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झारखंड

खेल युवाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम, लेकिन संघर्ष जरूरी है...

सिटी रिपोर्टर | बोकारो बोकारो में आयोजित अंडर-23 झारखंड राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता रविवार को गरिमामयी वातावरण में शुरू हुआ। प्रतियोगिता में राज्य के विभिन्न जिलों से लगभग 175 पुरुष व महिला खिलाड़ी हिस्सा ले रही हैं। यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय स्तर में चयन का महत्वपूर्ण मंच मानी जा रही है। उद्घाटन मुख्य अतिथि कांग्रेस नेत्री अनुपमा सिंह तथा विशिष्ट अतिथि चास की डिप्टी मेयर पूजा कुमारी उपस्थित रहीं। दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया। बोकारो कुश्ती संघ के अध्यक्ष धर्मवीर सिंह ने कहा कि कुश्ती केवल एक खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण, संघर्ष और आत्मविश्वास का प्रतीक है। आज के युवा खिलाड़ी ही भविष्य में देश का गौरव बनेंगे और खेल के माध्यम से समाज को नई दिशा देंगे। मुख्य अतिथि अनुपमा सिंह ने कहा कि खेल युवाओं के सर्वांगीण विकास का सबसे सशक्त माध्यम है। खिलाड़ियों को निरंतर मेहनत और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सरकार और समाज को खिलाड़ियों के विकास के लिए हर संभव सहयोग देना चाहिए। समारोह में झारखंड कुश्ती संघ के कोषाध्यक्ष बबलू कुमार, संयुक्त सचिव संजीव कुमार झा, अजीत भगत, रामकृष्ण तिवारी, राजू कुमार, मृत्युंजय नाथ चौधरी, अभय प्रजापति आदि मौजूद थे। Source link

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पलक झपकते ही ड्रैगन की नस दबा देगा भारत? चीन के 80%...

नई दिल्ली. अंडमान-निकोबार भारत का अंतिम छोर है. सामरिक दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद निकट स्थित है. यह ऐसी रणनीतिक लोकेशन है, जहां से चीन के लगभग 80 प्रतिशत कच्चे तेल और 70 प्रतिशत एलएनजी (एलएनजी) का आवागमन होता है. सामरिक और व्यावसायिक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को नई पहचान देने की दिशा में भारत सरकार तैयारी कर रही है. ग्रेट निकोबार द्वीप समूह (जीएनआई) के समग्र विकास की परिकल्पना के तहत केंद्र सरकार ने चार प्रमुख परियोजनाओं को शामिल किया है. इनमें अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (आईसीटीपी), संयुक्त उपयोग वाला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा एवं नौसैनिक एयर स्टेशन, टाउनशिप तथा पावर प्लांट शामिल हैं. रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस परियोजनाओं के तहत, भारत सरकार नौसेना और आम नागरिकों के इस्तेमाल के लिए एक हवाई अड्डा और रनवे बनाने के लिए 13,000 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना बनाई है. इस निवेश को रक्षा मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय दोनों मिलकर उठाएंगे. इस परियोजना के पांच वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है. ग्रेट निकोबार द्वीप (जीएनआई) में प्रस्तावित संयुक्त उपयोग वाले ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे और नौसैनिक वायु स्टेशन से भारत की इस क्षेत्र में निरंतर उपस्थिति मजबूत होगी. इसके साथ ही सैन्य संसाधनों की आवाजाही, अभियानों को समर्थन, समुद्री मार्गों की निगरानी, संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया तथा अग्रिम क्षेत्रों में रसद (लॉजिस्टिक्स) बनाए रखने की क्षमता भी बढ़ेगी. ग्रेट निकोबार द्वीप समूह 6-डिग्री चैनल के निकट स्थित है, जो अदन की खाड़ी से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक फैले समुद्री व्यापार मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह क्षेत्र इस समुद्री मार्ग से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. दुनिया के कुल ऊर्जा व्यापार का लगभग दो-तिहाई और कंटेनर परिवहन का लगभग आधा हिस्सा इसी संवेदनशील क्षेत्र से होकर गुजरता है. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना का एयर स्टेशन आईएनएस बाज वर्ष 2012 से सक्रिय है. रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह एयरफील्ड प्रारंभ में 3,500 फीट लंबे रनवे के साथ शुरू हुआ था. बाद में आवश्यकताओं के अनुरूप इसके विस्तार का कार्य जारी रहा. रनवे की लंबाई 3,500 फीट से बढ़ाकर 4,500 फीट कर दी गई थी, जबकि विस्तार योजना के तहत इसे 10,000 फीट तक बढ़ाने का प्रस्ताव था. हालांकि, इसके लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण और समुद्री क्षेत्र के पुनर्भरण (रीक्लेमेशन) की आवश्यकता थी. रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की स्थापना के लिए आईएनएस बाज सहित पांच वैकल्पिक स्थलों का मूल्यांकन किया गया था. इस दौरान स्थलाकृति (टोपोग्राफी), हवाई नेविगेशन में संभावित बाधाएं, जनजातीय आबादी पर प्रभाव, वनस्पति एवं वन्यजीवों पर पड़ने वाले असर सहित कई अन्य मानकों को ध्यान में रखा गया. विस्तृत अध्ययन के बाद गलाथिया खाड़ी को ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के लिए सबसे उपयुक्त स्थान के रूप में चुना गया. इसके अलावा, आईएनएस बाज को ब्राउनफील्ड परियोजना के रूप में विकसित करने की संभावना पर भी विचार किया गया, लेकिन कई व्यावहारिक सीमाओं के कारण इस विकल्प को छोड़ दिया गया. इस क्षेत्र के उत्तर में 80 मीटर से अधिक ऊंची पहाड़ियां हैं, जिनके कारण बड़े विमानों के सुरक्षित संचालन के लिए व्यापक स्तर पर पहाड़ी कटान और उथले समुद्री तट की ड्रेजिंग आवश्यक होती. साथ ही, भारतीय नौसेना का मौजूदा बुनियादी ढांचा छोटे रनवे के आसपास विकसित हो चुका है और कोड-4 श्रेणी के रनवे के लिए आवश्यक सुरक्षा मानक यहां उपलब्ध नहीं हैं. ऐसी स्थिति में मौजूदा सुविधाओं को हटाना पड़ता. इसके अतिरिक्त, भविष्य में विस्तार की संभावनाएं भी सीमित थीं और यह स्थान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए आवश्यक अवसंरचना को समायोजित करने में सक्षम नहीं था. अधिकारियों के अनुसार, यदि आईएनएस बाज को ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट के लिए चुना जाता तो जनजातीय आबादी, वनस्पति और वन्यजीवों पर अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव पड़ता. यही कारण है कि नई परियोजना के तहत आईएनएस बाज से लगभग 30 किलोमीटर दूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित किया जाएगा. Source link

