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न मांस, न मछली, न अंडा… आपको पता है भारत का पहला...

होमफोटोदेश न मांस, न मछली, न अंडा… आपको पता है भारत का पहला शाकाहारी शहर? Last Updated:June 01, 2026, 20:19 IST भारत के गुजरात में एक ऐसा शहर है, जहां ना सिर्फ मांस और मछली पर बैन है बल्कि अंडा बेचने की भी मनाही है. भारत अपनी विविध संस्कृतियों, परंपराओं और खान-पान की आदतों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की भोजन संबंधी पसंद भी अलग-अलग है. कहीं शाकाहार जीवनशैली का हिस्सा है तो कहीं मांसाहार आम बात है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है जहां अंडा, मांस और मछली बेचना कानूनन प्रतिबंधित है? यह अनोखा शहर है गुजरात का पालीताना, जो अपनी धार्मिक पहचान के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है. गुजरात के भावनगर जिले में स्थित पालीताना जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है. यहां स्थित शत्रुंजय पर्वत पर सैकड़ों भव्य जैन मंदिर बने हुए हैं, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. जैन धर्म में अहिंसा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाना पाप माना जाता है. इसी धार्मिक मान्यता ने पालीताना को देश के अन्य शहरों से अलग पहचान दिलाई है. (ट्रैवेल डॉट इन) साल 2014 में जैन संतों और स्थानीय समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद प्रशासन ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. इस फैसले के तहत पालीताना शहर की सीमा के भीतर मांस, मछली और अंडों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया. इसके साथ ही पशु वध और उससे जुड़े कई व्यवसायों को भी बंद कर दिया गया. इस निर्णय के बाद पालीताना को भारत का पहला ‘शाकाहारी शहर’ कहा जाने लगा. Add News18 as Preferred Source on Google यह कानून केवल धार्मिक भावना तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुका है. जहां देश के अधिकांश शहरों में अंडा एक सामान्य खाद्य पदार्थ माना जाता है. वहीं पालीताना में इसकी बिक्री भी अनुमति प्राप्त नहीं है. समय-समय पर स्थानीय प्रशासन नियमों के पालन की निगरानी करता है ताकि शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं बरकरार रह सकें. (इंडियाइन्वीटेशन डॉट कॉम) आज पालीताना केवल अपने शानदार जैन मंदिरों और आध्यात्मिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि इस अनोखे प्रतिबंध के कारण भी चर्चा में रहता है. देश-विदेश से आने वाले पर्यटक अक्सर यह जानकर हैरान रह जाते हैं कि यहां अंडा तक बेचना गैरकानूनी है. पालीताना इस बात का अनूठा उदाहरण है कि कैसे धार्मिक आस्थाएं और सांस्कृतिक परंपराएं किसी शहर की जीवनशैली, पहचान और स्थानीय कानूनों को प्रभावित कर सकती हैं. यह तथ्य सामान्य ज्ञान के लिहाज से भी भारत की सबसे दिलचस्प जानकारियों में से एक माना जाता है. (ट्रिपोटो डॉट कॉम) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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नेबरहुड फर्स्ट: पूर्वोत्तर से हिंद-प्रशांत तक, PM मोदी और ह्लाइंग मुलाकात से...

होमताजा खबरदेश PM मोदी और आंग ह्लाइंग मुलाकात से भारत-म्यांमार रिश्तों को मिली नई उड़ान Last Updated:June 01, 2026, 19:32 IST यह म्यांमार राष्ट्रपति की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है. म्यांमार के नेता के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हैं. म्यांमार भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम पड़ोसी देशों में से एक है और वह उग्रवाद प्रभावित नगालैंड तथा मणिपुर सहित कई पूर्वोत्तर राज्यों के साथ 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है. ख़बरें फटाफट पीएम मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. नई दिल्ली. भारत और म्यांमार ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ ही व्यापार, निवेश, संपर्क (कनेक्टिविटी), विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. सोमवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में हुई विस्तृत वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की. बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भारत हर तरह की मदद को तैयार है. उन्होंने संघीय शासन व्यवस्था और आर्थिक विकास के अनुभव साझा करने की भी बात कही. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीतियों के अनुरूप भारत हमेशा म्यांमार का सहयोग करता रहेगा. आंग ह्लाइंग इस समय भारत की पांच दिवसीय यात्रा पर हैं. उनकी भारत यात्रा म्यांमा में संसदीय चुनावों के बाद उनके राष्ट्रपति बनने के दो महीने से भी कम समय में हो रही है. ये चुनाव सत्ताधारी सैन्य जुंटा के खिलाफ वर्षों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बाद पिछले साल दिसंबर और इस साल जनवरी में हुए थे. सैन्य जुंटा ने एक फरवरी, 2021 को तख्तापलट करके आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंका था. विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति की बातचीत व्यापक रही और दोनों देशों ने शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि भारत म्यांमार के लिए एक भरोसेमंद पड़ोसी और संकट के समय में पहला सहयोगी है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच बहुआयामी संबंधों को और गहराई देगी. इससे पहले रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उनसे मुलाकात की थी, जबकि 30 मई को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी उनसे बातचीत की थी और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही थी. राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना से की थी. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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NTA विवाद: 21 जून का पेपर लीक नहीं होगा क्या गारंटी? संसद...

देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के गंभीर मुद्दों के बीच शिक्षा मंत्रालय की संसद की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में आज भारी हंगामा देखने को मिला. कमेटी के अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के चेयरमैन और हायर एजुकेशन सेक्रेटरी की जमकर क्लास लगाई. बैठक का माहौल उस समय बेहद आक्रामक और गंभीर हो गया जब दिग्विजय सिंह ने सीधे अधिकारियों की आंख में आंख डालकर पूछा कि इसकी क्या गारंटी है कि 21 जून को होने वाला एग्जाम दोबारा लीक नहीं होगा? इस संवेदनशील मुद्दे पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसद एक सुर में नजर आए. सभी सांसदों का साफ कहना था कि यह देश के लाखों बच्चों के भविष्य का सीधा मामला है इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सरकार और अधिकारियों की टालमटोल नीति पर तीखे सवाल उठाते हुए कमेटी ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है. शिक्षा मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक की 5 मुख्य बातें• 21 जून की परीक्षा पर तीखा सवाल: कमेटी अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने NTA चेयरमैन और हायर एजुकेशन सेक्रेटरी से सीधे पूछा कि आगामी 21 जून को होने वाली परीक्षा के लीक न होने की उनके पास क्या गारंटी है.• अधिकारियों की सफाई: अधिकारियों ने दलील दी कि पुरानी खामियों को सुधारने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं. जिस दोबारा परीक्षा (Re-exam) को कराने में 5 महीने का वक्त लगता है, उसे वे महज 37 दिनों में आयोजित कर रहे हैं.• दलगत राजनीति से ऊपर उठा मुद्दा: इस गंभीर विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसद पूरी तरह एकजुट दिखे. सभी ने एक सुर में कहा कि यह छात्रों के भविष्य का सवाल है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.• CBT और हैकिंग पर चिंता: दिग्विजय सिंह ने अगले साल होने वाले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में जब हैकिंग आम हो चुकी है, तो सीबीटी के जरिए पेपर लीक नहीं होगा, यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा?• कमेटी गठन का आश्वासन: हैकिंग और सीबीटी सुरक्षा के सवाल पर अधिकारियों ने बताया कि एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है, जो 3 महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद ही इस पर विस्तार से चर्चा संभव होगी. छात्रों के भविष्य पर गारंटी बनाम टालमटोल की राजनीति संसद की स्टैंडिंग कमेटी की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि देश में परीक्षा प्रणाली को लेकर अविश्वास की खाई कितनी गहरी हो चुकी है. जब अधिकारी 5 महीने का काम 37 दिनों में करने की पीठ थपथपा रहे थे, तब दिग्विजय सिंह का यह कहना कि “पहले भी लीक होने पर आपने यही कहा था” सीधे तौर पर सिस्टम की साख पर प्रहार है. इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ी बात यह है कि अब यह लड़ाई सिर्फ विपक्ष बनाम सरकार की नहीं रह गई है बल्कि स्टैंडिंग कमेटी में सत्ता पक्ष के सांसदों का सुर मिलाना यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा कितना ज्यादा है. अधिकारियों द्वारा विशेष कमेटी और 3 महीने में रिपोर्ट की बात कहना प्रशासनिक ढर्रे की याद दिलाता है. दिग्विजय सिंह की यह चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण है कि सरकार अधिकारियों को आगे करके सिर्फ टालमटोल कर रही है और अगर दोबारा कुछ गलत हुआ तो इसका अंजाम सीधे तौर पर इन अधिकारियों को ही भुगतना पड़ेगा. यह बयान साफ करता है कि अब नौकरशाही अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती.  सवाल-जवाब स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में दिग्विजय सिंह ने NTA चेयरमैन से 21 जून की परीक्षा को लेकर क्या तीखा सवाल पूछा? कमेटी के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने NTA चेयरमैन और हायर एजुकेशन सेक्रेटरी की क्लास लगाते हुए सीधा सवाल किया कि इस बात की क्या गारंटी है कि आगामी 21 जून को होने वाला एग्जाम दोबारा लीक नहीं होगा? उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी पेपर लीक होने पर अधिकारियों ने सुरक्षा के ऐसे ही दावे किए थे. दिग्विजय सिंह के कड़े सवालों पर NTA और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने क्या दलील दी? अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि पुरानी परीक्षा में जो भी खामियां सामने आई थीं, उन्हें सुधारने के लिए सभी कड़े कदम उठाए गए हैं. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि दोबारा एग्जाम आयोजित करने में आमतौर पर 5 महीने का लंबा वक्त लगता है, लेकिन वे इसे रिकॉर्ड 37 दिनों के भीतर ही संपन्न करा रहे हैं. कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) को लेकर बैठक में क्या चिंताएं जताई गईं और अधिकारियों का इस पर क्या जवाब था? दिग्विजय सिंह ने तकनीकी सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज के दौर में जब हैकिंग बेहद आम हो चुकी है, तो अगले साल से होने वाले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) के सुरक्षित होने और पेपर लीक न होने का फैसला कैसे तय होगा? इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि इसके लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई है, जो 3 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी. Source link

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अभिषेक बनर्जी से मारपीट पर सियासत: राम मंदिर पर अड़ंगा और कसाब...

