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Mamata Banerjee won’t resign | Mamata Banerjee Latest News | ‘बर्खास्त कर...

होमताजा खबरदेश बर्खास्त कर दें, मैं इस्तीफा नहीं दूंगी… ममता ने भरी बैठक में कहा, 10 MLA गायब Last Updated:May 06, 2026, 21:08 IST Mamata Banerjee Latest News: ममता बनर्जी ने एक बार फिर से इस्तीफा न देने का सुर दोहराया है. उन्होंने कालीघाट में नए चुने गए विधायकों के साथ मिटिंग में दोहराते हुए कहा कि मैं राज्यपाल द्वारा बर्खास्तगी का इंतजार करूंगी. ममता बनर्जी ने पार्टी मीटिंग में इस्तीफा देने से इनकार कर दिया. (फाइल फोटो) Mamata Banerjee Declined to Resign: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रही है. 15 साल के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई है. इस बीच ममता बनर्जी ने अलग बखेड़ा खड़ा कर दिया है. उन्होंने चुनावी हार के बाद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. बुधवार को उन्होंने टीएमसी के नए चुने गए विधायकों के साथ बैठक में कहा कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी. उन्होंने पार्टी बैठक में साफ तौर पर अपने इरादे जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें मुझे निकालने दो, मैं इस्तीफा नहीं दूंगी. बताते चलें कि टीएमसी की पार्टी बैठक कोलकाता के कालीघाट आयोजित की गई थी. ममता ने पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी के साथ मिलकर चुनावी हार के बाद पार्टी की आगे की राह तय करने के लिए मीटिंग को एड्रेस किया. नए चुने गए विधायकों और पार्टी मीटिंग के संबोधन में ममता बनर्जी ने अपने पद पर बने रहने का इरादा जताया. साथ ही एक सिंबॉलिक प्रोटेस्ट की अपील की. ​​उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी. उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा उनकी (खुद की) बर्खास्तगी का इंतजार करेंगी. साथ ही ममता ने अपनी पार्टी के मेंबर्स और नए चुने गए विधायकों से ‘ब्लैक डे’ के खिलाफ प्रोटेस्ट करने की अपील की. उन्होंने उनसे पश्चिम बंगाल असेंबली के पहले दिन काले कपड़े पहनने को कहा. Our Chairperson Smt. @MamataOfficial and National General Secretary Shri @abhishekaitc addressed a meeting with our leaders in Kalighat, instilling in them clarity, confidence, conviction, and a renewed sense of purpose to continue the good fight. — All India Trinamool Congress (@AITCofficial) May 6, 2026 Source link

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Vande Mataram New Rules। वंदे मातरम का अपमान किया तो होगी जेल,...

होमताजा खबरदेश वंदे मातरम का अपमान किया तो जेल, मोदी कैबिनेट ने दिया राष्ट्रगान के समान दर्जा Last Updated:May 06, 2026, 19:55 IST Vande Mataram New Rules: मोदी कैबिनेट ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान दर्जा दे दिया है. अब राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत इसके अपमान या गायन में बाधा डालने पर 3 साल तक की जेल हो सकती है. 150वीं वर्षगांठ पर आए इस फैसले को बंगाल जीत के बाद सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बड़ी जीत माना जा रहा है जिससे तुष्टीकरण की राजनीति को खत्म करने का संदेश दिया गया है. मोदी कैबिनेट ने बंगाल चुनाव नतीजों के बाद निर्णय लिया. नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सियासी जंग जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी फुल फॉर्म में नजर आ रहे हैं. नई कैबिनेट की पहली ही बैठक में सरकार ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया है जिसने देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है. अब बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के बराबर का दर्जा दे दिया गया है. यह केवल एक घोषणा नहीं बल्कि कानूनी रूप से अब वंदे मातरम उतना ही शक्तिशाली हो गया है जितना हमारा राष्ट्रगान. सरकार ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी है जिसके बाद इस गीत का अपमान करना अब सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है. कानून में क्या बदला?कैबिनेट के फैसले के अनुसार, अब अधिनियम की धारा-3 में बदलाव किया जाएगा. इस संशोधन के बाद: · यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम के गायन में बाधा डालता है तो उसे 3 साल तक की कैद या भारी जुर्माना (या दोनों) भुगतना होगा. · अगर कोई दोबारा यही गुस्ताखी करता है तो कम से कम एक साल की जेल अनिवार्य होगी. · वही नियम और पाबंदियां लागू होंगी जो तिरंगे, संविधान और राष्ट्रगान के लिए निर्धारित हैं. 150वीं वर्षगांठ पर मोदी का मास्टरस्ट्रोकसंयोग देखिए कि यह फैसला तब आया है जब देश वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है. पीएम मोदी ने पहले ही साफ कर दिया था कि तुष्टीकरण की राजनीति की वजह से इस कालजयी गीत को सांप्रदायिक रंग दिया गया और इसे वह सम्मान नहीं मिला जिसका यह हकदार था. अब गृह मंत्रालय के नए निर्देशों के बाद सरकारी कार्यक्रमों में इसके सभी छह अंतरों का गायन अनिवार्य होगा. बंगाल की जीत का रिटर्न गिफ्टसियासी गलियारों में इसे बंगाल चुनाव की जीत से जोड़कर देखा जा रहा है. बीजेपी ने बंगाल चुनाव में वंदे मातरम को बंगाली अस्मिता और राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा चेहरा बनाया था. बंकिम चंद्र की विरासत को सम्मान देकर मोदी सरकार ने न केवल अपनी विचारधारा को मजबूती दी है, बल्कि विरोधियों को भी बैकफुट पर धकेल दिया है. सवाल-जवाब वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है कि अब वंदे मातरम को कानूनी रूप से वही सुरक्षा और सम्मान प्राप्त होगा जो ‘जन गण मन’ को मिलता है. इसका अपमान करना अब दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा. क्या वंदे मातरम के अपमान पर जेल की सजा का प्रावधान है? हाँ, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन के बाद, इसके गायन में बाधा डालने या अपमान करने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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BJP Assam SC ST Vote News। इंडिया गठबंधन का खेल खत्म! 2024...

