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अवैध बांग्‍लादेशियों की शामत, अब तक 500 हिरासत में लिए गए –...

Last Updated:June 04, 2026, 13:54 IST Illegal Bangladeshi News: देशभर में अवैध तरीके से भारत की सीमा में घुसे घुसपैठियों के खिलाफ एक्‍शन लिया जा रहा है. गुजरात में इसके लिए बकायदा ऑपरेश डेल्‍टा हंट लॉन्‍च किया गया है. इसके तहत सैकड़ों की तादाद में अवैध बांग्‍लादेशियों को पकड़ा गया है. गुजरात में अवैध बांग्‍लादेशियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है. Illegal Bangladeshi News: गुजरात पुलिस ने अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ पूरे राज्य में ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ को तेज कर दिया है. इसी क्रम में पुलिस ने 501 लोगों को हिरासत में लिया है. अधिकारियों ने बताया कि पुलिस की कार्रवाई एक ही समय में कई जिलों में हुई. कोऑर्डिनेटेड एक्‍शन में अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों की पहचान और उनका वेरिफिकेशन किया गया. पुलिस टीमों ने खुफिया जानकारी के आधार पर चिह्नित आवासीय क्षेत्रों, मजदूरों के ठिकानों और अन्य स्थानों पर जांच की. इस कार्रवाई में पुलिस की जिला इकाइयां, क्राइम ब्रांच टीमें और साइबर सेल की टीमें शामिल थीं. ऑपरेशन के शुरुआती चरणों में अधिकारियों ने हजारों संदिग्ध लोगों की जांच की थी और सत्यापन के बाद सैकड़ों लोगों को हिरासत में ले लिया. गुजरात के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने इस पहल को एक खुफिया सूचना आधारित अभियान बताया है, जिसमें पुलिस की विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वित कार्रवाई शामिल है. उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों का उद्देश्य बिना दस्तावेज वाले निवासियों की पहचान करना और जाली दस्तावेज, आवास और रोजगार सहायता से जुड़े संभावित मददगार नेटवर्क की जांच करना है. फेक आधार कार्ड पिछले चरणों में पुलिस की जांच में पहचान के दस्तावेजों की बारीकी से जांच भी शामिल थी. कुछ मामलों में जाली या धोखाधड़ी से प्राप्त आधार रिकॉर्ड के संदिग्ध इस्तेमाल की बात सामने आई और जांच का दायरा उन लोगों और नेटवर्क तक भी बढ़ाया गया, जो कथित तौर पर बिना दस्तावेज वाले निवासियों की मदद कर रहे थे. वेरिफिकेशन के साथ पूछताछ अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया था कि हिरासत में लिए गए लोगों के वेरिफिकेशन के साथ-साथ अन्य संदिग्ध लोगों से भी आगे की पूछताछ जारी रहेगी. ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के पिछले चरणों में अहमदाबाद, सूरत और राजकोट जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर जांच-पड़ताल और लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई दर्ज की गई थी. फिलहाल, हिरासत में लिए गए लोगों का जिला-वार ब्योरा और आगे की कानूनी कार्रवाई समेत अन्य विस्तृत जानकारी, जारी सत्यापन कार्य पूरा होने के बाद सामने आने की संभावनाएं हैं. बता दें कि देशभर में अवैध तरीके से सीमा पार करने वालों पर एक्‍शन लिया जा रहा है. ये लोग नेशनल थ्रेट के तौर पर भी सामने आए हैं. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ahmedabad,Ahmedabad,Gujarat Source link

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इतिहास जिंदा… झुंझुनूं के प्राइवेट बस स्टैंड को अब मिली नई पहचान!...