होमताजा खबरदेश अभिषेक बनर्जी से मारपीट पर दिल्ली में बयानबाजी, TMC-भाजपा में बढ़ी तल्खी Last Updated:June 01, 2026, 17:25 IST पुलिस ने बताया कि 30 मई को चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों के परिवारों से मिलने के लिए सोनारपुर जाने पर अभिषेक बनर्जी के साथ कथित तौर पर स्थानीय लोगों ने मारपीट की. अज्ञात लोगों ने सांसद पर पत्थर, जूते और अंडे फेंके, और “चोर, चोर” के नारे लगाते हुए उन पर लात-घूंसे बरसाने की कोशिश भी की. अभिषेक बनर्जी पर हमले को लेकर सियासत तेज हो गई है. नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेताओं पर हुए हमलों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा घटनाओं को शर्मनाक बताए जाने के बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला है. भाजपा नेताओं का कहना है कि टीएमसी नेताओं के खिलाफ जनता में नाराजगी है, जबकि कपिल सिब्बल के बयान को देश और लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान बताया. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कपिल सिब्बल को लेकर कहा कि उनका बयान देश विरोधी है और देश की जनता तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान है. इस बयान में जनता द्वारा बार-बार ठुकराए जाने का असर दिखाई देता है. जिस देश ने आपको नेता, मंत्री, सांसद और अधिवक्ता बनाया, उसी देश का आप अपमान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां सत्ता परिवर्तन भी लोकतांत्रिक तरीकों से होता है, “खेला होबे” से नहीं. हर नागरिक को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है, लेकिन देश को बदनाम करने वाले ऐसे बयान कपिल सिब्बल सहित विपक्ष के नेताओं की मानसिकता को उजागर करते हैं. विदेशी टूलकिट के हिसाब से राहुल गांधी के नेतृत्व में कुछ लोग देश की संस्थाओं, लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. लोकतंत्र की नींव कमजोर करने का काम कांग्रेस ने दशकों तक किया है. उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि का फैसला रोकने और कसाब को बचाने के लिए देर रात कोर्ट खुलवाने वाले लोग आज देश को गाली दे रहे हैं. देश नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूती से आगे बढ़ रहा है और कोई इसे रोक नहीं सकता. कपिल सिब्बल का बयान गैरजिम्मेदाराना है और देश का अपमान करने का प्रयास है. वहीं, भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि अभिषेक बनर्जी या कल्याण बनर्जी पर हुआ हमला किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है. हम इसका विरोध करते हैं और भाजपा के कार्यकर्ता इन घटनाओं में शामिल नहीं हैं. यह जनता का गुस्सा है. उन्हें कुछ दिन एहतियात बरतनी चाहिए. सरकार सुरक्षा देगी, लेकिन पिछले 15 वर्षों में लोगों को जिस तरह परेशान किया गया, उसका प्रभाव अब दिखाई दे रहा है. उन्होंने टीएमसी को आत्मचिंतन करने की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें यह पता लगाना चाहिए कि उनकी हार क्यों हुई. आखिर लोगों में ऐसी क्या नाराजगी है कि वे बाहर निकलते हैं तो जनता उन पर टूट पड़ती है. भाजपा हिंसा और मारपीट के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के शासनकाल में लोगों पर कितनी ज्यादतियां हुईं, यह किसी को याद नहीं आता. अब परिवार के किसी सदस्य के साथ जनता की नाराजगी सामने आई तो ममता बनर्जी प्रदर्शन कर रही हैं. उन्हें इसका अधिकार है, लेकिन यह भी सोचना चाहिए कि जनता उनसे नाराज क्यों है. बता दें कि कपिल सिब्बल ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और हालिया हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे शर्मनाक बताया था और सरकार के रवैये पर सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर हमला हैं. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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Annamalai: क्या PM मोदी को गुरु मानने वाले पूर्व IPS अधिकारी के...

