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ममता बनर्जी के बाद अब उद्धव ठाकरे की बारी…’ऑपरेशन टाइगर’ के नाम...

Last Updated:June 14, 2026, 11:52 IST Maharashtra Politics: 8 जून 2026 को देश की राजधानी दिल्‍ली में इंडिया गठबंधन के घटक दलों की अहम बैठक हुई. पश्मि बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की करारी हार का साया इस मीटिंग में साफतौर पर दिखा. टीएमसी में टूट से जूझ रहीं ममता बनर्जी ने पहली बार खुले तौर पर कांग्रेस के लीडरशिप को स्‍वीकार किया. बंगाल में चल रहा राजनीतिक घमासान अभी थमा भी नहीं कि महाराष्‍ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की गूंज सुनाई देने लगी है. अपने सांसदों को पार्टी में जोड़कर रखने के लिए उद्धव ठाकरे मातोश्री में आज अहम बैठक करने जा रहे हैं. महाराष्‍ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा ने जोर पकड़ रखी है. उद्धव ठाकरे ने किसी भी तरह की टूट से अपनी पार्टी को बचाने के लिए सभी 9 सांसदों की मातोश्री में बैठक बुलाई है. (फाइल फोटो/Reuters) Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को लेकर लगातार चल रही अटकलों के बीच अब शिवसेना (यूबीटी) भी संभावित टूट चर्चाओं के केंद्र में आ गई है. ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम से चर्चित राजनीतिक कवायद की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने सभी 9 सांसदों को रविवार को मातोश्री में तलब किया है. इस बैठक को महज एक नियमित संगठनात्मक समीक्षा नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी और संभावित राजनीतिक संकट से जोड़कर देखा जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के 7 सांसदों के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की चर्चाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. यही वजह है कि उद्धव ठाकरे ने सभी सांसदों को मातोश्री पहुंचने का निर्देश दिया है. जो सांसद किसी कारणवश मौजूद नहीं हो पाएंगे, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल किया जाएगा. दरअसल, महाराष्ट्र में 2022 में शिवसेना के विभाजन और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से उद्धव ठाकरे लगातार संगठन को एकजुट रखने की चुनौती का सामना कर रहे हैं. ऐसे में यदि सांसदों के स्तर पर भी किसी प्रकार की असंतुष्टि या संपर्क की खबरें सामने आती हैं तो उसका राजनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है. मातोश्री में बैठक डर का नतीजा? हालांकि, पार्टी नेतृत्व इन अटकलों को सार्वजनिक तौर पर खारिज कर रहा है. शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि सांसदों की बैठक पार्टी की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है. उनके मुताबिक जिस तरह समय-समय पर विधायकों की बैठकें होती हैं, उसी तरह सांसदों के साथ भी संगठनात्मक चर्चा की जाती है. राउत ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों से ऑपरेशन टाइगर की बातें की जा रही हैं, लेकिन ऐसा कोई अभियान अब तक अस्तित्व में नहीं आया. इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि यदि सब कुछ सामान्य है तो फिर अचानक सभी सांसदों की बैठक बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल उपस्थिति दर्ज कराने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांसदों की निष्ठा और संगठनात्मक प्रतिबद्धता को परखने का अवसर भी हो सकती है. एकनाथ शिंदे की पार्टी ने किसी भी तरह का ऑपरेशन चलाने की बात से इनकार किया है. हालांकि, पार्टी नेता का कहना है कि उद्धव गुट के कई नेता उनके संपर्क में हैं. शिवसेना के कई सांसद शिंदे के संपर्क में! दूसरी ओर, शिंदे गुट भी इन चर्चाओं को पूरी तरह नकार नहीं रहा है. शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट ने कहा है कि उनकी ओर से कोई ऑपरेशन टाइगर नहीं चलाया जा रहा, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) के कई नेता और सांसद विकास कार्यों तथा अन्य मुद्दों को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी नेता या सांसद के पार्टी में आने का सवाल उठता है तो अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख एकनाथ शिंदे ही करेंगे. उद्धव ठाकरे के नेतृत्‍व की परीक्षा उधर, शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भाजपा और महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑपरेशन टाइगर की बातें 2024 से सुनाई जा रही हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्ण बहुमत वाली सरकार को विपक्षी दलों को तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है. महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रम को देखते हुए किसी भी तरह की राजनीतिक अटकल को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि मातोश्री में होने वाली यह बैठक सिर्फ एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व की पकड़ और सांसदों की एकजुटता की परीक्षा के रूप में भी देखी जा रही है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ऑपरेशन टाइगर केवल राजनीतिक अफवाह है या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में किसी नए समीकरण की प्रस्तावना. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mumbai,Maharashtra Source link

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NIT vs IIT Fees Refund Rules: पहले मिला NIT, फिर पक्का हुआ...