Last Updated:June 04, 2026, 12:47 IST Jhunjhunu Private Bus Standछ झुंझुनूं शहर के प्राइवेट बस स्टैंड को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है. नगर के पहले शहीद इंद्रसिंह सैनी के सम्मान में प्राइवेट बस स्टैंड का नाम बदलकर “शहीद इंद्रसिंह सैनी बस स्टैंड” रखने का निर्णय लिया गया है. इस फैसले का उद्देश्य शहीद के बलिदान को सम्मान देना और आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान से परिचित कराना है. स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है. बताया जा रहा है कि शहर के प्रमुख स्थानों पर भी शहीद इंद्रसिंह सैनी के नाम को सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाएगा. नाम परिवर्तन के बाद बस स्टैंड की पहचान आधिकारिक रूप से नए नाम से होगी, जिससे यात्रियों और नागरिकों को शहीद की स्मृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा. Jhunjhunu News: झुंझुनूं शहर के प्राइवेट बस स्टैंड का नाम बदल दिया गया है. जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्व सम्मति इस बस स्टैंड का नाम बदला गया है. अब यह बस स्टैंड शहीद इंद्रसिंह सैनी के नाम से जाना जाएगा. ये झुंझुनूं के पहले शहीद थे, जिन्हें देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. जल्द ही मुख्य बोर्ड पर भी शहीद इंद्रसिंह सैनी का नाम लिखा जाएगा. आपको बता दें कि झुंझुनूं शहर के इस बस स्टैंड में केवल प्राइवेट बसों का हो संचालन होता है. यहां से लोकल रूट से लेकर देश के अलग अलग राज्यों के लिए बसे जाती है. इसके अलावा लोक परिवहन बसों का भी संचालन यहां होता है. रोजाना दर्जनों लंबी रूटों की स्लीपर बस यहां चलती है. यह बस स्टैंड शेखावाटी के सबसे बड़े बस स्टैंड में से एक है. इस बस स्टैंड का नाम शाहिद के नाम से किए जाने पर लोगों में खुशी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सही मायने में शहीद इंद्रसिंह सैनी का सही सम्मान है. इस प्राइवेट बस स्टैंड का नाम उनके नाम पर रखे जाने से उनका नाम हमेशा के लिए अमर हो गया है. आने वाली पीढ़ी भी उनके शौर्य और पराक्रम के किस्सों के बारे में जान सकेगी. जानकारी के अनुसार इस बस स्टैंड पर शहीद इंद्रसिंह सैनी की जानकारी भी लिखी जाएगी. Add News18 as Preferred Source on Google जानिए कौन थे इंद्रसिंह सैनी: जवान इंद्रसिंह सैनी जवानों की फैक्ट्री कहे जाने वाले झुंझुनू जिले के पहले शहीद जवान थे. जब वे शहीद हुए तब उनकी पोस्टिंग जम्मू के सांबा कैवेलरी रेजीमेंट में थी. गुरुवार का दिन था, तभी अचानक कुछ आतंकवादियों ने हमला कर दिया. तब उन्होंने हिम्मत से आतंकियों को जवाब दिया. लेकिन, अचानक हुए हमले से नहीं बच सके. एक आतंकी की गोली जवान इंद्रसिंह सैनी को लग गई. इस दौरान वे आखिरी सांस तक लड़ते रहे और अंत में लड़ते लड़ते ही शहीद हो गए. जब उनका शव राजकीय अंतिम संस्कार के लिए लाया गया तभी एक उनकी पत्नी और बच्चों को उनके शहीद होने की खबर नहीं थी. जब शहीद इंद्रसिंह सैनी के घर वालों ने बहुत सारे जवानों को घर आते देखा तो वे सहम गए. जब सेना के अधिकारी ने परिवार वालों को उनका सामान दिया, तो घर में चीख पुकार मच गया. जब लोगों को इस बारे में पता चला तो उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शमिल हुए. इसके बाद उनका स्मारक भी बनाया गया. हर साल उनके शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होता है. इसके अलावा जगह रक्तदान और जगह जगह सेवा के कार्य होते हैं. ऐसे में अब लोगों की मांग के अनुसार उनके नाम पर झुंझुनूं शहर के प्राइवेट बस स्टैंड का नाम रखा गया है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

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धान की रोपाई से पहले कर लें यह काम, 80% तक कम...

बरसात का मौसम शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी है, लेकिन इस बीच किसान धान की रोपाई की तैयारी में जुट गए हैं. अगर आप किसान हैं और धान की रोपाई करना चाहते हैं और चाहते हैं कि आगे चलकर आपकी फसल में खरपतवार न आएं, तो रोपाई से पहले यह जरूरी काम जरूर कर लें. इससे आपकी धान की फसल में खरपतवार की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी. आइए जानते हैं कि वे कौन-से जरूरी उपाय हैं, जिनसे फसल में खरपतवार नहीं उगेंगे. जानकारी के अभाव में किसान नहीं कर पाते सही खेती लोकल 18 से बातचीत में जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि पूर्वांचल में ज्यादातर किसान धान की खेती संडा विधि से करते हैं. इस विधि में पर्याप्त जानकारी के अभाव में किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. खरपतवार को नष्ट करने के लिए किसान काफी पैसा और रसायनों का उपयोग करते हैं, जबकि थोड़ी-सी जानकारी और सावधानी बरतकर इस अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में किसान धान की नर्सरी तैयार कर रहे हैं और लगभग 21 दिन बाद संडा की रोपाई की जाती है. रोपाई से पहले कुछ आवश्यक कार्य कर लेने से खरपतवार की समस्या काफी कम हो सकती है. धान की रोपाई से 20-25 दिन पहले करें हल्की सिंचाई सोम प्रकाश गुप्ता के अनुसार, जब खेत में अंतिम रोपाई करनी हो, तो उससे 20 से 25 दिन पहले किसी भी साधन से हल्की सिंचाई कर दें. इससे खेत में मौजूद खरपतवार के बीज अंकुरित होकर उगने लगेंगे. हल्की सिंचाई के बाद खेत में उगने वाले अधिकांश खरपतवार बाहर आ जाते हैं. जब इन खरपतवारों में दो से तीन पत्तियां निकल आएं, तब रोपाई से पहले खेत में पानी भरकर कीचड़ वाली जुताई कर दें और खरपतवारों को मिट्टी में दबा दें. जब ये खरपतवार कीचड़ में दब जाएंगे और उसके बाद धान की रोपाई कर दी जाएगी, तो वे दोबारा नहीं उग पाएंगे. 80 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं खरपतवार उन्होंने बताया कि रोपाई से पहले हल्की सिंचाई करने पर उस मौसम में उगने वाले 80 से 90 प्रतिशत खरपतवार पहले ही अंकुरित हो जाते हैं. यदि इन खरपतवारों को रोपाई से पहले कीचड़ में दबा दिया जाए, तो लगभग 80 प्रतिशत तक खरपतवार की समस्या समाप्त हो सकती है. इससे किसान खरपतवार नियंत्रण पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से बच सकते हैं. धान की फसल में खरपतवार आने पर महंगे रसायनों और खरपतवारनाशकों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ फसल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए, यदि आप धान की रोपाई करने जा रहे हैं, तो पहले खेत में हल्की सिंचाई करें और उगे हुए खरपतवारों को जुताई के दौरान कीचड़ में दबा दें. इससे आपकी फसल मजबूत होगी और खरपतवार की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी. Source link