Annamalai launch new party in tamilnadu: तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसा पक रहा है जो आने वाले दिनों में दक्षिण भारत की पूरी राजनीति को बदलकर रख सकता है. कभी सूबे में भारतीय जनता पार्टी का सबसे आक्रामक और चमकता हुआ चेहरा रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई के बारे में यह खबर उड़ रही है कि वह बीजेपी का दामन छोड़ सकते हैं. मीडिया और सियासी हल्कों में यह दावा किया जा रहा है कि अन्नामलाई दिल्ली दरबार के कुछ फैसलों से बेहद खफा हैं, खासकर राज्य में क्षेत्रीय दलों के साथ पार्टी के नए तालमेल को लेकर. चर्चा तो यहां तक है कि वह जून के इसी हफ्ते में अपने अगले बड़े कदम का ऐलान कर सकते हैं और अपनी खुद की नई पार्टी की घोषणा भी कर सकते हैं. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर वो कौन से समीकरण हैं, जिन्होंने पीएम मोदी के इस सबसे भरोसेमंद सिपाही को बगावत और नई राह चुनने की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है. पीएम मोदी के ‘सिंघम’ की बीजेपी से क्यों बढ़ीं दूरियां? मीडिया रिपोर्ट में छपी खबर के मुताबिक, तमिलनाडु के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष के. अन्नामलाई और केंद्रीय नेतृत्व के बीच लंबे समय से कुछ मुद्दों को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही थी. राज्य में संगठन के भीतर जब से बदलाव किए गए और उनके कुछ फैसलों को पलटा गया, तभी से अन्नामलाई और उनके धुर समर्थकों में एक अजीब सी खामोशी और नाराजगी देखी जा रही थी. हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच जब उम्मीदवारों और रणनीति की बात आई, तो उसमें अन्नामलाई के आक्रामक तेवरों को थोड़ा शांत करने की कोशिश की गई, जो उनके समर्थकों को बिल्कुल रास नहीं आया. अन्नामलाई राज्य की कुछ खास सीटों पर अपनी रणनीति के तहत काम करना चाहते थे, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने स्थानीय स्तर पर कुछ ऐसे फैसले लिए जो उनके नजरिए से मेल नहीं खा रहे थे. इसी तवज्जो की कमी और संगठन में बढ़ते मतभेदों के कारण अन्नामलाई ने पिछले कुछ दिनों से खुद को बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों और बैठकों से दूर कर लिया है. हालांकि उन्होंने इस दूरी के पीछे कुछ निजी और पारिवारिक कारणों का हवाला दिया है, लेकिन राजनीति को करीब से जानने वाले लोग इसे किसी बड़े तूफान से पहले की खामोशी मान रहे हैं. क्या वाकई नई क्षेत्रीय पार्टी बनाने जा रहे हैं अन्नामलाई? सोशल मीडिया से लेकर चेन्नई के चाय के अड्डों तक यह अफवाह इस वक्त बेहद गर्म है कि अन्नामलाई अब किसी राष्ट्रीय पार्टी के अनुशासन के दायरे में बंधकर रहने के मूड में नहीं हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि अन्नामलाई के बेहद करीबी समर्थक और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर लगातार एक नई राजनीतिक लहर की बातें कर रहे हैं. यहां तक कि उनके प्रशंसक नई पार्टी के संभावित नाम, उसकी विचारधारा और तमिलनाडु की माटी से जुड़े कुछ खास प्रतीकों को भी आपस में शेयर कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि जून के पहले या दूसरे हफ्ते में अन्नामलाई कोई बड़ा और चौंकाने वाला आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं. द्रविड़ राजनीति के इस मजबूत गढ़ में अपनी एक अलग और बेदाग पहचान बनाने वाले पूर्व आईपीएस के चाहने वाले भी यही चाहते हैं कि वह किसी केंद्रीय गाइडलाइन के नीचे काम करने के बजाय, तमिलनाडु के युवाओं की आवाज बनकर अपनी एक अलग क्षेत्रीय पार्टी खड़ी करें. अगर ऐसा होता है, तो यह दक्षिण भारत में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश में जुटी बीजेपी के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है. द्रविड़ दलों से गठबंधन की कोशिश बनी सबसे बड़ा कांटा? अन्नामलाई के बीजेपी छोड़ने की अटकलों के पीछे जो सबसे बड़ी और ठोस वजह निकलकर सामने आ रही है, वो है राज्य के बड़े क्षेत्रीय दल एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ बीजेपी के रिश्तों का उतार-चढ़ाव. अन्नामलाई शुरू से ही इस स्टैंड पर अड़े थे कि बीजेपी को तमिलनाडु में बिना किसी बैसाखी के, अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ना चाहिए और द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में उभरना चाहिए. उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान द्रविड़ पार्टियों की नीतियों पर जमकर तीखे हमले किए थे, जिससे राज्य के युवाओं में उनका क्रेज बढ़ा था. लेकिन दिल्ली में बैठे रणनीति कारों को लगता था कि स्टालिन की मजबूत डीएमके को टक्कर देने के लिए स्थानीय स्तर पर पुराना गठबंधन ही काम आ सकता है. सूत्रों के अनुसार, इस गठबंधन की शर्तों और रणनीति को लेकर अन्नामलाई के आक्रामक रुख को आलाकमान ने थोड़ा दबाने की कोशिश की. बीजेपी नेतृत्व चाहता था कि द्रविड़ दलों के साथ रिश्ते सुधारे जाएं, जो कि अन्नामलाई की अपनी राजनीतिक लाइन के बिल्कुल खिलाफ था. यही वैचारिक मतभेद अब एक बड़ी खाई में बदल चुका है. कभी कहा था- राजनीति छोड़कर खेती करने चला जाऊंगा अन्नामलाई स्वभाव से बेहद कड़क, स्वाभिमानी और लीक से हटकर राजनीति करने वाले नेता माने जाते हैं. कुछ समय पहले जब उनके साइडलाइन होने या पार्टी लाइन से अलग चलने की खबरें उड़ी थीं, तब उन्होंने मीडिया के सामने आकर बेहद बेबाकी से अपनी बात रखी थी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि वह राजनीति में किसी पद या कुर्सी के लालच में नहीं आए हैं. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा था, “मैं जब तक अपनी मर्जी से और अपनी शर्तों पर राजनीति में रहना चाहूंगा, रहूंगा. जिस दिन मुझे लगेगा कि मैं कुछ नहीं बदल पा रहा, मैं वापस अपने गांव जाकर खेती करने लगूंगा.” उनका यह पुराना तेवर साफ दिखाता है कि वह दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाले इंसान नहीं हैं. मौजूदा समय में तमिलनाडु की सियासत में सिनेमा से राजनीति में आए जोसेफ विजय (विजय थलपति) की पार्टी टीवीके (TVK) ने भी एक मजबूत तीसरी ताकत के रूप में हलचल मचा रखी है. ऐसे में अन्नामलाई को लगता है कि सूबे के युवाओं और द्रविड़-विरोधी वोटर्स के बीच उनके लिए अपनी खुद की जमीन तैयार करने का यह बिल्कुल सही मौका है. अब देखना यह है कि दिल्ली का बुलावा उन्हें रोकता है या ‘अन्ना’ अपनी नई राह चुनते हैं. Source link