Last Updated:June 14, 2026, 10:50 IST NIT vs IIT Fees Refund Rules: अगर जोसा काउंसलिंग में पहले NIT में सीट मिली और बाद में एडमिशन IIT में पक्का हो गया तो क्या NIT की फीस वापस मिलेगी? जानिए सीट अपग्रेड होने पर फीस ट्रांसफर और रिफंड से जुड़े जोसा (JoSAA) के सभी जरूरी और आसान नियम. NIT vs IIT Fees Refund Rules: एनआईटी और आईआईटी की फीस का अंतर बैलेंस कर दिया जाता है नई दिल्ली (Fees Refund Rules). इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के लिए जोसा (JoSAA) काउंसलिंग किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं होती. कई बार शुरुआती राउंड्स में स्टूडेंट्स को किसी बेहतरीन एनआईटी में सीट मिल जाती है और वे फीस जमा करके सीट लॉक कर लेते हैं. फिर आगे के राउंड्स में उन्हें IIT में सीट अलॉट हो जाती है. आईआईटी मिलने की खुशी तो सातवें आसमान पर होती है, लेकिन इसके ठीक बाद एक सवाल सामने आता है- NIT में जमा की गई लाखों की फीस का क्या होगा? क्या रिफंड मिलेगा? अगर आपके मन में भी यही उलझन चल रही है तो घबराइए मत. जोसा का सिस्टम स्टूडेंट्स की सहूलियत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. नियम स्पष्ट है कि सीट अपग्रेड होने पर फीस सुरक्षित रहती है. हालांकि, रिफंड और फीस ट्रांसफर की यह प्रक्रिया इस पर निर्भर करती है कि आपकी सीट काउंसलिंग के किस चरण में बदली है. जानिए एनआईटी से आईआईटी में ट्रांसफर होने पर फीस वापस कैसे आती है और किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए. जोसा काउंसलिंग के दौरान: ऑटोमैटिक फीस ट्रांसफर का जादू अगर सीट अपग्रेडेशन JoSAA के रेगुलर राउंड्स के बीच हो जाता है तो रिफंड के लिए कहीं चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. जोसा का ऑनलाइन पोर्टल सेंट्रलाइज्ड होता है. इसका मतलब है कि जब आप एनआईटी की सीट मिलने पर ‘Seat Acceptance Fee’ (SAF) या ‘Partial Admission Fee’ (PAF) जमा करते हैं और बाद में आईआईटी मिल जाता है तो वह पैसा ऑटोमैटिकली आईआईटी के खाते में एडजस्ट कर दिया जाता है. आपको सिर्फ दोनों कॉलेजों की फीस का अंतर (अगर IIT की फीस ज्यादा है तो) जमा करना होगा. काउंसलिंग से खुद हटने (Withdraw) पर क्या हैं नियम? कई बार स्टूडेंट्स जोसा के आखिरी राउंड से पहले अपनी एनआईटी की सीट को खुद सरेंडर या Withdraw करने का फैसला लेते हैं, जिससे वे दूसरे ऑप्शन की तरफ जा सकें. अगर आप जोसा की तय समय-सीमा (Withdrawal Window) के अंदर पोर्टल पर जाकर सीट छोड़ते हैं तो जोसा महज 2,000 से 7,000 रुपये के बीच की प्रोसेसिंग फीस काटता है. इसके बाद बची हुई पूरी रकम उसी बैंक खाते में वापस (Refund) भेज दी जाती है, जिसकी डिटेल आपने काउंसलिंग फॉर्म भरते समय दी थी. कॉलेज शुरू होने के बाद सीट छोड़ना: यहां बदल जाते हैं नियम असली पेंच तब फंसता है जब आप एनआईटी में जाकर फिजिकल रिपोर्टिंग कर चुके होते हैं, वहां के हॉस्टल और सेमेस्टर की फीस भर चुके होते हैं और उसके बाद एडमिशन आईआईटी में तय होता है. ऐसे मामलों में जोसा की भूमिका खत्म हो जाती है और सीधे एनआईटी के नियम लागू होते हैं. यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) और AICTE की गाइडलाइंस के अनुसार, अगर क्लासेस शुरू होने या एडमिशन की लास्ट डेट से पहले सीट छोड़ते हैं तो कॉलेज को प्रोसेसिंग फीस काटकर आपकी बाकी रकम लौटानी होगी. रिफंड पाने के लिए इन 3 बातों का रखें ख्याल एनआईटी से अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई वापस पाने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे: डेडलाइन न भूलें: जोसा के पोर्टल पर सीट विथड्रॉ करने की आखिरी तारीख पर नजर रखें. अंतिम राउंड के बाद जोसा रिफंड नहीं देता. एनआईटी एडमिशन सेल से संपर्क: अगर मामला कॉलेज स्तर का है तो तुरंत एनआईटी की वेबसाइट से ‘Fee Refund Form’ डाउनलोड करें और उसे सही बैंक डिटेल्स के साथ जमा करें. डॉक्यूमेंट्स संभालकर रखें: अपने सभी अलॉटमेंट लेटर, फीस की रसीदें और कैंसिल्ड चेक को हमेशा तैयार रखें. रिफंड की अर्जी लगाते समय इनकी सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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फरीदाबाद की देवाश्रय गौशाला, जहां बेजुबानों को मिलता है नया जीवन और...