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ट्यूशन के लिए निकला 13 वर्षीय 8वीं का छात्र लापता

बोकारो | बियाडा क्षेत्र में अपने नाना-नानी के साथ रहकर पढ़ाई कर रहा 13 वर्षीय छात्र प्रतीक गुप्ता शनिवार को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया। घटना के बाद परिजनों में चिंता का माहौल है। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिलने पर मामले की सूचना पुलिस को दी गई। परिजनों ने बताया कि वह सुबह ट्यूशन जाने की बात कहकर घर से निकला था। खोजबीन के दौरान पुलिस ने बोकारो रेलवे स्टेशन के वीआईपी गेट के समीप उसकी साइकिल बरामद की। इससे परिजनों को आशंका हुई कि वह रेलवे स्टेशन की ओर गया होगा। प्रतीक के चाचा सुमन गुप्ता ने बताया कि बच्चे की मां दिल्ली में रहती है, जबकि पिता वर्तमान में जेल में है। दोस्तों से पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि वह पिछले एक-दो दिनों से दिल्ली जाने की बात कर रहा था। फिलहाल पुलिस तलाश में है। Source link

झारखंड

बस स्टैंड की खाली जमीन पर बनेगा विवाह भवन

भास्कर न्यूज | गिरिडीह शहर के बस स्टैंड स्थित जिला परिषद की खाली जमीन पर जल्द ही आधुनिक विवाह भवन का निर्माण शुरू होगा। करीब 10 वर्षों से लंबित इस योजना को अब धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है। विवाह भवन निर्माण के लिए जिला परिषद की ओर से लगभग 1 करोड़ 10 लाख रुपए की लागत स्वीकृत की गई है। निर्माण कार्य के लिए 10 दिन पूर्व टेंडर जारी किया जा चुका है और प्रक्रिया अंतिम चरण में है। टेंडर फाइनल होते ही संवेदक को कार्यादेश जारी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी ने बताया कि बस स्टैंड के समीप जिला परिषद की लगभग 50 डिसमिल जमीन वर्षों से खाली पड़ी हुई है। इस भूमि पर विवाह भवन निर्माण का प्रस्ताव करीब एक दशक पहले जिला परिषद बोर्ड की बैठक में पारित किया गया था। हालांकि, पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण योजना पर काम शुरू नहीं हो सका था। आधुनिक सुविधाओं से होगा सु​सज्जित :नरेश कुमार जिला अभियंता नरेश कुमार ने बताया कि विवाह भवन आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। भवन में विशाल हॉल, वातानुकूलित कमरे और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। वर और वधू पक्ष के लोगों के लिए अलग-अलग आवासीय व्यवस्था की जाएगी, जिससे विवाह समारोहों का आयोजन सुविधाजनक ढंग से हो सकेगा। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य एक वर्ष निर्धारित किया गया है। समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा कराने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा जिला परिषद कार्यालय परिसर में उपलब्ध लगभग 5,000 वर्ग फीट जमीन पर भविष्य में बैंक ऑफ इंडिया के भवन निर्माण की भी संभावना जताई गई है। Source link

