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झारखंड

Whenever the opposition mocked, the public’s blessings increased; we built Jharkhand, we...

Hindi News Local Jharkhand Ranchi Whenever The Opposition Mocked, The Public's Blessings Increased; We Built Jharkhand, We Will Continue To Improve It: Nabin रांची17 घंटे पहले कॉपी लिंक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। झारखंड के दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को रांची पहुंचे नबीन ने कई सांगठनिक बैठकें लीं। प्रबुद्धजन संवाद कार्यक्रम में कहा, जब-जब विपक्ष ने हमारा मजाक उड़ाया, जनता का और आशीर्वाद मिला। झारखंड को हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे। हमें अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों का झारखंड बनाना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत बनाना मोदी सरकार का सपना है। सभी के सहयोग से भाजपा इसे पूरा कर रही है। उन्होंने दावा किया कि झारखंड को उसकी विरासत और संस्कृति के साथ विकास के नए पायदान पर ले जाएंगे। केंद्र सरकार किसानों के कल्याण, कृषि सुधारों और उनकी आय बढ़ाने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने जैविक खेती, आयुष्मान भारत, जन धन योजना, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप और मुद्रा योजना जैसी पहलों को गरीब, किसान, महिला और युवाओं को सशक्त बनाने वाला बताया। राष्ट्रीय सुरक्षा, नक्सलवाद का खात्मा, रेलवे और बुनियादी ढांचे का विकास, महिला सशक्तीकरण और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को सरकार की प्रमुख उपलब्धियां बताई। युवाओं से सकारात्मक राजनीति, नवाचार और विकसित भारत-2047 के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। नबीन ने बताया कि आज भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और 125 से अधिक यूनिकॉर्न काम कर रहे हैं। मुद्रा योजना ने युवाओं को नौकरी मांगने वाले के बजाय नौकरी देने वाला बनाया है। उन्होंने रेलवे और बुनियादी ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि आज 164 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं, 99 प्रतिशत ब्रॉड-गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका है और 26 शहरों में मेट्रो चल रही है। रांची एयरपोर्ट पर नेताओं-कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत इससे पहले रांची एयरपोर्ट पर भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। वहां से वे प्रदेश कार्यालय पहुंचे और सांसदों-विधायकों की बैठक को संबोधित किया। कोर कमेटी की बैठक में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई। पूर्व अध्यक्षों की बैठक में झारखंड की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की। रविवार को वे बोकारो जाएंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ Source link

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bihar engineering admission at 10 lakh rank civil cutoff jee mains college...

Last Updated:June 07, 2026, 22:06 IST Bihar Engineering Admission Cutoff: जेईई-मेंस की परीक्षा में कम स्कोर या 10 लाख तक रैंक लाने वाले छात्रों के लिए भी बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल इंजीनियर बनने का रास्ता साफ है. राज्य के विभिन्न जिलों में खुले नए इंजीनियरिंग कॉलेजों और सीटों की संख्या अधिक होने के कारण, सही काउंसलिंग रणनीति अपनाकर छात्र कम रैंक पर भी सरकारी कॉलेज में अपनी सीट पक्की कर सकते हैं. जानिए एडमिशन और काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया. ख़बरें फटाफट गयाजी: इंजीनियर बनने का सपना देख रहे हैं लेकिन जेईई एडवांस में सफलता नहीं मिली हो बावजूद बिहार के कॉलेज में जेईई मेंस के रैंक के आधार पर नामांकन लेकर इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर सकते हैं. बिहार के लगभग हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज है जहां जेईई मेंस और बीसीईसीई के रैंक पर नामांकन होता है. बिहार के टॉप फाइव इंजीनियरिंग कॉलेज में शामिल गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में नामांकन के लिए जेईई मेंस में 90 हजार से 10 लाख रैंक के बीच छात्रों का नामांकन होता है. बिहार में स्कोप ज्यादा, नामांकन की होड़गया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग का सिविल ब्रांच में नामांकन के लिए छात्रों में होड़ लगी रहती है. पिछले 2 साल की रैंक की बात करें तो जेईई मेंस में 1 लाख से 10 लाख के बीच के रैंक वाले छात्रों को सिविल ब्रांच मिला है. बिहार में सिविल इंजीनियरिंग एक प्रमुख और अत्यधिक मांग वाली शाखा है. यह बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, पुल, इमारत के निर्माण और योजना से जुड़ी ब्रांच है. इस कोर्स को करने के बाद ज्यादातर छात्र सरकारी नौकरी लेता चाहते हैं और बिहार में इसका स्कोप भी अधिक है. यहां पर है खूब मांग, मिलेगा अवसर भीदेश और राज्य में बन रहे नए एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स, एयरपोर्ट्स और स्मार्ट सिटीज, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे सड़कें, पुल, भवन, और रियल एस्टेट के कारण सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए भी प्लेसमेंट के शानदार मौके बन रहे हैं. इसके अलावे जूनियर इंजीनियर से लेकर सरकारी ठेकेदार और निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों में काम करके आप शानदार करियर बना सकते हैं. वहीं प्राइवेट सेक्टर में भी सिविल इंजीनियर की मांग हाल के वर्षो में खूब बढी है. सिविल ब्रांच की डिमांड ज्यादा, इस बार ये रहेगा रैंकगया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डिप्टी रजिस्ट्रार डाॅ.कृष्णा प्रसाद ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बिहार के ज्यादातर बच्चे सरकारी नौकरी में जाना चाहते हैं इसलिए सिविल ब्रांच की डिमांड ज्यादा रहती है. सरकारी नौकरियों में सबसे ज्यादा वैकेंसी सिविल इंजीनियर के लिए होती है. इन्होंने बताया इस कालेज में 120 सीट पर सिविल ब्रांच में नामांकन होता है. इस बार भी उम्मीद है 1 लाख से 10 लाख के बीच रैंक वाले छात्रों को यहां एडमिशन मिलेगा. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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एयर होस्टेस से ‘बांसा घर’ की मालकिन, पिंकी ने छोड़ी कॉर्पोरेट जॉब,...