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fotula tunnel| lac china border| चीन बॉर्डर पर फटाफट पहुंचेंगे तोप-टैंक, LAC...

Jammu-Kashmir to Ladakh Fotu la Tunnel: भारत सरकार ने चीन की सीमा के बेहद करीब लद्दाख तक फटाफट पहुंचने और जम्मू-कश्मीर से कनेक्ट करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जोजिला सुरंग से भी एक कदम आगे बढ़कर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग-1 फोटू ला पास के पार दो यूनि-डायरेक्शन सुरंगों के निर्माण की बोली प्रक्रिया शुरू कर दी है. ये दोनों ही सुरंगे LAC के इस पार चीन की गुस्ताखियों के मद्देनजर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं और आने वाले दिनों में चीन बॉर्डर के बेहद करीबी इस इलाके में किसी भी मौसम में मिलिट्री हथियारों से लेकर जरूरी सामान तक तुरंत पहुंचाया जा सकेगा. जोजिला सुरंग का ब्रेकथ्रू समारोह अगले हफ्ते होने जा रहा है जो 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा. करीब 7000 करोड़ रुपये की जोजिला सुरंग और फोटू ला पास सुरंग मिलकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के राष्ट्रीय राजमार्ग-1 को ऑल-वेदर रणनीतिक कॉरिडोर बना देंगे. गौरतलब है कि इसी साल मई में सरकार ने फोटू ला सुरंग के लिए बजट आवंटित किया था. फोटू ला सुरंग परियोजना करीब 824.12 करोड़ रुपये की है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है. इसमें लगभग दो-दो किलोमीटर लंबी दो सुरंगें बनानी हैं, साथ में एप्रोच रोड भी, जिससे कुल परियोजना की लंबाई 2.65 किलोमीटर हो जाएगी. फोटू ला सुरंग का महत्व इसकी जगह के कारण है. फोटू ला, श्रीनगर-कारगिल-लेह राजमार्ग पर सबसे ऊंचा बिंदु है, जो लगभग 4,108 मीटर की ऊंचाई पर है. यह पास राष्ट्रीय राजमार्ग-1 का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ने वाली एकमात्र मुख्य सड़क है. कई दशकों से यह हिस्सा इस रूट का सबसे मुश्किल हिस्सा रहा है. तेज मौसम, भारी बर्फबारी और खतरनाक ड्राइविंग की स्थिति अक्सर आवाजाही रोक देती है, अधिकारियों ने बताया कि अब इस सुरंग को पूरा करने के लिए तीन साल की समय-सीमा तय की गई है. अब आड़े नहीं आएगी 5-10 फीट मोटी बर्फ की परत हर सर्दी में फोटू ला पर बर्फ पांच से दस फीट तक जमा हो सकती है, एक दस्तावेज में कहा गया है. सड़क पर बर्फ की परत बनने से ड्राइविंग बहुत खतरनाक हो जाती है, दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और वहां कर्मचारियों को लगातार बर्फ हटाने का काम करना पड़ता है. इतनी ऊंचाई पर पहाड़ी सड़कों के तेज ढलान और तेज मोड़ भी समस्या बढ़ाते हैं. भारी बर्फबारी या खराब मौसम में यहां यातायात पूरी तरह रुक जाता है. हालांकि अब प्रस्तावित सुरंग इन समस्याओं का जड़ से समाधान करेगी. यह सुरंग यातायात को पहाड़ के ऊपर से नहीं, बल्कि नीचे से लेकर जाएगी. पास के खुले हिस्से को बायपास करके यह सुरंग मौसम पर निर्भरता कम कर देगी और लद्दाख की इस महत्वपूर्ण सड़क को ज्यादा भरोसेमंद बना देगी. लेह-कारगिल के बीच आसान होगी यात्रा यह परियोजना पास के पार सड़क की दूरी कम करेगी और लेह-कारगिल के बीच यात्रा को आसान और तेज बनाएगी. इस प्रोजेक्ट का महत्व सिर्फ आम लोगों की सुविधा से काफीद आगे है क्योंकि यह भारत की सबसे जरूरी रणनीतिक सड़कों में से एक बनने जा रही है. इसका इस्तेमाल सैनिकों, उपकरणों, ईंधन, राशन और लद्दाख में आगे तैनात सैनिकों के लिए सामान भेजने के लिए बेहद सुविधाजनक होने जा रहा है. चीन से सैन्य तनाव में जरूरत हुई महसूस 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य तनाव के बाद इस इलाके में मजबूत और बिना रुकावट कनेक्टिविटी की जरूरत और भी ज्यादा साफ हो गई है. मौसम से जुड़ी समस्याएं कम करने और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाओं को अब राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से देखा जा रहा है. जोजिला सुरंग, जो फिलहाल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच बन रही है, अगले हफ्ते ब्रेकथ्रू देखेगी. इसे 2028 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. सबसे खास बात है कि यह एशिया की सबसे लंबी सुरंग होगी. सरकार का लंबा लक्ष्य साफ है कि श्रीनगर-लेह कॉरिडोर पर मौसम से होने वाली सारी रुकावटों को धीरे-धीरे खत्म किया जाए और एक ऐसी यातायात व्यवस्था बनाई जाए जो साल भर चल सके, जिसमें आम लोगों की आवाजाही, आर्थिक विकास और सेना की जरूरतें सभी पूरी हो सकें. Source link

