ प्रोग्राम ने इस सेंटर को दुनिया का सबसे खतरनाक सूचना केंद्र बना दिया है. भारत का मैरीटाइम सर्विलांस सेंटर (फोटो क्रेडिट- https://ifcior.indiannavy.gov.in/) चीन के ‘डार्क शिपिंग’ के खेल को कैसे फेल करता है भारत? चीन और उसके इशारे पर काम करने वाले कई अवैध जहाज समंदर में अपनी पहचान छिपाने के लिए अपना ऑटोमैटिक ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) बंद कर देते हैं. डिफेंस की भाषा में इसे ‘डार्क शिपिंग’ कहा जाता है. चीन को लगता है कि सिस्टम बंद करके वो भारत और उसके साथियों की नजरों से बच जाएगा, लेकिन गुरुग्राम का ये सेंटर उसकी इसी चालाकी को पकड़ने में माहिर है. यहां की आधुनिक सेंसर-ड्रिवन टेक्नोलॉजी और सर्विलांस सिस्टम समंदर के ऊपर, नीचे और सतह पर होने वाली किसी भी विसंगति को तुरंत भांप लेते हैं. अगर कोई जहाज अपने तय रास्ते से जरा सा भी भटकता है या अपना सिग्नल गलत दिखाता है यानी किसी तरह की ‘स्पूफिंग’ करता है तो गुरुग्राम में तुरंत रेड अलर्ट जारी हो जाता है. इसके साथ ही भारत ने अब अंडर-वाटर सर्विलांस यानी पानी के अंदर की सर्विलांस सिस्टम को भी बेहद मजबूत कर लिया है, जिससे चीनी पनडुब्बियों का छिपकर निकलना अब नामुमकिन हो चुका है. हिंद महासागर में चीन का जहाज ड्रैगन की हर गुस्ताखी का ऑन-स्पॉट इलाज साउथ चाइना सी से लेकर हिंद महासागर तक चीन जिस तरह से छोटे देशों को डराकर अपने बेस बना रहा है, उसे रोकने में गुरुग्राम का ये सेंटर मील का पत्थर साबित हो रहा है. ये सेंटर न सिर्फ चीन की नौसैनिक हरकतों पर नजर रखता है, बल्कि समुद्री डकैती, ह्यूमन ट्रैफिकिंग, हथियारों की तस्करी, और चीन की अवैध फिशिंग को भी ट्रैक करता है. आज ये सेंटर 30 से ज्यादा देशों के साथ सीधे तालमेल बिठाकर काम कर रहा है. भारत की इस ‘मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ यानी समुद्री निगरानी क्षमता ने चीन को उसके ही जाल में घेर लिया है. जिनपिंग की सेना चाहे जितनी कोशिश कर लें लेकिन गुरुग्राम में बैठे भारतीय नौसेना के जांबाज और आधुनिक कंप्यूटर उनके हर चक्रव्यूह को पल भर में डिकोड कर देते हैं. Source link

ताज़ा खबर

DK शिवकुमार की ‘ताजपोशी’, बैंगलुरू के सरकारी दफ्तरों में कल आधे दिन...

