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Sushant Sinha | Desh ki Paathshala | कॉकरोच पार्टी का घिनौना सच...


कॉकरोच पार्टी के आंदोलन में हुई भारी हिंसा की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. इस आंदोलन में जिस तरह की अभद्रता हुई उसका पूरा हिसाब होना बाकी है. कल से सोशल मीडिया पर लगातार एक फर्जी माहौल बनाया जा रहा था. यह कहा जा रहा था कि छात्र आंदोलन के नाम पर दंगा करने वालों पर कोई एक्शन नहीं होगा. जिन लोगों ने जगह जगह पर बवाल किया वे बच जाएंगे. यह माहौल बनाया गया कि सरकार उपद्रवियों के सामने झुक गई है. बिहार, असम, बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का उदाहरण दिया गया.

कहा गया कि इन राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर से केस वापस ले लिए गए हैं. इंडी गठबंधन और कॉकरोच वाले इसे अपनी बहुत बड़ी जीत बताने में लगे हुए थे. लेकिन आज इन सभी लोगों को बहुत तेज आग लग गई है. ये लोग जो भी झूठा माहौल बना रहे थे उसकी पूरी तरह हवा निकल गई है. यह अब एकदम क्लियर हो गया है कि गुंडई करने वालों पर एक्शन बिल्कुल नहीं रुकेगा. छात्र आंदोलन की आड़ में दंगा करने वाले एक एक इंसान का पक्का इलाज होगा.

जिन लोगों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसवालों के सिर फोड़े थे वे जेल जाएंगे. जिन उपद्रवियों ने सरकारी और पुलिस की गाड़ियां तोड़ी थीं उनसे वसूली होगी. जिन लोगों ने देश के पीएम को भद्दी गालियां दी थीं उन सबका हिसाब होगा. यह बात आज देश की सबसे बड़ी अदालत से भी पूरी तरह क्लियर हो गई है. सुप्रीम कोर्ट में आज प्रोटेस्ट में हिंसा करने वालों पर एक्शन को लेकर बड़ी बात कही गई है. कॉकरोच पार्टी वाले इस बात से कैसे तिलमिला गए हैं यह देखना बहुत दिलचस्प है. ये लोग अब नई नई धमकी दे रहे हैं जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा करने वाले उपद्रवियों के लिए क्या सख्त आदेश दिया है?

पिछले 24 घंटे में इन दंगाइयों को लग रहा था कि ये जो चाहे वो आसानी से करवा लेंगे. बिहार, असम और महाराष्ट्र में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस वापस हुए तो इनका घमंड बढ़ गया. तो ये लोग तुरंत माहौल बनाने लगे कि सरकार इनका अब कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी. लेकिन आज इन लोगों के सीने में आग लगी हुई है. इसका कारण यह है कि आज सुप्रीम कोर्ट का एक बहुत बड़ा फैसला आ गया है. आज सुप्रीम कोर्ट में हिंसा के तमाम मामलों को लेकर एक अहम सुनवाई हुई.

इस महत्वपूर्ण सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा वह उपद्रवियों के लिए बड़ा झटका है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि 18 साल से कम उम्र के प्रदर्शनकारियों को छोड़ दिया जाए. लेकिन इसमें भी एक बहुत बड़ी और अहम शर्त जोड़ी गई है. अदालत ने कहा है कि फौरन रिहा सिर्फ उनको किया जाए जिनका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है. जिन लोगों पर पहले से कोई भी क्रिमिनल केस दर्ज नहीं है उन पर राहत मिलेगी. उन पर फिलहाल पुलिस की तरफ से कोई बहुत सख्त एक्शन नहीं लिया जाएगा.