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चुनाव आयोग की टांगें तोड़ देंगे, BJP के बाप की औकात नहीं…ये...

Last Updated:June 04, 2026, 09:50 IST Firhad Hakim Resigns As Kolkata Mayor After Mamata: पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार के संकट के बीच कभी ‘चुनाव आयोग के पैर तोड़ने’ की धमकी देने वाले कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम पूरी तरह शांत पड़ गए हैं. बीजेपी सरकार की धमक और टीएमसी में 58 विधायकों की ऐतिहासिक टूट के बाद अब वह बस अपनी जान बचाने में जुट गए हैं. ख़बरें फटाफट कभी मंच से जहर उगलने वाले फिरहाद हकीम की राजनीति का क्या होने वाला है अंत. Firhad Hakim Resigns: पश्चिम बंगाल की सियासत में कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम की चर्चा तेज हो गई है. फिरहाद हकीम जो ऐसा आदमी जिसकी ममता राज में ऐसी तूती बोलती थी कि बस जुबान जहर ही उगलती थी. बयानों से ‘आग उगलने वाले’  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सबसे विवादित चेहरे के तौर पर लोग उन्हें जानते हैं. लेकिन बीजेपी की सत्ता आते ही अब उनके तेवर पूरी तरह ठंडे पड़ चुके हैं. कभी मंचों से खुलेआम केंद्रीय एजेंसियों, चुनाव आयोग और बीजेपी को घुटनों पर लाने की हुंकार भरने वाले हकीम अब राजनीति में सिर्फ अपनी ‘सेफ एग्जिट’ की गुहार लगा रहे हैं. बंगाल में ममता बनर्जी के राजनैतिक साम्राज्य में आई इस भीषण दरार और बीजेपी की बढ़ती ताकत के बीच फिरहाद हकीम अब चुपचाप कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा देने की सोच रहे हैं. मंगलवार रात से उनके इस्तीफ की बात भी होने लगी है. कल वे विधानसभा में बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी के साथ भी देखे गए थे, जिसने सबको चौंका दिया. आप भी देखें ममता के राज में जहर उगलने वाले इंसान का हाल:- Source link

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malviya nagar hotel owner lovkesh bajaj: मालवीय नगर होटल में आग के...

