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झारखंड

आसंगी चेकडैम में डूबे दूसरे छात्र का शव बरामद, इलाके में शोक

भास्कर न्यूज| सरायकेला आरआईटी थाना क्षेत्र स्थित आसंगी चेकडैम में नहाने के दौरान डूबे दूसरे स्कूली छात्र का शव रविवार सुबह बरामद कर लिया गया। इसके साथ ही हादसे में लापता दोनों छात्रों के शव मिल चुके हैं। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे इलाके में शोक का माहौल है। शनिवार दोपहर करीब एक बजे कल्पनापुरी निवासी उत्सव और एस-टाइप निवासी लव आसंगी चेकडैम में नहाने गए थे। इसी दौरान दोनों गहरे पानी में चले गए। दोनों डूब गए। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और स्थानीय गोताखोरों की टीम ने राहत व खोज अभियान शुरू किया। शनिवार को ही लव का शव बरामद कर लिया गया था। उत्सव की तलाश देर रात तक जारी रही। सफलता नहीं मिल सकी। रविवार सुबह स्थानीय लोगों ने चेकडैम के पानी में एक शव तैरता देखा। सूचना मिलने पर आरआईटी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव को बाहर निकालकर उसकी पहचान उत्सव के रूप में की गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आसंगी चेकडैम में पहले भी कई डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं। Source link

झारखंड

जमशेदपुर में चापड़ के बल पर लूट का प्रयास नाकाम:लोगों ने दो...

जमशेदपुर के बर्मामाइंस थाना क्षेत्र में रविवार रात चापड़ के बल पर लूट का प्रयास किया गया, जिसे स्थानीय लोगों की सतर्कता ने नाकाम कर दिया। घटना उस समय हुई जब स्कूटी पर सवार दो युवक बारीडीह निवासी राजेश कुमार को निशाना बनाकर पहुंचे। आरोपियों ने अचानक चापड़ से हमला कर उनसे नकदी छीन ली और इसके बाद उनका मोबाइल लूटने की कोशिश करने लगे। हालांकि राजेश ने विरोध करते हुए शोर मचाया, जिससे आसपास के लोग सतर्क हो गए। देखते ही देखते कई लोग मौके पर जमा हो गए और दोनों बदमाशों को पकड़ लिया। लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने हथियार और स्कूटी जब्त की घटना की जानकारी मिलते ही बर्मामाइंस थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किया गया चापड़ बरामद कर लिया है, साथ ही आरोपियों की स्कूटी को भी जब्त कर थाने ले जाया गया है। दोनों आरोपियों से फिलहाल पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे किसी गिरोह से जुड़े हैं या नहीं। इससे पहले भी इस तरह की वारदातों में उनकी संलिप्तता रही है या नहीं। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों ने इलाके की रेकी कर वारदात को अंजाम दिया या यह अचानक की गई घटना थी। लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाएं पीड़ित राजेश कुमार ने पुलिस को बताया कि वह सड़क किनारे लघुशंका कर रहे थे, तभी अचानक दोनों आरोपी पहुंचे और हमला कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर शहर में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में जमशेदपुर में लूट, छिनतई, फायरिंग और चापड़बाजी की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। बीते शनिवार को सिदगोड़ा में जन्मदिन समारोह से लौट रहे भाई-बहन से स्नैचिंग की घटना हुई थी, जबकि शुक्रवार को कदमा के रामजनम नगर में एक युवक को गोली मार दी गई थी। इससे पहले टेल्को क्षेत्र में भी चापड़ के बल पर लूट की वारदात सामने आई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। Source link

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बारिश में टमाटर से होगी तगड़ी कमाई! लेकिन भूलकर भी न करें...