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गर्मी में बढ़ जाती है पित्ती की समस्या, जानिए खुजली और जलन...

Last Updated:June 01, 2026, 15:24 IST गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने, ज्यादा पसीना आने और तेज धूप के संपर्क में रहने से कोलीनर्जिक अर्टिकेरिया (हीट हाइव्स) या सोलर अर्टिकेरिया ट्रिगर हो जाते हैं. इस दौरान त्वचा में मौजूद मास्ट सेल्स सक्रिय होकर हिस्टामाइन नामक रसायन छोड़ते हैं, जिससे त्वचा पर लाल चकत्ते, सूजन और तेज खुजली होने लगती है.डॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार, “गर्मी में त्वचा को ठंडा और साफ रखना बेहद जरूरी है गर्मी और उमस भरे मौसम में त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं बढ़ जाती हैं, जिनमें से एक आम समस्या है. पीती (हाइव्स/अर्टिकेरिया). इस स्थिति में त्वचा पर लाल-लाल उभरे हुए चकत्ते दिखाई देते हैं, जिनमें तेज खुजली और जलन होती है. कई बार ये चकत्ते शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैल जाते हैं. व्यक्ति को काफी असहज कर देते हैं. खासतौर पर बच्चों में यह समस्या गर्मियों में ज्यादा देखने को मिलती है, जिससे उनकी नींद और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं. क्यों बढ़ती है गर्मी में पित्ती की समस्या*गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने, ज्यादा पसीना आने और तेज धूप के संपर्क में रहने से कोलीनर्जिक अर्टिकेरिया (हीट हाइव्स) या सोलर अर्टिकेरिया ट्रिगर हो जाते हैं. इस दौरान त्वचा में मौजूद मास्ट सेल्स सक्रिय होकर हिस्टामाइन नामक रसायन छोड़ते हैं, जिससे त्वचा पर लाल चकत्ते, सूजन और तेज खुजली होने लगती है.डॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार, “गर्मी में त्वचा को ठंडा और साफ रखना बेहद जरूरी है, तभी इस समस्या से राहत मिल सकती है. खुजली और जलन से राहत के 3 असरदार तरीके 1. ठंडी सिकाई और कैलामाइन लोशन का इस्तेमालखुजली और जलन से तुरंत राहत पाने के लिए प्रभावित हिस्से पर ठंडी सिकाई करना बेहद फायदेमंद होता है. बर्फ को सीधे त्वचा पर लगाने की बजाय उसे कपड़े में लपेटकर 10-15 मिनट तक सिकाई करें. इसके साथ ही कैलामाइन लोशन या मेन्थॉल युक्त कूलिंग जेल लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और खुजली कम होती है. 2. सूती कपड़े पहनें और शरीर को ठंडा रखेंपसीना पित्ती को बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण होता है. इसलिए ढीले-ढाले, हल्के और हवादार सूती कपड़े पहनना चाहिए, ताकि त्वचा पर पसीना जमा न हो. घर या कार्यस्थल को ठंडा रखें, जैसे कूलर या एसी का इस्तेमाल करें, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहे. 3. आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय अपनाएंडॉक्टर अनिल बताते हैं कि आयुर्वेद में इस समस्या का इलाज शरीर की गर्मी को संतुलित करके किया जाता है. घरेलू उपायों के रूप में गोंद कतीरा, नींबू पानी, शिकंजी, खीरा, तरबूज, खरबूजा और नारियल पानी का सेवन फायदेमंद होता है. इससे शरीर हाइड्रेटेड और ठंडा रहता है.इसके अलावा खाने में पुराने चावल का उपयोग करना, आटे में जौ मिलाना और शरीर पर चंदन का लेप लगाना भी राहत देता है। मटके का पानी और धनिए के बीजों का पानी पीने से भी शरीर की गर्मी कम होती है और पित्ती में आराम मिलता है. रखें खास ध्यानअगर पित्ती की समस्या बार-बार हो रही है या ज्यादा गंभीर हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह जरूर लें. सही समय पर उपचार और सावधानी अपनाकर इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Khandwa,Madhya Pradesh Source link

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‘ऐसे देश में रहने पर शर्म आती है…’ बीजेपी पर हमला करते-करते...

पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों को लेकर देश की सियासत गरमा गई है. इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. सिब्बल ने कहा कि उन्हें ऐसे देश में रहने पर शर्म आती है, जहां राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए हिंसा का सहारा लिया जाता है. अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले की निंदा करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो देखकर वह स्तब्ध रह गए. उनके मुताबिक यह कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हमला था. सिब्बल ने दावा किया कि अगर अभिषेक बनर्जी ने हेलमेट नहीं पहना होता तो उन्हें गंभीर या जानलेवा चोट लग सकती थी. सिब्बल ने क्या कहा? सिब्बल ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठी राजनीतिक ताकतें लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करने के लिए हर तरीका अपना रही हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव जीतने के बाद विपक्ष को हिंसा के जरिये खत्म करना लोकतंत्र का रास्ता हो सकता है? उन्होंने यह भी पूछा कि गृह मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और अन्य जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने इस घटना पर अब तक खुलकर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी. हालांकि सिब्बल के बयान का सबसे ज्यादा विवादित हिस्सा वह रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे देश में रहने पर शर्म महसूस होती है. यही बयान अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. बीजेपी ने किया पलटवार बीजेपी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि करोड़ों रुपये कमाने वाले और वर्षों तक सत्ता के केंद्र में रहने वाले नेता का पूरे देश पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है. बीजेपी का आरोप है कि कपिल सिब्बल ने पश्चिम बंगाल में 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा, भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमलों तथा पंचायत चुनावों के दौरान हुई घटनाओं पर कभी ऐसी तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी थी. बीजेपी ने यह सवाल भी उठाया कि अब जांच में यह बात सामने आ रही है कि अभिषेक बनर्जी पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार कुछ लोगों के तार टीएमसी के ही पूर्व नेताओं से जुड़े बताए जा रहे हैं. ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने आने से पहले देश और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना क्या उचित है? किसी भी राजनीतिक नेता पर हमला निंदनीय है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन क्या किसी एक घटना के आधार पर पूरे देश के लोकतंत्र और व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर देना सही है? क्या राजनीतिक हिंसा की घटनाओं की आलोचना और देश के प्रति निराशा व्यक्त करने के बीच एक स्पष्ट अंतर नहीं होना चाहिए? भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां हर दिन लाखों लोग चुनावी प्रक्रिया, न्यायपालिका, मीडिया और संवैधानिक संस्थाओं के जरिए अपनी आवाज उठाते हैं. ऐसे में आलोचकों का कहना है कि किसी घटना पर नाराजगी जताना एक बात है, लेकिन पूरे देश पर शर्मिंदगी जताने वाला बयान दूसरी बात है. अब सवाल आपके सामने है. क्या कपिल सिब्बल का बयान सिर्फ लोकतंत्र को लेकर उनकी चिंता को दर्शाता है, या फिर उन्होंने राजनीतिक विरोध में देश को भी कठघरे में खड़ा कर दिया? क्या आप उनके इस बयान से सहमत हैं? अपनी राय हमें कमेंट करके जरूर बताइए. Source link

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मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत सरकार युवाओं को बिजनेस के लिए...

Last Updated:June 01, 2026, 13:12 IST जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने लोकल 18 से बताया कि वर्तमान समय में दो योजनाओं के टारगेट विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं.  जिसमें एक मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना है. जिसके अंतर्गत युवाओं को 10 लाख रुपए तक का लोन ब्याज पर सब्सिडी के अंतर्गत उपलब्ध कराया जा रहा है. जिससे कि वह अपने बिजनेस को काफी बेहतर तरीके से आगे ले जा सके. इसमें सर्विस एवं मैन्युफैक्चरिंग दोनों स्तर पर युवाओं को बैंकों द्वारा लोन दिया जाएगा. इसमें बैंक द्वारा लगाया गया ब्याज विभाग देगा. ख़बरें फटाफट मेरठः मेरठ से संबंधित जिन युवाओं ने बिजनेस करने का सपना संजोया है. इसके लिए वह विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अध्ययन भी कर रहे हैं. ताकि बिजनेस के क्षेत्र में विशेष पहचान बना सके. लेकिन के मन में यही जिज्ञासा है कि आखिर वह अपने बिजनेस को एक बेहतर बिजनेस के रूप में डेवलप करने के लिए आर्थिक चुनौतियों को पार कैसे करें. तो ऐसे सभी युवाओं के लिए अच्छी खबर है. उनके सपने को साकार करने के लिए जिला ग्रामोद्योग विभाग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. युवाओं को मिल रहा 10 लाख लोन लोकल 18 की टीम से खास बातचीत करते हुए जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने बताया कि वर्तमान समय में दो योजनाओं के टारगेट विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं.  जिसमें एक मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना है. जिसके अंतर्गत युवाओं को 10 लाख रुपए तक का लोन ब्याज पर सब्सिडी के अंतर्गत उपलब्ध कराया जा रहा है. जिससे कि वह अपने बिजनेस को काफी बेहतर तरीके से आगे ले जा सके. इसमें सर्विस एवं मैन्युफैक्चरिंग दोनों स्तर पर युवाओं को बैंकों द्वारा लोन दिया जाएगा. इसमें बैंक द्वारा लगाया गया ब्याज विभाग देगा. इसी के साथ ही दूसरी योजना मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना है.  इसके अंतर्गत प्रजापति समाज या फिर परंपरागत रूप से जो भी लोग माटीकला से संबंधित कार्य कर रहे हैं. ऐसे सभी लोगों को 10 लाख रुपए तक का लोन बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा. इसमें 25% तक की सब्सिडी माटीकला बोर्ड द्वारा युवाओं को उपलब्ध कराई जाएगी. जिससे कि युवा अपने सपने को साकार कर सके. ये प्रमाण पत्र है जरूरी उन्होंने कहा कि जो भी युवा इस योजना के अंतर्गत आवेदन करना चाहते हैं. ऐसे सभी युवा ग्रामीण क्षेत्र से ताल्लुक रखने चाहिए. साथ ही अगर वह एससी -एसटी वर्ग से है. तो उनके पास जाति प्रमाण पत्र होना चाहिए. जिससे कि उन्हें कैटेगरी के अंतर्गत लाभ मिल सके. इसके साथ उन्होंने बताया कि लोन के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में आवेदन करते समय प्रोजेक्ट रिपोर्ट में पूरा विवरण उपलब्ध कराएं. आप लोन किस  उद्देश्य से लेना चाहते हैं. किस तरह से आप टर्म और सीसी के अंतर्गत अपने व्यापार का संचालन करेंगे. बताते चलें कि अगर सभी डॉक्यूमेंट ठीक होते हैं तो युवाओं को लोन मिलने में ज्यादा समय नहीं लगता है. उन्होंने बताया कि अधिक जानकारी के लिए युवा विभाग की वेबसाइट का विकसित कर सकते हैं. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Meerut,Uttar Pradesh Source link