होमताजा खबरदेश 2024 की जिस सेंधमारी ने रोका था बहुमत, बंगाल-असम में BJP ने किया सूपड़ा साफ Last Updated:May 06, 2026, 19:01 IST BJP Assam SC ST Vote News: हाल के चुनावों में भाजपा और एनडीए ने असम और पश्चिम बंगाल की एससी-एसटी आरक्षित सीटों पर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है. बंगाल की 68 एससी सीटों में से भाजपा ने 51 और सभी 16 एसटी सीटों पर कब्जा कर टीएमसी को करारी शिकस्त दी है. असम में भी एनडीए ने सभी 19 एसटी सीटें जीतकर अपना वर्चस्व साबित किया. केंद्र की योजनाओं और मजबूत सामाजिक रणनीति ने इन वर्गों में भाजपा की पैठ गहरी की है. ख़बरें फटाफट पीएम मोदी के करिश्‍में ने विपक्ष के अरमानों पर पानी फेर दिया. (PTI) नई दिल्‍ली. असम और बंगाल के रणमैदान में प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसी सियासी सर्जिकल स्ट्राइक की कि विपक्ष का वो पुराना तिलिस्म ताश के पत्तों की तरह ढह गया. जहां सेंध लगी थी, वहां अब भाजपा की ऐसी फौलादी दीवार खड़ी है जिसे भेदना नामुमकिन सा नजर आ रहा है. असम से लेकर बंगाल तक अनुसूचित जाति और जनजातियों ने एकतरफा भगवा बटन दबाया. जिसे इंडिया गठबंधन के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया. 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान इंडिया गठबंधन ने बीजेपी के इस बड़े वोटबैंक में सेंधमारी कर उन्‍हें पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से वंचित रखा था. तब बीजेपी हिन्‍दुओं को एकजुट करने में लगी रही लेकिन तमाम विपक्षी पार्टी अनुसूचित जाति और जनजाति के वोटबैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही थी. असम और बंगाल में सियासी भूचाल विपक्ष की रणनीति का अंत: 2024 के आम चुनाव में विपक्षी गठबंधन अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल रहा था, जिससे भाजपा की हिंदू एकता की रणनीति को कड़ी चुनौती मिली थी.असम में भाजपा का क्लीन स्वीप: भाजपा ने असम की सभी 19 एसटी (ST) आरक्षित सीटों पर कब्जा कर लिया है, जहां एनडीए ने शत-प्रतिशत जीत हासिल की.पश्चिम बंगाल का बड़ा उलटफेर: बंगाल में भाजपा ने 68 एससी (SC) सीटों में से 51 पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है जबकि ममता बनर्जी की टीएमसी मात्र 17 सीटों पर सिमट गई.एसटी सीटों पर पूर्ण वर्चस्व: बंगाल की सभी 16 एसटी सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल कर विपक्ष के वंचित वर्ग वाले दांव को पूरी तरह नाकाम कर दिया. 16 सीटों पर भाजपा ने पूर्ण वर्चस्व हासिल किया.तमिलनाडु: एनडीए सहयोगी अन्नाद्रमुक ने 46 एससी सीटों में से 9 और 2 एसटी सीटों में से 1 सीट पर जीत हासिल की.पुडुचेरी: एनडीए सहयोगी ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस ने 5 एससी सीटों में से 2 पर कब्जा जमाया.मतुआ समुदाय का प्रभाव: विशेषज्ञों का मानना है कि एससी बहुल क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में मतुआ समुदाय के एकजुट समर्थन ने भाजपा के पक्ष में एकतरफा माहौल बनाया.परिसीमन का मास्टरस्ट्रोक: असम में परिसीमन के चलते एसटी सीटों का 16 से बढ़कर 19 होना भाजपा के लिए निर्णायक साबित हुआ. कैसे ढहा विपक्ष का किला?2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष यह नैरेटिव सेट करने में सफल रहा था कि भाजपा के आने से आरक्षित वर्गों के हितों को खतरा हो सकता है जिसकी वजह से भाजपा पूर्ण बहुमत से चूक गई थी. भाजपा हिंदू एकता की रणनीति बनाती रही लेकिन तब उसकी दाल नहीं गली थी. हालांकि, असम और बंगाल के इन ताजा नतीजों ने साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति ने उस नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया है. इन राज्यों में अनुसूचित जाति और जनजातियों ने एकतरफा वोट डालकर यह साफ कर दिया है कि अब विपक्ष का वह सोशल इंजीनियरिंग वाला दांव बेअसर हो चुका है. उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे आदिवासी क्षेत्रों में विपक्ष का लगभग सफाया होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है. सवाल-जवाब असम में एनडीए ने एसटी सीटों पर कैसा प्रदर्शन किया? असम में एनडीए ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए सभी 19 एसटी आरक्षित सीटों पर कब्जा कर लिया. इसमें भाजपा ने अकेले 13 सीटें जीतीं, जबकि बाकी सीटें उसके सहयोगी दलों के खाते में गईं. पश्चिम बंगाल में एससी-एसटी सीटों पर भाजपा और टीएमसी की क्या स्थिति रही? पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 84 एससी-एसटी सीटों में से कुल 67 पर जीत हासिल की. टीएमसी केवल 17 एससी सीटों तक सिमट गई और एसटी की सभी 16 सीटों पर उसका सूपड़ा साफ हो गया. दक्षिण भारत में एनडीए का प्रदर्शन कैसा रहा? दक्षिण में भी एनडीए ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक ने 9 एससी और 1 एसटी सीट जीती, जबकि पुडुचेरी में एनआर कांग्रेस ने 2 एससी सीटों पर जीत हासिल की. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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पीएफ से एक महीने में कितनी बार निकाल सकते हैं पैसा? EPFO...

Last Updated:May 06, 2026, 17:59 IST PF Withdrawal : पीएफ खाते में तो सभी नौकरीपेशा लोग निवेश करते हैं, लेकिन क्‍या आपको पता है कि इस खाते से महीने में कितनी बार पैसे निकाले जा सकते हैं. अगर आपने एक बार क्‍लेम कर दिया तो दूसरी बार पैसे निकालने के बीच में कितना अंतर होना जरूरी है. पीएफ से पैसे निकालने के लिए हर बार आपको कारण बताना जरूरी होता है. नई दिल्‍ली. कर्मचारी भविष्‍य निधि यानी पीएफ खाते में आपकी सैलरी से हर महीने मोटी रकम निवेश की जाती है. किसी इमरजेंसी में आप यहां से पैसे निकाल भी सकते हैं. इन खातों की देखरेख करने वाली संस्‍था ईपीएफओ ने अब पैसे निकालने की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है. साथ ही डॉक्‍यूमेंट की जरूरतों को भी कम कर दिया है. प्रोसेसिंग में लगने वाला समय भी अब बस कुछ ही दिनों का रह गया है, जो पहले 1 से 2 महीने तक जाता था. लेकिन, सवाल ये उठता है कि आखिर आप अपने पीएफ खाते से एक महीने में कितनी बार पैसा निकाल सकते हैं. दो बार निकासी के लिए कितना टाइम पीरियड होना जरूरी है. सबसे पहले आपको यह जवाब देते हैं कि ईपीएफ खाते से एक महीने में कितनी बार पैसे निकाल सकते हैं. दरअसल, ईपीएफओ ने इसके लिए कोई लिमिट नहीं तय की है. आप महीने में जितनी बार चाहें पैसे निकालने के लिए क्‍लेम कर सकते हैं. लेकिन, शर्त ये है कि पीएफ खाते से पैसे निकालने के लिए अलग-अलग कंडीशन है. यानी आपको पीएफ खाते में क्‍लेम करते समय इसका कारण भी बताना होगा. मसलन, आप बीमारी के लिए पैसे निकाल रहे हैं या फिर मकान खरीदने अथवा बच्‍चों की शादी या पढ़ाई के लिए. इन सभी कारणों के हिसाब से ही पीएफ खाते से पैसे निकालने की अनुमति दी जाती है. लिमिट से ज्‍यादा उद्देश्‍य बताना जरूरीपीएफ खाते से पैसे निकालने के लिए एक महीने में निकासी की कोई लिमिट तो नहीं है, लेकिन हर बार आपको उद्देश्‍य जरूर बताना होगा. बस इसी उद्देश्‍य की वजह से ही पीएफ निकासी पर लिमिट अपने आप तय हो जाती है. इसके लिए ईपीएफओ ने अपनी तरफ से कोई नियम नहीं बनाया है. लेकिन, एक बात का ध्‍यान जरूर रखना चाहिए कि अगर महीने में एक से ज्‍यादा क्‍लेम किया गया तो इनमें से सभी की प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है, क्‍योंकि एक बार के क्‍लेम के प्रोसेस में 3 से 20 दिन का समय लगता है. किस उद्देश्‍य के लिए कितनी बार निकासी Education : अगर आप पढ़ाई के लिए पीएफ खाते से पैसे निकालना चाहते हैं तो लाइफटाइम में 10 बार ही निकासी की जा सकती है. Marriage : शादी के लिए पीएफ खाते से लाइफटाइम 5 बार ही पैसे निकाले जा सकते हैं. Medical : इलाज के लिए पीएफ खाते से जितनी बार चाहें आप निकासी कर सकते हैं, चाहें तो एक महीने में ही कई क्‍लेम कर सकते हैं लेकिन आपको इलाज के डॉक्‍यूमेंट लगाने पड़ सकते हैं. Housing : अगर आप घर बनाने या रेनोवेशन के लिए पीएफ से पैसे निकालना चाहते हैं तो लाइफटाइम 1 बार ही निकासी की जा सकती है. नौकरी छूटने पर कैसे निकालें पैसाअगर किसी की नौकरी छूट जाती है तो उसके 1 महीने बाद आप अपने पीएफ खाते की कुल रकम का 75 फीसदी निकाल सकते हैं, जबकि दूसरे महीने में 100 फीसदी निकासी की जा सकती है. अगर आपकी सर्विस 5 साल से कम है तो इस निकासी पर टीडीएस भी देना होगा. हालांकि, यह ध्‍यान जरूर रखें कि किसी भी तरह की निकासी के लिए आपके पास कम से कम 12 महीने की नौकरी जरूर होनी चाहिए, तभी आप आंशिक निकासी कर सकते हैं. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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सिर्फ 1000 रुपये में बेटे के नाम ट्रांसफर हो जाएगा फ्लैट, अभी...