फरीदाबाद: फरीदाबाद में अब घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं को समय पर इलाज और सुरक्षित आश्रय मिलने की सुविधा उपलब्ध है. इससे न केवल बेजुबान जानवरों की जान बच रही है बल्कि आम लोगों को भी राहत मिल रही है. सड़क पर घायल पशुओं की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के साथ-साथ यह पहल आसपास के गांवों की महिलाओं और दिव्यांग बच्चों को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर भी दे रही है. साल 2021 में हुई थी देवाश्रय गौशाला की स्थापना Local18 से बातचीत में फरीदाबाद सर्वोदय हॉस्पिटल की मैनेजिंग डायरेक्टर अंशु गुप्ता बताती हैं कि यह देवाश्रय गौशाला वर्ष 2021 में शुरू की गई थी. इसका उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने किया था. अंशु गुप्ता बताती हैं उनकी सहायता से ही इस परियोजना की शुरुआत हुई. आज यहां करीब 80 लोग काम कर रहे हैं. गांव की महिलाओं को मिला रोजगार अंशु गुप्ता बताती हैं आसपास के गांवों की महिलाओं को रोजगार दिया गया है जिससे वे अपनी आजीविका चला रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं. अंशु गुप्ता बताती हैं कई ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं जहां किसी गाय के बछड़े पर वाहन चढ़ गया या कोई पशु गंभीर रूप से घायल हालत में सड़क किनारे पड़ा था. ऐसी स्थिति में लोगों के पास कोई व्यवस्था नहीं होती थी कि वे किसे फोन करें और पशु को मदद कैसे मिले. अंशु गुप्ता बताती हैं तभी उन्हें महसूस हुआ कि ऐसी व्यवस्था की बहुत जरूरत है और इसी सोच के साथ देवाश्रय एनिमल हॉस्पिटल की शुरुआत की गई. देवाश्रय एनिमल हॉस्पिटल में हैं ढेरों सुविधाएं अंशु गुप्ता बताती हैं अस्पताल में 24 घंटे रेस्क्यू टीम, कॉल सेंटर, एम्बुलेंस और डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं. कहीं से भी घायल या बीमार पशु की सूचना मिलने पर टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है और पशु को अस्पताल लाकर उसका इलाज करती है. अंशु गुप्ता बताती हैं यहां ओपीडी से लेकर सर्जरी और पुनर्वास तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं. अंशु गुप्ता बताती हैं मेरा उद्देश्य शहर में ऐसी व्यवस्था बनाना है जहां हर घायल और बीमार पशु को समय पर और उचित उपचार मिल सके. अंशु गुप्ता बताती हैं आने वाले समय में मैं पशुओं के लिए एक बड़े तपोवन जैसी व्यवस्था विकसित करना चाहती हैं जहां उन्हें सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके. अंशु गुप्ता बताती हैं इस समय गौशाला में करीब 350 गायों की देखभाल की जा रही है. इसके अलावा यहां कुत्ते, बंदर और अन्य कई बेजुबान पशु भी हैं. अंशु गुप्ता बताती हैं कुल मिलाकर लगभग 400 पशु यहां आश्रय और उपचार प्राप्त कर रहे हैं. अंशु गुप्ता बताती हैं मेरी सोच सिर्फ पशुओं की सेवा तक सीमित नहीं है. मैंने यहां एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसमें पशुओं की देखभाल के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. रेस्क्यू किए गए पशुओं को आश्रय, चारा और पानी उपलब्ध कराया जाता है वहीं गाय के गोबर से कई तरह के उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं. गौशाला में दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षण अंशु गुप्ता बताती हैं गौशाला में दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और भविष्य में अपना काम शुरू कर सकें. अंशु गुप्ता बताती हैं आसपास के गांवों की महिलाओं को भी प्रशिक्षण दिया जाता है. ये महिलाएं गोबर से बने उत्पाद तैयार करती हैं और इसके बदले उन्हें रोजगार भी दिया गया है. अंशु गुप्ता बताती हैं मेरा प्रयास एक ऐसी इकोनॉमी तैयार करना है जो पशुओं के संरक्षण और रोजगार दोनों को साथ लेकर चले. अंशु गुप्ता बताती हैं गौशाला में एकत्र होने वाले गोबर से जैविक खाद, गोबर की लकड़ी और अन्य कई उत्पाद बनाए जाते हैं. इसके अलावा इको-फ्रेंडली पेंट भी तैयार किया जा रहा है. इससे होने वाली आय को पशुओं की देखभाल और उपचार पर खर्च किया जाता है. 3 एकड़ में फैली है गौशाला अंशु गुप्ता बताती हैं यह गौशाला करीब तीन एकड़ जमीन में फैली हुई है. अंशु गुप्ता बताती हैं यहां एक तरफ अत्याधुनिक पशु अस्पताल है जबकि दूसरी तरफ हेल्दी विंग और गोबर आधारित उत्पाद तैयार करने के लिए प्लांट लगाया गया है. अंशु गुप्ता बताती हैं यहां तैयार होने वाले उत्पादों और अन्य गतिविधियों से मिलने वाली आय का उपयोग बेजुबान पशुओं की सेवा और देखभाल में किया जाता है. Source link

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अमेरिका से मिला धोखा तो चट्टान की तरह भारत संग खड़ा हुआ...