होमवीडियोकृषि बारिश में टमाटर से होगी तगड़ी कमाई! लेकिन भूलकर भी न करें ये 3 बड़ी गलतियां X बारिश में टमाटर से होगी तगड़ी कमाई! लेकिन भूलकर भी न करें ये 3 बड़ी गलतियां   बरसात का मौसम टमाटर किसानों के लिए अच्छी कमाई का अवसर लेकर आता है, क्योंकि इस दौरान बाजार में कीमतें कई बार 200 से 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती हैं. कृषि विशेषज्ञ वकील यादव के अनुसार, बारिश में टमाटर की खेती करते समय ऊंची जमीन या मेड़ों पर पौधे लगाना और पानी निकासी की उचित व्यवस्था करना बेहद जरूरी है. अधिक नमी के कारण फफूंद और कीटों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए नियमित निगरानी और समय पर दवा का छिड़काव आवश्यक है. साथ ही खरपतवार हटाकर मल्चिंग करने से फसल स्वस्थ रहती है और बेहतर उत्पादन मिलता है. Source link

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दिल्ली में हेमंत सोरेन पेश करेंगे डिजिटल रोडमैप, जानें क्या है रांची...

Last Updated:July 06, 2026, 20:46 IST Jharkhand Digital Roadmap: झारखंड AI, डिजिटल गवर्नेंस में नई पहचान बनाएगा. CM हेमंत सोरेन 8-9 जुलाई को दिल्ली में डिजिटल रोडमैप पेश करेंगे. रांची IT पार्क में निवेश प्रस्ताव भी रखा जाएगा. जानें क्या है रांची आईटी पार्क और ड्राफ्ट एआई पॉलिसी. रांची: झारखंड अब र्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल गवर्नेंस और आईटी निवेश के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नई पहचान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. 8 और 9 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन राज्य का डिजिटल रोडमैप प्रस्तुत करेंगे. इस दौरान झारखण्ड की आईटी, आईटीईएस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़ी भावी विकास रणनीति देश-विदेश के उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के समक्ष रखी जाएगी. वैश्विक मंच पर लॉन्च होगा रांची आईटी पार्कराष्ट्रीय स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का उद्देश्य झारखण्ड को भारत के एआई परिदृश्य में एक ऐसे राज्य के रूप में स्थापित करना है. जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल तकनीकी नवाचार के रूप में नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता एवं नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. कार्यक्रम के पहले दिन देश-विदेश की लगभग 100 अग्रणी टेक एवं आईटी कंपनियों के प्रतिनिधि तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी दो अलग-अलग सत्रों में भाग लेंगे. नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के जरिए झारखण्ड सरकार का उद्देश्य राज्य को डिजिटल नवाचार, आईटी निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन तथा भविष्य की प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है. राष्ट्रीय स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के दौरान पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर रांची आईटी पार्क को निवेश प्रस्ताव के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा. ड्राफ्ट एआई पॉलिसी-2026 बदलेगी सूरतलगभग 100.97 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाला यह आईटी पार्क राजधानी रांची के कोर कैपिटल एरिया में स्थित है. यह परिसर आईआईएम रांची के समीप तथा बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से भी बगल में स्थित है. जिससे उत्कृष्ट कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी. राज्य में प्रतिवर्ष 20000 से अधिक आईटी स्नातकों की उपलब्धता तथा झारखंड आईटी नीति-2023 के अंतर्गत पूर्वी भारत में सर्वाधिक आकर्षक प्रोत्साहनों-50 प्रतिशत पूंजीगत निवेश प्रतिपूर्ति, 100 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क छूट एवं 100 प्रतिशत विद्युत शुल्क छूट जैसे प्रावधानों को उद्योग जगत के समक्ष रखा जाएगा. कंसल्टेशन के दौरान विभाग द्वारा ड्राफ्ट एआई पॉलिसी-2026 भी प्रमुख हितधारकों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी जो वर्ष 2026-2031 की अवधि के लिए होगी. प्रस्तावित नीति के तहत मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में स्टेट एआई मिशन के गठन, JAP-IT को नोडल एजेंसी बनाने तथा India AI के साथ इंटर ऑपरेबल झारखण्ड एआई क्लाउड विकसित करने का प्रस्ताव है. साथ ही, विभिन्न विभागों में एआई आधारित उपयोगों के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता एवं सेवा वितरण को सुदृढ़ करने की रूपरेखा भी इसमें सम्मिलित है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

झारखंड

करणी सेना नेता हिमांशु हत्याकांड का आरोपी खाटू से गिरफ्तार:श्याम बाबा के...