होमताजा खबरDelhi आग की लपटें उठते हुए देखीं लेकिन… मालवीय नगर होटल मालिक लवकेश का बड़ा खुलासा Last Updated:June 04, 2026, 08:37 IST Delhi Malviya nagar restaurent owner luvkesh Bajaj: मालवीय नगर अग्‍न‍िकांड के आरोपी और होटल के मा‍ल‍िक लवकेश बजाज ने द‍िल्‍ली पुलिस की पूछताछ में बड़ा खुलासा क‍िया है. उसने बताया क‍ि वह आग लगने के समय होटल के पास ही था लेक‍िन जैसे जैसे आग बढ़ती गई, वह डर के मारे मौके से भाग गया और अपने घर भी नहीं गया, सड़कों पर घूमता रहा. Malviya nagar fire update today: मालवीय नगर आग मामले में होटल माल‍िक लवकेश बजाज को द‍िल्‍ली पुल‍िस के सामने बड़ा खुलासा. Delhi Malviya nagar restaurent owner luvkesh Bajaj: दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में जले होटल के मालिक लवकेश बजाज ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में बड़ा खुलासा किया है. लवकेश बजाज ने कल रात दिल्ली पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह घटना के वक्त मौके पर ही मौजूद था. उसने होटल में आग लगते हुए देखी लेकिन वह उस वक्त मौके से होकर गुजर गया और वहां रुका नहीं. लवकेश बजाज ने पुलिस को बताया कि वह घबरा गया था और डर के चलते मौके से भाग गया था और आग की घटना को देखने के बाद भी वहां रुका नहीं था. उसने बताया कि जब यह अग्निकांड हुआ तो उसकी वह इतना परेशान था कि अपने घर भी नही गया और सड़कों पर घूमता रहा. पूछताछ मे उसने खुलासा किया की उसने तीन साल पहले अहुलवालिया नाम की एक पार्टी से यह जगह बिल्डिंग थी और उसमे होटल कम गेस्ट हाउस चला रहा था.पहले यहां खादी की शॉप थी. लवकेश बजाज ने कहा कि जिस वक्त उसने यह बिल्डिंग ली थी तब भी इमारत काफी जर्जर थी. हालांकि पूछताछ में उसने दावा किया कि उसने BNB, यानी बेड एंड ब्रेकफास्ट का लाइसेंस ले रखा था और टूरिस्ट, हेल्थ रेस्टोरेंट की परमिशन ली थी. अनुमति के बाद ही वह इसे चला रहा था. हालांकि पुलिस को उसकी सुनाई कहानी पर यकीन नहीं हो रहा है और दिल्ली पुलिस उसके इस दावों की जांच करवा रही है. आज गुरुवार को करीब 2 बजे के आसपास उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा.पुलिस कोर्ट से आरोपी के 3 से 4 दिन की पुलिस रिमांड की मांग करेगी. बता दें कि अग्निकांड वाले दिन भी मौके पर मौजूद लोगों ने बताया था कि आग लगने के तुरंत बाद ही होटल मालिक लवकेश बजाज को सूचना दे दी गई थी. सुबह 8 बजकर 52 मिनट पर उन्हें फोन कर आग लगने और मौके के हालात की जानकारी दी गई थी. आग की सूचना मिलने के बाद लवकेश बजाज करीब 15 मिनट के भीतर ही घटनास्थल पर पहुंच गए थे. हालांकि जैसे जैसे आग धधकती गई, वह करीब 40 से 45 मिनट तक होटल और गेस्ट हाउस के आसपास मौजूद रहे, लेकिन फिर अचानक ही वह मौके से फरार हो गए. इस दौरान आग लगातार फैलती रही और अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए राहत एवं बचाव कार्य के बावजूद 21 लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोगों ने बिल्डिंग की छत से कूदकर अपनी जान बचाई. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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धान की फसल से चाहते हैं ज्यादा पैदावार, तो अपनाएं यह सिंपल...

होमताजा खबरकृषि धान की फसल से चाहते हैं ज्यादा पैदावार, तो अपनाएं यह सिंपल सी तकनीक Last Updated:June 04, 2026, 07:27 IST शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि डीएसआर तकनीकी कम सिंचित क्षेत्र के किसानों के लिए बेहतर तकनीकी होने के साथ ही भूगर्भ जल बचाओ की दिशा में एक बेहतर तकनीकी है.यह तकनीकी कम सिंचित क्षेत्रों के साथ ही पानी की अधिकता वाले क्षेत्र के लिए भी बेहद उपयोगी है.  रायबरेली: खरीफ का सीजन चल रहा है. धान इस सीजन की मुख्य फसल मानी जाती है. किसान धान की खेती की तैयारी में जुटे हुए हैं क्योंकि धान की खेती के लिए सबसे पहले धान की नर्सरी तैयार की जाती है. नर्सरी तैयार होने के बाद फसल की रोपाई की जाती है. परंतु कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पानी की भारी कमी होने के चलते धान की खेती करना किसानों के लिए काफी कठिन होता है. इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कृषि विशेषज्ञ अब किसानों को पारंपरिक धान की रोपाई के बजाय धान की खेती की एक नई तकनीक के प्रति जागरूक कर रहे हैं, जिसमें कम लागत और कम पानी की आवश्यकता होती है. किसान यदि इस तकनीक से धान की खेती करते हैं तो गिरते भूजल स्तर को बचाने में भी मदद मिलेगी. धान की बुवाई कौन सी टेक्निक से करें दरअसल, रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी कृषि अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद) ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि धान की खेती करने वाले किसान पारंपरिक रोपाई के बजाय अब धान की सीधी बुवाई “DSR (Direct Seeded Rice)” तकनीक से खेती करें तो यह उनके लिए अत्यधिक लाभकारी होगी. इस तकनीक से किसानों का खर्च कम होगा और मेहनत भी कम लगेगी. यह तकनीक पानी की बचत करने के साथ-साथ खेती की लागत घटाकर किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है. उन्होंने बताया कि डीएसआर विधि से खेती करने पर पारंपरिक रोपाई की तुलना में दो से तीन सिंचाई की बचत होती है. साथ ही खेत में पानी भरने की आवश्यकता नहीं होती है. खेत में केवल पर्याप्त नमी होने पर भी इस तकनीक के तहत धान की बुवाई करके किसान अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं. पारंपरिक तरीके से रोपाई और बुवाई में अंतर पारंपरिक तरीके से धान की खेती में नर्सरी तैयार करनी पड़ती है और लगभग 25 से 30 दिनों बाद रोपाई की जाती है, जिसमें समय, मेहनत और लागत अधिक लगती है. इसके विपरीत, सीधी बुवाई में केवल खेत में हल्की नमी की आवश्यकता होती है. इसमें धान के बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है. कम सिंचित क्षेत्रों के लिए वरदान शिव शंकर वर्मा ने बताया कि डीएसआर तकनीक कम सिंचित क्षेत्रों के किसानों के लिए बेहतर है और यह भूगर्भ जल संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी तकनीक है. यह तकनीक कम सिंचित क्षेत्रों के साथ-साथ अधिक जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी है. कतारबद्ध बुवाई जरूरी डीएसआर तकनीक से धान की खेती करने के लिए कतारबद्ध बुवाई करना आवश्यक है. इसके लिए बाजार में डीएसआर मशीनें उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से बीज की बुवाई की जा सकती है. इससे एक ही बार में कई हेक्टेयर भूमि पर बुवाई संभव हो जाती है, जिससे समय, मेहनत और लागत दोनों की बचत होती है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rae Bareli,Rae Bareli,Uttar Pradesh Source link