India-France Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 12 साल के कार्यकाल में 7वीं बार फ्रांस दौरे पर हैं. इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने 10 साल के कार्यकाल में चार बार पेरिस का दौरा किया. उनसे पहले अटल बिहार वाजपेयी बतौर प्रधानमंत्री अपने करीब छह साल के कार्यकाल में दो बार फ्रांस गए. इस बीच वर्ष 2000 से अब तक नौ बार फ्रांसीसी राष्ट्रपतियों ने भारत का आधिकारिक दौरा किया. इसमें मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 2018 से अब तक चार बार भारत का दौरा कर चुके हैं. दोनों देशों के बीच ये उच्च स्तरीय दौरे यूं नहीं हुए हैं. दोनों के बीच भरोसा बनाने में दशकों का समय लगा है. तब जाकर भारत और फ्रांस इस मोड़ पर पहुंचे हैं. दोनों देशों के बीच रिश्तों को इस मोड़ पर पहुंचाने में एक सबसे अहम भूमिका 1998 की घटना की रही जब अमेरिका, कनाडा, जापान सहित तमाम बड़े यूरोपीय देशों ने भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगा दिए लेकिन फ्रांस एक सच्चे मित्र की तरह सीना तानकर नई दिल्ली के साथ खड़ा रहा. इस परीक्षा में तपकर भारत और फ्रांस की दोस्ती अटूट बन गई. दरअसल, मई 1998 का समय था. राजस्थान के पोखरण का तपता रेगिस्तान. धरती के नीचे कुछ ऐसा हुआ जिसने दुनिया की भू-राजनीति को झकझोर दिया. भारत ने पांच परमाणु परीक्षण कर खुद को खुले तौर पर परमाणु शक्ति घोषित कर दिया. नई दिल्ली में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वाभिमान का क्षण माना गया, लेकिन वाशिंगटन, टोक्यो और कई पश्चिमी राजधानियों में इसे चुनौती के रूप में देखा गया. उस वक्त देश की बागडोर अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों में थी. कुछ ही दिनों में अमेरिका ने प्रतिबंधों की झड़ी लगा दी. आर्थिक सहायता रोकने से लेकर तकनीकी सहयोग सीमित करने तक कई कदम उठाए गए. जापान, कनाडा और कुछ अन्य देशों ने भी भारत से दूरी बनानी शुरू कर दी. ऐसा लग रहा था कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अकेला पड़ जाएगा. लेकिन, इसी कठिन दौर में यूरोप से एक ऐसी आवाज उठी जिसने भारत को यह एहसास कराया कि सभी पश्चिमी देश एक जैसी सोच नहीं रखते. वह आवाज फ्रांस की थी. जब दुनिया सजा देने पर उतारू थी पोखरण-2 के बाद अधिकांश पश्चिमी देशों का तर्क था कि भारत को उसके फैसले की कीमत चुकानी चाहिए. भारत पर वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को चुनौती देने के आरोप लगाए जा रहे थे. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही थी. तभी फ्रांस भारत के साथ खड़ा हो गया. तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने साफ संकेत दिया कि भारत को अलग-थलग करना समाधान नहीं है. पेरिस का मानना था कि भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझे बिना केवल प्रतिबंध की भाषा बोलना व्यावहारिक नहीं होगा. फ्रांस ने यह भी महसूस किया कि दक्षिण एशिया की जटिल सुरक्षा परिस्थितियों को यूरोप के नजरिए से नहीं समझा जा सकता. यह वह समय था जब भारत का एक पड़ोसी पाकिस्तान परमाणु चाहत रखता था और दूसरी ओर पहले से परमाणु शक्ति बन चुका चीन था. वर्ष 2013 में नई दिल्ली राष्ट्रपति फ्रांस्क्वा ओलांद के साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. फोटो- रायटर भारत के खिलाफ गोलबंदी वर्ष 1998 में भारत के परमाणु परीक्ष के बाद ब्रिटेन के बर्मिंघम में जी-8 शिखर सम्मेलन आयोजित हुई. उस बैठक में भारत के खिलाफ कड़े सामूहिक रुख की चर्चा हुई. अमेरिका और उसके कुछ सहयोगी देश नई दिल्ली पर दबाव बढ़ाना चाहते थे. यह जी-8 आज का जी-7 है. उस वक्त उस समूह में रूस भी शामिल था. इस कारण उसका नाम जी-8 था. अब इस समूह में रूस नहीं है. इसलिए इसका नाम जी-7 कर दिया गया. फ्रांस और रूस बने संकटमोचक कूटनीतिक गलियारों में यह संदेश साफ था कि भारत को पूरी तरह खलनायक बना दिया जाए. लेकिन, रूस और फ्रांस संकटमोचक बनकर उभरे. फ्रांस का मानना था कि संवाद के रास्ते खुले रहने चाहिए. यही वह क्षण था जब नई दिल्ली ने पहली बार महसूस किया कि पेरिस सिर्फ एक साझेदार नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहने वाला मित्र भी हो सकता है. फिर दोनों देशों के रिश्ते में एक भरोसे की बहाली हुई. यह भरोसा समय के साथ रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच गया. अटल और शिराक की नई शुरुआत पोखरण परीक्षणों के कुछ ही महीनों बाद सितंबर 1998 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी फ्रांस पहुंचे. यह यात्रा केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई. इसी यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस ने औपचारिक रूप से ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ की शुरुआत की. यह किसी पश्चिमी देश के साथ भारत की पहली रणनीतिक साझेदारी थी. आज जब भारत की रणनीतिक साझेदारियों की लंबी सूची दिखाई देती है, तो यह याद रखना जरूरी है कि इसकी शुरुआत फ्रांस के साथ हुई थी. पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों. फोटो- रायटर राजनीति और कूटनीति में दोस्ती अक्सर परिस्थितियों के साथ बदल जाती है. लेकिन भारत-फ्रांस संबंधों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि 1998 में बना भरोसा आने वाले वर्षों में लगातार मजबूत होता गया. फ्रांस उन शुरुआती देशों में शामिल रहा जिसने भारत के साथ परमाणु मुद्दों पर उच्च स्तरीय संवाद शुरू किया. बाद में जब भारत को वैश्विक परमाणु व्यवस्था में स्वीकार्यता मिलने लगी, तब उसी विश्वास ने नई संभावनाओं के दरवाजे खोले. 2008 में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) से छूट मिलने के बाद भारत के साथ असैन्य परमाणु समझौता करने वाला पहला देश भी फ्रांस ही बना. यह कोई संयोग नहीं था. इसकी नींव एक दशक पहले उस दौर में रखी जा चुकी थी जब भारत पर प्रतिबंधों का साया था. आज भी क्यों याद की जाती है 1998 की कहानी? आज भारत और फ्रांस रक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे अनेक क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं. राफेल लड़ाकू विमान से लेकर हिंद महासागर में सहयोग तक दोनों देशों के रिश्ते लगातार गहरे हुए हैं. लेकिन, इन संबंधों की असली ताकत किसी रक्षा सौदे या संयुक्त बयान में नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक स्मृति में छिपी है जब भारत कठिन दौर से गुजर रहा था और दुनिया