होमताजा खबरदेश DK शिवकुमार की ‘ताजपोशी’, बैंगलुरू के सरकारी दफ्तरों में कल आधे दिन की छुट्टी Last Updated:June 02, 2026, 15:06 IST सिद्धारमैया का ‘त्याग’, ज्योतिषी का ‘मुहूर्त’ और 4 डिप्टी सीएम का सस्पेंस, कल कर्नाटक में सिर्फ कुर्सी नहीं, पूरा भूगोल बदलेगा! कर्नाटक के मनोनीत सीएम डीके शिवकुमार. बैंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति के सबसे बड़े ‘संकटमोचक’ और कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार की आखिरकार ताजपोशी होने जा रही है. कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों से आ रही सबसे बड़ी खबर के मुताबिक, कल होने वाले उनके भव्य शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर राज्य सरकार ने बैंगलुरु के कुछ प्रमुख सरकारी कार्यालयों में आधे दिन की छुट्टी घोषित कर दी है. डीके शिवकुमार के इस शक्ति प्रदर्शन और शपथ ग्रहण को लेकर पूरे बैंगलुरु को किसी दुल्हन की तरह सजाया गया है, जहां देश भर के वीवीआईपी VVIPs जुटने वाले हैं. सुरक्षा और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए ‘हाफ-डे’ का ऐलानशपथ ग्रहण समारोह बैंगलुरु के प्रतिष्ठित कांतीरवा स्टेडियम में आयोजित होगा. चूंकि डीके शिवकुमार के इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए लाखों समर्थकों और देश भर के बड़े राजनेताओं के बैंगलुरु पहुंचने की उम्मीद है, इसलिए प्रशासन ने सुरक्षा और भारी ट्रैफिक जाम की आशंका को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है. सरकार के आधिकारिक आदेश के मुताबिक, स्टेडियम के आसपास और मध्य बैंगलुरु के इलाकों में स्थित सभी सरकारी दफ्तरों, बोर्डों और निगमों में कल दोपहर 1 बजे के बाद आधे दिन की छुट्टी रहेगी, ताकि आम जनता को ट्रैफिक की वजह से किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. राजनीति के ‘कनकपुरा रॉक’ का सबसे बड़ा दिनकर्नाटक की राजनीति में डीके शिवकुमार को ‘कनकपुरा रॉक’ और कांग्रेस का सबसे मजबूत सिपहसालार माना जाता है. सरकार बनाने से लेकर संकट के समय विधायकों को एकजुट रखने तक, डीके शिवकुमार ने हमेशा किंगमेकर की भूमिका निभाई है. लेकिन कल का दिन उनके खुद के ‘किंग’ बनने या राज्य की कमान आधिकारिक तौर पर पूरी ताकत से संभालने का दिन है. यही वजह है कि उनके समर्थक इस दिन को एक महा-उत्सव की तरह मना रहे हैं. कांतीरवा स्टेडियम में वीवीआईपी का जमावड़ाकल होने वाले इस भव्य समारोह के लिए सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं. बैंगलुरु पुलिस ने कांतीरवा स्टेडियम के चारों ओर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी तैनात की है. ट्रैफिक एडवाइजरी: पुलिस ने कल के लिए एक विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (CBD) की ओर जाने वाले कई रास्तों को डायवर्ट किया गया है. कौन-कौन आ रहा है?: इस समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व गांधी परिवार और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा देश के कई विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और दिग्गज नेताओं के शामिल होने की पूरी संभावना है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें राजनीति के ‘कनकपुरा रॉक’ का सबसे बड़ा दिनकर्नाटक की राजनीति में डीके शिवकुमार को ‘कनकपुरा रॉक’ और कांग्रेस का सबसे मजबूत सिपहसालार माना जाता है. सरकार बनाने से लेकर संकट के समय विधायकों को एकजुट रखने तक, डीके शिवकुमार ने हमेशा किंगमेकर की भूमिका निभाई है. लेकिन कल का दिन उनके खुद के ‘किंग’ बनने या राज्य की कमान आधिकारिक तौर पर पूरी ताकत से संभालने का दिन है. यही वजह है कि उनके समर्थक इस दिन को एक महा-उत्सव की तरह मना रहे हैं. कांतीरवा स्टेडियम में वीवीआईपी का जमावड़ाकल होने वाले इस भव्य समारोह के लिए सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं. बैंगलुरु पुलिस ने कांतीरवा स्टेडियम के चारों ओर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी तैनात की है. ट्रैफिक एडवाइजरी: पुलिस ने कल के लिए एक विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (CBD) की ओर जाने वाले कई रास्तों को डायवर्ट किया गया है. कौन-कौन आ रहा है?: इस समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व गांधी परिवार और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा देश के कई विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और दिग्गज नेताओं के शामिल होने की पूरी संभावना है. किसकी छुट्टी रहेगी?कर्नाटक सरकार के कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग (DPAR) ने छुट्टी के लिए बाकायदा आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है. जब भी कर्नाटक में किसी बेहद बड़े कद के नेता का शपथ ग्रहण या कोई बड़ा राजनीतिक समागम होता है, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैंगलुरु के चिन्हित इलाकों में इस तरह की छुट्टी का ऐलान किया जाता रहा है. नोटिफिकेशन के मुताबिक छुट्टी सिर्फ उन्हीं दफ्तरों में है जहां सबसे ज्यादा वीवीआईपी मूवमेंट और ट्रैफिक ब्लॉक होने वाला है. निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस हाईकमान के आदेश का सम्मान करते हुए 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. कर्नाटक के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सीएम रहने वाले सिद्धारमैया ने खुद विधायक दल की बैठक में डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा था. यह महज एक आम शपथ ग्रहण नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर 2023 से चले आ रहे ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद के ‘पावर-शेयरिंग एग्रीमेंट’ का सुपर शो है. शपथ ठीक 4:05 बजे ही क्यों?डीके शिवकुमार राजनीति के धुरंधर होने के साथ-साथ पंचांग और ज्योतिष में अटूट विश्वास रखते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स और उनके पारिवारिक ज्योतिषक ‘आराध्या’ के मुताबिक, 3 जून को दोपहर ठीक 4:05 बजे का समय उनके लिए सबसे बड़ा ‘राजयोग’ बना रहा है. यही वजह है कि शपथ ग्रहण का मुहूर्त बिल्कुल मिनट-टू-मिनट तय किया गया है. शपथ लेने से ठीक पहले वो अपने पसंदीदा ‘कदासिद्देश्वर मठ’ में विशेष पूजा-अर्चना भी करेंगे. खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