Last Updated:June 07, 2026, 17:15 IST Success Story: जुनून और खुद पर आत्मविश्वास के दम पर महानगरों की नौकरी छोड़कर भी अपने घर-गांव में सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है. इसे सच कर दिखाया है झारखंड के बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड की रहने वाली पिंकी कुमारी ने. कभी आसमान में उड़ान भरने की तैयारी करने वाली और कॉर्पोरेट सेक्टर में ऊंची सैलरी पाने वाली पिंकी आज अपने दम पर फास्ट फूड बिजनेस में एक नई और मिसाल देने योग्य पहचान बना रही हैं. आइए जानते हैं इनकी कहानी. पिंकी कुमारी ने एक खास बातचीत में अपने इस दिलचस्प सफर को साझा किया. उन्होंने बताया कि उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के गुड़गांव (गुरुग्राम) में लगभग 8 वर्षों तक कॉर्पोरेट और सर्विस सेक्टर में काम किया था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मशहूर एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट के साथ बतौर एयर होस्टेस की थी. इसके बाद उन्होंने कई बड़े कॉर्पोरेट संस्थानों में भी अपनी सेवाएं दीं. हालांकि, इतनी अच्छी नौकरियों के बावजूद उनका मन हमेशा खुद का कुछ बिजनेस शुरू करने की ओर ही लगा रहता था. जब खुद का काम करने की इच्छा बढ़ने लगी, तो पिंकी ने बोकारो लौटकर अपने सपनों को नई उड़ान देने का कड़ा फैसला किया. चूंकि उन्हें बचपन से ही फूड और कुकिंग में काफी रुचि थी, इसलिए उन्होंने फास्ट फूड बिजनेस को चुना. उन्होंने चंद्रपुरा में अपने स्टॉल की शुरुआत की और इसका नाम बेहद अनोखा बांसा घर रखा. पिंकी बताती हैं कि मिथिलांचल और मैथिली संस्कृति में रसोई घर को बांसा घर कहा जाता है. इसी सांस्कृतिक लगाव के कारण उन्होंने यह नाम चुना. पिंकी ने अपने बिजनेस की शुरुआत मुख्य रूप से मोमोज की अलग-अलग वैरायटी के साथ की थी. आज उनके स्टॉल पर मलाई मोमोज, अफगानी मोमोज, पास्ता, नूडल्स और कई तरह के स्वादिष्ट फास्ट फूड आइटम्स मिलते हैं. इनके आउटलेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मिलने वाले सभी फूड आइटम पूरी तरह से शाकाहारी होते हैं. लेकिन इनके मसालों और बनाने के तरीके का स्वाद ऐसा है कि लोग यहां बार-बार खाने पहुंचते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पिंकी कुमारी कहती हैं कि चंद्रपुरा जैसे छोटे इलाके में आमतौर पर पहले फास्ट फूड की ज्यादा वैरायटी देखने को नहीं मिलती थी. ऐसे में उन्होंने स्थानीय लोगों को महानगरों जैसा कुछ नया और प्रीमियम स्वाद देने की कोशिश की. जिसे अब ग्राहकों का बेहद शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है. उनके यहां इस समय सबसे ज्यादा डिमांड मलाई मोमोज की रहती है. जिसकी रोजाना लगभग 100 प्लेट तक की खपत आसानी से हो जाती है. यह फूड स्टॉल रोजाना शाम 5 बजे से लेकर रात 10 बजे तक खुलता है. पिंकी के अनुसार महज कुछ ही घंटों के इस बिजनेस से आज वह हर महीने लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक की शानदार कमाई कर लेती हैं, जो किसी भी बड़े शहर की नौकरी के मुकाबले काफी सुकून देने वाली है. अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर पिंकी भावुक होते हुए बताती हैं कि उनके पिता नौकरी करते हैं, जबकि कोरोना काल के कठिन समय में उनकी माता जी का निधन हो गया था. माता के जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और खुद के दम पर पैरों पर खड़े होने व आगे बढ़ने का फैसला किया. भविष्य में उनका इरादा अपने इस बांसा घर ब्रांड को और भी बड़े लेवल पर ले जाने का है. ग्राहक इशिता ने बताया कि चंद्रपुरा जैसे छोटे इलाके में पहले फास्ट फूड की अच्छी और हाइजीनिक वैरायटी मिलना बेहद मुश्किल था. जब से पिंकी के स्टॉल का फास्ट फूड ट्राई किया है. वह इसकी दीवानी हो गई हैं. उन्हें यहां का स्वाद और वैरायटी काफी पसंद आ रही है. जिसके चलते यहां अब हर उम्र के फूड लवर्स की भीड़ उमड़ रही है. Source link