Last Updated:May 06, 2026, 16:59 IST Flat Transfer Fee : यूपी रेरा ने मकान खरीदारों और कानूनी उत्‍तराधिकारियों को बड़ी राहत दी है .रेरा के चेयरमैन ने बताया कि अभी तक बिल्‍डर और डेवलपर मकान मालिक की मौत के बाद उनके कानूनी उत्‍तराधिकारियों को संपत्ति ट्रांसफर करने के नाम पर लाखों रुपये वसूलते थे, लेकिन अब इसकी फीस अधिकतम 1,000 रुपये होगी. यूपी रेरा ने उत्‍तराधिकारियों के लिए संपत्ति ट्रांसफर फीस तय कर दी है. नई दिल्‍ली. उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने फ्लैट के मूल आवंटी की मृत्यु के बाद कानूनी उत्तराधिकारियों को फ्लैट ट्रांसफर करने के लिए अधिकतम शुल्क 1,000 रुपये तय किया है. इस फैसले से प्रदेश में घर खरीदारों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है. यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूरेड्डी ने बताया कि अब डेवलपर्स या प्रमोटर्स को मृत आवंटी के पति/पत्नी, बेटे या बेटी को फ्लैट ट्रांसफर करना अनिवार्य होगा, जिसके लिए केवल 1,000 रुपये का नाममात्र प्रोसेसिंग शुल्क लिया जाएगा. यूपी रेरा के 10 साल पूरे होने उन्होंने कहा कि अथॉरिटी को कई शिकायतें मिली थीं, जिनमें बिल्डर्स मनमाने शुल्क वसूल रहे थे. कई बार प्रति वर्ग फुट के हिसाब से भी, जिससे यह रकम लाखों रुपये तक पहुंच जाती थी. कुछ मामलों में शुल्क 200 रुपये से 1,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक था, जिससे कुल राशि 25–30 लाख रुपये हो जाती थी. यह अनुचित है, खासकर जब आवंटी ने फ्लैट की पूरी कीमत पहले ही चुका दी है. रेरा ने बदल दिए हैं नियमउन्होंने बताया कि इन शिकायतों के बाद, प्रशासनिक और मानक शुल्क से संबंधित रेगुलेशन 47 में संशोधन किया गया है, ताकि उत्तराधिकार या आवंटन ट्रांसफर के मामलों में प्रमोटर्स की ओर से वसूले जाने वाले शुल्क को नियंत्रित किया जा सके. संशोधित प्रावधानों के तहत रक्त संबंधों के भीतर कानूनी उत्तराधिकारियों को फ्लैट ट्रांसफर करने पर अधिकतम प्रोसेसिंग शुल्क 1,000 रुपये होगा. इससे राहत मिलेगी और मकान के उत्‍तराधिकारियों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा. क्‍या-क्‍या दस्‍तावेज जमा कराना होगाकानूनी उत्तराधिकारी को मृत्यु प्रमाण पत्र, सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों की अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे. परिवार के बाहर किसी व्यक्ति को फ्लैट ट्रांसफर करने पर प्रमोटर अधिकतम 25,000 रुपये शुल्क ले सकता है. ऐसे मामलों में कोई नई बिक्री विलेख या लीज एग्रीमेंट नहीं बनाई जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य बिल्डर्स की अनुचित प्रथाओं पर रोक लगाना और आवंटी की मृत्यु के बाद संपत्ति अधिकार ट्रांसफर की प्रक्रिया को पारदर्शी और स्‍टैंडर्ड बनाना है. प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा रियल एस्‍टेट कारोबारचेयरमैन ने बताया कि राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में लगातार वृद्धि हो रही है. आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 में 197 नए प्रोजेक्ट्स रजिस्टर हुए, साल 2024 में 259 और साल 2025 में 308 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर हुए, जिससे निवेशकों की भागीदारी बढ़ती दिख रही है. 2026 के पहले चार महीनों में ही 106 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 84 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर हुए थे. लखनऊ अब एनसीआर के बाहर सबसे तेज से बढ़ता प्रॉपर्टी बाजार बन गया है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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‘इस वकील को 24 घंटे जेल में रखो’, हाईकोर्ट जज की हरकत...

भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा मंजर देखा गया हो जब एक भरी अदालत में न्यायाधीश और वकील के बीच तल्खी इस कदर बढ़ जाए कि मामला सीधे जेल की सलाखों तक पहुंचाने की नौबत आ जाए. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक वायरल वीडियो ने देश के कानूनी गलियारों में भूचाल ला दिया है. माय लॉर्ड के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते एक युवा वकील और गुस्से से लाल न्यायमूर्ति टी. राजशेखर राव के बीच जो कुछ भी हुआ उसने अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर दस्तक दे दी है. तनाव इतना गहरा गया कि मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को खुद इस मामले की कमान संभालनी पड़ी है. सीजेआई जज को रिपोर्ट तलब करने पर मजबूर कर दिया. लुकआउट नोटिस से जुड़ा मामलायह मामला तब शुरू हुआ जब एक रिट याचिका (लुकआउट नोटिस और पासपोर्ट जब्त करने के खिलाफ) पर सुनवाई चल रही थी. महज 2 साल का अनुभव रखने वाले एक वकील के व्यवहार से नाराज होकर न्यायमूर्ति टी. राजशेखर राव ने उन्हें 24 घंटे की पुलिस हिरासत में भेजने का मौखिक आदेश दे दिया. कोर्टरूम में क्‍या कुछ हुआ? · विवाद की जड़: जज ने वकील के व्यवहार को अकर्मण्य यानी आलस्‍य से भरा  बताया. वीडियो में जज को यह कहते सुना जा सकता है कि वकील ने कोर्ट में बंडल (फाइल) फेंका और वरिष्ठ वकील की तरह व्यवहार करने की कोशिश की. · जज की कड़ी टिप्पणी: न्यायमूर्ति राव ने कहा, “अभी आपके पास 10 साल का अनुभव भी नहीं है और आप बंडल फेंक रहे हैं? अब आपको दर्द महसूस होगा.” उन्होंने रजिस्ट्रार को तत्काल हिरासत का आदेश जारी करने का निर्देश दिया. · वकील की माफी: अधिवक्ता हाथ जोड़कर माफी मांगते रहे और दया की भीख मांगते दिखे लेकिन जज ने उन्हें बार काउंसिल जाकर धरना देने की नसीहत दे डाली. · CJI का हस्तक्षेप: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की. जिसके बाद CJI ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. एसोसिएशन का हस्तक्षेप और आदेश की वापसी जैसे ही यह खबर फैली आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारी न्यायाधीश के चैंबर में पहुंचे. उनके अनुरोध के बाद न्यायमूर्ति राव ने लिखित आदेश पर हस्ताक्षर होने से पहले ही अपना निर्देश वापस ले लिया. सवाल-जवाब कोर्ट में ‘इंडोलेंट’ (Indolent) व्यवहार का क्या अर्थ है? कानूनी संदर्भ में इसका अर्थ है कि वकील ने अदालत की गरिमा के प्रति लापरवाही दिखाई या अदालत की कार्यवाही के दौरान सुस्त और अपमानजनक आचरण किया. इस मामले में जज ने वकील द्वारा फाइल फेंकने और बहस के दौरान अनुशासनहीनता को इंडोलेंट व्यवहार माना. क्या कोई जज किसी वकील को सीधे पुलिस हिरासत में भेज सकता है? न्यायाधीशों के पास ‘अवमानना’ की स्थिति में कार्यवाही करने की शक्ति होती है. हालांकि, पुलिस हिरासत का आदेश अत्यंत दुर्लभ और विवादास्पद है. बार काउंसिल का मानना है कि ऐसे मुद्दों को बार काउंसिल के अनुशासनात्मक तंत्र के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए, न कि हिरासत के जरिए. इस मामले में वर्तमान स्थिति क्या है? फिलहाल वह आदेश वापस ले लिया गया है और वकील को हिरासत में नहीं लिया गया. हालांकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया की शिकायत पर CJI सूर्यकांत ने रिपोर्ट मांगी है, जिससे यह मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है. Source link

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भारत के निवेश से US में पैदा हो रहीं नौकरियां, डोनाल्ड ट्रंप...