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लाडले का कीर्ति चक्र छाती से लगा रो पड़ी मां, जिसने भी...

होमवीडियोदेश लाडले का कीर्ति चक्र छाती से लगा रो पड़ी मां, जिसने भी देखा कलेजा मुंह को आ गया X लाडले का कीर्ति चक्र छाती से लगा रो पड़ी मां, जिसने भी देखा कलेजा मुंह को आ गया   नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन का अशोक हॉल सोमवार, 8 जून 2026 को उस वक्त अत्यंत भावुक हो उठा जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया. आर्मी सर्विस कॉर्प्स/1 सिक्किम स्काउट्स के जांबाज अधिकारी शशांक ने उत्तरी सिक्किम की एक उफनती नदी में गिरे अपने साथी अग्निवीर स्टीफन सुब्बा की जान तो बचा ली लेकिन खुद वीरगति को प्राप्त हो गए. जब शहीद का यह सर्वोच्च सम्मान लेने उनके पिता श्री जंग बहादुर तिवारी और मां श्रीमती नीता तिवारी आगे बढ़े तो मां अपने लाडले की शहादत और अदम्य साहस को याद कर फूट-फूटकर रो पड़ीं. इस हृदयविदारक क्षण में राष्ट्रपति ने भी बेहद संवेदनशीलता दिखाते हुए मां का कंधा थामकर उन्हें ढांढस बंधाया. देश के इस वीर सपूत का सर्वोच्च बलिदान भारतीय सेना के अटूट सौहार्द, निस्वार्थ सेवा और सर्वोच्च निष्ठा की एक अमर दास्तान बन गया है, जिसने हर भारतीय की आंख नम कर दी.<br>नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन का अशोक हॉल सोमवार, 8 जून 2026 को उस वक्त अत्यंत भावुक हो उठा जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया. आर्मी सर्विस कॉर्प्स/1 सिक्किम स्काउट्स के जांबाज अधिकारी शशांक ने उत्तरी सिक्किम की एक उफनती नदी में गिरे अपने साथी अग्निवीर स्टीफन सुब्बा की जान तो बचा ली लेकिन खुद वीरगति को प्राप्त हो गए. जब शहीद का यह सर्वोच्च सम्मान लेने उनके पिता श्री जंग बहादुर तिवारी और मां श्रीमती नीता तिवारी आगे बढ़े तो मां अपने लाडले की शहादत और अदम्य साहस को याद कर फूट-फूटकर रो पड़ीं. इस हृदयविदारक क्षण में राष्ट्रपति ने भी बेहद संवेदनशीलता दिखाते हुए मां का कंधा थामकर उन्हें ढांढस बंधाया. देश के इस वीर सपूत का सर्वोच्च बलिदान भारतीय सेना के अटूट सौहार्द, निस्वार्थ सेवा और सर्वोच्च निष्ठा की एक अमर दास्तान बन गया है, जिसने हर भारतीय की आंख नम कर दी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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आदित्यपुर में आदिवासी भूमि बचाओ सभा में जमीन पर कब्जे को लेकर...

भास्कर न्यूज| सरायकेला आदित्यपुर भूमिज मुंडा समाज के तत्वावधान में रविवार को कुलपटांगा में “आदित्यपुर भूमिज मुंडा महापंचायत सह आदिवासी भूमि बचाओ सभा” का आयोजन किया गया। सभा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल थे। इस दौरान आदिवासी भूमि पर कथित अवैध कब्जे तथा प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ आवाज बुलंद की। सभा में राजू सरदार ने अपने पूर्वज मोती सरदार की जमीन से जुड़े विवाद का मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि उनकी पुश्तैनी भूमि पर गैर-आदिवासियों द्वारा कब्जा कर बाउंड्री और मकान निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1964 से उनका परिवार उक्त भूमि पर खेती करते आ रहा है तथा उनके पास भूमि से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं। राजू सरदार ने आरोप लगाया कि राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी कर जमीन को अन्य लोगों के नाम दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों को लिखित शिकायत भी दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सभा को संबोधित करते हुए समाज के नेता लालबाबू सरदार ने कहा कि आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छोटानागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम का सख्ती से पालन होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित मामले में जनप्रतिनिधियों द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। सभा में उपस्थित लोगों ने भूमि विवाद की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों पर कार्रवाई करने तथा आदिवासी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो समाज आंदोलन को और तेज करेगा। इस दौरान पारंपरिक तीर-धनुष के साथ लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन भी किया। Source link