जमशेदपुर करणी सेना नेता हिमांशु हत्याकांड में फरार चल रहे आरोपी नीरज सिंह को पुलिस ने खाटू से गिरफ्तार कर लिया। झारखंड के जमशेदपुर में 27 जून को बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर करनी सेना के नेता हिमांशु सिंह की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से आरोपी फरार चल रहा था। सोमवार सुबह आरोपी बार संचालक नीरज सिंह पहले श्याम बाबा के दर्शन करने सीकर के खाटूश्यामजी पहुंचा था। आरोपी अपने बेटे आदित्य के साथ खाटूश्यामजी में दर्शन करने के लिए आया था। श्याम बाबा के दर्शन करने के बाद आरोपी एक रेस्टोरेंट गया, जहां दबिश देकर टीम ने उसे पकड़ लिया गया। आरोपी नीरज सिंह को झारखंड पुलिस के हवाले किया जाएगा। जानिए, क्या है पूरा मामला झारखंड के जमशेदपुर में 27 जून को बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के अंदर रात करीब 11:30 बजे कुछ लड़के युवतियों से छेड़खानी कर रहे थे। इसी बात को लेकर दो गुटों के बीच मारपीट होना शुरू हो गई। इस दौरान करनी सेना नेता हिमांशु सिंह और प्रत्यूष नाम के युवक ने बीच बचाव कर मामले को शांत करा दिया। मामला शांत होने के बाद जब हिमांशु और प्रत्यूष बार से बाहर निकले तो करीब 8 से 10 लड़कों ने उन्हें घेर लिया। बदमाशों ने इस दौरान हिमांशु सिंह पर चाकू से हमला करना शुरू कर दिया। हालांकि, इस दौरान पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और हिमांशु को पकड़कर अपनी जीप की तरफ ले गई, लेकिन वहां पर भी कुछ युवकों ने हिमांशु पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद बार मालिक नीरज सिंह सहित 11 लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। अब नीरज की गिरफ्तारी होने के बाद मामले में कुल 9 आरोपी गिरफ्तार हो चुके है। घटना के बाद आरोपी नीरज सिंह पहले तो फरार होने के लिए कोलकाता चला गया, इसके बाद हवाई मार्ग से राजस्थान पहुंचा था। आरोपी की SIT की टीम लगातार कर रही थी पीछा दरअसल, नीरज सिंह की गिरफ्तारी के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम(SIT) लगातार पीछा कर रही थी। टीम को क्लू मिला था कि आरोपी खाटू में दर्शन करने आया हुआ है। यह इनपुट लोकल पुलिस से शेयर किया गया। जिस पर खाटू पुलिस थाने के हेड कॉन्स्टेबल बनवारी और कॉन्स्टेबल राजेंद्र गढ़वाल ने मंडा रोड पर स्थित एक होटल के रेस्टोरेंट से आरोपी को गिरफ्तार किया। अब आरोपी को झारखंड पुलिस को सौंपा जाएगा। Source link

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रनिंग रूम इंचार्ज का क्षत-विक्षत शव मिला:कोडरमा रेलवे स्टेशन के पासट्रेन से...