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आम की फसल से चाहिए बंपर पैदावार, तो तुड़ाई से पहले इन...

होमताजा खबरकृषि आम की फसल से चाहिए बंपर पैदावार, तो तुड़ाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान Last Updated:June 04, 2026, 06:36 IST मेरठ के जिला उद्यान अधिकारी ने आम उत्पादक किसानों को बढ़ते तापमान के बीच फसल की देखभाल को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है. उन्होंने खेतों में हल्की सिंचाई बनाए रखने, दोपहर के समय आम की तुड़ाई से बचने और फलों को कीटों से सुरक्षित रखने के लिए लाल फ्रूट कवर बैग के इस्तेमाल की सलाह दी है. विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों को अपनाकर किसान आम की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ा सकते हैं, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है. मेरठ से संबंधित ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले जिन किसानों ने भी अपने खेतों में बागवानी की है, उसमें आम की बंपर पैदावार भी देखने को मिल रही है. साथ ही आम धीरे-धीरे पकने की कगार पर भी पहुंच गया है. लेकिन जिस तरह से लगातार मौसम में बदलाव हो रहा है. उसको लेकर किसान चिंतित हैं, आम की फसल को नुकसान ना हो, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए लोकल 18 के टीम द्वारा जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार से खास बातचीत की. सिंचाई का भी रखें विशेष ध्यान लोकल -18 की टीम से खास बातचीत करते हुए जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया की जिस तरह से लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है. ऐसे में खेतों में सिंचाई की प्रक्रिया का भी विशेष रूप से ध्यान रखें. जमीन में नमी बरकरार रहे. इसीलिए हल्की सिंचाई की प्रक्रिया को किसान जारी रख सकते है.  जिससे आम की फसल को काफी फायदा हो. लेकिन अधिक सिंचाई की प्रक्रिया को बिल्कुल भी ना अपनाए, क्योंकि इससे किसानों को नुकसान हो सकता है. आम की कब करें तुड़ाई इसी के साथ उन्होंने बताया कि जल्द ही आम की तुड़ाई भी शुरू हो जाएगी. अक्सर देखने को मिलता है कि किसान दोपहर के समय भी आम के फल की तुड़ाई करते हैं. जबकि यह फसल व किसान की सेहत दोनों के लिए के लिए नुकसानदायक है. ऐसे में सुबह 12:00 बजे से पहले और दोपहर 3:00 बजे के बाद ही आम की तुड़ाई करें, ताकि आम की फसल को बिल्कुल भी नुकसान ना हो. फ्रूट कवर का भी करें अवश्य उपयोग  उन्होंने बताया आम के फल पर किसान लाल कलर के फ्रूट कवर का प्रयोग अवश्य करें, क्योंकि इस मौसम में देखने को मिलता है कि विभिन्न प्रकार की कीट पतंगे भी आम में लगने की संभावनाएं बढ़ जाती है. ऐसे में यह आम का लाल फ्रूट बैग सभी तरह के कीट पतंग से आम के फल को बचाएगा. वही जो उसकी क्वालिटी है, वह काफी बेहतर होगी. जिससे किसानों को दाम भी बेहतर मिलेंगे. उन्होंने बताया कि इसके लिए उद्यान विभाग द्वारा भी सरकार के दिशा निर्देश अनुसार सब्सिडी के अंतर्गत किसानों को फ्रूट कवर बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं. बताते चलें कि अगर आप सभी भी लाल कलर के फ्रूट कवर को लेना चाहते हैं, तो उद्यान विभाग में संपर्क कर सकते हैं. साथ ही इन सभी बातों का विशेष रूप से ध्यान रखेंगे. तो निश्चित तौर पर आम के फल की बंपर पैदावार होगी. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Meerut,Meerut,Uttar Pradesh Source link

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Today Weather Live | Aaj Ka Mausam Live | आज का मौसम:...