Last Updated:May 06, 2026, 14:43 IST अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अमेर‍िका में भारतीय कंप‍न‍ियों के न‍िवेश को लेकर बड़ी जानकारी साझा की है. उन्‍होंने कहा क‍ि भारतीय कंपनियां यूएस में 20.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश करेंगी. डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से नौकरियां और सप्लाई चेन मजबूत हो रही हैं. भारतीय कंपन‍ियों के न‍िवेश से अमेर‍िका में बढ़ रहीं नौकर‍ियां. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर Sergio Gor on Indian Investment in US: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अमेरिका में भारतीय निवेश को लेकर बड़ी जानकारी दी है. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि यूएस में भारत से करीब 20.5 बिलियन डॉलर निवेश की योजना है. भारतीय रुपयों में देखें तो करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश भारतीय कंपन‍ियां अमेर‍िका में कर रही हैं. सर्जियो गोर का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर निवेश वापस आ रहा है. खासतौर पर यह निवेश भारतीय कंपनियों की ओर से किया जा रहा है और इससे बड़ी संख्या में देश नौकरियां पैदा हो रही हैं. गोर ने कहा, ‘भारतीय कंपनियां टेक, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स समेत कई सेक्टर में $20.5 बिलियन से अधिक निवेश की योजना बना रही हैं. आज ही 12 भारतीय कंपनियों ने $1.1 बिलियन के निवेश की घोषणा की है.’ उन्होंने कहा कि भारत के साथ इन साझेदारियों से अमेरिका में वास्तविक नौकरियां पैदा हो रही हैं. इतना ही नहीं सप्लाई चेन पहले से ज्यादा मजबूत बन रही है. दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र जब साथ मिलकर काम करते हैं, तो सभी को फायदा होता है. बता दें कि SelectUSA Summit में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी को अब तक का सबसे बड़ा बताया जा रहा है. अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अधिकारी विलियम किमिट ने भी इसे ‘एक ही प्रतिनिधिमंडल से अब तक की सबसे बड़ी घोषणाएं’ करार दिया था. वहीं अब सर्जियो गोर का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर निवेश वापस आ रहा है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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‘मुख्यमंत्री हर वक्त नशे में डूबा रहेगा तो…अमृतसर-जालंधर धमाकों के बाद विपक्ष...

Last Updated:May 06, 2026, 13:47 IST पंजाब के अमृतसर और जालंधर बम धमाकों के बाद विपक्ष ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर हमला बोला है. श‍िरोमण‍ि अकाली दल ने सीएम भगवंत मान पर नशे में रहने और कानून व्यवस्था व राष्ट्रीय सुरक्षा में विफल रहने के आरोप लगाए हैं. पंजाब में ब्‍लास्‍ट के बाद सीएम भगवंत मान पर व‍िपक्ष का हमला, कहा नशे में डूबा रहेगा सीएम तो कैसे सुरक्षि‍त होगी कानून व्‍यवस्‍था. Amritsar-Jalandhar Blasts: पंजाब के अमृतसर और जालंधर में धमाकों के बाद विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पर जबर्दस्त हमला बोला है. विपक्ष के नेताओं ने सीएम भगवंत मान को नशे में डूबा रहने वाला मुख्यमंत्री कहा है. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार आपसी विवादों में अधिक फंसी रहती है और ये धमाके बता रहे हैं कि भगवंत मान मुख्यमंत्री के तौर पर विफल हैं. शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “मैं इन धमाकों की कड़ी निंदा करता हूं. लेकिन सच्चाई यह है कि यह पंजाब सरकार के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (जागने का संकेत) है. हमारे मुख्यमंत्री, भगवंत मान जी, हर समय नशे में रहने के आदी हो गए हैं. पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य के मुख्यमंत्री, जिसकी 550 किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान से लगती है, जहां पाकिस्तान बार-बार अशांति फैलाने और शांति भंग करने की कोशिश करता रहता है, अगर ऐसे राज्य का मुख्यमंत्री हर समय नशे में डूबा रहेगा, तो वह कानून-व्यवस्था को कैसे संभाल पाएगा?” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब में हालात ऐसे हैं कि जालंधर में धमाका हुआ. पुलिस अधिकारी कहते हैं कि स्कूटरी की बैट्री में ब्लास्ट हुआ, जबकि ‘खालिस्तान लिबरेशन आर्मी’ ने धमाके की जिम्मेदारी भी ली है. ब्लास्ट इतना बड़ा था कि कई किलोमीटर तक उनकी आवाज सुनाई दी. यह पंजाब पुलिस की इंटेलिजेंस की विफलता है कि बीएसएफ चौक के पास धमाका हुआ, जो जगह जालंधर का दिल कही जाती है.” वहीं, कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने कहा कि पंजाब एक संवेदनशील राज्य है. इतिहास में देखा जा सकता है कि पंजाब में अक्सर किस तरह से धमाके हुए हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब की सरकार को सबसे पहले केंद्र के साथ मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर काम करना चाहिए. अभिषेक दत्त ने आगे कहा, “यह भी सच है कि पंजाब की सरकार आपसी विवादों में अधिक फंसी रहती है. कभी पंजाब के मुख्यमंत्री के ऊपर शराब पीकर विधानसभा जाने के आरोप लगते हैं, कभी उनके 7-7 राज्यसभा सांसद भाग हो जाते हैं. अभी यह लगता है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार भी गिरने वाली है. कहीं न कहीं भगवंत मान मुख्यमंत्री के तौर पर विफल हुए हैं. न उनके सांसद उनके बस में हैं और न राज्य की कानून व्यवस्था.” About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Amritsar,Amritsar,Punjab Source link

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हिमंता बिस्वा सरमा का दावा- 19 से 6 कांग्रेस विधायक मेरे दोस्त,...

