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झारखंड

झुमरी तिलैया में फला दुनिया का सबसे महंगा मियाजाकी आम, 3 लाख...

Last Updated:June 26, 2026, 22:02 IST Jhumri Tilaiya Miyazaki Mango: झारखंड के कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया शहर के अड्डी बांग्ला रोड स्थित एक घर इन दिनों खास वजह से चर्चा में है. यहां लगा मियाजाकी आम का पेड़ अब फल देने लगा है. मियाजाकी आम को दुनिया की सबसे महंगी और प्रीमियम आम की किस्मों में गिना जाता है. जापान में इसे ‘सन ऑफ एग’ यानी ‘सूर्य का अंडा’ के नाम से भी जाना जाता है. अड्डी बांग्ला रोड निवासी मनोज कुमार ने बताया कि करीब छह वर्ष पहले उनके पिता हारो यादव रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे. तब उन्होंने लगभग 700 रुपये में मियाजाकी आम का पौधा खरीदकर घर के आंगन में लगाए. उस समय उन्होंने परिवार के लोगों से कहा था कि यह आम की एक बेहद खास और कीमती किस्म है, जिसका स्वाद सामान्य आमों से बिल्कुल अलग होता है. परिवार के सदस्यों ने इस पौधे की नियमित रूप से देखभाल की. वर्ष 2024 में हारो यादव का निधन हो गया, लेकिन उनके द्वारा लगाया गया यह पौधा अब फल देने लगा है. इससे परिवार को उनकी यादें भी ताजा हो रही हैं. पेड़ पर लगे आकर्षक लाल रंग के आमों को देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंच रहे हैं और इसके बारे में जानकारी ले रहे हैं. मनोज कुमार ने बताया कि मियाजाकी आम मूल रूप से जापान के मियाजाकी प्रांत में उगाया जाता है. पकने के बाद इसका रंग गहरे लाल या रूबी जैसा हो जाता है, जो इसे अन्य आमों से अलग पहचान देता है. इसका गूदा बेहद मखमली, रसीला और सुगंधित होता है. साथ ही इसमें प्राकृतिक मिठास भी काफी अधिक होती है. फिलहाल उनके पेड़ पर करीब 200 आम लगे हुए हैं. Add News18 as Preferred Source on Google जानकारों के अनुसार, मियाजाकी आम में एंटीऑक्सीडेंट्स, बीटा-कैरोटीन, विटामिन-सी और फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यही कारण है कि इसे स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है. इसके स्वाद, गुणवत्ता और पोषण मूल्य के कारण दुनिया भर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. सीमित उत्पादन और अधिक मांग के कारण मियाजाकी आम दुनिया के सबसे महंगे फलों में गिना जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमत करीब 2.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है. वहीं भारत में स्थानीय स्तर पर उगाए गए मियाजाकी आम की कीमत आमतौर पर 3,000 से 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहती है. झुमरी तिलैया में इस दुर्लभ और प्रीमियम आम के फल आने से न केवल परिवार में खुशी का माहौल है, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच भी इसे लेकर खास उत्सुकता देखने को मिल रही है. Source link

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बैरियादामर में मो. बाबर अली बने स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष

भास्कर न्यूज | डंडई डंडई प्रखंड क्षेत्र के डंडई सदर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय बैरियादामर में विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) का पुनर्गठन बुधवार को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक माहौल में संपन्न हुआ। पुनर्गठन प्रक्रिया की अध्यक्षता मोहम्मद फखरुद्दीन अंसारी ने की। बैठक में उपस्थित सदस्यों एवं अभिभावकों ने सर्वसम्मति से मो.बाबर अली को विद्यालय प्रबंधन समिति का अध्यक्ष, सीमा देवी को उपाध्यक्ष तथा सकीना बीवी को संयोजिका चुना। चुनाव प्रक्रिया के दौरान विभाग की ओर से पर्यवेक्षक के रूप में दिलीप कुमार यादव, संजय कुमार पाठक एवं अमरजीत राम मौजूद रहे। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अंबिका मांझी के सहयोग से पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराई गई। बैठक में मौजूद लोगों ने बताया कि समिति के 12 सदस्यों में से 11 सदस्यों ने अध्यक्ष पद के लिए मोहम्मद बाबर अली के पक्ष में समर्थन दिया। एक सदस्य द्वारा प्रारंभिक असहमति जताई गई थी, लेकिन बाद में सभी सदस्यों ने एकजुट होकर समर्थन प्रदान किया, जिसके बाद निर्विरोध रूप से समिति का गठन पूरा हुआ। अध्यक्ष चुने जाने के बाद मो.बाबर अली ने कहा कि सरकार की मंशा एवं शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुरूप विद्यालय के सर्वांगीण विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार तथा विद्यालय की सभी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पुनर्गठन के बाद उपस्थित अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने नव निर्वाचित अध्यक्ष को फूल-माला पहनाकर बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर कमरुद्दीन अंसारी, नूरे आलम, वकील अंसारी, जावेद अंसारी, जाऊल अंसारी, तौफीक अंसारी, शफीक अंसारी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक एवं ग्रामीण उपस्थित थे। Source link

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आपातकाल लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय : बाबूलाल मरांडी

सिटी रिपोर्टर | बोकारो भाजपा बोकारो की ओर से चास स्थित दीपांजलि पैलेस में गुरुवार को संविधान हत्या दिवस विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाया गया आपातकाल लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और नागरिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता बचाने के लिए विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों को जेलों में बंद किया गया तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया। उन्होंने आपातकाल के दौरान चलाए गए नसबंदी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासनिक दबाव के जरिए बड़ी संख्या में लोगों की नसबंदी कराई गई, जिससे नागरिक अधिकारों और मानवीय गरिमा का उल्लंघन हुआ। युवा पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास और उसके प्रभावों की जानकारी होना जरूरी है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति जागरुकता बनी रहे। वर्ष 1977 में जनता ने मतदान के माध्यम से लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। कहा कि संविधान की बात करने वाली कांग्रेस ने न तो संविधान का सम्मान किया और न ही डॉ. भीमराव आंबेडकर का उचित सम्मान किया। केंद्र सरकार ने डॉ. आंबेडकर को सम्मान देते हुए उनसे जुड़े पांच प्रमुख स्थलों को तीर्थस्थल का दर्जा दिया है। वहीं पूर्व विधायक बिरंची नारायण ने कहा कि आपातकाल भारतीय संविधान पर लगा एक ऐसा कलंक था, जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई। भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक परंपराओं और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। इससे पूर्व आपातकाल से संबंधित प्रदर्शनी का उद्घाटन बाबूलाल मरांडी, जिलाध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र राज, पूर्व विधायक बिरंची नारायण, पूर्व सांसद रवीन्द्र कुमार पांडेय, पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बाटुल, पूर्व जिलाध्यक्ष जयदेव राय, रोहित लाल सिंह, अंबिका खवास प जगरनाथ राम ने संयुक्त रूप से किया। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र राज ने व संचालन जिला महामंत्री संजय सिन्हा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन चास नगर दक्षिणी अध्यक्ष जयप्रकाश तापड़िया ने किया। मौके पर आरती राणा, मुकेश राय, एंजेला सिंह, अर्जुन सिंह, रामलाल सोरेन, अमित सिंह, विवेक सिंह, राकेश मधु, अरविंद राय, विक्रम आदि थे। Source link

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भारत में कुछ रेलवे स्टेशन दो राज्यों में आते हैं… ऐसा क्यों?...