Today Weather Live: देशभर में लोग जिस मानसून का इंतजार कर रहे थे, अब उसकी आहट साफ सुनाई देने लगी है. बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक मौसम का सिस्टम तेजी से एक्टिव हो चुका है और इसका असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है. कई राज्यों में आसमान का रंग बदल चुका है, तेज हवाओं ने गर्मी की रफ्तार पर ब्रेक लगाना शुरू कर दिया है और मौसम विभाग (IMD) लगातार अलर्ट जारी कर रहा है. IMD का कहना है कि अगले कुछ घंटों और दिनों में देश के कई हिस्सों में मौसम अचानक करवट ले सकता है. कहीं धूलभरी आंधी चलेगी तो कहीं बिजली गिरने और ओलावृष्टि का खतरा रहेगा. सबसे ज्यादा चिंता उन इलाकों को लेकर है जहां 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना जताई गई है. मौसम वैज्ञानिक मान रहे हैं कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बन रहे सिस्टम अब पूरे देश के मौसम को प्रभावित करेंगे. यही वजह है कि दिल्ली से लेकर बिहार, राजस्थान से लेकर ओडिशा और दक्षिण भारत तक लगातार चेतावनियां जारी की जा रही हैं. गर्मी से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन मौसम का यह बदला हुआ रूप कई जगह परेशानी भी बढ़ा सकता है. दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और केरल में इसकी एंट्री के लिए परिस्थितियां लगभग पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं. IMD के अनुसार अगले कुछ घंटों में मानसून केरल पहुंच सकता है, जिसके बाद दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है. मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और द्रोणिका जैसे कई सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं. यही वजह है कि उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत में भी तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां बढ़ती नजर आ रही हैं. कई राज्यों में बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जून की शुरुआत में ही मौसम का इतना एक्टिव होना इस बार मानसून के तेज रफ्तार पकड़ने का संकेत भी हो सकता है. हालांकि तेज बारिश और तूफानी हवाओं के कारण किसानों, यात्रियों और खुले इलाकों में रहने वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है. आने वाले दिनों में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज देश के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है. मौसम विभाग के अनुसार देशभर में कई स्तरों पर मौसम प्रणाली सक्रिय बनी हुई है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है, जबकि वहां से लेकर उत्तरी तमिलनाडु तक एक द्रोणिका फैली हुई है. इसके अलावा पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश, पूर्वी-मध्य अरब सागर और उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर भी ऊपरी हवा के साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं. इन सभी सिस्टम का संयुक्त असर अब देश के मौसम पर दिखाई देने लगा है. कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और तेज हवाओं की गतिविधियां दर्ज की जा सकती हैं. मौसम विभाग ने साफ कहा है कि आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम तेजी से बदलता रहेगा. IMD के मुताबिक इस सप्ताह केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, मेघालय और अंडमान-निकोबार समेत कई राज्यों में बारिश और आंधी का असर देखने को मिल सकता है. कई इलाकों में तापमान में गिरावट आएगी, जबकि कुछ क्षेत्रों में धूलभरी आंधी और ओलावृष्टि भी हो सकती है. मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है. किसानों को भी फसल और पशुओं की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने को कहा गया है. दिल्ली-NCR में तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट दिल्ली-NCR में अगले दो दिनों के दौरान मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आ सकता है. राजधानी में आंशिक बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार दोपहर और शाम के समय गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. कई इलाकों में धूलभरी आंधी भी देखने को मिल सकती है. हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है, जबकि कुछ स्थानों पर झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. बारिश के कारण तापमान में गिरावट होगी और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है. हालांकि बिजली गिरने और अचानक तेज हवाएं चलने की आशंका को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है. यूपी में आंधी-तूफान का बढ़ता खतरा उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग ने 4 से 6 जून तक कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है. वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, आगरा, झांसी, जौनपुर और चंदौली समेत कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश की संभावना है. कुछ जगहों पर 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. पिछले 24 घंटों के दौरान भी कई जिलों में तेज हवाएं दर्ज की गईं. मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है. लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है. बिहार में बारिश और लू दोनों का असर बिहार में मौसम का मिजाज मिला-जुला रहने वाला है. राज्य के दक्षिण-पश्चिम हिस्सों में लू चलने की संभावना है, जबकि उत्तर-पूर्वी जिलों में गरज-चमक और बारिश का असर देखने को मिल सकता है. सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार समेत कई जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. IMD के अनुसार हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. बारिश के कारण कुछ इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज होगी, लेकिन दक्षिणी हिस्सों में उमस और गर्मी बनी रह सकती है. मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है. ओडिशा में चार दिन तक गरज-चमक का खतरा ओडिशा में अगले चार दिनों तक मौसम सक्रिय बना रहने की संभावना है. IMD ने 22 जिलों के लिए

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IMD Tomorrow Weather Update | IMD Alert | 4 June Mausam |...