ताज़ा खबर

Gold & RBI : रिजर्व बैंक बेच सकता है 83 टन सोना!...

Last Updated:June 02, 2026, 13:51 IST RBI Gold Reserve : ब्‍लूमबर्ग ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि आरबीआई अपने गोल्‍ड रिजर्व में से 12 अरब डॉलर मूल्‍य का सोना बेच सकता है. इन पैसों का इस्‍तेमाल विदेशी मुद्रा जैसे डॉलर को खरीदने में किया जाएगा. अगर ऐसा होता है तो रिजर्व बैंक का गोल्‍ड रिजर्व करीब 83 टन कम हो जाएगा. रुपये की गिरावट को थामने के लिए आरबीआई सोना बेच सकता है. नई दिल्‍ली. ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर इस कदर असर डाल दिया है कि रिजर्व बैंक को अपने खजाने से अरबों डॉलर का सोना बेचना पड़ सकता है. ब्‍लूमबर्ग के इकनॉमिस्‍ट का कहना है कि मिडल ईस्‍ट में चल रहे युद्ध की वजह से भारतीय करेंसी पर काफी दबाव पड़ रहा है. करेंसी में गिरावट की वजह से देश का आयात बिल भी लगातार बढ़ता जा रहा है. अब इस दोहरी मुसीबत से निपटने के लिए रिजर्व बैंक को अपने खजाने में से कई टन सोना बेचकर विदेशी मुद्रा खरीदनी पड़ सकती है. ब्‍लूमबर्ग के हवाले से मनीकंट्रोल ने बताया है कि आरबीआई को अपने गोल्‍ड रिजर्व में से करीब 12 अरब डॉलर (1.20 लाख करोड़ रुपये) मूल्‍य का सोना बेचना पड़ सकता है. ब्‍लूमबर्ग के भारतीय इकनॉमिस्‍ट अभिषेक गुप्‍ता का कहना है कि 22 मई से शुरू हुए सप्‍ताह से लेकर अगले 2 हफ्ते में आरबीआई 12 अरब डॉलर का सोना बेचकर उन पैसों से विदेशी मुद्रा की खरीद कर सकता है. उन्‍होंने अनुमान लगाया कि आरबीआई करीब 7.5 अरब डॉलर खर्च करके विदेशी मुद्रा की संपत्तियां खरीद सकता है. क्‍यों आई सोना बेचने की नौबतअभिषेक गुप्‍ता का कहना है कि सरकार की ओर से पिछले दिनों सोने और चांदी पर आयात शुल्‍क बढ़ाए जाने के बाद आरबीआई के रिजर्व में मौजूद बुलियन की कीमत बढ़ गई है. साथ ही डॉलर के मूल्‍य में भी बढ़ोतरी दिख रही है. यही वजह है कि रिजर्व बैंक को सोना बेचने की सलाह दी गई है. एक्‍सपर्ट का कहना है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था अभी रुपये में गिरावट के साथ होर्मुज जलडमरूमध्‍य बंद होने की वजह महंगे तेल के आयात का बोझ भी झेल रही है. ऐसे में रिजर्व बैंक चालू खाते के घाटे के दबाव से निपटने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने पर जोर दे रहा है. यही वजह है कि अपने खजाने में से सोने को बेचकर डॉलर खरीदने पर दांव लगाने की मंशा है. कर्ज भी हो सकता है महंगाब्‍लूमबर्ग ने पहले ही रिपोर्ट दी थी कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा रुपये को स्थिर करने के लिए सभी विकल्‍पों पर विचार कर रहे हैं. इसमें रेपो रेट बढ़ाने से लेकर विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाना तक शामिल है. आरबीआई के अभी तक उठाए गए कदमों की वजह से ही रुपये में थोड़ी मजबूती आई है. 20 मई को यह एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बनकर ऑल टाइम डाउन हो गया था, लेकिन मंगलवार को यह 0.20 फीसदी की गिरावट के साथ 95.17 रुपये पर दिख रहा है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड आयातक देश है, लेकिन मि‍डल ईस्‍ट में मचे कोहराम की वजह से भारत का खजाना तेल खरीदने पर तेजी से खाली हो रहा है. आरबीआई के पास कितना सोनारिजर्व बैंक के पास मार्च, 2026 तक करीब 880.52 मीट्रिक टन सोने का भंडार रहा, जिसमें से 77 फीसदी सोना देश में ही रखा हुआ है. 6 महीने पहले तक देश में आरबीआई के कुल गोल्‍ड भंडार का 66 फीसदी था, लेकिन इस दौरान रिजर्व बैंक ने 10 फीसदी रिजर्व और बढ़ा दिया है. देश का शेष 23 फीसदी सोना बैंक ऑफ इंग्‍लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट के पास रखा हुआ है. अगर रिजर्व बैंक इसमें से 12 अरब डॉलर कीमत का सोना बेचता है तो यह वजन में करीब 82.6 मीट्रिक टन के आसपास होगा. ग्‍लोबल मार्केट में सोने का भाव अभी 4,500 डॉलर प्रति औंस चल रहा है. इसी भाव से 12 अरब डॉलर में करीब 83 टन सोना आएगा. अगर यह बिक्री होती है तो आरबीआई के पास 797.50 मीट्रिक टन सोने का भंडार बचेगा. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