होमताजा खबरदेश भारत में कुछ रेलवे स्टेशन दो राज्यों में आते हैं… ऐसा क्यों? पता है आपको! Last Updated:June 26, 2026, 21:38 IST देशभर में 7000 से अधिक रेलवे स्‍टेशन हैं. तमाम स्‍टेशन कोई न कोई खासियत समेटे हुए हैं. इन्‍हीं में से नवापुर और भवानी मंडी स्टेशन हैं, जो दो राज्यों की सीमा पर हैं. इनका आधा हिस्सा एक राज्य में है और आधा दूसरे में है. यानी यात्री कुछ कदम चलने पर दूसरे राज्‍य पर पहुंच जाते हैं. यह स्थिति राज्यों के पुनर्गठन और नई सीमाओं की वजह से बनी है. रेलवे स्‍टेशन पहले से बने थे और राज्‍यों के पुनर्गठन दो राज्‍यों की सीमाओं पर बंट गए. नई दिल्‍ली. भारतीय रेलवे के देशभर में 7000 से अधिक रेलवे स्‍टेशन हैं. तमाम स्‍टेशन ऐसे हैं, जो कोई न कोई खासियत समेटे हुए हैं. इसी तरह कुछ स्‍टेशन ऐसे हैं, जो दो राज्‍यों की सीमा में पड़ते हैं. इन स्टेशनों की सबसे खास बात यह है कि प्लेटफॉर्म पर कुछ कदम चलते ही यात्री एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंच जाते हैं. इस तरह के स्‍टेशन राज्‍यों के पुनर्गठन के बाद बने बॉर्डर की वजह से बने हैं. ऐसे स्टेशनों में सबसे चर्चित नाम नवापुर रेलवे स्टेशन का है, जो महाराष्ट्र और गुजरात की बॉर्डर पर स्थित है. इसका एक हिस्सा महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में आता है और दूसरा हिस्सा गुजरात के तापी जिले में पड़ता है. इसी वजह से यह स्टेशन लंबे समय से अपनी अनोखी पहचान बनाए हुए है. यहां कई वर्षों तक एक ऐसी बेंच भी रही, जिसका आधा हिस्सा महाराष्ट्र और आधा गुजरात में था. यह बेंच यात्रियों के लिए खास बनी रहती थी.इसी तरह भवानी मंडी रेलवे स्टेशन भी दो राज्यों में है. यह स्टेशन राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है. स्टेशन का नाम राजस्थान के भवानी मंडी शहर के नाम पर रखा गया, लेकिन इसका कुछ हिस्सा मध्य प्रदेश की सीमा में आता है. इस वजह से यह स्टेशन भी दोनों राज्यों की पहचान लिए हुए है. क्‍या है इसकी वजह इन स्टेशनों के दो राज्यों में आने के पीछे राज्‍यों का पुनर्गठन है. जब इन स्‍टेशनों का निर्माण हुआ, उस समय वर्तमान राज्यों के बॉर्डर नहीं थीं. बाद में राज्यों के पुनर्गठन और नई प्रशासनिक सीमाएं तय की गयीं. कई स्थानों पर सीमाएं पहले से बनी रेलवे लाइन या स्टेशन के बीच से गुजरने लगीं. इससे कुछ स्टेशन दो राज्यों की सीमा में आ गए. क्‍यों हटाया नहीं गया ऐसी स्थिति बनने के बाद रेलवे के सामने स्टेशन को दूसरी जगह ट्रांसफर करने का विकल्प था, लेकिन यह काम बेहद महंगा माना गया. रेलवे स्टेशन, ट्रैक और उससे जुड़े ढांचे को हटाकर नई जगह बनाना आसान नहीं था. इसलिए इन स्टेशनों को उसी स्थान पर रहने दिया गया. कोई बदलाव नहीं किया गया. मिसाल बने हैं ये स्‍टेशन आज नवापुर और भवानी मंडी जैसे स्टेशन केवल रेल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के इतिहास और प्रशासनिक बदलावों की अनोखी मिसाल भी माने जाते हैं. ये स्टेशन बताते हैं कि समय के साथ राज्य बदल सकते हैं, लेकिन पहले से तैयार बुनियादी ढांचे को हर बार बदलना संभव नहीं होता. यही वजह है कि आज भी भारत में कुछ रेलवे स्टेशन दो राज्यों की सीमा पर हैं. About the Author Sharad Pandeyविशेष संवाददाता करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi Source link

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जीरो से खड़ा किया करोड़ों का क्लॉथिंग ब्रांड ‘लूम डेट्स’! अब अमेजन-फ्लिपकार्ट...