झारखंड

एक सप्ताह में किसानों को 50% अनुदान पर 400 क्विंटल धान का...

भास्कर न्यूज| सरायकेला सरायकेला-खरसावां जिले में मानसून के आगमन की आहट के साथ किसानों की उम्मीदें भी बढ़ने लगी हैं। मौसम विभाग के संकेतों के अनुसार अगले एक से डेढ़ सप्ताह के भीतर जिले में मानसून पहुंचने की संभावना है। इसके मद्देनजर ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्यों की तैयारियां तेज हो गई हैं। किसान खेतों की जुताई, मेड़बंदी और अन्य आवश्यक कार्यों को तेजी से पूरा करने में जुटे हैं, ताकि अच्छी बारिश के साथ खरीफ खेती की शुरुआत की जा सके। जिले में कृषि मुख्य रूप से वर्षा पर आधारित है। ऐसे में मानसून की पहली बारिश किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बारिश शुरू होते ही धान की नर्सरी तैयार करने और रोपाई से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। कृषि विभाग ने भी खरीफ मौसम को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार किसानों को समय पर धान बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है और जल्द ही विभिन्न प्रखंडों में बीज वितरण का कार्य शुरू होगा। सरायकेला-खरसावां जिले के किसानों को आगामी एक से डेढ़ सप्ताह के भीतर बीज विनिमय योजना के तहत 400 क्विंटल धान बीज उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि विभाग ने खरीफ मौसम को देखते हुए इसकी तैयारी पूरी कर ली है। योजना के तहत किसानों को धान बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर दिया जाएगा। जिले के कृषि परिदृश्य पर नजर डालें तो यहां 1,148 गांवों में कुल 76,388 किसान खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। जिले में कुल 1,46,046 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इनमें 63 प्रतिशत क्षेत्र अपलैंड, 24 प्रतिशत मीडियम लैंड तथा 12 प्रतिशत लोलैंड श्रेणी में आता है। वहीं जिले में कुल 5,729 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित है, जबकि अधिकांश खेती अब भी मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए मानसून की पहली फुहार का इंतजार कर रहे हैं, जो जिले में खेती की नई उम्मीद लेकर आएगी। जिला कृषि पदाधिकारी रोशन नीलकमल ने बताया कि प्रथम चरण में किसानों के बीच 400 क्विंटल धान बीज का वितरण किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। बीज का वितरण लैंपस के माध्यम से किया जाएगा, ताकि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि इस चरण में एमटीयू-1010, तथा एमटीयू-7029 जैसी उन्नत किस्मों के धान बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। ये किस्में बेहतर उत्पादन क्षमता और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप मानी जाती हैं। जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि बीज विनिमय योजना के बाद फसल विस्तार योजना के तहत भी किसानों को धान बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत किसानों को 100 प्रतिशत अनुदान पर बीज प्रदान किए जाएंगे। विभाग का प्रयास है कि मानसून के आगमन से पहले किसानों को पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध हो सके। Source link

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samastipur pusa university fish and moti pearl farming tips