लेकिन अदालत ने सबूतों को लेकर बहुत ही कड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं. इसके साथ ही ड्रोन फुटेज और सारे डिजिटल सबूत भी सुरक्षित रखने को कहा गया है. पुलिस एक्शन की भी एक पूरी तरह निष्पक्ष जांच की जाएगी. अगर किसी ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है तो उसकी जवाबदेही तय की जाएगी. अदालत ने बहुत साफ शब्दों में कहा है कि जिसने भी ज्यादती की है उस पर एक्शन होगा. जिसने भी कानून अपने हाथ में लिया है उनके खिलाफ सख्त एक्शन होना ही चाहिए. अगर किसी भी प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है तो कानून को अपना काम जरूर करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट का तगड़ा हंटर, छात्र आंदोलन में पुलिस पीटने वालों का अब पक्का इलाज होगा. (File Photo : PTI)

कॉकरोच पार्टी वालों ने कैसे जेन जी युवाओं को फंसाकर बहुत बड़ा धोखा दिया?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब बहुत सीधा और साफ है. सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ और सिर्फ नाबालिगों को फौरन छोड़ने को कहा है. साथ ही यह भी कहा है कि फिलहाल कोई बहुत सख्त कार्रवाई नहीं होगी. इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में आगे कार्रवाई जरूर हो सकती है. लेकिन कॉकरोच पार्टी वाले तो अब देश के सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं मान रहे हैं. कॉकरोच पार्टी लगातार कह रही है कि जिन उपद्रवियों पर एफआईआर है उनको भी तुरंत छोड़ा जाए.

सौरभ दास ने एफआईआर पर यही बात कही है जो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना जैसी है. सोचिए ये लोग अब सुप्रीम कोर्ट की बात भी मानने को तैयार नहीं हैं. कॉकरोच वाले सरेआम कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश इन्हें बिल्कुल मंजूर नहीं है. कॉकरोच वाले आज पूरे दिन बोल रहे हैं कि जिन पर एफआईआर है उनको भी छोड़ा जाए. जबकि कल तक यही लोग एक अलग ही सुर में बोल रहे थे. कल तक ये बोल रहे थे कि जिन्होंने हुड़दंग और गुंडई की है उन पर कड़ा एक्शन होना चाहिए.

अब ये लोग रातों रात दूसरी बात करने लगे हैं और अपने बयान से पलट गए हैं. ये लोग ना सुप्रीम कोर्ट को मान रहे हैं और ना ही सरकार को मान रहे हैं. जिन उपद्रवियों को बचाने के लिए कॉकरोच वाले ये सब ड्रामा कर रहे हैं उनकी असलियत जान लीजिए. उन लोगों को पहले तो कॉकरोच वाले कहते थे कि ये बीजेपी और संघ के लोग हैं. कॉकरोच पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके भी हिंसा पर यही बात कह रहे थे. आप खुद देखिए कि कॉकरोच पार्टी कभी कहती है कि गुंडई करने वाले बीजेपी के लोग थे. और कभी यही पार्टी कहती है कि जिन पर पहले से केस दर्ज हैं उनको भी छोड़ दिया जाए.

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर हिंसा के खूंखार आरोपियों पर क्या खुलासा किया है?

कॉकरोच पार्टी की इस दोहरी राजनीति के बीच दिल्ली पुलिस पहले ही एक बड़ा खुलासा कर चुकी है. पुलिस ने बताया है कि इस तथाकथित छात्र प्रोटेस्ट में सैकड़ों अपराधी घुसे हुए थे. ये अपराधी कोई आम छात्र नहीं थे बल्कि पेशेवर क्रिमिनल थे. इन लोगों पर पहले से ही हत्या के संगीन केस चल रहे हैं. इनमें से कई पर रेप और डकैती जैसे खौफनाक मामले दर्ज हैं. कुछ प्रदर्शनकारियों पर पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामले भी पहले से दर्ज हैं.

इस प्रोटेस्ट की भीड़ में महिलाओं से छेड़छाड़ के पुराने आरोपी भी शामिल थे. अब आप ही तय कीजिए कि क्या ऐसे खतरनाक लोगों के खिलाफ एक्शन नहीं होना चाहिए. क्या कॉकरोच पार्टी के कहने पर इन सभी खूंखार अपराधियों को खुला छोड़ देना चाहिए. कॉकरोच पार्टी ऐसा नहीं करने पर फिर से देश में धरना प्रदर्शन की धमकी दे रही है. सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश को भी कॉकरोच पार्टी वाले मानने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं. इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रोटेस्ट से जुड़े कई मामलों पर सुनवाई हुई है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस की अहम जिम्मेदारियों को लेकर बिल्कुल साफ और कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट में जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस द्वारा एक महिला को थप्पड़ मारने के केस में सुनवाई हुई. इस गंभीर मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार भी लगाई. कोर्ट ने कहा कि आपको हर हाल में पूरी तरह निष्पक्ष रहना होगा. संस्थानों की साख को इस तरह से कमजोर करना तुरंत बंद कीजिए. अगर उस अधिकारी ने कुछ भी गलत किया है तो उसे उसके परिणाम जरूर भुगतने होंगे.