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Hemant Soren surprises by giving ticket to Dalit outside the family, Baijnath...

Hindi News Local Jharkhand Ranchi Rashtra Samithi Election: Hemant Soren Surprises By Giving Ticket To Dalit Outside The Family, Baijnath Becomes Candidate रांची16 घंटे पहले कॉपी लिंक राजनीति में ट्विस्ट: कांग्रेस के प्रणव झा, भाजपा के गौरव वल्लभ, झामुमो से बैजनाथ राम और निर्दलीय के रूप में नाथवानी व साईं रेड्डी ने पर्चा खरीदा है, लेकिन भाजपा अभी भी चुप है। झारखंड में दो सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव ने राज्य के सियासी पारे को गरमा दिया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गुरुजी की खाली हुई सीट पर सोरेन परिवार से किसी को चुनाव मैदान में न उतारकर सबको चौंका दिया है। शुक्रवार तक दोनों सीटों पर दावा ठोकने वाले झामुमो ने शनिवार को पूर्व मंत्री और केंद्रीय उपाध्यक्ष बैजनाथ राम को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। हालांकि, दूसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने के सवाल पर पार्टी ने अभी कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। उधर, विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने शुक्रवार रात दावा किया था कि शनिवार सुबह पार्टी के प्रत्याशी की घोषणा कर दी जाएगी। भाजपा प्रत्याशी के रूप में गौरव वल्लभ ने पर्चा भी खरीद लिया है, लेकिन शनिवार देर शाम तक पार्टी ने उनके नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की। वहीं, कांग्रेस से प्रणव झा और झामुमो से बैजनाथ राम ने नामांकन पत्र खरीद लिया है। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बैजनाथ राम सोमवार को नामांकन पत्र भरेंगे, और उस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहेंगे। सीएम से मिले परिमल नाथवानी, निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव परिमल नाथवानी शनिवार रात आठ बजे रांची पहुंचे। वे एयरपोर्ट से सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कांके रोड स्थित आवास गए, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक मुलाकात हुई। मुलाकात के बाद नाथवानी ने कहा कि यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात थी और राज्यसभा चुनाव पर कोई बात नहीं हुई। उन्होंने साफ किया कि वे इस बार झारखंड से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। उनका नामांकन पत्र खरीदा जा चुका है और वे सोमवार को पर्चा दाखिल करेंगे। राज्यसभा चुनाव में ‘पर्दे के पीछे’ का खेल 1. प्रस्तावक कौन? 10 विधायकों की ‘मिस्ट्री’ और 2 दिग्गजों की एंट्री राज्यसभा के रण में परिमल नाथवानी और विजय साईं रेड्डी जैसे हैवीवेट निर्दलीयों की एंट्री ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। नियम के अनुसार, नामांकन के लिए कम से कम 10 विधायकों का बतौर प्रस्तावक होना अनिवार्य है। अंदर की बात: झारखंड विधानसभा में बिना किसी बड़े दल की मूक सहमति या भितरघात के 10 विधायक जुटाना लगभग असंभव है। ऐसे में सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वो हिडन (छिपे हुए) विधायक कौन हैं, जो इन दिग्गजों का प्रस्तावक बनने को तैयार बैठे हैं? क्या सत्ता व विपक्ष के भीतर सुलग रहा कोई असंतोष इसका कारण बनेगा या फिर यह हॉर्स ट्रेडिंग की कोई नई बिसात बिछेगी? 2. भाजपा का ‘डार्क हॉर्स’ प्लान: चुप्पी के पीछे सेंधमारी की बिसात गौरव वल्लभ ने नामांकन पत्र खरीद लिया है, लेकिन भाजपा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अधिकृत घोषणा में यह देरी अकारण नहीं है। अंदर की बात: भाजपा की यह चुप्पी उसकी मजबूरी नहीं, बल्कि प्लान-बी का हिस्सा मानी जा रही है। अगर पार्टी आधिकारिक तौर पर अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारती है, तो इसका सीधा अर्थ है कि वह पर्दे के पीछे से किसी मजबूत निर्दलीय को समर्थन देने का मन बना चुकी है। सीधे मुकाबले में हारने के बजाय निर्दलीय के माध्यम से महागठबंधन के vote bank में सेंधमारी की जाए और असंतुष्ट विधायकों को साधा जाए। सीएम से मिले भूपेश व अजय, कहा- ‘ऑल इज वेल’ राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के ऑब्जर्वर भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने शनिवार दोपहर सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली मुलाकात के बाद दोनों पर्यवेक्षकों ने कहा कि सब कुछ ठीक है। राज्यसभा चुनाव में गठबंधन दोनों ही सीटों पर जीत हासिल करेगा। भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री से अच्छी और खुलकर बातें हुई हैं, कोई गलतफहमी नहीं है और गठबंधन मजबूत है। झामुमो ने बैजनाथ राम को ही क्यों चुना? चंपाई सोरेन सरकार में मंत्री बनने की सूची में बैजनाथ राम का भी नाम शामिल था और यह सूची राजभवन भी पहुंच गई थी। लेकिन शपथ से ठीक पहले उन्हें रोक दिया गया, जिससे पार्टी पर दलितों की उपेक्षा का आरोप लगा। बाद में उनसे वादा किया गया था कि उन्हें उपयुक्त जगह दी जाएगी और इसीलिए उन्हें राज्यसभा प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा, कांग्रेस के ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने के बाद झामुमो ने यह दलित कार्ड खेला है। उम्मीदवारों का प्रोफाइल: एक नजर में परिमल नाथवानी: उद्योगपति और अभी आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं। वे 2008 से 2020 तक लगातार 2 कार्यकाल के लिए झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद रहे हैं। वे गुजरात के अहमदाबाद के द्वारकेशनंदी में रहते हैं। प्रणव झा: कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पार्टी के मीडिया रणनीतिकार हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी इनकी निकटता है। वे मूल रूप से भागलपुर जिले के अनादिपुर गांव के हैं और बोकारो से इनकी पढ़ाई-लिखाई हुई है। फिलहाल दिल्ली के साउथ एवेन्यू में रहते हैं। गौरव वल्लभ: भाजपा के प्रमुख नेता, अर्थशास्त्री और शिक्षाविद हैं। अभी प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं। एक्सएलआरआई (XLRI) जमशेदपुर व एसआईएसएस (SISS) रांची में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं। वे राजस्थान के जोधपुर के हैं। बैजनाथ राम: झामुमो के वरिष्ठ नेता हैं और झारखंड सरकार में मंत्री रह चुके हैं। झामुमो के अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें पार्टी के एससी (SC) वर्ग के बड़े चेहरे के तौर पर देखा जाता है। वे मूल रूप से लातेहार के धोबी मुहल्ला के रहने वाले हैं। साईं विजय रेड्डी: चार्टर्ड अकाउंटेंट और आंध्र प्रदेश के राजनेता हैं। वाईएसआर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उन्हें वाईएसआरसीपी प्रमुख जगनमोहन रेड्डी के करीबी और पार्टी का ‘चाणक्य’ माना जाता है। वे आंध्र प्रदेश के इस्कॉन सिटी नेल्लोर के हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ Source link

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हेमंत ने बैजनाथ के नामांकन के लिए दो सेट में 10-10 विधायकों...