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शू रैक पर थूकने को लेकर शुरू हुआ झगड़ा, नाबालिग लड़के ने...

Last Updated:June 14, 2026, 07:40 IST Pimpri Chindwad News: यह घटना पिंपरी के मोरवाड़ी इलाके में बुधवार रात हुई. बताया जा रहा है कि लिफ्ट के पास रखे शू-रैक पर थूकने को लेकर दोनों परिवारों के बीच कहासुनी हुई थी. देखते ही देखते झगड़ा बढ़ गया और आरोपियों ने इस दंपति पर हमला कर दिया. इस दौरान नाबालिग लड़के ने महिला के पति पर चाकू से कई वार कर दिए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. लिफ्ट के बाहर रखे शू-रैक पर थूकने की बात को लेकर शुरू हुए झगड़े ने हिंसक रूप ले लिया. महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ में पड़ोसियों के बीच झगड़े का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां लिफ्ट के बाहर रखे शू-रैक पर थूकने की बात को लेकर शुरू हुए झगड़े ने हिंसक रूप ले लिया. आरोप है कि झगड़े के दौरान एक नाबालिग लड़के और उसके परिवार के लोगों ने पड़ोसी दंपति पर चाकू से हमला कर दिया. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है. हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए News18 हिन्दी यह सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखा रहा. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह घटना पिंपरी के मोरवाड़ी इलाके में बुधवार रात हुई. बताया जा रहा है कि लिफ्ट के पास रखे शू-रैक पर थूकने को लेकर दोनों परिवारों के बीच कहासुनी हुई थी. देखते ही देखते झगड़ा बढ़ गया और आरोपियों ने इस दंपति पर हमला कर दिया. इस दौरान नाबालिग लड़के ने महिला के पति पर चाकू से कई वार कर दिए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने इस मामले में एक महिला और एक नाबालिग लड़के के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. महिला आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नाबालिग के संबंध में कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है. हालांकि, मामले में दूसरा पक्ष भी सामने आया है. आरोपी महिला के पति योगेश उभयकर ने शिकायतकर्ता परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि शिकायतकर्ता परिवार पिछले कई दिनों से उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था. उन्होंने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता पक्ष ने उनके 17 वर्षीय बेटे के घर में घुसकर मारपीट की थी. फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोप-प्रत्यारोप को ध्यान में रखते हुए संत तुकाराम नगर पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की सच्चाई पता लगाने में जुटी हुई है. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mumbai,Maharashtra Source link

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दुधवा घूमने का बना रहे हैं प्लान, तो यहां आने से पहले...