धनबाद-गया रेलखंड पर कोडरमा रेलवे स्टेशन के ईस्ट केबिन के पास एक क्षत-विक्षत शव मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही कोडरमा जीआरपी टीम मौके पर पहुंची और देखा कि शव बुरी तरह क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा था। मृतक का सिर, धड़ और हाथ-पैर अलग-अलग स्थानों पर बिखरे हुए थे। जीआरपी ने तत्परता दिखाते हुए शव को कब्जे में लेकर थाना पहुंचाया और आगे की कार्रवाई शुरू की। शुरुआती जांच में मामला ट्रेन से कटने का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जींस और आई-कार्ड से हुई पहचान इसी बीच कोडरमा स्टेशन के लोको रनिंग रूम के कर्मचारी अपने इंचार्ज बी. चंपईया की तलाश कर रहे थे। उन्हें जब शव मिलने की जानकारी मिली, तो वे जीआरपी थाना पहुंचे। वहां शव की पहचान मृतक के पहने हुए जींस पैंट और जेब से मिले आई-कार्ड के आधार पर बी. चंपईया के रूप में की गई। बताया गया कि वे पिछले एक वर्ष से कोडरमा लोको रनिंग रूम के इंचार्ज के पद पर कार्यरत थे। घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई है। ट्रैक पार करते समय हादसे की आशंका लोको स्टाफ के अनुसार, आशंका जताई जा रही है कि बी. चंपईया सुबह के समय ब्रश करने के दौरान रेलवे ट्रैक पार कर रहे होंगे, तभी किसी अज्ञात ट्रेन की चपेट में आ गए। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।इधर, सहकर्मियों ने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले एक अधिकारी के साथ उनका विवाद हुआ था, जिसके बाद से वे मानसिक रूप से तनाव में थे। Source link

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ये नदी नहीं… मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे है, बारिश ने बना दिया समंदर

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की तस्वीर पूरी तरह बदल दी. तेज रफ्तार वाहनों के लिए मशहूर यह एक्सप्रेसवे कई जगहों पर पानी में डूब गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर लोग कह रहे हैं, ये नदी नहीं… मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे है. सड़क पर इतना पानी भर गया कि कई वाहन रेंगते नजर आए, जबकि कुछ जगहों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया. प्रशासन ने लोगों से बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करने की अपील की है. भारी बारिश के चलते जलनिकासी व्यवस्था भी प्रभावित हुई, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. Source link

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Gangster Sabbir Alams Ambikapur Business Hit; FIR Against Partner