शिबू सोरेन की सीट पर प्रत्याशी बनाए जाने के बाद पार्टी केंद्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शाम को अपने आवास पर पार्टी मंत्रियों एवं विधायकों की बैठक की। बैठक में नामांकन पत्र के विभिन्न सेटों पर विधायकों से हस्ताक्षर कराए गए। बैजनाथ राम कम से कम दो सेट में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इसलिए एक सेट पर 10 विधायकों और दूसरे सेट पर अन्य 10 विधायकों का हस्ताक्षर करा कर उन्हें प्रस्तावक बनाया गया। आठ जून को नामांकन दाखिल करते समय उनके साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उपस्थित रहेंगे। बैठक में पार्टी प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने और दूसरे सीट के लिए रणनीतियों पर विचार किया गया। बैठक में प्रत्याशी बैजनाथ राम के अलावा स्टीफन मरांडी, मथुरा महतो, योगेंद्र प्रसाद, दीपक बिरुआ, आलोक सोरेन, सुदिव्य कुमार सोनू, हफीजुल हसन, बसंत सोरेन, सुदीव गुड़िया, धनंजय सोरेन सहित कई विधायक शामिल हुए। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्‌टाचार्य ने कहा कि झामुमो के पास अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल है। झामुमो ने बैजनाथ राम को ही क्यों चुना, के जवाब में सुप्रियो ने कहा कि चंपाई सोरेन सरकार में मं​त्री बनने की सूची में बैजनाथ राम का भी नाम था। यह सूची राजभवन पहुंच गई थी। लेकिन शपथ से पहले उन्हें रोक दिया गया। पार्टी पर दलितों की उपेक्षा का आरोप लगा। बाद में उनसे वादा किया गया था कि उन्हें उपयुक्त जगह दी जाएगी। और इसीलिए उन्हें राज्यसभा प्रत्याशी बनाया गया। Source link

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पीएम की कुर्सी तक पहुंचने के दो रास्ते! नेहरू को मिली तैयार...

Last Updated:June 07, 2026, 21:04 IST नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम करने जा रहे हैं. लेकिन इस पड़ाव से एक दिलचस्प तुलना भी सामने आती है. जवाहरलाल नेहरू और नरेंद्र मोदी दोनों पीएम की कुर्सी तक पहुंचे, मगर उनके रास्ते बिल्कुल अलग थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जवाहर लाल नेहरू. मंजरी जोशी10 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे. इस मौके पर यह देखना भी दिलचस्प है कि मोदी और जवाहरलाल नेहरू दोनों देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे जरूर, लेकिन वहां तक पहुंचने के उनके रास्ते पूरी तरह अलग थे. जब जवाहरलाल नेहरू 1947 में देश के पहले प्रधानमंत्री बने, तब वे स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे. उन्हें कांग्रेस संगठन का पूरा समर्थन हासिल था. महात्मा गांधी का भरोसा भी उनके साथ था और आजादी की लड़ाई से कांग्रेस को देशभर में जबरदस्त सम्मान मिला हुआ था. उस समय भारत की राजनीति आज जैसी नहीं थी. कांग्रेस का पूरे देश में दबदबा था और विपक्षी दल बहुत कमजोर तथा बिखरे हुए थे. आजादी की खुशी और कांग्रेस के योगदान के कारण जनता का बड़ा वर्ग पार्टी के साथ खड़ा था. नेहरू के सामने नई आजाद हुई देश की संस्थाओं को खड़ा करने की बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के रास्ते में उन्हें बहुत ज्यादा राजनीतिक मुकाबले का सामना नहीं करना पड़ा. चुनावी संघर्ष से निकले मोदी नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर बिल्कुल अलग दौर में शुरू हुआ. प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने संगठन में लंबे समय तक काम किया, जमीनी राजनीति की, चुनाव लड़े और प्रशासनिक अनुभव हासिल किया. जिस दौर में मोदी उभरे, उस समय भारतीय राजनीति गठबंधन सरकारों, क्षेत्रीय दलों, वैचारिक टकराव और कड़े चुनावी मुकाबलों से भरी हुई थी. राष्ट्रीय राजनीति में किसी एक पार्टी का वैसा दबदबा नहीं था जैसा आजादी के बाद कांग्रेस का हुआ करता था. बीसवीं सदी के आखिरी वर्षों और इक्कीसवीं सदी के शुरुआती दौर में देश की राजनीति खंडित जनादेश, गठबंधन की मजबूरियों, भ्रष्टाचार के आरोपों और अलग-अलग राजनीतिक विचारों से प्रभावित रही. ऐसे माहौल में राष्ट्रीय नेतृत्व हासिल करने के लिए लगातार चुनाव जीतना और जनता का समर्थन बढ़ाना जरूरी था. पार्टी कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने तक मोदी का सफर लगातार चुनावी सफलताओं और जनसमर्थन पर आधारित रहा. भारत की राजनीति के दो अलग दौर News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi चुनावी संघर्ष से निकले मोदी नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर बिल्कुल अलग दौर में शुरू हुआ. प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने संगठन में लंबे समय तक काम किया, जमीनी राजनीति की, चुनाव लड़े और प्रशासनिक अनुभव हासिल किया. जिस दौर में मोदी उभरे, उस समय भारतीय राजनीति गठबंधन सरकारों, क्षेत्रीय दलों, वैचारिक टकराव और कड़े चुनावी मुकाबलों से भरी हुई थी. राष्ट्रीय राजनीति में किसी एक पार्टी का वैसा दबदबा नहीं था जैसा आजादी के बाद कांग्रेस का हुआ करता था. बीसवीं सदी के आखिरी वर्षों और इक्कीसवीं सदी के शुरुआती दौर में देश की राजनीति खंडित जनादेश, गठबंधन की मजबूरियों, भ्रष्टाचार के आरोपों और अलग-अलग राजनीतिक विचारों से प्रभावित रही. ऐसे माहौल में राष्ट्रीय नेतृत्व हासिल करने के लिए लगातार चुनाव जीतना और जनता का समर्थन बढ़ाना जरूरी था. पार्टी कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने तक मोदी का सफर लगातार चुनावी सफलताओं और जनसमर्थन पर आधारित रहा. भारत की राजनीति के दो अलग दौर नेहरू और मोदी की यात्राएं भारत के लोकतंत्र के दो अलग-अलग चरणों को दिखाती हैं. नेहरू उस दौर के नेता थे जब कांग्रेस का दबदबा था और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत उनके साथ थी. वहीं मोदी ऐसे समय में उभरे जब हर चुनाव कड़ी प्रतिस्पर्धा वाला था, राजनीतिक समर्थन बंटा हुआ था और राष्ट्रीय जनादेश हासिल करने के लिए कई स्तरों पर मुकाबला करना पड़ता था. एक नेता ऐसे राजनीतिक माहौल में आगे बढ़ा जहां एक ही आंदोलन और एक ही पार्टी का प्रभाव था. दूसरे नेता ने गठबंधन युग, क्षेत्रीय राजनीति और लगातार चुनावी संघर्ष के बीच अपनी जगह बनाई. मोदी के इस ऐतिहासिक पड़ाव के साथ यह भी साफ दिखाई देता है कि आजादी के बाद के सर्वसम्मति वाले राजनीतिक दौर से भारत अब प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र के एक नए युग में पहुंच चुका है. खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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किसानों के लिए ‘ऑल-इन-वन’ मशीन, 40 हजार में करेगी जुताई, कटाई, सिंचाई...