होमवीडियोbusiness नौकरी छोड़ रांची लौटीं मनीषा! खड़ा किया करोड़ों का क्लॉथिंग ब्रांड लूम डेट्स X नौकरी छोड़ रांची लौटीं मनीषा! खड़ा किया करोड़ों का क्लॉथिंग ब्रांड लूम डेट्स   Ranchi Loom Dates Clothing Brand Story: बेंगलुरु की आरामदायक कॉर्पोरेट नौकरी के दौरान मनीषा के मन में कुछ अलग करने का विचार आया, जो आज झारखंड का एक सफल बिजनेस मॉडल बन चुका है. मनीषा ने रांची के रिंग रोड में अपनी फैक्ट्री डालकर ‘लूम डेट्स’ (Loom Dates) नाम से कपड़ों का पहला लोकल स्टार्टअप शुरू किया. आज यह रांची का पहला ऐसा क्लॉथिंग ब्रांड बन गया है. जिसके उत्पाद अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं. इसका टर्नओवर करोड़ों में पहुंच चुका है. इस ब्रांड की सबसे बड़ी यूएसपी इसका वर्सेटाइल यूनिफॉर्म सेगमेंट है. ‘लूम डेट्स’ आम कैजुअल और कॉर्पोरेट कपड़ों के अलावा स्कूल, कॉलेज, अस्पतालों के डॉक्टर-नर्स और यहां तक कि फायर ब्रिगेड के लिए भी डिजाइनर यूनिफॉर्म तैयार करता है. प्रोडक्ट मैनेजर ए.के. राय के मुताबिक, क्वालिटी, मजबूत स्टिचिंग और क्विक कस्टमर फीडबैक के दम पर इन्होंने बड़े ब्रांड्स को पीछे छोड़ दिया है. जीरो से शुरू हुए इस सफर में आज 30 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिला हुआ है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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राजद कार्यकर्ताओं ने मनाई स्व. वीपी सिंह की जयंती

बोकारो | राष्ट्रीय जनता दल के तत्वावधान में गुरुवार को बाघरायबेड़ा (सतनपुर) में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय विश्वनाथ प्रताप सिंह की जयंती मनाई गई। इस दौरान उनके चित्र पर माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजद अनुसूचित मोर्चा के पूर्व प्रदेश महासचिव रामलाल राम ने की। इस अवसर पर प्रदेश महासचिव बहादुर सिंह यादव ने वीपी सिंह के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कर पिछड़े वर्गों को केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। युवा राजद के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष समर बहादुर यादव ने कहा कि वीपी सिंह ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को भारत रत्न दिलाने और उनके सम्मान में महत्वपूर्ण निर्णय लिए। पूर्व जिला अध्यक्ष अरशद अली ने उनके सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सौहार्द के प्रति समर्पण को याद किया। कार्यक्रम में धनजी सिंह यादव, वीरेंद्र रजक, वशिष्ठ यादव आदि उपस्थित थे। Source link

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नशा व्यक्ति नहीं, उसके परिवार व समाज को भी खोखला कर देता...

गढ़वा| अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर गुरुवार को आर.के. पब्लिक स्कूल, गढ़वा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा नशा मुक्ति की सामूहिक शपथ के साथ हुई। इस दौरान नशे के दुष्प्रभावों से बचने तथा समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के निदेशक सह शिक्षाविद् अलखनाथ पांडेय ने कहा कि नशा व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और पूरे समाज को भी खोखला कर देता है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त समाज से ही परिवार और देश का समग्र विकास संभव है। नशे की लत व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक रूप से कमजोर बना देती है। इसलिए युवाओं को इससे दूर रहना चाहिए। विद्यालय के प्राचार्य संतोष पांडेय ने अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रत्येक वर्ष 26 जून को यह दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसंबर 1987 को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाने का प्रस्ताव पारित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाकर स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पोस्टर निर्माण एवं भाषण प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। Source link

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‘गर्व से फूला नहीं समा रहा हूं’, ऐसा क्या हुआ जो खुशी...