दर्ज एफआईआर वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया में क्या बड़ा पेंच फंसा है?

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारी की गलती का मतलब यह नहीं कि पूरा काम वापस ले लिया जाए. क्या आज एक घटना की वजह से पूरी दिल्ली पुलिस कटघरे में खड़ी है. फिर क्या दिल्ली पुलिस अपना काम करना और एफआईआर दर्ज करना भी पूरी तरह बंद कर दे. जंतर मंतर पर हुई भयंकर हिंसा के बाद पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज की थीं. इन सारी दर्ज एफआईआर को वापस लेने की एक बहुत लंबी कानूनी प्रक्रिया होती है. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि किसी ने मुंह से बोल दिया और एफआईआर रातों रात वापस हो गई या रद्द हो गई.

जंतर मंतर हिंसा और उससे जुड़े अन्य मामलों में करीब बीस केस दर्ज हुए हैं. इनमें से चौदह केस सीधे तौर पर प्रोटेस्ट और उस दौरान हुई हिंसा से जुड़े हुए हैं. एक केस बिना अनुमति के नियम तोड़कर ड्रोन उड़ाने का दर्ज किया गया है. बाकी के सभी केस पत्रकारों ने खुद के साथ हुई मारपीट पर दर्ज कराए हैं. पहले सरकार की तरफ से केस वापस लेने का एक औपचारिक आदेश आएगा. फिर स्टेट यानी अभियोजन की तरफ से दिल्ली पुलिस एलजी को एक पत्र लिखेगी.

इस पत्र में दिल्ली पुलिस आगे कोई कार्रवाई नहीं करने की अपनी बात बताएगी. दिल्ली पुलिस के इस महत्वपूर्ण पत्र पर एलजी का अप्रूवल आएगा. एलजी का अप्रूवल आने के बाद पुलिस संबंधित कोर्ट को इसकी पूरी जानकारी देगी. पुलिस कोर्ट को बताएगी कि हमें इन मामलों में आगे प्रॉसिक्यूट बिल्कुल नहीं करना है. इसके बाद यह पूरी तरह से कोर्ट पर निर्भर करता है कि वो इस पर क्या आदेश दे. दिल्ली पुलिस के दर्ज किए हुए केस वापस हो सकते हैं लेकिन पत्रकारों वाले केस वापस नहीं होंगे.

हवा में नहीं हटेंगी गुंडों पर दर्ज एफआईआर, दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड जवान भी उतरे सड़क पर. (File Photo : PTI)

रिटायर्ड पुलिसकर्मी और जेन जी के परिवार वाले अब क्यों गुस्से में हैं?

पत्रकारों ने खुद पर हुए हमलों के जो केस दर्ज कराए हैं वो केस किसी हाल में वापस नहीं होंगे. जैसे ही कोर्ट का आदेश आएगा उसके बाद कानूनी तरीके से इस पर आगे की कार्रवाई होगी. यानी ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सिर्फ बोल देने भर से कोई भी क्रिमिनल केस वापस हो जाएगा. उसकी एक बहुत लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया होती है जिसका पालन करना होता है. और केस वापस लेने की बात से अब देश के कई लोग कह रहे हैं कि वो खुद केस करेंगे.

ये लोग पुलिस पर जानलेवा हमला करने वालों के खिलाफ केस वापस लेने का कड़ा विरोध कर रहे हैं. खुद दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड कर्मचारी अब इसके खिलाफ सड़क पर प्रोटेस्ट करने जा रहे हैं. इन रिटायर्ड कर्मचारियों में गजटेड और नॉन गजटेड दोनों रैंक के अधिकारी शामिल हैं. इन सभी ने दिल्ली पुलिस से जंतर मंतर पर एक बड़े प्रोटेस्ट के लिए इजाजत मांगी है. दिल्ली पुलिस के इन रिटायर्ड कर्मचारियों का यह विरोध प्रदर्शन 31 जुलाई को हो सकता है.