Last Updated:June 07, 2026, 17:39 IST All-in-One machine for farmers: मानसून आने से पहले जिले के किसान अपने खेतों की तैयारी में पूरी मेहनत के साथ जुट गए हैं. समय पर खेत तैयार कर खेती शुरू करने को लेकर गांवों में हलचल बढ़ गई है. इसी बीच किसानों की मेहनत और खर्च दोनों को कम करने के लिए कोडरमा बाजार में एक ऐसी आधुनिक मशीन आई है. जो अकेले पांच अलग-अलग काम करने में सक्षम है. इस मशीन के आने से किसानों को अब अलग-अलग उपकरण खरीदने या अधिक मजदूर लगाने की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है. झुमरी तिलैया शहर के अग्रसेन भवन गली स्थित गुरुनानक एग्रो के संचालक मनजीत सिंह ने विशेष बातचीत में बताया कि उनके प्रतिष्ठान पर किसानों के लिए 7.5 एचपी का आधुनिक पावर वीडर उपलब्ध कराया जा रहा है. यह मशीन खेती से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों को बेहद आसानी से कर सकती है. उन्होंने कहा कि पहले किसानों को जुताई, कटाई, सिंचाई और अन्य कार्यों के लिए अलग-अलग मशीनों का सहारा लेना पड़ता था. लेकिन अब एक ही मशीन से कई काम किए जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि इस पावर वीडर का मुख्य उपयोग खेत की जुताई और खेती से पहले जमीन को तैयार करने में किया जाता है. खास बात यह है कि यह मशीन कम ईंधन में बेहतर प्रदर्शन करती है. उन्होंने कहा कि मात्र 1 लीटर पेट्रोल में यह मशीन लगभग सवा घंटा तक आराम से चलती है. जिससे किसानों के पेट्रोल खर्च में भी काफी बचत होती है. उन्होंने बताया कि इस मशीन में पीटीओ सॉफ्ट लगाकर इसे धान कटाई के लिए रीपर मशीन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे किसानों को धान की कटाई के समय मजदूरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और कम समय में अधिक काम हो सकेगा. Add News18 as Preferred Source on Google इसके अलावा इस मशीन में अल्टरनेटर जोड़ने के बाद यह जनरेटर का भी काम करती है. ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में जहां बिजली की समस्या अक्सर बनी रहती है. वहां यह मशीन काफी उपयोगी साबित हो सकती है. किसान जरूरत पड़ने पर इससे बिजली उत्पादन कर छोटे उपकरण चला सकते हैं. उन्होंने बताया कि इस मशीन की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें पानी पंप सेट भी लगाया जा सकता है. इससे किसानों को अलग से पंप सेट खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी. सिंचाई के लिए यही मशीन काफी मददगार साबित होगी. उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं सॉफ्ट लगाकर इसे धान झाड़ने वाली थ्रेसर मशीन में भी बदला जा सकता है. यानी एक ही मशीन जुताई, कटाई, सिंचाई, बिजली उत्पादन और धान झाड़ने जैसे पांच बड़े काम करने में सक्षम है. इससे किसानों का समय, पैसा और मेहनत तीनों की बचत होगी. उन्होंने बताया कि इस मल्टीटास्किंग मशीन की कीमत लगभग 40 हजार रुपये है. किसानों की जरूरत और बजट को देखते हुए यह मशीन काफी उपयोगी साबित हो रही है. मानसून से पहले जिले के कई किसान इस मशीन के प्रति रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने बताया कि पावर वीडर मशीन अलग-अलग कंपनी और अलग-अलग पावर रेंज में भी उपलब्ध है. जिसमें सबसे कम 7 एचपी की मशीन 32 हजार और 10 एचपी 74 हजार, 12 एचपी की मशीन 82 हजार तक की रेंज में उपलब्ध है. Source link