होमताजा खबरदेश ‘गर्व से फूला नहीं समा रहा’, क्या हुआ जो झूम उठे शशि थरूर, आर्मी से है कनेक्शन Last Updated:June 26, 2026, 20:14 IST कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह ‘गर्व से फूले नहीं समा रहे हैं’. इसकी वजह राजनीति नहीं, बल्कि उनके बहनोई लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर की बड़ी उपलब्धि है. उन्हें भारतीय सेना के सदर्न कमांड का नया आर्मी कमांडर नियुक्त किया गया है. 1 जुलाई से वह यह जिम्मेदारी संभालेंगे. अपने साले लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर और उनकी पत्‍नी अनु के साथ कांग्रेस सांसद शशि थरूर. दिल्‍ली. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म X पर एक ऐसा पोस्ट किया है. इस पोस्‍ट में वह खुशी से फूल नहीं समा रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह ‘गर्व से फूले नहीं समा रहे हैं’. इसकी वजह कोई राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि उनके परिवार से जुड़ी एक बड़ी उपलब्धि है. जी हां, शशि थरूर के बहनोई लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर को भारतीय सेना के सदर्न कमांड का नया आर्मी कमांडर नियुक्त किया गया है. वह 1 जुलाई से यह जिम्मेदारी संभालेंगे. इस नियुक्ति के बाद शशि थरूर ने उन्हें फोन पर बधाई दी और अपनी खुशी सोशल मीडिया पर शेयर की है. थरूर ने लिखा कि उन्हें अभी-अभी अपने साले लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर से बात करने का मौका मिला और वह अपनी खुशी छिपा नहीं पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह उनके पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व का पल है. देश की सबसे बड़ी कमांड में मिली जिम्मेदारीशशि थरूर ने बताया कि भारतीय सेना में कुल छह ऑपरेशनल कमांड हैं. इनमें सदर्न कमांड भौगोलिक क्षेत्र के लिहाज से सबसे बड़ी कमांड मानी जाती है. यह देश के बड़े और रणनीतिक रूप से बेहद अहम इलाके की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है. उन्होंने कहा कि इतने बड़े पद पर पहुंचना किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है. उन्हें पूरा भरोसा है कि लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और प्रोफेशनलिज्म के साथ निभाएंगे. ‘उनकी मिलिट्री ब्रिलियंस पर कभी शक नहीं रहा’शशि थरूर ने अपने पोस्ट में लिखा कि उनके साले का मिलिट्री करियर शानदार रहा है. उनकी लीडरशिप, प्रोफेशनल रिकॉर्ड और यूनिफॉर्म के प्रति समर्पण हमेशा प्रेरणादायक रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी का इतने बड़े पद तक पहुंचना सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है. शशि थरूर ने अपने पोस्ट के साथ एक पुरानी तस्वीर और एक वीडियो भी शेयर किया है. यह फोटो उस समय की है, जब लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर मेजर जनरल बने थे. तस्वीर में शशि थरूर, राजेश पुष्कर और उनकी पत्नी अनु एक साथ नजर आ रहे हैं. देशवासियों से की शुभकामनाएं देने की अपीलअपने पोस्ट के आखिर में शशि थरूर ने सभी देशवासियों से अपील की कि वे लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दें. उन्होंने ‘जय हिंद’ के साथ अपना संदेश खत्म करते हुए कहा कि देश की सेवा और सुरक्षा की इस नई जिम्मेदारी के लिए वह उन्हें दिल से शुभकामनाएं देते हैं. वहीं, अपनी पोस्‍ट के साथ शेयर किए गए वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ऑपरेशन सिंदूर पार्ट-2 से जुड़े एक मिशन का जिक्र कर रहे हैं. आपको बता दें कि लेफिटनेंट जनरल राजेश पुष्‍कर कांग्रेस सांसद शशि थरूर की दिवंगत पत्‍नी सुनंदा पुष्‍कर के भाई हैं. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

रामगढ़ सड़क हादसे में 8 की मौत, शादी में बाजा बजाने जा...