इधर पुलिस वालों में उपद्रवियों को लेकर बहुत भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है. उधर जेन जी युवाओं के परिवारों में भी अब खौफ और बहुत ज्यादा गुस्सा है. क्योंकि उन्हें अब साफ लग रहा है कि कॉकरोच वालों ने तो उनके बच्चों का सिर्फ इस्तेमाल किया. इस्तेमाल करने के बाद कॉकरोच वालों ने उनके बच्चों को पुलिस के डंडे खाने के लिए छोड़ दिया. आज वही जेन जी युवा कैमरे के सामने रो रोकर माफी मांग रहा है. प्रदर्शन में गंदी गाली गलौज करने वाले लोगों को भी अब समझ आ रहा है कि वो क्या गलती कर बैठे हैं.

पुलिस और आर्मी को गाली देने वाले जेन जी युवा कैसे मांग रहे हैं माफी?

जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान सोशल मीडिया पर सैकड़ों वीडियो वायरल हुए थे. इन वीडियो में खुद को जेन जी बताने वाले छोटे छोटे लड़के लड़कियां खुल कर गंदी गालियां दे रहे थे. ये लोग जोश में आकर सरकार से लेकर सेना तक सबको भद्दे अपशब्द कह रहे थे. अब इन सभी लोगों के गालियों वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. घर परिवार वालों तक जब यह बात पहुंच रही है तो ये लोग हाथ जोड़कर माफी मांग रहे हैं.

डिंपल चौधरी जैसी कई लड़कियों के वीडियो सामने आए हैं जिनमें वे अपने किए पर शर्मिंदा हैं. इसी तरह से महाराष्ट्र में प्रोटेस्ट के दौरान पीएम मोदी पर बहुत अभद्र टिप्पणी की गई थी. जिन लोगों ने यह सब गंदा काम किया था अब वो पुलिस के डर से माफी मांग रहे हैं. आप यह भी देखिए कि जेन जी के नाम पर इस प्रोटेस्ट में देश की सेना को भी नहीं छोड़ा गया. कुछ उपद्रवियों ने देश की रक्षा करने वाली इंडियन आर्मी को भी भद्दी गाली दी.

दिल्ली पुलिस से लेकर इंडियन आर्मी तक को इन लोगों ने कैमरे पर जमकर गालियां दीं. जबकि भारतीय सेना का नीट प्रोटेस्ट से दूर दूर तक कोई भी लेना देना ही नहीं है. दिल्ली पुलिस वहां मौजूद रहकर सिर्फ अपना फर्ज और काम कर रही थी. इन सभी जेन जी युवाओं को लग रहा था कि सेना को गाली देकर और पुलिस को गाली देकर कुछ नहीं होगा. लेकिन अब मामला गंभीर हो गया है और बात इनके घरों तक पहुंच रही है. गाली गलौज करने वाले लोगों के परिवार वालों को पूरे समाज के सामने शर्मिंदा होना पड़ रहा है.

फेक न्यूज फैलाने वालों और कॉकरोच पार्टी का कैसे हुआ पूरा पर्दाफाश?

सोचिए इन गालियां देने वाले बच्चों के परिवार वालों पर इस वक्त क्या गुजर रही होगी. जो माता पिता अपने गाली देने वाले बच्चों की तरफ से लोगों से माफी मांग रहे हैं. जेन जी होने का मतलब यह तो बिल्कुल नहीं है कि जो मन में आए वो बकवास बोल दो. किसी को भी रास्ते चलते गाली दे दो और किसी के बारे में भी उल्टा सीधा बोल दो. ऐसे भटके हुए युवाओं की इस तरह की हरकत से सेना के रिटायर्ड अधिकारी भी बहुत हैरान हैं.