होमताजा खबरlifestyle एक ही तालाब में करें मछली के साथ मोती पालन, डबल इनकम के लिए पहुंचे यहां Last Updated:June 08, 2026, 21:33 IST Fish And Ship farming Tips: समस्तीपुर के किसानों के लिए खुशखबरी है. अब मछली पालन के साथ तालाबों में सीप पालन कर मोती उत्पादन से डबल मुनाफा कमा रहे हैं. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा) किसानों को ट्रेनिंग और तकनीकी मदद देकर इस आधुनिक तकनीक से जोड़ रहा है. जानें कैसे एक ही तालाब से हो रही है दोगुनी कमाई. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर: हर किसान का सपना होता है कि वह कम लागत में अधिक से अधिक आमदनी प्राप्त करे. इसी सोच को साकार करने की दिशा में मछली पालन के साथ शीप (सीप) पालन एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है. समस्तीपुर जिले में कई किसान इस तकनीक को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार मछली पालन के लिए तैयार तालाबों में ही शिप पालन किया जा सकता है. जिससे अलग से जमीन या बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं पड़ती. यही वजह है कि एक ही संसाधन का उपयोग कर किसान दो अलग-अलग स्रोतों से कमाई कर सकते हैं. शिप पालन के माध्यम से मोती उत्पादन भी संभव है. जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होता है. वैज्ञानिक किसानों को दे रहे प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोगडॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के मत्स्य पालन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय द्वारा शीप पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इच्छुक किसान विभाग से संपर्क कर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं.विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रकार के शिप उपलब्ध हैं, जिन्हें किसान लेकर इस कार्य की शुरुआत कर सकते हैं. वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को शिप के रखरखाव, भोजन, देखभाल और मोती उत्पादन की पूरी प्रक्रिया सिखाई जाती है. डॉ. कुमार के अनुसार शिप के अंदर विशेष प्रकार का न्यूक्लियस डालकर मनचाहे डिजाइन के मोती तैयार किए जा सकते हैं. यदि किसी किसान को गणपति, फूल या अन्य आकृति वाला मोती चाहिए तो उसी प्रकार का न्यूक्लियस शिप के भीतर स्थापित किया जाता है. 17 से 18 महीने में तैयार होता है मोतीवैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि मोती उत्पादन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है. जिसमें धैर्य और तकनीकी जानकारी दोनों की आवश्यकता होती हैं. सामान्य तौर पर एक गुणवत्तापूर्ण मोती तैयार होने में 17 से 18 महीने का समय लगता है. इस दौरान शिप सूक्ष्म शैवाल, बैक्टीरिया और कार्बनिक पदार्थों को भोजन के रूप में ग्रहण करता है. उचित देखभाल और सही तकनीक अपनाने पर किसानों को अच्छा उत्पादन प्राप्त होता है. उन्होंने कहा कि शिप पालन न केवल अतिरिक्त आय का साधन है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है. विश्वविद्यालय लगातार किसानों को इस तकनीक से जोड़ने का प्रयास कर रहा है ताकि वे पारंपरिक मछली पालन के साथ मोती उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बना सकें. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar Source link

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राजेश साव की संदिग्ध अवस्था में मौत मामला:दो माह बाद भी कार्रवाई...

हजारीबाग के कटकमदाग थाना क्षेत्र के पसई गांव में राजेश साव की संदिग्ध अवस्था में मौत के मामले में पुलिस कार्रवाई न होने से ग्रामीण सोमवार को सड़क पर उतर आए। घटना के लगभग दो महीने बीत जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने मुख्य सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि राजेश साव की मौत सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का परिणाम है। उनका कहना है कि मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। हर बार केवल आश्वासन ही मिला: पत्नी प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाता, तो उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। मृतक की पत्नी ने बताया कि पिछले दो महीनों से उनका परिवार न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे परिवार में असुरक्षा का माहौल है। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच कर दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। सड़क जाम की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और मामले में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। हालांकि, ग्रामीण त्वरित कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है। Source link

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पलामू में दो बाइक की टक्कर, दो युवकों की मौत:आमने-सामने हुई टक्कर...

पलामू जिले के पांकी थाना क्षेत्र के इमली चौक के पास सोमवार दोपहर एक सड़क हादसे में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दुर्घटना दो बाइकों की आमने-सामने की टक्कर के कारण हुई। मृतकों की पहचान पथरा निवासी अंकित सिंह (पिता अरुण सिंह) और कसमार शामगढ़ तरहसी निवासी दीपक कुमार यादव (पिता पूरन यादव) के रूप में हुई है। घायलों में बगलाडी निवासी नितिन कुमार (पिता सत्येंद्र राम) और सुधांशु सिंह (पिता उपेंद्र सिंह) शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, अंकित कुमार और नितिन कुमार एक बाइक से ट्यूशन पढ़ने जा रहे थे। विपरीत दिशा से दीपक और सुधांशु दूसरी बाइक पर आ रहे थे। इमली चौक के पास दोनों बाइकों में जोरदार टक्कर हो गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पांकी पहुंचाया गया। वहां से उन्हें मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एमएमसीएच) रेफर किया गया। एमएमसीएच में अंकित को मौके पर ही मृत घोषित कर दिया गया था, जबकि दीपक की इलाज के दौरान मौत हो गई। नितिन और सुधांशु का इलाज जारी है। दोनों शवों का पोस्टमॉर्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पांकी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त दोनों बाइकों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को दुर्घटना का संभावित कारण माना जा रहा है। पुलिस हादसे के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। Source link

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