वासेपुर का कुख्यात गैंगस्टर सब्बीर आलम 13 साल से अंबिकापुर में छिपकर रह रहा था। झारखंड के वासेपुर का कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम (60) और उसका सहयोगी जावेद अंबिकापुर में 13 साल से छिपकर रह रहे थे। बस संचालक के साथ पार्टनरशिप में बसें और 40 से ज्यादा एम्बुलेंस चला रहा था। गैंगस्टर ने करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर आलीशान मकान भी बनवाय . दोहरे हत्याकांड मामले में शब्बीर आलम को आजीवन कारावास की सजा मिली है। धनबाद पुलिस भगोड़ा घोषित कर चुकी है। उसकी तलाश की जा रही थी। 3 दिन पहले झारखंड पुलिस अंबिकापुर पहुंची थी। छापेमारी से पहले गैंगस्टर और उसका साथी दोबारा फरार हो गए। सरगुजा पुलिस ने सोमवार को गैंगस्टर के सहयोगी और पार्टनर बस संचालक बैदुल खान (57) के खिलाफ कोतवाली थाने में FIR दर्ज की है। आरोप है कि बैदुल खान ने यह जानते हुए कि शब्बीर आलम भगोड़ा घोषित है, उसे अपने यहां पनाह दी। पुलिस अब इनके आर्थिक नेटवर्क और मददगारों की कुंडली खंगाल रही है। बता दें कि वासेपुर के खूनी संघर्ष पर ‘गैंग्स आफ वासेपुर’ फिल्म भी बन चुकी है। अंबिकापुर में गैंगस्टर सब्बीर आलम का मकान। गैंगस्टर को पकड़ने में नाकाम रही पुलिस दरअसल, वासेपुर (धनबाद) के गैंगस्टर शब्बीर आलम, उसके भाई शाहीद आलम ने 5 लोगों के साथ मिलकर डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून को 18 अक्टूबर 2001 को धनबाद में गोली मार दी थी। हत्या के आरोप में आरोपी गिरफ्तार भी किए गए थे। साल 2013 में हाईकोर्ट में पेशी के दौरान गैंगस्टर शब्बीर आलम भाग गया था। वह अपने साथी जावेद के साथ अंबिकापुर के बस संचालक बैदुल खान के संपर्क में आया। बैदुल खान ने गैंगस्टर को पनाह देने के साथ ही अपने साथ बस संचालन में पार्टनर भी बनाया। अंबिकापुर में छिपे शब्बीर आलम के तार धनबाद के क्रिमिनल सिंडिकेट से पूरी तरह जुड़े हुए थे। वहां से रंगदारी और वसूली का मोटा पैसा लगातार इन आरोपियों तक पहुंचता था। शब्बीर आलम अपने साथी बैदुल के साथ मिलकर राजहंश बस सर्विस का संचालन कर रहा था। इसके अलावा, राजहंस कंपनी की 2 बसें भी खरीदी, जिन्हें सासाराम और बिहार पटना रूट पर चलाई जा रही थी। एम्बुलेंस और रियल एस्टेट में भी लगाया पैसा बताया गया है कि, गैंगस्टर के सिंडिकेट में SECL सहित अन्य औद्योगिक इलाके में लगभग 40 एंबुलेंस चल रही थी। इसके साथ ही शब्बीर और उसके सहयोगी जावेद आलम उर्फ बाबू ने खरसिया नाका के आसपास जमीन खरीदकर प्लॉटिंग का काम भी शुरू कर दिया था। धनबाद पुलिस की दबिश के बाद इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। सरगुजा SSP राजेश अग्रवाल ने बताया कि, मामले में कोतवाली पुलिस ने बैदुल खान के खिलाफ FIR दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अंबिकापुर में छिपे आरोपी की तलाश में झारखंड पुलिस पहुंची थी, लेकिन वह भाग निकलने में कामयाब रहा। अभी तक वह पकड़ा नहीं गया है। पुलिस सूचना तंत्र की नाकामी- आलोक दुबे भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने कहा कि, झारखंड के धनबाद में हत्याकांड का मुख्य आरोपी गैंगस्टर इतने सालों तक हमारे शहर में छिपा रहा, यह बेहद गंभीर और सुरक्षा पर सवाल उठाने वाला मामला है। उसे संरक्षण देने और छुपाने वालों पर पुलिस को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। कुख्यात अपराधी स्थानीय पुलिस की नजरों से बचकर घूमता रहा, यह पुलिस सूचना तंत्र की एक बड़ी नाकामी है। गैंगवार पर बनी है फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर धनबाद के कोयला माफियाओं और गैंगस्टरों पर गैंग्स ऑफ वासेपुर नाम से फिल्म भी बनी है, जो साल 2012 में रिलीज हुई थी। एक दौर में कोयला, रेलवे ठेकेदारी, जमीन और लोहे का कारोबार फहीम खान की मर्जी के बिना नहीं होता था। उसी दौर में उसकी मां-मौसी की हत्या साबिर आलम और उसके सहयोगियों ने की थी। …………………… इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… सरगुजा में सालों से छिपा था वासेपुर का गैंगस्टर सब्बीर:धनबाद पुलिस पकड़ने पहुंची तो हुआ फरार, डॉन की मां और चाची को मारी थी गोली गैंग्स ऑफ वासेपुर का गैंगस्टर सब्बीर आलम। झारखंड के वासेपुर का गैंगस्टर सब्बीर आलम कई सालों से अंबिकापुर में पहचान छिपाकर रह रहा था। उसे पकड़ने के लिए पहुंची धनबाद पुलिस को चकमा देकर सब्बीर आलम फरार हो गया। सरगुजा एसएसपी राजेश अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की है। पढ़ें पूरी खबर… Source link

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सीएम हेमंत से सांसद निशिकांत ने पूछा सवाल:20 साल में देवघर, दुमका...