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कॉकरोच आपकी क्रीम में भी मौजूद, मॉस्चराइजर से लेकर ब्यूटी प्रोडक्ट्स तक...

होमफोटोनॉलेज कॉकरोच आपकी क्रीम में भी मौजूद, मॉस्चराइजर से मेकअप तक में कैसे इस्तेमाल Last Updated:June 01, 2026, 12:20 IST दुनियाभर में तिलचट्टों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल अमेरिकन कॉकरोच का होता है. ये कॉकरोच भारत में खूब होता है, तो ये जान लें कि जो मॉस्चराइजर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स आप आराम से लगाते हैं, उसमें तिलचट्टे से निकलने वाले प्रोटीन और अन्य तत्वों का इस्तेमाल खूब होता है. तिलचट्टे से बनने वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की लिस्ट और उनमें इसका क्या काम है, ये समझना थोड़ा रोचक है. जैसे स्किनकेयर प्रोड्क्ट्स में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. तिलचट्टे के अर्क का इस्तेमाल ज्यादातर त्वचा से जुड़े प्रोडक्ट्स में किया जाता है, क्योंकि इसमें रिपेयर, हाइड्रेशन और एंटी-एजिंग के गुण होते हैं. (ai image) एक पेटेंट के अनुसार, भारत में मिलने वाला कॉकरोच, जिसे अमेरिकन कॉकरोच प्रजाति भी कहते हैं, उसका एक्सट्रैक्ट वाला फेस वॉश त्वचा को मॉइस्चराइज़ और रिपेयर करने में मदद करता है. फेशियल मास्क और टोनर भी इससे बनाए जाते हैं, जो त्वचा के रंग को निखारने, रोमछिद्रों को कम करने और त्वचा की बनावट को सुधारने का काम करता है. मॉइस्चराइज़र और हैंड क्रीम तो हम अक्सर ही लगाते हैं, ये हमारी त्वचा को गहराई से नमी (हाइड्रेशन) प्रदान करता है और फटने से बचाता है. (open ai image) तिलचट्टे में पाए जाने वाले पेप्टाइड्स और एमिनो एसिड्स कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देते हैं. इससे त्वचा को जवां रखने और झुर्रियों को कम करने में मदद मिलती है. जिससे एंटी एजिंग क्रीम और सीरम बनते हैं. कुछ रिसर्च में ये पाया गया कि इसके अर्क में सन-स्क्रीन जैसे गुण भी हो सकते हैं. कॉकरोच एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल बालों के लिए भी होता है. इसका मुख्य फोकस स्कैल्प की सेहत और बालों की ग्रोथ पर होता है. (google ai image) Add News18 as Preferred Source on Google हैरानी की बात है लेकिन तिलचट्टे से निकला एक तत्व आपके मेकअप में भी छुपा हो सकता है. कई बड़े ब्रांड्स के फाउंडेशन में इसे एक कंडीशनर और ह्यूमेक्टेंट के तौर पर मिलाया जाता है. अब हम आपको बताते हैं कि तिलचट्टे में मौजूद चिटिन और चिटोसन नाम के तत्व बहुत फायदेमंद होते हैं. ये त्वचा की मरम्मत भी करते हैं. साथ ही घाव भरने में तेजी लाता है. डैमेज्ड स्किन को रिपेयर करता है. साथ ही जब ये एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी के रूप में काम करता है तो त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाता है और सूजन को कम करता है. (ai image) कॉस्मेटिक्स में जिस तिलचट्टे का इस्तेमाल होता है, वह गंदगी वाला घरेलू तिलचट्टा नहीं होता. इसे फार्मों में बेहद साफ और नियंत्रित वातावरण में खासतौर पर पाला जाता है. इसके बाद इनसे केमिकल प्रोसेस के जरिए सिर्फ जरूरी तत्व जैसे चिटोसन निकाले जाते हैं और कई बार परीक्षणों के बाद ही प्रोडक्ट्स में मिलाया जाता है. चीन जैसे देशों में ये FDA (US) और अन्य एजेंसियों से सेफ्टी परमिशन लेकर ही बाजार में आता है. (ai image) अगर आप अपने प्रोडक्ट के इंग्रीडिएंट्स लिस्ट में Chitin (चिटिन), Chitosan (चिटोसन), या Deacetylated Chitin देखते हैं, तो हो सकता है कि यह तिलचट्टे से आया हो, हालांकि ये तत्व झींगा और केकड़े के छिलकों से भी निकाले जाते हैं. बहुत कम लोगों को यह पता है, लेकिन साइंस की दुनिया में अमेरिकन कॉकरोच वास्तव में एक “जैविक खजाना” माना जाता है, जिसका इस्तेमाल दवाइयों से लेकर हाई-एंड स्किनकेयर तक में हो रहा है. (ai image) महिलाओं के फेशियल मास्क, रिपेयरिंग सीरम, एंटी-एजिंग क्रीम, हैंड क्रीम, लिप बाम में इससे निकलने वाले तत्वों का इस्तेमाल होता है. हेयर केयर में भी शैम्पू, हेयर टॉनिक, कंडीशनर में इसका इस्तेमाल बालों की सेहत और ग्रोथ को बेहतर करने में होता है. मेकअप में लिक्विड फाउंडेशन, लिपस्टिक जैसी प्रोड्क्ट्स में कॉक्रोच से निकलने वाले तत्व यूज किए जाते हैं. (ai image) प्रोडक्ट्स के लिए जिन तिलचट्टों को पाला जाता है, उन्हें बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया, कीटनाशकों और गंदगी से दूर, पूरी तरह से नियंत्रित और स्टेराइल वातावरण में रखा जाता है. इन्हें सीधे पीसकर प्रोडक्ट में नहीं मिलाया जाता. वैज्ञानिक प्रक्रियाओं द्वारा इनसे केवल जरूरी केमिकल को निकाला जाता है, जिसे बाद में कई बार शुद्ध किया जाता है. (ai image) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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delhi fire| दिल्ली में आईटीओ के पास मि‍न‍िस्‍ट्री की बिल्डिंग में आग,...