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ब्लू कॉर्नर नोटिस से प्रिंस खान का सही लोकेशन पता करेगी पुलिस,...

लोकेशन जुटाने के लिए कई टीमें कर रही काम कारोबारियों और पुलिस के लिए सिरदर्द बने गैंगस्टर प्रिंस खान के सही ठिकाने का पता लगाने में झारखंड एटीएस जुट गई है। एटीएस ने इसके लिए इंटरपोल की मदद मांगी है। इंटरपोल से प्रिंस खान के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया है। सही लोकेशन का पता चलने के बाद उसे गिरफ्तारी कीक्रिया शुरू होगी। दरअसल प्रिंस खान सोशल मीडिया पर धमकी भरा पोस्ट कर कभी दुबई में तो कभी ओमान में होने की बात करता है। वहीं उसके गुर्गे ने पुलिस को बताया है कि वह पाकिस्तान के बहावलपुर में छिपा है। ऐसे में उसके सही लोकेशन का पता नहीं चल रहा है। फर्जी पासपोर्ट बनाकर भागा है विदेश, एटीएस केस में है वांटेड नन्हे खान हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद धनबाद पुलिस ने जब उसकी तलाश शुरू की तो वह फर्जी पासपोर्ट बनाकर 24 नवंबर 2021 को विदेश भाग गया। उसने खुद का नाम बदलकर हैदर अली कर लिया और फर्जी कागजात से पासपोर्ट बनवा लिया। शुरुआती जांच में पता चला कि प्रिंस खान ने दुबई में शरण ले रखी है, लेकिन वह लगातार ठिकाना बदलता रहा है। इसी कारण एटीएस ने ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया है। जानिए… क्या होता है ब्लू कॉर्नर नोटिस जब कोई अपराधी देश छोड़कर भाग जाता है तो इंटरपोल ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करता है। यह सीधे गिरफ्तारी वारंट नहीं होता, बल्कि पूछताछ और पहचान का नोटिस होता है। इसका मुख्य उद्देश्य फरार आरोपी की पहचान की पुष्टि करना, उसके सटीक लोकेशन का पता करना है। Source link

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डीसी आवास के पास मॉर्निंग वॉक कर रही महिला से चेन की...

शोर मचाने पर भी नहीं मिली मदद, बाइक सवार दो अपराधी फरार लालपुर थाना क्षेत्र के मोराबादी स्थित डीसी आवास के पास शनिवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकली एक महिला से बाइक सवार अपराधियों ने चेन झपट ली। पीड़िता 64 वर्षीय अमिता गुप्ता रातू रोड की रहने वाली हैं। घटना सुबह करीब 6.35 बजे की है।जानकारी के अनुसार अमिता गुप्ता रोज की तरह मॉर्निंग वॉक कर रही थीं। इसी दौरान डीसी आवास के पास पीछे से आए बाइक सवार दो अपराधियों ने उनके गले से करीब 15 ग्राम वजन की सोने की चेन झपट ली और करमटोली की ओर फरार हो गए। घटना के बाद महिला ने शोर मचाया, लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया।इसके बाद वह चंपई सोरेन के आवास पर तैनात हाउस गार्ड के पास पहुंचीं और घटना की जानकारी दी। हाउस गार्ड की सलाह पर उन्होंने लालपुर थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अपराधियों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा। Source link

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बुंदेलखंड के यात्रियों को राहत, चर्लपल्ली एक्सप्रेस ट्रेन से नागपुर-हैदराबाद पहुंचना होगा...