ताज़ा खबर

दुनिया का वो अकेला शहर, जहां ना कोई मांस खाता और ना...

क्या आपको मालूम है कि दुनिया में एक शहर ऐसा भी है, जहां ना तो कोई मांसाहार करता है और ना ही बनाता है तो बेचने का तो सवाल ही नहीं उठता. इस शहर में नॉनवेज पूरी तरह प्रतिबंधित है. यहां ना तो मांसाहारी भोजन खा सकते हैं, ना बेच सकते हैं ना रख सकते हैं. अंदाज लगाइए कि ये शहर कहां होगा. ये जगह गुजरात में है. नाम है पालिताना. ये जैन धार्मिक शहर है. राज्य सरकार ने भी इसे केवल शाकाहारी शहर घोषित किया है. इस शहर के बारे में जानने में हर किसी की दिलचस्पी रहती है. पालिताना 900 से अधिक जैन मंदिरों के कारण “जैन टैम्पल टाउन” के नाम से विख्यात है. लिहाजा ये शहर पूरी तरह अहिंसा का पालन करता है. इसे “जैन टैम्पल टाउन” भी कहते हैं. दूर दूर से लोग यहां आते हैं. खासकर जैन धर्म के लोग बहुतायत में यहां सालभर आते रहते हैं. पालिताना गुजरात के भावनगर जिले में स्थित एक कस्बा और तहसील है. अहमदाबाद इसके पड़ोस में ही है. मांस, मछली और अंडे पर पूर्ण प्रतिबंध जैन धर्म में अहिंसा (अणुव्रत) का सिद्धांत है, जिसके तहत किसी भी जीव की हिंसा नहीं की जा सकती. 2014 में जैन मुनियों के आग्रह पर गुजरात सरकार ने पालिताना को “मांस-मुक्त शहर” (Vegetarian City) घोषित किया. यहां मांस, मछली और अंडे की बिक्री व सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया. यहां स्लॉटरहाउस (कसाईघर) और नॉन-वेज रेस्तरां नहीं हैं. पर्यटकों को भी शहर में मांसाहार लाने की अनुमति नहीं है. यहां कानूनी तौर पर नॉन-वेज पर पूर्ण प्रतिबंध है. श्वेतांबर जैन का प्रमुख तीर्थ स्थल पालिताना श्वेतांबर जैन समुदाय का प्रमुख तीर्थ स्थल है. यहां शत्रुंजय पहाड़ी पर करीब 900 मंदिर स्थित हैं, जिन्हें “सिद्धक्षेत्र” (मोक्ष प्राप्ति का स्थान) माना जाता है. जैन मान्यताओं के अनुसार, इस पहाड़ी पर कई तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया था. 2014 में जैन मुनियों ने एक धर्म अनशन (उपवास) किया. सरकार से मांसाहार पर प्रतिबंध लगाने की मांग की. इसके बाद सरकार ने वैसा ही कर दिया. तब से ही यहां कोई भी मांस, मछली या अंडे की बिक्री नहीं होती और न ही इसे खाया जाता है. शत्रुंजय के मंदिर अपनी नक्काशीदार वास्तुकला और संगमरमर के उत्कृष्ट काम के लिए प्रसिद्ध हैं, जो 11वीं से 20वीं शताब्दी तक बनाए गए. शत्रुंजय पहाड़ी पर मंदिरों तक पहुंचने के लिए लगभग 3,500 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं. यह जगह यह जैन धर्म के साथ-साथ क्षेत्रीय शासकों जैसे गोहिल राजपूतों से भी जुड़ी हुई है. यहां 3 से 5 फीसदी मुस्लिम रहते हैं पालिताना की कुल जनसंख्या करीब 65,000 है. साक्षरता दर 85% है. यहां 60 फीसदी जैन समुदाय के ही लोग रहते हैं. 