होमताजा खबरदेश हिमंता बिस्वा सरमा का दावा- 19 से 6 कांग्रेस विधायक मेरे दोस्त, मचा हाहाकार Last Updated:May 06, 2026, 12:38 IST Himanta Biswa Sarma News: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के दावे से कांग्रेस पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ गई है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस के विजयी हुए 19 में से 6 विधायक उनके अच्छे दोस्त हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में ये विधायक उनके पक्ष में वोट देंगे. इससे कांग्रेस पार्टी में बेचैनी बढ़ गई है. असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के एक दावे से कांग्रेस की बेचैनी बढ़ गई है. Himanta Biswa Sarma News:  असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका देते हुए दावा किया है कि राज्य में कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए 19 विधायकों में से छह उनके बेहद करीबी दोस्त हैं. सरमा ने कहा कि ये छह विधायक राष्ट्रपति चुनाव के समय उनके पक्ष में वोट करेंगे. एनडीटीवी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में हिमंता बिस्वा सरमा ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने कहा- मैं कांग्रेस पार्टी में 22 साल तक रहा हूं. इन्हीं नेताओं की मैंने राजनीतिक परवरिश की है. ये मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं. जब देश में राष्ट्रपति चुनाव होगा, तो आप देखेंगे कि ये छह विधायक मेरे पक्ष में वोट करेंगे. यह कोई माइंड गेम नहीं है, बल्कि सच्चाई है. एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ये छह कांग्रेस विधायक उनसे व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से बेहद करीब रहे हैं. उन्होंने कहा कि असम कांग्रेस में लंबे समय तक काम करने के दौरान उन्होंने इन नेताओं को तराशा और आगे बढ़ाया. अब जब कांग्रेस इन चुनावों में कुछ सफलता हासिल कर पाई है, तब भी हिमंता का दावा है कि पार्टी के अंदर उनकी पहुंच बनी हुई है. राजनीतिक हलचलअसम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 19 सीटें जीती हैं. कांग्रेस यह बेहद खराब प्रदर्शन है. हालांकि हिमंता बिस्वा सरमा का यह बयान कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गया है. अगर उनके दावे में सच्चाई है तो राष्ट्रपति चुनाव जैसे महत्वपूर्ण मौके पर कांग्रेस को अपने ही विधायकों से बड़ा झटका लग सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमंता बिस्वा सरमा असम में भाजपा की रणनीति को मजबूत करने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं. वे कांग्रेस को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. सरमा ने पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी हैं और उन्हें अपनी टीम में शामिल किया है. सरमा का कांग्रेस से नाताहिमंता बिस्वा सरमा असम कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस में लंबा समय बिताया और बाद में भाजपा जॉइन कर ली. 2021 में भाजपा की भारी जीत के बाद वे असम के मुख्यमंत्री बने. तब से वे राज्य में भाजपा की पकड़ को मजबूत करने में लगे हुए हैं. सरमा के इस दावे पर कांग्रेस की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि पार्टी के कुछ नेता इसे माइंड गेम और भ्रम फैलाने की कोशिश बता रहे हैं. कांग्रेस का कहना है कि उनके विधायक पार्टी की लाइन पर चलेंगे और किसी भी तरह की बगावत नहीं होगी. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Tamilnadu Vijay Government Live: DMK-कांग्रेस में खींचीं तलवारें, TVK के विधायक रिसॉर्ट...

Last Updated:May 06, 2026, 11:34 IST Tamilnadu Vijay Government Live: तमिलनाडु में थलापति विजय की टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है. राज्य में कांग्रेस के 5 विधायक हैं. अब विजय कांग्रेस के समर्थन से राज्य में सरकार बनाने की कोशिश कर …और पढ़ें तमिलनाडु में कांग्रेस टीवीके को समर्थन दे सकती है. Tamilnadu Vijay Government Live: तमिलनाडु की पूरी राजनीति ने करवट बदल दी है. थलापति विजय की पार्टी टीवीके की जीत ने राज्य में करीब छह दशक से चल रहे राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है. राज्य में अब विजय की पार्टी टीवीके की सरकार बनने जा रही है. वह भी कांग्रेस के सहयोग से. अभिनेता से राजनेता बने विजय की टीवीके तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. उसने 108 सीटें जीतकर सरकार बनाने का दावा किया है और कांग्रेस के समर्थन से सरकार गठन की तैयारी शुरू कर दी है. इस जीत के साथ तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव आ गया है. डीएमके और एआईएडीएम जैसे पुराने दलों को अब विपक्ष में बैठना पड़ेगा. टीवीके के सबसे बड़े नेता और अभिनेता विजय ने चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद राज्यपाल राजेंद्र अरलेकर को पत्र लिखकर सरकार बनाने का निमंत्रण मांगा है. पत्र में विजय ने कहा है कि उनकी पार्टी दो सप्ताह के अंदर सदन में बहुमत साबित कर देगी. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला कर लिया है. कांग्रेस ने इस चुनाव में पांच सीटें जीती हैं. कांग्रेस ने समर्थन के बदले दो कैबिनेट पदों की मांग की है. टीवीके और कांग्रेस के गठबंधन के बावजूद अभी बहुमत के लिए पांच और सीटें चाहिए. बहुमत का आंकड़ा 118 सीटों का है. वर्तमान में भाकपा और माकपा जैसे वामपंथी दल भी टीवीके को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने विजय की तरफ से औपचारिक संवाद का इंतजार किया है. अगर वाम दल भी साथ आए तो टीवीके आसानी से सरकार बना लेगी. यह जीत विजय और उनकी नई पार्टी टीवीके के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है. कुछ साल पहले तक फिल्मों में व्यस्त रहे विजय ने राजनीति में कदम रखते ही तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह हिला दिया है. टीवीके की इस शानदार सफलता को उनकी लोकप्रियता और युवाओं-मध्यम वर्ग के बीच मजबूत अपील का नतीजा बताया जा रहा है. Tamilnadu Vijay Government Live: तमिलनाडु में DMK के खिलाफ जनादेश… कांग्रेस ने निकाली तलवार, विजय की राह हुई आसान Tamilnadu Vijay Government Live: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों पर कांग्रेस ने साफ कहा है कि जनादेश डीएमके सरकार के खिलाफ गया है. इसमें उसकी कोई गलती नहीं है. बावजूद इसके उसको नुकसान उठाना पड़ा है. कांग्रेस सांसद माणिक्कम टैगोर एक्स पर लिखा है कि डीएमके सरकार के खिलाफ जनादेश गया है. कैबिनेट के आधे से ज्यादा मंत्री अपनी सीटें हार गए. हम बिना किसी गलती के नुकसान के शिकार हुए हैं. अब भाजपा तमिलनाडु पर नजर गड़ाए हुए है. हमारे सामने सवाल साफ है- क्या हम उन लोगों के साथ खड़े हों जिन्हें जनता ने ठुकरा दिया या भाजपा के खिलाफ लड़ने वाली ताकत टीवीके के साथ मिलकर भाजपा को सत्ता से दूर रखें? कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह विजय की टीवीके के साथ मिलकर भाजपा को तमिलनाडु में सरकार बनाने से रोकने की रणनीति पर विचार कर रही है. पार्टी का मानना है कि डीएमके की हार के बावजूद उसे अनावश्यक रूप से नुकसान उठाना पड़ा. The verdict has gone against the DMK government. Half the ministers in the Cabinet have lost their seats. We faced collateral damage for no fault of ours. Now, BJP is eyeing Tamil Nadu. The question before us is clear: Should we stand with those rejected by the people’s verdict,… — Manickam Tagore .B🇮🇳மாணிக்கம் தாகூர்.ப (@manickamtagore) May 6, 2026 Tamilnadu Vijay Government Live: टीवीके के सभी 108 विधायक होटल में शिफ्ट Tamilnadu Vijay Government Live: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने वाली एक्टर विजय की पार्टी टीवीके ने अपने सभी 108 विधायकों को महाबलीपुरम के चेंगलपट्टू के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है. इस बीच टीवीके अन्य दलों के साथ समर्थन को लेकर बातचीत कर रही है. इसमें कांग्रेस और वाम दल प्रमुख हैं. टीवीके को सरकार बनाने के लिए कम से कम और 10 विधायकों की जरूरत है. #WATCH | Tamil Nadu | TVK has lodged its 108 MLAs-elect at a hotel in Chengalpattu, Mahabalipuram, as it tries to garner support from other parties to gain majority for government formation pic.twitter.com/fXJgXQB884 — ANI (@ANI) May 6, 2026 Tamilnadu Vijay Government Live: कांग्रेस ने पहले ही टीवीके को समर्थन की घोषणा कर चुकी है Tamilnadu Vijay Government Live: कांग्रेस ने पहले ही विजय की टीवीके को समर्थन देने की घोषणा कर दी है. अगर कांग्रेस टीवीके के साथ पूर्ण गठबंधन करती है तो इसका मतलब डीएमके के साथ उसके पुराने गठबंधन से अलगाव होगा. कांग्रेस की यह रणनीति तमिलनाडु में भाजपा और एआईएडीएमके गठबंधन को रोकने की साफ कोशिश के रूप में देखी जा रही है. टीवीके विधानसभा चुनाव में 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कांग्रेस के समर्थन के साथ टीवीके सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. अभी यह देखना बाकी है कि कांग्रेस अंतिम रूप से टीवीके के साथ कितना गहरा गठबंधन करती है और डीएमके के साथ उसके संबंधों पर क्या असर पड़ता है. Tamilnadu Vijay Government Live: बीजेपी को सरकार से दूर रखना हमारा लक्ष्य, TVK के साथ गठबंधन पर बोली कांग्रेस Tamilnadu Vijay Government Live: कांग्रेस ने तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि उसका मुख्य उद्देश्य भाजपा को सत्ता में आने से रोकना है. पार्टी ने टीवीके के साथ गठबंधन पर विचार करते हुए कहा कि राज्य इकाई स्थिति के अनुसार फैसला लेगी. पार्टी ने कहा कि हम अपने विकल्प तलाश रहे हैं. राज्य इकाई स्थिति और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गठबंधन का फैसला करेगी. हमारा लक्ष्य सेकुलर पार्टियों को एकजुट करना है और टीवीके उनमें से एक है. हमारा मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भाजपा तमिलनाडु में सरकार में न आ पाए. इसी के लिए हम

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