होमफोटोदेश दौड़ती-भागती आ रही खुशखबरी, मौसम लेगा U-टर्न, IMD का मूसलाधार बारिश का अलर्ट Last Updated:June 03, 2026, 23:48 IST IMD Tomorrow Weather: मौसम विभाग (आईएमडी) ने 4 जून 2026 के लिए देश भर का मौसम पूर्वानुमान जारी कर दिया है. एक तरफ जहां दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल तट पर दस्तक देने की पूरी संभावना बन गई है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर-पश्चिम भारत के सभी राज्यों में भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलने वाली है. 4 से 6 जून के बीच दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में तापमान 2 से 4 डिग्री तक गिरेगा. हालांकि, बिहार के लोगों का लू भी टॉर्चर झेलना पड़ सकता है. केरल और तमिलनाडु में अति भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान में ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है. IMD बुलेटिन के अनुसार, देश के कई हिस्सों में 40-50 से लेकर किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं और गरज-चमक के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना है. IMD Monsoon Alert: देशभर में मौसम फिर से पल-पल पलटी मार रहा है. चिलचिलाती धूप, जानलेवा लू, आंधी-तूफान और अब मानसून की धमाकेदार एंट्री – मौसम विभाग (आईएमडी) का नए पूर्वानुमान में कई राज्यों के लिए बड़ी खुशखबरी है, तो कई राज्यों के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है. 4 जून का दिन मौसम के लिहाज से बेहद खास होने वाला है. दक्षिण-पश्चिम मानसून अपनी पूरी ताकत के साथ भारतीय मुख्य भूमि में प्रवेश करने के लिए तैयार है. आइए, एक शानदार नजर डालते हैं कि कल 4 जून को देश के 10 प्रमुख राज्यों और क्षेत्रों में मौसम का मिजाज कैसा रहेगा. आईएमडी के आधिकारिक पूर्वानुमान के अनुसार, 4 जून के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों और बंगाल की खाड़ी के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल हो गई हैं. मानसून की इस एंट्री का सीधा असर केरल और माहे पर पड़ेगा, जहां 3 से 8 जून तक अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है. इसके अलावा, तटीय कर्नाटक और लक्षद्वीप में भी 3 से 7 जून तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. उत्तर-पश्चिम भारत के लोगों के लिए 4 जून एक बड़ा सुकून लेकर आ रहा है. मौसम विभाग का कहना है कि 4 से 6 जून के बीच उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट आएगी. इसके साथ ही, 3 और 4 जून को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार (जो 70 किमी तक जा सकती है) से भयंकर तूफानी हवाएं (Thunder squall) चलने की संभावना है. Add News18 as Preferred Source on Google जहां एक तरफ दिल्ली-NCR को गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं बिहार के लिए मौसम अभी भी क्रूर बना रहेगा. मौसम विभाग की स्पष्ट और गंभीर चेतावनी है कि 4 से 6 जून के दौरान बिहार में हीटवेव की स्थिति बनी रहने की प्रबल संभावना है. लोगों को दिन के समय छतरियों का उपयोग करने और खुद को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है. उत्तर प्रदेश के मौसम में मिला-जुला असर देखने को मिलेगा. पूर्वानुमान के अनुसार, 3 से 6 जून के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट से लेकर हल्की या मध्यम बारिश हो सकती है. इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गरज और चमक के साथ तेज हवाएं चलने की भी उम्मीद है. पहाड़ी और रेगिस्तानी इलाकों में मौसम बेहद खतरनाक रूप ले सकता है. IMD के मुताबिक, 3 और 4 जून को जम्मू-कश्मीर और राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) होने की कड़ी संभावना है. इसके अलावा, पश्चिमी राजस्थान में 3 और 4 जून को तथा पूर्वी राजस्थान में 3 से 5 जून तक गरज और तेज हवाओं (40-50 kmph) के साथ बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है. पहाड़ी राज्यों में अगले कुछ दिनों तक मौसम काफी सक्रिय और सुहावना रहने वाला है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में 3 से 6 जून के बीच गरज और बिजली चमकने के साथ-साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की पूरी संभावना है. वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी 3 से 5 जून के दौरान इसी तरह का बरसाती मौसम बना रहेगा. इस अवधि में इन सभी पहाड़ी क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज और झोंकेदार हवाएं चलने का भी अलर्ट जारी किया गया है, जिससे भीषण गर्मी से झुलस रहे लोगों और पहाड़ों का रुख करने वाले पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी. मध्य प्रदेश के निवासियों को 4 जून को घर से बाहर निकलते वक्त विशेष सावधानी बरतनी होगी. मौसम विभाग के अनुसार, 4 जून को मध्य प्रदेश में छिटपुट ओलावृष्टि होने की पूरी संभावना है. वहीं पड़ोसी राज्यों विदर्भ और छत्तीसगढ़ में 4 से 6 जून के बीच 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान (Thundersquall) का कड़ा अलर्ट भी जारी किया गया है. पश्चिम भारत में भी मौसम तेजी से करवट ले रहा है. कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में 3 से 6 जून के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. हालांकि, मौसम विभाग ने 3 जून को कोंकण और गोवा में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की चेतावनी दी थी. कोंकण के पालघर, ठाणे, मुंबई, रायगढ़ और रत्नागिरी जिलों में गर्म और उमस भरा मौसम बना रहेगा. हालांकि, दोपहर के बाद कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है. इस क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है और मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है. पूर्वी भारत में भी मानसूनी हलचल के कारण बारिश का दौर शुरू होने वाला है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 4 से 6 जून के दौरान छिटपुट भारी बारिश होने की संभावना है. इसके साथ ही 4 से 8 जून तक गांगेय पश्चिम बंगाल में भी छिटपुट से हल्की बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन रही है. पूर्वोत्तर के राज्यों में बादलों ने अपना डेरा डाल लिया है. मौसम विभाग ने बताया है कि 4 से 8 जून तक

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