गोड्डा से बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने राज्य में एम्बुलेंस व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने देवघर, दुमका और गोड्डा जिलों में पिछले 20 वर्षों में खरीदी गई एम्बुलेंसों का पूरा ब्योरा मांगा है। सांसद ने यह भी जानना चाहा है कि इन एम्बुलेंसों की वर्तमान स्थिति क्या है। वे अभी उपयोग में हैं या जर्जर होकर बेकार पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि जनता के पैसे से खरीदी गई सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने आए। उन्होंने पत्र की कॉपी हेल्थ मिनिस्टर इरफान अंसारी को भी दी है। तीन बिंदुओं पर खरीदारी को लेकर सवाल पत्र में सांसद ने विशेष रूप से तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। पहले बिंदु में उन्होंने पूछा है कि सांसद और विधायक निधि से पिछले 20 वर्षों में कितनी एम्बुलेंस खरीदी गईं। किन जनप्रतिनिधियों के फंड से खरीदी गईं। उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। दूसरे बिंदु में उन्होंने राज्य सरकार द्वारा खरीदी गई एम्बुलेंसों का ब्योरा मांगा है। जिसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि ये एम्बुलेंस किन अस्पतालों को दी गईं, कब दी गईं और उनकी वर्तमान कार्य स्थिति क्या है। सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि अगर एम्बुलेंस जर्जर हालत में हैं, तो वे कब से ऐसी स्थिति में हैं। इसके लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने इसे सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जोड़ते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। CSR फंड से खरीदी एम्बुलेंस की भी मांगी जानकारी तीसरे बिंदु में सांसद ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के तहत खरीदी गई एम्बुलेंसों का भी पूरा विवरण मांगा है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में इन तीन जिलों में CSR के माध्यम से कितनी एम्बुलेंस दी गईं। उन्हें किन अस्पतालों या संस्थाओं को सौंपा गया और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। सांसद निशिकांत ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने स्वयं ONGC, NTPC, पावरग्रिड समेत अन्य कॉर्पोरेट संस्थाओं के सहयोग से 15 एम्बुलेंस उपलब्ध कराई हैं। इसके अलावा कितनी नई एम्बुलेंस इस योजना के तहत आईं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है। सांसद ने सभी मामलों की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। कहा कि जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। Source link

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कौन है भारत में सबसे ज्यादा दिनों तक जेल में बिताने वाला...