होमताजा खबरDelhi दिल्ली में आईटीओ के पास बिल्डिंग में आग, दमकल की 8 गाड़ियों ने पाया काबू Last Updated:June 01, 2026, 11:21 IST द‍िल्‍ली के आईटीओ स्‍थ‍ित‍ एक सरकारी ब‍िल्‍ड‍िंग में आग लगने से सुबह-सुबह हड़कंप मच गया. दरअसल आग म‍िन‍िस्‍ट्री ऑफ एजुकेशन के स्‍कूल ऑफ प्‍लानिंग एंड आर्किटेक्‍ट के ऑफ‍िस में लगी थी. यह एडम‍िन का ऑफ‍िस है. फि‍लहाल मौके पर पहुंची दमकल की गाड़‍ियों ने आग पर काबू पा ल‍िया है. द‍िल्‍ली के आईटीओ पर म‍िन‍िस्‍ट्री ऑफ एजुकेशन ब‍िल्‍ड‍िंग में लगी आग Delhi Fire: दिल्ली में आईटीओ के पास आग की भयावट घटना सामने आई है. यह आग मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन की बिल्डिंग में लगी है. यहां दूसरे फ्लोर पर स्‍कूल ऑफ प्‍लान‍िंंग एंड आर्किटेक्‍ट का ऑफ‍िस है. जहां सुबह 9 बजकर 37 मिनट पर आग पकड़ने की खबर सामने आई. फायर व‍िभाग को सुबह जानकारी मिली कि पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट की इमारत के नजदीक बिल्डिंग में आग लगी है. इस ब‍िल्‍ड‍िंंग से अचानक आग की लपटें उठते देख आसपास हड़कंप मच गया. जिसके बाद तुरंत फायर विभाग को कॉल किया गया. द‍िल्‍ली फायर व‍िभाग की ओर से तुरंत आग पर काबू पाने के ल‍िए दमकल की 8 गाड़‍ियां भेजी गईं. चश्‍मदीदों ने बताया क‍ि आग ब‍िल्‍ड‍िंंग की दूसरी मंज‍िल पर लगी थी जैसे ही ब‍िल्‍ड‍िंंग से लपटें उठने लगीं, अचानक पूरे इलाके में हंगामा मच गया. इस आग से क‍ितना नुकसान हुआ है, इस‍की जानकारी अभी सामने नहीं आई है. हालांक‍ि अभी तक क‍िसी के हताहत होने या घायल होने की खबर सामने नहीं आई है. आज सोमवार होने के कारण ब‍िल्‍ड‍िंंग की बाकी मंज‍िलों में सुबह से ही तमाम सरकारी कर्मचारी भी मौजूद थे और कामकाज भी चल रहा था, ऐसे में यह हादसा कैसे हुआ इसकी जानकारी भी आनी है.  फि‍लहाल आग पर काबू पा ल‍िया गया है. फायर डि‍पार्टमेंट आग के कारणों का पता लगा रहा है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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