Last Updated:June 14, 2026, 06:42 IST लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व से पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. पार्क प्रशासन ने पर्यटकों की बढ़ती संख्या और शानदार टाइगर साइटिंग को देखते हुए पर्यटन सत्र को 15 जून के बजाय 30 जून तक बढ़ाने का फैसला किया है. इस दौरान पर्यटक बाघ, एक सींग वाले गैंडे, बारासिंघा, जंगली हाथी और अन्य दुर्लभ वन्य जीवों को प्राकृतिक वातावरण में देखने का रोमांचक अनुभव ले सकेंगे. लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व से पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पर्यटकों की बढ़ती संख्या और वन्य जीवों की शानदार साइटिंग को देखते हुए मौजूदा पर्यटन सत्र को 15 जून के बजाय अब 30 जून तक बढ़ाने का निर्णय लिया है. इस फैसले के बाद देश-विदेश से आने वाले पर्यटक अगले पंद्रह दिनों तक दुधवा की जैव विविधता और वन्य जीवों का रोमांचक अनुभव ले सकेंगे. इस बार पर्यटन सत्र के दौरान दुधवा में पर्यटकों की संख्या और राजस्व दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यही वजह है कि पार्क प्रशासन ने पर्यटकों की मांग और उत्साह को देखते हुए पर्यटन अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है. क्यों है दुधवा टाइगर रिजर्व खास दुधवा टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख वन्य जीव अभयारण्यों में गिना जाता है. प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और दुर्लभ वन्य जीवों के कारण यह पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. हर वर्ष बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं इस वर्ष भी पर्यटन सत्र के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटकों ने दुधवा का रुख किया पार्क प्रशासन के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस बार हजारों अधिक पर्यटक दुधवा पहुंचे हैं, जिससे राजस्व में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. जंगल सफारी से करें रोमांचकारी अनुभव इस पर्यटन सत्र में लगभग हर सप्ताह पांच दिनों तक पर्यटकों को एक या एक से अधिक बाघ देखने को मिले हैं. जंगल सफारी के दौरान टाइगर का सहज रूप से दिखाई देना पर्यटकों के लिए बेहद रोमांचकारी अनुभव साबित हुआ है. यही कारण है कि सोशल मीडिया पर भी दुधवा की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए, जिससे अन्य पर्यटकों का आकर्षण भी बढ़ा सिर्फ बाघ ही नहीं, बल्कि दुधवा में मौजूद अन्य दुर्लभ वन्य जीव भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. सफारी के दौरान पर्यटकों को एक सींग वाला गैंडा, जंगली हाथी, भालू, बारासिंघा, हिरण, सांभर और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के दर्शन हुए हैं. विशेष रूप से दुधवा का बारासिंघा और गैंडा देशभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं. इन दुर्लभ वन्य जीवों को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलने से पर्यटक काफी उत्साहित नजर आए. कब बंद होगा  लोकल 18 से बातचीत करते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एस. राजा मोहन ने बताया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुराधा वेमुरी के निर्देश पर इस वर्ष दुधवा का पर्यटन सत्र 30 जून से बंद कर दिया जाएगा. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh Source link

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इंडो-पैसिफिक से डिफेंस और AI तक; फ्रांस में PM मोदी का कूटनीतिक...