35 फीसदी हिंदू और 5 फीसदी मुसलमान और अन्य. यहां रहने वाले मुस्लिम भी नॉनवेज नहीं खा सकते. धार्मिक पर्यटन ही इस शहर की अर्थव्यवस्था को चलाता है. लाखों श्रद्धालु और पर्यटक हर साल यहां आते हैं. मंदिर प्रशासन, होटल और धर्मशालाएं प्रमुख रोजगार देते हैं. सभी होटल और रेस्तरां शुद्ध शाकाहारी सभी होटल और रेस्तरां शुद्ध शाकाहारी हैं. दूध, फल और सब्जियों का प्रयोग अधिक होता है. हर 12 साल में यहां महामस्तकाभिषेक का विशाल समारोह होता है. नानवेज प्रतिबंधित होने से यहां पर कार्बन फुटप्रिंट कम. शाकाहारी आहार से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम हैं. हालांकि कुछ विदेशी पर्यटकों को यह नियम असुविधाजनक लगता है. मांस बेचने वाले छोटे व्यवसायियों खासकर मुस्लिमों को अन्य काम ढूंढने पड़े. कुछ मुस्लिमों ने स्वेच्छा से शाकाहार अपना लिया यहां के अधिकांश मुस्लिम परिवार स्थानीय जैन और हिंदू समुदाय के साथ मिलकर रहते हैं. चूंकि पालिताना में कानूनी रूप से मांस, मछली और अंडे की बिक्री व सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है, लिहाजा शहर में रहते हुए वो भी इसका सेवन नहीं कर सकते. सार्वजनिक तौर पर वो ऐसा करते दिखते भी नहीं. जैन समुदाय के अहिंसा के सिद्धांतों के कारण, मुस्लिम समुदाय भी सार्वजनिक रूप से मांसाहार से बचता है ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे. कुछ मुस्लिम परिवारों ने स्वेच्छा से शाकाहार अपना लिया है, खासकर वे जो जैनों के साथ व्यापारिक संबंध रखते हैं. हां, बकरीद जैसे त्योहारों पर इस्लाम में कुर्बानी (बकरीद) और अन्य अवसरों पर मांस खाने की परंपरा है, जो पालिताना में मुश्किल हो जाता है. ये भी कहा जाता है कि बहुत से मुस्लिमों ने शाकाहार को ही अपना लिया है. उनकी जीवनशैली भी यहां बदल रही है. प्याज और लहसुन तक नहीं बिकता पालिताना में प्याज और लहसुन की बिक्री और उपयोग पर भी प्रतिबंध है. स्थानीय बाजारों में आपको प्याज और लहसुन नहीं मिलेगा. रेस्तरां या घरों में भी इनका उपयोग नहीं किया जाता. यदि आप प्याज या लहसुन खरीदना चाहते हैं, तो आपको पड़ोसी शहरों जैसे भावनगर या अन्य क्षेत्रों में जाना पड़ सकता है, जहां ऐसे प्रतिबंध नहीं हैं. क्या भारत में कहीं और ऐसा बैन है उत्तराखंड जैसे ऋषिकेश और हरिद्वार में धार्मिक मान्यताओं के कारण मांस और शराब पर स्थानीय रोक है, लेकिन यह क़ानूनी बैन नहीं है. अयोध्या, वृंदावन, पुष्कर जैसे तीर्थस्थलों पर भी परंपरागत रूप से मांस नहीं परोसा जाता लेकिन सामाजिक संहिता के तौर पर है. Source link

Scroll to Top