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट वामशी ने गालियों वाले इस मामले पर बहुत कड़ा एतराज जताया है. जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान सिर्फ गाली गलौज का खेल नहीं हुआ था. बल्कि इस दौरान इंटरनेट पर जमकर फेक न्यूज भी फैलाई गई है. सोशल मीडिया पर वड़ा पाव गर्ल के नाम से मशहूर एक लड़की ने भी इसमें हिस्सा लिया. उसने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का एक बहुत ही भ्रामक वीडियो शेयर किया. यह वीडियो पूरी तरह से फेक था और इसे एआई की मदद से बनाया गया था.

जब वह एआई वीडियो वायरल हुआ तो अब वड़ा पाव गर्ल भी डर के मारे सॉरी बोल रही है. इसी तरह के कई वीडियो हैं जिनमें गाली गलौज करने वाले अब रोते हुए माफी मांग रहे हैं. कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट को लेकर अब जेन जी युवा पूरी तरह से खुल कर बात कर रहा है. युवा कह रहे हैं कि कॉकरोच पार्टी वहां लोकतंत्र के लिए बिल्कुल आंदोलन नहीं कर रही थी. आप यह भी देखिए कि जंतर मंतर प्रोटेस्ट में कई लोगों के महंगे फोन भी चोरी हुए थे.

फोन चोरी का ड्रामा और निजता के नाम पर कैसे हो रही है राजनीति?

जो लोग कैमरे पर दिल्ली पुलिस को गंदी गालियां दे रहे थे. फोन चोरी होने के बाद वे लोग उसी दिल्ली पुलिस के पास रोते हुए गए. उन्होंने पुलिस से कहा कि हमारा चोरी हुआ फोन किसी तरह वापस करा दो. लेकिन प्रदर्शन के उस भारी हंगामे में पुलिस हिंसक भीड़ को संभालती या उनका फोन खोजती. जेन जी युवाओं का तो राजनीतिक तौर पर पूरी तरह इस्तेमाल हो गया. और इधर कॉकरोच वाले पब में बैठकर आराम से पार्टी कर रहे हैं और इधर उधर घूम रहे हैं.

जिस मीडिया को ये लोग कल तक गाली देते थे आज उसी मीडिया पर बैठकर इंटरव्यू दे रहे हैं. ये लोग मीडिया चैनलों पर जाकर अपना लाइव दे रहे हैं. कॉकरोच वाले अपने दोगलेपन से खुद को ही एक्सपोज कर रहे हैं. लोग अब इनसे पूछ रहे हैं कि आप तो सुसाइड करने वाले छात्रों के परिजनों लिए एक करोड़ का मुआवजा मांग रहे थे. लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की बात पर आप लोग अचानक जश्न मनाने लगे. जश्न मनाने के चक्कर में ये लोग सुसाइड करने वाले छात्रों को पूरी तरह भूल गए.

जब इस बारे में रत्ना सिंह से सवाल पूछा गया तो उनसे कोई सीधा जवाब देते नहीं बना. कॉकरोच पार्टी वाले तो पूरे देश के सामने एक्सपोज हो ही रहे हैं. जिन्होंने इनका इस गंदे खेल में साथ दिया वो भी अब एक्सपोज हो रहे हैं. सीपीएम के एक सांसद इस मामले को लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं. क्योंकि जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के लिए फेस रिकगनिशन टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की थी. जिस टेक्नोलॉजी से अपराधियों की सटीक पहचान हुई उससे इन्हें बहुत दिक्कत है.

फजीहत के बाद कॉकरोच पार्टी मना रही है जश्न, फेसबुक का पीएम मोदी वाला वीडियो हुआ वायरल. (File Photo : PTI)

इसे अब इन नेताओं द्वारा निजता का हनन बताया जा रहा है. इसी तकनीक को लेकर सीपीएम सांसद एए रहीम ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि ये प्रदर्शनकारियों की निजता और उनके मौलिक अधिकारों का हनन है. याचिका में इस सिस्टम को पूरी तरह असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है. साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन में इसके इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. यह सच में गजब है कि पीएम को गाली देते समय इन्हें अपनी निजता की टेंशन नहीं थी. यह टेंशन नहीं थी कि गाली देते हुए उनका वीडियो वायरल हो जाएगा. अब जब पुलिस का शिकंजा कस रहा है तो इनको अपनी निजता की याद आ रही है.



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