Last Updated:June 07, 2026, 19:58 IST रीवा से हैदराबाद के लिए जाने वाली चर्रपल्ली एक्सप्रेस अब वाया सागर और बीना से होते हुए जाएगी यानी कि अब इस ट्रेन का ठहराव सागर जिले की दो प्रमुख स्टेशन सागर और बीना पर होगा जिसकी वजह से सागर शहर पूरे बुंदेलखंड के हजारों यात्रियों के लिए इसका फायदा मिलेगा सागर की रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. यहां लंबे समय से मध्य भारत के क्षेत्र को दक्षिण भारत से जोड़ने की जो मांग की जा रही थी. वह अब लगभग पूरी हो गई है यानी कि बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी अब नागपुर और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों से होने जा रही है. क्योंकि रीवा से हैदराबाद के लिए जाने वाली चर्रपल्ली एक्सप्रेस अब वाया सागर और बीना से होते हुए जाएगी यानी कि अब इस ट्रेन का ठहराव सागर जिले की दो प्रमुख स्टेशन सागर और बीना पर होगा जिसकी वजह से सागर शहर पूरे बुंदेलखंड के हजारों यात्रियों के लिए इसका फायदा मिलेगा यह ट्रेन नियमित रूप से चलाने की स्वीकृति मिली है. पिछले 3 – 4 दशकों से बुंदेलखंड एरिया को नागपुर और हैदराबाद जैसे महानगरों से जोड़ने की मांग चल रही थी. क्षेत्रीय लोगों के द्वारा इसको लेकर कई बार धरना प्रदर्शन किए गए. जनप्रतिनिधियों के द्वारा संसद में इसकी आवाज उठाई गई जिम्मेदार अधिकारी मंत्रियों से मुलाकात हुई पत्राचार हुआ. लेकिन हर बार यह मांग ठंडी बस्ती में चली जाती थी बरसों से चली आ रही इस मांग पर इस बार केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के द्वारा गंभीरता से लिया गया. और पिछले दिनों सागर सांसद ने इसको लेकर बैक टू बैक मुलाकातें की इस क्षेत्र की समस्याएं बताईं लोगों के पिछड़ेपन के बारे में और उन्हें किस तरह से दक्षिण भारत तक जाने में आसुविधाओं का सामना करना पड़ता है इन सब से परिचित करवाया. सागर-बीना होते हुए नागपुर तक जाएगी चर्लपल्ली एक्सप्रेससागर और इसके आसपास के जिलों की लोगों को ध्यान में रखते हुए वर्षों से चली आ रही है. इस मांग को लेकर उन्होंने आखिरकार स्वीकृति दे दी रेल मंत्री के द्वारा सागर सांसद के लिए 4 जून को पत्र लिखकर इसके बारे में जानकारी दी गई जिसमें उन्होंने लिखा है कि जन सुविधा के लिए आपकी संसदीय क्षेत्र सागर को हैदराबाद एवं अन्य शहरों से जोड़ने के लिए नई रेलगाड़ी का परिचालन किए जाने के संबंध में जानकर प्रसन्नता होगी. रीवा से हैदराबाद बाय सागर वेपीना नई रेलगाड़ी संख्या 20158/20157 रीवा चर्लपल्ली एक्सप्रेस के परिचालन को स्वीकृत कर दिया गया है. बुंदेलखंड की दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटीसागर और बुंदेलखंड क्षेत्र के लोग सबसे अधिक इलाज करने के लिए नागपुर और हैदराबाद जैसी शहरों में जाते हैं इसके अलावा यहां पर स्टूडेंट व्यापारी और आईटी सेक्टर के लोगों की भी खूब आवाजाही है अभी तक सागर से यात्री बसों या निजी वाहन के माध्यम से इन शहरों तक सफर करती है लेकिन रेल कनेक्टिविटी मिलने की वजह से इनकी पहुंच आसान हो जाएगी. किराया कम लगेगा सफर आरामदायक होता है. हालांकि यह ट्रेन कब से चालू की जाएगी इसका टाइम टेबल आना अभी बाकी है News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sagar,Madhya Pradesh Source link

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