बेंगलुरु. करीब चार दशक तक ऊंची जेल की दीवारों और लोहे की सलाखों के बीच कैद रहने के बाद जब 72 वर्षीय साइबन्ना एन. नाटीकर ने परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल का मुख्य दरवाज़ा पार किया, तो उनके कदम बेहद धीमे थे. सफेद हो चुके लंबे बाल, बढ़ी हुई दाढ़ी और झुका हुआ शरीर बता रहा था कि वक्त ने उन्हें कितना बदल दिया है. जेल से बाहर निकली पहली सांस आज़ादी की जरूर थी, लेकिन उसके साथ बीते 38 सालों की परछाइयां भी थीं, जिन्हें शायद वह कभी पीछे नहीं छोड़ पाएंगे. देश का सबसे लंबा समय जेल में बिताने वाला कैदीकर्नाटक जेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, साइबन्ना देश के सबसे लंबे समय तक जेल में रहने वाले कैदी माने जाते हैं. डीजीपी (जेल) आलोक कुमार बताते हैं कि उन्होंने साइबन्ना को बेलगावी और कलबुर्गी जेलों में भी देखा था. उनके मुताबिक, जेल के भीतर उनका व्यवहार हमेशा अनुशासित और शांत रहा. लेकिन जेल के रिकॉर्ड में दर्ज यह अनुशासन उस अतीत को मिटा नहीं सकता, जिसने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाया. शक ने पहली बार छीनी एक जिंदगीसाल 1988 में साइबन्ना पर अपनी पहली पत्नी मलकव्वा की हत्या का आरोप लगा. उन्हें शक था कि उनकी पत्नी का किसी और से संबंध है. इसी संदेह ने एक परिवार को खत्म कर दिया और अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. यहीं से उनकी लंबी कैद की शुरुआत हुई. पैरोल पर मिली आज़ादी भी नहीं बदल सकी किस्मत1994 में उन्हें पैरोल मिली. जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने दूसरी शादी की. ऐसा लगा कि जिंदगी उन्हें दूसरा मौका दे रही है. नया परिवार बसा, एक बेटी विजयलक्ष्मी का जन्म हुआ और सब कुछ सामान्य होता दिखाई दिया. लेकिन यह सुकून बहुत कम समय का मेहमान साबित हुआ. दूसरी बार दोहरी हत्या ने हमेशा के लिए बदल दी जिंदगीकुछ ही सप्ताह बाद वही शक, वही गुस्सा और वही हिंसा फिर सामने आई. साइबन्ना ने अपनी दूसरी पत्नी नागम्मा और अपनी मासूम बेटी विजयलक्ष्मी की भी हत्या कर दी. आरोप था कि उन्हें दूसरी पत्नी पर भी बेवफाई का शक था. धारदार हथियार से की गई इस दोहरी हत्या ने उनके जीवन पर हमेशा के लिए एक ऐसा दाग लगा दिया, जिसे समय भी हल्का नहीं कर सका. आज़ादी मिली, लेकिन क्या सच में लौट पाया जीवन?38 साल बाद जेल से बाहर निकले साइबन्ना अब उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां न परिवार बचा, न रिश्ते और न ही कोई नया भविष्य. जेल के बाहर उनका स्वागत करने वाला कोई अपना नहीं था. उनके पास बची हैं तो सिर्फ यादें, अपराधों का इतिहास और एक लंबी कैद का बोझ. यह कहानी सिर्फ एक कैदी की रिहाई नहीं, बल्कि उस त्रासदी की है, जिसमें शक ने तीन जिंदगियां छीन लीं और एक इंसान की पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे कैद कर दी. हत्याओं के लिए कोई खास पछतावा नहींकोऑपरेटिव सेक्टर में काम करने वाले साइबन्ना ने कहा कि इन हत्याओं की वजह से उन्हें अपनी नौकरी और 10 एकड़ ज़मीन गंवानी पड़ी; उनका दावा है कि उस ज़मीन की कीमत आज 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा होती. इतने सालों तक जेल में रहने के बावजूद, उनका यही कहना रहा है कि उनकी पत्नियों के बेवफ़ा होने के सबूत थे, और उन्हें इन हत्याओं के लिए कोई खास पछतावा नहीं है. कोर्ट ने सुनाई थी मौत की सजा2003 में, एक ट्रायल कोर्ट ने अपराध की बर्बरता को देखते हुए उन्हें दूसरे दोहरे हत्याकांड के लिए मौत की सज़ा सुनाई थी. बाद में कर्नाटक हाई कोर्ट ने उनकी सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया. उनकी रिहाई कानूनी दखल के बाद हुई, जिसमें यह बात सामने आई कि उन्होंने लगभग एक दशक अकेले जेल की कोठरी में बिताया था, जिसे हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी और अमानवीय करार दिया था. उनकी दया याचिका पर फ़ैसला लेने में हुई देरी का भी उन्हें फ़ायदा मिला, जिससे 37 साल बाद उनकी रिहाई हो सकी. उठ रहे नए सवालसाइबन्ना ने आलोक कुमार का शुक्रिया अदा किया और उन्हें एक उदार और सक्रिय अधिकारी बताया. उनकी रिहाई से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए पुराने सवालों पर बहस फिर से शुरू हो गई है. लंबे समय तक जेल में रहने और गैर-कानूनी तौर पर अकेले कोठरी में रखे जाने को किस बिंदु पर क्रूर और अमानवीय माना जाए? समाज को दोषी की उम्र, जेल में बिताए गए साल और जेल के अधिकारों के उल्लंघन को किए गए अपराधों की गंभीरता के साथ कैसे तौलना चाहिए? Source link

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