रामगढ़. झारखंड के रामगढ़ जिले में शुक्रवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे ने आठ परिवारों की खुशियां छीन लीं. रामगढ़-बोकारो एनएच-23 पर रजरप्पा थाना क्षेत्र के लारी बुद्ध बाजार के पास कोयला लदे तेज रफ्तार ट्रक ने एक सवारी वाहन को जोरदार टक्कर मार दी. हादसे में पहले सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति ने इलाज के दौरान रांची स्थित रिम्स में दम तोड़ दिया. इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है. शादी समारोह में बाजा बजाने जा रहे थे सभी जानकारी के अनुसार, हादसे का शिकार हुए सभी लोग ताशा (बाजा) पार्टी के सदस्य थे. वे एक शादी समारोह में बाजा बजाने के लिए जा रहे थे. इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक ने उनके वाहन को टक्कर मार दी. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और अधिकांश लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. रिम्स में इलाज के दौरान हुई आठवें व्यक्ति की मौत अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक, हादसे में कुल आठ लोगों को अस्पताल लाया गया था. इनमें सात लोगों को मृत अवस्था में लाया गया, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल था. घायल की हालत बेहद नाजुक थी और सिर में गंभीर चोट लगी थी. प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए रांची के रिम्स रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मृतक की पहचान पप्पू कर्माली के रूप में हुई है. मृतकों की हुई पहचान हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान इस प्रकार हुई है: हेमंत महतोमनीष कुमारअमोद कुमारशक्ति कालिंदीअशोक कालिंदीविशाल कर्मालीपवन कर्मालीपप्पू कर्माली ट्रक चालक मौके से फरार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया. सूचना मिलते ही रजरप्पा थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और क्षतिग्रस्त वाहन को हटाकर यातायात बहाल कराया. पुलिस ट्रक चालक की तलाश में जुटी है और पूरे मामले की जांच की जा रही है. लगातार हादसों से लोगों में आक्रोश स्थानीय लोगों का कहना है कि रामगढ़-बोकारो मुख्य मार्ग पर लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं. लोगों ने आरोप लगाया कि इस सड़क पर कई ब्लैक स्पॉट होने के बावजूद प्रशासन की ओर से दुर्घटनाएं रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ. सड़क सुरक्षा के लिए उठी मांग घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में हाईमास्ट लाइट, स्पीड कंट्रोल सिस्टम, स्पीड गन और नियमित जांच अभियान चलाने की मांग की है. साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की भी मांग उठी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों पर रोक लगाई जा सके. जांच में जुटी पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है. शुरुआती जांच में ओवरटेक के दौरान ट्रक की टक्कर से हादसा होने की बात सामने आई है. फरार चालक की तलाश जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है. Source link

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प्रदूषण नियंत्रण व कचरा प्रबंधन पर दिया गया प्रशिक्षण

बोकारो | बोकारो इस्पात संयंत्र में गुरुवार को प्रदूषण नियंत्रण एवं अपशिष्ट प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के उद्देश्य एवं महत्व से अवगत कराया गया। इस दौरान जिम्मेदार औद्योगिक संचालन, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय अनुपालन तथा सतत अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। साथ ही बताया गया कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना प्रत्येक कर्मचारी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण उपायों एवं उन्नत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को अपनाना आवश्यक है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 21 प्रतिभागियों ने भाग लिया। Source link

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