होमताजा खबरदेश फ्रांस में PM मोदी का कूटनीतिक मिशन, रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई धार Last Updated:June 14, 2026, 05:06 IST भारत की रणनीतिक दूरदृष्टि में फ्रांस का एक खास स्थान है, जबकि स्लोवाकिया की पीएम मोदी की यात्रा एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है तथा यह दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को और आगे बढ़ाएगी. यह 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की पहली यात्रा होगी. ख़बरें फटाफट पीएम मोदी फ्रांस में इमैनुएल मैक्रों के साथ कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस अपने पहले चरण के दौरे के लिए पहुंच चुके हैं और फ्रांस में पहले चरण के दौरे में उनका फोकस भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी, नवाचार, प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप सहयोग को नई गति देने पर रहेगा. प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और द्विपक्षीय तथा वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा करेंगे. रविवार को प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रमों का केंद्रबिंदु “Bharat Innovates” पहल होगी. दोपहर 2:30 बजे राष्ट्रपति मैक्रों के साथ वह इस कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन करेंगे. यह पहल भारत की इनोवेशन यात्रा को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है. इसके तहत भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम, डीप-टेक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और भारतीय प्रतिभाओं के वैश्विक योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा. कार्यक्रम में उन्नत कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, एग्री-टेक, ऊर्जा, स्थिरता, स्वास्थ्य, इंडस्ट्री 4.0, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों से जुड़े भारतीय स्टार्टअप अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे. साथ ही दुनिया भर की प्रमुख कंपनियों के शीर्ष सीईओ और निवेशक भी इसमें भाग लेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि इस मंच पर कई निवेश और कारोबारी समझौते भी आकार ले सकते हैं. विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच होने वाली व्यापक वार्ता में रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आर्थिक सहयोग और इंडो-पैसिफिक सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी की समीक्षा की जाएगी. दोनों नेता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे. “Bharat Innovates” कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी शाम 4:10 बजे से 5:10 बजे तक राष्ट्रपति मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. इसके बाद राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा आयोजित लंच में शामिल होंगे. फ्रांस के पहले चरण के दौरे का समापन कर प्रधानमंत्री रविवार रात 8:30 बजे नीस से वियना होते हुए स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा के लिए रवाना होंगे. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और फ्रांस रक्षा, AI, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की मुलाकात दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. भारत और फ्रांस ने फरवरी 2026 में अपने संबंधों को “स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के स्तर तक पहुंचाया था. इसी दौरान दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष का शुभारंभ भी किया था. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी में पेरिस में आयोजित एआई एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता भी की थी. फ्रांस दौरे के दौरान रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में सभी मुद्दों पर चर्चा होगी. फ्रांस के साथ भारत का रक्षा सहयोग बहुत गहरा और मजबूत है. हाल के वर्षों में दोनों देश का प्रयास सह-उत्पादन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सह-विकास के माध्यम से प्लेटफॉर्म विकसित करने पर अधिक केंद्रित रहा है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा का एक प्रमुख फोकस क्षेत्र प्रौद्योगिकी और नवाचार है. इस क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण परिणाम सामने आने की उम्मीद है. मुख्य रूप से यह AI से जुड़ा है. इसके अलावा हेल्थ-टेक, मेड-टेक और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग पर जोर रहेगा…कुल मिलाकर, कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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गोविंदपुरी आग कांड में बड़ा खुलासा! CCTV में दिखी संदिग्ध महिला, 3...

होमवीडियोदेश गोविंदपुरी आग कांड में बड़ा खुलासा! CCTV में दिखी संदिग्ध महिला, 3 मौतों के पीछे साजिश का शक X गोविंदपुरी आग कांड में बड़ा खुलासा! CCTV में दिखी संदिग्ध महिला, 3 मौतों के पीछे साजिश का शक   दक्षिण-पूर्व दिल्ली के गोविंदपुरी में 11-12 जून की रात चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस को इस मामले में अब एक संदिग्ध महिला की तलाश है. यह महिला सीसीटीवी फुटेज में आग लगने से पहले बिल्डिंग में दाखिल होती है. इसके बाद, आग की लपटे नजर आती है. आग लगते ही यह महिला तेज कदमों से बिल्डिंग से बाहर निकलते दिखाई देती है. इस हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं. पुलिस को शुरुआती जांच में आग के पीछे साजिश की आशंका लग रही है और महिला की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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क्या लाउडस्पीकर का कोई शोर सुनाई देता है, सड़कें जाम की गईं?...

Last Updated:June 13, 2026, 23:23 IST सुवेंदु अधिकारी ने कार्यक्रम में अपने काम करने के तरीके को साफ किया. उन्होंने अनावश्यक बयानबाजी से पूरी तरह दूरी बनाए रखने की बात कही. सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘मैं ज्यादा बात नहीं करूंगा, मैं काम करूंगा. मेरा काम ही खुद बोलेगा.’ मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों को प्राथमिकता देते हैं. राजनीति में केवल बातें करने से जनता का भला नहीं हो सकता है. ख़बरें फटाफट सुवेंदु अधिकारी ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. (फाइल फोटो) कोलकाता. कोलकाता के बालीगंज में आयोजित “बंगाल विकास फोरम” कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल विधानसभा के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में नई सरकार के कामकाज और विकास कार्यों को लेकर बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि सरकार को सत्ता संभाले पांच सप्ताह हो चुके हैं और इस दौरान लोगों को बदलाव साफ दिखाई देने लगा है. सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि जनता खुद आकलन कर सकती है कि क्या अब लाउडस्पीकरों का शोर सुनाई देता है या सड़कों पर जाम लगाने जैसी स्थितियां देखने को मिल रही हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पद की कुछ सीमाएं होती हैं और वह अनावश्यक बयानबाजी में विश्वास नहीं रखते. उन्होंने कहा, “मैं ज्यादा बात नहीं करूंगा, मैं काम करूंगा. मेरा काम ही खुद बोलेगा.” अधिकारी ने दावा किया कि सीमावर्ती इलाकों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें हटाया जा रहा है. विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कोलकाता के चिंगरीघाटा क्षेत्र में मेट्रो परियोजना का काम, जो लंबे समय से रुका हुआ था, अब दोबारा शुरू हो गया है. उनके मुताबिक, सरकार का फोकस बुनियादी ढांचे के विकास, प्रशासनिक सुधार और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने पर है. सुवेंदु अधिकारी के इस बयान को राज्य में विकास के दावों के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी प्राथमिकता राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले परिणाम हैं. सीएम शुभेंदु अधिकारी ने जनता दरबार लगायापश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को भाजपा कार्यालय में अपना जनता दरबार लगाया, जहां उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर लोगों की शिकायतें सुनीं और अधिकारियों को उनका शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए. पहला ‘जनता दरबार’ 18 मई को आयोजित किया गया था. मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद अधिकारी ने इस साप्ताहिक कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा था कि नागरिक हर सप्ताह सीधे उनसे मिल सकेंगे. शनिवार को गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के परिजन, स्वास्थ्यकर्मी और नौकरी की तलाश कर रहे लोग बड़ी संख्या में अपनी शिकायतें दर्ज कराने और मुख्यमंत्री को अपनी समस्याओं से अवगत कराने पहुंचे. जनता दरबार में पहुंचे लोगों में से एक करुणा ने बताया कि वह अपनी बेटी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता मांगने आई हैं. वहीं, एक अन्य महिला तनिमा चटर्जी नौकरी की सुरक्षा की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के साप्ताहिक शिकायत निवारण कार्यक्रम में शामिल हुईं. वह सरकार की मिशन वात्सल्य पहल में कार्यक्रम अधिकारी हैं. उन्होंने कहा, “हम कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के लिए परिवार-आधारित और गैर-संस्थागत देखभाल को बढ़ावा देते हैं. राज्य में 876 कर्मचारी कार्यरत हैं, फिर भी हमें नौकरी की सुरक्षा नहीं मिली है. हमें केवल एकमुश्त मानदेय दिया जाता है.” चटर्जी ने कहा, “पिछली सरकार ने हमारे लिए कभी कुछ नहीं किया, लेकिन हमें उम्मीद है कि भाजपा सरकार हमारी नौकरियों को स्थायी करेगी.” कई अन्य लोगों ने बताया कि वे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने आए हैं. उनका आरोप था कि पिछली सरकार ने हत्या के मामलों और अन्य अपराधों को दबाने का प्रयास किया था. यह साप्ताहिक जनसंपर्क पहल बंगाल में सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार के शुरुआती जनोन्मुखी प्रशासनिक प्रयासों में से एक के रूप में उभर रही है. भाजपा शासित राज्यों में इस तरह की जनसुनवाई की व्यवस्था पहले भी देखने को मिलती रही है और पार्टी इसे आम लोगों तक पहुंच बढ़ाने तथा शिकायतों के त्वरित निस्तारण का प्रभावी माध्यम बताती है. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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स्क्वाड्रन लीडर से अग्निवीर तक: जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर ‘मौत’ की...

होमफोटोदेश जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर ‘मौत’ की लैंडिंग, ले गई 5 जांबाजों की जान Last Updated:June 13, 2026, 23:44 IST असम के जोरहाट में रूसी मूल के एएन-32 परिवहन विमान के शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त होने से भारतीय वायुसेना के पांच कर्मियों की मौत हो गई. वायुसेना ने बताया कि विमान सुबह करीब 10 बजे एक नियमित उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसने एक बयान में कहा, “जोरहाट में एएन-32 विमान दुर्घटना में पांच कर्मियों की मौत पर भारतीय वायुसेना गहरा दुख व्यक्त करती है.” असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर शनिवार को उतरते समय एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के क्रैश होने से भारतीय वायुसेना के पांच जवान शहीद हो गए. यह घटना सुबह लगभग 10 बजे हुई. उतरने के लैंडिंग के दौरान विमान में आग लग गई, जिसके बाद एयरफोर्स और एयरपोर्ट की अग्निशमन टीमों ने तुरंत इमरजेंसी कार्रवाई शुरू कर दी. भारतीय वायुसेना ने एक बयान में कहा, “आज सुबह लगभग 10 बजे असम के जोरहाट में एक रूटीन उड़ान के दौरान आईएएफ के एएन-32 विमान का एक्सीडेंट हो गया. अभी क्रैश वाली जगह पर जांच चल रही है. आईएएफ सभी से अपील करता है कि शुरुआती नतीजे आने तक कोई अटकलें न लगाएं.” एक अन्य पोस्ट में आईएएफ ने लिखा, “भारतीय वायु सेना को असम के जोरहाट में एएन-32 विमान दुर्घटना में अपने पांच कर्मियों के खोने का गहरा दुख है. स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया. भारतीय वायु सेना शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है और दुख की इस घड़ी में मजबूती से उनके साथ खड़ी है.” Add News18 as Preferred Source on Google एक्सीडेंट की वजह का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच के आदेश दिए जाने की उम्मीद है. टेक्निकल एक्सपर्ट और एयरफोर्स के अधिकारी क्रैश वाली जगह की जांच कर रहे हैं, जबकि शुरुआती जांच जारी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, “असम के जोरहाट में AN-32 विमान दुर्घटना में पांच वायु सैनिकों की मौत से मुझे गहरा दुख हुआ है. स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम ने अपनी ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया. देश उनके साहस और सेवा को हमेशा गर्व और कृतज्ञता के साथ याद रखेगा. शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. दुख की इस घड़ी में देश मजबूती से उनके साथ खड़ा है.” न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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